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बोलने में माहिर कैसे बनें? | Think Fast, Talk Smart : Communication Techniques | Hindi Audiobook (YouTube Video Transcript)

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Title: बोलने में माहिर कैसे बनें? | Think Fast, Talk Smart : Communication Techniques | Hindi Audiobook
Duration: 00:32:35
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(00:00:00) Your YouTube transcript will appear here (00:00:00) क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग जब (00:00:02) बोलते हैं तो लोग ध्यान से सुनते हैं। (00:00:05) उनके शब्द याद रखते हैं और उनकी बातें (00:00:08) लंबे समय तक असर छोड़ती हैं? वहीं कुछ लोग (00:00:11) चाहे जितना भी बोल लें उनकी बातें हवा में (00:00:14) खो जाती हैं। आखिर ऐसा क्यों होता है? (00:00:17) इसका जवाब एक ही है कम्युनिकेशन की कला। (00:00:21) आपकी जिंदगी में चाहे जॉब इंटरव्यू हो, (00:00:23) ऑफिस मीटिंग हो, दोस्तों के साथ बातचीत हो (00:00:26) या किसी भी अनजान इंसान से पहली मुलाकात (00:00:29) आपकी कम्युनिकेशन स्किल्स ही तय करती है (00:00:31) कि लोग आपको कैसे देखेंगे। आप पर कितना (00:00:34) भरोसा करेंगे और आपकी बातों को कितना (00:00:36) सीरियसली लेंगे। लेकिन अच्छी बात यह है कि (00:00:39) असरदार तरीके से बोलना कोई जन्मजात टैलेंट (00:00:42) नहीं है। इसे सीखा जा सकता है। इस ऑडियो (00:00:45) बुक में हम सीखेंगे कि कैसे जल्दी और (00:00:47) स्मार्टली सोें। अपनी बातें सही तरीके से (00:00:50) रखें। आत्मविश्वास से बोलें और हर बातचीत (00:00:54) को दिलचस्प और प्रभावी बनाएं। यहां आपको (00:00:57) मिलेगा एक प्रैक्टिकल और आसान तरीका जिससे (00:01:00) आप अपनी कम्युनिकेशन स्किल्स को नए लेवल (00:01:03) पर ले जा सकते हैं। अगर आप भी उन लोगों (00:01:05) में से हो जो सही शब्दों की तलाश में अटक (00:01:08) जाते हैं। बोलने से पहले घबराते हैं या (00:01:11) सोचते हैं कि काश उनकी बातें ज्यादा (00:01:13) असरदार होती तो यह ऑडियो बुक आपके लिए ही (00:01:16) है। तो तैयार हो जाइए क्योंकि अब आपकी (00:01:19) आवाज सिर्फ सुनी नहीं जाएगी बल्कि महसूस (00:01:21) भी की जाएगी। चैप्टर वन सोच की स्पीड (00:01:25) बढ़ाओ। कभी सोचा है कि कुछ लोग किसी भी (00:01:29) सिचुएशन में झट से जवाब कैसे दे देते हैं? (00:01:32) जैसे मान लो ऑफिस में बॉस ने अचानक से पूछ (00:01:35) लिया व्हाई शुड आई गिव यू दिस प्रमोशन? और (00:01:38) कुछ लोग तुरंत ही एक बढ़िया जवाब दे देते (00:01:40) हैं। जबकि कुछ लोग सोचते ही रह जाते हैं (00:01:42) और बाद में अफसोस करते हैं कि यार ऐसा (00:01:46) बोलना चाहिए था। यह फर्क आता है सोचने की (00:01:48) स्पीड से। और अच्छी बात यह है कि यह सीखा (00:01:51) जा सकता है। सोचो अगर दिमाग एक कंप्यूटर (00:01:54) होता तो कुछ लोगों के प्रोसेसर सुपर फास्ट (00:01:57) होते हैं और कुछ के थोड़े स्लो। लेकिन हम (00:02:00) अपने दिमाग के प्रोसेसर को अपग्रेड कर (00:02:02) सकते हैं। जब दिमाग तेज चलता है तो लाइफ (00:02:05) में हर चीज आसान लगने लगती है। एग्जाम हो, (00:02:08) किसी को इंप्रेस करना हो या फिर किसी बहस (00:02:11) में खुद को साबित करना हो, फास्ट थिंकिंग (00:02:14) हर जगह काम आती है। अब सवाल आता है कि (00:02:17) फास्ट थिंकिंग आती कैसे है? पहला सीक्रेट (00:02:20) है। ज्यादा सोचो मत। यह अजीब लग सकता है, (00:02:23) लेकिन सच यही है जब हम ज्यादा सोचते हैं (00:02:26) तो कंफ्यूज हो जाते हैं। इसीलिए फटाफट (00:02:29) डिसीजन लेने की आदत डालो। जैसे अगर कोई (00:02:31) पूछे कि तुम्हारा फेवरेट ट्रेवल (00:02:34) डेस्टिनेशन क्या है? तो मत सोचो कि यार (00:02:36) गोवा बोलूं या मनाली? बस झट से बोल दो जो (00:02:39) दिल में पहले आया। दूसरी बात अपनी (00:02:42) ऑब्जरवेशन स्किल्स तेज करो। जितना ज्यादा (00:02:45) आप लोगों को सिचुएशनंस को नोटिस करोगे (00:02:47) उतना जल्दी चीजें पकड़ने लगोगे। कभी सोचा (00:02:50) है क्या कि कुछ लोग किसी की बात बीच में (00:02:52) पकड़ कर मजेदार जवाब दे देते हैं। यह ऑन द (00:02:55) स्पॉट ऑब्जरवेशन से आता है। अगली बार जब (00:02:58) किसी ग्रुप में हो तो ध्यान दो कि कौन (00:03:00) क्या बोल रहा है, कैसे बोल रहा है और कब (00:03:03) बोल रहा है। तीसरी चीज है प्रैक्टिस। सोचो (00:03:07) एक क्रिकेटर कैसे तेज खेलता है। प्रैक्टिस (00:03:09) से। वैसे ही आपको दिमाग की स्पीड बढ़ाने (00:03:12) के लिए फटाफट जवाब देने की प्रैक्टिस करनी (00:03:15) होगी। कोशिश करो कि हर बातचीत में थोड़ी (00:03:18) तेजी लाओ। घर पर भी, फ्रेंड्स के साथ भी। (00:03:21) जब आप अपने सोचने की स्पीड बढ़ा लोगे तो (00:03:23) हर जगह कॉन्फिडेंस भी बढ़ जाएगा। इंटरव्यू (00:03:26) हो, मीटिंग हो, डेटिंग हो या फिर दोस्तों (00:03:28) के साथ मजाक हर जगह आप शार्प और (00:03:30) इंटेलिजेंट लगोगे। तो अगली बार जब कोई (00:03:32) आपसे कोई सवाल पूछे सोचो मत बस बोल दो। (00:03:36) चैप्टर टू जुबान को तेज बनाओ। क्या कभी (00:03:39) ऐसा हुआ है कि आपके दिमाग में एकदम सही (00:03:42) जवाब था? लेकिन जब बोलने की बारी आई तो (00:03:44) जुबान लड़खड़ा गई और फिर बाद में सोचा यार (00:03:48) ऐसा बोल देता तो मजा आ जाता। यह सिर्फ (00:03:50) आपके साथ नहीं होता। बहुत लोगों के साथ (00:03:52) होता है। दिमाग तेज चलता है लेकिन जुबान (00:03:56) साथ नहीं देती और इस वजह से कई बार लोग (00:03:59) हमें इग्नोर करने लगते हैं या फिर हमारी (00:04:01) बातों को सीरियसली नहीं लेते। लेकिन इसकी (00:04:04) अच्छी बात यह है कि यह बदला जा सकता है। (00:04:07) आपको अपने बोलने की स्पीड को भी अपने (00:04:10) सोचने की स्पीड के साथ मैच करना होगा और (00:04:13) यह किसी टैलेंट से नहीं आता बल्कि (00:04:14) प्रैक्टिस से आता है। सबसे पहली चीज जो (00:04:17) जरूरी है वह है क्लेरिटी। अगर दिमाग में (00:04:21) कंफ्यूजन होगा तो बोलने में भी आएगा। (00:04:24) इसीलिए जब भी बात करो तो पहले अपने माइंड (00:04:26) में उसे क्लियर कर लो। मान लो आप ऑफिस में (00:04:29) हो और बॉस पूछता है टेल मी अबाउट योर (00:04:32) प्रोजेक्ट। अब अगर आप सोचना शुरू कर दोगे (00:04:35) कि यार कहां से शुरू करूं तो फिर अटकना तय (00:04:38) है। इसीलिए हर बातचीत में पहले ही एक (00:04:41) क्लियर आईडिया रखो कि क्या बोलना है। (00:04:44) दूसरी बात अपनी वोकैबुलरी और एक्सप्रेशनंस (00:04:47) को अपडेट करो। ऐसा नहीं कि मुश्किल (00:04:49) अंग्रेजी के शब्द याद करने हैं बल्कि अपनी (00:04:52) भाषा को स्मार्ट बनाना है। कभी नोटिस किया (00:04:54) है कि कुछ लोग सिंपल बातें भी इतने स्टाइल (00:04:57) से बोलते हैं कि सामने वाला इंप्रेस हो (00:04:59) जाता है? ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि उनके (00:05:02) पास सही शब्द होते हैं। अगली बार जब भी (00:05:06) कोई अच्छी लाइन सुनो या पढ़ो उसे याद रखो (00:05:09) और अपने कन्वर्सेशन में यूज करो। तीसरी (00:05:12) चीज बोलने की प्रैक्टिस करो। जो लोग तेज (00:05:15) और स्मार्टली बोलते हैं, वह हर दिन (00:05:18) प्रैक्टिस करते हैं। जैसे स्टैंड अप (00:05:20) कॉमेडियंस को देखो। वह इतनी तेजी से और (00:05:24) मजेदार तरीके से बातें करते हैं क्योंकि (00:05:26) उन्होंने इसे बार-बार प्रैक्टिस किया होता (00:05:28) है। आप भी रोज किसी टॉपिक पर बोलने की आदत (00:05:31) डालो। चाहे शीशे के सामने हो या किसी (00:05:34) दोस्त के साथ। जब आप अपनी स्पीकिंग (00:05:36) स्किल्स इंप्रूव कर लोगे तो लोग आपकी (00:05:39) बातें ध्यान से सुनेंगे। आप किसी भी जगह (00:05:41) पर अपनी बात कॉन्फिडेंटली रख पाओगे और (00:05:44) लाइफ में बहुत आगे बढ़ जाओगे। चैप्टर थ्री (00:05:47) फटाफट जवाब देने की कला सीखो। कभी ऐसा हुआ (00:05:50) है कि कोई आपके सामने तगड़ा तर्क रख देता (00:05:53) है और आप उस समय चुप रह जाते हो लेकिन बाद (00:05:56) में सोचते हो यार मुझे ऐसा बोलना चाहिए (00:05:59) था। ऐसा क्यों होता है? क्योंकि हमारा (00:06:02) दिमाग कुछ सेकंड्स का ब्रेक ले लेता है (00:06:05) सोचने के लिए और उसी दौरान दूसरा इंसान (00:06:07) बाजी मार लेता है। फास्ट रिप्लाई देने की (00:06:10) सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि इससे (00:06:13) सामने वाले पर इंप्रेशन पड़ता है कि आप (00:06:15) शार्प और स्मार्ट हो और यह सिर्फ डिबेट (00:06:18) में नहीं बल्कि हर जगह काम आता है। ऑफिस (00:06:21) में, फ्रेंड्स के साथ, डेट पर, इंटरव्यू (00:06:23) में हर जगह। अब सवाल आता है कि फास्ट (00:06:25) रिप्लाई देने के लिए करना क्या है? पहली (00:06:28) चीज अपने दिमाग को ट्रेन करो कि बिना डिले (00:06:31) के रिस्पांस दे। जब कोई सवाल आए तो तुरंत (00:06:33) जवाब दो। भले ही वह परफेक्ट ना हो। जैसे (00:06:37) अगर कोई पूछे तुम्हें कौन सी फिल्म पसंद (00:06:39) है? तो मत सोचो कि यार एक बताऊं या दो झट (00:06:42) से बोल दो। शोले क्लासिक है भाई। इस तरह (00:06:45) से आपके दिमाग की ट्रेनिंग होगी। दूसरी (00:06:48) बात सवालों के पैटर्न को समझो। दुनिया में (00:06:51) ज्यादातर सवाल रिपीट होते हैं। इंटरव्यू (00:06:53) में पूछे जाने वाले सवाल, डेटिंग के सवाल (00:06:56) या फिर डेली लाइफ के कॉमन सवाल। अगर आप (00:06:59) इनके बढ़िया जवाब पहले से तैयार कर लोगे (00:07:02) तो कभी अटकोगे नहीं। तीसरी चीज थोड़ा (00:07:04) ह्यूमर ऐड करो। कभी नोटिस किया है कि जो (00:07:07) लोग फटाफट और मजेदार जवाब देते हैं, लोग (00:07:10) उन्हें ज्यादा पसंद करते हैं? जैसे अगर (00:07:13) कोई कहे यार तू लेट क्यों आया? तो सीधा (00:07:16) ट्रैफिक था। बोलने के बजाय थोड़ा मजेदार (00:07:18) बनाओ। भाई इंडिया में टाइम पर पहुंचना (00:07:21) इललीगल है कि क्या? इस तरह से लोग आपकी (00:07:24) बातें ज्यादा ध्यान से सुनेंगे। जब आप इन (00:07:27) चीजों पर काम करोगे तो धीरे-धीरे आपकी (00:07:30) जवाब देने की स्पीड बढ़ जाएगी और जब आपकी (00:07:33) स्पीड बढ़ेगी तो लोग आपकी बातों को और (00:07:36) सीरियसली लेने लगेंगे। स्मार्ट बनने के (00:07:39) लिए फटाफट जवाब देना सीखो। क्योंकि इस (00:07:42) दुनिया में स्लो रहने वालों को कोई नहीं (00:07:44) सुनता। चैप्टर फोर कॉन्फिडेंस अंदर से आता (00:07:47) है बाहर से नहीं। कभी नोटिस किया है कि (00:07:49) कुछ लोग भीड़ में भी अलग नजर आते हैं? (00:07:52) उनकी बॉडी लैंग्वेज, उनकी आवाज और उनका (00:07:55) पूरा तरीका ऐसा होता है कि लोग उनकी तरफ (00:07:58) खींचे चले जाते हैं। यह जादू कोई फैशन या (00:08:01) पैसे से नहीं आता। यह आता है कॉन्फिडेंस (00:08:03) से। लेकिन कॉन्फिडेंस आखिर होता क्या है? (00:08:06) और सबसे बड़ा सवाल यह आता कहां से है? (00:08:09) अक्सर लोग सोचते हैं कि कॉन्फिडेंस का (00:08:12) मतलब है तेज आवाज में बोलना या जबरदस्ती (00:08:15) खुद को बड़ा दिखाना। लेकिन सच्चाई यह है (00:08:18) कि रियल कॉन्फिडेंस अंदर से आता है। जब (00:08:21) आपको खुद पर भरोसा होता है तो वह बिना कुछ (00:08:24) बोले भी झलकता है। जैसे जब कोई आपसे कहे (00:08:27) कि आपका नाम क्या है तो आप बिना रुके झट (00:08:29) से बोल देते हो क्योंकि आपको कोई डाउट (00:08:32) नहीं होता। यही चीज लाइफ के हर हिस्से में (00:08:34) होनी चाहिए। कॉन्फिडेंस बनाने के लिए सबसे (00:08:37) पहले अपनी कमजोरियों को एक्सेप्ट करना (00:08:39) जरूरी है। लोग अक्सर इस डर में जीते हैं (00:08:42) कि अगर मैं गलती कर दूं तो लोग क्या (00:08:44) सोचेंगे? लेकिन सच यह है कि कोई ज्यादा (00:08:47) देर तक आपकी गलतियों को याद नहीं रखता। (00:08:50) अगर कोई जोक मारने में फेल हो जाता है और (00:08:52) हंसकर टॉपिक बदल देता है तो लोग भी उसे (00:08:55) उतनी ही आसानी से भूल जाते हैं। इसीलिए (00:08:59) खुद को ज्यादा जज मत करो। दूसरी चीज खुद (00:09:02) को तैयार करना जरूरी है। जब आप किसी टॉपिक (00:09:05) पर नॉलेज रखते हो तो आपको डर नहीं लगता। (00:09:08) जैसे अगर किसी चीज के बारे में आपको सही (00:09:10) जानकारी है तो आप बिना हिचकिचाहट उस पर (00:09:13) बोल सकते हो। इसीलिए अपनी लाइफ में जिस भी (00:09:16) चीज में एक्सपर्ट बनना चाहते हो उस पर रोज (00:09:19) थोड़ा-थोड़ा सीखते रहो। जब आपको पता होगा (00:09:22) कि आप सही हो तो आपकी बॉडी लैंग्वेज खुद ब (00:09:25) खुद कॉन्फिडेंट दिखेगी। आप हर किसी को (00:09:28) इंप्रेस करने की कोशिश करो। सच तो यह है (00:09:31) कि हर इंसान को खुश करना नामुमकिन है। (00:09:34) इसीलिए खुद को बदलने के बजाय अपने असली (00:09:37) स्वभाव को अपनाओ। जब आप वैसे ही रहोगे (00:09:40) जैसे आप हो तो लोगों को आपकी ओर आकर्षित (00:09:43) होने से कोई नहीं रोक सकता। कॉन्फिडेंस (00:09:46) सिर्फ बोलने या दिखाने की चीज नहीं है। यह (00:09:48) आपके अंदर की एनर्जी है जो तभी नजर आती है (00:09:52) जब आप खुद को पूरी तरह से एक्सेप्ट करते (00:09:54) हो। चैप्टर फाइव बातचीत में इंटरेस्ट कैसे (00:09:57) बनाएं? कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी से (00:10:00) मिलते हो, बातचीत शुरू करते हो, लेकिन कुछ (00:10:03) ही मिनटों में माहौल बोरिंग लगने लगता है। (00:10:05) सामने वाला बस अच्छा हां, ठीक है। जैसी (00:10:09) छोटी-छोटी बातें करता है और फिर बातचीत (00:10:12) वहीं खत्म हो जाती है। इसका सबसे बड़ा (00:10:15) कारण होता है बातचीत को इंटरेस्टिंग ना (00:10:17) बना पाना। और अगर आप चाहते हो कि लोग आपसे (00:10:21) बात करके बोर ना हो बल्कि आपकी बातों को (00:10:23) एंजॉय करें तो आपको कुछ चीजें सीखनी (00:10:26) होंगी। बातचीत को इंटरेस्टिंग बनाने का (00:10:29) पहला सीक्रेट है। सिर्फ अपने बारे में मत (00:10:32) बोलो। बहुत से लोग खुद की कहानियां सुनाने (00:10:35) में इतना बिजी हो जाते हैं कि सामने वाला (00:10:37) बोर हो जाता है। अगर आपको वाकई में किसी (00:10:40) से कनेक्ट करना है तो उनकी बातों में (00:10:42) इंटरेस्ट लो, सवाल पूछो। उनकी राय जानने (00:10:45) की कोशिश करो। जब सामने वाला महसूस करता (00:10:48) है कि उसकी बातों को सुना जा रहा है तो वह (00:10:50) खुद ही बातचीत को एंजॉय करने लगता है। (00:10:53) दूसरा तरीका है अपनी बातों में कुछ (00:10:56) अनएक्सेक्टेड डालो। कभी-कभी लोग बहुत (00:10:59) प्रेडिक्टेबल तरीके से बात करते हैं जिससे (00:11:02) बातचीत बेजान लगने लगती है। जैसे अगर कोई (00:11:05) पूछे आपका दिन कैसा था और आप सीधा अच्छा (00:11:08) था बोल दो तो बात वहीं खत्म हो जाएगी। (00:11:10) लेकिन अगर आप बोलो यार आज का दिन कमाल का (00:11:13) था। सुबह-सुबह चाय गिरा दी, फिर बारिश में (00:11:16) भीग गया। लेकिन फिर भी दिन शानदार रहा तो (00:11:20) सामने वाला खुद ब खुद इंटरेस्ट लेने (00:11:22) लगेगा। तीसरी चीज है ह्यूमर का सही (00:11:25) इस्तेमाल। हर बातचीत में मजाकिया अंदाज (00:11:28) होना जरूरी नहीं। लेकिन अगर आप (00:11:30) हल्के-फुल्के तरीके से बात करोगे तो लोग (00:11:33) आपसे और ज्यादा कनेक्ट महसूस करेंगे। (00:11:35) ह्यूमर सिर्फ जोक्स सुनाने से नहीं आता (00:11:38) बल्कि बातें करने के तरीके से आता है। जब (00:11:41) आप अपनी बातों में थोड़ा कैजुअलनेस और (00:11:44) नेचुरल फ्लो रखोगे तो लोग आपकी बातें (00:11:46) सुनने में दिलचस्पी लेंगे। इंटरेस्टिंग (00:11:49) बनने का मतलब यह नहीं कि आपको बहुत (00:11:51) बड़ी-बड़ी बातें करनी होंगी। सिर्फ सही (00:11:54) टाइमिंग पर सही तरीके से बातचीत करना ही (00:11:56) काफी होता है। जब आप लोगों को सुनोगे, (00:11:59) उनके इमोशंस को समझोगे और अपनी बातों को (00:12:02) थोड़ा मजेदार बनाओगे तो कोई भी बातचीत (00:12:05) बोरिंग नहीं होगी। चैप्टर सिक्स बहस जीतने (00:12:09) का असली तरीका। बहस में जीतना सिर्फ लाउड (00:12:12) होने से नहीं आता बल्कि सही तरीके से अपने (00:12:15) पॉइंट को रखने से आता है। कई बार ऐसा होता (00:12:17) है कि किसी से बहस चल रही होती है और हम (00:12:20) अपनी बात सही होने के बावजूद हार जाते हैं (00:12:23) क्योंकि सामने वाला हमें चुप करवा देता है (00:12:26) या फिर हम अपनी बात को सही तरीके से रख (00:12:29) नहीं पाते। अगर आप चाहते हो कि आप हर बहस (00:12:32) में मजबूती से खड़े रहो और अपनी बात को (00:12:35) साबित कर सको तो आपको दिमाग से खेलना (00:12:37) सीखना होगा। सबसे पहले बहस में कभी भी (00:12:41) इमोशनल होकर मत बहस करो। बहुत से लोग बहस (00:12:45) के दौरान गुस्से में आ जाते हैं जिससे (00:12:47) उनकी बात की वैल्यू कम हो जाती है। अगर आप (00:12:50) किसी भी बहस में शांत और कॉन्फिडेंट रहोगे (00:12:52) तो सामने वाला खुद ही कमजोर पड़ने लगेगा। (00:12:55) जब कोई चिल्ला रहा हो और आप उसी टोन में (00:12:58) जवाब दो तो बहस आगे बढ़ती जाती है। लेकिन (00:13:01) अगर आप ठंडे दिमाग से जवाब देते हो तो (00:13:03) सामने वाला खुद ही धीरे-धीरे बैकफुट पर आ (00:13:06) जाएगा। दूसरी चीज हमेशा लॉजिक के साथ (00:13:09) बोलो। बहस में इमोशन से ज्यादा फैक्ट्स और (00:13:12) लॉजिक चलते हैं। अगर आप अपनी बात को (00:13:15) तर्कों और एग्जांपल्स के साथ रखोगे तो कोई (00:13:17) भी उसे गलत साबित नहीं कर पाएगा। जैसे अगर (00:13:20) किसी को समझाना है कि सुबह जल्दी उठना (00:13:23) अच्छा है तो सीधा यह मत कहो कि जल्दी उठना (00:13:25) हेल्दी होता है। बल्कि बोलो हर सक्सेसफुल (00:13:28) इंसान की लाइफ में एक चीज कॉमन होती है। (00:13:31) वह सुबह जल्दी उठता है। इससे आपकी बात (00:13:34) ज्यादा असरदार लगेगी। एक और ट्रिक जो बहुत (00:13:37) कारगर होती है वह है सामने वाले के (00:13:40) पॉइंट्स को उसके ही खिलाफ यूज करना। जब भी (00:13:44) कोई तर्क दे उसे ध्यान से सुनो और फिर उसी (00:13:46) बात में से ऐसी चीज निकालो जो आपके पक्ष (00:13:49) में जाती हो। जैसे अगर कोई कहे कि पढ़ाई (00:13:51) से ज्यादा एक्सपीरियंस जरूरी है तो आप (00:13:54) जवाब दे सकते हो? बिल्कुल। लेकिन बिना (00:13:56) पढ़ाई के एक्सपीरियंस लेना आसान नहीं (00:13:59) होता। इससे सामने वाला खुद ही सोचने पर (00:14:02) मजबूर हो जाएगा। बहस में जीतने का असली (00:14:05) मतलब यह नहीं कि आप सामने वाले को चुप करा (00:14:08) दो बल्कि यह कि आप अपनी बात को मजबूती से (00:14:10) रख सको और सामने वाला आपकी बात को समझने (00:14:13) पर मजबूर हो जाए। जब आप सही माइंडसेट और (00:14:17) सही तर्कों के साथ बहस करोगे तो कोई भी (00:14:20) आपको गलत साबित नहीं कर पाएगा। चैप्टर (00:14:23) सेवन डर को काबू में लाना सीखो। कभी ऐसा (00:14:27) हुआ है कि किसी के सामने बोलने से पहले (00:14:30) दिल की धड़कन तेज हो गई हो। आवाज कांपने (00:14:33) लगी हो और ऐसा महसूस हुआ हो कि अगर एक भी (00:14:36) गलत शब्द निकला तो लोग हंस देंगे। यह डर (00:14:40) हर किसी को होता है। लेकिन कुछ लोग इसे (00:14:42) मैनेज करना सीख जाते हैं और कुछ इसे अपनी (00:14:45) सबसे बड़ी कमजोरी बना लेते हैं। अगर आप (00:14:48) सोचते हो कि आपकी पब्लिक स्पीकिंग अच्छी (00:14:51) नहीं है या किसी भी ग्रुप में बोलने में (00:14:53) हिचक होती है तो इसका सीधा कारण है डर। और (00:14:57) जब तक इस डर को कंट्रोल नहीं किया जाएगा (00:15:00) तब तक बोलने का कॉन्फिडेंस नहीं आएगा। डर (00:15:03) हमेशा उसी चीज से लगता है जिसमें हमें कम (00:15:05) एक्सपीरियंस होता है। जैसे अगर आपको (00:15:08) स्विमिंग नहीं आती तो पानी में उतरते ही (00:15:10) डर लगेगा। लेकिन अगर हर दिन थोड़ा-थोड़ा (00:15:13) प्रैक्टिस करो तो वह डर अपने आप खत्म हो (00:15:16) जाएगा। बोलने का भी यही नियम है। जब आप (00:15:20) बार-बार बोलोगे तो धीरे-धीरे डर कम होता (00:15:22) जाएगा। लेकिन सबसे पहले यह समझना जरूरी है (00:15:25) कि डर को खत्म करने का कोई मैजिक फार्मूला (00:15:28) नहीं है। इसे फेस करना ही एकमात्र तरीका (00:15:32) है। कई बार हम यह सोच कर डर जाते हैं कि (00:15:35) सामने वाला हमें जज करेगा। लेकिन सच तो यह (00:15:38) है कि ज्यादातर लोग खुद इतने बिजी होते (00:15:41) हैं कि उन्हें आपकी छोटी-छोटी गलतियों से (00:15:44) कोई फर्क नहीं पड़ता। अगर आप किसी ग्रुप (00:15:46) में बोल रहे हो और एक लाइन गलत बोल भी (00:15:49) देते हो तो अगले ही पल लोग उसे भूल (00:15:52) जाएंगे। असल में लोगों को आपके शब्दों से (00:15:55) ज्यादा आपकी एनर्जी और आपके कॉन्फिडेंस से (00:15:57) फर्क पड़ता है। अगर आप अपनी बात पूरे यकीन (00:16:00) से कह रहे हो तो लोग उसे सुनेंगे। भले ही (00:16:03) उसमें छोटी-मोटी गलतियां हो। अगर डर को (00:16:06) मैनेज करना सीख लिया तो बोलने में वह (00:16:08) आत्मविश्वास आ जाएगा जो हर किसी को (00:16:10) आकर्षित करता है। जो लोग बोलने से डरते (00:16:13) हैं उन्हें सिर्फ एक चीज करनी चाहिए। रोज (00:16:16) किसी ना किसी से बातचीत करने की कोशिश। (00:16:19) चाहे घर में हो, दो दोस्तों के साथ हो या (00:16:21) ऑफिस में। जब धीरे-धीरे आप इस डर को फेस (00:16:24) करने लगोगे, तो एक दिन ऐसा आएगा जब आपको (00:16:27) महसूस भी नहीं होगा कि यह डर कभी था। और (00:16:30) जब डर खत्म होगा, तो बोलने की कला खुद ब (00:16:33) खुद आ जाएगी। चैप्टर एट सही शब्दों का (00:16:37) चुनाव आपकी पर्सनालिटी को बना सकता है। (00:16:40) कभी सोचा है कि कुछ लोग जब बोलते हैं तो (00:16:43) उनकी बातें सीधा दिल में उतर जाती हैं। वह (00:16:46) कुछ ऐसा बोलते हैं जो लंबे समय तक याद (00:16:48) रहता है। वहीं कुछ लोग कितना भी बोल लें (00:16:51) लेकिन उनकी बातों का कोई असर नहीं होता। (00:16:54) यह फर्क आता है शब्दों के चुनाव से। सही (00:16:58) शब्द चुनना एक आंठ है और जब इसे सही तरीके (00:17:00) से सीखा जाता है तो आपकी पर्सनालिटी में (00:17:03) एक अलग ही चमक आ जाती है। बातचीत में सबसे (00:17:06) जरूरी चीज होती है सिंपल और क्लियर (00:17:09) लैंग्वेज। बहुत से लोग दिखाने के लिए (00:17:11) बड़े-बड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। (00:17:13) लेकिन इससे उल्टा असर पड़ता है। लोग वही (00:17:16) बातें पसंद करते हैं जो आसानी से समझ में (00:17:19) आए और जिनसे वे खुद को कनेक्ट कर सकें। जब (00:17:22) आप किसी से बात कर रहे हो तो ध्यान दो कि (00:17:25) आप जो कह रहे हो वह समझने में आसान हो। (00:17:29) अगर आपकी भाषा बहुत जटिल होगी तो लोग (00:17:31) इंटरेस्ट खो देंगे और आपकी बातों का असर (00:17:34) कम हो जाएगा। सही शब्दों का चुनाव करने के (00:17:37) लिए सबसे अच्छा तरीका है रोजमर्रा की (00:17:40) बातचीत को ऑब्जर्व करना। जब आप किसी ऐसे (00:17:43) इंसान से मिलते हो जिसकी कम्युनिकेशन (00:17:45) स्किल्स बहुत अच्छी होती है तो गौर करो कि (00:17:48) वह किन शब्दों का इस्तेमाल कर रहा है। (00:17:51) उसकी टोन कैसी है और वह कैसे अपनी बात रख (00:17:54) रहा है। जब आप दूसरों से सीखने लगोगे तो (00:17:57) धीरे-धीरे यह स्किल आपकी खुद की (00:17:59) पर्सनालिटी का हिस्सा बन जाएगी। अगर आप (00:18:02) चाहते हो कि लोग आपकी बातों को सीरियसली (00:18:04) लें तो आपको अपनी भाषा में वह आकर्षण लाना (00:18:07) होगा जिससे लोग खुद ब खुद आपकी बातों को (00:18:10) याद रखें। शब्दों का सही चुनाव आपकी बातों (00:18:14) को यादगार बनाता है और जब आपकी बातें याद (00:18:17) रखी जाएंगी तो आपकी पर्सनालिटी भी हमेशा (00:18:20) के लिए लोगों के दिमाग में छप जाएगी। (00:18:22) चैप्टर नाइन किसी भी सिचुएशन में खुद को (00:18:26) कैसे संभालें। हमेशा लाइफ वैसी नहीं चलती (00:18:29) जैसी हम चाहते हैं। कभी अचानक किसी मीटिंग (00:18:31) में बोलना पड़ सकता है। कभी किसी बहस में (00:18:34) अपने विचार रखने की जरूरत पड़ सकती है तो (00:18:37) कभी किसी ऐसी सिचुएशन का सामना करना पड़ (00:18:40) सकता है जहां हम सोचते ही रह जाते हैं कि (00:18:42) अब क्या बोले। ऐसे वक्त पर वही लोग खुद को (00:18:46) संभाल पाते हैं जो पहले से तैयार होते हैं (00:18:49) और जिनकी थिंकिंग स्पीड तेज होती है। खुद (00:18:52) को संभालने का सबसे पहला तरीका है घबराने (00:18:55) से बचना। जब कोई अनएक्सेक्टेड सिचुएशन आती (00:18:58) है तो सबसे पहली प्रतिक्रिया होती है (00:19:01) पैनिकिक करना। लेकिन जो लोग इस पैनिकिक (00:19:03) मोमेंट को कंट्रोल कर लेते हैं वही आगे (00:19:06) बढ़ पाते हैं। जब भी आपको लगे कि कोई (00:19:08) सिचुएशन आपके हाथ से निकल रही है तो तुरंत (00:19:11) एक गहरी सांस लो और खुद को शांत करने की (00:19:14) कोशिश करो। घबराने से कोई हल नहीं निकलता (00:19:17) बल्कि इससे दिमाग और ज्यादा ब्लॉक हो जाता (00:19:19) है। दूसरा तरीका है अपनी बातों को (00:19:22) छोटे-छोटे हिस्सों में बांट कर बोलना। अगर (00:19:25) आपको एकदम से कोई सवाल पूछ लिया जाए और आप (00:19:28) नहीं जानते कि कैसे जवाब देना है तो उसे (00:19:30) छोटे-छोटे हिस्सों में सोचो। पहले एक (00:19:33) बेसिक आईडिया दो। फिर धीरे-धीरे अपनी बात (00:19:35) को विस्तार से रखो। इससे आपको सोचने का (00:19:38) टाइम भी मिल जाएगा और सामने वाले को भी (00:19:40) लगेगा कि आप पूरे आत्मविश्वास के साथ बोल (00:19:43) रहे हो। कई बार लोग ऐसी सिचुएशन में खुद (00:19:46) को ज्यादा प्रेशर में डाल लेते हैं और (00:19:48) परफेक्ट बनने की कोशिश करने लगते हैं। (00:19:51) लेकिन सच तो यह है कि कोई भी परफेक्ट नहीं (00:19:53) होता। जब भी आप किसी सिचुएशन में अटक जाओ (00:19:57) तो खुद को रिलैक्स रखो और नॉर्मल तरीके से (00:20:00) जवाब देने की कोशिश करो। अगर आप सोचोगे कि (00:20:03) हर बात एकदम सही और परफेक्ट होनी चाहिए तो (00:20:05) आप खुद को और ज्यादा दबाव में डाल लोगे। (00:20:08) खुद को संभालने की कला कोई एक दिन में (00:20:10) नहीं सीख सकता। लेकिन अगर हर सिचुएशन में (00:20:13) खुद को शांत और कॉन्फिडेंट रखने की आदत (00:20:16) डाल ली जाए तो धीरे-धीरे यह एक नेचुरल (00:20:19) स्किल बन जाती है। जब भी आप किसी मुश्किल (00:20:21) सिचुएशन में फंसो तो बस खुद से कहो आराम (00:20:25) से सब ठीक होगा। जैसे ही आप खुद को शांत (00:20:28) रखोगे आपकी सोच भी क्लियर हो जाएगी और आप (00:20:31) सही तरीके से जवाब दे पाओगे। चैप्टर 10 कम (00:20:35) बोलो लेकिन असरदार बोलो। कई बार हम सोचते (00:20:38) हैं कि ज्यादा बोलने से हम ज्यादा (00:20:40) प्रभावशाली लगेंगे। लेकिन असल में बात (00:20:43) इसका उलट होती है। जो लोग कम बोलते हैं (00:20:45) लेकिन सही समय पर सही शब्दों का इस्तेमाल (00:20:48) करते हैं। उनकी बातों की गूंज लंबे समय तक (00:20:51) रहती है। जब भी आप कुछ कहते हो तो सिर्फ (00:20:54) शब्द नहीं निकलते बल्कि आपकी सोच, आपका (00:20:57) आत्मविश्वास और आपका पूरा व्यक्तित्व (00:21:00) झलकता है। इसीलिए यह जरूरी है कि आप जो भी (00:21:04) बोलो वह इतना दमदार हो कि लोग उसे भूल ना (00:21:07) पाएं। अक्सर ऐसा होता है कि लोग बातों को (00:21:10) खींचने लगते हैं। बिना सोचे समझे बोलते (00:21:13) चले जाते हैं और फिर खुद ही अपनी कही हुई (00:21:16) बात में उलझ जाते हैं। इससे सुनने वाले को (00:21:19) लगता है कि या तो सामने वाला अपनी बात को (00:21:21) लेकर क्लियर नहीं है या फिर वह जबरदस्ती (00:21:24) इंप्रेस करने की कोशिश कर रहा है। जबकि जो (00:21:27) लोग कम लेकिन सोच समझ कर बोलते हैं उनकी (00:21:30) बातों में एक अलग ही असर होता है। अगर आप (00:21:32) चाहते हो कि लोग आपकी बातें ध्यान से सुने (00:21:35) तो पहले अपनी सोच को क्लियर करो। जब तक आप (00:21:38) खुद नहीं समझोगे कि आपको क्या कहना है तब (00:21:41) तक दूसरे भी आपकी बात को गंभीरता से नहीं (00:21:44) लेंगे। कम बोलने का मतलब यह नहीं कि आप (00:21:47) चुप ही रहो। इसका मतलब यह है कि आप अपनी (00:21:50) बातों को इतना प्रभावशाली बनाओ कि कम (00:21:53) शब्दों में ही पूरी बात समझा सको। जब भी (00:21:56) किसी महत्वपूर्ण बातचीत में हिस्सा लो तो (00:21:58) पहले ध्यान से सुनो, समझो और फिर जवाब दो। (00:22:02) इससे ना सिर्फ आपकी बातों का असर बढ़ेगा (00:22:05) बल्कि लोग आपकी राय को ज्यादा अहमियत देने (00:22:08) लगेंगे। शब्दों की ताकत को समझो क्योंकि (00:22:12) बोलना हर किसी को आता है लेकिन सही और (00:22:14) असरदार बोलना एक कला है। चैप्टर 11 सुनने (00:22:18) की कला आपको बेहतर वक्ता बना सकती है। लोग (00:22:21) अक्सर सोचते हैं कि अच्छी कम्युनिकेशन (00:22:23) स्किल्स का मतलब है अच्छा बोलना आना। (00:22:26) लेकिन सच्चाई यह है कि जितना जरूरी बोलना (00:22:28) है उतना ही जरूरी सुनना भी है। जब आप किसी (00:22:32) को ध्यान से सुनते हो तो आप सिर्फ उनके (00:22:34) शब्द नहीं बल्कि उनकी सोच, उनके इमोशंस और (00:22:38) उनके पर्सनालिटी के बारे में भी बहुत कुछ (00:22:40) जान सकते हो। और जब आप दूसरों को सही (00:22:43) तरीके से समझने लगते हो तो आप खुद भी (00:22:46) बेहतर तरीके से बोलने लगते हो। अक्सर (00:22:48) लोगों की सबसे बड़ी गलती यह होती है कि वे (00:22:51) सुनते कम है और बोलते ज्यादा हैं। बातचीत (00:22:54) के दौरान ज्यादातर लोग सिर्फ अपनी बात (00:22:57) कहने का इंतजार करते रहते हैं बजाय इसके (00:22:59) कि सामने वाला क्या कह रहा है उसे ध्यान (00:23:02) से सुना जाए। लेकिन जब आप सच में किसी को (00:23:04) सुनते हो तो आप उनकी बातों के पीछे छिपे (00:23:07) इमोशंस और इरादों को समझ सकते हो। इससे (00:23:10) आपकी बातचीत और ज्यादा डीप और इंटरेस्टिंग (00:23:13) हो जाती है। अगर आप किसी से बातचीत कर रहे (00:23:16) हो तो पूरी तरह से प्रेजेंट रहो। कई बार (00:23:20) लोग सामने वाले की बात सुनते वक्त भी अपने (00:23:23) दिमाग में किसी और चीज के बारे में सोच (00:23:25) रहे होते हैं। जिससे उनकी बातचीत में वह (00:23:28) कनेक्शन नहीं बन पाता जो बनना चाहिए। जब (00:23:32) आप किसी को पूरी तरह से अटेंशन देकर सुनते (00:23:35) हो तो सामने वाला इसे फील करता है और आपके (00:23:38) साथ ज्यादा कंफर्टेबल महसूस करता है। इससे (00:23:41) ना सिर्फ आपकी बातचीत बेहतर होती है बल्कि (00:23:44) लोग आपको एक भरोसेमंद और समझदार इंसान के (00:23:47) रूप में देखने लगते हैं। सुनने की कला (00:23:49) सिर्फ एक कम्युनिकेशन स्किल नहीं है बल्कि (00:23:52) यह आपके रिश्तों को भी मजबूत बनाती है। जब (00:23:55) आप लोगों की बातों को समझने और महसूस करने (00:23:58) लगते हो तो आपकी सोच भी ज्यादा गहरी हो (00:24:00) जाती है और आपकी अपनी बातचीत भी ज्यादा (00:24:03) असरदार बनने लगती है। अच्छा बोलने से पहले (00:24:06) अच्छा सुनना सीखो क्योंकि जब आप दूसरों को (00:24:09) ध्यान से सुनोगे तो आपकी खुद की बातों में (00:24:11) भी गहराई और वजन आने लगेगा। चैप्टर 12 (00:24:15) गलतियां करने से मत डरो। इससे ही सुधार (00:24:17) होता है। हम में से ज्यादातर लोग इस डर (00:24:19) में जीते हैं कि कहीं हमसे कोई गलती ना हो (00:24:22) जाए। खासकर जब हमें किसी ग्रुप के सामने (00:24:24) बोलना होता है या किसी नए माहौल में (00:24:27) बातचीत करनी होती है तो दिमाग में सबसे (00:24:29) पहला ख्याल यही आता है कि अगर मैं कुछ गलत (00:24:32) बोल गया तो लेकिन अगर ध्यान से देखो तो (00:24:35) यही डर हमारी सबसे बड़ी रुकावट बन जाता (00:24:38) है। जो लोग खुलकर बोल पाते हैं और अपने (00:24:40) विचारों को आत्मविश्वास के साथ रख पाते (00:24:43) हैं वे सिर्फ इसीलिए ऐसा कर पाते हैं (00:24:46) क्योंकि उन्हें गलतियां करने का डर नहीं (00:24:48) होता। कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता। हर (00:24:51) कोई गलती करता है। लेकिन जो लोग अपनी (00:24:54) गलतियों से सीखते हैं, वही आगे बढ़ते हैं। (00:24:57) जब आप बोलते वक्त किसी शब्द का गलत (00:25:00) उच्चारण कर देते हो या कोई वाक्य गलत बोल (00:25:03) देते हो, तो यह कोई बड़ी बात नहीं होती। (00:25:05) लोग उसे ज्यादा देर तक याद नहीं रखते, (00:25:08) लेकिन अगर आप गलती करने के डर से बोलना ही (00:25:10) बंद कर दोगे तो आप कभी सुधार नहीं कर (00:25:13) पाओगे। गलतियां ही हमें यह सिखाती हैं कि (00:25:15) हमें कहां सुधार करने की जरूरत है। अगर आप (00:25:18) किसी नई भाषा में बोलने की कोशिश कर रहे (00:25:21) हो और आपको शब्दों का सही इस्तेमाल नहीं (00:25:23) आता तो इसका मतलब यह नहीं कि आप चुप रहो। (00:25:27) जितना ज्यादा आप प्रैक्टिस करोगे उतना ही (00:25:30) बेहतर होते जाओगे। अगर आप किसी ग्रुप में (00:25:32) अपनी बात रखते वक्त अटक जाते हो तो इसका (00:25:35) मतलब यह नहीं कि आप बोलने के लिए सही (00:25:37) इंसान नहीं हो। इसका मतलब सिर्फ इतना है (00:25:40) कि आपको और प्रैक्टिस की जरूरत है। बोलने (00:25:44) में आत्मविश्वास लाने का सबसे अच्छा तरीका (00:25:46) है कि आप अपनी गलतियों को खुले दिल से (00:25:49) स्वीकार करो और उनसे सीखने की आदत डालो। (00:25:52) जितना ज्यादा आप खुद को एक्सप्रेस करने की (00:25:54) कोशिश करोगे, उतना ही ज्यादा आप अपने अंदर (00:25:57) सुधार देखोगे। गलतियों से घबराने की जरूरत (00:26:00) नहीं क्योंकि यही गलतियां हमें आगे बढ़ने (00:26:03) का रास्ता दिखाती हैं। जब आप इस डर से (00:26:05) बाहर निकल आओगे तो ना सिर्फ आपकी (00:26:08) कम्युनिकेशन स्किल्स बेहतर होंगी बल्कि (00:26:10) आपका ओवरऑनेल कॉन्फिडेंस भी कई गुना बढ़ (00:26:14) जाएगा। चैप्टर 13 हर बातचीत को दिलचस्प (00:26:18) कैसे बनाएं? कभी-कभी हम किसी से बात करने (00:26:21) की कोशिश करते हैं। लेकिन कुछ मिनटों में (00:26:24) ही महसूस होता है कि सामने वाला बोर हो (00:26:26) रहा है या हमारी बातों में ज्यादा (00:26:28) दिलचस्पी नहीं दिखा रहा। वहीं कुछ लोग ऐसे (00:26:32) होते हैं जो जब भी बात करते हैं तो सामने (00:26:34) वाला उन्हें बड़े ध्यान से सुनता है और (00:26:36) उनकी बातों का मजा लेता है। ऐसा इसीलिए (00:26:39) होता है क्योंकि वे लोग जानते हैं कि (00:26:41) बातचीत को कैसे दिलचस्प बनाया जाए। कोई भी (00:26:44) बातचीत सिर्फ शब्दों से नहीं बल्कि आपके (00:26:47) अंदाज, आपकी एनर्जी और आपकी टोन से भी (00:26:50) बनती है। जब आप किसी से बात करते हो तो (00:26:53) आपकी आवाज में जोश और एक्सप्रेशन होना (00:26:55) बहुत जरूरी है। अगर आपकी आवाज ही सुस्त और (00:26:58) बेजान लगेगी तो कोई आपकी बात में दिलचस्पी (00:27:01) नहीं लेगा। बातचीत में सबसे जरूरी चीज (00:27:04) होती है सामने वाले की रुचि को समझना। अगर (00:27:07) आप सिर्फ अपने बारे में ही बोलते जाओगे और (00:27:10) सामने वाले की दिलचस्पी की परवाह नहीं (00:27:12) करोगे तो बातचीत एकतरफा हो जाएगी और लोग (00:27:15) बोर हो जाएंगे। इसीलिए जब भी किसी से बात (00:27:18) करो तो ध्यान दो कि सामने वाला किस तरह के (00:27:20) टॉपिक्स में इंटरेस्टेड है। अगर आप उनके (00:27:23) पसंदीदा विषयों पर बात करोगे तो वे खुद ही (00:27:26) बातचीत में शामिल हो जाएंगे। बातचीत में (00:27:29) ह्यूमर का होना भी बहुत जरूरी है। हर (00:27:31) इंसान को हंसना पसंद होता है और अगर आपकी (00:27:34) बातों में हल्काफुल्का मजाक होगा तो लोग (00:27:37) आपसे बात करना ज्यादा पसंद करेंगे। लेकिन (00:27:40) इसका मतलब यह नहीं कि जबरदस्ती जोक मारने (00:27:43) लगो। नेचुरल तरीके से जब कोई हल्कीफुल्की (00:27:46) बात निकलती है तो उसे खुलकर कहो और माहौल (00:27:49) को हल्का बनाओ। अगर आप किसी भी बातचीत को (00:27:52) दिलचस्प बनाना चाहते हो तो खुद को अपडेट (00:27:55) रखना जरूरी है। जब आप नए-नए टॉपिक्स के (00:27:58) बारे में जानते हो तो आप किसी भी इंसान के (00:28:00) साथ आसानी से बातचीत कर सकते हो। बातचीत (00:28:03) को बोझिल बनाने के बजाय उसे एक मजेदार (00:28:06) एक्सचेंज बनाओ जहां दोनों लोग बराबरी से (00:28:08) भाग लें। जब आपकी बातें लोगों को अच्छी (00:28:11) लगेंगी तो वे खुद ब खुद आपसे जुड़ जाएंगे। (00:28:14) कनेक्शन आपकी बॉडी लैंग्वेज से होता है। (00:28:17) जब भी हम किसी को पहली बार देखते हैं तो (00:28:19) सबसे पहले उनकी बातों से पहले उनकी बॉडी (00:28:21) लैंग्वेज नोटिस करते हैं। कोई इंसान चाहे (00:28:24) जितना भी अच्छा बोल ले लेकिन अगर उसकी (00:28:26) बॉडी लैंग्वेज कमजोर होगी तो उसका (00:28:29) आत्मविश्वास कमजोर लगेगा। अगर आप चाहते हो (00:28:32) कि लोग आपको ध्यान से सुने और आपकी बातों (00:28:34) को सीरियसली लें तो आपकी बॉडी लैंग्वेज भी (00:28:37) स्ट्रांग होनी चाहिए। जब भी किसी से बात (00:28:40) करो तो सीधे खड़े रहो या बैठो। अगर आप (00:28:43) झुके हुए हो तो सामने वाले को लगेगा कि आप (00:28:46) खुद अपनी बात को लेकर कॉन्फिडेंट नहीं हो। (00:28:48) आपकी आंखों का कांटेक्ट बहुत जरूरी होता (00:28:51) है। अगर आप किसी से बात करते समय उनकी (00:28:54) आंखों में देखोगे तो सामने वाला आपकी (00:28:56) बातों को ज्यादा गंभीरता से लेगा। वहीं (00:28:59) अगर आपकी नजरें बार-बार इधर-उधर भाग रही (00:29:02) हैं तो सामने वाले को लगेगा कि आप खुद भी (00:29:05) अपनी बातों को लेकर शोर नहीं हो। आपकी (00:29:08) हाथों की मूवमेंट भी बहुत मायने रखती है। (00:29:11) जब भी आप बात कर रहे हो तो अपने हाथों का (00:29:14) नेचुरल तरीके से इस्तेमाल करो। अगर आप (00:29:16) एकदम स्थिर खड़े रहोगे या अपने हाथों को (00:29:19) छुपा लोगे तो आपकी बातचीत में वह जोश नहीं (00:29:22) दिखेगा। लेकिन अगर आप हाथों का सही तरीके (00:29:25) से इस्तेमाल करोगे तो आपकी बात ज्यादा (00:29:27) प्रभावी लगेगी। सबसे जरूरी बात यह है कि (00:29:31) आप खुद को रिलैक्स रखो। अगर आपकी बॉडी (00:29:34) बहुत टाइट और नर्वस लगेगी तो आपकी बातें (00:29:37) भी उतनी प्रभावी नहीं लगेंगी। हल्की (00:29:39) मुस्कान रखो और अपनी बॉडी को नेचुरल तरीके (00:29:42) से मूव करने दो। जब आपकी बॉडी लैंग्वेज (00:29:45) आत्मविश्वास से भरी होगी तो आपकी बातें भी (00:29:48) ज्यादा असरदार लगेंगी। इसीलिए सिर्फ बोलने (00:29:51) पर ही नहीं बल्कि अपनी पूरी प्रेजेंस पर (00:29:53) ध्यान दो। क्योंकि आपकी बॉडी लैंग्वेज (00:29:55) आपके शब्दों से ज्यादा जोर से बोलती है। (00:29:58) चैप्टर 15 हर किसी को प्रभावित करने की (00:30:01) कोशिश मत करो। अक्सर लोग बोलने से पहले (00:30:04) यही सोचते हैं कि सामने वाला क्या सोचेगा? (00:30:07) लोग मुझे कैसे जज करेंगे। मेरी बातों से (00:30:10) कोई नाराज तो नहीं होगा। लेकिन अगर आप हर (00:30:13) किसी को खुश करने की कोशिश करोगे तो आप (00:30:15) कभी अपने मन की बात कह ही नहीं पाओगे। (00:30:18) दुनिया में हर इंसान की सोच अलग होती है (00:30:20) और यह जरूरी नहीं कि हर कोई आपकी बातों से (00:30:23) सहमत हो। अगर आप हमेशा इस डर में रहोगे कि (00:30:26) लोग क्या सोचेंगे तो आप कभी भी (00:30:28) आत्मविश्वास के साथ नहीं बोल पाओगे। जब भी (00:30:31) आप किसी से बात करो तो अपने विचारों को (00:30:34) पूरी ईमानदारी और मजबूती से रखो। इसका (00:30:37) मतलब यह नहीं कि आप दूसरों की भावनाओं की (00:30:40) परवाह ना करो। लेकिन हर वक्त सिर्फ दूसरों (00:30:43) को खुश करने के लिए अपनी बात ना बदलो। (00:30:46) अपने विचारों में मजबूती रखने का सबसे (00:30:48) अच्छा तरीका यह है कि आप खुद को अच्छी तरह (00:30:51) समझो। जब आपको खुद पता होगा कि आप क्या (00:30:54) सोचते हो और क्यों सोचते हो तो आप बिना (00:30:57) झिझक अपनी बात कह पाओगे। बहुत से लोग (00:30:59) इसलिए कॉन्फिडेंट नहीं होते क्योंकि वे (00:31:02) खुद ही अपनी बातों को लेकर श्योर नहीं (00:31:04) होते। इसीलिए अपनी सोच को क्लियर करो और (00:31:08) फिर बिना किसी डर के उसे सामने रखो। जब आप (00:31:11) अपनी बातों में ईमानदारी रखोगे और खुद पर (00:31:14) भरोसा करोगे तो लोग खुद ब खुद रिस्पेक्ट (00:31:17) देने लगते हैं। इसीलिए अपनी बातों पर (00:31:20) भरोसा रखो और अपनी सोच को बिना डर के (00:31:23) दुनिया के सामने रखो। कंक्लूजन अब तक के (00:31:26) इस सफर में हमने जाना कि कैसे सही तरीके (00:31:29) से बोलना, ध्यान से सुनना, बातचीत को (00:31:32) दिलचस्प बनाना, अपनी गलतियों से सीखना और (00:31:36) आत्मविश्वास से अपनी बात रखना हमारी (00:31:39) जिंदगी को पूरी तरह बदल सकता है। यह सिर्फ (00:31:41) कम्युनिकेशन स्किल्स की बात नहीं है। (00:31:43) बल्कि यह हमारी पर्सनालिटी, हमारे (00:31:46) रिलेशनशिप्स और करियर ग्रोथ का भी सबसे (00:31:49) बड़ा आधार है। अगर आप सोच रहे हो कि क्या (00:31:52) यह सब बदलाव आप अपनी जिंदगी में ला सकते (00:31:55) हो, तो जवाब है बिल्कुल। हर बड़ा वक्ता (00:31:59) कभी ना कभी झिझकता था। हर कॉन्फिडेंट (00:32:02) इंसान ने कहीं ना कहीं डर महसूस किया था। (00:32:05) लेकिन उन्होंने उस डर को तोड़ा। अपनी (00:32:07) गलतियों से सीखा और खुद पर भरोसा किया। (00:32:11) यही सफर अब आपका भी है। आज से अभी से अपने (00:32:15) कम्युनिकेशन पर काम करना शुरू करो। अगर (00:32:18) आपको इस ऑडियो बुक ने मदद की तो इसे अपने (00:32:21) दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करना ना (00:32:23) भूलें और हां चैनल को सब्सक्राइब जरूर (00:32:26) करें ताकि आगे भी ऐसी ही लाइफ चेंजिंग (00:32:28) बातें आप तक पहुंचती रहे। आपकी आवाज मायने (00:32:32) रखती है उसे दुनिया तक पहुंचाइए।

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