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Title: बोलने में माहिर कैसे बनें? | Think Fast, Talk Smart : Communication Techniques | Hindi Audiobook
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क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग जब
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बोलते हैं तो लोग ध्यान से सुनते हैं।
(00:00:05)
उनके शब्द याद रखते हैं और उनकी बातें
(00:00:08)
लंबे समय तक असर छोड़ती हैं? वहीं कुछ लोग
(00:00:11)
चाहे जितना भी बोल लें उनकी बातें हवा में
(00:00:14)
खो जाती हैं। आखिर ऐसा क्यों होता है?
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इसका जवाब एक ही है कम्युनिकेशन की कला।
(00:00:21)
आपकी जिंदगी में चाहे जॉब इंटरव्यू हो,
(00:00:23)
ऑफिस मीटिंग हो, दोस्तों के साथ बातचीत हो
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या किसी भी अनजान इंसान से पहली मुलाकात
(00:00:29)
आपकी कम्युनिकेशन स्किल्स ही तय करती है
(00:00:31)
कि लोग आपको कैसे देखेंगे। आप पर कितना
(00:00:34)
भरोसा करेंगे और आपकी बातों को कितना
(00:00:36)
सीरियसली लेंगे। लेकिन अच्छी बात यह है कि
(00:00:39)
असरदार तरीके से बोलना कोई जन्मजात टैलेंट
(00:00:42)
नहीं है। इसे सीखा जा सकता है। इस ऑडियो
(00:00:45)
बुक में हम सीखेंगे कि कैसे जल्दी और
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स्मार्टली सोें। अपनी बातें सही तरीके से
(00:00:50)
रखें। आत्मविश्वास से बोलें और हर बातचीत
(00:00:54)
को दिलचस्प और प्रभावी बनाएं। यहां आपको
(00:00:57)
मिलेगा एक प्रैक्टिकल और आसान तरीका जिससे
(00:01:00)
आप अपनी कम्युनिकेशन स्किल्स को नए लेवल
(00:01:03)
पर ले जा सकते हैं। अगर आप भी उन लोगों
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में से हो जो सही शब्दों की तलाश में अटक
(00:01:08)
जाते हैं। बोलने से पहले घबराते हैं या
(00:01:11)
सोचते हैं कि काश उनकी बातें ज्यादा
(00:01:13)
असरदार होती तो यह ऑडियो बुक आपके लिए ही
(00:01:16)
है। तो तैयार हो जाइए क्योंकि अब आपकी
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आवाज सिर्फ सुनी नहीं जाएगी बल्कि महसूस
(00:01:21)
भी की जाएगी। चैप्टर वन सोच की स्पीड
(00:01:25)
बढ़ाओ। कभी सोचा है कि कुछ लोग किसी भी
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सिचुएशन में झट से जवाब कैसे दे देते हैं?
(00:01:32)
जैसे मान लो ऑफिस में बॉस ने अचानक से पूछ
(00:01:35)
लिया व्हाई शुड आई गिव यू दिस प्रमोशन? और
(00:01:38)
कुछ लोग तुरंत ही एक बढ़िया जवाब दे देते
(00:01:40)
हैं। जबकि कुछ लोग सोचते ही रह जाते हैं
(00:01:42)
और बाद में अफसोस करते हैं कि यार ऐसा
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बोलना चाहिए था। यह फर्क आता है सोचने की
(00:01:48)
स्पीड से। और अच्छी बात यह है कि यह सीखा
(00:01:51)
जा सकता है। सोचो अगर दिमाग एक कंप्यूटर
(00:01:54)
होता तो कुछ लोगों के प्रोसेसर सुपर फास्ट
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होते हैं और कुछ के थोड़े स्लो। लेकिन हम
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अपने दिमाग के प्रोसेसर को अपग्रेड कर
(00:02:02)
सकते हैं। जब दिमाग तेज चलता है तो लाइफ
(00:02:05)
में हर चीज आसान लगने लगती है। एग्जाम हो,
(00:02:08)
किसी को इंप्रेस करना हो या फिर किसी बहस
(00:02:11)
में खुद को साबित करना हो, फास्ट थिंकिंग
(00:02:14)
हर जगह काम आती है। अब सवाल आता है कि
(00:02:17)
फास्ट थिंकिंग आती कैसे है? पहला सीक्रेट
(00:02:20)
है। ज्यादा सोचो मत। यह अजीब लग सकता है,
(00:02:23)
लेकिन सच यही है जब हम ज्यादा सोचते हैं
(00:02:26)
तो कंफ्यूज हो जाते हैं। इसीलिए फटाफट
(00:02:29)
डिसीजन लेने की आदत डालो। जैसे अगर कोई
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पूछे कि तुम्हारा फेवरेट ट्रेवल
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डेस्टिनेशन क्या है? तो मत सोचो कि यार
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गोवा बोलूं या मनाली? बस झट से बोल दो जो
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दिल में पहले आया। दूसरी बात अपनी
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ऑब्जरवेशन स्किल्स तेज करो। जितना ज्यादा
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आप लोगों को सिचुएशनंस को नोटिस करोगे
(00:02:47)
उतना जल्दी चीजें पकड़ने लगोगे। कभी सोचा
(00:02:50)
है क्या कि कुछ लोग किसी की बात बीच में
(00:02:52)
पकड़ कर मजेदार जवाब दे देते हैं। यह ऑन द
(00:02:55)
स्पॉट ऑब्जरवेशन से आता है। अगली बार जब
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किसी ग्रुप में हो तो ध्यान दो कि कौन
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क्या बोल रहा है, कैसे बोल रहा है और कब
(00:03:03)
बोल रहा है। तीसरी चीज है प्रैक्टिस। सोचो
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एक क्रिकेटर कैसे तेज खेलता है। प्रैक्टिस
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से। वैसे ही आपको दिमाग की स्पीड बढ़ाने
(00:03:12)
के लिए फटाफट जवाब देने की प्रैक्टिस करनी
(00:03:15)
होगी। कोशिश करो कि हर बातचीत में थोड़ी
(00:03:18)
तेजी लाओ। घर पर भी, फ्रेंड्स के साथ भी।
(00:03:21)
जब आप अपने सोचने की स्पीड बढ़ा लोगे तो
(00:03:23)
हर जगह कॉन्फिडेंस भी बढ़ जाएगा। इंटरव्यू
(00:03:26)
हो, मीटिंग हो, डेटिंग हो या फिर दोस्तों
(00:03:28)
के साथ मजाक हर जगह आप शार्प और
(00:03:30)
इंटेलिजेंट लगोगे। तो अगली बार जब कोई
(00:03:32)
आपसे कोई सवाल पूछे सोचो मत बस बोल दो।
(00:03:36)
चैप्टर टू जुबान को तेज बनाओ। क्या कभी
(00:03:39)
ऐसा हुआ है कि आपके दिमाग में एकदम सही
(00:03:42)
जवाब था? लेकिन जब बोलने की बारी आई तो
(00:03:44)
जुबान लड़खड़ा गई और फिर बाद में सोचा यार
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ऐसा बोल देता तो मजा आ जाता। यह सिर्फ
(00:03:50)
आपके साथ नहीं होता। बहुत लोगों के साथ
(00:03:52)
होता है। दिमाग तेज चलता है लेकिन जुबान
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साथ नहीं देती और इस वजह से कई बार लोग
(00:03:59)
हमें इग्नोर करने लगते हैं या फिर हमारी
(00:04:01)
बातों को सीरियसली नहीं लेते। लेकिन इसकी
(00:04:04)
अच्छी बात यह है कि यह बदला जा सकता है।
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आपको अपने बोलने की स्पीड को भी अपने
(00:04:10)
सोचने की स्पीड के साथ मैच करना होगा और
(00:04:13)
यह किसी टैलेंट से नहीं आता बल्कि
(00:04:14)
प्रैक्टिस से आता है। सबसे पहली चीज जो
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जरूरी है वह है क्लेरिटी। अगर दिमाग में
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कंफ्यूजन होगा तो बोलने में भी आएगा।
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इसीलिए जब भी बात करो तो पहले अपने माइंड
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में उसे क्लियर कर लो। मान लो आप ऑफिस में
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हो और बॉस पूछता है टेल मी अबाउट योर
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प्रोजेक्ट। अब अगर आप सोचना शुरू कर दोगे
(00:04:35)
कि यार कहां से शुरू करूं तो फिर अटकना तय
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है। इसीलिए हर बातचीत में पहले ही एक
(00:04:41)
क्लियर आईडिया रखो कि क्या बोलना है।
(00:04:44)
दूसरी बात अपनी वोकैबुलरी और एक्सप्रेशनंस
(00:04:47)
को अपडेट करो। ऐसा नहीं कि मुश्किल
(00:04:49)
अंग्रेजी के शब्द याद करने हैं बल्कि अपनी
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भाषा को स्मार्ट बनाना है। कभी नोटिस किया
(00:04:54)
है कि कुछ लोग सिंपल बातें भी इतने स्टाइल
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से बोलते हैं कि सामने वाला इंप्रेस हो
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जाता है? ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि उनके
(00:05:02)
पास सही शब्द होते हैं। अगली बार जब भी
(00:05:06)
कोई अच्छी लाइन सुनो या पढ़ो उसे याद रखो
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और अपने कन्वर्सेशन में यूज करो। तीसरी
(00:05:12)
चीज बोलने की प्रैक्टिस करो। जो लोग तेज
(00:05:15)
और स्मार्टली बोलते हैं, वह हर दिन
(00:05:18)
प्रैक्टिस करते हैं। जैसे स्टैंड अप
(00:05:20)
कॉमेडियंस को देखो। वह इतनी तेजी से और
(00:05:24)
मजेदार तरीके से बातें करते हैं क्योंकि
(00:05:26)
उन्होंने इसे बार-बार प्रैक्टिस किया होता
(00:05:28)
है। आप भी रोज किसी टॉपिक पर बोलने की आदत
(00:05:31)
डालो। चाहे शीशे के सामने हो या किसी
(00:05:34)
दोस्त के साथ। जब आप अपनी स्पीकिंग
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स्किल्स इंप्रूव कर लोगे तो लोग आपकी
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बातें ध्यान से सुनेंगे। आप किसी भी जगह
(00:05:41)
पर अपनी बात कॉन्फिडेंटली रख पाओगे और
(00:05:44)
लाइफ में बहुत आगे बढ़ जाओगे। चैप्टर थ्री
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फटाफट जवाब देने की कला सीखो। कभी ऐसा हुआ
(00:05:50)
है कि कोई आपके सामने तगड़ा तर्क रख देता
(00:05:53)
है और आप उस समय चुप रह जाते हो लेकिन बाद
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में सोचते हो यार मुझे ऐसा बोलना चाहिए
(00:05:59)
था। ऐसा क्यों होता है? क्योंकि हमारा
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दिमाग कुछ सेकंड्स का ब्रेक ले लेता है
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सोचने के लिए और उसी दौरान दूसरा इंसान
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बाजी मार लेता है। फास्ट रिप्लाई देने की
(00:06:10)
सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि इससे
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सामने वाले पर इंप्रेशन पड़ता है कि आप
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शार्प और स्मार्ट हो और यह सिर्फ डिबेट
(00:06:18)
में नहीं बल्कि हर जगह काम आता है। ऑफिस
(00:06:21)
में, फ्रेंड्स के साथ, डेट पर, इंटरव्यू
(00:06:23)
में हर जगह। अब सवाल आता है कि फास्ट
(00:06:25)
रिप्लाई देने के लिए करना क्या है? पहली
(00:06:28)
चीज अपने दिमाग को ट्रेन करो कि बिना डिले
(00:06:31)
के रिस्पांस दे। जब कोई सवाल आए तो तुरंत
(00:06:33)
जवाब दो। भले ही वह परफेक्ट ना हो। जैसे
(00:06:37)
अगर कोई पूछे तुम्हें कौन सी फिल्म पसंद
(00:06:39)
है? तो मत सोचो कि यार एक बताऊं या दो झट
(00:06:42)
से बोल दो। शोले क्लासिक है भाई। इस तरह
(00:06:45)
से आपके दिमाग की ट्रेनिंग होगी। दूसरी
(00:06:48)
बात सवालों के पैटर्न को समझो। दुनिया में
(00:06:51)
ज्यादातर सवाल रिपीट होते हैं। इंटरव्यू
(00:06:53)
में पूछे जाने वाले सवाल, डेटिंग के सवाल
(00:06:56)
या फिर डेली लाइफ के कॉमन सवाल। अगर आप
(00:06:59)
इनके बढ़िया जवाब पहले से तैयार कर लोगे
(00:07:02)
तो कभी अटकोगे नहीं। तीसरी चीज थोड़ा
(00:07:04)
ह्यूमर ऐड करो। कभी नोटिस किया है कि जो
(00:07:07)
लोग फटाफट और मजेदार जवाब देते हैं, लोग
(00:07:10)
उन्हें ज्यादा पसंद करते हैं? जैसे अगर
(00:07:13)
कोई कहे यार तू लेट क्यों आया? तो सीधा
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ट्रैफिक था। बोलने के बजाय थोड़ा मजेदार
(00:07:18)
बनाओ। भाई इंडिया में टाइम पर पहुंचना
(00:07:21)
इललीगल है कि क्या? इस तरह से लोग आपकी
(00:07:24)
बातें ज्यादा ध्यान से सुनेंगे। जब आप इन
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चीजों पर काम करोगे तो धीरे-धीरे आपकी
(00:07:30)
जवाब देने की स्पीड बढ़ जाएगी और जब आपकी
(00:07:33)
स्पीड बढ़ेगी तो लोग आपकी बातों को और
(00:07:36)
सीरियसली लेने लगेंगे। स्मार्ट बनने के
(00:07:39)
लिए फटाफट जवाब देना सीखो। क्योंकि इस
(00:07:42)
दुनिया में स्लो रहने वालों को कोई नहीं
(00:07:44)
सुनता। चैप्टर फोर कॉन्फिडेंस अंदर से आता
(00:07:47)
है बाहर से नहीं। कभी नोटिस किया है कि
(00:07:49)
कुछ लोग भीड़ में भी अलग नजर आते हैं?
(00:07:52)
उनकी बॉडी लैंग्वेज, उनकी आवाज और उनका
(00:07:55)
पूरा तरीका ऐसा होता है कि लोग उनकी तरफ
(00:07:58)
खींचे चले जाते हैं। यह जादू कोई फैशन या
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पैसे से नहीं आता। यह आता है कॉन्फिडेंस
(00:08:03)
से। लेकिन कॉन्फिडेंस आखिर होता क्या है?
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और सबसे बड़ा सवाल यह आता कहां से है?
(00:08:09)
अक्सर लोग सोचते हैं कि कॉन्फिडेंस का
(00:08:12)
मतलब है तेज आवाज में बोलना या जबरदस्ती
(00:08:15)
खुद को बड़ा दिखाना। लेकिन सच्चाई यह है
(00:08:18)
कि रियल कॉन्फिडेंस अंदर से आता है। जब
(00:08:21)
आपको खुद पर भरोसा होता है तो वह बिना कुछ
(00:08:24)
बोले भी झलकता है। जैसे जब कोई आपसे कहे
(00:08:27)
कि आपका नाम क्या है तो आप बिना रुके झट
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से बोल देते हो क्योंकि आपको कोई डाउट
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नहीं होता। यही चीज लाइफ के हर हिस्से में
(00:08:34)
होनी चाहिए। कॉन्फिडेंस बनाने के लिए सबसे
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पहले अपनी कमजोरियों को एक्सेप्ट करना
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जरूरी है। लोग अक्सर इस डर में जीते हैं
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कि अगर मैं गलती कर दूं तो लोग क्या
(00:08:44)
सोचेंगे? लेकिन सच यह है कि कोई ज्यादा
(00:08:47)
देर तक आपकी गलतियों को याद नहीं रखता।
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अगर कोई जोक मारने में फेल हो जाता है और
(00:08:52)
हंसकर टॉपिक बदल देता है तो लोग भी उसे
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उतनी ही आसानी से भूल जाते हैं। इसीलिए
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खुद को ज्यादा जज मत करो। दूसरी चीज खुद
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को तैयार करना जरूरी है। जब आप किसी टॉपिक
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पर नॉलेज रखते हो तो आपको डर नहीं लगता।
(00:09:08)
जैसे अगर किसी चीज के बारे में आपको सही
(00:09:10)
जानकारी है तो आप बिना हिचकिचाहट उस पर
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बोल सकते हो। इसीलिए अपनी लाइफ में जिस भी
(00:09:16)
चीज में एक्सपर्ट बनना चाहते हो उस पर रोज
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थोड़ा-थोड़ा सीखते रहो। जब आपको पता होगा
(00:09:22)
कि आप सही हो तो आपकी बॉडी लैंग्वेज खुद ब
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खुद कॉन्फिडेंट दिखेगी। आप हर किसी को
(00:09:28)
इंप्रेस करने की कोशिश करो। सच तो यह है
(00:09:31)
कि हर इंसान को खुश करना नामुमकिन है।
(00:09:34)
इसीलिए खुद को बदलने के बजाय अपने असली
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स्वभाव को अपनाओ। जब आप वैसे ही रहोगे
(00:09:40)
जैसे आप हो तो लोगों को आपकी ओर आकर्षित
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होने से कोई नहीं रोक सकता। कॉन्फिडेंस
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सिर्फ बोलने या दिखाने की चीज नहीं है। यह
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आपके अंदर की एनर्जी है जो तभी नजर आती है
(00:09:52)
जब आप खुद को पूरी तरह से एक्सेप्ट करते
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हो। चैप्टर फाइव बातचीत में इंटरेस्ट कैसे
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बनाएं? कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी से
(00:10:00)
मिलते हो, बातचीत शुरू करते हो, लेकिन कुछ
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ही मिनटों में माहौल बोरिंग लगने लगता है।
(00:10:05)
सामने वाला बस अच्छा हां, ठीक है। जैसी
(00:10:09)
छोटी-छोटी बातें करता है और फिर बातचीत
(00:10:12)
वहीं खत्म हो जाती है। इसका सबसे बड़ा
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कारण होता है बातचीत को इंटरेस्टिंग ना
(00:10:17)
बना पाना। और अगर आप चाहते हो कि लोग आपसे
(00:10:21)
बात करके बोर ना हो बल्कि आपकी बातों को
(00:10:23)
एंजॉय करें तो आपको कुछ चीजें सीखनी
(00:10:26)
होंगी। बातचीत को इंटरेस्टिंग बनाने का
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पहला सीक्रेट है। सिर्फ अपने बारे में मत
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बोलो। बहुत से लोग खुद की कहानियां सुनाने
(00:10:35)
में इतना बिजी हो जाते हैं कि सामने वाला
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बोर हो जाता है। अगर आपको वाकई में किसी
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से कनेक्ट करना है तो उनकी बातों में
(00:10:42)
इंटरेस्ट लो, सवाल पूछो। उनकी राय जानने
(00:10:45)
की कोशिश करो। जब सामने वाला महसूस करता
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है कि उसकी बातों को सुना जा रहा है तो वह
(00:10:50)
खुद ही बातचीत को एंजॉय करने लगता है।
(00:10:53)
दूसरा तरीका है अपनी बातों में कुछ
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अनएक्सेक्टेड डालो। कभी-कभी लोग बहुत
(00:10:59)
प्रेडिक्टेबल तरीके से बात करते हैं जिससे
(00:11:02)
बातचीत बेजान लगने लगती है। जैसे अगर कोई
(00:11:05)
पूछे आपका दिन कैसा था और आप सीधा अच्छा
(00:11:08)
था बोल दो तो बात वहीं खत्म हो जाएगी।
(00:11:10)
लेकिन अगर आप बोलो यार आज का दिन कमाल का
(00:11:13)
था। सुबह-सुबह चाय गिरा दी, फिर बारिश में
(00:11:16)
भीग गया। लेकिन फिर भी दिन शानदार रहा तो
(00:11:20)
सामने वाला खुद ब खुद इंटरेस्ट लेने
(00:11:22)
लगेगा। तीसरी चीज है ह्यूमर का सही
(00:11:25)
इस्तेमाल। हर बातचीत में मजाकिया अंदाज
(00:11:28)
होना जरूरी नहीं। लेकिन अगर आप
(00:11:30)
हल्के-फुल्के तरीके से बात करोगे तो लोग
(00:11:33)
आपसे और ज्यादा कनेक्ट महसूस करेंगे।
(00:11:35)
ह्यूमर सिर्फ जोक्स सुनाने से नहीं आता
(00:11:38)
बल्कि बातें करने के तरीके से आता है। जब
(00:11:41)
आप अपनी बातों में थोड़ा कैजुअलनेस और
(00:11:44)
नेचुरल फ्लो रखोगे तो लोग आपकी बातें
(00:11:46)
सुनने में दिलचस्पी लेंगे। इंटरेस्टिंग
(00:11:49)
बनने का मतलब यह नहीं कि आपको बहुत
(00:11:51)
बड़ी-बड़ी बातें करनी होंगी। सिर्फ सही
(00:11:54)
टाइमिंग पर सही तरीके से बातचीत करना ही
(00:11:56)
काफी होता है। जब आप लोगों को सुनोगे,
(00:11:59)
उनके इमोशंस को समझोगे और अपनी बातों को
(00:12:02)
थोड़ा मजेदार बनाओगे तो कोई भी बातचीत
(00:12:05)
बोरिंग नहीं होगी। चैप्टर सिक्स बहस जीतने
(00:12:09)
का असली तरीका। बहस में जीतना सिर्फ लाउड
(00:12:12)
होने से नहीं आता बल्कि सही तरीके से अपने
(00:12:15)
पॉइंट को रखने से आता है। कई बार ऐसा होता
(00:12:17)
है कि किसी से बहस चल रही होती है और हम
(00:12:20)
अपनी बात सही होने के बावजूद हार जाते हैं
(00:12:23)
क्योंकि सामने वाला हमें चुप करवा देता है
(00:12:26)
या फिर हम अपनी बात को सही तरीके से रख
(00:12:29)
नहीं पाते। अगर आप चाहते हो कि आप हर बहस
(00:12:32)
में मजबूती से खड़े रहो और अपनी बात को
(00:12:35)
साबित कर सको तो आपको दिमाग से खेलना
(00:12:37)
सीखना होगा। सबसे पहले बहस में कभी भी
(00:12:41)
इमोशनल होकर मत बहस करो। बहुत से लोग बहस
(00:12:45)
के दौरान गुस्से में आ जाते हैं जिससे
(00:12:47)
उनकी बात की वैल्यू कम हो जाती है। अगर आप
(00:12:50)
किसी भी बहस में शांत और कॉन्फिडेंट रहोगे
(00:12:52)
तो सामने वाला खुद ही कमजोर पड़ने लगेगा।
(00:12:55)
जब कोई चिल्ला रहा हो और आप उसी टोन में
(00:12:58)
जवाब दो तो बहस आगे बढ़ती जाती है। लेकिन
(00:13:01)
अगर आप ठंडे दिमाग से जवाब देते हो तो
(00:13:03)
सामने वाला खुद ही धीरे-धीरे बैकफुट पर आ
(00:13:06)
जाएगा। दूसरी चीज हमेशा लॉजिक के साथ
(00:13:09)
बोलो। बहस में इमोशन से ज्यादा फैक्ट्स और
(00:13:12)
लॉजिक चलते हैं। अगर आप अपनी बात को
(00:13:15)
तर्कों और एग्जांपल्स के साथ रखोगे तो कोई
(00:13:17)
भी उसे गलत साबित नहीं कर पाएगा। जैसे अगर
(00:13:20)
किसी को समझाना है कि सुबह जल्दी उठना
(00:13:23)
अच्छा है तो सीधा यह मत कहो कि जल्दी उठना
(00:13:25)
हेल्दी होता है। बल्कि बोलो हर सक्सेसफुल
(00:13:28)
इंसान की लाइफ में एक चीज कॉमन होती है।
(00:13:31)
वह सुबह जल्दी उठता है। इससे आपकी बात
(00:13:34)
ज्यादा असरदार लगेगी। एक और ट्रिक जो बहुत
(00:13:37)
कारगर होती है वह है सामने वाले के
(00:13:40)
पॉइंट्स को उसके ही खिलाफ यूज करना। जब भी
(00:13:44)
कोई तर्क दे उसे ध्यान से सुनो और फिर उसी
(00:13:46)
बात में से ऐसी चीज निकालो जो आपके पक्ष
(00:13:49)
में जाती हो। जैसे अगर कोई कहे कि पढ़ाई
(00:13:51)
से ज्यादा एक्सपीरियंस जरूरी है तो आप
(00:13:54)
जवाब दे सकते हो? बिल्कुल। लेकिन बिना
(00:13:56)
पढ़ाई के एक्सपीरियंस लेना आसान नहीं
(00:13:59)
होता। इससे सामने वाला खुद ही सोचने पर
(00:14:02)
मजबूर हो जाएगा। बहस में जीतने का असली
(00:14:05)
मतलब यह नहीं कि आप सामने वाले को चुप करा
(00:14:08)
दो बल्कि यह कि आप अपनी बात को मजबूती से
(00:14:10)
रख सको और सामने वाला आपकी बात को समझने
(00:14:13)
पर मजबूर हो जाए। जब आप सही माइंडसेट और
(00:14:17)
सही तर्कों के साथ बहस करोगे तो कोई भी
(00:14:20)
आपको गलत साबित नहीं कर पाएगा। चैप्टर
(00:14:23)
सेवन डर को काबू में लाना सीखो। कभी ऐसा
(00:14:27)
हुआ है कि किसी के सामने बोलने से पहले
(00:14:30)
दिल की धड़कन तेज हो गई हो। आवाज कांपने
(00:14:33)
लगी हो और ऐसा महसूस हुआ हो कि अगर एक भी
(00:14:36)
गलत शब्द निकला तो लोग हंस देंगे। यह डर
(00:14:40)
हर किसी को होता है। लेकिन कुछ लोग इसे
(00:14:42)
मैनेज करना सीख जाते हैं और कुछ इसे अपनी
(00:14:45)
सबसे बड़ी कमजोरी बना लेते हैं। अगर आप
(00:14:48)
सोचते हो कि आपकी पब्लिक स्पीकिंग अच्छी
(00:14:51)
नहीं है या किसी भी ग्रुप में बोलने में
(00:14:53)
हिचक होती है तो इसका सीधा कारण है डर। और
(00:14:57)
जब तक इस डर को कंट्रोल नहीं किया जाएगा
(00:15:00)
तब तक बोलने का कॉन्फिडेंस नहीं आएगा। डर
(00:15:03)
हमेशा उसी चीज से लगता है जिसमें हमें कम
(00:15:05)
एक्सपीरियंस होता है। जैसे अगर आपको
(00:15:08)
स्विमिंग नहीं आती तो पानी में उतरते ही
(00:15:10)
डर लगेगा। लेकिन अगर हर दिन थोड़ा-थोड़ा
(00:15:13)
प्रैक्टिस करो तो वह डर अपने आप खत्म हो
(00:15:16)
जाएगा। बोलने का भी यही नियम है। जब आप
(00:15:20)
बार-बार बोलोगे तो धीरे-धीरे डर कम होता
(00:15:22)
जाएगा। लेकिन सबसे पहले यह समझना जरूरी है
(00:15:25)
कि डर को खत्म करने का कोई मैजिक फार्मूला
(00:15:28)
नहीं है। इसे फेस करना ही एकमात्र तरीका
(00:15:32)
है। कई बार हम यह सोच कर डर जाते हैं कि
(00:15:35)
सामने वाला हमें जज करेगा। लेकिन सच तो यह
(00:15:38)
है कि ज्यादातर लोग खुद इतने बिजी होते
(00:15:41)
हैं कि उन्हें आपकी छोटी-छोटी गलतियों से
(00:15:44)
कोई फर्क नहीं पड़ता। अगर आप किसी ग्रुप
(00:15:46)
में बोल रहे हो और एक लाइन गलत बोल भी
(00:15:49)
देते हो तो अगले ही पल लोग उसे भूल
(00:15:52)
जाएंगे। असल में लोगों को आपके शब्दों से
(00:15:55)
ज्यादा आपकी एनर्जी और आपके कॉन्फिडेंस से
(00:15:57)
फर्क पड़ता है। अगर आप अपनी बात पूरे यकीन
(00:16:00)
से कह रहे हो तो लोग उसे सुनेंगे। भले ही
(00:16:03)
उसमें छोटी-मोटी गलतियां हो। अगर डर को
(00:16:06)
मैनेज करना सीख लिया तो बोलने में वह
(00:16:08)
आत्मविश्वास आ जाएगा जो हर किसी को
(00:16:10)
आकर्षित करता है। जो लोग बोलने से डरते
(00:16:13)
हैं उन्हें सिर्फ एक चीज करनी चाहिए। रोज
(00:16:16)
किसी ना किसी से बातचीत करने की कोशिश।
(00:16:19)
चाहे घर में हो, दो दोस्तों के साथ हो या
(00:16:21)
ऑफिस में। जब धीरे-धीरे आप इस डर को फेस
(00:16:24)
करने लगोगे, तो एक दिन ऐसा आएगा जब आपको
(00:16:27)
महसूस भी नहीं होगा कि यह डर कभी था। और
(00:16:30)
जब डर खत्म होगा, तो बोलने की कला खुद ब
(00:16:33)
खुद आ जाएगी। चैप्टर एट सही शब्दों का
(00:16:37)
चुनाव आपकी पर्सनालिटी को बना सकता है।
(00:16:40)
कभी सोचा है कि कुछ लोग जब बोलते हैं तो
(00:16:43)
उनकी बातें सीधा दिल में उतर जाती हैं। वह
(00:16:46)
कुछ ऐसा बोलते हैं जो लंबे समय तक याद
(00:16:48)
रहता है। वहीं कुछ लोग कितना भी बोल लें
(00:16:51)
लेकिन उनकी बातों का कोई असर नहीं होता।
(00:16:54)
यह फर्क आता है शब्दों के चुनाव से। सही
(00:16:58)
शब्द चुनना एक आंठ है और जब इसे सही तरीके
(00:17:00)
से सीखा जाता है तो आपकी पर्सनालिटी में
(00:17:03)
एक अलग ही चमक आ जाती है। बातचीत में सबसे
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जरूरी चीज होती है सिंपल और क्लियर
(00:17:09)
लैंग्वेज। बहुत से लोग दिखाने के लिए
(00:17:11)
बड़े-बड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हैं।
(00:17:13)
लेकिन इससे उल्टा असर पड़ता है। लोग वही
(00:17:16)
बातें पसंद करते हैं जो आसानी से समझ में
(00:17:19)
आए और जिनसे वे खुद को कनेक्ट कर सकें। जब
(00:17:22)
आप किसी से बात कर रहे हो तो ध्यान दो कि
(00:17:25)
आप जो कह रहे हो वह समझने में आसान हो।
(00:17:29)
अगर आपकी भाषा बहुत जटिल होगी तो लोग
(00:17:31)
इंटरेस्ट खो देंगे और आपकी बातों का असर
(00:17:34)
कम हो जाएगा। सही शब्दों का चुनाव करने के
(00:17:37)
लिए सबसे अच्छा तरीका है रोजमर्रा की
(00:17:40)
बातचीत को ऑब्जर्व करना। जब आप किसी ऐसे
(00:17:43)
इंसान से मिलते हो जिसकी कम्युनिकेशन
(00:17:45)
स्किल्स बहुत अच्छी होती है तो गौर करो कि
(00:17:48)
वह किन शब्दों का इस्तेमाल कर रहा है।
(00:17:51)
उसकी टोन कैसी है और वह कैसे अपनी बात रख
(00:17:54)
रहा है। जब आप दूसरों से सीखने लगोगे तो
(00:17:57)
धीरे-धीरे यह स्किल आपकी खुद की
(00:17:59)
पर्सनालिटी का हिस्सा बन जाएगी। अगर आप
(00:18:02)
चाहते हो कि लोग आपकी बातों को सीरियसली
(00:18:04)
लें तो आपको अपनी भाषा में वह आकर्षण लाना
(00:18:07)
होगा जिससे लोग खुद ब खुद आपकी बातों को
(00:18:10)
याद रखें। शब्दों का सही चुनाव आपकी बातों
(00:18:14)
को यादगार बनाता है और जब आपकी बातें याद
(00:18:17)
रखी जाएंगी तो आपकी पर्सनालिटी भी हमेशा
(00:18:20)
के लिए लोगों के दिमाग में छप जाएगी।
(00:18:22)
चैप्टर नाइन किसी भी सिचुएशन में खुद को
(00:18:26)
कैसे संभालें। हमेशा लाइफ वैसी नहीं चलती
(00:18:29)
जैसी हम चाहते हैं। कभी अचानक किसी मीटिंग
(00:18:31)
में बोलना पड़ सकता है। कभी किसी बहस में
(00:18:34)
अपने विचार रखने की जरूरत पड़ सकती है तो
(00:18:37)
कभी किसी ऐसी सिचुएशन का सामना करना पड़
(00:18:40)
सकता है जहां हम सोचते ही रह जाते हैं कि
(00:18:42)
अब क्या बोले। ऐसे वक्त पर वही लोग खुद को
(00:18:46)
संभाल पाते हैं जो पहले से तैयार होते हैं
(00:18:49)
और जिनकी थिंकिंग स्पीड तेज होती है। खुद
(00:18:52)
को संभालने का सबसे पहला तरीका है घबराने
(00:18:55)
से बचना। जब कोई अनएक्सेक्टेड सिचुएशन आती
(00:18:58)
है तो सबसे पहली प्रतिक्रिया होती है
(00:19:01)
पैनिकिक करना। लेकिन जो लोग इस पैनिकिक
(00:19:03)
मोमेंट को कंट्रोल कर लेते हैं वही आगे
(00:19:06)
बढ़ पाते हैं। जब भी आपको लगे कि कोई
(00:19:08)
सिचुएशन आपके हाथ से निकल रही है तो तुरंत
(00:19:11)
एक गहरी सांस लो और खुद को शांत करने की
(00:19:14)
कोशिश करो। घबराने से कोई हल नहीं निकलता
(00:19:17)
बल्कि इससे दिमाग और ज्यादा ब्लॉक हो जाता
(00:19:19)
है। दूसरा तरीका है अपनी बातों को
(00:19:22)
छोटे-छोटे हिस्सों में बांट कर बोलना। अगर
(00:19:25)
आपको एकदम से कोई सवाल पूछ लिया जाए और आप
(00:19:28)
नहीं जानते कि कैसे जवाब देना है तो उसे
(00:19:30)
छोटे-छोटे हिस्सों में सोचो। पहले एक
(00:19:33)
बेसिक आईडिया दो। फिर धीरे-धीरे अपनी बात
(00:19:35)
को विस्तार से रखो। इससे आपको सोचने का
(00:19:38)
टाइम भी मिल जाएगा और सामने वाले को भी
(00:19:40)
लगेगा कि आप पूरे आत्मविश्वास के साथ बोल
(00:19:43)
रहे हो। कई बार लोग ऐसी सिचुएशन में खुद
(00:19:46)
को ज्यादा प्रेशर में डाल लेते हैं और
(00:19:48)
परफेक्ट बनने की कोशिश करने लगते हैं।
(00:19:51)
लेकिन सच तो यह है कि कोई भी परफेक्ट नहीं
(00:19:53)
होता। जब भी आप किसी सिचुएशन में अटक जाओ
(00:19:57)
तो खुद को रिलैक्स रखो और नॉर्मल तरीके से
(00:20:00)
जवाब देने की कोशिश करो। अगर आप सोचोगे कि
(00:20:03)
हर बात एकदम सही और परफेक्ट होनी चाहिए तो
(00:20:05)
आप खुद को और ज्यादा दबाव में डाल लोगे।
(00:20:08)
खुद को संभालने की कला कोई एक दिन में
(00:20:10)
नहीं सीख सकता। लेकिन अगर हर सिचुएशन में
(00:20:13)
खुद को शांत और कॉन्फिडेंट रखने की आदत
(00:20:16)
डाल ली जाए तो धीरे-धीरे यह एक नेचुरल
(00:20:19)
स्किल बन जाती है। जब भी आप किसी मुश्किल
(00:20:21)
सिचुएशन में फंसो तो बस खुद से कहो आराम
(00:20:25)
से सब ठीक होगा। जैसे ही आप खुद को शांत
(00:20:28)
रखोगे आपकी सोच भी क्लियर हो जाएगी और आप
(00:20:31)
सही तरीके से जवाब दे पाओगे। चैप्टर 10 कम
(00:20:35)
बोलो लेकिन असरदार बोलो। कई बार हम सोचते
(00:20:38)
हैं कि ज्यादा बोलने से हम ज्यादा
(00:20:40)
प्रभावशाली लगेंगे। लेकिन असल में बात
(00:20:43)
इसका उलट होती है। जो लोग कम बोलते हैं
(00:20:45)
लेकिन सही समय पर सही शब्दों का इस्तेमाल
(00:20:48)
करते हैं। उनकी बातों की गूंज लंबे समय तक
(00:20:51)
रहती है। जब भी आप कुछ कहते हो तो सिर्फ
(00:20:54)
शब्द नहीं निकलते बल्कि आपकी सोच, आपका
(00:20:57)
आत्मविश्वास और आपका पूरा व्यक्तित्व
(00:21:00)
झलकता है। इसीलिए यह जरूरी है कि आप जो भी
(00:21:04)
बोलो वह इतना दमदार हो कि लोग उसे भूल ना
(00:21:07)
पाएं। अक्सर ऐसा होता है कि लोग बातों को
(00:21:10)
खींचने लगते हैं। बिना सोचे समझे बोलते
(00:21:13)
चले जाते हैं और फिर खुद ही अपनी कही हुई
(00:21:16)
बात में उलझ जाते हैं। इससे सुनने वाले को
(00:21:19)
लगता है कि या तो सामने वाला अपनी बात को
(00:21:21)
लेकर क्लियर नहीं है या फिर वह जबरदस्ती
(00:21:24)
इंप्रेस करने की कोशिश कर रहा है। जबकि जो
(00:21:27)
लोग कम लेकिन सोच समझ कर बोलते हैं उनकी
(00:21:30)
बातों में एक अलग ही असर होता है। अगर आप
(00:21:32)
चाहते हो कि लोग आपकी बातें ध्यान से सुने
(00:21:35)
तो पहले अपनी सोच को क्लियर करो। जब तक आप
(00:21:38)
खुद नहीं समझोगे कि आपको क्या कहना है तब
(00:21:41)
तक दूसरे भी आपकी बात को गंभीरता से नहीं
(00:21:44)
लेंगे। कम बोलने का मतलब यह नहीं कि आप
(00:21:47)
चुप ही रहो। इसका मतलब यह है कि आप अपनी
(00:21:50)
बातों को इतना प्रभावशाली बनाओ कि कम
(00:21:53)
शब्दों में ही पूरी बात समझा सको। जब भी
(00:21:56)
किसी महत्वपूर्ण बातचीत में हिस्सा लो तो
(00:21:58)
पहले ध्यान से सुनो, समझो और फिर जवाब दो।
(00:22:02)
इससे ना सिर्फ आपकी बातों का असर बढ़ेगा
(00:22:05)
बल्कि लोग आपकी राय को ज्यादा अहमियत देने
(00:22:08)
लगेंगे। शब्दों की ताकत को समझो क्योंकि
(00:22:12)
बोलना हर किसी को आता है लेकिन सही और
(00:22:14)
असरदार बोलना एक कला है। चैप्टर 11 सुनने
(00:22:18)
की कला आपको बेहतर वक्ता बना सकती है। लोग
(00:22:21)
अक्सर सोचते हैं कि अच्छी कम्युनिकेशन
(00:22:23)
स्किल्स का मतलब है अच्छा बोलना आना।
(00:22:26)
लेकिन सच्चाई यह है कि जितना जरूरी बोलना
(00:22:28)
है उतना ही जरूरी सुनना भी है। जब आप किसी
(00:22:32)
को ध्यान से सुनते हो तो आप सिर्फ उनके
(00:22:34)
शब्द नहीं बल्कि उनकी सोच, उनके इमोशंस और
(00:22:38)
उनके पर्सनालिटी के बारे में भी बहुत कुछ
(00:22:40)
जान सकते हो। और जब आप दूसरों को सही
(00:22:43)
तरीके से समझने लगते हो तो आप खुद भी
(00:22:46)
बेहतर तरीके से बोलने लगते हो। अक्सर
(00:22:48)
लोगों की सबसे बड़ी गलती यह होती है कि वे
(00:22:51)
सुनते कम है और बोलते ज्यादा हैं। बातचीत
(00:22:54)
के दौरान ज्यादातर लोग सिर्फ अपनी बात
(00:22:57)
कहने का इंतजार करते रहते हैं बजाय इसके
(00:22:59)
कि सामने वाला क्या कह रहा है उसे ध्यान
(00:23:02)
से सुना जाए। लेकिन जब आप सच में किसी को
(00:23:04)
सुनते हो तो आप उनकी बातों के पीछे छिपे
(00:23:07)
इमोशंस और इरादों को समझ सकते हो। इससे
(00:23:10)
आपकी बातचीत और ज्यादा डीप और इंटरेस्टिंग
(00:23:13)
हो जाती है। अगर आप किसी से बातचीत कर रहे
(00:23:16)
हो तो पूरी तरह से प्रेजेंट रहो। कई बार
(00:23:20)
लोग सामने वाले की बात सुनते वक्त भी अपने
(00:23:23)
दिमाग में किसी और चीज के बारे में सोच
(00:23:25)
रहे होते हैं। जिससे उनकी बातचीत में वह
(00:23:28)
कनेक्शन नहीं बन पाता जो बनना चाहिए। जब
(00:23:32)
आप किसी को पूरी तरह से अटेंशन देकर सुनते
(00:23:35)
हो तो सामने वाला इसे फील करता है और आपके
(00:23:38)
साथ ज्यादा कंफर्टेबल महसूस करता है। इससे
(00:23:41)
ना सिर्फ आपकी बातचीत बेहतर होती है बल्कि
(00:23:44)
लोग आपको एक भरोसेमंद और समझदार इंसान के
(00:23:47)
रूप में देखने लगते हैं। सुनने की कला
(00:23:49)
सिर्फ एक कम्युनिकेशन स्किल नहीं है बल्कि
(00:23:52)
यह आपके रिश्तों को भी मजबूत बनाती है। जब
(00:23:55)
आप लोगों की बातों को समझने और महसूस करने
(00:23:58)
लगते हो तो आपकी सोच भी ज्यादा गहरी हो
(00:24:00)
जाती है और आपकी अपनी बातचीत भी ज्यादा
(00:24:03)
असरदार बनने लगती है। अच्छा बोलने से पहले
(00:24:06)
अच्छा सुनना सीखो क्योंकि जब आप दूसरों को
(00:24:09)
ध्यान से सुनोगे तो आपकी खुद की बातों में
(00:24:11)
भी गहराई और वजन आने लगेगा। चैप्टर 12
(00:24:15)
गलतियां करने से मत डरो। इससे ही सुधार
(00:24:17)
होता है। हम में से ज्यादातर लोग इस डर
(00:24:19)
में जीते हैं कि कहीं हमसे कोई गलती ना हो
(00:24:22)
जाए। खासकर जब हमें किसी ग्रुप के सामने
(00:24:24)
बोलना होता है या किसी नए माहौल में
(00:24:27)
बातचीत करनी होती है तो दिमाग में सबसे
(00:24:29)
पहला ख्याल यही आता है कि अगर मैं कुछ गलत
(00:24:32)
बोल गया तो लेकिन अगर ध्यान से देखो तो
(00:24:35)
यही डर हमारी सबसे बड़ी रुकावट बन जाता
(00:24:38)
है। जो लोग खुलकर बोल पाते हैं और अपने
(00:24:40)
विचारों को आत्मविश्वास के साथ रख पाते
(00:24:43)
हैं वे सिर्फ इसीलिए ऐसा कर पाते हैं
(00:24:46)
क्योंकि उन्हें गलतियां करने का डर नहीं
(00:24:48)
होता। कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता। हर
(00:24:51)
कोई गलती करता है। लेकिन जो लोग अपनी
(00:24:54)
गलतियों से सीखते हैं, वही आगे बढ़ते हैं।
(00:24:57)
जब आप बोलते वक्त किसी शब्द का गलत
(00:25:00)
उच्चारण कर देते हो या कोई वाक्य गलत बोल
(00:25:03)
देते हो, तो यह कोई बड़ी बात नहीं होती।
(00:25:05)
लोग उसे ज्यादा देर तक याद नहीं रखते,
(00:25:08)
लेकिन अगर आप गलती करने के डर से बोलना ही
(00:25:10)
बंद कर दोगे तो आप कभी सुधार नहीं कर
(00:25:13)
पाओगे। गलतियां ही हमें यह सिखाती हैं कि
(00:25:15)
हमें कहां सुधार करने की जरूरत है। अगर आप
(00:25:18)
किसी नई भाषा में बोलने की कोशिश कर रहे
(00:25:21)
हो और आपको शब्दों का सही इस्तेमाल नहीं
(00:25:23)
आता तो इसका मतलब यह नहीं कि आप चुप रहो।
(00:25:27)
जितना ज्यादा आप प्रैक्टिस करोगे उतना ही
(00:25:30)
बेहतर होते जाओगे। अगर आप किसी ग्रुप में
(00:25:32)
अपनी बात रखते वक्त अटक जाते हो तो इसका
(00:25:35)
मतलब यह नहीं कि आप बोलने के लिए सही
(00:25:37)
इंसान नहीं हो। इसका मतलब सिर्फ इतना है
(00:25:40)
कि आपको और प्रैक्टिस की जरूरत है। बोलने
(00:25:44)
में आत्मविश्वास लाने का सबसे अच्छा तरीका
(00:25:46)
है कि आप अपनी गलतियों को खुले दिल से
(00:25:49)
स्वीकार करो और उनसे सीखने की आदत डालो।
(00:25:52)
जितना ज्यादा आप खुद को एक्सप्रेस करने की
(00:25:54)
कोशिश करोगे, उतना ही ज्यादा आप अपने अंदर
(00:25:57)
सुधार देखोगे। गलतियों से घबराने की जरूरत
(00:26:00)
नहीं क्योंकि यही गलतियां हमें आगे बढ़ने
(00:26:03)
का रास्ता दिखाती हैं। जब आप इस डर से
(00:26:05)
बाहर निकल आओगे तो ना सिर्फ आपकी
(00:26:08)
कम्युनिकेशन स्किल्स बेहतर होंगी बल्कि
(00:26:10)
आपका ओवरऑनेल कॉन्फिडेंस भी कई गुना बढ़
(00:26:14)
जाएगा। चैप्टर 13 हर बातचीत को दिलचस्प
(00:26:18)
कैसे बनाएं? कभी-कभी हम किसी से बात करने
(00:26:21)
की कोशिश करते हैं। लेकिन कुछ मिनटों में
(00:26:24)
ही महसूस होता है कि सामने वाला बोर हो
(00:26:26)
रहा है या हमारी बातों में ज्यादा
(00:26:28)
दिलचस्पी नहीं दिखा रहा। वहीं कुछ लोग ऐसे
(00:26:32)
होते हैं जो जब भी बात करते हैं तो सामने
(00:26:34)
वाला उन्हें बड़े ध्यान से सुनता है और
(00:26:36)
उनकी बातों का मजा लेता है। ऐसा इसीलिए
(00:26:39)
होता है क्योंकि वे लोग जानते हैं कि
(00:26:41)
बातचीत को कैसे दिलचस्प बनाया जाए। कोई भी
(00:26:44)
बातचीत सिर्फ शब्दों से नहीं बल्कि आपके
(00:26:47)
अंदाज, आपकी एनर्जी और आपकी टोन से भी
(00:26:50)
बनती है। जब आप किसी से बात करते हो तो
(00:26:53)
आपकी आवाज में जोश और एक्सप्रेशन होना
(00:26:55)
बहुत जरूरी है। अगर आपकी आवाज ही सुस्त और
(00:26:58)
बेजान लगेगी तो कोई आपकी बात में दिलचस्पी
(00:27:01)
नहीं लेगा। बातचीत में सबसे जरूरी चीज
(00:27:04)
होती है सामने वाले की रुचि को समझना। अगर
(00:27:07)
आप सिर्फ अपने बारे में ही बोलते जाओगे और
(00:27:10)
सामने वाले की दिलचस्पी की परवाह नहीं
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करोगे तो बातचीत एकतरफा हो जाएगी और लोग
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बोर हो जाएंगे। इसीलिए जब भी किसी से बात
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करो तो ध्यान दो कि सामने वाला किस तरह के
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टॉपिक्स में इंटरेस्टेड है। अगर आप उनके
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पसंदीदा विषयों पर बात करोगे तो वे खुद ही
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बातचीत में शामिल हो जाएंगे। बातचीत में
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ह्यूमर का होना भी बहुत जरूरी है। हर
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इंसान को हंसना पसंद होता है और अगर आपकी
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बातों में हल्काफुल्का मजाक होगा तो लोग
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आपसे बात करना ज्यादा पसंद करेंगे। लेकिन
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इसका मतलब यह नहीं कि जबरदस्ती जोक मारने
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लगो। नेचुरल तरीके से जब कोई हल्कीफुल्की
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बात निकलती है तो उसे खुलकर कहो और माहौल
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को हल्का बनाओ। अगर आप किसी भी बातचीत को
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दिलचस्प बनाना चाहते हो तो खुद को अपडेट
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रखना जरूरी है। जब आप नए-नए टॉपिक्स के
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बारे में जानते हो तो आप किसी भी इंसान के
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साथ आसानी से बातचीत कर सकते हो। बातचीत
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को बोझिल बनाने के बजाय उसे एक मजेदार
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एक्सचेंज बनाओ जहां दोनों लोग बराबरी से
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भाग लें। जब आपकी बातें लोगों को अच्छी
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लगेंगी तो वे खुद ब खुद आपसे जुड़ जाएंगे।
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कनेक्शन आपकी बॉडी लैंग्वेज से होता है।
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जब भी हम किसी को पहली बार देखते हैं तो
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सबसे पहले उनकी बातों से पहले उनकी बॉडी
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लैंग्वेज नोटिस करते हैं। कोई इंसान चाहे
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जितना भी अच्छा बोल ले लेकिन अगर उसकी
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बॉडी लैंग्वेज कमजोर होगी तो उसका
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आत्मविश्वास कमजोर लगेगा। अगर आप चाहते हो
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कि लोग आपको ध्यान से सुने और आपकी बातों
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को सीरियसली लें तो आपकी बॉडी लैंग्वेज भी
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स्ट्रांग होनी चाहिए। जब भी किसी से बात
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करो तो सीधे खड़े रहो या बैठो। अगर आप
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झुके हुए हो तो सामने वाले को लगेगा कि आप
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खुद अपनी बात को लेकर कॉन्फिडेंट नहीं हो।
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आपकी आंखों का कांटेक्ट बहुत जरूरी होता
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है। अगर आप किसी से बात करते समय उनकी
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आंखों में देखोगे तो सामने वाला आपकी
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बातों को ज्यादा गंभीरता से लेगा। वहीं
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अगर आपकी नजरें बार-बार इधर-उधर भाग रही
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हैं तो सामने वाले को लगेगा कि आप खुद भी
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अपनी बातों को लेकर शोर नहीं हो। आपकी
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हाथों की मूवमेंट भी बहुत मायने रखती है।
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जब भी आप बात कर रहे हो तो अपने हाथों का
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नेचुरल तरीके से इस्तेमाल करो। अगर आप
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एकदम स्थिर खड़े रहोगे या अपने हाथों को
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छुपा लोगे तो आपकी बातचीत में वह जोश नहीं
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दिखेगा। लेकिन अगर आप हाथों का सही तरीके
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से इस्तेमाल करोगे तो आपकी बात ज्यादा
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प्रभावी लगेगी। सबसे जरूरी बात यह है कि
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आप खुद को रिलैक्स रखो। अगर आपकी बॉडी
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बहुत टाइट और नर्वस लगेगी तो आपकी बातें
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भी उतनी प्रभावी नहीं लगेंगी। हल्की
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मुस्कान रखो और अपनी बॉडी को नेचुरल तरीके
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से मूव करने दो। जब आपकी बॉडी लैंग्वेज
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आत्मविश्वास से भरी होगी तो आपकी बातें भी
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ज्यादा असरदार लगेंगी। इसीलिए सिर्फ बोलने
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पर ही नहीं बल्कि अपनी पूरी प्रेजेंस पर
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ध्यान दो। क्योंकि आपकी बॉडी लैंग्वेज
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आपके शब्दों से ज्यादा जोर से बोलती है।
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चैप्टर 15 हर किसी को प्रभावित करने की
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कोशिश मत करो। अक्सर लोग बोलने से पहले
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यही सोचते हैं कि सामने वाला क्या सोचेगा?
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लोग मुझे कैसे जज करेंगे। मेरी बातों से
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कोई नाराज तो नहीं होगा। लेकिन अगर आप हर
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किसी को खुश करने की कोशिश करोगे तो आप
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कभी अपने मन की बात कह ही नहीं पाओगे।
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दुनिया में हर इंसान की सोच अलग होती है
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और यह जरूरी नहीं कि हर कोई आपकी बातों से
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सहमत हो। अगर आप हमेशा इस डर में रहोगे कि
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लोग क्या सोचेंगे तो आप कभी भी
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आत्मविश्वास के साथ नहीं बोल पाओगे। जब भी
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आप किसी से बात करो तो अपने विचारों को
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पूरी ईमानदारी और मजबूती से रखो। इसका
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मतलब यह नहीं कि आप दूसरों की भावनाओं की
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परवाह ना करो। लेकिन हर वक्त सिर्फ दूसरों
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को खुश करने के लिए अपनी बात ना बदलो।
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अपने विचारों में मजबूती रखने का सबसे
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अच्छा तरीका यह है कि आप खुद को अच्छी तरह
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समझो। जब आपको खुद पता होगा कि आप क्या
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सोचते हो और क्यों सोचते हो तो आप बिना
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झिझक अपनी बात कह पाओगे। बहुत से लोग
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इसलिए कॉन्फिडेंट नहीं होते क्योंकि वे
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खुद ही अपनी बातों को लेकर श्योर नहीं
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होते। इसीलिए अपनी सोच को क्लियर करो और
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फिर बिना किसी डर के उसे सामने रखो। जब आप
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अपनी बातों में ईमानदारी रखोगे और खुद पर
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भरोसा करोगे तो लोग खुद ब खुद रिस्पेक्ट
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देने लगते हैं। इसीलिए अपनी बातों पर
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भरोसा रखो और अपनी सोच को बिना डर के
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दुनिया के सामने रखो। कंक्लूजन अब तक के
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इस सफर में हमने जाना कि कैसे सही तरीके
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से बोलना, ध्यान से सुनना, बातचीत को
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दिलचस्प बनाना, अपनी गलतियों से सीखना और
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आत्मविश्वास से अपनी बात रखना हमारी
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जिंदगी को पूरी तरह बदल सकता है। यह सिर्फ
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कम्युनिकेशन स्किल्स की बात नहीं है।
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बल्कि यह हमारी पर्सनालिटी, हमारे
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रिलेशनशिप्स और करियर ग्रोथ का भी सबसे
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बड़ा आधार है। अगर आप सोच रहे हो कि क्या
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यह सब बदलाव आप अपनी जिंदगी में ला सकते
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हो, तो जवाब है बिल्कुल। हर बड़ा वक्ता
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कभी ना कभी झिझकता था। हर कॉन्फिडेंट
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इंसान ने कहीं ना कहीं डर महसूस किया था।
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लेकिन उन्होंने उस डर को तोड़ा। अपनी
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गलतियों से सीखा और खुद पर भरोसा किया।
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यही सफर अब आपका भी है। आज से अभी से अपने
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कम्युनिकेशन पर काम करना शुरू करो। अगर
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आपको इस ऑडियो बुक ने मदद की तो इसे अपने
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दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करना ना
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भूलें और हां चैनल को सब्सक्राइब जरूर
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करें ताकि आगे भी ऐसी ही लाइफ चेंजिंग
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बातें आप तक पहुंचती रहे। आपकी आवाज मायने
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रखती है उसे दुनिया तक पहुंचाइए।
