↔
Title: Does God Exist? Javed Akhtar और Mufti Shamail Nadwi के बीच LIVE बहस | Saurabh Dwivedi
Duration: 01:54:41
Total Correct Answers:
Current Caption
Correct
Learning Modes
YouTube Video Transcript Hide
Ask AI:
Export as:
Ask AI Result
The ask AI result will appear here..
(00:00:00) Your YouTube transcript will appear here
(00:00:00)
कॉन्सिट्यूशन क्लब में हो रही इस बेहद
(00:00:03)
जरूरी बहस में डिबेट में आप सभी का
(00:00:06)
बहुत-बहुत स्वागत है। मेरा नाम सौरभ
(00:00:08)
द्विवेदी है। मैं इंडिया टुडे हिंदी
(00:00:10)
मैगजीन का और ललन टॉप का संपादक हूं और आज
(00:00:13)
की इस बहस का मॉडरेटर भी।
(00:00:16)
इससे पहले कि यह बहस जिसका शीर्षक जिसका
(00:00:20)
टॉपिक है डस गॉड एकिस्ट?
(00:00:22)
यह शुरू हो दो विद्वानों के बीच जिनके नाम
(00:00:26)
हैं श्री जावेद अख्तर और श्री मुफ्ती
(00:00:30)
शमाइल नदवी जी। मैं कुछ बुनियादी चीजें आप
(00:00:34)
लोगों को बता दूं ताकि यह बहस व्यवस्थित
(00:00:36)
ढंग से चले। वैसे नहीं जैसी बहसों को
(00:00:39)
देखने के हम इन दिनों आदि हो गए हैं। पढ़ी
(00:00:42)
लिखी अकादमिक बहस।
(00:00:45)
इस बहस का प्रारूप कैसा होगा? इसका
(00:00:47)
स्ट्रक्चर कैसा होगा? पहले मैं आपको यह
(00:00:49)
बता देता हूं।
(00:00:51)
सबसे पहले
(00:00:53)
नौजवान
(00:00:55)
विद्वान मुफ्ती शमाइल नदवी जी 10 मिनट
(00:00:58)
अपनी दलीलें आप लोगों के सामने रखेंगे।
(00:01:02)
उसके बाद जावेद अख्तर साहब 10 मिनट अपनी
(00:01:06)
बात रखेंगे। उसके बाद जिसको हम अंग्रेजी
(00:01:09)
में रिबटल कहते हैं। एक जवाबी दौर रहेगा
(00:01:11)
कि आपने जो कहा मैं उससे मुतमई हूं कि
(00:01:13)
नहीं हूं और हमने जो कहा। इसके बाद बहस का
(00:01:17)
राउंड टू शुरू होगा। दोनों विद्वानों को
(00:01:19)
फिर से सात-सात मिनट का वक्त मिलेगा और
(00:01:22)
इसके बाद रिबर्टल राउंड टू होगा 5-5 मिनट
(00:01:25)
का।
(00:01:27)
इसके बाद एक दूसरे से सवाल जवाब होंगे।
(00:01:30)
इसके लिए हमने लगभग 16 मिनट का वक्त तय
(00:01:33)
किया है। अब ये सवालों की प्रकृति पर
(00:01:35)
निर्भर करता है कि कितने सवाल होंगे।
(00:01:37)
इसीलिए हमने वक्त की पाबंदी रखी है और
(00:01:41)
इसके बाद आखिरी में 5-प मिनट का वक्त
(00:01:44)
दोनों विद्वानों को एक बार फिर से दिया
(00:01:46)
जाएगा अपने क्लोजिंग आर्गुमेंट के लिए और
(00:01:49)
उसके बाद जो इस बहस के लिए सबसे जरूरी चीज
(00:01:53)
है कि आप और हम और इंटरनेट पर देख रहे
(00:01:56)
लाखों करोड़ों लोग उनके सवाल जवाब होंगे।
(00:01:59)
तो आप लोग जो यहां मौजूद हैं आपके हम कुछ
(00:02:02)
सवाल लेने की कोशिश करेंगे। 30 मिनट का
(00:02:04)
वक्त हमने उसके लिए तय कर रखा है। इस तरह
(00:02:07)
से यह 2 घंटे की बहस पूरी होगी। दो तीन
(00:02:11)
बुनियादी बातें हैं जिनका हमें ध्यान रखना
(00:02:13)
है। किसी भी किस्म की नारेबाजी में हमें
(00:02:17)
शरीक नहीं होना है। यह हल्लागुल्ला नहीं
(00:02:19)
है क्योंकि पूरी दुनिया देख रही है तो एक
(00:02:21)
नजीर कायम करनी है। एक उदाहरण लोगों के
(00:02:23)
सामने रखना है कि पढ़े लिखे लोग इत्तेफाकी
(00:02:27)
और नाइत्तेफाकी रखते हुए भी एक दूसरे से
(00:02:29)
सहमति और असहमति रखते हुए भी बात कह सकते
(00:02:32)
हैं। यहां पर मेरे जेएनयू के प्रोफेसर
(00:02:34)
बैठे हैं पुरुषोत्तम अग्रवाल जी जिन्होंने
(00:02:36)
हमें क्लास में सिखाया है कि सहमति का
(00:02:40)
साहस और असहमति का विवेक और इसका ठीक उलट
(00:02:44)
भी यह बड़ा जरूरी है।
(00:02:47)
दूसरी बात यह किसी एक धर्म के बारे में
(00:02:52)
बहस नहीं है। यह बात सबको स्पष्ट होनी
(00:02:54)
चाहिए। किसी धर्म को महान बताने या किसी
(00:02:58)
धर्म को कमतर बताने की यह बहस नहीं है। तो
(00:03:01)
यदि कोई इस उम्मीद से देख रहा है या यहां
(00:03:03)
आया है तो मैं आपको आश्वस्त करना चाहता
(00:03:06)
हूं कि आपको ना उम्मीद ही हाथ लगेगी।
(00:03:09)
इस बहस में बहुत ज्यादा धार्मिक प्रतीकों
(00:03:12)
के इस्तेमाल को लेकर भी यह दोनों लोग जो
(00:03:14)
अभी आपको गंभीर दिख रहे हैं। भले लोग हैं।
(00:03:17)
कल शाम को चाय पर मिले थे। बहुत हंसीज़ाक
(00:03:21)
भी इनके बीच हुआ था और गलवया डालते हुए एक
(00:03:24)
तस्वीर भी हुई थी। यह इस बात का प्रमाण है
(00:03:28)
कि इंटरनेट पर जो हल्ला मचा हुआ है उसके
(00:03:31)
मुकाबले ये दोनों लोग बहुत ही अच्छे शांत
(00:03:35)
ढंग से बहस के लिए राजी हो गए हैं।
(00:03:37)
Twitter की बातें Twitter तक सीमित एलन
(00:03:39)
मस्क आजकल उसको एक्स कहते हैं।
(00:03:43)
और अब इस बहस की शुरुआत मैं इन विद्वानों
(00:03:47)
का हालांकि इनको परिचय की जरूरत नहीं है
(00:03:49)
पर हो सकता है। हमें पत्रकारिता में
(00:03:51)
सिखाया जाता है कि नेवर अस्यूम विज्ञान भी
(00:03:54)
यही कहता है। मुफ्ती शमाल नदवी साहब
(00:03:57)
इस्लामिक विद्वान शिक्षाविद हैं। कोलकाता
(00:03:59)
के वाहन फाउंडेशन के संस्थापक हैं। लखनऊ
(00:04:02)
की प्रतिष्ठित दारुल उलूम नदतुल उलमा से
(00:04:05)
ग्रेजुएशन किया है। सोशल मीडिया और
(00:04:07)
सार्वजनिक मंचों पर अध्यापन और बौद्धिक
(00:04:09)
कामों में सक्रिय हैं। और इस समय
(00:04:11)
इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी मलेशिया
(00:04:13)
से पीएचडी कर रहे हैं। अच्छी बात यह है कि
(00:04:16)
पढ़ाई के साथ-साथ ट्रेवल ब्लॉग भी बनाते
(00:04:18)
हैं। पेट्रोनस टावर के सामने का ब्लॉग
(00:04:20)
हमने देखा।
(00:04:22)
हमारे साथ जावेद अख्तर साहब हैं। जावेद
(00:04:25)
अख्तर साहब कवि हैं, शायर हैं। गद्य भी
(00:04:30)
लिखते हैं। फिल्मों के लिए संवाद लिखे
(00:04:33)
हैं। गीत लिखे हैं। इससे इत
(00:04:37)
वैज्ञानिक सोच को लेकर या अपने डिक्लेयर्ड
(00:04:41)
एथिज्म को लेकर भी मुखरित रहते हैं और
(00:04:44)
अपने त रैशनलिटी की बात करते हैं। देवियों
(00:04:47)
और सज्जनों डस गॉड एकिस्ट? इस सवाल का
(00:04:51)
जवाब सब अपने-अपने त खोजने की कोशिश कर
(00:04:53)
रहे हैं। कोई इसको गॉड डम पार्टिकल की खोज
(00:04:56)
बताता है। कोई गॉड पार्टिकल की खोज बताता
(00:04:59)
है। कोई हिक्स बोसान की खोज बताता है। कोई
(00:05:01)
यह सवाल जवाब तलाशने की कोशिश करता है कि
(00:05:04)
मास एग्जिस्टेंस में आखिर आया कैसे? हुआ
(00:05:07)
क्या था? सृष्टि के पहले समय के पहले क्या
(00:05:10)
था? और कोई ये कहता है कि ये सारी खोजें
(00:05:13)
जिस मस्तिष्क में हो रही हैं, प्रकृति के
(00:05:15)
क्रम में वो कैसे विकसित हुआ? मैं उम्मीद
(00:05:18)
करता हूं कि हम आज इन बुनियादी सवालों के
(00:05:22)
कुछ जवाब हासिल करने में कामयाब हो। मैं
(00:05:24)
सबसे पहले मंच पर आमंत्रित कर रहा हूं
(00:05:27)
मुफ्ती शमाल नदवी साहब को। आइए सर। जी
(00:05:33)
[प्रशंसा]
(00:05:43)
एक आपकी गुजारिश बोलना शुरू करें। आप लोग
(00:05:46)
प्लीज अपने फोन लाइट मोड पे या साइलेंट
(00:05:48)
मोड पे रखें। एक बार चेक कर ले कई बार
(00:05:50)
बेहदानी हो जाती है।
(00:06:01)
तमाम तारीफें उस क्रिएटर के लिए जिसने इस
(00:06:04)
यूनिवर्स को एक मकसद के तहत पैदा किया है।
(00:06:07)
रिस्पेक्टेड जनाब जावेद अख्तर साहब,
(00:06:10)
मिस्टर सौरभ द्विवेदी और रिस्पेक्टेड
(00:06:12)
ऑडियंस थैंक यू ऑल फॉर बीइंग हियर टुडे।
(00:06:16)
आज की डिबेट में क्योंकि हम बात करने वाले
(00:06:19)
हैं डस गॉड एक्सिस्ट के टॉपिक पर तो यह एक
(00:06:22)
ऐसा टॉपिक है जिसके मुतालिक कोई भी डिसीजन
(00:06:26)
लेने के लिए अलग-अलग स्टैंडर्ड्स हो सकते
(00:06:28)
हैं। लिहाजा डिबेट के शुरू में ये जरूरी
(00:06:31)
है कि हम ये जान लें कि आज के इस टॉपिक
(00:06:35)
में कौन सा स्टैंडर्ड सही होगा और कौन सा
(00:06:38)
गलत होगा। सबसे पहला स्टैंडर्ड जिसे मैं
(00:06:42)
समझता हूं कि हमारे रिस्पेक्टेड जनाब
(00:06:44)
जावेद अख्तर साहब बड़ी तेजी के साथ उसकी
(00:06:47)
तरफ लपकेंगे वो है साइंस। जबकि साइंस दर
(00:06:52)
हकीकत खुदा के एग्जिस्टेंस को डायरेक्टली
(00:06:55)
साबित करने या उसके एकिस्टेंस को डिनाई
(00:06:58)
करने के लिए स्टैंडर्ड नहीं बन सकती। और
(00:07:01)
उसकी वजह क्या है? ये मैं नहीं कह रहा। यह
(00:07:05)
वो लोग कह रहे हैं जो साइंस के एक्सपर्ट्स
(00:07:07)
हैं। नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस कहती है साइंस
(00:07:13)
डजंट हैव द प्रोसेससेस टू प्रूव और
(00:07:17)
डिस्रूव द एकिस्टेंस ऑफ़ गॉड। व्हाई?
(00:07:20)
क्योंकि साइंस का ताल्लुक एंपेरिकल
(00:07:22)
एविडेंस से है और एंपेरिकल एविडेंसेस का
(00:07:25)
ताल्लुक हमारे नेचुरल और फिजिकल वर्ल्ड से
(00:07:27)
है। जबकि गॉड नॉन फिजिकल और सुपर नेचुरल
(00:07:32)
रियलिटी है। लिहाजा नॉन फिजिकल रियलिटी को
(00:07:35)
आप उस टूल के साथ नहीं चेक कर सकते जिसका
(00:07:38)
काम फिजिकल रियलिटी को तलाश करना है।
(00:07:41)
लिहाज़ा, आज इस डिबेट में गॉड की
(00:07:45)
एक्जिस्टेंस को साबित करने या उसे डिनाई
(00:07:48)
करने में साइंटिफिक एविडेंस को एक्सेप्ट
(00:07:51)
नहीं किया जाएगा। दूसरा स्टैंडर्ड हो सकता
(00:07:55)
है रेवेलेशन। कि रेवेलेशन के जरिए हम ये
(00:07:58)
साबित करें कि गॉड एग्ज़िस्ट करता है या
(00:08:01)
नहीं। लेकिन ये स्टैंडर्ड भी आज
(00:08:03)
इररेिलेवेंट है। क्यों? क्योंकि रेवोलेशन
(00:08:06)
मेरे नजदीक सोर्स ऑफ नॉलेज है। वैलिड
(00:08:09)
सोर्स ऑफ नॉलेज है। लेकिन हमारे जावेद
(00:08:12)
अख्तर साहब के नजदीक ये वैलिड सोर्स ऑफ
(00:08:14)
नॉलेज नहीं है। लिहाजा आज की डिबेट में
(00:08:16)
मैं एक भी एविडेंस किसी भी मजहबी
(00:08:19)
स्क्रिप्चर से नहीं दूंगा। ताकि जावेद
(00:08:22)
अख्तर साहब के लिए वो अनएक्सेप्टेबल ना
(00:08:24)
हो। तीसरा जो मेरार हो सकता है वो है
(00:08:29)
ऑब्ज़रवेशन। के भाई कोई कहे कि हमें खुदा
(00:08:32)
दिखाओ। अगर है तो दिखाओ। या ये कि खुदा के
(00:08:35)
एकिस्टेंस पर एंपेरिकल एविडेंस दो। तो ये
(00:08:37)
है दर हकीकत गलत टूल का इस्तेमाल करना। ये
(00:08:40)
ऐसा ही है कि जावेद साहब मुझसे ये मुतालबा
(00:08:43)
करें कि मुफ्ती साहब आप मेटल डिटक्टर के
(00:08:45)
जरिए प्लास्टिक डिटेक्ट करके दिखाएं। अबकि
(00:08:48)
प्लास्टिक डिटेक्ट नहीं हो पा रही है।
(00:08:50)
लिहाजा प्लास्टिक डज़ नॉट एक्सिस्ट। नो यू
(00:08:52)
आर यूजिंग द रोंग टूल। इस टूल से
(00:08:55)
प्लास्टिक को डिटेक्ट नहीं किया जाता।
(00:08:57)
लिहाजा
(00:08:59)
मैं समझता हूं कि गॉड के एकिस्टेंस पर
(00:09:01)
एंपेरिकल एविडेंस का मुतालबा करना एक
(00:09:04)
बचकाना मुतालबा है और हमारे रिस्पेक्टेड
(00:09:06)
जनाब जावेद अख्तर साहब इस स्टेज से अब
(00:09:09)
बहुत आगे निकल चुके हैं। अब बचता है एक ही
(00:09:12)
स्टैंडर्ड। और वो स्टैंडर्ड है अकल। लॉजिक
(00:09:18)
रीजनिंग। और यही वो स्टैंडर्ड है जिसके
(00:09:21)
तहत गॉड के एग्जिस्टेंस को साबित किया
(00:09:24)
जाएगा या गॉड की एकिस्टेंस को डिनाई किया
(00:09:26)
जाएगा। लेकिन क्योंकि ये बहुत इंपॉर्टेंट
(00:09:30)
और सेंसिटिव टॉपिक है। इसलिए लॉजिकल
(00:09:33)
आर्गुमेंट भी ऐसा होना चाहिए जो डेफिनेटिव
(00:09:36)
हो। इनडेफिनेटिव ना हो जो दो और दो चार की
(00:09:39)
तरह बिल्कुल वाज़ हो। जिसे लॉजिकली रिजेक्ट
(00:09:42)
करना पॉसिबल नहीं हो। फॉर एग्जांपल हम
(00:09:44)
कहें हमारे रिस्पेक्टेड मिस्टर सौरभ साहब
(00:09:47)
ये एक इंसान है और तमाम इंसान कॉन्शियस
(00:09:52)
बीइंग है लिहाजा नतीजा क्या निकला हमारे
(00:09:54)
सौरभ साहब भी कॉन्शियस बीइंग है क्या ये
(00:09:57)
इनडेफिनेट आर्गुमेंट है या डेफिनेट
(00:09:59)
आर्गुमेंट है ये डेफिनेट आर्गुमेंट है ये
(00:10:01)
दो और दो की तरह वाज़ है इसमें किसी तरह जो
(00:10:04)
है लॉजिकली इसको रिजेक्ट नहीं किया जा
(00:10:06)
सकता तो अगर आज हमारे जावेद अख्तर साहब
(00:10:10)
ऐसी कोई अकली दलील और लॉजिकल एविडेंस दें
(00:10:14)
खुदा के ना होने पर जो डेफिनेट भी हो तो
(00:10:17)
मैं यह ऐलान करता हूं कि यकीनन मैं उस
(00:10:20)
एविडेंस को कबूल करूंगा और उस पर गौर
(00:10:22)
करूंगा। लेकिन साथ में यह भी ऐलान कर देता
(00:10:25)
हूं प्रेडिक्शन के तौर पर कि ऐसा कोई
(00:10:27)
डेफिनेट आर्गुमेंट कोई नहीं पेश कर सकता।
(00:10:30)
दलील हम देंगे और डेफिनेटिव दलील देंगे।
(00:10:35)
लॉजिकल दलील देंगे। ऐसी दलील देंगे जो
(00:10:39)
एंटायर एथिस्टिक वर्ल्ड उसे रेफ्यूट नहीं
(00:10:42)
कर सकती। चल अब हम एक एग्जांपल सोचते हैं।
(00:10:46)
एक सिनेरियो सिंपल सिनेरियो तमाम ऑडियंस
(00:10:48)
से गुजारिश है। हम और आप एक आइसोलेटेड
(00:10:51)
आइलैंड पर हैं। ऐसा आइलैंड जहां पे हमसे
(00:10:54)
पहले कोई कभी नहीं गया। चलते-चलते आपके
(00:10:57)
सामने अचानक आपने देखा एक पिंक कलर की बॉल
(00:10:59)
पड़ी हुई है। सबसे पहला सवाल आपके ज़हन में
(00:11:02)
क्या आएगा? कि ये बॉल यहां क्यों आई? कैसे
(00:11:05)
आई? ये पिंक कलर की ही क्यों है? कोई और
(00:11:08)
कलर भी हो सकता था। ये इसी शेप में क्यों
(00:11:10)
है? कोई और शेप भी हो सकता था। नेचुरली आप
(00:11:13)
इस तरफ पहुंचेंगे कि कोई ना कोई है जिसने
(00:11:17)
इन स्पेसिफिक प्रॉपर्टीज के साथ इस बॉल को
(00:11:20)
बनाया है और यहां पे रखा है। चकि आप जानते
(00:11:23)
हैं कि ये जो बॉल है इसका एग्ज़िस्ट करना
(00:11:26)
जरूरी नहीं है। ये एग्ज़िस्ट कर भी सकती थी
(00:11:29)
नहीं भी कर सकती थी। और एग्ज़िस्ट करना ही
(00:11:31)
था तो किसी और फॉर्म में करती। किसी और
(00:11:33)
कलर में करती। अब आप इस बॉल को एक्सपेंड
(00:11:36)
करते चले जाएं, एक्सपैंड करते चले जाएं,
(00:11:38)
एक्सपैंड करते चले जाएं। यहां तक कि ये
(00:11:40)
बॉल यूनिवर्स के साइज की हो जाए। बताइए कि
(00:11:42)
क्या साइज साइज के बढ़ जाने से सवाल बदल
(00:11:45)
जाएगा? हरगिज़ नहीं बदलेगा। अभी भी सवाल
(00:11:47)
रहेगा। ये यूनिवर्स कहां से आया? इन
(00:11:50)
स्पेसिफिक प्रॉपर्टीज के साथ कहां से आया?
(00:11:53)
क्यों आया? किसने बनाया? ये सवाल उस वक्त
(00:11:56)
भी वैलिड रहेगा।
(00:11:58)
लेकिन यह सवाल अगर हम जनाब जावेद अख्तर
(00:12:01)
साहब से करें तो क्योंकि इनका वर्ल्ड व्यू
(00:12:04)
एथिस्टिक है और सिर्फ इनका नहीं मतलब
(00:12:05)
जितने भी एथिस्ट हैं और एथिस्टिक वर्ल्ड
(00:12:07)
व्यू को रखने वाले से अगर आप ये सवाल करें
(00:12:11)
कि ये यूनिवर्स कहां से आया तो इनका जवाब
(00:12:14)
या तो आर्गुमेंट फ्रॉम इग्नोरेंस होगा या
(00:12:17)
डॉग्मैटिक होगा। या तो ये कहेंगे कि मुझे
(00:12:21)
नहीं पता कि ये कहां से आया। लिहाजा गॉड
(00:12:24)
डज नॉट एक्सिस्ट। ये आर्गुमेंट फ्रॉम
(00:12:26)
इग्नोरेंस है। या ये कहेंगे कि ये
(00:12:30)
यूनिवर्स खुद ब खुद बन गया। इसका मतलब ये
(00:12:32)
है कि उस बॉल को भी खुद ब खुद बन जाना
(00:12:34)
चाहिए। लेकिन बॉल के ताल्लुक से ये
(00:12:36)
एक्सप्लेनेशन एक्सेप्ट नहीं की जाएगी कि
(00:12:38)
ये खुद ब खुद बन गई। लेकिन यूनिवर्स के
(00:12:40)
ताल्लुक से कर दिया जाएगा। इसे हम दूसरे
(00:12:42)
अल्फाज़ में डॉगमा भी कह सकते हैं। दूसरी
(00:12:46)
चीज हमारे जावेद अख्तर साहब जरूर गॉड ऑफ
(00:12:49)
गैप्स की मिसाल भी जरूर देंगे। और मिसाल
(00:12:52)
देंगे कि पहले जमाने में बिजलियां कड़कती
(00:12:54)
थी तो लोगों ने किसी एक खुदा की तरफ और
(00:12:56)
बारिश होती थी तो दूसरे खुदा की तरफ मंसूब
(00:12:58)
कर दिया। उनके पास दलील नहीं थी। ये हमारा
(00:13:00)
वर्ल्ड व्यू है ही नहीं। ये हमारा वर्ल्ड
(00:13:02)
व्यू है ही नहीं। क्योंकि नेचुरल फेनोमिना
(00:13:05)
के प्रोसेस की इंटरप्रिटेशन को जान लेने
(00:13:08)
से ये कहां से साबित हो गया कि गॉड
(00:13:09)
एक्सिस्ट नहीं करता है। इस पर मैं
(00:13:11)
इंशाल्लाह अभी आगे बात करूंगा। आप हजरात
(00:13:14)
ये भी देखेंगे और मैं ये एक्सपेक्ट करता
(00:13:17)
हूं कि हमारे रिस्पेक्टेड जनाब जावेद
(00:13:19)
अख्तर साहब जरूर इमोशनल आर्गुमेंट्स भी
(00:13:21)
देंगे जो कि एक लॉजिकल फैलेसी है जब बात
(00:13:24)
आती है ट्रुथ को डिसाइड करने में। क्यों?
(00:13:27)
मिसाल के तौर पर वो कहेंगे कि अगर गॉड है
(00:13:30)
तो इविल क्यों एक्सिस्ट करता है? जबकि मैं
(00:13:32)
कहता हूं इविल का एक्जिस्ट करना गॉड के
(00:13:35)
एग्जिस्ट एग्जिस्ट करने की दलील है उसके
(00:13:37)
खिलाफ नहीं है। चूंकि अगर गॉड है तो हम सब
(00:13:40)
उसके सामने अकाउंटेबल हैं और अगर हम
(00:13:42)
अकाउंटेबल हैं तो अकाउंटेबिलिटी के लिए
(00:13:44)
इविल का मौजूद होना जरूरी है। उसके बगैर
(00:13:46)
हम अकाउंटेबल नहीं हो सकते। और अगर हम
(00:13:48)
अकाउंटेबल नहीं हैं तो हम जनाब जावेद
(00:13:50)
अख्तर साहब से पूछेंगे कि आप बताएं कि फिर
(00:13:53)
सफरिंग इस दुनिया में क्यों है? अगर खुदा
(00:13:56)
नहीं है तो सफरिंग क्यों है? और उन लोगों
(00:13:59)
के जज्बे का क्या जिनके अंदर सफरिंग के के
(00:14:01)
बाद इंतकाम लेने का जज्बा पाया जाता है और
(00:14:04)
वो इस दुनिया से ऐसे ही चले गए। क्या उनकी
(00:14:06)
सारी तकलीफें बेकार चली जाएंगी? अब आ जाएं
(00:14:08)
उसी एग्जांपल की तरफ कि बॉल मुझसे अगर कोई
(00:14:11)
पूछे इस बॉल को किसने बनाया और या इस
(00:14:13)
एक्सपेंडेड बॉल को किसने बनाया? मैं
(00:14:15)
कहूंगा कि चूंकि ये यूनिवर्स और इस
(00:14:18)
यूनिवर्स की तमाम चीजें कंटिंजेंट हैं।
(00:14:20)
कॉन्टिंजेंट होने का मतलब ये होता है कि
(00:14:22)
जो अपने एक्सिस्टेंस पे किसी के ऊपर
(00:14:24)
डिपेंड करती हो। तो जाहिर है ये यूनिवर्स
(00:14:28)
कॉनंटिंजेंट है। और अगर कोई चीज
(00:14:30)
कॉनंटिंजेंट नहीं है तो मैं रिक्वेस्ट
(00:14:32)
करूंगा कि मुझे दिखा दें कि कौन सी चीज
(00:14:33)
यूनिवर्स में कंटिंजेंट नहीं है। हम भी
(00:14:35)
जरा गौर कर लें और हम भी देख लें। और जब
(00:14:37)
कंटिंजेंट चीजें मौजूद हैं तो फिलॉसोफर्स
(00:14:41)
की इस्तिला के मुताबिक हम उस टर्मिनोलॉजी
(00:14:44)
के मुताबिक हम उस जगह तक पहुंचते हैं और
(00:14:46)
उस हस्ती तक पहुंचते हैं जिसे नेसेसरी
(00:14:49)
बीइंग कहा जाता है कि ये वो नेसेसरी बीइंग
(00:14:51)
है जिसका मौजूद ना होना नामुमकिन हो चूंकि
(00:14:54)
अगर ये मौजूद ना हो तो सारी चीजें
(00:14:56)
एकिस्टेंस में आएंगी ही नहीं और ये सारी
(00:14:58)
डिप ये कंटिंजेंट चीजें उसी के ऊपर डिपेंड
(00:15:00)
करती हैं। अब अगर आप ये सवाल करते हैं कि
(00:15:03)
फिर उस हस्ती को किसने बनाया? फिर उसका
(00:15:05)
कॉज क्या है? फिर उसका कॉज क्या है? फिर
(00:15:07)
उसका कॉज क्या है? और एंडलेसली चले जाएं।
(00:15:09)
इसे हम कहते हैं इनफिनिट रिग्रेस ऑफ़ कॉजेस
(00:15:12)
जो कि लॉजिकल फैलेसी है। कॉनसेप्चुअली
(00:15:15)
इंफिनिटी पॉसिबल है। मिसाल के तौर पे
(00:15:17)
न्यूमेरिकल्स वन टू थ्री गिनते चले जाएं।
(00:15:19)
इनफिनिट नंबर्स हैं। मैं कॉनसेप्चुअली बात
(00:15:21)
नहीं कर रहा। प्रैक्टिकली रियलिटी में
(00:15:23)
साबित करके दिखाएं कि इनफिनिट रिग्रेस ऑफ़
(00:15:25)
कॉजेस पॉसिबल है या नहीं। अगर पॉसिबल है
(00:15:28)
तो हम मान लेंगे। मिसाल दे दें और पॉसिबल
(00:15:30)
नहीं है तो एक ही ऑप्शन बचता है जिसे हम
(00:15:32)
कहते हैं नेसेसरी बीइंग। ऐसी नेसेसरी
(00:15:34)
बीइंग जो इंडिपेंडेंट है। चूंकि अगर वो
(00:15:37)
डिपेंडेंट हुई तो वो नेसेसरी नहीं रहेगी।
(00:15:39)
ऐसी इंडिपेंडेंट बीइंग जो इटरनल है। अगर
(00:15:41)
वो इटरनल नहीं होगी उसकी बिगिनिंग होगी तो
(00:15:43)
वो खुद कंटिंजेंट है। ऐसी बीइंग जो
(00:15:46)
पावरफुल है। क्योंकि कंटिंजेंट को
(00:15:48)
एक्चुअलाइज करने के लिए पावर चाहिए। ऐसी
(00:15:50)
बीइंग जो इंटेलिजेंट है और नॉलेजेबल है।
(00:15:53)
क्योंकि ये यूनिवर्स स्पेसिफिक फॉर्म और
(00:15:55)
स्पेसिफिक लॉज़ ऑफ नेचर के तहत प्रिसाइजली
(00:15:58)
चल रहा है। थैंक यू।
(00:16:00)
थैंक यू साहब। [प्रशंसा]
(00:16:03)
मैं इन दलीलों के बाद जावेद अख्तर साहब से
(00:16:07)
गुजारिश करूंगा। आप बैठ के बोलना चाहेंगे
(00:16:09)
या जी।
(00:16:15)
[प्रशंसा]
(00:16:20)
पहले तो मैं मुफ्ती साहब को एक अच्छी खबर
(00:16:23)
देना चाहूंगा कि मेरी नॉलेज साइंस के बारे
(00:16:25)
में बड़ी मामूली है। तो आप फिक्र ना करें
(00:16:28)
उसकी। लेकिन कुछ कॉमन सेंस है मुझ में।
(00:16:33)
देखिए ये खुदा का तसवुर कोई नया तसवुर
(00:16:36)
नहीं है। ये सदियों से रहा है। ये कुछ
(00:16:40)
रिलीजन 3000 साल पुराने होंगे। 4000 साल
(00:16:43)
पुराने होंगे। लेकिन इंसान कोई 10,000
(00:16:46)
12000 साल से एकिस्ट करता है होमोसेपियर
(00:16:50)
की शक्ल में और हमेशा कुछ ना कुछ मजहब
(00:16:53)
रहे।
(00:16:54)
ये मजहब जाहिलों के नहीं थे। ये मजहब एक
(00:16:59)
ऐसी ग्रीक सोसाइटी के थे जहां बड़े-बड़े
(00:17:02)
फिलॉसफर्स पैदा हुए। ये मजहब इजिपशियंस के
(00:17:06)
थे जिन्होंने पिरामिड्स बनाए थे। ये रोमंस
(00:17:10)
के थे कि जिनका आर्किटेक्चर और सेनेट यानी
(00:17:13)
पहली बुनियाद डेमोक्रेसी थी। लिमिटेड थी
(00:17:17)
मगर डेमोक्रेसी थी। ये उन लोगों ने किए
(00:17:20)
थे। तो इनका जो जुपिटर था रास
(00:17:25)
था उन्हें उस पर इतना ही एतमान था जितना
(00:17:28)
आज किसी मजहबी आदमी को अपने खुदा पे होगा।
(00:17:33)
क्रिश्चियनिटी आने से पहले यूरोप में एक
(00:17:36)
मजहब था जर्मेनिक रिलीजन। उसका एक खुदा
(00:17:40)
था। उसकी एक बीवी थी। उसके दो बेटे थे। एक
(00:17:44)
बेटी थी। कि जर्मनी में जब यूरोप में
(00:17:48)
क्रिश्चियनिटी आई तो वो खुदा उसकी बीवी और
(00:17:50)
पूरे खानदान चला गया। तो हमने अगर हम
(00:17:55)
हिस्ट्री देखें तो खुदा जो है वो ज्यादातर
(00:17:59)
फनी है। वो हमेशा रहे नहीं। और वो जो लोग
(00:18:04)
इन्हें मानते थे उनको आप कहे वो तो जाहिल
(00:18:07)
थे। उन्हें तो कुछ पता ही नहीं था। ऐसा
(00:18:08)
नहीं है। वो अपने वक्त में बड़े काबिल लोग
(00:18:12)
थे। और अपने वक्त में उन्होंने बड़े-बड़े
(00:18:14)
काम किए हैं। फिलॉसफर थे, साइंटिस्ट थे।
(00:18:18)
लेकिन उनका मजहब कहां गया? उनके खुदा कहां
(00:18:22)
गए? आज जो खुदा हैं दुनिया में लोग उन्हें
(00:18:25)
मानते हैं। आपको क्या मालूम कि कितने
(00:18:28)
बरसों के बाद क्या होने वाला है? हम यूरोप
(00:18:30)
में देखते हैं तो चर्च खाली है तो व के
(00:18:34)
साथ चीजें बदलती हैं। जहां तक इसका
(00:18:38)
ताल्लुक है मजहबों का
(00:18:41)
हर मजहब आपसे एक चीज मांगता है। फेथ
(00:18:46)
ये फेथ क्या चीज होती है?
(00:18:50)
व्हाट इज द डिफरेंस बिटवीन फेथ एंड बिलीफ?
(00:18:53)
ये कोई ये तो बहुत ही अहमखाना बात होगी कि
(00:18:55)
कोई आदमी कहे साहब अगर खुदा है तो मुझे
(00:18:57)
दिखाइए। ये तो जाहिला में बात हुई। मैंने
(00:19:01)
तो नॉर्थ पोल नहीं देखा है। मगर मैं मानता
(00:19:04)
हूं कि नॉर्थ पोल है। मैं क्यों मानता
(00:19:07)
हूं? इसलिए कि अगर ये दुनिया रहूंगे तो
(00:19:09)
उसका कोई टॉप होगा। कुछ लोग हैं जो वहां
(00:19:12)
गए भी हैं। कॉमन सेंस कहता है कि ऐसा
(00:19:15)
होगा। सबूत है, गवाह है, रीजन है। तो ये
(00:19:20)
मेरा फेथ नहीं है। तो फेथ में और बिलीफ
(00:19:24)
में डिफरेंस क्या है?
(00:19:26)
जो मजहब मांगता है आपसे हर मजहब फथ मांगता
(00:19:29)
है। फेथ का मतलब यह है कि ना कोई गवाह हो,
(00:19:33)
ना कोई सबूत हो, ना कोई रैशन हो, ना कोई
(00:19:37)
लॉजिक हो, ना कोई प्रूफ हो। मगर तुम एक
(00:19:40)
बात को मानो। ये है फेथ।
(00:19:44)
वरना बिलीफ होता। अगर इसमें कुछ भी सबूत
(00:19:46)
होते, गवाह होते तो फिर इसे आप बिलीफ
(00:19:49)
कहते। जैसे मेरा बिलीफ है कि नॉर्थ पोल
(00:19:52)
है। मेरा फेथ थोड़ी है।
(00:19:54)
फेथ इन तमाम शर्तों को रद्द करता है।
(00:20:00)
तो फिर स्टुपिडिटी क्या है?
(00:20:03)
अगर मैं एक बात ऐसी मानूं जिसकी ना कोई
(00:20:06)
लॉजिक है, ना कोई रैशन है, ना कोई प्रूफ
(00:20:09)
है, ना कोई गवाह है,
(00:20:13)
ना कोई सबूत है और मैं उसे मानूं। तो ये
(00:20:17)
सुपिडिटी हुई। इसे ही वही कल को मैं यकीन
(00:20:20)
कर लूं कि ईलॉन मस्क जो है मेरा भाई है तो
(00:20:23)
मुझे इंतहाई खुशी होगी सुकून भी बहुत
(00:20:25)
मिलेगा मुझे लेकिन और कहे भाई क्यों मानते
(00:20:29)
हो क्या सबूत है भाई वो तो अमेरिकन है और
(00:20:31)
तुम तो इंडियन हो वो तो नसला अलग है
(00:20:33)
तुम्हें कभी मिले भी नहीं साहब देखिए ये
(00:20:36)
मेरा फेथ है इस पे बात किया फेथ का मतलब
(00:20:40)
ही यह है कि आप प्रूव नहीं कर सकते अगर आप
(00:20:43)
प्रूव कर सकते हो तो फेथ की जरूरत ही नहीं
(00:20:46)
है फिर तो आप बात करेंगे। आप कितनी बहस कर
(00:20:49)
लीजिए। अल्टीमेटली दुनिया का हर मजहब फेथ
(00:20:52)
पे टिका है। और फेथ का मतलब है एक ऐसा
(00:20:55)
यकीन जिसका कोई सबूत, कोई गवाह, कोई रैशन
(00:20:58)
नहीं।
(00:21:02)
अब आप ये कहें कि आप ये क्यों कह रहे हैं
(00:21:05)
कि साहब ये कायनात किसने बनाई? कमाल ये है
(00:21:10)
कि आपने बताया कि एक आइलैंड पे गए और एक
(00:21:12)
बॉल देखी।
(00:21:14)
आपने यह नहीं कहा कि आइलैंड किसने बनाया?
(00:21:17)
आपको सिर्फ बॉल पर हैरत हुई।
(00:21:21)
हमने आइलैंड पे हमने हैरत नहीं की। होते
(00:21:23)
हैं आइलैंड। इसी तरह ये आइलैंड है। सितारे
(00:21:27)
ये गैलेक्सीस ये सब आइलैंड्स हैं। खलम है।
(00:21:31)
हम उन्हें टेकन फॉर ग्रांटेड लेते हैं। हम
(00:21:33)
पूछते नहीं किसने बनाए? आपने जजीरे के
(00:21:35)
बारे में नहीं पूछा। है?
(00:21:39)
मेरी पैदाइश कैसे हुई?
(00:21:42)
क्या मैं प्लंड पैदा हुआ था?
(00:21:45)
आई वास प्ल टू बी बोर्न
(00:21:48)
या एक लकी स्पम था जो किसी एक्स से चिपक
(00:21:51)
गया।
(00:21:53)
मेरी पैदाइश रैंडम है। रैंडम
(00:21:58)
और इंसाफ जिसे आप कहते हैं इंसाफ का तो
(00:22:02)
नेचर से कोई वास्ता ही नहीं है। जो आप
(00:22:04)
कहते हैं कि एक दिन इंसाफ मिलेगा। इंसाफ
(00:22:07)
इज अ ह्यूमन कांसेप्ट। नेचर में कोई इंसाफ
(00:22:10)
नहीं। अगर शेर हिरण को खा जाता है तो उसे
(00:22:14)
कोई सुविधा नहीं मिलती।
(00:22:17)
अगर एक आंधी आती है और हरेभरे पेड़ों को
(00:22:20)
उखाड़ के फेंक देती है तो आंधियों की जेल
(00:22:22)
नहीं होती है।
(00:22:24)
नेचर में इंसाफ नहीं है। इसलिए बोलते नेचर
(00:22:28)
को इंसाफ की जरूरत भी नहीं। नेचर तमाम एक
(00:22:31)
है। अब हम कहे कि साहब ये देखिए जो मैंने
(00:22:35)
खाना खाया था ये मेरी आंख तो ने यूं कर
(00:22:37)
दिया उसे तो इसे सजा मिलने नहीं वो सिस्टम
(00:22:40)
है ऐसे ही चल रहा है। नेचर बगैर इंसाफ के
(00:22:45)
है। इंसाफ इज अ ह्यूमन कासेप्ट। तो जो
(00:22:50)
आपसे कहता है कि मैं तुम्हें इंसाफ दूंगा
(00:22:52)
वो इंसानी ज़हन की पैदावार है। ये नेचुरल
(00:22:56)
है ही नहीं। ये आसमानी है ही नहीं। नेचर
(00:22:59)
का तसुर, इंसाफ का तसवुर। भाई आप साथ
(00:23:03)
मिलते हैं। अब आप लेफ्ट हैंड ड्राइव कर
(00:23:06)
ले। ये क्या है? तमाम सच, तमाम नेकी, तमाम
(00:23:11)
शराफत लेफ्ट हैंड ड्राइव है। वरना क्या
(00:23:15)
होगा? या तो आप कॉस कर देंगे आपका
(00:23:17)
एक्सीडेंट हो जाएगा या आप किसी को मार
(00:23:19)
देंगे या ट्रैफिक जाम हो जाएगा।
(00:23:22)
झूठ, बेईमानी, रिश्वतखोरी यह तमाम जो है
(00:23:25)
ड्राइविंग ओनर ऑन साइड है। इसके ऊपर कुछ
(00:23:28)
नहीं। यह तो हमने बनाया है। जैसे हमने
(00:23:32)
लेफ्ट हैंड ड्राइव बनाई है। ये कांसेप्ट
(00:23:34)
ऑफ इंसाफ जो है ये हमारा है। इसका नेचर से
(00:23:39)
कोई वास्ता नहीं। शेर खा जाता है हिरन को
(00:23:41)
उसे जेल होती है। क्या? कुछ भी। है ही
(00:23:44)
नहीं।
(00:23:46)
तो यह जो दुनिया के रिलीज प्रॉमिस करते
(00:23:50)
हैं आपसे इंसाफ इसी से मालूम होता है कि
(00:23:53)
यह मैनमेंट है। ये तसवुर कहीं और का है ही
(00:23:57)
नहीं। जो नेचर है कुछ लोग कहते हैं नेचर
(00:24:01)
ही खुदा है। तो नेचर में तो इंसाफ नहीं
(00:24:04)
कहीं।
(00:24:06)
और आप वादा कर रहे हैं कि तुम्हें मरने के
(00:24:08)
बाद इंसाफ मिलेगा।
(00:24:10)
मुझे अगर मिलेगा तो मैं बहुत खुश हूंगा।
(00:24:13)
लेकिन मैं यकीन नहीं कर पाता हूं। इसलिए
(00:24:16)
कि मैं फेथ नहीं पैदा कर सकता। द वेरी
(00:24:20)
फैक्ट दैट रिलीजंस डिमांड फेथ।
(00:24:25)
इसका मतलब है कि उनके पास जस्टिफिकेशन
(00:24:28)
नहीं है।
(00:24:31)
अच्छा था। फिर
(00:24:34)
रिलीजन अगर मॉडरेशन में है कोई सा भी वो
(00:24:38)
आप में कुछ खूबियां भी पैदा करता होगा।
(00:24:40)
देखिए उससे यह फायदा है, वो फायदा है।
(00:24:43)
अल्कोहल जो है
(00:24:46)
वो ज्यादातर दवाओं में यूज़ होती है। और एक
(00:24:50)
सर्वे किया गया था अमेरिका में कि
(00:24:52)
लोंगिटिविटी किन लोगों की है? तो एक तरफ
(00:24:55)
वो लोग थे जो शराब पीते ही नहीं थे और एक
(00:24:58)
तरफ वो थे जो एक बोतल शराब पीते थे। सबसे
(00:25:01)
ज्यादा लंबी उम्र उनकी है जो दो पैक नाप
(00:25:05)
के शराब पीते और खाना खाते।
(00:25:08)
मगर हम शराब को बुरा समझते हैं। मैं भी
(00:25:11)
बुरा समझता हूं। क्यों?
(00:25:14)
ऐसा होता नहीं। कुछ चीजों में आदत होती है
(00:25:17)
जो बरसी है। आज तक मैंने एक आदमी दूध पीता
(00:25:21)
है। आप 10 साल बाद भी मिलेंगे तो एक ही
(00:25:23)
गिलास पीता होगा। ऐसा नहीं होता सुबह से
(00:25:25)
दूध पीता रहता है।
(00:25:28)
मिल्कोहलिक मैंने नहीं देखे। अल्कोहलिक
(00:25:31)
होते हैं। यह टेंडेंसी है मजहब की कि वो
(00:25:36)
बढ़ता है। जैसे कैंसर बढ़ता है, जैसे शराब
(00:25:40)
बढ़ती है।
(00:25:42)
कुछ लोग होंगे जो उसे सही तरह से यूज़ करते
(00:25:45)
हैं। मुझे यकीन है कि हमारे मुफ़्ती साहब
(00:25:48)
भी उनमें से एक हैं। बहुत खुशी हुई मुझे
(00:25:50)
इनसे मिलके। लेकिन कितने लोग हैं कि आज आप
(00:25:53)
देखते हैं दुनिया में जो तबाहया है इनमें
(00:25:56)
कितना हाथ है उन लोगों का जो बिलीव कहते
(00:25:59)
मजहब ये नहीं कहता ना कहता होगा मगर जब ये
(00:26:02)
मजहब पीते हैं तो ऐसे बिहेव करते हैं
(00:26:06)
थोड़ा सा अगर हो तो शायद बहुत अच्छी बात
(00:26:08)
है लेकिन शराब थोड़ी सी नहीं रहती उसमें
(00:26:12)
टेंडेंसी है पहले थोड़ा सा अगर दो तीन
(00:26:15)
कैंसर के सेल हो ना बॉडी में तो आदमी सिम
(00:26:18)
रहेगा लेकिन वो दो तीन सेल नहीं रहते वो
(00:26:21)
मल्टीप्लाई होते हैं। जावेद साहब टाइम
(00:26:23)
पूरा हो गया।
(00:26:24)
टाइम हो गया। बस बात खत्म हो गई। अच्छा
(00:26:26)
मुझे कुछ और कहने को था भी नहीं।
(00:26:29)
[प्रशंसा]
(00:26:31)
जी मैं पहले जवाबी दौर के लिए इनवाइट कर
(00:26:35)
रहा हूं मुफ्ती साहब को। योर रिबटल राउंड
(00:26:37)
वन। यू हैव से मिनट्स।
(00:26:45)
थैंक यू वेरी मच जावेद साहब। आपकी बात को
(00:26:48)
सुनकर बड़े महजूस हुए हैं हम लोग। महसूस
(00:26:50)
डू यू अंडरस्टैंड वी एंजॉय ओके अब थोड़ा सा
(00:26:54)
लॉजिकली उसको हम लोग
(00:26:55)
दरअसल हम लोगों ने कल गुजारिश की थी
(00:26:57)
मुफ्ती साहब से भी जावेद साहब से भी कि
(00:26:58)
हिंदुस्तानी जबान आम फहम सबको समझ में आ
(00:27:01)
जाए और जहां कहीं आप मुश्किल शब्द
(00:27:03)
इस्तेमाल करें वहां बताते भी चलें थैंक यू
(00:27:07)
तो सबसे पहले हमारे रिस्पेक्टेड जावेद
(00:27:09)
साहब ने हवाला दिया कि खुदा फानी है कितने
(00:27:12)
मजहब आ गए चले गए किसी ने जुपिटर को खुदा
(00:27:14)
माना किसी ने किसी को माना मैं कहता हूं
(00:27:16)
जिसने कॉन्टिंजेंट चीज को खुदा माना गलत
(00:27:18)
माना वो खुदा है ही नहीं वो खुदा ही नहीं
(00:27:21)
है। [प्रशंसा]
(00:27:23)
हम तो नेसेसरी बीइंग को साबित करने बैठे
(00:27:25)
हैं। वो नेसेसरी कॉज जो इटरनल है जो जो
(00:27:29)
अबदी भी है और अजली भी है। हम किसी और को
(00:27:31)
साबित करने नहीं बैठे। दूसरी चीज उन्होंने
(00:27:33)
कहा के फेथ एंड बिलीफ ये एक
(00:27:39)
ऐसी डेफिनेशन है फेथ की जो इन्होंने पहली
(00:27:42)
मर्तबा पेश की है या माफ़ कीजिएगा इन्होंने
(00:27:45)
पहली मर्तबा पेश नहीं की है। रिचर्ड
(00:27:46)
डॉकिंस ने पहली मर्तबा पेश की है। मुझे
(00:27:48)
मालूम है ये सोर्स कहां से है।
(00:27:50)
एपिस्टेमोलॉजिकली
(00:27:52)
फेथ और बिलीफ का फर्क आप इस तरह नहीं कर
(00:27:54)
सकते सर। फेथ सही भी होता है, गलत भी होता
(00:27:58)
है। बिलीफ सही भी होता है, गलत भी होता
(00:28:00)
है। जो लॉजिक रीजन और एविडेंस से बैक्ट
(00:28:04)
होगा वो फेथ सही होगा। और आप जिस फेथ की
(00:28:07)
बात कर रहे हैं कि इलॉजिकल है और उसके
(00:28:09)
पीछे नहीं है तो वी आर ऑन द सेम पेज। हम
(00:28:12)
नहीं मानते उस फेथ को। जो फेथ ऐसा हो
(00:28:15)
जिसके पीछे कोई लॉजिक ना हो। एविडेंस ना
(00:28:17)
हो। हम नहीं मानते। हम तो उस फेथ के कायल
(00:28:19)
हैं जिसके पीछे लॉजिक हो और एविडेंस हो।
(00:28:21)
तो बिलीफ सही भी होता है, गलत भी होता है,
(00:28:23)
फेथ भी सही होता है और गलत भी होता है। तो
(00:28:25)
आज फेथ और बिलीफ के डिफरेंस पे बात नहीं
(00:28:28)
हो रही है। आज आप चाहे फेथ एक्सेप्ट कर
(00:28:30)
लें या बिलीफ एक्सेप्ट कर लें। आज ये बात
(00:28:32)
होगी कि ट्रुथ क्या है? चाहे ट्रू बिलीफ
(00:28:36)
सही है या ट्रू फेथ सही है और फॉल्स फेथ
(00:28:38)
क्या है और फॉल्स बिलीफ क्या है? बात इसपे
(00:28:40)
हो रही है। दूसरी चीज इन्होंने पूछा
(00:28:42)
स्टुपिडिटी फिर क्या है? अगर फेथ रिलीजन
(00:28:45)
स्टुपिडिटी नहीं है तो और क्या है?
(00:28:46)
क्योंकि फेथ का मुतालबा करते हैं तो
(00:28:47)
स्टुपिडिटी स्टुपिडिटी क्या है? मैं कहता
(00:28:50)
हूं स्टुबिडिटी एथिज्म है। उसकी वजह ये है
(00:28:52)
कि आप एक सड़क पे जा रहे हो और आप किसी
(00:28:54)
गार्डन में जाएं और देखें वहां लिखा है
(00:28:56)
फूलों के साथ आई लव जावेद अख्तर एंड आई
(00:29:00)
रियली डू आई लव यू सर। सो
(00:29:03)
जब आप [प्रशंसा]
(00:29:05)
वहां पर पहुंचे तो वहां पहुंचकर अब ये
(00:29:09)
बताएं क्या आप ये कहेंगे वाओ व्हाट अ
(00:29:11)
नेचुरल सेक्शन। ये क्या नेचुरल सेक्शन है?
(00:29:15)
नहीं। यह प्रिसाइजली डिज़ है। इसके पीछे
(00:29:19)
डिजाइनर है। लिहाजा अगर कोई एक ऐसी कॉमन
(00:29:23)
सेंस की बात को कबूल नहीं कर रहा है कि
(00:29:25)
यूनिवर्स जो इतनी प्रिसाइज़ली काम कर रहा
(00:29:27)
है। हम कह दें कि खुद ब खुद बन गई। मैं
(00:29:29)
समझता हूं इससे बड़ी स्टूबिडिटी और कुछ
(00:29:31)
नहीं है। ये इररेशनल चीज है। [प्रशंसा]
(00:29:35)
फिर हमारे सर ने कहा कि आपने बॉल पे फोकस
(00:29:39)
किया, आइलैंड पे फोकस नहीं किया। अरे
(00:29:41)
आइलैंड को किसने बनाया यही समझाने के लिए
(00:29:44)
तो बॉल की मिसाल दे रहा हूं। [प्रशंसा]
(00:29:48)
और बॉल भी कॉन्टिंजेंट है, आइलैंड भी
(00:29:50)
कंटिंजेंट है। दोनों नेसेसरी बीइंग का
(00:29:52)
मुतालबा करते हैं। आगे इन्होंने कहा कि
(00:29:55)
नेचर में कोई इंसाफ नहीं है। हम डिसाइड
(00:29:58)
करते हैं कि मोरालिटी क्या होती है? इंसाफ
(00:30:00)
क्या होता है? हम डिसाइड करते हैं जैसे
(00:30:02)
ड्राइविंग सीट में, ट्रैफिक वाला ये तो
(00:30:04)
किसी खुदा ने नहीं कहा। ये है इसे कहते
(00:30:06)
हैं फॉल्स इक्विवेलेंस। ये एक लॉजिकल
(00:30:08)
फैलेसी है। आपने जो है मिसाल ली ड्राइविंग
(00:30:11)
की और ट्रैफिक की। ये सब्जेक्टिव मोरालिटी
(00:30:14)
है। आप सब्जेक्टिव मोरालिटी को मिसाल
(00:30:16)
बनाकर ऑब्जेक्टिव मोरालिटी के ऊपर नहीं
(00:30:18)
थोप सकते। इंसाफ ये ऑब्जेक्टिव मोरालिटी
(00:30:20)
है। अगर आप ये कहते हैं कि नेचर में इंसाफ
(00:30:22)
नहीं है तो इंसाफ का ना होना ये नेचुरल
(00:30:25)
हुआ तो फिर नेचर को नेचर रहने दे। क्यों
(00:30:27)
हम इतना स्ट्राइव कर रहे हैं दुनिया में
(00:30:28)
इंसाफ लाने के लिए? ये तो इलॉजिकल बात है।
(00:30:30)
इरशनल बात है। इसलिए बहुत सी चीजें ऐसी
(00:30:34)
हैं जो ऑब्जेक्टिवली जो है इविल या गुड
(00:30:37)
हैं और बहुत सी चीजें ऐसी हैं जो
(00:30:38)
सब्जेक्टिवली हैं। सब्जेक्टिवली जो मोरल
(00:30:41)
होता है या इमोरल होता है उसको हम सोशल
(00:30:44)
कंसेंस कंसेंसेस से या पर्सनल प्रेफरेंस
(00:30:46)
से डिसाइड करते हैं। लेकिन जो ऑब्जेक्टिव
(00:30:49)
मोरालिटी है जिसमें इंसाफ आया जो इन्होंने
(00:30:51)
बार-बार रिपीट किया ये ऑब्जेक्टिव है।
(00:30:54)
सब्जेक्टिव नहीं है। अगर आप कहते हैं ये
(00:30:55)
सब्जेक्टिव है। तो मेरा सवाल आपसे यह है
(00:30:58)
क्या सोशल कंसेंसेस के जरिए अगर जुल्म को
(00:31:01)
सही करार दे दिया जाएगा तो आप जुल्म को
(00:31:03)
जस्टिफाई करेंगे? दूसरी चीज इन्होंने ये
(00:31:07)
कहा कि दो पैक शराब पी लें तो वो उतने पे
(00:31:11)
नहीं रहता बढ़ जाता है। यही मामला मजहब के
(00:31:14)
साथ है। दो पैक आप पी ले बढ़ेगा। तो ये एक
(00:31:17)
ऐसी मिसाल है इसको कहीं भी फिट कर लें कि
(00:31:20)
आप एथिज्म पे जब फिट करें जब आप दो पैक
(00:31:22)
एथिज्म का लेंगे ना तो वो बढ़-बढ़ के
(00:31:24)
नॉर्थ कोरिया बनेगा। थैंक यू।
(00:31:26)
[प्रशंसा]
(00:31:31)
अ [प्रशंसा]
(00:31:33)
फर्स्ट राउंड के रिबटल के लिए मैं जावेद
(00:31:35)
साहब को इनवाइट कर रहा हूं। आपके पास 7
(00:31:37)
मिनट का वक्त है। रिसेट कर दीजिएगा प्लीज।
(00:31:42)
मुझे इस बात की खुशी है कि मुफ्ती साहब ने
(00:31:44)
भी मान लिया कि नेचर में कोई इंसाफ नहीं
(00:31:46)
है। तो कोई भी चीज जो इंसान ने नहीं बनाई
(00:31:50)
है उसमें इंसाफ नहीं होता है। एक बात मैं
(00:31:52)
आपसे अ करूं जरा पता लगा लीजिएगा। ये जो
(00:31:54)
आप बाग में जाते हैं बेहद खूबसूरत फूल
(00:31:56)
देखते हैं ना इनमें से कोई नेचुरल नहीं
(00:31:58)
है। ये सारे फूल क्रॉस करके बनाए गए हैं।
(00:32:03)
जो जंगल में फूल होते हैं वो निहायत
(00:32:05)
मामूली होते हैं। ये फूल इंसानों ने बनाए
(00:32:07)
हैं। जो आप बाग में देख के वाहवाह कहते
(00:32:10)
हैं। ये इंसानों के बनाए हुए हैं। डिफरेंट
(00:32:12)
फूलों को क्रॉस करके डेवलप करके फिर क्रॉस
(00:32:14)
करके इस तरह से बनाए गए हैं। नेचुरल
(00:32:16)
फ्लावर्स नहीं। किसी जंगल वीरांग में जाके
(00:32:18)
आप गुलाब के फूल नहीं देखेंगे। ये सब बनाए
(00:32:21)
हुए हैं इंसान ने। बहुत से काम इंसान ने
(00:32:23)
किए हैं। बाकी ये कि आपने मेरी एक बात का
(00:32:27)
जवाब नहीं दिया। जिससे मुझे शिकायत है कि
(00:32:31)
फेथ क्या है? और आप फेथ मांगते क्यों हैं
(00:32:34)
मुझसे? आप तो लॉजिकल हैं। आपके पास तो
(00:32:38)
सारे रैशन हैं। आपके पास सारे सबूत हैं।
(00:32:41)
तो आपको फेथ की डिमांड क्यों करते हो आप?
(00:32:44)
कि भाई तुम सरेंडर कर दो और सवाल मत करो।
(00:32:47)
कोई मजहब सारे सवाल करने की इजाजत नहीं
(00:32:49)
देता है और मना करता है कि ज्यादा सवाल ना
(00:32:52)
करो बैठ जाओगे तुम। आप क्यों रोकते हैं?
(00:32:57)
हकीकत ये है कि इंसानी तारीख क्या है?
(00:33:00)
इंसानी तारीख यह है कि दुनिया में दो तरह
(00:33:02)
के लोग हुए हैं। एक वो जिन्होंने अपनी
(00:33:05)
लालमी की परस्तिश की है। दूसरे वो
(00:33:09)
जिन्होंने अपनी इग्नोरेंस या लालमी से
(00:33:12)
झगड़ा किया है और मालूम किया है कि क्या
(00:33:14)
है। ये जो आप कह रहे हैं आज आप हैरान हैं
(00:33:18)
कि भाई ये यूनिवर्स कैसे बनी? लोग हैरान
(00:33:21)
थे कि सूरज डूबता है तो इधर से कैसे
(00:33:23)
निकलता है?
(00:33:25)
और आप एक कदम जाके हमेशा का मानने को
(00:33:29)
तैयार है। एक कदम पीछे ही मत जाइए। भाई आप
(00:33:32)
इसके पास जाते हैं और कहते हैं सवाल ना
(00:33:34)
करना कि ये कहां से आया? ये पावर तो हमेशा
(00:33:36)
से हमेशा रहेगी। तो आप यूनिवर्स के बारे
(00:33:38)
में मानेंगे क्या तकलीफ है? एक कदम पहले
(00:33:40)
या रुक जाइए।
(00:33:42)
यह हमेशा से थी या नहीं थी हमें मालूम
(00:33:45)
नहीं है। और यह कहना कि हमें मालूम नहीं
(00:33:48)
है। कमाल यह है कि दुनिया के सारे मजहब सब
(00:33:52)
जानते हैं। ये दुनिया कैसे बनी थी? कैसे
(00:33:55)
मिटेगी? मरने के बाद क्या होगा? इनको सब
(00:33:57)
इल्म है। इनको किसी को डायनासोर होते थे।
(00:34:02)
पहले ये नहीं पता था। किसी को नहीं पता।
(00:34:05)
[प्रशंसा]
(00:34:07)
किसी भी दुनिया की मजहबी किताब में
(00:34:10)
डायनासोर का जिक्र नहीं है।
(00:34:13)
लेकिन बाकी सब बातें हाउ टू मेक यूनिवर्सल
(00:34:16)
फॉर ईजी लेसंस एंड बाकी सब पता है। जिसको
(00:34:20)
सब पता है वो गड़बड़ है। हम में ये इंकसार
(00:34:24)
ये ह्यूमिलिटी होनी चाहिए कि हम ये कहें
(00:34:26)
कि हमें ये बहुत सारी बातें नहीं मालूम।
(00:34:29)
लेकिन हम उनकी परस्त ना कर लें। अपनी
(00:34:31)
लालमी को की परस्त ना करें। हम उसे पता
(00:34:36)
लगाने की कोशिश करें। जिस दुनिया में आप
(00:34:38)
बैठे हैं सर ये हॉल जो है ये
(00:34:40)
इलेक्ट्रिसिटी जो है ये माइक जो है जिस
(00:34:43)
हवाई जहाज से आप आए थे वो जिस कार से आप
(00:34:46)
यहां आए हैं ये सब उन लोगों की बनाई हुई
(00:34:48)
है जिन्होंने सवाल किए थे
(00:34:51)
[प्रशंसा]
(00:34:53)
ये दुनिया जिसमें आप आज आराम से हैं ये उन
(00:34:57)
लोगों की बनाई है कि जिन्होंने सवाल किए
(00:35:00)
थे और हर स्टेज पे इन सवालों को
(00:35:07)
मकरू कहा गया था, गलत कहा गया था। आप जरा
(00:35:11)
तारीख पढ़िए। एक बड़ी दिलचस्प किताब है बटन
(00:35:14)
की
(00:35:16)
जिसमें उसने रिलजन एंड साइंस के कब से
(00:35:20)
रिलीजन जो है साइंस के अगेंस्ट है। और हद
(00:35:23)
तो ये है कि भाप के इंजन के खिलाफ थे।
(00:35:28)
स्टीम इंजन के भी खिलाफ थे। और फतवे उन पे
(00:35:31)
वेटिकन ने दिए।
(00:35:34)
तो ये हमेशा अभी जैसे ही ये राइट फिंगर
(00:35:38)
आते हैं
(00:35:40)
अमेरिका में पावर में तो वो जो अपना ये
(00:35:44)
क्या बोलते हैं उसे
(00:35:46)
सीड क्या बेटे सीड क्या जो
(00:35:50)
नहीं नहीं सीड जो होते हैं
(00:35:54)
जी
(00:35:59)
नहीं भाई
(00:36:01)
वो जो ह्यूमन बॉडी के
(00:36:09)
उसप रिसर्च बंद हो जाती है।
(00:36:12)
रिपब्लिकन नहीं करने देते।
(00:36:15)
अरे भाई इतना डर क्या है तुम्हें?
(00:36:17)
एक जमाने में बहुत नाराज थे ये सारे मजहबी
(00:36:20)
लोग कि ये इंसान तो इंसान बनाने की कोशिश
(00:36:23)
कर रहा है। आपको क्या तकलीफ हुई? बना ले
(00:36:25)
तो बना लेने दो। ये खौफ क्या है?
(00:36:30)
और यह सब आज जो आप कह रहे हैं नामुमकिन है
(00:36:33)
यह कैसे हुआ मुझे किस्सा याद आता है जब
(00:36:36)
मैं छठी क्लास में था तो मैं मैथमेटिक्स
(00:36:38)
में बहुत वीक था तो एक टीचर रख दिया गया
(00:36:41)
उसने एक दो तीन चार पांच छ सात तो सिखा
(00:36:43)
दिया मुझे वो दिन मैं भूल नहीं सकता हूं
(00:36:45)
मुफ्ती साहब जिस दिन उसने ये बताया कि 1/2
(00:36:49)
क्या होता है और 3/4 क्या होता है मुझे
(00:36:52)
ऐसा लगा कि मेरा सर बीच से फट जाएगा ये
(00:36:55)
आदमी कह रहा है कि यू दीवार के अंदर जाओ
(00:36:57)
वॉक करते हुए आज हंसता हूं मैं इस बात पे।
(00:37:00)
तो आज जो बातें आपके ज़हन से बिल्कुल परे
(00:37:04)
हैं और आप हैरान होते हो उन्हें देख के।
(00:37:06)
एक वक्त आएगा कि मामूली लगेंगे और हुआ है
(00:37:09)
आपकी इंसानी तारीख है। इतनी जल्दी सारे
(00:37:12)
फैसले आप मत कर लीजिए। थोड़ा ह्यूमिलिटी
(00:37:14)
रखिए कि भाई ये हमें नहीं मालूम। ये कहने
(00:37:18)
में क्या आ रहा है? ये यूनिवर्स कहां तक
(00:37:21)
फैली? ये कब से है और कब तक रहेगी? हमें
(00:37:24)
नहीं मालूम। आपने फैसला कर लिया कब बनी?
(00:37:28)
ये आपके हिसाब से कोई 14 बिलियन इयर्स बनी
(00:37:31)
जो समझा जाता है। उससे पहले हजारों
(00:37:35)
करोड़ों अरबों साल तक खुदा बैठा क्या कर
(00:37:38)
रहा था। खामोश बैठा था ऐसे ही जमाइयां ले
(00:37:41)
रहा था। फिर उसे आईडिया आया यार एक काम
(00:37:44)
करते हैं। वक्त अच्छा गुजर जाएगा यूनिवर्स
(00:37:46)
पर आपसे।
(00:37:48)
सोचिए। [प्रशंसा]
(00:37:52)
वो तो हमेशा से है ना। मगर यूनिवर्स हमेशा
(00:37:54)
से नहीं है। ये तो बनाई गई है। और उससे
(00:37:59)
पहले क्या था? इनका क्या काम था?
(00:38:03)
कैसी बात है? ये बड़ा आसान है। जो बात
(00:38:06)
हमें आज धीरे-धीरे पता चली है। बरसों 2000
(00:38:09)
और ढाई हजार साल पहले आपको किसी ने बता
(00:38:11)
दिया कि क्या था आप मान गए? और तब से वही
(00:38:14)
मान रहे हैं जो ढाई हजार साल पहले कहा गया
(00:38:16)
था। सब कुछ बदल गया है। सॉल्व हो रही है
(00:38:20)
चीजें। अभी
(00:38:22)
साइंस बिलकुल दावा नहीं करती या कोई
(00:38:26)
फ़िलॉसफर ये दावा नहीं करता कि हमें सब
(00:38:29)
मालूम है। बल्कि वो कहता है कि हमें जितना
(00:38:31)
मालूम होता है उससे ये मालूम होता है कि
(00:38:32)
हमें कितना कम मालूम है। तो हम अपनी
(00:38:36)
जियालत से लड़े उसकी परफेशना करें।
(00:38:39)
जी टाइम थैंक यू। थैंक यू सो [प्रशंसा]
(00:38:42)
मच।
(00:38:44)
मैं
(00:38:46)
तर्कों की श्रंखला में राउंड टू के लिए
(00:38:49)
मुफ्ती साहब को आमंत्रित कर रहा हूं। आपके
(00:38:51)
पास एक बार फिर से 7 मिनट का वक्त है।
(00:38:58)
शुक्रिया। जनाब जावेद अख्तर साहब कई
(00:39:01)
मर्तबा दोहरा रहे हैं कि फेथ का मतलब
(00:39:03)
बताइए। फेथ का मतलब बताइए। मैंने बता
(00:39:05)
दिया। फेथ सही भी होता है, गलत भी होता
(00:39:08)
है। और आज हम फेथ पे बात नहीं कर रहे। हम
(00:39:10)
ट्रुथ और डस गॉड एक्सिस्ट पे बात कर रहे
(00:39:12)
हैं। क्या डस गॉड एक्सिस्ट? यह ट्रुथ यानी
(00:39:16)
गॉड है या नहीं है? इसमें से दोनों ट्रुथ
(00:39:18)
क्या है? अब आप उसे फेथ कह लें, बिलीफ कह
(00:39:20)
लें, नॉट माय बिज़नेस। उसके बाद आपने कहा
(00:39:23)
कि भाई सवाल करने से मजहब रोकता है। मैं
(00:39:26)
कहता हूं जो रोकता है वो रोकता होगा। मैं
(00:39:30)
नहीं रोकता बल्कि सवाल करें। सवाल करना
(00:39:33)
चाहिए। सवाल कर करके तो हम आगे बढ़ते हैं,
(00:39:35)
तरक्की करते हैं। और इसीलिए मैं आज यहां
(00:39:37)
पे आया हूं। लेकिन सवाल सिर्फ खुदा से
(00:39:39)
नहीं होगा। आपसे भी होगा। सवाल एथिज्म से
(00:39:41)
भी होगा। सवाल सिर्फ मजहब से नहीं होगा।
(00:39:43)
सबसे होगा। और आज मैं सवाल करूंगा और
(00:39:46)
उम्मीद है कि आप जवाब देंगे। अभी तक आपने
(00:39:48)
वैसे कंटिंजेंसी आर्गुमेंट का कोई जवाब
(00:39:50)
नहीं दिया है। चलें। आपने कहा यूनिवर्स के
(00:39:52)
बारे में इटरनल क्यों नहीं बोल देते? ये
(00:39:55)
क्योंकि लॉजिकली पॉसिबल ही नहीं है कि
(00:39:57)
यूनिवर्स इटरनल हो। यूनिवर्स एक कंटिंजेंट
(00:40:01)
चीज है। जो टाइम एंड स्पेस के पाबंद है।
(00:40:04)
टाइम एंड स्पेस से बाउंड है। जो टाइम एंड
(00:40:06)
स्पेस से बाउंड होगा वो कंटिंजेंट होगा।
(00:40:08)
जो कंटिंजेंट होगा वो उसकी बिगिनिंग हुई
(00:40:10)
होगी। जिसकी बिगिनिंग हुई होगी वो इटरनल
(00:40:12)
नहीं हो सकता। ये तो कॉमन सी बात है।
(00:40:14)
[प्रशंसा]
(00:40:18)
आपने कहा कि किसी मजहबी किताब में
(00:40:21)
डायनासोर का जिक्र नहीं है। अफसोस कि आज
(00:40:23)
तक किसी मैथमेटिक्स के किताब में मुझे
(00:40:25)
डायनासोर का जिक्र नहीं मिला।
(00:40:27)
[प्रशंसा]
(00:40:29)
तो इसका मतलब मैथमेटिक्स की किताब बेकार
(00:40:31)
है। नहीं उसका वो टॉपिक नहीं है। रेवेलेशन
(00:40:33)
का और मजहबी किताबों का टॉपिक ये नहीं है
(00:40:35)
कि आपको आ के बताएं साइकिल कैसे बनाते
(00:40:37)
हैं। ये आकर ये बताएं कि जो है डायनासोर
(00:40:39)
कब था। वो तो मोरालिटी सिखाने आया है। गॉड
(00:40:42)
के बारे में बताने आया। नॉन फिजिकल
(00:40:44)
रियलिटी की हकीकत को सिखाने के लिए आया।
(00:40:46)
रिलीजियन साइंस को रोकता है। नहीं रोकता।
(00:40:48)
अगर रोकता है तो गलत करता है। रिलीजन
(00:40:51)
साइंटिज्म को रोकता है जिसमें हमारे जावेद
(00:40:53)
साहब मुख्तल हैं। [प्रशंसा]
(00:40:56)
साइंस
(00:40:58)
साइंस और साइंटिज्म में फर्क है।
(00:41:01)
साइंटिज्म ये है कि आप समझे कि साइंस और
(00:41:04)
साइंटिफिक मेथोडोलॉजी ये नॉलेज को हासिल
(00:41:07)
करने का वाहिद सोर्स ऑफ नॉलेज है। ये है
(00:41:10)
साइंटिज्म। हम इसे रिजेक्ट करते हैं। हम
(00:41:12)
साइंस को तो तरक्की करते हैं। भाई आप
(00:41:14)
हमारी पूरी तारीख कर लें। पढ़ लें तो आपको
(00:41:16)
पता चल जाएगा। बहरहाल ये अलग टॉपिक है।
(00:41:18)
उसके बाद इन्होंने एक लफ्ज़ कहा वेटिकन ने
(00:41:20)
फतवा दिया। वेटिकन का फतवे से कोई ताल्लुक
(00:41:22)
नहीं है। दोनों कंट्राडिक्टरी अल्फाज़
(00:41:23)
हैं। उसके बाद उन्होंने कहा कि भाई हमें
(00:41:25)
नहीं मालूम। अगर नहीं मालूम तो क्लियरली
(00:41:28)
कह दे ना कि नहीं मालूम है। इसमें क्या
(00:41:30)
हरज है? तो वही तो मैं कह रहा हूं ना कि
(00:41:32)
आप कह दें कि नहीं मालूम लेकिन क्लेम
(00:41:33)
क्यों कर रहे हैं कि गॉड एक्सिस्ट नहीं कर
(00:41:35)
रहा है। [प्रशंसा]
(00:41:40)
आप कह दे नहीं मालूम है हो सकता है हो
(00:41:42)
सकता ना हो लेकिन आप क्लेम कर रहे हैं। द
(00:41:45)
मोमेंट यू से गॉड डस नॉट एक्सिस्ट दिस इज
(00:41:48)
अ क्लेम एंड नाउ द बर्डन ऑफ प्रूफ इज अपॉन
(00:41:50)
यू टू जैसे हमारे ऊपर है। [प्रशंसा]
(00:41:54)
और क्यों है मैं बताता हूं। क्यों है यह
(00:41:56)
भी मैं बताता हूं। फिलॉसोफिकली
(00:41:59)
जो क्लेम होता है ना सिर्फ यह नहीं होता
(00:42:02)
कि इंसान कहे पॉजिटिव क्लेम करे और
(00:42:04)
नेगेटिव क्लेम करे तो बर्डन अप्रूव नहीं
(00:42:06)
है। आप मिसाल के तौर पे मैं कहूं कि फुला
(00:42:09)
उस कमरे में कोई नहीं है। मैंने एक नॉलेज
(00:42:11)
का क्लेम किया है। उस कमरे में कोई नहीं
(00:42:14)
है। मैंने एक नॉलेज का क्लेम किया। या तो
(00:42:15)
मैं कहूं मुझे नहीं पता हो भी सकता है
(00:42:17)
नहीं भी हो सकता है। दिस इज़ नॉट अ क्लेम।
(00:42:19)
लेकिन जब मैं कह रहा हूं कि वहां कोई नहीं
(00:42:20)
है। या मैं कह रहा हूं वहां कोई है। दोनों
(00:42:22)
क्लेम है। और दोनों के ऊपर बर्डन ऑफ प्रूफ
(00:42:24)
है। हमारे ऊपर भी बर्डन ऑफ प्रूफ है।
(00:42:26)
मैंने कंटिंजेंसी आर्गुमेंट दिया। इसे
(00:42:28)
तोड़ कर दिखाइए।
(00:42:30)
[प्रशंसा]
(00:42:32)
आखरी चीज इन्होंने कहा कि खुदा दुनिया
(00:42:36)
बनाने से पहले 150 साल पहले या करोड़ों
(00:42:39)
साल पहले क्या कर रहा था? अरे हजरत
(00:42:43)
चल बहरहाल मैं जवाब दे देता हूं। आप हमारे
(00:42:45)
रिस्पेक्टेड पर्सनालिटी हैं। अगर आप नहीं
(00:42:47)
होते तो मैं ऐसे एंटरटेन ही नहीं करता।
(00:42:50)
[प्रशंसा]
(00:42:53)
टाइम ये 100 साल पहले या 100 साल बाद पहले
(00:42:57)
बाद में अभी ये वो अल्फाज़ हैं जिनका
(00:43:00)
ताल्लुक टाइम से है। टाइम शुरू ही हुआ है
(00:43:02)
यूनिवर्स की बिगिनिंग के बाद तो उसके पहले
(00:43:05)
खुदा क्या कर रहा था? सवाल इलॉजिकल है। ये
(00:43:07)
फैलेसी है। यानी आप ये कह रहे हैं कि
(00:43:09)
यूनिवर्स के बनने से पहले खुदा क्या कर
(00:43:11)
रहा था? टाइम के बनने से पहले पहले का
(00:43:14)
ताल्लुक टाइम से है। टाइम उस वक्त था ही
(00:43:16)
नहीं। तो ये सवाल ही इनवैलिड है खुदा के
(00:43:18)
ताल्लुक से। [प्रशंसा]
(00:43:22)
दूसरी चीज आर्गुमेंट ऑफ कंटिंजेंसी जो
(00:43:25)
मैंने आपके सामने पेश की है। आपने बार-बार
(00:43:28)
ये प्रूफ किया और ये कह रहे हैं कि गॉड ऑफ
(00:43:31)
गैप्स। देखिए पहले नहीं मालूम था साइंस ने
(00:43:33)
कर दिया। सिंपल इसकी मिसाल से मैं समझा
(00:43:35)
देता हूं। जिस गैप्स की आप बात कर रहे हैं
(00:43:37)
ना साइंस उन गैप्स को जिन चीज के जरिए भी
(00:43:41)
प्रूव करेगा वो कंटिंजेंट ही होगा। अब
(00:43:44)
चाहे वो फोर्स हो, मैटर हो या एनर्जी हो।
(00:43:47)
लिहाजा सवाल हमारा उस वक्त भी वैलिड होगा
(00:43:50)
जब तक कि आप नेसेसरी बीइंग पे ना आ जाए और
(00:43:53)
इनफिनिट रिग्रेस पॉसिबल नहीं है ऑफ कॉजेस
(00:43:55)
इन इन प्रैक्टिकल वर्ल्ड तो जाहिर है कहीं
(00:43:58)
रुकना पड़ेगा जहां रुकेंगे वही खुदा है।
(00:44:01)
दूसरी चीज आपने
(00:44:05)
ये कहा क्या कह रहा था मैं किस पॉइंट को
(00:44:11)
व्हाट
(00:44:14)
नो आफ्टर दैट जस्ट जस्ट जस्ट नाउ
(00:44:18)
जहां
(00:44:19)
हां जहां रुकेंगे वही खुदा है। बहरहाल तो
(00:44:22)
टाइम का जिक्र हो गया। गॉड ऑफ़ गैप्स सॉरी
(00:44:24)
या। इसकी एक मिसाल आप ले लें। एक कार है
(00:44:29)
एक साहब ने देखा कि भाई कार जो है उसके
(00:44:32)
व्हील्स कितने अच्छे लगे हुए हैं। सही जगह
(00:44:35)
पे। स्टयरिंग जो है कितने अच्छे जगह पर
(00:44:38)
लगी हुई है और सीट्स कितने वेल डिज़ है।
(00:44:42)
कितनी प्रिसाइजली यह कार काम कर रही है।
(00:44:45)
तो जरूर कोई ना कोई इसे क्रिएट किया है।
(00:44:47)
किसी ने क्रिएट किया है। अब जावेद साहब आए
(00:44:49)
और अरे जनाब बोनट खोलिए। इसमें इंजन है।
(00:44:52)
इंजन इस कार को चला रहा है। हेंस प्रूव नो
(00:44:54)
वन हैज़ क्रिएटेड द कार। दिस इज़ इलॉजिकल।
(00:44:56)
दिस इज़ इररेशनल। आपने इंजन के जरिए उस गैप
(00:45:00)
को तो साबित किया। लेकिन क्या उससे
(00:45:04)
कि कार की जो क्रिएशन है और उसका जो
(00:45:08)
क्रिएटर है यह इंपॉसिबल हो जाए ऐसा पॉसिबल
(00:45:10)
है? उसका सवाल खत्म हो जाए ऐसा पॉसिबल है?
(00:45:12)
नहीं। आपने गैप्स को फिल करके कंटिंजेंट
(00:45:16)
चीजों से गैप्स को फिल करके हमारे
(00:45:18)
ऑब्जरवेशन को और ब्रॉड कर दिया। अब हमें
(00:45:20)
और पता चल गया कि ये जो कार है इसका
(00:45:23)
सिस्टम कितना ज्यादा कॉम्प्लेक्स है। पहले
(00:45:25)
कम समझते थे। अब कॉम्प्लेक्सिटी और ज्यादा
(00:45:27)
वाज़ हो गई। अब हमें समझ में आ रहा है कि
(00:45:29)
हमारी सर्टेनिटी और बढ़ गई कि जरूर इस कार
(00:45:32)
को किसी ना किसी ने बनाया। यही मामला
(00:45:33)
यूनिवर्स का है। साइंस हमेशा फिजिकल
(00:45:36)
वर्ल्ड की चीजों को ही फिल करती जाएगी और
(00:45:38)
फिजिकल चीजों से ही करती जाएगी क्योंकि
(00:45:40)
एंपेरिकल एविडेंस का ताल्लुक फिजिकल
(00:45:41)
वर्ल्ड से है। आप साइंस के जरिए
(00:45:43)
मेटाफिजिकल रियलिटी को कभी साबित नहीं कर
(00:45:46)
सकते। ये रॉन्ग टूल का इस्तेमाल करना है।
(00:45:48)
ये वही काम है कि आप मेटल डिटक्टर से
(00:45:50)
प्लास्टिक डिटक्टर करने चलें जो कि जाहिर
(00:45:53)
है सही नहीं है। थैंक यू। [प्रशंसा]
(00:46:00)
जी
(00:46:02)
ये आर्गुमेंट का राउंड टू है। सात मिनट
(00:46:04)
है।
(00:46:05)
पहले तो मैं आपसे अर्ज करूं कि आपने कहा
(00:46:07)
कि जब कायनात ही नहीं थी तो वक्त भी नहीं
(00:46:10)
था। कुछ भी नहीं था। कैसे नहीं था? खुदा
(00:46:12)
था।
(00:46:13)
एक एकिस्टेंस तो था ना खुदा का। तो जब
(00:46:16)
खुदा था तो वक्त भी होगा। ऐसा नहीं है कि
(00:46:19)
कुछ भी नहीं था। खुदा था। अच्छा बाकी है
(00:46:22)
कि आपने कहा साहब आप साबित कीजिए। आपके
(00:46:24)
पास भी लॉजिक है या मेरे पास भी लॉजिक है
(00:46:26)
आपका मेरा जिम्मेदारी नहीं है साबित करना
(00:46:28)
कि खुदा है। बर्टन रसेल ने बड़ी अच्छी बात
(00:46:32)
कही। [प्रशंसा]
(00:46:34)
बर्टन रसेल ने एक बड़ी अच्छी बात कही है।
(00:46:35)
मैं आपसे अगर ये दावा करूं कि एक चाय की
(00:46:38)
केतली मिरर के चारों तरफ घूम रही है मार्स
(00:46:41)
के चारों तरफ तो ये आपका काम नहीं है कि
(00:46:43)
आप साबित करें कि कोई चाय की केतली नहीं
(00:46:45)
है। ये मेरा काम है। मैंने दावा किया है।
(00:46:48)
ये दावा तो मजहबी लोग करते हैं कि खुदा
(00:46:50)
है। मैं क्यों साबित करूं कि नहीं है? जब
(00:46:52)
तक आप मुझे कंफ नहीं कर देंगे मैं नहीं
(00:46:54)
मानूंगा।
(00:46:56)
आपकी जिम्मेदारी है। [प्रशंसा] मेरी
(00:46:58)
जिम्मेदारी नहीं है।
(00:47:02)
दो ये कि ये जो आप कह रहे हैं जो गैप्स है
(00:47:05)
ये गैप्स जबजब किसी मजहब को चैलेंज करते
(00:47:08)
हैं। जब ऐसा कोई बात आती है तो हंगामा हो
(00:47:12)
जाता है। के जब वो चैलेंज करें किसी फेथ
(00:47:15)
को ये तमाम साइंस जो है इसे मुख्तलिफ
(00:47:20)
जगहों पे मुख्तलिफ़ वक्तों में मजहब ने
(00:47:24)
रोकने की कोशिश की है। यह किताब है रिलजन
(00:47:27)
एंड साइंस बट नर्सरी की पढ़िएगा अच्छी
(00:47:30)
लगेगी आपको। तारीख ही है साइंस मजहब की
(00:47:34)
साइंस से उसका यही रिश्ता है। अच्छा अब ये
(00:47:38)
हम सोचे कि बहाल ये वजूद जो है मजहब और ये
(00:47:41)
बिलीव इन गॉड इंसान को बेहतर बना देता है।
(00:47:45)
तो एक काम कीजिए हिंदुस्तान वर्ल्ड का
(00:47:46)
नक्शा लीजिए और मार्क कीजिए कि रिलीजन
(00:47:49)
कहां-कहां ज्यादा है। कहां-कहां चाहे वो
(00:47:52)
लैटिन अमेरिका हो या मिडिल ईस्ट हो या फार
(00:47:55)
ईस्ट हो या हिंदुस्तान के वो इलाके जहां
(00:47:57)
मजहबीियत ज्यादा है। रख दीजिए नक्शा अलग।
(00:48:01)
अब दूसरा नक्शा के कहां-कहां नाइंसाफी,
(00:48:04)
रिप्रेशन, औरतों के हुकूक की पामाली,
(00:48:08)
जुल्म, डिक्टेटरशिप कहां है? नक़्शा एक ही
(00:48:12)
होगा।
(00:48:13)
[प्रशंसा]
(00:48:14)
तो, आप मुझे बताएं के जो इसका तरकीब
(00:48:18)
इस्तेमाल क्या है?
(00:48:21)
खुदा का तरकीब इस्तेमाल तो बताइए। आप छोटी
(00:48:23)
सी दवा सड़क पे बेचते हैं। उसकी भी तरकीब
(00:48:25)
इस्तेमाल बताते हैं। इसके इस्तेमाल से तो
(00:48:28)
फायदा ही नहीं हुआ किसी को। जो सारे के
(00:48:31)
सारे ख़राब मुल्क हैं, खराब समाज है, वो
(00:48:34)
सारे जुल्म खुदा के नाम पे करते हैं। वो
(00:48:37)
गलत करते हैं, सही करते हैं। मुझे क्या
(00:48:40)
लेना देना उससे? इस्तेमाल से मालूम होता
(00:48:42)
ना। एक विस्की की बोतल कभी शायद देखी हो
(00:48:45)
आपने। लाल रंग की होती है उसपे रोशनी और
(00:48:47)
छिपड़े खूबसूरत लगती है। क्या बिगाड़ रही है
(00:48:50)
किसी का? उसका इस्तेमाल गलत है। इसलिए आप
(00:48:53)
उसे नापसंद करते हैं। इसका इस्तेमाल गलत
(00:48:56)
है। इस तसवुर का
(00:48:59)
इस्तेमाल ही गलत है और हमेशा से गलत हुआ
(00:49:02)
है। आप देख लीजिए इंसानी तारीख देख लीजिए।
(00:49:04)
आज देख लीजिए हिंदुस्तान देख लीजिए।
(00:49:06)
दुनिया देख लीजिए। क्या हो रहा है?
(00:49:09)
इसे कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं? फेथ वाले
(00:49:12)
लोग क्या फेयर हैं? जस्ट हैं जो अपने
(00:49:15)
खुदाओं पे यकीन रखते हैं। वो किस तरह के
(00:49:18)
लोग हैं?
(00:49:19)
वो लोगों को इंसाफ देते हैं। वह बेहतर
(00:49:22)
इंसान बने। तो इस दवा का फायदा क्या है?
(00:49:25)
चलो बहुत फायदा हो रहा तो मैं इस्तेमाल कर
(00:49:26)
लूंगा। मुझे तो इस दवा का कोई फायदा दिखता
(00:49:29)
ही नहीं। मुझे तो ऐसा लगता मैं एक और बात
(00:49:32)
बताऊं। अगर कोई आदमी मजहबी है और अच्छा
(00:49:36)
आदमी है तो मैं उसकी बहुत इज्जत करता हूं।
(00:49:38)
इसलिए कि मेरा ख्याल है मजहबी आदमी का
(00:49:41)
अच्छा होना मुझसे अच्छा होने से ज्यादा
(00:49:43)
मुश्किल है। भाई हर चीज की एक लिमिट है।
(00:49:47)
आप इतना भाग सकते हैं, इतना नहीं भाग
(00:49:49)
सकते। इतना वजन उठा सकते, इतना नहीं उठा
(00:49:52)
सकते। इतना दूर देख सकते हैं। इतना दूर
(00:49:54)
नहीं देख सकते। उसी तरह कॉमन सेंस कहता है
(00:49:56)
कि आप में नेकी का भी एक कोटा होगा। अब आप
(00:50:00)
अगर सुबह जाते हैं अपनी इबादतगाह और इबादत
(00:50:04)
करते हैं तो बाहर निकलते हैं तो आप तो यही
(00:50:06)
महसूस करते हैं कि आपने एक बहुत अच्छा काम
(00:50:08)
किया। आपकी नेकी का एक बहुत बड़ा कोटा
(00:50:10)
खर्च हो गया जिससे किसी का कोई फायदा नहीं
(00:50:12)
होगा। मैं तो नहीं जाता हूं तो मुझे तो
(00:50:14)
किसी को खाना खिलाना पड़ेगा। किसी बेवा की
(00:50:17)
मदद करनी पड़ेगी। मैं अपना कोटा कैसे
(00:50:19)
कंज्यूम करूं? आप अपना कोटा सारे मजहबी
(00:50:23)
लोग इंतहाई यूज़लेस कामों में यूज़ करते
(00:50:25)
हैं। उसके बाद भी अगर आप में बचती है थोड़ी
(00:50:28)
सी शराफत तो भाई वाह क्या बात है।
(00:50:31)
[प्रशंसा]
(00:50:36)
एक तो मुझे ये बात बहुत अच्छी लग रही है
(00:50:38)
कि दोनों ही विद्वान समय को मानते हैं। और
(00:50:42)
बहुत समय से अपनी दलीलें और बाज दफा समय
(00:50:46)
से पहले अपनी तकरीरें पूरी करके अपनीपनी
(00:50:49)
कुर्सी पर बैठ रहे हैं। ये इस आर्गुमेंट
(00:50:52)
का राउंड टू पूरा हुआ। अब रिबर्टल का
(00:50:55)
राउंड टू है और उसके बाद क्रॉस
(00:50:56)
एग्जामिनेशन होगा।
(00:50:59)
नहीं आपका आर्गुमेंट हो गया सर।
(00:51:04)
हमारे यहां स्कूल के सिलेबस में पंच
(00:51:06)
परमेश्वर कहानी पढ़ाई जाती है। प्रेमचंद
(00:51:08)
जी की लिखी हुई। आप निश्चिंत रहिए। आपकी
(00:51:10)
कोई राउंड मैं मिस नहीं होने दूंगा।
(00:51:12)
रिबर्टल का राउंड टू मुफ्ती शमाल नदी
(00:51:14)
साहब।
(00:51:20)
असल में जो हकीकी प्रॉब्लम है, असल
(00:51:22)
प्रॉब्लम है वो ये है कि जावेद साहब के
(00:51:25)
पास कांसेप्ट ऑफ गॉड क्लियर नहीं है।
(00:51:28)
इन्होंने कहा कि कायनात से पहले खुदा तो
(00:51:31)
था तब भी तो टाइम होगा। कि खुद कायनात
(00:51:34)
टाइम कायनात का हिस्सा है। हम खुदा उस
(00:51:38)
खुदा को मानते हैं। नेसेसरी बीइंग का
(00:51:40)
टाइमलेस होना जरूरी है। क्योंकि वो टाइम
(00:51:42)
का क्रिएटर है। जब उसने टाइम को क्रिएट
(00:51:44)
किया तो वो खुद टाइम पे कैसे होगा? उसने
(00:51:46)
जब स्पेस को क्रिएट किया तो खुद स्पेस में
(00:51:48)
कैसे होगा? अगर वो टाइम एंड स्पेस को पहले
(00:51:50)
से ही उसका पाबंद है तो फिर किस चीज को
(00:51:53)
उसने क्रिएट किया? लिहाजा ये सवाल गलत है
(00:51:55)
के खुदा था तो टाइम होगा। बिल्कुल नहीं।
(00:51:58)
टाइम के पाबंद हम है खुदा नहीं है। हम
(00:52:00)
फिजिकल वर्ल्ड से ताल्लुक रखते हैं। वो
(00:52:02)
मेटाफिजिकल रियलिटी है। दूसरी चीज
(00:52:05)
इन्होंने मिसाल दी कि चाय की केतली हवा
(00:52:07)
में घूम रही होगी और पता नहीं शायद वो
(00:52:09)
बर्टन रसेल का उन्होंने हवाला दिया।
(00:52:10)
बहरहाल यही प्रॉब्लम है। प्रॉब्लम यही है
(00:52:13)
कि हम चीजों के दरमियान डिफरेंशिएट नहीं
(00:52:16)
कर पाते। ये जो आपने मिसाल दी ये
(00:52:18)
इमेजिनेशन है। और मैं जो साबित कर रहा हूं
(00:52:20)
वो लॉजिकल नेसेसिटी है। [प्रशंसा]
(00:52:25)
आप इमेजिन करने आए तो कुछ भी करें। में
(00:52:27)
जुपिटर में पिंक एलीिफेंट होगा, यूनिकॉर्न
(00:52:29)
होगा। करें उसके उससे कायनात पे क्या फर्क
(00:52:32)
पड़ता है? उससे आप लॉजिकल नेसेसिटी साबित
(00:52:34)
नहीं कर सकते। मैं तो उस प्राइम कॉज की
(00:52:37)
बात कर रहा हूं। उस नेसेसरी बीइंग की बात
(00:52:39)
कर रहा हूं जिसके बगैर इस कायनात का
(00:52:41)
एकिस्टेंस मुमकिन नहीं है। दूसरी चीज़ मजहब
(00:52:43)
को साइंस चैलेंज करती है वगैरह-वगैरह। ये
(00:52:45)
हमारा टॉपिक ही नहीं है। मैं मैं इस पे
(00:52:48)
बात करूंगा तो फिर मेरा वक्त चला जाएगा।
(00:52:50)
मजहब के ऊपर क्योंकि हमारी डिस्कशन नहीं
(00:52:52)
है। साइंस को मजहब और बिलखसूस मैं और
(00:52:56)
हमारा वर्ल्ड व्यू कम से कम साइंस को पीछा
(00:52:58)
नहीं पीछे नहीं करता है। साइंटिज्म की
(00:53:00)
मज़म्मत करता है। इसकी वजाहत मैंने पहले कर
(00:53:02)
दी। दूसरी ची चीज इन्होंने कहा वर्ल्ड का
(00:53:05)
नक्शा लीजिए। वर्ल्ड मैप लीजिए। दो
(00:53:08)
अलग-अलग जगह की। हज़रत मैंने ये होमवर्क
(00:53:10)
किया था। और मैंने मिडिल ईस्ट मिडिल ईस्ट
(00:53:12)
का एक नक्शा लिया और यूरोप का एक नक्शा
(00:53:15)
लिया। यह मजहबी इलाका और यह
(00:53:19)
लिबरल और एथिस्ट इलाका। मुझे पता चला कि
(00:53:22)
सबसे ज्यादा रेप केसेस जो है वहां पर है।
(00:53:26)
[प्रशंसा]
(00:53:30)
मुझे ये पता चला यूएन की रिपोर्ट के
(00:53:32)
मुताबिक। मैं ये अपने घर से नहीं लेके आ
(00:53:34)
रहा कि जो वर्किंग वुमेन है यूरोपियन
(00:53:36)
कंट्रीज में उसमें 81%
(00:53:39)
वुमेन सेक्सुअल हरासमेंट का वर्क में जो
(00:53:41)
शुमार [प्रशंसा] ये मिडिल ईस्ट में नहीं
(00:53:43)
हो रहा है। वो मजहबी लोग हैं इसलिए नहीं
(00:53:46)
हो रहा है। दूसरी चीज आपने ये कहा के
(00:53:50)
मजहबी आदमी का अच्छा होना हमारे अच्छे
(00:53:53)
होने से बहुत मुश्किल है। बहुत मुश्किल
(00:53:56)
है। तो इसका मतलब ये है कि गॉड के अलावा
(00:53:58)
आपके पास अच्छे और बुरे का कोई स्टैंडर्ड
(00:54:01)
है। मैं चाहूंगा कि कन्वर्सेशनल स्टाइल
(00:54:04)
वाले डिस्कशन और सेगमेंट पे इसी पे बात कर
(00:54:06)
लेते हैं। थैंक यू वेरी मच। [प्रशंसा]
(00:54:13)
ये रिबर्टल का राउंड टू है। आपके पास 5
(00:54:17)
मिनट का वक्त है। और इसके बाद क्रॉस
(00:54:20)
एग्जामिनेशन शुरू करेंगे। आप चाहे तो जो
(00:54:22)
इन्होंने सवाल पूछे उनके जवाब आप रिबर्टल
(00:54:24)
में भी दे सकते हैं।
(00:54:25)
जी जी
(00:54:26)
देखिए पहले तो ये बात कि ये मिसाल गलत
(00:54:30)
नहीं है। गलत है। इन्होंने पहले ही हमको
(00:54:32)
डिस्म कर दिया। कह अकल से मामला सॉल्व
(00:54:34)
नहीं हो सकता। लॉजिक से आप पहुंच नहीं
(00:54:36)
सकते। ये एक मेटाफिजिकल चीज है।
(00:54:39)
मेटाफिजिकल अजीब सा लब्ज़ है। ठीक से किसी
(00:54:41)
को माने नहीं मालूम इसके तो ऐसा लगता है
(00:54:43)
कुछ बड़ी चीज है। अरे भाई क्या होता है
(00:54:45)
मैटाफिजिकल? बताओ खड़ी हो। ये एक लफज़ है जो
(00:54:51)
कहीं भी इस्तेमाल हो जाता है। जब आप एक
(00:54:54)
बात कर रहे हैं और आप मुझसे बहस कर रहे
(00:54:55)
हैं तो मुझे मेटाफिजिकल मत बताइए। आप
(00:54:58)
लॉजिकली मुझे प्रूफ किए और अगर लॉजिकली आप
(00:55:00)
नहीं बात करते साहब ये मेटाफिजिकल है तो
(00:55:02)
फिर हम आप बात क्या कर रहे हैं? मेरा आपका
(00:55:05)
किस जबान में कन्वर्सेशन हुआ और ये कहना
(00:55:09)
कि वक्त पहले नहीं था तो फिर क्यों कहते
(00:55:11)
हैं ये हमेशा से और हमेशा रहेगा हमेशा
(00:55:14)
वक्त है। तो आप कैसे कहते हैं वो हमेशा से
(00:55:18)
है और हमेशा रहेगा। हमेशा का मतलब है कोई
(00:55:20)
वक्त। अगर वक्त ही नहीं है तो हमेशा कैसे?
(00:55:26)
बहरहाल वो रहेगा। अब मैं यह देखता हूं।
(00:55:29)
आपने कहा ना कि वहां रेप ज्यादा होते हैं।
(00:55:32)
तो हम एक बात देखते हैं कि ये दुनिया
(00:55:35)
जिसमें वो कादरे मुतलक है। जिसकी मर्जी के
(00:55:37)
बगैर पत्ता भी नहीं हिलता वो ओमनीपोटेंट
(00:55:40)
है। ये दुनिया चल कैसे रही है? और इस
(00:55:43)
दुनिया का हाल क्या है? 45,000
(00:55:47)
बच्चे
(00:55:49)
जो 10 साल की उम्र से कम थे
(00:55:53)
वो अदाज़ा में मरे हैं।
(00:55:56)
भूख से काला हांडी में बच्चे मरते हैं और
(00:56:00)
डिप्थीरिया से मरते हैं। डिप्थीरिया अजीब
(00:56:03)
मर्ज है। गले में जाली मरना शुरू होती है।
(00:56:06)
बच्चा नीला हो जाता है। गरीब का बच्चा
(00:56:09)
इसलिए कि वो पास इला ये कादरे मुतलक है जो
(00:56:12)
जाहिर कर दे। इसलिए आप दुआएं मांगते हैं
(00:56:14)
हमारी ये काम कर दे वो कर दे तो इसका मतलब
(00:56:17)
डे टू डे लाइफ में वो इंटरफेयर करता है और
(00:56:21)
ये देख रहा है वो अगर वो वाकई भी है फॉर
(00:56:24)
डिस्कशन सेक तो मैं जब दुनिया देखता हूं
(00:56:27)
तो मेरे दिल में उसके लिए कोई इज्जत नहीं
(00:56:28)
पैदा होती क्या कर रहे हो तुम
(00:56:32)
[प्रशंसा]
(00:56:33)
पूरे ऑल पावरफुल हो ओमनीपोटेंट हो ओमनी
(00:56:38)
प्रेजेंट हो तुम तो वहां गदा में रहेगे ना
(00:56:41)
तुम हर जगह हो तुम देख रहे रहे थे कि
(00:56:43)
बच्चे की कैसे धज्जियां उड़ गई। तुम देख
(00:56:46)
रहे थे और तुम चाहते हो मैं तुम्हारी
(00:56:49)
परस्त करूं और तुम हो भी।
(00:56:52)
अरे यार इससे अच्छे तो हमारे चीफ प्राइम
(00:56:54)
मिनिस्टर हैं। कुछ तो ख्याल करते हैं।
(00:56:59)
कमाल [प्रशंसा] है। आप किसकी इबादत कर रहे
(00:57:02)
हैं? अगर वो है भी। यह दुनिया नाइंसाफी
(00:57:06)
से, जुल्म से, जब्र से, तशद्दुद से भरी
(00:57:09)
हुई है। और आप यह मत कहिएगा कि वो देख रहा
(00:57:13)
है और वो बताएगा एक दिन। अगर वो देख रहा
(00:57:16)
है और इंटरफेयर नहीं करता तो आप दुआ क्यों
(00:57:17)
मांगते? आप कहते हैं मेरा यह काम करा दे।
(00:57:20)
इसका मतलब है वो दखल दे सकता है। वो आपको
(00:57:24)
नौकरी दिलवा सकता है। भले दूसरे आदमी को
(00:57:27)
ना मिले। मगर आपका काम कर देगा क्योंकि
(00:57:29)
आपने दुआ मांगी है। तो जब वो आपको नौकरी
(00:57:32)
दिला सकता है, लड़की की शादी कर सकता है,
(00:57:35)
बेटे को ग्रीन कार्ड दिलवा सकता है। तो कम
(00:57:38)
से कम ये जो मर रहे हैं बच्चे इनको रोकते
(00:57:41)
हैं। कुछ तो करें। मुझे तो दुनिया में इस
(00:57:43)
दुनिया का कोई मालिक है। इसका ओमनीपोटेंट
(00:57:47)
कोई रूलर है। और ये दुनिया ऐसी चल रही है।
(00:57:52)
मैं तो चाहूंगा कि भाई ना हो। अगर हो तो
(00:57:55)
बड़ी शर्मिंदगी की बात है। शुक्रिया।
(00:57:59)
[प्रशंसा]
(00:58:03)
देवियों और सज्जनों इस बहस के दो राउंड और
(00:58:07)
दो रिबर्टल पूरे हो चुके हैं। अब सबसे
(00:58:11)
जरूरी और सबसे मुश्किल राउंड शुरू हो रहा
(00:58:14)
है क्रॉस एग्जामिनेशन का। अब इन विद्वानों
(00:58:17)
की सज्जनता की एक परख भी होगी। और वक्त
(00:58:20)
हमने 16 मिनट का तय किया है।
(00:58:24)
पहला सवाल आप पूछना चाहेंगे?
(00:58:26)
जी बिल्कुल
(00:58:28)
पहले बोले भी [हंसी]
(00:58:31)
आप माइक ले लीजिएगा हाथ में।
(00:58:34)
ये नीचे से हटवा
(00:58:39)
जी मैं मैं बोलता हूं।
(00:58:42)
ये डाइस हटा सकते हैं क्या हम? थोड़ा
(00:58:44)
क्विकली।
(00:58:48)
डाइस पीछे कर दीजिए बस थोड़ा सा है ताकि
(00:58:51)
यह जो दाएं बाएं लोग बैठे हैं इसे हटा
(00:58:53)
दीजिए अब हम वहां तो जाने वाले नहीं आराम
(00:58:56)
से आराम से दोनों तरफ से हटा दीजिए
(00:59:08)
इस बीच आप लोग भी अपनेप सवाल तैयार कर लें
(00:59:12)
यह ध्यान रखेंगे कि मैं यहां से सवाल
(00:59:14)
लूंगा आप लोगों को अपना हाथ ऊपर करना है।
(00:59:17)
अपना नाम बताना है और अधिकतम तीन वाक्यों
(00:59:20)
में अपना सवाल पूरा करना है। कई लोग सवाल
(00:59:23)
की जगह भाषण देने लगते हैं। उससे आज बचना
(00:59:25)
है। [प्रशंसा]
(00:59:27)
जी मुफ्ती साहब पहला सवाल आपका 16 मिनट
(00:59:30)
हैं। हम दोनों लोगों के सवाल लेंगे। जी
(00:59:33)
बहुत शुक्रिया। आप आपकी जो अभी बात हुई
(00:59:35)
बहुत अहम थी। मैं इसको चाहूंगा कि आगे
(00:59:37)
डिस्कस करूं। लेकिन चूंकि अभी ये वो
(00:59:40)
सेगमेंट है क्रॉस एग्जामिनेशन। अह तो सबसे
(00:59:44)
पहला सवाल आपसे यह है कि जो मैं इतनी देर
(00:59:48)
से कंटिंजेंसी आर्गुमेंट आपको बता रहा था,
(00:59:50)
यह अकल से ही बता रहा था हजरत। आप यह
(00:59:53)
बताएं के आप इनफिनिट रिग्रेस ऑफ कॉजेस को
(00:59:56)
पॉसिबल मानते हैं या नेसेसरी बीइंग के
(00:59:58)
एक्सिस्टेंस को सही समझते हैं। क्योंकि दो
(01:00:00)
ही ऑप्शन हो सकता है। आप ये बताएं।
(01:00:02)
देखिए आपको मैं ईमानदारी से बात कर रहा
(01:00:04)
हूं। एक तो मैं कंटिंजेंसी वर्ड ठीक से
(01:00:06)
समझता हूं।
(01:00:07)
और इस वक्त भी जो आपने अंग्रेजी के अल्फाज़
(01:00:10)
इस्तेमाल किए वो जरा थोड़े से मुझे
(01:00:12)
डिफिकल्ट और कॉम्प्लिकेटेड लगे। [हंसी] तो
(01:00:14)
आप जरा सिंपल जबान में ये सवाल कर सकते
(01:00:16)
हैं।
(01:00:17)
बिल्कुल कर सकता हूं।
(01:00:18)
जी
(01:00:18)
यूनिवर्स की हर चीज कॉन्टिंजेंट होने का
(01:00:21)
मतलब ये है कि वो अपने एकिस्टेंस में किसी
(01:00:23)
के ऊपर डिपेंडेंट है। जो भी चीज डिपेंडेंट
(01:00:26)
होगी वो चीज इंडिपेंडेंट नहीं हो सकती। तो
(01:00:28)
उसका कोई ना कोई कॉज होगा। तो अब आप क्या
(01:00:31)
समझते हैं कि ये इनफिनिट रिग्रेस है यानी
(01:00:34)
कॉज पर कॉज कॉज पर कॉज कॉज पर कॉज और कभी
(01:00:36)
कोई एंड यानी ये एंडलेसली चलता रहा
(01:00:38)
क्योंकि अगर ऐसा होगा तो हम तो
(01:00:40)
एक्सिस्टेंस में आते ही नहीं। लॉजिकली ये
(01:00:42)
मुत्तफक अल चीज है मुत्तफक अल अग्रीड अपॉन
(01:00:46)
[हंसी]
(01:00:47)
इस पे हमने एग्री किया था कि मुश्किल शब्द
(01:00:50)
आएगा तो अर्थ बताना पड़ेगा।
(01:00:51)
तो इनफिनिट रिग्रेस तो पॉसिबल नहीं है। तो
(01:00:53)
कहीं ना कहीं आपको रुकना पड़ेगा ऐसे
(01:00:55)
नेसेसिटी पर।
(01:00:56)
नहीं कोई जरूरत नहीं है रुकने की। किसने
(01:00:58)
कहा रुकना पड़ेगा। आप रुकते हैं खुदा
(01:01:01)
आप नहीं रुकते आप कहते हैं वो हमेशा से जब
(01:01:04)
उस वक्त से है जब वक्त नहीं था आप कहां
(01:01:08)
रुकते हैं कि अब हुआ था वो आप नहीं कहते
(01:01:11)
हम क्यों नहीं मान सकते कि यूनिवर्स जो है
(01:01:13)
और बल्कि मल्टीवर्स जो है वो हमेशा से हैं
(01:01:16)
वो बनती है बिगड़ती है एक हमारे यहां एक
(01:01:20)
चीज है ब्लैक होल वो समेट लेता है वापस
(01:01:24)
फिर ब्लास्ट होता है फिर फैल जाता है और
(01:01:27)
इसमें हमारी तो खैर कोई औकात ही नहीं
(01:01:28)
इंसान की एक छोटे से जर्रे पे हम 50 60
(01:01:32)
साल की उम्र रखते हैं जो करोरा अरबों साल
(01:01:36)
की कायनात उसमें और पैदा भी निहायती
(01:01:39)
बेहूदा वजह से हुए थे तो तो इसमें ये
(01:01:44)
सोचना कि इसकी वजूहात और ये क्यों है ये
(01:01:47)
डिपेंडेंट है ये हम देख रहे हैं क्या
(01:01:50)
मालूम आप सोचिए कि ये जो फैल रही है
(01:01:52)
कायनात ये कहां फैल रही है ये कहां जा रही
(01:01:56)
है और ये फैल क्यों रही है अरे बना ली थी।
(01:01:59)
तुमने रुको यहां काफी है। ये फैल क्यों
(01:02:01)
रही है? और कौन सी कायनात? जिसे मैं
(01:02:04)
दूरबीन से देखता हूं तो दो बिलियन लाइट
(01:02:07)
ईयर पे है। उससे मेरा कोई वास्ता ही नहीं
(01:02:09)
है। दो बिलियन ईयर यानी अगर मैं 80
(01:02:15)
थाउजेंड माइल्स पर सेकंड से चलूं तो 20
(01:02:18)
करोड़ साल में वहां पहुंच जाऊंगा। इसकी
(01:02:21)
जरूरत क्या थी? यह दुनिया ये कायनात तो
(01:02:24)
इंसान अशरफुल मखलूकात के लिए बनाई गई ना।
(01:02:26)
तो ये सब ये टर्म समझ में नहीं आया।
(01:02:31)
इसमें कोई खास समझने वाली बात थी भी नहीं।
(01:02:36)
ये जो अल्टीमेट कहा ये जाता है कि ये जो
(01:02:38)
पूरी यूनिवर्स है ये जो दुनिया है ये
(01:02:41)
इंसान के लिए बनाई गई है।
(01:02:42)
अच्छा ये सब इंसान के लिए। क्यों साहब?
(01:02:44)
सही है ना?
(01:02:45)
बिल्कुल। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि किसी
(01:02:47)
चीज़ के पीछे रीज़न आपको नहीं पता तो रीज़न
(01:02:49)
नहीं है। इसे कहते हैं आदमी नहीं। मुझे
(01:02:51)
मुझे नहीं पता। लेकिन मेरी जिम्मेदारी
(01:02:54)
नहीं है। वो बिल्कुल सही कहा था उसने।
(01:02:56)
बट्टन रसल ने आपने उसे मजाक में टाल दिया।
(01:02:59)
के भाई आप एक दावा कर रहे हैं। मैं क्यों
(01:03:02)
कहूं के ये गलत है दावा। आप प्रूफ कीजिए।
(01:03:05)
मेरे पे जिम्मेदारी ही नहीं है। मैंने
(01:03:07)
थोड़ी कहा है। आप प्रूफ कीजिए कि ये सही
(01:03:10)
है।
(01:03:10)
आप आर्गुमेंट ऑफ कंटिंजेंसी का जवाब
(01:03:12)
दीजिए।
(01:03:12)
सवाल पूछना चाहेंगे? आप सवाल पूछना
(01:03:15)
चाहेंगे मुफ्ती साहब से
(01:03:17)
क्योंकि ये क्रॉस एग्जामिनेशन का दौर है।
(01:03:19)
आप जैसे पहले बोल रहे थे फेथ को लेके कुछ
(01:03:21)
मैं ये पूछना चाहूंगा कि खुदा ने जो भी
(01:03:24)
रेवोलशंस किए हैं एक मजहब के नहीं बहुत से
(01:03:26)
मजहबों में किए हैं। अलग-अलग रेवोलेशन है।
(01:03:29)
कहीं कुछ एक बातें हैं। कंट्राडिक्शन भी
(01:03:31)
है आपस में। कहीं कुछ आप कर सकते हैं।
(01:03:34)
कहीं कुछ नहीं कर सकते। ऐसा नहीं है कि
(01:03:37)
सबकी कोड ऑफ़ मोरल एक है। तो
(01:03:42)
ये
(01:03:45)
किस्सा क्या है? अब आप ये देखिए कि मुझे
(01:03:48)
कभी-कभी लगता है कि जो फुटबॉल फाइनल होता
(01:03:50)
है लाखों लोग होते हैं। फिर वो टीवी कवर
(01:03:53)
करोड़ों लोग अगर उसमें खुदा की एक भूमि
(01:03:56)
आवाज आ जाती मैं गॉड हूं। तो सारे लोग अभी
(01:04:01)
सुन लेते और टीवी पे भी सुन लेते किस्सा
(01:04:03)
खत्म होता। ये इतनी राजदारी क्या है कि
(01:04:06)
तुम सामने कुछ तो सबूत दे दो हमें। सॉलिड
(01:04:10)
ये कह साहब ये यूनिवर्स कैसे बने? इससे
(01:04:12)
मसला क्या हल होगा? मैं पूछूंगा आपसे खुदा
(01:04:15)
कैसे बना? क्यों नहीं पूछूंगा? कैसे बना?
(01:04:18)
बल्कि वह तो कायनात से कहीं ज़्यादा
(01:04:20)
इंटेलिजेंस है। कायनात से कहीं ज़्यादा जी
(01:04:23)
वो हमेशा से। सही आप कहेंगे मैं मान
(01:04:26)
लूंगा। अच्छा दोयम वो कादर मुखल यानी
(01:04:30)
कादरे मुख का मतलब ओमनीपोटेंट जो चाहे कर
(01:04:33)
सकता है आपको नौकरी दिलवा सकता है। आपकी
(01:04:36)
अच्छी जगह शादी करवा सकता है। आपके पड़ोसी
(01:04:40)
का मुकदमा हरवा सकता है। आपको जिता सकता
(01:04:42)
है। सब काम करता है। थोड़ा सा माइक
(01:04:44)
वो इस दुनिया को चला कैसे रहा है? ये
(01:04:48)
दुनिया कैसे चल रही है? आपको इसमें हैरत
(01:04:50)
नहीं होती। या कयामत के बाद कभी एक जस्टिस
(01:04:54)
होगा। जब ये बच्चा मर चुका होगा जिसकी
(01:04:57)
धज्जियां उड़ गई बम से इसको इंसाफ मिलेगा
(01:05:00)
तब।
(01:05:02)
अच्छा
(01:05:02)
अब जवाब दूं कीजिए।
(01:05:04)
मैं वही इसीलिए आपकी तरफ आता हूं।
(01:05:06)
सबसे पहले आपने रेवोल्यूशन और
(01:05:08)
स्क्रिप्चर्स की बात की। इस पे मैं बात कर
(01:05:10)
सकता हूं लेकिन आज नहीं करूंगा क्योंकि
(01:05:11)
वक्त कम है। कभी और इस पे डिस्कस करेंगे।
(01:05:13)
मैं तैयार हूं उसपे भी बात करने के लिए।
(01:05:15)
ये अभी से राउंड टू की भूमिका तय हो रही
(01:05:18)
है। डस गॉट एक्सिस्ट राउंड टू। जी
(01:05:21)
क्योंकि आज गॉड के एक्सिस्टेंस पे बात है
(01:05:23)
तो मैं उसी के रिलेटेड जो है आपके सवालात
(01:05:26)
को एंटरटेन भी करूंगा और मैं भी पूछूंगा।
(01:05:28)
आपने कहा कि आपने साबित ही नहीं किया जबकि
(01:05:32)
आर्गुमेंट ऑफ कंटिंजेंसी बुनियादी
(01:05:34)
आर्गुमेंट है।
(01:05:34)
आप मुझे कॉन्टिंजेंसी का मतलब बताइए। आपका
(01:05:37)
मतलब क्या है? कॉन्टिंजेंसी? कंटिंजेंसी
(01:05:39)
का मतलब यह हुआ के हर वो वजूद जो किसी भी
(01:05:44)
चीज का पाबंद है। हर वो वजूद या हर वो चीज
(01:05:47)
जो अपने एकिस्टेंस में किसी भी चीज के
(01:05:50)
पाबंद है और उससे बाउंड है। उसको उसकी
(01:05:53)
जरूरत है। उस पर डिपेंड करती है। तो जाहिर
(01:05:55)
सी बात है कि उसका कोई ना कोई कॉज होता
(01:05:57)
है। ये तो अक्ल की बात है। ये आप रीजनिंग
(01:06:00)
की बात करते हैं। मैं वही कर रहा हूं।
(01:06:01)
दूसरी चीज आपने ये बात कही के
(01:06:04)
इतने बिलियन लाइट इयर्स दूर है उसका मेरा
(01:06:08)
क्या लेना देना फिर मेरे ख्याल से आपको ये
(01:06:10)
नहीं कहना चाहिए आई एम आई थिंक देयर फॉर
(01:06:12)
आई एम एन एथिस्ट आपको सोचना चाहिए सिर्फ
(01:06:15)
आप एक लिमिटेड दायरे में रहकर नहीं सोचे
(01:06:17)
बल्कि बाहर निकल कर सोचें| आपने तीसरा
(01:06:20)
सवाल किया आपने दो तीन सवाल एक साथ
(01:06:22)
ऐसी बातें ना कीजिए कुछ लोगों को ऐतराज हो
(01:06:24)
जाएगा आप पे कि आप कुछ भी सोचिए ये इजाजत
(01:06:28)
आपको है नहीं मुझे है [हंसी]
(01:06:33)
[प्रशंसा]
(01:06:35)
जी आप आपने प्रॉब्लम ऑफ इविल के ताल्लुक
(01:06:39)
से सवाल किया और बार-बार आप एक लफ्ज रिपीट
(01:06:42)
कर रहे हैं कि ओमनीपोटेंट गॉड है। ऑल
(01:06:45)
पावरफुल गॉड है। यही तो दर असल समझना है
(01:06:48)
कि गॉड का कांसेप्ट क्या है? प्रॉब्लम ऑफ
(01:06:50)
इविल जो है प्रॉब्लम ऑफ इविल दर हकीकत दो
(01:06:53)
असमशन पर कायम है। अगर आप इन दो असमशन को
(01:06:56)
समझ जाए तो ये प्रॉब्लम प्रॉब्लम नहीं
(01:06:57)
रहेगी। ये आर्गुमेंट आपको समझ में आ जाएगी
(01:06:59)
कि ये कोलैप्स कर जाता है। पॉइंट नंबर वन
(01:07:02)
यानी जो आपका सबसे पहला फॉल्स असमशन है कि
(01:07:06)
गॉड मर्सफुल है, ओमनीपोटेंट है। दुनिया
(01:07:08)
में जुल्म हो रहा है। लेकिन आपको ये समझना
(01:07:11)
चाहिए कि हमारे वर्ल्ड व्यू के मुताबिक
(01:07:12)
गॉड सिर्फ ओमनीपोटेंट और सिर्फ मर्सफुल
(01:07:15)
नहीं है। बल्कि वो ऑल वाइज भी है और वो ऑल
(01:07:17)
नोइंग भी है। उसके हर काम के पीछे हिकमत
(01:07:20)
और विज़डम है। ये कोई जरूरी नहीं है कि वो
(01:07:22)
हिकमत और विज़डम आपको समझ में आए या मुझे
(01:07:24)
समझ में आए। अगर आप जो समझ रहे हैं उसके
(01:07:27)
मुताबिक आप फैसला कर रहे हैं ये लिमिटेड
(01:07:28)
पर्सपेक्टिव से आर्गुमेंट है और इस चीज को
(01:07:31)
हम अपनी दुनिया में अपने लाइफ में डेली
(01:07:33)
लाइफ में इस प्रिंसिपल को एक्सेप्ट करते
(01:07:35)
हैं। हम जब किसी डॉक्टर के पास जाते हैं
(01:07:37)
डॉक्टर के पास जाकर वो अगर उसने हमें कोई
(01:07:39)
दवाई दी है तो हम ये तो नहीं कहते कि जब
(01:07:42)
तक आपके पास जितना नॉलेज और जितना विज़डम
(01:07:44)
नहीं है आपने क्यों ये दवाई दी है तब तक
(01:07:47)
हम इस चीज को एक्सेप्ट नहीं करेंगे। नहीं
(01:07:49)
कहते हम उसकी अथॉरिटी को तस्लीम करते हैं।
(01:07:51)
क्यों? क्योंकि उसकी हम जानते हैं कि वो
(01:07:53)
नॉलेजेबल है। वो विज़डम वाला है। हमसे
(01:07:55)
ज्यादा नॉलेज और हमसे ज्यादा विज़डम है।
(01:07:57)
बताएं सर।
(01:07:58)
नहीं नहीं डॉक्टर में खुदा में बड़ा है।
(01:08:00)
डॉक्टर पढ़ लिखा होता है। एक तो मैं उसकी
(01:08:04)
बात सुनूंगा।
(01:08:06)
दो ये नहीं कुछ जवाब तो ये भी नहीं है।
(01:08:09)
सर अगर सब ऑडियंस से बोलने लगेंगे तो फिर
(01:08:11)
मतलब नहीं है।
(01:08:13)
मतलब आप ये कहें कि क्योंकि आप डॉक्टर पे
(01:08:15)
बिलीव करते हैं इसलिए खुदा पे बिलीव किए।
(01:08:16)
ये क्या
(01:08:17)
ये मिसाल आपको समझाने के लिए
(01:08:18)
आर्गुमेंट है इस पे आपको एतराज नहीं है तो
(01:08:25)
सिंपल बात ये है कि मैं अगर ये यकीन कर
(01:08:29)
रहा हूं कि एक ओमनी परसेंट उसकी मसलहत है
(01:08:32)
ये जो बच्चे मर रहे हैं ये मसलहत है उसकी
(01:08:35)
मुझे नहीं चाहिए इसकी मसलहत
(01:08:36)
उसकी मसलहत नहीं यही तो समझना है
(01:08:38)
मतलब एक्सपीरियंस
(01:08:40)
अच्छा
(01:08:41)
इस आपने अभी मेरी बात पूरी सुनी नहीं
(01:08:43)
मैंने कहा आपका पूरा आर्गुमेंट दो फॉल्स
(01:08:46)
फॉल्स असमशन पर है। एक फॉल्स असमशन मैंने
(01:08:48)
बता दिया। दूसरा फॉल्स असंप्शन ये है कि
(01:08:51)
इस दुनिया में इविल के होने का कोई गुड
(01:08:53)
रीज़ नहीं है। जबकि हमारे पास बाज रीज़ंस
(01:08:56)
मौजूद हैं। हमारे पास बाज वजूहात मौजूद
(01:08:58)
हैं। अगर इस दुनिया में इविल ना हो तो आप
(01:09:00)
गुड को डिफाइन कैसे करेंगे? अगर जुल्म ना
(01:09:02)
हो आप इंसाफ को समझेंगे कैसे? अगर तारीकी
(01:09:05)
ना हो तो आप लाइट को समझेंगे कैसे?
(01:09:08)
[प्रशंसा]
(01:09:09)
बहुत अच्छे।
(01:09:10)
अभी और सुन ले। अभी और बाकी है।
(01:09:11)
ये तो बात बहुत पसंद आई साहब मुझे के जब
(01:09:14)
तक रेप ना हो तब तक औरतों की इज्जत का
(01:09:17)
ख्याल आप
(01:09:17)
आपने मेरा जवाब पूरा सुना ही नहीं।
(01:09:19)
जब तक के बच्चों का कत्ल ना किया जाए तब
(01:09:21)
तक आपको बच्चों की मासूमियत की इज्जत है।
(01:09:24)
आपने पूरा जवाब सुना ही।
(01:09:25)
क्या बात है। क्या आपने नुक्ता निकाला?
(01:09:27)
आपने पूरा जवाब सुनाई। नहीं आप सुन ले।
(01:09:29)
मेरी बात सुन लें। ये मैंने आपको एक चीज
(01:09:31)
बताई। दूसरी चीज इस दुनिया में हम आए हैं
(01:09:34)
टेस्ट के लिए। हमारा टेस्ट हो रहा है और
(01:09:36)
हर इंसान का अलग-अलग अंदाज में टेस्ट होता
(01:09:38)
है और इस दुनिया में अगर इविल मौजूद है तो
(01:09:42)
वो इविल जरिया है हमारे अंदर ह्यूमन नोबल
(01:09:45)
क्वालिटीज को डेवलप करने का और अलग-अलग
(01:09:47)
फील्ड में प्रोग्रेस करने का और अगर हमारे
(01:09:51)
अंदर और इस दुनिया में इविल नहीं होता तो
(01:09:53)
बताइए टेस्ट का मतलब क्या होता है? अगर
(01:09:55)
मैं अपने स्टूडेंट को एमसीक्यूस दूं और
(01:09:57)
उसमें सिर्फ राइट आंसर लिख कर दे दूं और
(01:09:59)
कहूं तुम्हारा टेस्ट हो गया। ये मीनिंगलेस
(01:10:01)
है। इस दुनिया में अगर हम टेस्ट के लिए आए
(01:10:03)
हैं तो जाहिर है गुड एंड इविल दोनों मौजूद
(01:10:05)
है।
(01:10:07)
[प्रशंसा]
(01:10:08)
तो अगर गुड एंड इविल दोनों मौजूद है तो ये
(01:10:11)
इविल भी खुदा का बनाया हुआ है।
(01:10:13)
जी हां खुदा का बनाया हुआ है। लेकिन
(01:10:15)
अच्छा चलो अच्छी बात है।
(01:10:16)
जी बिल्कुल। तो अभी अभी तो ये है कि जो
(01:10:20)
मेजॉरिटी
(01:10:21)
है दुनिया में वो इवल है। तो ये खुदा
(01:10:25)
एक्चुअली इविल के साइड पे लग रहा है मुझे।
(01:10:27)
बिल्कुल।
(01:10:28)
मेजोरिटी में तो वो है।
(01:10:30)
क्या बात कर रहे हैं भाई आप कोई भी जो
(01:10:33)
मुंसिफ होगा चाहे आपका अपना घर हो जिसके
(01:10:35)
आप सबसे बड़े हैं चाहे आपकी ऑर्गेनाइजेशन
(01:10:38)
हो जो आप चलाते हैं वहां पर आप इवल रखेंगे
(01:10:42)
साबित करने को कि बाकी लोग शरीफ हैं
(01:10:44)
मेरी बात सुनिए
(01:10:45)
क्या ये आर्गुमेंट ही गलत है कि जब तक के
(01:10:47)
कोई इवल नहीं होगा तब तक के शरीफ आदमी
(01:10:50)
शरीफ नहीं लगेगा
(01:10:51)
अगर एग्जामिनर इ गलत ऑप्शन दे रहा है तो
(01:10:54)
एग्जामिनर इविल नहीं हो गया जो गलत ऑप्शन
(01:10:56)
को सेलेक्ट कर रहा है वो फेल होगा क्रिएटर
(01:10:58)
ने इविल को बनाया है लेकिन वो इविल नहीं
(01:11:01)
है। सुनिए मेरी बात सर लेट मी कंप्लीट सर।
(01:11:06)
क्रिएटर ने इविल को बनाया है टेस्ट के लिए
(01:11:08)
वो इविल नहीं है। इविल वो होगा वो होगा जो
(01:11:11)
उसे इख्तियार करेगा। छुरी को बनाने वाला
(01:11:14)
गलत नहीं होता है। छुरी का गलत इस्तेमाल
(01:11:16)
करने वाला गलत होता है। [प्रशंसा]
(01:11:21)
रेप को कैसे गलत इस्तेमाल करते हैं?
(01:11:24)
रेप इंसान के फ्री मिल का नतीजा
(01:11:29)
ये रेप कैसे गलत इस्तेमाल होता है ये मुझे
(01:11:31)
अब सुन ले अब सुन ले गलत इस्तेमाल होता
(01:11:33)
हां मैं बता रहा हूं ना कैसे मैं बता रहा
(01:11:35)
हूं मैं बता रहा हूं कि जो इविल इस दुनिया
(01:11:38)
में मौजूद है उसके कई सारे तरीके हैं एक
(01:11:41)
तरीका इंसान का अपना फ्री विल है अब अगर
(01:11:43)
कोई रेपिस्ट रेप कर रहा है तो इसका गॉड का
(01:11:45)
कसूर नहीं है वो अपने फ्री विल का गलत
(01:11:47)
इस्तेमाल करना कर रहा है उसको सजा मिलनी
(01:11:49)
चाहिए और उसी के लिए जहन्नुम बनाई गई है
(01:11:52)
ये फ्री विल का भी बड़ा बड़ा चक्कर आप जब
(01:11:55)
कोई बुरा काम करते हैं या कोई बुराई होती
(01:11:57)
है तो ये कहा जाता है कि यह फ्री विल है।
(01:12:00)
7 बिलियन फ्री विल्स आर मूविंग ऑन दिस
(01:12:02)
प्लेनेट। 7 बिलियन फ्री विल और एक आदमी
(01:12:06)
अपनी फ्री विल से मुझे कत्ल कर दे तो मैं
(01:12:08)
खुदा की मर्जी से मरा हूं कि इसकी फ्री
(01:12:10)
विल की वजह से।
(01:12:12)
मेरी मौत खुदा के हाथ है या फ्री विल वाले
(01:12:15)
के हाथ है?
(01:12:17)
खुदा ने फ्री विल का निजाम बनाया है और उस
(01:12:19)
निजाम का गलत इस्तेमाल करके कोई आपको मार
(01:12:22)
रहा है।
(01:12:22)
इस्तेमाल करके मेरा कत्ल कर देता है। अब
(01:12:24)
मेरी मौत का जिम्मेदार कौन है?
(01:12:26)
वो इंसान जिम्मेदार है।
(01:12:27)
वो इंसान तो ये कहना कि
(01:12:29)
और उसको उसको उसको सजा मिलेगी।
(01:12:31)
तो अब आप आगे चलिए कि ये तय करना कि
(01:12:34)
अल्लाह ही या खुदा सॉरी अल्लाह नहीं। खुदा
(01:12:37)
ही जिंदगी देता है और खुदा ही मौत देता
(01:12:39)
है। ये गलत है।
(01:12:40)
बिल्कुल गलत नहीं है।
(01:12:41)
हां नहीं।
(01:12:41)
निजाम उसी ने बनाया फ्री विल का। निजाम
(01:12:44)
मौत और हयात का उसी ने बनाया।
(01:12:45)
यू आर कंट्राडिक्टिंग योरसेल्फ। अभी आपने
(01:12:48)
कहा कि एक आदमी ने फ्री विल से आपको मार
(01:12:50)
दिया। इसमें उसे फ्री विल दी गई थी। उसने
(01:12:53)
गलत इस्तेमाल किया। 7 बिलियन फ्री विल्स
(01:12:56)
आर मूविंग ऑन दिस प्लेनेट। और आप चाह रहे
(01:12:59)
हैं कि मैं सिर्फ खुदा का ध्यान करूं। ये
(01:13:01)
7 बिलियन फ्री विल्स को मुझे लुक आफ्टर
(01:13:04)
करना पड़ेगा कि नहीं? ये तो तबाहियां कर
(01:13:06)
रही हैं और तबाहियां ज्यादा हो रही हैं।
(01:13:08)
बिल्कुल। तो अगर आप बताएं आप बताएं अगर
(01:13:11)
खुदा नहीं है फॉर एग्जांपल तो आप इविल को
(01:13:14)
कैसे डिसाइड करेंगे? यानी हाउ कैन यू
(01:13:16)
डिफाइन इविल ऑब्जेक्टिवली विदाउट गॉड?
(01:13:20)
इविल को डिफाइन।
(01:13:22)
देखिए दुनिया में दो तरह के जानवर हैं। एक
(01:13:26)
जो अकेले रहते हैं जंगल में और एक जो
(01:13:29)
ग्रुप्स में रहते हैं।
(01:13:32)
ग्रुप में जो भी रहेगा चाहे वो आपका
(01:13:35)
फाउंडेशन हो, चाहे कोई क्लब हो, चाहे कोई
(01:13:38)
पॉलिटिकल पार्टी हो, चाहे कोई यूनिट हो,
(01:13:42)
उसमें आपको इंटलेक्ट करने के रूल बनाने
(01:13:46)
पड़ेंगे।
(01:13:46)
यानी लोग तय करेंगे।
(01:13:47)
लोग तय करेंगे। अगर लोगों ने ये तय किया
(01:13:49)
कि किसी का रेप करना सही है आप जस्टिफाई
(01:13:51)
करेंगे।
(01:13:52)
आपका फाउंडेशन तो ये हो गया ना कि लोग
(01:13:54)
इविल डिसाइड करेंगे।
(01:13:56)
नहीं अरे [प्रशंसा]
(01:13:59)
दुनिया में ऐसे ग्रुप्स हैं जो रेप को
(01:14:03)
जायज मानते हैं सर्टेन हालात में। मैं
(01:14:06)
डिटेल में नहीं जानूंगा। आप भी जानते हैं।
(01:14:09)
ये जो आईिस वाले थे जिन्होंने क्या किया
(01:14:12)
था? तो
(01:14:13)
उन्होंने क्या किया? उसका खुदा से कोई
(01:14:15)
ताल्लुक नहीं है। सर मैंने सिंपल सवाल
(01:14:16)
किया कि इविल को आप डिफाइन करते कैसे हैं?
(01:14:19)
आइए वापस आइए।
(01:14:20)
जी
(01:14:21)
आप साथ में तभी रह सकते हैं जब कुछ आप ऐसे
(01:14:25)
उसूल डेवलप करें जिसमें हर एक का बेसिक
(01:14:28)
तहफुल हर एक का बेसिक राइट हो और हर एक को
(01:14:31)
कोई आराम मिले। यही तरीका है किसी भी
(01:14:34)
ऑर्गेनाइजेशन जिसमें एक से ज्यादा लोग हैं
(01:14:38)
और वो ऐसे चलती है जिंदगी में। उसमें अगर
(01:14:40)
आप गड़बड़ करेंगे तो तबाही होगी, नुकसान
(01:14:43)
होगा, बर्बादियां आएंगी। और अगर उसमें आप
(01:14:47)
घर ले लीजिए ना एक हस्बैंड है, एक वाइफ
(01:14:49)
है, बच्चे हैं, वालदा भी हैं, दो बहनें भी
(01:14:52)
है, एक भाई भी है। अब इसमें कोई निजाम
(01:14:55)
आपको चाहिए साथ में रहने का। और एक दूसरे
(01:14:59)
पे भरोसा रहे। एक दूसरे से बही ख्वाब हो,
(01:15:02)
एक दूसरे की मदद करें। ऐसी जिंदगी
(01:15:04)
सर आपकी बात आ गई। आप ये कह रहे हैं कि
(01:15:06)
लोग डिसाइड करेंगे क्या सही है क्या गलत
(01:15:08)
है। यही है मेजॉरिटी डिसाइड करेगी क्या
(01:15:10)
सही है क्या गलत है। अरे भाई बिल्कुल
(01:15:12)
मेजॉरिटी अगर ये कहे कि नाज़ जर्मनी के साथ
(01:15:14)
जिस तरह मेजॉरिटी थी कि जेनोसाइड करना सही
(01:15:16)
है आप जस्टिफाई करेंगे
(01:15:19)
उस वक्त उस वक्त
(01:15:21)
आपका आपका ये
(01:15:22)
सवाल उसके बाद उस वक्त प्लेनेट पे जो लोग
(01:15:26)
थे उनमें कितने लोग हिट को सही समझते
(01:15:29)
अच्छा प्लेनेट की मेजॉरिटी तय करेगी
(01:15:31)
सोसाइटी की नहीं प्लनेट की मेजॉरिटी गॉड
(01:15:33)
के एक्सिस्टेंस को सही मानती है आप क्यों
(01:15:34)
नहीं मानते
(01:15:38)
[प्रशंसा]
(01:15:39)
ये
(01:15:40)
हेलो हेलो हेलो ये क्रॉस क्वेश्चन का
(01:15:44)
राउंड यहां पर समाप्त होता है और ये बड़ा
(01:15:48)
अच्छा है कि इस तरह से फ्रेगमेंट कर दिया
(01:15:49)
गया है ताकि जो मरकरी ऊपर जा रहा है नीचे
(01:15:51)
जवाब दे
(01:15:52)
जी
(01:15:53)
प्लनेट की ज्यादातर मेजॉरिटी
(01:15:56)
कुछ दूसरे मजहबों के खुदा को मानती है आप
(01:16:00)
नहीं आप तो मेजॉरिटी की बात कर रहे हैं।
(01:16:03)
आप ये कह रहे हैं इविल और गुड को डिसाइड
(01:16:05)
मेजॉरिटी करेगी। मेजॉरिटी जो कर दे वो सही
(01:16:08)
हो जाएगा।
(01:16:10)
इसको जैसा आप ही लोगों ने तय किया है उसी
(01:16:12)
फॉर्मेट को फॉलो कर लेते हैं। हां भाई
(01:16:15)
मैंने तो भले लोगों पे ऐतबार किया पर
(01:16:18)
मॉडरेशन तय किया। जी आपके पास 5 मिनट का
(01:16:21)
वक्त है क्लोजिंग आर्गुमेंट है। उसके बाद
(01:16:23)
हम ऑडियंस से क्वेश्चन आंसर लेंगे। जावेद
(01:16:24)
साहब के क्लोजिंग आर्गुमेंट के बाद। ओके
(01:16:26)
टाइम स्टार्ट।
(01:16:27)
बहुत शुक्रिया।
(01:16:28)
हमारा जो टॉपिक है डस गॉड एक्सिस्ट। मैं
(01:16:31)
इस पे इतने एकेडमिक तैयारी करके आया था।
(01:16:34)
मुझे था कि मैं मैंने सोचा था कि कई सारे
(01:16:36)
मैं आर्गुमेंट्स दूंगा। लेकिन वक्त की भी
(01:16:38)
किल्लत और जावेद साहब बार-बार इधर-उधर चले
(01:16:41)
जा रहे थे तो उसको भी थोड़ा एंटरटेन करना
(01:16:43)
पड़ गया। डस गॉड एक्सिस्ट पे मैं एक ही
(01:16:45)
आर्गुमेंट दे पाया। आर्गुमेंट्स बहुत हैं
(01:16:47)
और डेफिनेटिव आर्गुमेंट्स हैं और मेरे
(01:16:50)
आर्गुमेंट को किसी एक राउंड में भी
(01:16:52)
इन्होंने एंटरटेन नहीं किया और रेफ्यूट
(01:16:53)
नहीं किया है। एक राउंड में भी नहीं। एक
(01:16:56)
राउंड में भी नहीं। और ना ही
(01:16:58)
अभी अभी आपका क्लोजिंग आर्गुमेंट आएगा।
(01:17:00)
बता देना।
(01:17:00)
आर्गुमेंट ऑफ कंटिंजेंसी सर।
(01:17:02)
अरे मैं आपसे कई बार कह चुका हूं
(01:17:04)
कंटिंजेंसी का मतलब
(01:17:05)
अब मैं कैसे समझाऊं [हंसी] आपको? आपस में
(01:17:07)
हां आप
(01:17:07)
और कितने आसानी से समझाऊं मैं मुझे तो
(01:17:09)
नहीं समझ में आ रहा है। बस आप अपनी
(01:17:12)
कंटिंजेंसी उर्दू में बोल सकते हैं। आप
(01:17:15)
अपनी बात पूरी कर लें आखरी चार मिनट
(01:17:17)
दूसरी चीज
(01:17:20)
जस्ट अ मिनट प्लीज मैम कैन आई टॉक?
(01:17:24)
दूसरी चीज ये है कि आपने एक तो इसका जवाब
(01:17:27)
नहीं दिया। दूसरा आपने गॉड के ना होने पर
(01:17:29)
कोई डेफिनेटिव आर्गुमेंट नहीं दिया। सिर्फ
(01:17:31)
मजहब पे बात कर रहे हैं आप। मजहब तो आज
(01:17:33)
हमारा टॉपिक ही नहीं था। आज तो हमारा
(01:17:36)
टॉपिक हुआ आप मजहब से ले लेकर आईएस आईएस
(01:17:38)
तक चले गए भाई हमारा क्या ताल्लुक है उससे
(01:17:40)
वी कंडेम देम और उसका गॉड से क्या ताल्लुक
(01:17:42)
है अगर कोई गलत काम कर रहा है किसी ने
(01:17:45)
किसी को कत्ल किया किसी ने किसी का रेप
(01:17:47)
किया उसको सजा मिलनी चाहिए और आपके पास
(01:17:49)
कोई भी कोई भी रैशन स्ट्रांग फाउंडेशन ऑफ
(01:17:53)
मोरालिटी नहीं है। आपने कहा कि मेजॉरिटी
(01:17:56)
तय करेगी सोसाइटी की वो सही होगा। मैंने
(01:17:58)
कहा हिटलर को फिर आप सही कहेंगे। नहीं
(01:18:00)
नहीं नहीं प्लनेट की सोसाइट की मेजॉरिटी
(01:18:03)
तय करेगी। तो प्लनेट की मेजॉरिटी गॉड की
(01:18:05)
एक्सिस्टेंस को मानती है। आप कह रहे हैं
(01:18:06)
ये रिलीजियस है। तो यानी आपके पास कोई
(01:18:09)
स्ट्रांग फाउंडेशन नहीं है ऑब्जेक्टिव
(01:18:11)
मोरालिटी का। ऑब्जेक्टिव मोरालिटी का अगर
(01:18:13)
कोई फाउंडेशन है तो वो सिर्फ गॉड है। गॉड
(01:18:16)
है, गॉड है। थैंक यू। [प्रशंसा]
(01:18:18)
जी। ये मुफ्ती शमाइल नदवी साहब का
(01:18:22)
क्लोजिंग आर्गुमेंट था। अब हमारे पास जी
(01:18:25)
मैं
(01:18:26)
जी। [हंसी]
(01:18:28)
ये बड़ा अच्छा है कि दोनों लोगों को
(01:18:32)
मॉडरेटर से शिकायत भी और बोल रहे हैं भाई
(01:18:34)
हमारी शाबाशी भी तो करते चलो। अब मेरी बात
(01:18:37)
जी आपके पास जावेद अख्तर साहब 5 मिनट का
(01:18:40)
वक्त है। ये आपका क्लोजिंग आर्गुमेंट है।
(01:18:42)
टाइम रिसेट कर दें। जी
(01:18:45)
देखिए बहुत सारी बातें हैं। गॉड का
(01:18:47)
डेफिनेशन दुनिया के किसी भी रिलजन में है
(01:18:49)
कि वो पोटेंट है। वो भी प्रेजेंट है। ही
(01:18:52)
इज़ जस्ट ही इज़ काइंड। ही लव्स यू एंड सो
(01:18:56)
ऑन।
(01:18:57)
मैं जब दुनिया देखता हूं तो मुझे कोई ऐसा
(01:18:59)
सुप्रीम पावर यहां दिखाई नहीं देती है जो
(01:19:03)
इंसान की बेबूती के लिए कुछ कर रही हो
(01:19:05)
कमजोर को बचा रही हो मदद कर रही हो जालिम
(01:19:08)
को पीछे हटा रही हो मैंने देखा है तारीख
(01:19:10)
में नहीं एक तो अगर है और ये देख रहा है
(01:19:14)
तमाशा तो उसका होना ना होना बराबर है दो
(01:19:18)
ये कि
(01:19:20)
ये जो है जब आप ये कहते हैं कि कायनात
(01:19:24)
जिसकी कंटिंजेंसी है देखिए वो लफज़
(01:19:27)
इस्तेमाल किया मैंने तो ये कैसे हो सकती
(01:19:30)
है और फौरन आप सरेंडर कर देते हैं कि
(01:19:33)
जाहिर है कि इसका बनाने वाला तो इससे
(01:19:35)
10,000 गुना ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड होगा।
(01:19:37)
उस पे आपके होने पे कोई ऐतराज नहीं है।
(01:19:40)
उसे वो टाइमलेस है। वो पहले से था टाइम तो
(01:19:43)
बहुत बाद में आया। ये सब आप मानने को
(01:19:45)
तैयार है। जिसका आपके पास कोई सबूत नहीं।
(01:19:48)
आपके पास कोई रीज़ नहीं है। आपकी तारीफ
(01:19:51)
क्या है मजहबों की? बिलीफ की जो खुदाओं का
(01:19:54)
बिलीफ है ये कॉन्सेंटली गलत साबित होता
(01:19:57)
रहा है। मतलब आप कहें कि एस्टोटिस के
(01:19:59)
जमाने में तो सब जाहिल थे। वो भी इतने ही
(01:20:02)
यकीन से खुदा पे यकीन रखते थे जो अब नहीं
(01:20:04)
रहा।
(01:20:06)
ये भी नहीं रहेगा। आप लिख लीजिए और इसके
(01:20:10)
आसार आपको दुनिया में दिखाई देना शुरू हो
(01:20:13)
चुके हैं। ये बहस क्या आज से 100 साल पहले
(01:20:16)
इस तरह हो सकती थी?
(01:20:18)
यहां तक तो आपको हम ले आए हैं। तो
(01:20:24)
[प्रशंसा] सर सर
(01:20:26)
अरे इनको मदद की जरूरत नहीं भाई। ये सेल्फ
(01:20:29)
सफिशिएंट आदमी है। आप क्यों इनकी मदद कर
(01:20:30)
रहे हैं?
(01:20:31)
सर सर सर सर प्लीज प्लीज
(01:20:34)
तो ये जो है तमाम बातें अपनी जगह है। ये
(01:20:37)
एक पैकेज है। आप अकेले कोई आदमी ऐसा नहीं
(01:20:40)
है जो सिर्फ गॉड को मानता हो। उसके साथ
(01:20:42)
बहुत पैराफनेलिया आता है। अलग-अलग
(01:20:44)
पैराफनेलिया आते हैं। दे आर ओनली दे हैव
(01:20:48)
ऑलवेज क्रिएटेड इन द सोसाइटी। मैं तो आपको
(01:20:52)
सीधा ऑफर देता हूं कि दुनिया में 10
(01:20:55)
इंपॉर्टेंट बिलीव्स है। आप एक मानते हैं
(01:20:58)
नौ नहीं मानते। नौ में आप एथिस्ट है। नौ
(01:21:01)
को आप बिल्कुल रीज़नेबली मेरी तरह देखते
(01:21:03)
हैं।
(01:21:05)
तो 90 मजहबी आदमी भी 90% एथिस्ट है। वो
(01:21:09)
दूसरे खुदा नहीं मानता। एक को मानता है
(01:21:11)
अपना वाला बाकियों को कहता है गलत है।
(01:21:16)
अगर आप मानना ही बंद कर दे तो आपका 10%
(01:21:18)
चांस है कि आप सही है और 90% चांस है कि
(01:21:21)
आप गलत हैं। मेरा मशवरा है आप मानना छोड़
(01:21:23)
दिए तो 50% चांस होगा कि आप सही हैं और
(01:21:26)
50% चांस होगा। 40% आप गेन करेंगे बाय
(01:21:30)
बिकम एन एथ।
(01:21:33)
[प्रशंसा]
(01:21:36)
ये एक फसूदा ख्याल है। ये खत्म हो रहा है।
(01:21:40)
हो सकता है मेरी जिंदगी में ना हो। लेकिन
(01:21:42)
ये हो जाएगा। जो बातें ये इनको आप
(01:21:46)
मेटाफिजिकल ये वो ऐसे रिस्पेक्टेबल टर्म
(01:21:49)
दे दिए। ये तो उन लोगों के हैं जिन्हें ना
(01:21:51)
फिजिक्स मालूम थी ना मेटा मालूम था। ये
(01:21:54)
उन्होंने आपको दिए हैं।
(01:21:57)
जी बहुत शुक्रिया आप दोनों लोगों का और अब
(01:22:00)
इस बातचीत का आखिरी राउंड शुरू होगा। डस
(01:22:03)
गॉड एक्सिस्ट की यह बहस मुफ्ती शमाइल नदवी
(01:22:06)
और जावेद अख्तर साहब के बीच आप लोग अपने
(01:22:09)
अपने हाथ ऊपर करेंगे मैं यहां से तय
(01:22:11)
करूंगा और माइक हमारे पास है क्या एक ही
(01:22:14)
माइक है ऑडियंस के लिए दो माइक है एक इस
(01:22:17)
तरफ एक इस तरफ ठीक है तो जी सबसे पहले
(01:22:20)
हमारी सहयोगी है मारिया मारिया शकी जी
(01:22:23)
पूछिए सवाल थोड़ा सा रुकेंगे ताकि कैमरे
(01:22:26)
का फ्रेम आप पर आ जाए आपकी तो प्रैक्टिस
(01:22:28)
है टीवी की जी
(01:22:30)
नवी साहब मैं
(01:22:33)
खुदा को मानती हूं। पहले मैं इसी प्रमाइस
(01:22:35)
से शुरू कर रही हूं और यह बता रही हूं
(01:22:37)
आपको। मैं मानती हूं। लेकिन कुछ कुछ सवाल
(01:22:40)
है जो जावेद साहब ने उठाया। उसका जवाब
(01:22:43)
आपको देना चाहिए। पहला सवाल ये के गजा में
(01:22:47)
सालों से छोटे बच्चे मर रहे हैं। वो उनको
(01:22:52)
अगर खुदा मर्सफुल है। हम मानते हैं कि
(01:22:55)
अल्लाह ताला में बहुत ताकत है तो वो बच्चे
(01:22:58)
क्यों मर रहे हैं? दूसरी बात ये कि अगर
(01:23:02)
कंटिंजेंसी की जो आप बात करते हैं पूरे
(01:23:04)
मुस्लिम मुालिक
(01:23:06)
मिलकर के भी उन गजा के बच्चों को क्यों
(01:23:09)
नहीं बचा पा रहे हैं? क्योंकि अगर वो
(01:23:12)
चाहते क्योंकि अल्लाह ताला उन पर हुकूमत
(01:23:15)
करते हैं। सब पर हुकूमत करते हैं तो वो
(01:23:17)
उनको क्यों नहीं बचा?
(01:23:18)
जी थैंक यू। थैंक यू वेरी मच। बहुत अच्छा
(01:23:21)
किया। आपने इस चीज को जिक्र कर दिया। मैं
(01:23:22)
इसको और अच्छे से एक्सप्लेन करने की कोशिश
(01:23:24)
करता हूं। देखें जहां तक आपने कहा कि गजा
(01:23:28)
के बच्चों को मारा जा रहा है। देखिए दो
(01:23:30)
वर्ल्ड व्यू है। एक एथिस्टिक वर्ल्ड व्यू
(01:23:32)
एक थिस्टिक वर्ल्ड व्यू है। बच्चे मर रहे
(01:23:35)
हैं दोनों वर्ल्ड व्यू में लेकिन हमारा
(01:23:38)
वर्ल्ड व्यू कह रहा है कि रिकेंस है। ये
(01:23:40)
कह रहे हैं कि उनका मर उनका मरना बेकार
(01:23:42)
जाने वाला है। कोई उसका रिकेंस नहीं है।
(01:23:44)
क्योंकि इनके यहां आखिरत और अल्लाह का कोई
(01:23:46)
तसवुर या गॉड का कोई तसवुर नहीं है। आपने
(01:23:49)
ये सवाल किया कि गॉड मर्सफुल है। क्यों
(01:23:52)
नहीं रोकता? ये मैंने बताया कि ये
(01:23:54)
मिसकंसेप्शन है लोगों के दरमियान कि गॉड
(01:23:57)
को सिर्फ मर्सफुल और ओमनीपोटेंट समझते
(01:23:59)
हैं। गॉड के सिर्फ यही दो एट्रिब्यूट्स
(01:24:01)
नहीं है। गॉड के कई सारे एट्रिब्यूट्स
(01:24:03)
हैं। उनमें से अल हकीम भी है। उनमें से
(01:24:06)
सॉरी ऑल ऑल ऑल वाइज भी है। ऑल नोइंग भी
(01:24:09)
है। लिहाजा अगर इस दुनिया में किसी को
(01:24:12)
तकलीफ आ रही है और गॉड उसको नहीं रोक रहा
(01:24:15)
है। वो इसलिए नहीं रोक रहा है क्योंकि
(01:24:17)
इंसानों को फ्री विल दिया गया है। ठीक इसी
(01:24:19)
सुनिए सुनिए। ठीक इसी तरीके से अगर एक
(01:24:22)
डॉक्टर किसी छोटे बच्चे को इंजेक्शन लगा
(01:24:24)
रहा है उसे तकलीफ पहुंच रही है। उसके
(01:24:26)
लिमिटेड पर्सपेक्टिव के ऐतबार से ये गलत
(01:24:28)
हो रहा है और डॉक्टर बुरा है। लेकिन जब आप
(01:24:31)
ब्रॉडर पिक्चर को देखेंगी आपके और हमारे
(01:24:34)
पास सिर्फ एक पिक्सल है। हमें इतना नजर आ
(01:24:36)
रहा है कि गजा में कत्ल हो रहा है। लेकिन
(01:24:38)
इसके पीछे कितना रिक्पेंस उनको मिलने वाला
(01:24:41)
है। पूरा पिक्चर गॉड के पास है। तो एक
(01:24:43)
पिक्सल से आप पूरे पिक्चर को कभी भी जज
(01:24:46)
नहीं कर सकती।
(01:24:46)
आप आप इसमें कुछ जोड़ना चाहेंगे? आपको कुछ
(01:24:49)
बोलना है इसमें? मैं ये बोल रहा हूं के
(01:24:51)
भाई आपने बहुत अच्छा जस्टिफिकेशन दिया ये
(01:24:54)
आप वो जो वहां के प्राइम मिनिस्टर है
(01:24:56)
इजराइल के उन्हें भेजिए वो बहुत खुश होंगे
(01:24:58)
आप जस्टिफिकेशन दे दे ना कि अगर गॉड नहीं
(01:25:00)
है तो बच्चे क्यों मर रहे हैं आप बताएं
(01:25:03)
वो ये सवाल पूछ रहे हैं कि अगर आप ईश्वर
(01:25:05)
का अस्तित्व नहीं मानते हैं तो उन बच्चों
(01:25:07)
की मौत को आप कैसे इंटरप्रेट करते हैं
(01:25:12)
भाई ये दुनिया जो है जो ताकतवर लोग होते
(01:25:14)
हैं वो एक नाइंसाफी करते हैं
(01:25:17)
तो ये अच्छा काम है आपके नजदीक तो नेचर
(01:25:19)
नाइंसाफी पे मबनी है।
(01:25:21)
अरे मेरे भाई आप नेचर की कहां बात कर तो
(01:25:23)
इंसान की बात
(01:25:24)
तो फिर जब मैं इंसान की बात कर रहा था आप
(01:25:26)
नेचर की बात करने लग गए।
(01:25:27)
क्रॉस एग्जामिनेशन मुझे बोलने नहीं देंगे
(01:25:30)
तो अलग बात है। आप बोलिए मैं मुझे कोई
(01:25:33)
नहीं क्रॉस एग्जामिनेशन
(01:25:36)
तो लेने दीजिए। क्या बात है?
(01:25:38)
बात ये है कि ह्यूमन सोसाइटी तभी साथ में
(01:25:42)
रह सकती है जब वो मोहब्बत से एकता से एक
(01:25:45)
दूसरे के एतराम करके रहे हो। इसके अलावा
(01:25:47)
पॉसिबल नहीं है। अकेले तो इंसान रह ही
(01:25:49)
नहीं सकता। वहां पर कुछ लोग हैं जो फाउल
(01:25:52)
करते हैं। वो फाउल हम हमेशा से तारीफ में
(01:25:55)
होता आया है। आज ये हो रहा है। जो हो रहा
(01:25:58)
है बहुत बुरा हो रहा है। बहुत जालिमाना
(01:26:00)
है। बहुत जाबराना है। उसको आप कहें कि ये
(01:26:03)
बच्चों को कंपनसेशन मिल जाएगा या इसकी
(01:26:07)
इंजेक्शन है। इंजेक्शन तो हेल्थ के लिए
(01:26:09)
दिया जाता है। आप ये कह रहे हैं कि ये
(01:26:11)
बच्चों की जो धज्जियां उड़ रही है। ये
(01:26:13)
इंजेक्शन है।
(01:26:15)
ये टेस्ट है। यह टेस्ट है और उस टेस्ट में
(01:26:17)
उनको उनको ऐसा रिकॉन्फेंस मिलेगा जो आपके
(01:26:20)
तसवुर के बाहर है।
(01:26:21)
ये आप तीन बरस के बच्चे को बारूद से उड़ा
(01:26:24)
के टेस्ट ले रहे हैं।
(01:26:25)
वाह!
(01:26:25)
वो नहीं ले रहा है। खुदा नहीं उड़ा रहा है।
(01:26:27)
इजराइल उड़ा रहा है।
(01:26:28)
ये अगला सवाल लेते हैं। अगला सवाल लेते
(01:26:32)
हैं प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल।
(01:26:34)
मुफ्ती साहब एक निवेदन आपसे है। कम से कम
(01:26:37)
एक
(01:26:37)
थोड़ा सा माइक क्लोज कर।
(01:26:38)
एक रिलीजियस और फिलोसफिकल
(01:26:41)
कर रहे हैं। कर रहे हैं। कर मैम मैम
(01:26:42)
प्लीज।
(01:26:43)
एक रिलीजियस और फिलोसोफिकल ट्रेडिशन है।
(01:26:46)
जो ब्रह्मांड को यानी यूनिवर्स को ही
(01:26:49)
अंतिम मानती है। सर्वम खलदम ब्रह्मम दिस
(01:26:53)
इज छंद उपनिषद एंड इट कंप्लीटली रूल्स आउट
(01:26:57)
द एकिस्टेंस और नेसेसिटी आपके शब्दों में
(01:27:01)
नेसेसिटी ऑफ़ अ क्रिएटर। द क्रिएशन इटसेल्फ
(01:27:04)
इज द क्रिएटर। तो एक मिनट प्लीज। दूसरा जो
(01:27:08)
सवाल आपने अभी जो आप बार-बार कह रहे हैं
(01:27:10)
कि भगवान विद्वान भी है वाइज सब जानने
(01:27:14)
वाला। तो अगर विडम में दुनिया भर के पापों
(01:27:17)
और अत्याचारों को बर्दाश्त करना शामिल है
(01:27:20)
तो फिर इसका मतलब ये हुआ कि अगर मैं फ्री
(01:27:22)
विल से उसको अपोज करता हूं तो ईश्वर की
(01:27:25)
विज़डम और मेरी फ्री विल में कंट्राडिक्शन
(01:27:27)
है। बिकॉज़ व्हेन आई एम अपोजिंग व्हाटएवर
(01:27:29)
हैपनिंग इन गाजा देन आई एम अपोजिंग द
(01:27:31)
गॉड्स विल और गॉड्स विज़डम जवाब ले वैसे तो
(01:27:34)
गॉड की विज़डम एक मिनट सौरभ प्लीज सर ये एक
(01:27:38)
एक जुमला गॉड की विज़डम है कि गाजा में जो
(01:27:40)
कुछ हो रहा है वो हो रहा है। मैं उसका
(01:27:42)
अपोज कर रहा हूं। तो मैं बोर्ड की विज़डम
(01:27:44)
के खिलाफ जा रहा हूं। एक सवाल। दूसरा यह
(01:27:48)
नहीं नहीं आपने दो ऑलरेडी।
(01:27:49)
एक सर
(01:27:50)
आप और सवाल कर लें लेकिन मुझे दो जवाब दे
(01:27:52)
दे। पहले आपने ये कहा सुनिए मेरी बात
(01:27:55)
सुनिए।
(01:27:56)
के मुताबिक थोड़ा ठीक हो रहा है ना? नहीं
(01:27:58)
नहीं हो रहा है। ठीक नहीं हो रहा है। मैं
(01:27:59)
बता रहा हूं क्या हो रहा है। आप तशरीफ़
(01:28:00)
रखिए। मैं बता रहा हूं क्या हो रहा है।
(01:28:02)
लेट मी कंप्लीट प्लीज।
(01:28:03)
एक सेकंड गाइज़ एक सेकंड। ये देखिए ऐसा है
(01:28:06)
कि ये सब बड़ा आपस में विचार विमर्श के
(01:28:09)
बाद यह तय हुआ था कि कुछ नियम बना लिए
(01:28:12)
जाएं ताकि एक टाइम बाउंड बातचीत चले और
(01:28:16)
भाई साहब आप बड़ा जरूरी काम कर रहे हैं
(01:28:18)
लेकिन कैमरे के फ्रेम में आके उस काम को
(01:28:20)
गड़बड़ कर दे रहे है ठीक है गुरु अब मेरे
(01:28:23)
को कहीं का गुस्सा कहीं निकालना था सॉरी
(01:28:26)
[हंसी]
(01:28:26)
नहीं कोई गुस्सा नहीं है जी तो प्रोफेसर
(01:28:29)
ने सवाल पूछे आप उनके जवाब दें और थोड़ा
(01:28:31)
ये सब लोग थोड़ा ख्याल रखें भाई सवाल
(01:28:34)
संक्षिप्त रखें। आपने दो सवाल किए। सबसे
(01:28:37)
पहला ये कहा कि हमारे पास ये कांसेप्ट है
(01:28:39)
कि ये यूनिवर्स खुद नेसेसरी बीइंग है।
(01:28:42)
क्रिएशन इटसेल्फ इज द क्रिएटर।
(01:28:45)
हाउ इररेशनल इज दिस? कि मैं एकिस्ट करूंगा
(01:28:48)
बाद में लेकिन अभी एक्सिस्ट कर भी रहा
(01:28:50)
हूं। यानी एक ही टाइम में एक्सिस्ट भी कर
(01:28:51)
रहे हैं, नहीं भी कर रहे हैं। दिस इज नॉट
(01:28:53)
ट्रू। दूसरी चीज आपने कहा कि अगर इजराइल
(01:28:57)
में सॉरी माफ कीजिएगा। इजराइल डजंट
(01:29:00)
एक्सिस्ट ऑक्यूपाइड पेस्टाइन में अगर
(01:29:04)
[प्रशंसा]
(01:29:07)
अगर ऑक्यूपाइड पैलेस्टाइन में बच्चों को
(01:29:09)
मारा जा रहा है फ्री विल की वजह से और गॉड
(01:29:12)
नहीं रोक रहा ये कंट्राडिक्शन है ये बताइए
(01:29:14)
कि एक एग्जाम में एक बच्चा गलत आंसर लिख
(01:29:17)
रहा है सुनिए एग्जामिनर चाहे तो रोक रोक
(01:29:19)
सकता है क्यों नहीं रोक रहा है जो ये
(01:29:22)
कंट्राडिक्शन है या कंट्राडिक्शन नहीं है
(01:29:26)
नहीं सर ये आपस में
(01:29:29)
ये क्या आपका सवाल माइक पे माइक पे बोल
(01:29:32)
माइक माइक
(01:29:33)
फ्री विल दिया गया है टेस्ट के लिए
(01:29:36)
अकाउंटेबिलिटी के लिए। अगर फ्री विल नहीं
(01:29:38)
होता तो आप कहते हमें रोबोट बना दिया गया।
(01:29:40)
नॉट प्रजेंट माय पोजीशन। आपकी जो भी
(01:29:42)
पोजीशन मैं अपनी फ्री विल के नाते अपने
(01:29:45)
ह्यूमन विज़डम के नाते गाजा में हो रही
(01:29:47)
अत्याचार का विरोध करता हूं।
(01:29:48)
बिल्कुल करना चाहिए।
(01:29:49)
के हिसाब से मैं गॉड की विज़डम का विरोध कर
(01:29:51)
रहा हूं।
(01:29:51)
बिल्कुल नहीं।
(01:29:52)
जो हो रहा है गॉड
(01:29:53)
बिल्कुल भी नहीं।
(01:29:54)
बिल्कुल भी नहीं। उसका वहां पर गाजा में
(01:29:57)
कत्ल होना ये इंसानों के गलत इस्तेमाल का
(01:30:00)
नतीजा है। फ्री विल के इस्तेमाल का नतीजा
(01:30:02)
है। गॉड इसको गॉड इसका हुक्म नहीं देता।
(01:30:05)
उससे रोकता है। यही तो मसला है ना आपके
(01:30:07)
लिए कांसेप्ट क्लियर है।
(01:30:08)
नहीं नहीं भाई आपने तो बताया था इंजेक्शन
(01:30:09)
लगाने से बच्चे को तकलीफ होती है। ये
(01:30:11)
इंजेक्शन लगा
(01:30:12)
सर आप ऐसे रेटोरिक स्टेटमेंट दे तब तो कोई
(01:30:14)
मसला नहीं समझते रहेंगे। दिस इज अ रेटोरिक
(01:30:16)
स्टेटमेंट। दिस इज नॉट अ लॉजिकल आर्गुमेंट
(01:30:18)
सर। आई एम सॉरी। आई एम सॉरी। आखिरी 30
(01:30:20)
मिनट बड़े मुश्किल होने वाले हैं। जी
(01:30:22)
मुफ्ती साहब आगे बैठे हैं। इनको माइक
(01:30:24)
दीजिए।
(01:30:25)
हां। तरुण माइक आप अपने पास रखिए। आपको
(01:30:28)
कैमरे का फ्रेम पता है।
(01:30:29)
जी।
(01:30:30)
सबसे पहले दोनों को मुबारकबाद।
(01:30:32)
एक सर अपना आप नाम बता दें। आप अमेरिका
(01:30:36)
में शिकागो में रहते हैं। इतना मुझे याद
(01:30:37)
है।
(01:30:37)
बताएं आपको। यासिर नदीम अलवाजदी मेरा नाम
(01:30:39)
है। जावेद सर आपसे एक क्वेश्चन है
(01:30:42)
इनफिनिटी इंग्रेस के ताल्लुक से। एक
(01:30:43)
हाइपोथेटिकल सिनेरियो है। मसल अगर आप
(01:30:46)
सर माइक थोड़ा सा प्लीज क्लोज रख। जी अगर
(01:30:48)
आप शायर इसलिए हैं कि आपके कोई उस्ताद
(01:30:50)
शायर थे और वो इसलिए शायर थे कि उनके कोई
(01:30:53)
उस्ताद शायर थे और इसी तरीके से हम माज़
(01:30:55)
में पीछे चलते चलते चले जाएं और कहीं ना
(01:30:58)
रुके तो माफ़ कीजिएगा आप कभी शायर नहीं हो
(01:31:00)
सकते लेकिन आप शायर हैं। आपका शायर
(01:31:02)
एक्सिस्ट करता है। इसका मतलब यह है कि आप
(01:31:04)
कहीं ना कहीं रुके हैं। तो मेरा सवाल यह
(01:31:07)
है कि क्या आप इंफिनिट रिग्रेस ऑफ कॉजेस
(01:31:10)
को लॉजिकल फैलेसी मानते हैं या नहीं
(01:31:13)
मानते? हां या ना?
(01:31:17)
मैं इन्हें लॉजिकल फैलेसी नहीं मानता हूं।
(01:31:21)
लेकिन मैं मेरा प्रॉब्लम यह है कि जब मैं
(01:31:23)
नहीं मानता हूं तो आई विल कंटिन्यू विद
(01:31:25)
दिस लॉजिक जो फैलेसी नहीं हो। आप एक जगह
(01:31:29)
रुक जाते हैं जाके। आप कहते हैं ये गेंद
(01:31:32)
कैसे बनी? ये जजीरा कैसे बना? ये समंदर
(01:31:34)
कैसे बना? ये जमीन कैसे बनी? और अचानक गॉड
(01:31:37)
पे जाके आपको ब्रेक लग जाता है। एक बार आप
(01:31:40)
सवाल नहीं करते कि भाई इनको बनाने वाला तो
(01:31:42)
इनसे भी कॉम्प्लिकेटेड होगा। वो कैसे बना?
(01:31:45)
उसके बारे में आपने इत्मीनान कर लिया वो
(01:31:47)
हमेशा से है। तो अगर आप उसे हमेशा से
(01:31:50)
मानते हैं तो फिर ये मान लीजिए कि कायनात
(01:31:52)
हमेशा से क्या तकलीफ?
(01:31:54)
फिर हम वजूद नहीं आते।
(01:31:55)
जी हैं?
(01:31:56)
हम मौजूद नहीं।
(01:31:57)
सर सर सर क्यों नहीं होते? मैं बताऊंगा
(01:31:58)
प्लीज प्लीज।
(01:31:59)
जैसे मैंने मिसाल दी आपके शेर की।
(01:32:02)
आपका शेर कभी वजूद में ना आता अगर शायरी
(01:32:04)
इसी तरह चलता रहे हमेशा।
(01:32:05)
जी माइक माइक मेरे ख्याल से। इनफिनिट
(01:32:08)
रिग्रेस का कांसेप्ट क्लियर नहीं हो पाया।
(01:32:09)
ऐसा रहने दे। लेट्स मूव ऑन।
(01:32:11)
ठीक है। हां। थोड़ा सा मॉडरेटर का भी ख्याल
(01:32:14)
रखें। नहीं नहीं आपने तो रखा है। आपने रखा
(01:32:16)
है। यहां पे गौहर रजा साहब है वो भी एक
(01:32:18)
सवाल पूछना चाहते हैं।
(01:32:21)
माइक लीजिए तो ऑन कर
(01:32:26)
पहले तो ये कह दूं के
(01:32:29)
मैं उन बच्चों से शर्मिंदा हूं जिनको गजा
(01:32:33)
में कत्ल किया गया।
(01:32:36)
[प्रशंसा]
(01:32:37)
क्योंकि हमारे होते हुए कत्ल किया गया।
(01:32:39)
लेकिन उससे ज्यादा शर्मिंदगीगी इस बात से
(01:32:41)
हुई कि मुझे लगा कि मुफ्ती साहब उसको
(01:32:45)
जस्टिफाई कर रहे हैं।
(01:32:47)
बिल्कुल भी नहीं। आप आप गलत मुझे लगा मैं
(01:32:50)
गलत हो सकता हूं। गलत मैं सवाल पूछ रहा
(01:32:52)
हूं। सवाल मैं सवाल पूछ रहा हूं।
(01:32:54)
मैं जावेद भाई से डिसए्री करता हूं।
(01:32:57)
देखिए अगर देखिए ऐसा एक सेकंड आप सर वेट
(01:33:01)
वेट। अरे आप मैं कुछ मेरे पहले मुझे अपनी
(01:33:04)
बात कह लेने दीजिए। अगर ऑडियंस तय करेगी
(01:33:06)
तो फिर मॉडरेटर का मतलब नहीं है। मेरा आप
(01:33:08)
सबसे यह कहना है ये बहस दो लोगों के बीच
(01:33:13)
में है। एक तरफ मुफ्ती साहब एक तरफ जावेद
(01:33:15)
साहब। पिछले डेढ़ घंटे से ये लोग
(01:33:18)
अपने-अपने तर्क रख रहे हैं। आपकी इनसे
(01:33:21)
इत्तेफाकी हो सकती है ना इत्तेफाकी हो
(01:33:23)
सकती है। मेरे उस्ताद मुझे सिखा गए हैं कि
(01:33:26)
मुखा मुखम में असहमति की गुंजाइश बची रहनी
(01:33:30)
चाहिए। अगर मैं आपकी बहुत इज्जत करता हूं।
(01:33:33)
गौर साहब आपने जो कमाल की किताबें लिखी
(01:33:36)
साइंटिफिक टेंपरामेंट लेकिन मेरी यह
(01:33:38)
गुजारिश है आप सबसे कि यदि आप इन लोगों ने
(01:33:41)
जो बोला उन पे टिप्पणियां करेंगे तो ना
(01:33:44)
वक्त की पाबंदी रहेगी ना वन शास्त्र आप
(01:33:46)
सवाल पूछ लें उस सवाल में जो बात आ जाए वो
(01:33:48)
आ जाए मैं जावेद साहब से डिसए्री करता हूं
(01:33:52)
इसलिए जावेद साहब से सवाल पूछ रहा हूं
(01:33:54)
आपका सवाल जावेद अख्तर साहब से
(01:33:55)
और सवाल ये है मेरा कि जावेद साहब ने कई
(01:33:58)
बार लॉजिक का इस्तेमाल किया के साइंस में
(01:34:02)
लॉजिक है और रिलजन में लॉजिक नहीं है।
(01:34:04)
मेरा ख्याल यह है कि रिलजन में भी लॉजिक
(01:34:07)
है। लेकिन उस लॉजिक की बेसिस यह है कि आप
(01:34:11)
रुक जाते हैं जिसका जिक्र जावेद साहब ने
(01:34:13)
बार-बार किया। यानी खुदा के तसवुर पे आते
(01:34:16)
हुए, गॉड के तसवुर पे आते हुए रुक जाते
(01:34:18)
हैं। और इसके इसमें सवाल पूछना मतलब
(01:34:23)
फॉरबिटन होता है। सवाल ये है कि क्या
(01:34:26)
जावेद साहब इससे एग्री करते हैं कि साइंस
(01:34:29)
की लॉजिक अलग है और रिलीजन की लॉजिक अलग
(01:34:33)
है। बताइए सर।
(01:34:37)
देखिए तीन चीजें हैं। साइंस है, एक है
(01:34:40)
मंतिक है, इस्तदाल है। और एक जो है कुछ भी
(01:34:44)
नहीं है। फथ है, अकीदा है। मैं अकीदे के
(01:34:49)
लॉजिक का कायल नहीं हूं। मुझे आप इ्तदाल
(01:34:52)
से, लॉजिक से, रीज़्म से समझाइए। मैं मानने
(01:34:56)
को तैयार हूं। मेरा क्या नुकसान होगा?
(01:34:58)
लेकिन ये के अकीदे पे मैं नहीं जा सकता
(01:35:01)
हूं। अकीदे का मतलब है कि तुम ये मान लो,
(01:35:03)
सवाल ना करो। ये नहीं आप सारी बातें करके
(01:35:07)
बड़ी साइंटिफिक बातें करके एक जगह जाके
(01:35:09)
खुदा के हुदूद पे रुक जाते हैं। सरेंडर कर
(01:35:12)
देते हैं। मैं सरेंडर करने को तैयार नहीं।
(01:35:14)
दैट्स ऑल जी ये आगे सर बैठे हुए हैं। इनको
(01:35:18)
माइक दीजिए।
(01:35:19)
भाई वो वो आप पूछना चाह रहे थे ना?
(01:35:21)
नहीं नहीं मैं थैंक यू।
(01:35:23)
जी आपका नाम?
(01:35:24)
आसिम इफ्तखार।
(01:35:25)
आसिम जी पूछिए।
(01:35:27)
सर जावेद सर से सवाल है कि आपने अपने
(01:35:29)
क्लोजिंग
(01:35:30)
माइक थोड़ा करीब। ने क्लोजिंग स्टेटमेंट
(01:35:32)
में ये बात कही थी के मजहब का जो फ्यूचर
(01:35:35)
है वो ज्यादा दिन नहीं जाने वाला है।
(01:35:38)
लेकिन मैं देख पा रहा हूं कि जो ऑक्सफोर्ड
(01:35:40)
यूनिवर्सिटी की एक स्टडी है 2011 में हुई
(01:35:43)
है जिसके 50 एकेडमिशंस ने इसको अंजाम दिया
(01:35:46)
था। उसमें वो ये कहते हैं कि जो फेथ इन
(01:35:51)
गॉड है वो इनबिल्ट है ह्यूमन नेचर के अंदर
(01:35:53)
जिसको हम कहते हैं फितरत के अंदर शामिल है
(01:35:55)
वो। और वो ये कहते हैं कि अगर कोई यह
(01:35:58)
समझता है के मजहब को वो खत्म कर देगा तो
(01:36:02)
ये उसकी गलतफहमी है तो आप इसके बारे में
(01:36:05)
इस स्टडीज के बारे में क्या कहते हैं?
(01:36:07)
ठीक है। मैं उनसे एग्री नहीं करता हूं। वो
(01:36:09)
कौन से प्रोफेसर होंगे? ऐसा
(01:36:10)
आपके पास डाटा है। इन्होंने डाटा के
(01:36:12)
होगा। डाटा क्या हो सकता है? फ्यूचर का
(01:36:15)
डाटा तो नहीं हो सकता ना उनके पास।
(01:36:17)
प्रेजेंट का डाटा हो सकता है। डाटा आपने
(01:36:19)
सुना 100 साल पहले का बाद का डाटा मैंने
(01:36:22)
तो नहीं सुना आज तक। तो आज उनकी ये राय है
(01:36:25)
और होगी राय है। ठीक है। दुनिया में
(01:36:28)
तरह-तरह की राय है लोग। लेकिन मैं समझता
(01:36:30)
हूं कि वक्त के साथ इंसान ज्यादा से
(01:36:32)
ज्यादा रीज़नेबल और लॉजिकल होता जा रहा है।
(01:36:36)
आज आप देखिए वेस्टर्न यूरोप में क्या
(01:36:38)
परसेंटेज है नॉन बिलीवर्स की। बहुत हाई
(01:36:42)
है। वहां चर्च खाली पड़े होते हैं। तो
(01:36:45)
अल्टीमेटली
(01:36:47)
तो इंसान कोई ऐसी बात बहुत अरसे तक नहीं
(01:36:50)
मान सकेगा। चाहे गलत या सही जो उसे उसके
(01:36:55)
दिमाग को, उसके ज़हन को, उसके लॉजिक को
(01:36:57)
अपील ना करे। वो कह रहे हैं तो ऑक्सफोर्ड
(01:37:00)
के होंगे तो कैमरेज के होंगे तो मुझे क्या
(01:37:02)
लेना देना? उनका डाटा मुस्तकबिल का नहीं
(01:37:05)
हो सकता है।
(01:37:06)
जी दीपक हां पूछिए। मैं आऊंगा अभी पीछे की
(01:37:09)
साइड भी आऊंगा। माइक व भेजूंगा दो तीन
(01:37:11)
सवाल के लिए। जी
(01:37:12)
जावेद साहब आपसे सवाल है। नमस्ते।
(01:37:14)
अरे भाई
(01:37:15)
सर अगर आप ही लोगों को तय करना है तो फिर
(01:37:17)
सब फिर 200 लोग तय कर लें।
(01:37:19)
नहीं सर प्लीज डोंट डू दिस सर। सर,
(01:37:21)
एवरीबडी हैज़ अ राइट, सर। बट, वी कैन ओनली
(01:37:24)
टेक सिलेक्टेड क्वेश्चन। इन्होंने सर, यह
(01:37:27)
यंग लोग भी हैं, तो इनकी यह उतने यंग भाई
(01:37:30)
आप यंग है कि नहीं हैं?
(01:37:31)
वो कह रहे हैं वो भी यंग है साहब। आप उनकी
(01:37:33)
नौजवानी पर दावा उनको ही करने दे।
(01:37:37)
मुफ्ती साहब आप यंग, हां पूछिए।
(01:37:40)
अरे भैया साहब मेरा सवाल ये है।
(01:37:42)
भी तो पूछो। बस आपसे एक सवाल है। जैसे
(01:37:46)
थीस्टों के पास अपने जो ईश्वर को मानते
(01:37:48)
हैं उनके पास अपने सोशल गेट टुगेदर्स हैं।
(01:37:49)
पांच रोज आज क्रिसमस आने वाला है। होली
(01:37:51)
है, दिवाली है, ईद है। एथिस्ट क्या ऑफर कर
(01:37:54)
रहे हैं? मतलब मैं इनकी दुकान से दूर में
(01:37:55)
आना चाहता हूं उस तरफ। पर मैं अट्रैक्ट
(01:37:57)
नहीं हो पा रहा हूं। मैं सोशल गेट
(01:37:58)
टुगेदर्स क्या है आपके पास?
(01:38:01)
वो ये कह रहे हैं कि जो धार्मिक लोग हैं,
(01:38:04)
अलग-अलग धर्म के लोग उनके उत्सव, त्यौहार,
(01:38:07)
कम्युनिकेशन बहुत हैं। अब आपको मैं एक
(01:38:09)
सुनाता हूं। यहां हिस्टोरियन भी बैठे हैं।
(01:38:11)
मृदुला जी आप बताइएगा सही है क्या? ये एक
(01:38:16)
कॉन्सेंटाइन एक ग्रीक रोमन भाषा था जो
(01:38:19)
क्रिश्चियनिटी आने के 400 साल बाद उसने
(01:38:22)
डिसाइड किया कि मैं क्रिश्चियन हो जाऊंगा।
(01:38:24)
मेरी पूरी स्टेट कैंसिल हो जाएगी। उस
(01:38:26)
जमाने में ऐसे ही होता था राजा जो धर्म
(01:38:28)
इ्तियार करता था वो जनता भी कर लेती थी।
(01:38:32)
इसलिए कि वो हो गया था बैंककरप्ट और उसे
(01:38:35)
जो मेडिटेरियन कोस्ट के रिच क्रिश्चियन वो
(01:38:39)
थे मर्चेंट उससे पैसा चाहिए था। तो उसने
(01:38:42)
कहा यार क्रिश्चियन हो जाओ। तो उसने अपने
(01:38:44)
वजीर से कहा कि भाई ये हिस्ट्री है के अब
(01:38:48)
हम लोग क्रिश्चियन हो जाते हैं। कहते सर
(01:38:50)
हो जाएंगे कोई प्रॉब्लम नहीं है। लेकिन एक
(01:38:52)
प्रॉब्लम ये है कि 17 दिसंबर से 25 दिसंबर
(01:38:57)
तक जो पेगम फेस्टिवल होता जो पेग स्टेबल
(01:39:00)
हो जो फेस्टिवल होता है वो बंद हो जाएगा।
(01:39:03)
इसलिए कि हम क्रिश्चियन हो गए तो होगा
(01:39:05)
नहीं। तो वो बच्चों को बहुत बुरा लगेगा।
(01:39:08)
पब्लिक को बहुत डे वो बहुत एंजॉय करते
(01:39:10)
हैं। खासतौर से 25 तो उसने कहा हां ये तो
(01:39:13)
सही कह रहे हो। ये जीसस क्राइस्ट की
(01:39:15)
पैदाइश कब थी? कह साहब वो अप्रैल में थी
(01:39:17)
नहीं कट करो वो 25 दिसंबर को है। [हंसी]
(01:39:21)
ये हकीकत है।
(01:39:23)
और 400 साल बाद क्रिश्चियनिटी के अप्रैल
(01:39:26)
से दिसंबर ले आए और इसलिए कि यहां पेगन
(01:39:29)
फेस्टिवल होता था। अब मनाते हैं आप आराम
(01:39:31)
से। ये जो सारे फेस्टिवल हैं ये रिलीजन
(01:39:35)
थे। हर एक को एक एंटरटेनमेंट डिपार्टमेंट
(01:39:38)
चाहिए होता है अपनी कंपनी चलाने के लिए।
(01:39:40)
तो ये रिलीजंस ने ये सेकुलर त्यौहार थे
(01:39:44)
जिन्हें रिलीजंस ने ले लिया है। ये मौसम
(01:39:46)
के थे, फसलों के थे, किसानों के थे उसको
(01:39:49)
आपने लेके रिलीजियस रंग दे दिया। ये कोई
(01:39:53)
रिलीजन से थोड़ी आएंगे। आप आप अच्छा हमें
(01:39:57)
देखिए हम तो मुद हैं। हम ईद मनाते हैं। हम
(01:40:00)
दिवाली मनाते हैं। हम होली मनाते हैं। हम
(01:40:02)
क्रिसमस मनाते हैं। मुंबई की फिल्म
(01:40:05)
इंडस्ट्री की सबसे बड़ी होली हमारे घर में
(01:40:07)
होती है। सबसे बड़ी ईद हमारे घर में होती
(01:40:09)
है। वो हमारी सोशल वो है। हमारे यहां
(01:40:13)
हेरिटेज है। ऐसा थोड़ी है कि वी विल थ्रो
(01:40:15)
द बेबी अलोंग वि द वाटर। ये तो अच्छी चीज
(01:40:18)
है। इन्हें रखो। तो बेकार है। फेंक दो।
(01:40:22)
जी। हां। हेलो जी। मेरा सवाल नाधवी जी से
(01:40:26)
है। जैसा कि आपने बोला कि गॉड टाइम के भी
(01:40:30)
परे है और गॉड इतनी कॉम्प्लेक्स चीज है कि
(01:40:33)
उसे ह्यूमन माइंड समझ नहीं सकता और गॉड ने
(01:40:36)
अर्थ पे फ्री वेल भी दे दी है। तो आप अपना
(01:40:39)
वक्त जाया क्यों कर रहे हैं गॉड के बारे
(01:40:41)
में बात करके। अपन को तो बात करनी चाहिए
(01:40:42)
कि सोसाइटी को बेहतर कैसे करें? मैं गॉड
(01:40:45)
वही बताता है सोसाइटी को कैसे बेहतर करें।
(01:40:47)
अभी मैं आपका जवाब देता हूं। आपने कहा कि
(01:40:50)
टाइम पे वो एक्सिस्ट नहीं करता। सो
(01:40:55)
नहीं मेरा सवाल ये है कि जैसा आपने बोला
(01:40:58)
कि गॉड बहुत ही कॉम्प्लेक्स चीज है।
(01:41:01)
मैंने कहा ही नहीं कि कॉम्प्लेक्स है ये
(01:41:02)
तो आपके अल्फाज़ हैं। कॉम्प्लेक्स का लफज़
(01:41:04)
गॉड के लिए सूटेबल नहीं है। क्यों?
(01:41:06)
क्योंकि कॉम्प्लेक्स वो चीजें होती है जो
(01:41:08)
ऑब्जेक्ट हो। गॉड इज नॉट एन ऑब्जेक्ट
(01:41:10)
जिसको आप इंस्ट्रूमेंट के जरिए लेबोरेटरी
(01:41:12)
में जाकर टेस्ट करें। ओह इट्स वेरी
(01:41:14)
कॉम्प्लेक्स। नो वो कोई कार का इंजन नहीं
(01:41:16)
है। वो फिलोसोफिकली
(01:41:18)
नेसेसरी बीइंग ऐसी बीइंग है जो सिंपल
(01:41:21)
बीइंग है। हां आप उसको मुकम्मल तौर पे
(01:41:24)
उसकी तमाम हिकमतों को जान ले और हर चीज को
(01:41:26)
जान ले ये पॉसिबल नहीं है। क्योंकि वो ऑल
(01:41:28)
वाइज है आप ऑल वाइज नहीं है और वो खुदा है
(01:41:31)
वो आपको सारी चीजें बता दे ये जरूरी नहीं
(01:41:33)
है। मेरा सवाल ये नहीं था। मेरा सवाल यह
(01:41:36)
था कि जब गॉड इतना परे है इस दुनिया से कि
(01:41:40)
उसने अर्थ पे फ्री विल भी दी है हम सब
(01:41:42)
ह्यूमंस की फ्री विल है और जो सोसाइटी में
(01:41:45)
हो रहा है वो अपन लोग डिसाइड करेंगे तो
(01:41:48)
अपन लोग डिसाइड नहीं करेंगे ना अपन लोग
(01:41:50)
डिसाइड नहीं करेंगे गॉड जो है गॉड ने वो
(01:41:54)
उसकी जात उसकी एकिस्टेंस टाइम एंड स्पेस
(01:41:56)
से परे है लेकिन वो हमारा टेस्ट ले रहा है
(01:41:59)
और उसी गॉड ने हमें बताया कि तुम्हें क्या
(01:42:01)
करना है क्या नहीं करना है तो जाहिर है उस
(01:42:02)
गॉड की बात सुनेंगे ना हम
(01:42:04)
जी
(01:42:04)
वो पीछे पीछे एक चश्मा लगा है जो मैम खड़ी
(01:42:07)
है उनको दीजिए। हां आप आप
(01:42:12)
जी जी बिल्कुल आएंगे। देखिए मैं कोशिश कर
(01:42:14)
रहा हूं सब तरफ जाने की हां उनको दीजिए
(01:42:16)
माइक जी
(01:42:20)
हेलो सर मैं
(01:42:21)
मैं ओमनी प्रेजेंट नहीं हूं टाइम पाबंद
(01:42:24)
हूं और जहां तक कोशिश कर सकता हूं करूंगा।
(01:42:26)
जी अपना नाम बताइए।
(01:42:28)
मेरा नाम उज्जला है। मैं दिल्ली
(01:42:30)
यूनिवर्सिटी की एक स्टूडेंट हूं और मैं
(01:42:31)
स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया से हूं। अ
(01:42:34)
मेरा सवाल मुफ्ती जी से है कि इस हॉल के
(01:42:37)
इस कमरे में बैठ के हम लोग रेप की
(01:42:39)
मोरालिटी के बारे में फिलॉसफिकली बात तो
(01:42:41)
कर सकते हैं बट असलियत ये है कि रोजमर्रा
(01:42:44)
की जिंदगी में औरतें रेप के थ्रू गुजरती
(01:42:47)
हैं और हम लोग सिर्फ नंबर्स पे इस तरह
(01:42:50)
नहीं देख सकते क्योंकि कितनी औरतें हैं इन
(01:42:52)
कंट्रीज में जहां पे आप बता रहे हैं कि
(01:42:54)
केसेस कम है जिनका एक्सेस है कि वो जाके
(01:42:56)
केस फाइल कर सकें। कितनी औरतें हैं जो
(01:43:00)
वर्किंग
(01:43:01)
जिनको काम करने की आजादी है उन कंट्रीज
(01:43:04)
में। यूरोप में ये आजादी आ गई। यूरोप में
(01:43:06)
ये रूल्स आ गए तो हम आज उसके बारे में बात
(01:43:08)
कर पा रहे हैं।
(01:43:09)
जी जॉब।
(01:43:11)
आपने ये कहा कि कमरे में बंद होकर हम लोग
(01:43:15)
इस पर फिलॉसोफिकली बात कर सकते हैं। लेकिन
(01:43:17)
हकीकत में क्या हो रहा है? वो ग्राउंड
(01:43:20)
लेवल पर क्या हो रहा है, जो बहुत गलत हो
(01:43:22)
रहा है और वो सफर कर रही हैं। आई एग्री?
(01:43:24)
बहुत गलत हो रहा है और जो गलत हो रहा है
(01:43:26)
उसको हमें रोकना है और क्यों रोकना है वो
(01:43:29)
गलत क्यों है? हमारे पास इसका ऑब्जेक्टिव
(01:43:31)
फाउंडेशन है। इनके पास उसका ऑब्जेक्टिव
(01:43:33)
फाउंडेशन नहीं है। मैं ये कहना चाह रहा
(01:43:35)
हूं कि जहां पे भी जुल्म हो रहा है, जहां
(01:43:37)
पे भी औरत पे जुल्म हो रहा है या उसकी
(01:43:39)
इज्जत लूटी जा रही है या उसे तकलीफ
(01:43:41)
पहुंचाई जा रही है। और सिर्फ औरत नहीं
(01:43:43)
किसी इंसान के ऊपर भी जुल्म हो रहा है तो
(01:43:46)
उसके खिलाफ खड़ा होना ये मोरालिटी हमारे
(01:43:48)
पास गॉड के पास से आई है। वरना जावेद साहब
(01:43:51)
तो कह रहे हैं कि जो है मेजॉरिटी डिसाइड
(01:43:53)
करेगी। की तो मेजॉरिटी तो कभी भी बदल सकती
(01:43:54)
है। [प्रशंसा]
(01:43:57)
क्या आप
(01:43:59)
ये थोड़ी सी आपको गलतफहमी है। मैं अगर
(01:44:02)
मेरे जुमले से ये मला निकला या मैंने कहा
(01:44:05)
तो ये जुमला मैं वापस लेता हूं। ये मेरा
(01:44:06)
मतलब ही नहीं था कि मेजॉरिटी डिसाइड
(01:44:09)
[प्रशंसा] कर। मेजरिटी डिसाइड करे तो
(01:44:11)
दुनिया में बड़ी
(01:44:12)
वैसे आपने कहा था ये जुमला। मैं मान रहा
(01:44:14)
हूं।
(01:44:15)
बाद में रीकैप कर लेंगे।
(01:44:16)
अरे एक सेकंड मैं अपनी एक्सप्लेनेशन दे
(01:44:18)
रहा हूं।
(01:44:19)
मुनासिब बात ये है कि हम सब के सब दिल में
(01:44:22)
जानते हैं कि क्या अच्छा है क्या बुरा है
(01:44:24)
हमें पता है अच्छी तरह से जो लोग बुरे काम
(01:44:27)
करते हैं उन्हें भी मालूम अच्छा क्या है
(01:44:29)
यही तो सवाल था हजरत कि फिर ये मोरालिटी
(01:44:31)
आई कहां से
(01:44:32)
क्रॉस एग्जामिनेशन मोरालिटी साथ रहने की
(01:44:35)
डिजायर से आई है।
(01:44:36)
यानी साथ रहकर जो कुछ कह दे जो कुछ कर दे
(01:44:39)
वो हो जाएगा।
(01:44:40)
नहीं तो
(01:44:41)
आप कायदे से रहित सकते हैं जब तक लोगों
(01:44:43)
में मोरालिटी हो। वरना कॉस हो जाएगा।
(01:44:46)
ये आपको कैसे पता?
(01:44:47)
जी। हमने देखा ना जहां मोरिटी काउंस हो
(01:44:50)
गया है। हम देखते हैं।
(01:44:51)
कहां पे देखते हैं?
(01:44:52)
भाई दुनिया में आप क्यों आप कहीं पे अगर
(01:44:56)
गलत हो रहा है इसको आप देखिए आप सर आप
(01:45:00)
एपिस्टमोलॉजी की बात कर रहे हैं मैं
(01:45:01)
ऑनोलॉजी की बात कर रहा हूं मैं आप दोनों
(01:45:04)
लोगों को चाय पोस्ट करूंगा वहां पे क्रॉस
(01:45:06)
एग्जामिनेशन कर लीजिए। अभी ऑडियंस का हक
(01:45:08)
मार रहे हैं आप लोग भाई। जस्ट लोग हैं आप
(01:45:10)
लोग और ये भाई ये
(01:45:12)
हां उधर उधर आएंगे उधर जी सर आएंगे आएंगे।
(01:45:15)
सर सर मेरा नाम लखुर रहमान है और मैं
(01:45:17)
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का स्टूडेंट
(01:45:19)
हूं और जहां तक मुझे पता है कि सर यू आर
(01:45:21)
आल्सो प्रोडक्ट ऑफ अलीगढ़ मुस्लिम
(01:45:23)
मैं भी उसी चंदन का बुलबुल हूं।
(01:45:25)
हां सर तो बड़ी खुशी हुई मुझे जान के कि
(01:45:28)
मैं आपसे मिलूंगा।
(01:45:29)
सवाल
(01:45:29)
सर मेरा सवाल ये है सर सैयद अली रहमा का
(01:45:32)
नजरिया ये था के खुदा के वजूद को अकल के
(01:45:36)
दायरे में रह के तलाश करना ना के पूरी तौर
(01:45:40)
से उसका इंकार कर देना। सर हाउ विल यू
(01:45:43)
डिफाइन इट? नहीं नहीं तो यह तो आप इन्हें
(01:45:45)
बताइए सवाल है कि खुदा का वजूद साबित कर
(01:45:49)
रहे हैं तो सर आपने इनकार रखा है इस वजह
(01:45:52)
से मेरा क्वेश्चन
(01:45:53)
उन्होंने यही सबसे एक सेकंड सर सैयद ने
(01:45:55)
यही कहा है ना कि अकल से आप खुदा के वजूद
(01:45:58)
को साबित नहीं कर सकते यही कहा ना भाई
(01:46:01)
वो उन्होंने कहा है कर सकते हैं और वो कर
(01:46:03)
दिया गया आज
(01:46:04)
वो
(01:46:06)
तलाश करना या साबित करना अक्ल से ताल्लुक
(01:46:10)
अक्ल से नहीं अरे सवाल तो सुन लीजिए
(01:46:12)
जी अक्ल से नहीं हो सकता है। यही कहा ना
(01:46:15)
आपने?
(01:46:16)
अक्ल से हो सकता है।
(01:46:17)
अरे वो यही कह रहे हैं भाई आप बता रहे हो
(01:46:20)
सकता है। वो तो कुछ और
(01:46:23)
आप अगर सर देखो नौजवान
(01:46:25)
ले लो इतनी कमाल की यूनिवर्सिटी है ये।
(01:46:27)
अरे भाई दे दो।
(01:46:29)
अरे भाई मेरी बात सुनो। माइक पे बोलो ताकि
(01:46:32)
जो लाखों लोग देख रहे हैं।
(01:46:34)
माइक दे दो ना।
(01:46:34)
अरे देंगे ना माइक। तुम ठहरो तो।
(01:46:37)
हां सर मेरा सवाल ये था के सर सैयद अल
(01:46:41)
रहमा का एक नजरिया था अपना के खुदा का जो
(01:46:44)
वजूद है उसको अकल के दायरे में रह के तलाश
(01:46:48)
करना है ना कि पूरे तौर से इंकार कर देना
(01:46:51)
है ये ये उनका कांसेप्ट था लेकिन मेरा
(01:46:53)
सवाल ये है कि आप इसको कैसे डिफाइन करते
(01:46:55)
हैं एक्सप्लेन कैसे करेंगे मैं आपसे जानना
(01:46:57)
चाहता हूंकि यू आर द प्रोडक्ट ऑफ अलीगढ़
(01:47:00)
मुस्लिम यूनिवर्सिटी
(01:47:00)
मुझे अली मुझे अक्ल के दायरे में मैंने
(01:47:04)
बहुत तलाश की मुझे मिला नहीं
(01:47:09)
हां ये इधर उधर वो चश्मा लगाए जो हां उनको
(01:47:12)
दे दीजिए
(01:47:14)
जी जी फटाफट पूछिए बस पांच मिनट है पांच
(01:47:16)
मिनट में खत्म हो रहा है हां
(01:47:17)
अस्सलाम वालेकुम मुफ्ती साहब एंड मेरा
(01:47:19)
सवाल मेरा सवाल जावेद अख्तर साहब से
(01:47:21)
क्या नाम है आपका मुझे पूछ रहे हो यार
(01:47:25)
फैज फैज फैज
(01:47:26)
फैज पूछिए फैज साहब
(01:47:27)
तो मेरा सवाल ये है कि अभी जो एथियस्ट है
(01:47:30)
वो प्रॉब्लम ऑफ इविल आर्गुमेंट यूज कर रहे
(01:47:33)
हैं अगेंस्ट मुस्लिम्स राइट कि इस दुनिया
(01:47:34)
में इतना सारा ईव वाले और
(01:47:36)
अगेंस्ट मुस्लिम तो यहां थिएस्ट अगेंस्ट
(01:47:38)
थिएस्ट हां थोड़ा सा करेक्ट कर लीजिए भाई
(01:47:40)
पूरी मशक्कत ही इसी बात की थी कि किसी एक
(01:47:42)
मजहब पे बात ना टिके
(01:47:44)
जी तो बेसिकली ये आर्गुमेंट ऐसा है कि इस
(01:47:47)
दुनिया में इतना ज्यादा ईवल एक्सिस्ट करता
(01:47:49)
है और अगर एक ऑल गुड गॉड है तो वो रोकता
(01:47:50)
क्यों नहीं है लेकिन इस सवाल में एक हिडन
(01:47:53)
असंप्शन ये है कि इस दुनिया में ईवल
(01:47:55)
एक्सिस्ट करता है अब एथियस कि कैसे
(01:47:57)
ऑनटोलॉजिकली प्रूव कर सकते हैं कि इस
(01:47:58)
दुनिया में ईवल एक्सिस्ट करता है मैं आपको
(01:48:00)
बताता हूं थोड़ा सा समझा
(01:48:01)
नहीं नहीं सर [हंसी]
(01:48:03)
इनको सुनिए नहीं प्लीज डोंट नो आई वांट
(01:48:05)
वांट टू एक्सप्लेन ऑनलॉजी
(01:48:06)
नहीं नहीं हम समझ गए सर इनको आप जवाब देने
(01:48:08)
दीजिए।
(01:48:08)
अच्छा सवाल पूछ रहा हूं मैं।
(01:48:10)
अभी तक क्या था?
(01:48:10)
वो मैं मैं थोड़ा सा ऐड ऑन कर लेता हूं।
(01:48:13)
तुम गुरु तो हम जब इसका राउंड 13 करेंगे
(01:48:15)
ना तब तुमको स्टेज पे बिठाएंगे।
(01:48:18)
जी जी तो हां जल्दी से तो देखिए एथिज्म
(01:48:21)
एथिज्म के हिसाब से सब कुछ रैंडमली बन गया
(01:48:23)
है। सब कुछ एटम्स और मॉलिक्यूल्स हैं। एक
(01:48:25)
पत्थर में और मुझ में सिर्फ इतना फर्क है
(01:48:27)
कि हम लोग एटम्स और मॉलिक्यूल्स का
(01:48:28)
अलग-अलग रिअरेंजमेंट है। अब एक पत्थर को
(01:48:30)
कोई इंसान तलवार से दो टुकड़ों में काट दे
(01:48:32)
या मुझे। अकॉर्डिंग टू एथिज्म इट इज़ सेम।
(01:48:34)
देयर इज नो इवल एंड गुड अकॉर्डिंग टू
(01:48:35)
एथिज्म।
(01:48:37)
जी। अच्छा फैज साहब का सवाल ये है कि
(01:48:41)
कोशिश भी करते तो इससे गलत सवाल नहीं कर
(01:48:43)
पाते।
(01:48:45)
एक लाइफ फॉर्म है और लाइफ फॉर्म में
(01:48:48)
फीलिंग्स है। मतलब लाइफ फॉर्म सुनता है,
(01:48:52)
देखता है, टेस्ट कर सकता है, फील कर सकता
(01:48:55)
है। तो उसकी जो ये जो क्वालिटी इस बबल में
(01:48:59)
आ गई है कि वो जानवर में भी है, इंसान में
(01:49:02)
भी है। तो जाहिर है कि उसे कोई तकलीफ
(01:49:04)
पहुंचेगी। तो चकि उसके पास वो सेंसिटिविटी
(01:49:07)
है तो करेगा। पत्थर में वह सेंसिटिविटी
(01:49:10)
नहीं है। तो यह क्या सवाल हुआ कि अगर
(01:49:12)
पत्थर को काटा तो पत्थर को तकलीफ नहीं
(01:49:14)
होती। तो आपको काटे तो आपको क्यों तकलीफ
(01:49:16)
होगी? बैठ जाइए।
(01:49:17)
जी।
(01:49:18)
हां, अगला सवाल।
(01:49:19)
हां पूछिए पूछिए पूछिए।
(01:49:21)
जी जावेद अख्तर साहब।
(01:49:22)
अरे भैया सब आप लोग मुफ्ती साहब को छोड़
(01:49:26)
रहे हैं। वो मेरे ही पीछे पड़े हैं। क्या?
(01:49:28)
चलो बोलो भाई।
(01:49:30)
यू यू आस्क हाउ गॉड कैन एक्सिस्ट व्हेन
(01:49:33)
चिल्ड्रन डाई एंड गाज़ा।
(01:49:34)
हां?
(01:49:35)
यू आस्क्ड हाउ गॉड कैन एकिस्ट व्हेन
(01:49:37)
चिल्ड्रन डाई इन काज़ा एंड यू आल्सो मेंशन
(01:49:40)
द राइज़ ऑफ़ एथिज्म इन यूरोप बट द सेम
(01:49:43)
इवेंट्स आल्सो आर लीडिंग मेनी एथिस्ट एंड
(01:49:46)
नॉन बिलीवर्स टू टर्न टुवर्ड्स फेथ हाउ डू
(01:49:49)
यू इंटरप्रेट दिस कंट्राडिक्शन वेयर
(01:49:51)
सफरिंग पुशेस सम अवे फ्रॉम गॉड येट
(01:49:54)
ब्रिंग्स अदर्स क्लोजर टू बिलीफ आपको एक
(01:49:57)
बात बताऊं दुनिया परफेक्ट तो कहीं भी नहीं
(01:50:00)
है हर जगह कुछ खामियां है बेटा एक मिनट आप
(01:50:03)
ही को कहेंगे देखो वो
(01:50:06)
तो कुछ खामियां कमजोरियां खराबियां सब जगह
(01:50:09)
है। लेकिन अगर देखोगे ईमानदारी से कि
(01:50:12)
दुनिया सबसे ज्यादा मुजब कहां है? एक आम
(01:50:16)
शहरी को कहां हुकूक हासिल है? वो बोल सकता
(01:50:20)
है। अपनी मर्जी से काम कर सकता है। अपनी
(01:50:22)
मर्जी से राय दे सकता है। हुकूमत के खिलाफ
(01:50:25)
बोल सकता है। बरसरे इख्तेदार लोगों के
(01:50:28)
बारे में बोल सकता है। सरमायादारों के
(01:50:30)
खिलाफ बोल सकता है। तो आपको ये
(01:50:32)
स्कंडीनेवियन कंट्रीज में मिलेगा।
(01:50:34)
वेस्टर्न यूरोप में मिलेगा। मैं नहीं कह
(01:50:36)
रहा हूं परफेक्ट है। बिल्कुल नहीं। वहां
(01:50:38)
बहुत खराबियां भी है। परफेक्ट तो कोई
(01:50:40)
नहीं। लेकिन जिन-जिन मुल्कों में लिटिल
(01:50:42)
अमेरिका देखो। गल्फ देखो। वहां पर आपको यह
(01:50:47)
जरूर है कि रेप नहीं होते होंगे। रेप की
(01:50:49)
जरूरत क्या है? भाई उसको तो खरीद लो। घर
(01:50:51)
में रखो। सड़क पे रेप करने की क्या जरूरत
(01:50:54)
है? मगर सुनिए सुनिए सुनिए। मगर हकीकत ये
(01:50:58)
है कि वहां शख्स आजादी राय देने की बोलने
(01:51:02)
की नहीं है।
(01:51:04)
जी। ये एक आखरी सवाल मुफ्ती साहब से। हां
(01:51:07)
मैं इनको माइक दीजिए।
(01:51:10)
शुक्रिया। मेरा नाम मनीषा है। मैं हरियाणा
(01:51:12)
से आई हूं। मैं मुफ्ती साहब से एक बात
(01:51:14)
पूछना चाहती हूं। आप बार-बार जावेद साहब
(01:51:16)
को कंट्राडिक्ट तो कर रहे हैं कि आपने ये
(01:51:18)
कहा, ये कहा। लेकिन आप भी एजंपशंस के
(01:51:21)
बेसिस पे बात कर रहे हैं। आपने खुदा के
(01:51:23)
होने का कौन सा प्रूफ पेश किया है खुदा
(01:51:26)
[संगीत] की एक्सिस्टेंस का। अब मां इस
(01:51:28)
सवाल को अलग रहने दीजिए कौन एथिस्ट है,
(01:51:30)
कौन नहीं है। और दूसरी बात जो आपने एक
(01:51:32)
छोटी सी कही थी कि ये फ्री विल का
(01:51:35)
इस्तेमाल करता है इंसान अपनी। लेकिन उस
(01:51:37)
फ्री विल का इस्तेमाल में मतलब खुदा ने ये
(01:51:40)
दे दी सबको ये इजाजत कि वो कितना घिनौनापन
(01:51:44)
और कितने ज्यादा खराब से खराब तरीके
(01:51:46)
इस्तेमाल कर सकता है।
(01:51:47)
जब आप सुनते हैं
(01:51:48)
आप फ्री विल को मानती है ना या कहती है कि
(01:51:50)
फ्री विल नहीं है।
(01:51:52)
है ना? मानती है ना? तो अब आपके पास इसका
(01:51:55)
कोई एक्सप्लेनेशन नहीं है कि अगर एक इंसान
(01:51:59)
उस फ्री विल का इस्तेमाल करके गलत काम कर
(01:52:01)
रहा है और बच के अच्छी जिंदगी गुजार के
(01:52:04)
निकल जा रहा है उसका कोई रिकंपेंस नहीं
(01:52:06)
है। हमारे वर्ल्ड व्यू में जो इंसान गलत
(01:52:10)
काम कर रहा है उसको भी रिकंपैेंस यानी
(01:52:13)
उसका बुरा बदला मिलना है और जो सही काम कर
(01:52:15)
रहा है उसको सही बदला मिलना है। लिहाजा जो
(01:52:18)
फ्री विल है वो इस तरीके से है कि एक
(01:52:21)
लिमिटेड टाइम तक खुदा ने मोहलत दी है। ऐसा
(01:52:23)
नहीं कि छूट दे दी जो करना है करते रहो
(01:52:25)
हमेशा। वक्त आएगा जब एग्जाम का टाइम खत्म
(01:52:28)
होगा तब रिजल्ट आएगा। दौराने एग्जाम
(01:52:30)
जबरदस्ती आपको नहीं बताया जाएगा।
(01:52:32)
अरे भाई एक मिनट मुफ़्ती साहब से मेरा मैम
(01:52:36)
मुफ्ती साहब सेम
(01:52:40)
एक सेकंड रुक जाइए। आपसे फ़ आपसे
(01:52:45)
मैं मुफ़्ती साहब से एक ही सवाल करता हूं
(01:52:48)
के अगर जो हो रहा है फ्री विल से हो रहा
(01:52:51)
है और एक दिन बरोज़ कयामत इंसाफ होगा महशर
(01:52:55)
में वगैरह-वगैरह
(01:52:58)
तो दुआ क्यों मांगते हैं लोग? दुआ मांगते
(01:53:01)
हैं। इसके मतलब है अभी भी उसने यह
(01:53:03)
डिपार्टमेंट रखा है कि मैं रोजमर्रा की
(01:53:06)
जिंदगी में इंटरव्यू ही कैन
(01:53:09)
तो तुम ही कैन हो तुम मुझे नौकरी दिला
(01:53:12)
देते हो। मेरे बेटे को ग्रीन कार्ड दिला
(01:53:14)
देते हो और 45,000 बच्चे मरते हैं उन्हें
(01:53:16)
रोकते नहीं हो।
(01:53:17)
नहीं तो क्या आप ये कह रहे हैं कि इस
(01:53:18)
दुनिया में जालिमों को कभी पकड़ ही नहीं
(01:53:20)
होती है।
(01:53:21)
अरे जो भी पकड़ होगी। वो बच्चे के रोते
(01:53:23)
हैं।
(01:53:24)
बिल्कुल देखिए मैंने अपने ओपनिंग
(01:53:26)
स्टेटमेंट में यही कहा था कि जनाब जावेद
(01:53:28)
साहब सिर्फ इमोशनल आर्गुमेंट दिस एन
(01:53:30)
इमोशनल आर्गुमेंट ये छोटे इसके पीछे
(01:53:34)
इसके पीछे का रीज़न मैंने बताया क्या है?
(01:53:37)
इसके पीछे का क्या है मैंने बताया।
(01:53:39)
मंच से आप लोगों को सज्जनों इसलिए कह रहा
(01:53:41)
हूं ताकि थोड़ा सा आपके कॉन्शियस पे जोर
(01:53:44)
रहे कि आपको आर्डर बचा के रखना है। वक्त
(01:53:47)
तय हुआ था। ये वक्त पूरा हुआ। आपने इतने
(01:53:50)
धैर्य पूर्वक सुना। मैं आप सबका बहुत-बहुत
(01:53:52)
शुक्रगुजार हूं। यदि इन दोनों विद्वानों
(01:53:55)
की इच्छा होगी तो कभी हम इस बातचीत का
(01:53:58)
राउंड टू राउंड थ्री यही तो देखिए खूबी है
(01:54:00)
इंसान की कि बहस मुबासे में वो पड़ा रहता
(01:54:03)
है। आप लोगों ने बड़े धैर्य का परिचय
(01:54:05)
दिया। बहुत-बहुत शुक्रिया। इसी के साथ ये
(01:54:06)
बातचीत यहां पे
(01:54:07)
आप लोगों को मैं एक बात बता दूं। ये सारी
(01:54:09)
बहस हो गई। अब मुफ्ती साहब और बड़े मुफ्ती
(01:54:12)
साहब इन सब के साथ में खाना खाने वाला
(01:54:14)
हूं।
