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Does God Exist? Javed Akhtar और Mufti Shamail Nadwi के बीच LIVE बहस | Saurabh Dwivedi (YouTube Video Transcript)

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Title: Does God Exist? Javed Akhtar और Mufti Shamail Nadwi के बीच LIVE बहस | Saurabh Dwivedi
Duration: 01:54:41
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(00:00:00) Your YouTube transcript will appear here (00:00:00) कॉन्सिट्यूशन क्लब में हो रही इस बेहद (00:00:03) जरूरी बहस में डिबेट में आप सभी का (00:00:06) बहुत-बहुत स्वागत है। मेरा नाम सौरभ (00:00:08) द्विवेदी है। मैं इंडिया टुडे हिंदी (00:00:10) मैगजीन का और ललन टॉप का संपादक हूं और आज (00:00:13) की इस बहस का मॉडरेटर भी। (00:00:16) इससे पहले कि यह बहस जिसका शीर्षक जिसका (00:00:20) टॉपिक है डस गॉड एकिस्ट? (00:00:22) यह शुरू हो दो विद्वानों के बीच जिनके नाम (00:00:26) हैं श्री जावेद अख्तर और श्री मुफ्ती (00:00:30) शमाइल नदवी जी। मैं कुछ बुनियादी चीजें आप (00:00:34) लोगों को बता दूं ताकि यह बहस व्यवस्थित (00:00:36) ढंग से चले। वैसे नहीं जैसी बहसों को (00:00:39) देखने के हम इन दिनों आदि हो गए हैं। पढ़ी (00:00:42) लिखी अकादमिक बहस। (00:00:45) इस बहस का प्रारूप कैसा होगा? इसका (00:00:47) स्ट्रक्चर कैसा होगा? पहले मैं आपको यह (00:00:49) बता देता हूं। (00:00:51) सबसे पहले (00:00:53) नौजवान (00:00:55) विद्वान मुफ्ती शमाइल नदवी जी 10 मिनट (00:00:58) अपनी दलीलें आप लोगों के सामने रखेंगे। (00:01:02) उसके बाद जावेद अख्तर साहब 10 मिनट अपनी (00:01:06) बात रखेंगे। उसके बाद जिसको हम अंग्रेजी (00:01:09) में रिबटल कहते हैं। एक जवाबी दौर रहेगा (00:01:11) कि आपने जो कहा मैं उससे मुतमई हूं कि (00:01:13) नहीं हूं और हमने जो कहा। इसके बाद बहस का (00:01:17) राउंड टू शुरू होगा। दोनों विद्वानों को (00:01:19) फिर से सात-सात मिनट का वक्त मिलेगा और (00:01:22) इसके बाद रिबर्टल राउंड टू होगा 5-5 मिनट (00:01:25) का। (00:01:27) इसके बाद एक दूसरे से सवाल जवाब होंगे। (00:01:30) इसके लिए हमने लगभग 16 मिनट का वक्त तय (00:01:33) किया है। अब ये सवालों की प्रकृति पर (00:01:35) निर्भर करता है कि कितने सवाल होंगे। (00:01:37) इसीलिए हमने वक्त की पाबंदी रखी है और (00:01:41) इसके बाद आखिरी में 5-प मिनट का वक्त (00:01:44) दोनों विद्वानों को एक बार फिर से दिया (00:01:46) जाएगा अपने क्लोजिंग आर्गुमेंट के लिए और (00:01:49) उसके बाद जो इस बहस के लिए सबसे जरूरी चीज (00:01:53) है कि आप और हम और इंटरनेट पर देख रहे (00:01:56) लाखों करोड़ों लोग उनके सवाल जवाब होंगे। (00:01:59) तो आप लोग जो यहां मौजूद हैं आपके हम कुछ (00:02:02) सवाल लेने की कोशिश करेंगे। 30 मिनट का (00:02:04) वक्त हमने उसके लिए तय कर रखा है। इस तरह (00:02:07) से यह 2 घंटे की बहस पूरी होगी। दो तीन (00:02:11) बुनियादी बातें हैं जिनका हमें ध्यान रखना (00:02:13) है। किसी भी किस्म की नारेबाजी में हमें (00:02:17) शरीक नहीं होना है। यह हल्लागुल्ला नहीं (00:02:19) है क्योंकि पूरी दुनिया देख रही है तो एक (00:02:21) नजीर कायम करनी है। एक उदाहरण लोगों के (00:02:23) सामने रखना है कि पढ़े लिखे लोग इत्तेफाकी (00:02:27) और नाइत्तेफाकी रखते हुए भी एक दूसरे से (00:02:29) सहमति और असहमति रखते हुए भी बात कह सकते (00:02:32) हैं। यहां पर मेरे जेएनयू के प्रोफेसर (00:02:34) बैठे हैं पुरुषोत्तम अग्रवाल जी जिन्होंने (00:02:36) हमें क्लास में सिखाया है कि सहमति का (00:02:40) साहस और असहमति का विवेक और इसका ठीक उलट (00:02:44) भी यह बड़ा जरूरी है। (00:02:47) दूसरी बात यह किसी एक धर्म के बारे में (00:02:52) बहस नहीं है। यह बात सबको स्पष्ट होनी (00:02:54) चाहिए। किसी धर्म को महान बताने या किसी (00:02:58) धर्म को कमतर बताने की यह बहस नहीं है। तो (00:03:01) यदि कोई इस उम्मीद से देख रहा है या यहां (00:03:03) आया है तो मैं आपको आश्वस्त करना चाहता (00:03:06) हूं कि आपको ना उम्मीद ही हाथ लगेगी। (00:03:09) इस बहस में बहुत ज्यादा धार्मिक प्रतीकों (00:03:12) के इस्तेमाल को लेकर भी यह दोनों लोग जो (00:03:14) अभी आपको गंभीर दिख रहे हैं। भले लोग हैं। (00:03:17) कल शाम को चाय पर मिले थे। बहुत हंसीज़ाक (00:03:21) भी इनके बीच हुआ था और गलवया डालते हुए एक (00:03:24) तस्वीर भी हुई थी। यह इस बात का प्रमाण है (00:03:28) कि इंटरनेट पर जो हल्ला मचा हुआ है उसके (00:03:31) मुकाबले ये दोनों लोग बहुत ही अच्छे शांत (00:03:35) ढंग से बहस के लिए राजी हो गए हैं। (00:03:37) Twitter की बातें Twitter तक सीमित एलन (00:03:39) मस्क आजकल उसको एक्स कहते हैं। (00:03:43) और अब इस बहस की शुरुआत मैं इन विद्वानों (00:03:47) का हालांकि इनको परिचय की जरूरत नहीं है (00:03:49) पर हो सकता है। हमें पत्रकारिता में (00:03:51) सिखाया जाता है कि नेवर अस्यूम विज्ञान भी (00:03:54) यही कहता है। मुफ्ती शमाल नदवी साहब (00:03:57) इस्लामिक विद्वान शिक्षाविद हैं। कोलकाता (00:03:59) के वाहन फाउंडेशन के संस्थापक हैं। लखनऊ (00:04:02) की प्रतिष्ठित दारुल उलूम नदतुल उलमा से (00:04:05) ग्रेजुएशन किया है। सोशल मीडिया और (00:04:07) सार्वजनिक मंचों पर अध्यापन और बौद्धिक (00:04:09) कामों में सक्रिय हैं। और इस समय (00:04:11) इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी मलेशिया (00:04:13) से पीएचडी कर रहे हैं। अच्छी बात यह है कि (00:04:16) पढ़ाई के साथ-साथ ट्रेवल ब्लॉग भी बनाते (00:04:18) हैं। पेट्रोनस टावर के सामने का ब्लॉग (00:04:20) हमने देखा। (00:04:22) हमारे साथ जावेद अख्तर साहब हैं। जावेद (00:04:25) अख्तर साहब कवि हैं, शायर हैं। गद्य भी (00:04:30) लिखते हैं। फिल्मों के लिए संवाद लिखे (00:04:33) हैं। गीत लिखे हैं। इससे इत (00:04:37) वैज्ञानिक सोच को लेकर या अपने डिक्लेयर्ड (00:04:41) एथिज्म को लेकर भी मुखरित रहते हैं और (00:04:44) अपने त रैशनलिटी की बात करते हैं। देवियों (00:04:47) और सज्जनों डस गॉड एकिस्ट? इस सवाल का (00:04:51) जवाब सब अपने-अपने त खोजने की कोशिश कर (00:04:53) रहे हैं। कोई इसको गॉड डम पार्टिकल की खोज (00:04:56) बताता है। कोई गॉड पार्टिकल की खोज बताता (00:04:59) है। कोई हिक्स बोसान की खोज बताता है। कोई (00:05:01) यह सवाल जवाब तलाशने की कोशिश करता है कि (00:05:04) मास एग्जिस्टेंस में आखिर आया कैसे? हुआ (00:05:07) क्या था? सृष्टि के पहले समय के पहले क्या (00:05:10) था? और कोई ये कहता है कि ये सारी खोजें (00:05:13) जिस मस्तिष्क में हो रही हैं, प्रकृति के (00:05:15) क्रम में वो कैसे विकसित हुआ? मैं उम्मीद (00:05:18) करता हूं कि हम आज इन बुनियादी सवालों के (00:05:22) कुछ जवाब हासिल करने में कामयाब हो। मैं (00:05:24) सबसे पहले मंच पर आमंत्रित कर रहा हूं (00:05:27) मुफ्ती शमाल नदवी साहब को। आइए सर। जी (00:05:33) [प्रशंसा] (00:05:43) एक आपकी गुजारिश बोलना शुरू करें। आप लोग (00:05:46) प्लीज अपने फोन लाइट मोड पे या साइलेंट (00:05:48) मोड पे रखें। एक बार चेक कर ले कई बार (00:05:50) बेहदानी हो जाती है। (00:06:01) तमाम तारीफें उस क्रिएटर के लिए जिसने इस (00:06:04) यूनिवर्स को एक मकसद के तहत पैदा किया है। (00:06:07) रिस्पेक्टेड जनाब जावेद अख्तर साहब, (00:06:10) मिस्टर सौरभ द्विवेदी और रिस्पेक्टेड (00:06:12) ऑडियंस थैंक यू ऑल फॉर बीइंग हियर टुडे। (00:06:16) आज की डिबेट में क्योंकि हम बात करने वाले (00:06:19) हैं डस गॉड एक्सिस्ट के टॉपिक पर तो यह एक (00:06:22) ऐसा टॉपिक है जिसके मुतालिक कोई भी डिसीजन (00:06:26) लेने के लिए अलग-अलग स्टैंडर्ड्स हो सकते (00:06:28) हैं। लिहाजा डिबेट के शुरू में ये जरूरी (00:06:31) है कि हम ये जान लें कि आज के इस टॉपिक (00:06:35) में कौन सा स्टैंडर्ड सही होगा और कौन सा (00:06:38) गलत होगा। सबसे पहला स्टैंडर्ड जिसे मैं (00:06:42) समझता हूं कि हमारे रिस्पेक्टेड जनाब (00:06:44) जावेद अख्तर साहब बड़ी तेजी के साथ उसकी (00:06:47) तरफ लपकेंगे वो है साइंस। जबकि साइंस दर (00:06:52) हकीकत खुदा के एग्जिस्टेंस को डायरेक्टली (00:06:55) साबित करने या उसके एकिस्टेंस को डिनाई (00:06:58) करने के लिए स्टैंडर्ड नहीं बन सकती। और (00:07:01) उसकी वजह क्या है? ये मैं नहीं कह रहा। यह (00:07:05) वो लोग कह रहे हैं जो साइंस के एक्सपर्ट्स (00:07:07) हैं। नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस कहती है साइंस (00:07:13) डजंट हैव द प्रोसेससेस टू प्रूव और (00:07:17) डिस्रूव द एकिस्टेंस ऑफ़ गॉड। व्हाई? (00:07:20) क्योंकि साइंस का ताल्लुक एंपेरिकल (00:07:22) एविडेंस से है और एंपेरिकल एविडेंसेस का (00:07:25) ताल्लुक हमारे नेचुरल और फिजिकल वर्ल्ड से (00:07:27) है। जबकि गॉड नॉन फिजिकल और सुपर नेचुरल (00:07:32) रियलिटी है। लिहाजा नॉन फिजिकल रियलिटी को (00:07:35) आप उस टूल के साथ नहीं चेक कर सकते जिसका (00:07:38) काम फिजिकल रियलिटी को तलाश करना है। (00:07:41) लिहाज़ा, आज इस डिबेट में गॉड की (00:07:45) एक्जिस्टेंस को साबित करने या उसे डिनाई (00:07:48) करने में साइंटिफिक एविडेंस को एक्सेप्ट (00:07:51) नहीं किया जाएगा। दूसरा स्टैंडर्ड हो सकता (00:07:55) है रेवेलेशन। कि रेवेलेशन के जरिए हम ये (00:07:58) साबित करें कि गॉड एग्ज़िस्ट करता है या (00:08:01) नहीं। लेकिन ये स्टैंडर्ड भी आज (00:08:03) इररेिलेवेंट है। क्यों? क्योंकि रेवोलेशन (00:08:06) मेरे नजदीक सोर्स ऑफ नॉलेज है। वैलिड (00:08:09) सोर्स ऑफ नॉलेज है। लेकिन हमारे जावेद (00:08:12) अख्तर साहब के नजदीक ये वैलिड सोर्स ऑफ (00:08:14) नॉलेज नहीं है। लिहाजा आज की डिबेट में (00:08:16) मैं एक भी एविडेंस किसी भी मजहबी (00:08:19) स्क्रिप्चर से नहीं दूंगा। ताकि जावेद (00:08:22) अख्तर साहब के लिए वो अनएक्सेप्टेबल ना (00:08:24) हो। तीसरा जो मेरार हो सकता है वो है (00:08:29) ऑब्ज़रवेशन। के भाई कोई कहे कि हमें खुदा (00:08:32) दिखाओ। अगर है तो दिखाओ। या ये कि खुदा के (00:08:35) एकिस्टेंस पर एंपेरिकल एविडेंस दो। तो ये (00:08:37) है दर हकीकत गलत टूल का इस्तेमाल करना। ये (00:08:40) ऐसा ही है कि जावेद साहब मुझसे ये मुतालबा (00:08:43) करें कि मुफ्ती साहब आप मेटल डिटक्टर के (00:08:45) जरिए प्लास्टिक डिटेक्ट करके दिखाएं। अबकि (00:08:48) प्लास्टिक डिटेक्ट नहीं हो पा रही है। (00:08:50) लिहाजा प्लास्टिक डज़ नॉट एक्सिस्ट। नो यू (00:08:52) आर यूजिंग द रोंग टूल। इस टूल से (00:08:55) प्लास्टिक को डिटेक्ट नहीं किया जाता। (00:08:57) लिहाजा (00:08:59) मैं समझता हूं कि गॉड के एकिस्टेंस पर (00:09:01) एंपेरिकल एविडेंस का मुतालबा करना एक (00:09:04) बचकाना मुतालबा है और हमारे रिस्पेक्टेड (00:09:06) जनाब जावेद अख्तर साहब इस स्टेज से अब (00:09:09) बहुत आगे निकल चुके हैं। अब बचता है एक ही (00:09:12) स्टैंडर्ड। और वो स्टैंडर्ड है अकल। लॉजिक (00:09:18) रीजनिंग। और यही वो स्टैंडर्ड है जिसके (00:09:21) तहत गॉड के एग्जिस्टेंस को साबित किया (00:09:24) जाएगा या गॉड की एकिस्टेंस को डिनाई किया (00:09:26) जाएगा। लेकिन क्योंकि ये बहुत इंपॉर्टेंट (00:09:30) और सेंसिटिव टॉपिक है। इसलिए लॉजिकल (00:09:33) आर्गुमेंट भी ऐसा होना चाहिए जो डेफिनेटिव (00:09:36) हो। इनडेफिनेटिव ना हो जो दो और दो चार की (00:09:39) तरह बिल्कुल वाज़ हो। जिसे लॉजिकली रिजेक्ट (00:09:42) करना पॉसिबल नहीं हो। फॉर एग्जांपल हम (00:09:44) कहें हमारे रिस्पेक्टेड मिस्टर सौरभ साहब (00:09:47) ये एक इंसान है और तमाम इंसान कॉन्शियस (00:09:52) बीइंग है लिहाजा नतीजा क्या निकला हमारे (00:09:54) सौरभ साहब भी कॉन्शियस बीइंग है क्या ये (00:09:57) इनडेफिनेट आर्गुमेंट है या डेफिनेट (00:09:59) आर्गुमेंट है ये डेफिनेट आर्गुमेंट है ये (00:10:01) दो और दो की तरह वाज़ है इसमें किसी तरह जो (00:10:04) है लॉजिकली इसको रिजेक्ट नहीं किया जा (00:10:06) सकता तो अगर आज हमारे जावेद अख्तर साहब (00:10:10) ऐसी कोई अकली दलील और लॉजिकल एविडेंस दें (00:10:14) खुदा के ना होने पर जो डेफिनेट भी हो तो (00:10:17) मैं यह ऐलान करता हूं कि यकीनन मैं उस (00:10:20) एविडेंस को कबूल करूंगा और उस पर गौर (00:10:22) करूंगा। लेकिन साथ में यह भी ऐलान कर देता (00:10:25) हूं प्रेडिक्शन के तौर पर कि ऐसा कोई (00:10:27) डेफिनेट आर्गुमेंट कोई नहीं पेश कर सकता। (00:10:30) दलील हम देंगे और डेफिनेटिव दलील देंगे। (00:10:35) लॉजिकल दलील देंगे। ऐसी दलील देंगे जो (00:10:39) एंटायर एथिस्टिक वर्ल्ड उसे रेफ्यूट नहीं (00:10:42) कर सकती। चल अब हम एक एग्जांपल सोचते हैं। (00:10:46) एक सिनेरियो सिंपल सिनेरियो तमाम ऑडियंस (00:10:48) से गुजारिश है। हम और आप एक आइसोलेटेड (00:10:51) आइलैंड पर हैं। ऐसा आइलैंड जहां पे हमसे (00:10:54) पहले कोई कभी नहीं गया। चलते-चलते आपके (00:10:57) सामने अचानक आपने देखा एक पिंक कलर की बॉल (00:10:59) पड़ी हुई है। सबसे पहला सवाल आपके ज़हन में (00:11:02) क्या आएगा? कि ये बॉल यहां क्यों आई? कैसे (00:11:05) आई? ये पिंक कलर की ही क्यों है? कोई और (00:11:08) कलर भी हो सकता था। ये इसी शेप में क्यों (00:11:10) है? कोई और शेप भी हो सकता था। नेचुरली आप (00:11:13) इस तरफ पहुंचेंगे कि कोई ना कोई है जिसने (00:11:17) इन स्पेसिफिक प्रॉपर्टीज के साथ इस बॉल को (00:11:20) बनाया है और यहां पे रखा है। चकि आप जानते (00:11:23) हैं कि ये जो बॉल है इसका एग्ज़िस्ट करना (00:11:26) जरूरी नहीं है। ये एग्ज़िस्ट कर भी सकती थी (00:11:29) नहीं भी कर सकती थी। और एग्ज़िस्ट करना ही (00:11:31) था तो किसी और फॉर्म में करती। किसी और (00:11:33) कलर में करती। अब आप इस बॉल को एक्सपेंड (00:11:36) करते चले जाएं, एक्सपैंड करते चले जाएं, (00:11:38) एक्सपैंड करते चले जाएं। यहां तक कि ये (00:11:40) बॉल यूनिवर्स के साइज की हो जाए। बताइए कि (00:11:42) क्या साइज साइज के बढ़ जाने से सवाल बदल (00:11:45) जाएगा? हरगिज़ नहीं बदलेगा। अभी भी सवाल (00:11:47) रहेगा। ये यूनिवर्स कहां से आया? इन (00:11:50) स्पेसिफिक प्रॉपर्टीज के साथ कहां से आया? (00:11:53) क्यों आया? किसने बनाया? ये सवाल उस वक्त (00:11:56) भी वैलिड रहेगा। (00:11:58) लेकिन यह सवाल अगर हम जनाब जावेद अख्तर (00:12:01) साहब से करें तो क्योंकि इनका वर्ल्ड व्यू (00:12:04) एथिस्टिक है और सिर्फ इनका नहीं मतलब (00:12:05) जितने भी एथिस्ट हैं और एथिस्टिक वर्ल्ड (00:12:07) व्यू को रखने वाले से अगर आप ये सवाल करें (00:12:11) कि ये यूनिवर्स कहां से आया तो इनका जवाब (00:12:14) या तो आर्गुमेंट फ्रॉम इग्नोरेंस होगा या (00:12:17) डॉग्मैटिक होगा। या तो ये कहेंगे कि मुझे (00:12:21) नहीं पता कि ये कहां से आया। लिहाजा गॉड (00:12:24) डज नॉट एक्सिस्ट। ये आर्गुमेंट फ्रॉम (00:12:26) इग्नोरेंस है। या ये कहेंगे कि ये (00:12:30) यूनिवर्स खुद ब खुद बन गया। इसका मतलब ये (00:12:32) है कि उस बॉल को भी खुद ब खुद बन जाना (00:12:34) चाहिए। लेकिन बॉल के ताल्लुक से ये (00:12:36) एक्सप्लेनेशन एक्सेप्ट नहीं की जाएगी कि (00:12:38) ये खुद ब खुद बन गई। लेकिन यूनिवर्स के (00:12:40) ताल्लुक से कर दिया जाएगा। इसे हम दूसरे (00:12:42) अल्फाज़ में डॉगमा भी कह सकते हैं। दूसरी (00:12:46) चीज हमारे जावेद अख्तर साहब जरूर गॉड ऑफ (00:12:49) गैप्स की मिसाल भी जरूर देंगे। और मिसाल (00:12:52) देंगे कि पहले जमाने में बिजलियां कड़कती (00:12:54) थी तो लोगों ने किसी एक खुदा की तरफ और (00:12:56) बारिश होती थी तो दूसरे खुदा की तरफ मंसूब (00:12:58) कर दिया। उनके पास दलील नहीं थी। ये हमारा (00:13:00) वर्ल्ड व्यू है ही नहीं। ये हमारा वर्ल्ड (00:13:02) व्यू है ही नहीं। क्योंकि नेचुरल फेनोमिना (00:13:05) के प्रोसेस की इंटरप्रिटेशन को जान लेने (00:13:08) से ये कहां से साबित हो गया कि गॉड (00:13:09) एक्सिस्ट नहीं करता है। इस पर मैं (00:13:11) इंशाल्लाह अभी आगे बात करूंगा। आप हजरात (00:13:14) ये भी देखेंगे और मैं ये एक्सपेक्ट करता (00:13:17) हूं कि हमारे रिस्पेक्टेड जनाब जावेद (00:13:19) अख्तर साहब जरूर इमोशनल आर्गुमेंट्स भी (00:13:21) देंगे जो कि एक लॉजिकल फैलेसी है जब बात (00:13:24) आती है ट्रुथ को डिसाइड करने में। क्यों? (00:13:27) मिसाल के तौर पर वो कहेंगे कि अगर गॉड है (00:13:30) तो इविल क्यों एक्सिस्ट करता है? जबकि मैं (00:13:32) कहता हूं इविल का एक्जिस्ट करना गॉड के (00:13:35) एग्जिस्ट एग्जिस्ट करने की दलील है उसके (00:13:37) खिलाफ नहीं है। चूंकि अगर गॉड है तो हम सब (00:13:40) उसके सामने अकाउंटेबल हैं और अगर हम (00:13:42) अकाउंटेबल हैं तो अकाउंटेबिलिटी के लिए (00:13:44) इविल का मौजूद होना जरूरी है। उसके बगैर (00:13:46) हम अकाउंटेबल नहीं हो सकते। और अगर हम (00:13:48) अकाउंटेबल नहीं हैं तो हम जनाब जावेद (00:13:50) अख्तर साहब से पूछेंगे कि आप बताएं कि फिर (00:13:53) सफरिंग इस दुनिया में क्यों है? अगर खुदा (00:13:56) नहीं है तो सफरिंग क्यों है? और उन लोगों (00:13:59) के जज्बे का क्या जिनके अंदर सफरिंग के के (00:14:01) बाद इंतकाम लेने का जज्बा पाया जाता है और (00:14:04) वो इस दुनिया से ऐसे ही चले गए। क्या उनकी (00:14:06) सारी तकलीफें बेकार चली जाएंगी? अब आ जाएं (00:14:08) उसी एग्जांपल की तरफ कि बॉल मुझसे अगर कोई (00:14:11) पूछे इस बॉल को किसने बनाया और या इस (00:14:13) एक्सपेंडेड बॉल को किसने बनाया? मैं (00:14:15) कहूंगा कि चूंकि ये यूनिवर्स और इस (00:14:18) यूनिवर्स की तमाम चीजें कंटिंजेंट हैं। (00:14:20) कॉन्टिंजेंट होने का मतलब ये होता है कि (00:14:22) जो अपने एक्सिस्टेंस पे किसी के ऊपर (00:14:24) डिपेंड करती हो। तो जाहिर है ये यूनिवर्स (00:14:28) कॉनंटिंजेंट है। और अगर कोई चीज (00:14:30) कॉनंटिंजेंट नहीं है तो मैं रिक्वेस्ट (00:14:32) करूंगा कि मुझे दिखा दें कि कौन सी चीज (00:14:33) यूनिवर्स में कंटिंजेंट नहीं है। हम भी (00:14:35) जरा गौर कर लें और हम भी देख लें। और जब (00:14:37) कंटिंजेंट चीजें मौजूद हैं तो फिलॉसोफर्स (00:14:41) की इस्तिला के मुताबिक हम उस टर्मिनोलॉजी (00:14:44) के मुताबिक हम उस जगह तक पहुंचते हैं और (00:14:46) उस हस्ती तक पहुंचते हैं जिसे नेसेसरी (00:14:49) बीइंग कहा जाता है कि ये वो नेसेसरी बीइंग (00:14:51) है जिसका मौजूद ना होना नामुमकिन हो चूंकि (00:14:54) अगर ये मौजूद ना हो तो सारी चीजें (00:14:56) एकिस्टेंस में आएंगी ही नहीं और ये सारी (00:14:58) डिप ये कंटिंजेंट चीजें उसी के ऊपर डिपेंड (00:15:00) करती हैं। अब अगर आप ये सवाल करते हैं कि (00:15:03) फिर उस हस्ती को किसने बनाया? फिर उसका (00:15:05) कॉज क्या है? फिर उसका कॉज क्या है? फिर (00:15:07) उसका कॉज क्या है? और एंडलेसली चले जाएं। (00:15:09) इसे हम कहते हैं इनफिनिट रिग्रेस ऑफ़ कॉजेस (00:15:12) जो कि लॉजिकल फैलेसी है। कॉनसेप्चुअली (00:15:15) इंफिनिटी पॉसिबल है। मिसाल के तौर पे (00:15:17) न्यूमेरिकल्स वन टू थ्री गिनते चले जाएं। (00:15:19) इनफिनिट नंबर्स हैं। मैं कॉनसेप्चुअली बात (00:15:21) नहीं कर रहा। प्रैक्टिकली रियलिटी में (00:15:23) साबित करके दिखाएं कि इनफिनिट रिग्रेस ऑफ़ (00:15:25) कॉजेस पॉसिबल है या नहीं। अगर पॉसिबल है (00:15:28) तो हम मान लेंगे। मिसाल दे दें और पॉसिबल (00:15:30) नहीं है तो एक ही ऑप्शन बचता है जिसे हम (00:15:32) कहते हैं नेसेसरी बीइंग। ऐसी नेसेसरी (00:15:34) बीइंग जो इंडिपेंडेंट है। चूंकि अगर वो (00:15:37) डिपेंडेंट हुई तो वो नेसेसरी नहीं रहेगी। (00:15:39) ऐसी इंडिपेंडेंट बीइंग जो इटरनल है। अगर (00:15:41) वो इटरनल नहीं होगी उसकी बिगिनिंग होगी तो (00:15:43) वो खुद कंटिंजेंट है। ऐसी बीइंग जो (00:15:46) पावरफुल है। क्योंकि कंटिंजेंट को (00:15:48) एक्चुअलाइज करने के लिए पावर चाहिए। ऐसी (00:15:50) बीइंग जो इंटेलिजेंट है और नॉलेजेबल है। (00:15:53) क्योंकि ये यूनिवर्स स्पेसिफिक फॉर्म और (00:15:55) स्पेसिफिक लॉज़ ऑफ नेचर के तहत प्रिसाइजली (00:15:58) चल रहा है। थैंक यू। (00:16:00) थैंक यू साहब। [प्रशंसा] (00:16:03) मैं इन दलीलों के बाद जावेद अख्तर साहब से (00:16:07) गुजारिश करूंगा। आप बैठ के बोलना चाहेंगे (00:16:09) या जी। (00:16:15) [प्रशंसा] (00:16:20) पहले तो मैं मुफ्ती साहब को एक अच्छी खबर (00:16:23) देना चाहूंगा कि मेरी नॉलेज साइंस के बारे (00:16:25) में बड़ी मामूली है। तो आप फिक्र ना करें (00:16:28) उसकी। लेकिन कुछ कॉमन सेंस है मुझ में। (00:16:33) देखिए ये खुदा का तसवुर कोई नया तसवुर (00:16:36) नहीं है। ये सदियों से रहा है। ये कुछ (00:16:40) रिलीजन 3000 साल पुराने होंगे। 4000 साल (00:16:43) पुराने होंगे। लेकिन इंसान कोई 10,000 (00:16:46) 12000 साल से एकिस्ट करता है होमोसेपियर (00:16:50) की शक्ल में और हमेशा कुछ ना कुछ मजहब (00:16:53) रहे। (00:16:54) ये मजहब जाहिलों के नहीं थे। ये मजहब एक (00:16:59) ऐसी ग्रीक सोसाइटी के थे जहां बड़े-बड़े (00:17:02) फिलॉसफर्स पैदा हुए। ये मजहब इजिपशियंस के (00:17:06) थे जिन्होंने पिरामिड्स बनाए थे। ये रोमंस (00:17:10) के थे कि जिनका आर्किटेक्चर और सेनेट यानी (00:17:13) पहली बुनियाद डेमोक्रेसी थी। लिमिटेड थी (00:17:17) मगर डेमोक्रेसी थी। ये उन लोगों ने किए (00:17:20) थे। तो इनका जो जुपिटर था रास (00:17:25) था उन्हें उस पर इतना ही एतमान था जितना (00:17:28) आज किसी मजहबी आदमी को अपने खुदा पे होगा। (00:17:33) क्रिश्चियनिटी आने से पहले यूरोप में एक (00:17:36) मजहब था जर्मेनिक रिलीजन। उसका एक खुदा (00:17:40) था। उसकी एक बीवी थी। उसके दो बेटे थे। एक (00:17:44) बेटी थी। कि जर्मनी में जब यूरोप में (00:17:48) क्रिश्चियनिटी आई तो वो खुदा उसकी बीवी और (00:17:50) पूरे खानदान चला गया। तो हमने अगर हम (00:17:55) हिस्ट्री देखें तो खुदा जो है वो ज्यादातर (00:17:59) फनी है। वो हमेशा रहे नहीं। और वो जो लोग (00:18:04) इन्हें मानते थे उनको आप कहे वो तो जाहिल (00:18:07) थे। उन्हें तो कुछ पता ही नहीं था। ऐसा (00:18:08) नहीं है। वो अपने वक्त में बड़े काबिल लोग (00:18:12) थे। और अपने वक्त में उन्होंने बड़े-बड़े (00:18:14) काम किए हैं। फिलॉसफर थे, साइंटिस्ट थे। (00:18:18) लेकिन उनका मजहब कहां गया? उनके खुदा कहां (00:18:22) गए? आज जो खुदा हैं दुनिया में लोग उन्हें (00:18:25) मानते हैं। आपको क्या मालूम कि कितने (00:18:28) बरसों के बाद क्या होने वाला है? हम यूरोप (00:18:30) में देखते हैं तो चर्च खाली है तो व के (00:18:34) साथ चीजें बदलती हैं। जहां तक इसका (00:18:38) ताल्लुक है मजहबों का (00:18:41) हर मजहब आपसे एक चीज मांगता है। फेथ (00:18:46) ये फेथ क्या चीज होती है? (00:18:50) व्हाट इज द डिफरेंस बिटवीन फेथ एंड बिलीफ? (00:18:53) ये कोई ये तो बहुत ही अहमखाना बात होगी कि (00:18:55) कोई आदमी कहे साहब अगर खुदा है तो मुझे (00:18:57) दिखाइए। ये तो जाहिला में बात हुई। मैंने (00:19:01) तो नॉर्थ पोल नहीं देखा है। मगर मैं मानता (00:19:04) हूं कि नॉर्थ पोल है। मैं क्यों मानता (00:19:07) हूं? इसलिए कि अगर ये दुनिया रहूंगे तो (00:19:09) उसका कोई टॉप होगा। कुछ लोग हैं जो वहां (00:19:12) गए भी हैं। कॉमन सेंस कहता है कि ऐसा (00:19:15) होगा। सबूत है, गवाह है, रीजन है। तो ये (00:19:20) मेरा फेथ नहीं है। तो फेथ में और बिलीफ (00:19:24) में डिफरेंस क्या है? (00:19:26) जो मजहब मांगता है आपसे हर मजहब फथ मांगता (00:19:29) है। फेथ का मतलब यह है कि ना कोई गवाह हो, (00:19:33) ना कोई सबूत हो, ना कोई रैशन हो, ना कोई (00:19:37) लॉजिक हो, ना कोई प्रूफ हो। मगर तुम एक (00:19:40) बात को मानो। ये है फेथ। (00:19:44) वरना बिलीफ होता। अगर इसमें कुछ भी सबूत (00:19:46) होते, गवाह होते तो फिर इसे आप बिलीफ (00:19:49) कहते। जैसे मेरा बिलीफ है कि नॉर्थ पोल (00:19:52) है। मेरा फेथ थोड़ी है। (00:19:54) फेथ इन तमाम शर्तों को रद्द करता है। (00:20:00) तो फिर स्टुपिडिटी क्या है? (00:20:03) अगर मैं एक बात ऐसी मानूं जिसकी ना कोई (00:20:06) लॉजिक है, ना कोई रैशन है, ना कोई प्रूफ (00:20:09) है, ना कोई गवाह है, (00:20:13) ना कोई सबूत है और मैं उसे मानूं। तो ये (00:20:17) सुपिडिटी हुई। इसे ही वही कल को मैं यकीन (00:20:20) कर लूं कि ईलॉन मस्क जो है मेरा भाई है तो (00:20:23) मुझे इंतहाई खुशी होगी सुकून भी बहुत (00:20:25) मिलेगा मुझे लेकिन और कहे भाई क्यों मानते (00:20:29) हो क्या सबूत है भाई वो तो अमेरिकन है और (00:20:31) तुम तो इंडियन हो वो तो नसला अलग है (00:20:33) तुम्हें कभी मिले भी नहीं साहब देखिए ये (00:20:36) मेरा फेथ है इस पे बात किया फेथ का मतलब (00:20:40) ही यह है कि आप प्रूव नहीं कर सकते अगर आप (00:20:43) प्रूव कर सकते हो तो फेथ की जरूरत ही नहीं (00:20:46) है फिर तो आप बात करेंगे। आप कितनी बहस कर (00:20:49) लीजिए। अल्टीमेटली दुनिया का हर मजहब फेथ (00:20:52) पे टिका है। और फेथ का मतलब है एक ऐसा (00:20:55) यकीन जिसका कोई सबूत, कोई गवाह, कोई रैशन (00:20:58) नहीं। (00:21:02) अब आप ये कहें कि आप ये क्यों कह रहे हैं (00:21:05) कि साहब ये कायनात किसने बनाई? कमाल ये है (00:21:10) कि आपने बताया कि एक आइलैंड पे गए और एक (00:21:12) बॉल देखी। (00:21:14) आपने यह नहीं कहा कि आइलैंड किसने बनाया? (00:21:17) आपको सिर्फ बॉल पर हैरत हुई। (00:21:21) हमने आइलैंड पे हमने हैरत नहीं की। होते (00:21:23) हैं आइलैंड। इसी तरह ये आइलैंड है। सितारे (00:21:27) ये गैलेक्सीस ये सब आइलैंड्स हैं। खलम है। (00:21:31) हम उन्हें टेकन फॉर ग्रांटेड लेते हैं। हम (00:21:33) पूछते नहीं किसने बनाए? आपने जजीरे के (00:21:35) बारे में नहीं पूछा। है? (00:21:39) मेरी पैदाइश कैसे हुई? (00:21:42) क्या मैं प्लंड पैदा हुआ था? (00:21:45) आई वास प्ल टू बी बोर्न (00:21:48) या एक लकी स्पम था जो किसी एक्स से चिपक (00:21:51) गया। (00:21:53) मेरी पैदाइश रैंडम है। रैंडम (00:21:58) और इंसाफ जिसे आप कहते हैं इंसाफ का तो (00:22:02) नेचर से कोई वास्ता ही नहीं है। जो आप (00:22:04) कहते हैं कि एक दिन इंसाफ मिलेगा। इंसाफ (00:22:07) इज अ ह्यूमन कांसेप्ट। नेचर में कोई इंसाफ (00:22:10) नहीं। अगर शेर हिरण को खा जाता है तो उसे (00:22:14) कोई सुविधा नहीं मिलती। (00:22:17) अगर एक आंधी आती है और हरेभरे पेड़ों को (00:22:20) उखाड़ के फेंक देती है तो आंधियों की जेल (00:22:22) नहीं होती है। (00:22:24) नेचर में इंसाफ नहीं है। इसलिए बोलते नेचर (00:22:28) को इंसाफ की जरूरत भी नहीं। नेचर तमाम एक (00:22:31) है। अब हम कहे कि साहब ये देखिए जो मैंने (00:22:35) खाना खाया था ये मेरी आंख तो ने यूं कर (00:22:37) दिया उसे तो इसे सजा मिलने नहीं वो सिस्टम (00:22:40) है ऐसे ही चल रहा है। नेचर बगैर इंसाफ के (00:22:45) है। इंसाफ इज अ ह्यूमन कासेप्ट। तो जो (00:22:50) आपसे कहता है कि मैं तुम्हें इंसाफ दूंगा (00:22:52) वो इंसानी ज़हन की पैदावार है। ये नेचुरल (00:22:56) है ही नहीं। ये आसमानी है ही नहीं। नेचर (00:22:59) का तसुर, इंसाफ का तसवुर। भाई आप साथ (00:23:03) मिलते हैं। अब आप लेफ्ट हैंड ड्राइव कर (00:23:06) ले। ये क्या है? तमाम सच, तमाम नेकी, तमाम (00:23:11) शराफत लेफ्ट हैंड ड्राइव है। वरना क्या (00:23:15) होगा? या तो आप कॉस कर देंगे आपका (00:23:17) एक्सीडेंट हो जाएगा या आप किसी को मार (00:23:19) देंगे या ट्रैफिक जाम हो जाएगा। (00:23:22) झूठ, बेईमानी, रिश्वतखोरी यह तमाम जो है (00:23:25) ड्राइविंग ओनर ऑन साइड है। इसके ऊपर कुछ (00:23:28) नहीं। यह तो हमने बनाया है। जैसे हमने (00:23:32) लेफ्ट हैंड ड्राइव बनाई है। ये कांसेप्ट (00:23:34) ऑफ इंसाफ जो है ये हमारा है। इसका नेचर से (00:23:39) कोई वास्ता नहीं। शेर खा जाता है हिरन को (00:23:41) उसे जेल होती है। क्या? कुछ भी। है ही (00:23:44) नहीं। (00:23:46) तो यह जो दुनिया के रिलीज प्रॉमिस करते (00:23:50) हैं आपसे इंसाफ इसी से मालूम होता है कि (00:23:53) यह मैनमेंट है। ये तसवुर कहीं और का है ही (00:23:57) नहीं। जो नेचर है कुछ लोग कहते हैं नेचर (00:24:01) ही खुदा है। तो नेचर में तो इंसाफ नहीं (00:24:04) कहीं। (00:24:06) और आप वादा कर रहे हैं कि तुम्हें मरने के (00:24:08) बाद इंसाफ मिलेगा। (00:24:10) मुझे अगर मिलेगा तो मैं बहुत खुश हूंगा। (00:24:13) लेकिन मैं यकीन नहीं कर पाता हूं। इसलिए (00:24:16) कि मैं फेथ नहीं पैदा कर सकता। द वेरी (00:24:20) फैक्ट दैट रिलीजंस डिमांड फेथ। (00:24:25) इसका मतलब है कि उनके पास जस्टिफिकेशन (00:24:28) नहीं है। (00:24:31) अच्छा था। फिर (00:24:34) रिलीजन अगर मॉडरेशन में है कोई सा भी वो (00:24:38) आप में कुछ खूबियां भी पैदा करता होगा। (00:24:40) देखिए उससे यह फायदा है, वो फायदा है। (00:24:43) अल्कोहल जो है (00:24:46) वो ज्यादातर दवाओं में यूज़ होती है। और एक (00:24:50) सर्वे किया गया था अमेरिका में कि (00:24:52) लोंगिटिविटी किन लोगों की है? तो एक तरफ (00:24:55) वो लोग थे जो शराब पीते ही नहीं थे और एक (00:24:58) तरफ वो थे जो एक बोतल शराब पीते थे। सबसे (00:25:01) ज्यादा लंबी उम्र उनकी है जो दो पैक नाप (00:25:05) के शराब पीते और खाना खाते। (00:25:08) मगर हम शराब को बुरा समझते हैं। मैं भी (00:25:11) बुरा समझता हूं। क्यों? (00:25:14) ऐसा होता नहीं। कुछ चीजों में आदत होती है (00:25:17) जो बरसी है। आज तक मैंने एक आदमी दूध पीता (00:25:21) है। आप 10 साल बाद भी मिलेंगे तो एक ही (00:25:23) गिलास पीता होगा। ऐसा नहीं होता सुबह से (00:25:25) दूध पीता रहता है। (00:25:28) मिल्कोहलिक मैंने नहीं देखे। अल्कोहलिक (00:25:31) होते हैं। यह टेंडेंसी है मजहब की कि वो (00:25:36) बढ़ता है। जैसे कैंसर बढ़ता है, जैसे शराब (00:25:40) बढ़ती है। (00:25:42) कुछ लोग होंगे जो उसे सही तरह से यूज़ करते (00:25:45) हैं। मुझे यकीन है कि हमारे मुफ़्ती साहब (00:25:48) भी उनमें से एक हैं। बहुत खुशी हुई मुझे (00:25:50) इनसे मिलके। लेकिन कितने लोग हैं कि आज आप (00:25:53) देखते हैं दुनिया में जो तबाहया है इनमें (00:25:56) कितना हाथ है उन लोगों का जो बिलीव कहते (00:25:59) मजहब ये नहीं कहता ना कहता होगा मगर जब ये (00:26:02) मजहब पीते हैं तो ऐसे बिहेव करते हैं (00:26:06) थोड़ा सा अगर हो तो शायद बहुत अच्छी बात (00:26:08) है लेकिन शराब थोड़ी सी नहीं रहती उसमें (00:26:12) टेंडेंसी है पहले थोड़ा सा अगर दो तीन (00:26:15) कैंसर के सेल हो ना बॉडी में तो आदमी सिम (00:26:18) रहेगा लेकिन वो दो तीन सेल नहीं रहते वो (00:26:21) मल्टीप्लाई होते हैं। जावेद साहब टाइम (00:26:23) पूरा हो गया। (00:26:24) टाइम हो गया। बस बात खत्म हो गई। अच्छा (00:26:26) मुझे कुछ और कहने को था भी नहीं। (00:26:29) [प्रशंसा] (00:26:31) जी मैं पहले जवाबी दौर के लिए इनवाइट कर (00:26:35) रहा हूं मुफ्ती साहब को। योर रिबटल राउंड (00:26:37) वन। यू हैव से मिनट्स। (00:26:45) थैंक यू वेरी मच जावेद साहब। आपकी बात को (00:26:48) सुनकर बड़े महजूस हुए हैं हम लोग। महसूस (00:26:50) डू यू अंडरस्टैंड वी एंजॉय ओके अब थोड़ा सा (00:26:54) लॉजिकली उसको हम लोग (00:26:55) दरअसल हम लोगों ने कल गुजारिश की थी (00:26:57) मुफ्ती साहब से भी जावेद साहब से भी कि (00:26:58) हिंदुस्तानी जबान आम फहम सबको समझ में आ (00:27:01) जाए और जहां कहीं आप मुश्किल शब्द (00:27:03) इस्तेमाल करें वहां बताते भी चलें थैंक यू (00:27:07) तो सबसे पहले हमारे रिस्पेक्टेड जावेद (00:27:09) साहब ने हवाला दिया कि खुदा फानी है कितने (00:27:12) मजहब आ गए चले गए किसी ने जुपिटर को खुदा (00:27:14) माना किसी ने किसी को माना मैं कहता हूं (00:27:16) जिसने कॉन्टिंजेंट चीज को खुदा माना गलत (00:27:18) माना वो खुदा है ही नहीं वो खुदा ही नहीं (00:27:21) है। [प्रशंसा] (00:27:23) हम तो नेसेसरी बीइंग को साबित करने बैठे (00:27:25) हैं। वो नेसेसरी कॉज जो इटरनल है जो जो (00:27:29) अबदी भी है और अजली भी है। हम किसी और को (00:27:31) साबित करने नहीं बैठे। दूसरी चीज उन्होंने (00:27:33) कहा के फेथ एंड बिलीफ ये एक (00:27:39) ऐसी डेफिनेशन है फेथ की जो इन्होंने पहली (00:27:42) मर्तबा पेश की है या माफ़ कीजिएगा इन्होंने (00:27:45) पहली मर्तबा पेश नहीं की है। रिचर्ड (00:27:46) डॉकिंस ने पहली मर्तबा पेश की है। मुझे (00:27:48) मालूम है ये सोर्स कहां से है। (00:27:50) एपिस्टेमोलॉजिकली (00:27:52) फेथ और बिलीफ का फर्क आप इस तरह नहीं कर (00:27:54) सकते सर। फेथ सही भी होता है, गलत भी होता (00:27:58) है। बिलीफ सही भी होता है, गलत भी होता (00:28:00) है। जो लॉजिक रीजन और एविडेंस से बैक्ट (00:28:04) होगा वो फेथ सही होगा। और आप जिस फेथ की (00:28:07) बात कर रहे हैं कि इलॉजिकल है और उसके (00:28:09) पीछे नहीं है तो वी आर ऑन द सेम पेज। हम (00:28:12) नहीं मानते उस फेथ को। जो फेथ ऐसा हो (00:28:15) जिसके पीछे कोई लॉजिक ना हो। एविडेंस ना (00:28:17) हो। हम नहीं मानते। हम तो उस फेथ के कायल (00:28:19) हैं जिसके पीछे लॉजिक हो और एविडेंस हो। (00:28:21) तो बिलीफ सही भी होता है, गलत भी होता है, (00:28:23) फेथ भी सही होता है और गलत भी होता है। तो (00:28:25) आज फेथ और बिलीफ के डिफरेंस पे बात नहीं (00:28:28) हो रही है। आज आप चाहे फेथ एक्सेप्ट कर (00:28:30) लें या बिलीफ एक्सेप्ट कर लें। आज ये बात (00:28:32) होगी कि ट्रुथ क्या है? चाहे ट्रू बिलीफ (00:28:36) सही है या ट्रू फेथ सही है और फॉल्स फेथ (00:28:38) क्या है और फॉल्स बिलीफ क्या है? बात इसपे (00:28:40) हो रही है। दूसरी चीज इन्होंने पूछा (00:28:42) स्टुपिडिटी फिर क्या है? अगर फेथ रिलीजन (00:28:45) स्टुपिडिटी नहीं है तो और क्या है? (00:28:46) क्योंकि फेथ का मुतालबा करते हैं तो (00:28:47) स्टुपिडिटी स्टुपिडिटी क्या है? मैं कहता (00:28:50) हूं स्टुबिडिटी एथिज्म है। उसकी वजह ये है (00:28:52) कि आप एक सड़क पे जा रहे हो और आप किसी (00:28:54) गार्डन में जाएं और देखें वहां लिखा है (00:28:56) फूलों के साथ आई लव जावेद अख्तर एंड आई (00:29:00) रियली डू आई लव यू सर। सो (00:29:03) जब आप [प्रशंसा] (00:29:05) वहां पर पहुंचे तो वहां पहुंचकर अब ये (00:29:09) बताएं क्या आप ये कहेंगे वाओ व्हाट अ (00:29:11) नेचुरल सेक्शन। ये क्या नेचुरल सेक्शन है? (00:29:15) नहीं। यह प्रिसाइजली डिज़ है। इसके पीछे (00:29:19) डिजाइनर है। लिहाजा अगर कोई एक ऐसी कॉमन (00:29:23) सेंस की बात को कबूल नहीं कर रहा है कि (00:29:25) यूनिवर्स जो इतनी प्रिसाइज़ली काम कर रहा (00:29:27) है। हम कह दें कि खुद ब खुद बन गई। मैं (00:29:29) समझता हूं इससे बड़ी स्टूबिडिटी और कुछ (00:29:31) नहीं है। ये इररेशनल चीज है। [प्रशंसा] (00:29:35) फिर हमारे सर ने कहा कि आपने बॉल पे फोकस (00:29:39) किया, आइलैंड पे फोकस नहीं किया। अरे (00:29:41) आइलैंड को किसने बनाया यही समझाने के लिए (00:29:44) तो बॉल की मिसाल दे रहा हूं। [प्रशंसा] (00:29:48) और बॉल भी कॉन्टिंजेंट है, आइलैंड भी (00:29:50) कंटिंजेंट है। दोनों नेसेसरी बीइंग का (00:29:52) मुतालबा करते हैं। आगे इन्होंने कहा कि (00:29:55) नेचर में कोई इंसाफ नहीं है। हम डिसाइड (00:29:58) करते हैं कि मोरालिटी क्या होती है? इंसाफ (00:30:00) क्या होता है? हम डिसाइड करते हैं जैसे (00:30:02) ड्राइविंग सीट में, ट्रैफिक वाला ये तो (00:30:04) किसी खुदा ने नहीं कहा। ये है इसे कहते (00:30:06) हैं फॉल्स इक्विवेलेंस। ये एक लॉजिकल (00:30:08) फैलेसी है। आपने जो है मिसाल ली ड्राइविंग (00:30:11) की और ट्रैफिक की। ये सब्जेक्टिव मोरालिटी (00:30:14) है। आप सब्जेक्टिव मोरालिटी को मिसाल (00:30:16) बनाकर ऑब्जेक्टिव मोरालिटी के ऊपर नहीं (00:30:18) थोप सकते। इंसाफ ये ऑब्जेक्टिव मोरालिटी (00:30:20) है। अगर आप ये कहते हैं कि नेचर में इंसाफ (00:30:22) नहीं है तो इंसाफ का ना होना ये नेचुरल (00:30:25) हुआ तो फिर नेचर को नेचर रहने दे। क्यों (00:30:27) हम इतना स्ट्राइव कर रहे हैं दुनिया में (00:30:28) इंसाफ लाने के लिए? ये तो इलॉजिकल बात है। (00:30:30) इरशनल बात है। इसलिए बहुत सी चीजें ऐसी (00:30:34) हैं जो ऑब्जेक्टिवली जो है इविल या गुड (00:30:37) हैं और बहुत सी चीजें ऐसी हैं जो (00:30:38) सब्जेक्टिवली हैं। सब्जेक्टिवली जो मोरल (00:30:41) होता है या इमोरल होता है उसको हम सोशल (00:30:44) कंसेंस कंसेंसेस से या पर्सनल प्रेफरेंस (00:30:46) से डिसाइड करते हैं। लेकिन जो ऑब्जेक्टिव (00:30:49) मोरालिटी है जिसमें इंसाफ आया जो इन्होंने (00:30:51) बार-बार रिपीट किया ये ऑब्जेक्टिव है। (00:30:54) सब्जेक्टिव नहीं है। अगर आप कहते हैं ये (00:30:55) सब्जेक्टिव है। तो मेरा सवाल आपसे यह है (00:30:58) क्या सोशल कंसेंसेस के जरिए अगर जुल्म को (00:31:01) सही करार दे दिया जाएगा तो आप जुल्म को (00:31:03) जस्टिफाई करेंगे? दूसरी चीज इन्होंने ये (00:31:07) कहा कि दो पैक शराब पी लें तो वो उतने पे (00:31:11) नहीं रहता बढ़ जाता है। यही मामला मजहब के (00:31:14) साथ है। दो पैक आप पी ले बढ़ेगा। तो ये एक (00:31:17) ऐसी मिसाल है इसको कहीं भी फिट कर लें कि (00:31:20) आप एथिज्म पे जब फिट करें जब आप दो पैक (00:31:22) एथिज्म का लेंगे ना तो वो बढ़-बढ़ के (00:31:24) नॉर्थ कोरिया बनेगा। थैंक यू। (00:31:26) [प्रशंसा] (00:31:31) अ [प्रशंसा] (00:31:33) फर्स्ट राउंड के रिबटल के लिए मैं जावेद (00:31:35) साहब को इनवाइट कर रहा हूं। आपके पास 7 (00:31:37) मिनट का वक्त है। रिसेट कर दीजिएगा प्लीज। (00:31:42) मुझे इस बात की खुशी है कि मुफ्ती साहब ने (00:31:44) भी मान लिया कि नेचर में कोई इंसाफ नहीं (00:31:46) है। तो कोई भी चीज जो इंसान ने नहीं बनाई (00:31:50) है उसमें इंसाफ नहीं होता है। एक बात मैं (00:31:52) आपसे अ करूं जरा पता लगा लीजिएगा। ये जो (00:31:54) आप बाग में जाते हैं बेहद खूबसूरत फूल (00:31:56) देखते हैं ना इनमें से कोई नेचुरल नहीं (00:31:58) है। ये सारे फूल क्रॉस करके बनाए गए हैं। (00:32:03) जो जंगल में फूल होते हैं वो निहायत (00:32:05) मामूली होते हैं। ये फूल इंसानों ने बनाए (00:32:07) हैं। जो आप बाग में देख के वाहवाह कहते (00:32:10) हैं। ये इंसानों के बनाए हुए हैं। डिफरेंट (00:32:12) फूलों को क्रॉस करके डेवलप करके फिर क्रॉस (00:32:14) करके इस तरह से बनाए गए हैं। नेचुरल (00:32:16) फ्लावर्स नहीं। किसी जंगल वीरांग में जाके (00:32:18) आप गुलाब के फूल नहीं देखेंगे। ये सब बनाए (00:32:21) हुए हैं इंसान ने। बहुत से काम इंसान ने (00:32:23) किए हैं। बाकी ये कि आपने मेरी एक बात का (00:32:27) जवाब नहीं दिया। जिससे मुझे शिकायत है कि (00:32:31) फेथ क्या है? और आप फेथ मांगते क्यों हैं (00:32:34) मुझसे? आप तो लॉजिकल हैं। आपके पास तो (00:32:38) सारे रैशन हैं। आपके पास सारे सबूत हैं। (00:32:41) तो आपको फेथ की डिमांड क्यों करते हो आप? (00:32:44) कि भाई तुम सरेंडर कर दो और सवाल मत करो। (00:32:47) कोई मजहब सारे सवाल करने की इजाजत नहीं (00:32:49) देता है और मना करता है कि ज्यादा सवाल ना (00:32:52) करो बैठ जाओगे तुम। आप क्यों रोकते हैं? (00:32:57) हकीकत ये है कि इंसानी तारीख क्या है? (00:33:00) इंसानी तारीख यह है कि दुनिया में दो तरह (00:33:02) के लोग हुए हैं। एक वो जिन्होंने अपनी (00:33:05) लालमी की परस्तिश की है। दूसरे वो (00:33:09) जिन्होंने अपनी इग्नोरेंस या लालमी से (00:33:12) झगड़ा किया है और मालूम किया है कि क्या (00:33:14) है। ये जो आप कह रहे हैं आज आप हैरान हैं (00:33:18) कि भाई ये यूनिवर्स कैसे बनी? लोग हैरान (00:33:21) थे कि सूरज डूबता है तो इधर से कैसे (00:33:23) निकलता है? (00:33:25) और आप एक कदम जाके हमेशा का मानने को (00:33:29) तैयार है। एक कदम पीछे ही मत जाइए। भाई आप (00:33:32) इसके पास जाते हैं और कहते हैं सवाल ना (00:33:34) करना कि ये कहां से आया? ये पावर तो हमेशा (00:33:36) से हमेशा रहेगी। तो आप यूनिवर्स के बारे (00:33:38) में मानेंगे क्या तकलीफ है? एक कदम पहले (00:33:40) या रुक जाइए। (00:33:42) यह हमेशा से थी या नहीं थी हमें मालूम (00:33:45) नहीं है। और यह कहना कि हमें मालूम नहीं (00:33:48) है। कमाल यह है कि दुनिया के सारे मजहब सब (00:33:52) जानते हैं। ये दुनिया कैसे बनी थी? कैसे (00:33:55) मिटेगी? मरने के बाद क्या होगा? इनको सब (00:33:57) इल्म है। इनको किसी को डायनासोर होते थे। (00:34:02) पहले ये नहीं पता था। किसी को नहीं पता। (00:34:05) [प्रशंसा] (00:34:07) किसी भी दुनिया की मजहबी किताब में (00:34:10) डायनासोर का जिक्र नहीं है। (00:34:13) लेकिन बाकी सब बातें हाउ टू मेक यूनिवर्सल (00:34:16) फॉर ईजी लेसंस एंड बाकी सब पता है। जिसको (00:34:20) सब पता है वो गड़बड़ है। हम में ये इंकसार (00:34:24) ये ह्यूमिलिटी होनी चाहिए कि हम ये कहें (00:34:26) कि हमें ये बहुत सारी बातें नहीं मालूम। (00:34:29) लेकिन हम उनकी परस्त ना कर लें। अपनी (00:34:31) लालमी को की परस्त ना करें। हम उसे पता (00:34:36) लगाने की कोशिश करें। जिस दुनिया में आप (00:34:38) बैठे हैं सर ये हॉल जो है ये (00:34:40) इलेक्ट्रिसिटी जो है ये माइक जो है जिस (00:34:43) हवाई जहाज से आप आए थे वो जिस कार से आप (00:34:46) यहां आए हैं ये सब उन लोगों की बनाई हुई (00:34:48) है जिन्होंने सवाल किए थे (00:34:51) [प्रशंसा] (00:34:53) ये दुनिया जिसमें आप आज आराम से हैं ये उन (00:34:57) लोगों की बनाई है कि जिन्होंने सवाल किए (00:35:00) थे और हर स्टेज पे इन सवालों को (00:35:07) मकरू कहा गया था, गलत कहा गया था। आप जरा (00:35:11) तारीख पढ़िए। एक बड़ी दिलचस्प किताब है बटन (00:35:14) की (00:35:16) जिसमें उसने रिलजन एंड साइंस के कब से (00:35:20) रिलीजन जो है साइंस के अगेंस्ट है। और हद (00:35:23) तो ये है कि भाप के इंजन के खिलाफ थे। (00:35:28) स्टीम इंजन के भी खिलाफ थे। और फतवे उन पे (00:35:31) वेटिकन ने दिए। (00:35:34) तो ये हमेशा अभी जैसे ही ये राइट फिंगर (00:35:38) आते हैं (00:35:40) अमेरिका में पावर में तो वो जो अपना ये (00:35:44) क्या बोलते हैं उसे (00:35:46) सीड क्या बेटे सीड क्या जो (00:35:50) नहीं नहीं सीड जो होते हैं (00:35:54) जी (00:35:59) नहीं भाई (00:36:01) वो जो ह्यूमन बॉडी के (00:36:09) उसप रिसर्च बंद हो जाती है। (00:36:12) रिपब्लिकन नहीं करने देते। (00:36:15) अरे भाई इतना डर क्या है तुम्हें? (00:36:17) एक जमाने में बहुत नाराज थे ये सारे मजहबी (00:36:20) लोग कि ये इंसान तो इंसान बनाने की कोशिश (00:36:23) कर रहा है। आपको क्या तकलीफ हुई? बना ले (00:36:25) तो बना लेने दो। ये खौफ क्या है? (00:36:30) और यह सब आज जो आप कह रहे हैं नामुमकिन है (00:36:33) यह कैसे हुआ मुझे किस्सा याद आता है जब (00:36:36) मैं छठी क्लास में था तो मैं मैथमेटिक्स (00:36:38) में बहुत वीक था तो एक टीचर रख दिया गया (00:36:41) उसने एक दो तीन चार पांच छ सात तो सिखा (00:36:43) दिया मुझे वो दिन मैं भूल नहीं सकता हूं (00:36:45) मुफ्ती साहब जिस दिन उसने ये बताया कि 1/2 (00:36:49) क्या होता है और 3/4 क्या होता है मुझे (00:36:52) ऐसा लगा कि मेरा सर बीच से फट जाएगा ये (00:36:55) आदमी कह रहा है कि यू दीवार के अंदर जाओ (00:36:57) वॉक करते हुए आज हंसता हूं मैं इस बात पे। (00:37:00) तो आज जो बातें आपके ज़हन से बिल्कुल परे (00:37:04) हैं और आप हैरान होते हो उन्हें देख के। (00:37:06) एक वक्त आएगा कि मामूली लगेंगे और हुआ है (00:37:09) आपकी इंसानी तारीख है। इतनी जल्दी सारे (00:37:12) फैसले आप मत कर लीजिए। थोड़ा ह्यूमिलिटी (00:37:14) रखिए कि भाई ये हमें नहीं मालूम। ये कहने (00:37:18) में क्या आ रहा है? ये यूनिवर्स कहां तक (00:37:21) फैली? ये कब से है और कब तक रहेगी? हमें (00:37:24) नहीं मालूम। आपने फैसला कर लिया कब बनी? (00:37:28) ये आपके हिसाब से कोई 14 बिलियन इयर्स बनी (00:37:31) जो समझा जाता है। उससे पहले हजारों (00:37:35) करोड़ों अरबों साल तक खुदा बैठा क्या कर (00:37:38) रहा था। खामोश बैठा था ऐसे ही जमाइयां ले (00:37:41) रहा था। फिर उसे आईडिया आया यार एक काम (00:37:44) करते हैं। वक्त अच्छा गुजर जाएगा यूनिवर्स (00:37:46) पर आपसे। (00:37:48) सोचिए। [प्रशंसा] (00:37:52) वो तो हमेशा से है ना। मगर यूनिवर्स हमेशा (00:37:54) से नहीं है। ये तो बनाई गई है। और उससे (00:37:59) पहले क्या था? इनका क्या काम था? (00:38:03) कैसी बात है? ये बड़ा आसान है। जो बात (00:38:06) हमें आज धीरे-धीरे पता चली है। बरसों 2000 (00:38:09) और ढाई हजार साल पहले आपको किसी ने बता (00:38:11) दिया कि क्या था आप मान गए? और तब से वही (00:38:14) मान रहे हैं जो ढाई हजार साल पहले कहा गया (00:38:16) था। सब कुछ बदल गया है। सॉल्व हो रही है (00:38:20) चीजें। अभी (00:38:22) साइंस बिलकुल दावा नहीं करती या कोई (00:38:26) फ़िलॉसफर ये दावा नहीं करता कि हमें सब (00:38:29) मालूम है। बल्कि वो कहता है कि हमें जितना (00:38:31) मालूम होता है उससे ये मालूम होता है कि (00:38:32) हमें कितना कम मालूम है। तो हम अपनी (00:38:36) जियालत से लड़े उसकी परफेशना करें। (00:38:39) जी टाइम थैंक यू। थैंक यू सो [प्रशंसा] (00:38:42) मच। (00:38:44) मैं (00:38:46) तर्कों की श्रंखला में राउंड टू के लिए (00:38:49) मुफ्ती साहब को आमंत्रित कर रहा हूं। आपके (00:38:51) पास एक बार फिर से 7 मिनट का वक्त है। (00:38:58) शुक्रिया। जनाब जावेद अख्तर साहब कई (00:39:01) मर्तबा दोहरा रहे हैं कि फेथ का मतलब (00:39:03) बताइए। फेथ का मतलब बताइए। मैंने बता (00:39:05) दिया। फेथ सही भी होता है, गलत भी होता (00:39:08) है। और आज हम फेथ पे बात नहीं कर रहे। हम (00:39:10) ट्रुथ और डस गॉड एक्सिस्ट पे बात कर रहे (00:39:12) हैं। क्या डस गॉड एक्सिस्ट? यह ट्रुथ यानी (00:39:16) गॉड है या नहीं है? इसमें से दोनों ट्रुथ (00:39:18) क्या है? अब आप उसे फेथ कह लें, बिलीफ कह (00:39:20) लें, नॉट माय बिज़नेस। उसके बाद आपने कहा (00:39:23) कि भाई सवाल करने से मजहब रोकता है। मैं (00:39:26) कहता हूं जो रोकता है वो रोकता होगा। मैं (00:39:30) नहीं रोकता बल्कि सवाल करें। सवाल करना (00:39:33) चाहिए। सवाल कर करके तो हम आगे बढ़ते हैं, (00:39:35) तरक्की करते हैं। और इसीलिए मैं आज यहां (00:39:37) पे आया हूं। लेकिन सवाल सिर्फ खुदा से (00:39:39) नहीं होगा। आपसे भी होगा। सवाल एथिज्म से (00:39:41) भी होगा। सवाल सिर्फ मजहब से नहीं होगा। (00:39:43) सबसे होगा। और आज मैं सवाल करूंगा और (00:39:46) उम्मीद है कि आप जवाब देंगे। अभी तक आपने (00:39:48) वैसे कंटिंजेंसी आर्गुमेंट का कोई जवाब (00:39:50) नहीं दिया है। चलें। आपने कहा यूनिवर्स के (00:39:52) बारे में इटरनल क्यों नहीं बोल देते? ये (00:39:55) क्योंकि लॉजिकली पॉसिबल ही नहीं है कि (00:39:57) यूनिवर्स इटरनल हो। यूनिवर्स एक कंटिंजेंट (00:40:01) चीज है। जो टाइम एंड स्पेस के पाबंद है। (00:40:04) टाइम एंड स्पेस से बाउंड है। जो टाइम एंड (00:40:06) स्पेस से बाउंड होगा वो कंटिंजेंट होगा। (00:40:08) जो कंटिंजेंट होगा वो उसकी बिगिनिंग हुई (00:40:10) होगी। जिसकी बिगिनिंग हुई होगी वो इटरनल (00:40:12) नहीं हो सकता। ये तो कॉमन सी बात है। (00:40:14) [प्रशंसा] (00:40:18) आपने कहा कि किसी मजहबी किताब में (00:40:21) डायनासोर का जिक्र नहीं है। अफसोस कि आज (00:40:23) तक किसी मैथमेटिक्स के किताब में मुझे (00:40:25) डायनासोर का जिक्र नहीं मिला। (00:40:27) [प्रशंसा] (00:40:29) तो इसका मतलब मैथमेटिक्स की किताब बेकार (00:40:31) है। नहीं उसका वो टॉपिक नहीं है। रेवेलेशन (00:40:33) का और मजहबी किताबों का टॉपिक ये नहीं है (00:40:35) कि आपको आ के बताएं साइकिल कैसे बनाते (00:40:37) हैं। ये आकर ये बताएं कि जो है डायनासोर (00:40:39) कब था। वो तो मोरालिटी सिखाने आया है। गॉड (00:40:42) के बारे में बताने आया। नॉन फिजिकल (00:40:44) रियलिटी की हकीकत को सिखाने के लिए आया। (00:40:46) रिलीजियन साइंस को रोकता है। नहीं रोकता। (00:40:48) अगर रोकता है तो गलत करता है। रिलीजन (00:40:51) साइंटिज्म को रोकता है जिसमें हमारे जावेद (00:40:53) साहब मुख्तल हैं। [प्रशंसा] (00:40:56) साइंस (00:40:58) साइंस और साइंटिज्म में फर्क है। (00:41:01) साइंटिज्म ये है कि आप समझे कि साइंस और (00:41:04) साइंटिफिक मेथोडोलॉजी ये नॉलेज को हासिल (00:41:07) करने का वाहिद सोर्स ऑफ नॉलेज है। ये है (00:41:10) साइंटिज्म। हम इसे रिजेक्ट करते हैं। हम (00:41:12) साइंस को तो तरक्की करते हैं। भाई आप (00:41:14) हमारी पूरी तारीख कर लें। पढ़ लें तो आपको (00:41:16) पता चल जाएगा। बहरहाल ये अलग टॉपिक है। (00:41:18) उसके बाद इन्होंने एक लफ्ज़ कहा वेटिकन ने (00:41:20) फतवा दिया। वेटिकन का फतवे से कोई ताल्लुक (00:41:22) नहीं है। दोनों कंट्राडिक्टरी अल्फाज़ (00:41:23) हैं। उसके बाद उन्होंने कहा कि भाई हमें (00:41:25) नहीं मालूम। अगर नहीं मालूम तो क्लियरली (00:41:28) कह दे ना कि नहीं मालूम है। इसमें क्या (00:41:30) हरज है? तो वही तो मैं कह रहा हूं ना कि (00:41:32) आप कह दें कि नहीं मालूम लेकिन क्लेम (00:41:33) क्यों कर रहे हैं कि गॉड एक्सिस्ट नहीं कर (00:41:35) रहा है। [प्रशंसा] (00:41:40) आप कह दे नहीं मालूम है हो सकता है हो (00:41:42) सकता ना हो लेकिन आप क्लेम कर रहे हैं। द (00:41:45) मोमेंट यू से गॉड डस नॉट एक्सिस्ट दिस इज (00:41:48) अ क्लेम एंड नाउ द बर्डन ऑफ प्रूफ इज अपॉन (00:41:50) यू टू जैसे हमारे ऊपर है। [प्रशंसा] (00:41:54) और क्यों है मैं बताता हूं। क्यों है यह (00:41:56) भी मैं बताता हूं। फिलॉसोफिकली (00:41:59) जो क्लेम होता है ना सिर्फ यह नहीं होता (00:42:02) कि इंसान कहे पॉजिटिव क्लेम करे और (00:42:04) नेगेटिव क्लेम करे तो बर्डन अप्रूव नहीं (00:42:06) है। आप मिसाल के तौर पे मैं कहूं कि फुला (00:42:09) उस कमरे में कोई नहीं है। मैंने एक नॉलेज (00:42:11) का क्लेम किया है। उस कमरे में कोई नहीं (00:42:14) है। मैंने एक नॉलेज का क्लेम किया। या तो (00:42:15) मैं कहूं मुझे नहीं पता हो भी सकता है (00:42:17) नहीं भी हो सकता है। दिस इज़ नॉट अ क्लेम। (00:42:19) लेकिन जब मैं कह रहा हूं कि वहां कोई नहीं (00:42:20) है। या मैं कह रहा हूं वहां कोई है। दोनों (00:42:22) क्लेम है। और दोनों के ऊपर बर्डन ऑफ प्रूफ (00:42:24) है। हमारे ऊपर भी बर्डन ऑफ प्रूफ है। (00:42:26) मैंने कंटिंजेंसी आर्गुमेंट दिया। इसे (00:42:28) तोड़ कर दिखाइए। (00:42:30) [प्रशंसा] (00:42:32) आखरी चीज इन्होंने कहा कि खुदा दुनिया (00:42:36) बनाने से पहले 150 साल पहले या करोड़ों (00:42:39) साल पहले क्या कर रहा था? अरे हजरत (00:42:43) चल बहरहाल मैं जवाब दे देता हूं। आप हमारे (00:42:45) रिस्पेक्टेड पर्सनालिटी हैं। अगर आप नहीं (00:42:47) होते तो मैं ऐसे एंटरटेन ही नहीं करता। (00:42:50) [प्रशंसा] (00:42:53) टाइम ये 100 साल पहले या 100 साल बाद पहले (00:42:57) बाद में अभी ये वो अल्फाज़ हैं जिनका (00:43:00) ताल्लुक टाइम से है। टाइम शुरू ही हुआ है (00:43:02) यूनिवर्स की बिगिनिंग के बाद तो उसके पहले (00:43:05) खुदा क्या कर रहा था? सवाल इलॉजिकल है। ये (00:43:07) फैलेसी है। यानी आप ये कह रहे हैं कि (00:43:09) यूनिवर्स के बनने से पहले खुदा क्या कर (00:43:11) रहा था? टाइम के बनने से पहले पहले का (00:43:14) ताल्लुक टाइम से है। टाइम उस वक्त था ही (00:43:16) नहीं। तो ये सवाल ही इनवैलिड है खुदा के (00:43:18) ताल्लुक से। [प्रशंसा] (00:43:22) दूसरी चीज आर्गुमेंट ऑफ कंटिंजेंसी जो (00:43:25) मैंने आपके सामने पेश की है। आपने बार-बार (00:43:28) ये प्रूफ किया और ये कह रहे हैं कि गॉड ऑफ (00:43:31) गैप्स। देखिए पहले नहीं मालूम था साइंस ने (00:43:33) कर दिया। सिंपल इसकी मिसाल से मैं समझा (00:43:35) देता हूं। जिस गैप्स की आप बात कर रहे हैं (00:43:37) ना साइंस उन गैप्स को जिन चीज के जरिए भी (00:43:41) प्रूव करेगा वो कंटिंजेंट ही होगा। अब (00:43:44) चाहे वो फोर्स हो, मैटर हो या एनर्जी हो। (00:43:47) लिहाजा सवाल हमारा उस वक्त भी वैलिड होगा (00:43:50) जब तक कि आप नेसेसरी बीइंग पे ना आ जाए और (00:43:53) इनफिनिट रिग्रेस पॉसिबल नहीं है ऑफ कॉजेस (00:43:55) इन इन प्रैक्टिकल वर्ल्ड तो जाहिर है कहीं (00:43:58) रुकना पड़ेगा जहां रुकेंगे वही खुदा है। (00:44:01) दूसरी चीज आपने (00:44:05) ये कहा क्या कह रहा था मैं किस पॉइंट को (00:44:11) व्हाट (00:44:14) नो आफ्टर दैट जस्ट जस्ट जस्ट नाउ (00:44:18) जहां (00:44:19) हां जहां रुकेंगे वही खुदा है। बहरहाल तो (00:44:22) टाइम का जिक्र हो गया। गॉड ऑफ़ गैप्स सॉरी (00:44:24) या। इसकी एक मिसाल आप ले लें। एक कार है (00:44:29) एक साहब ने देखा कि भाई कार जो है उसके (00:44:32) व्हील्स कितने अच्छे लगे हुए हैं। सही जगह (00:44:35) पे। स्टयरिंग जो है कितने अच्छे जगह पर (00:44:38) लगी हुई है और सीट्स कितने वेल डिज़ है। (00:44:42) कितनी प्रिसाइजली यह कार काम कर रही है। (00:44:45) तो जरूर कोई ना कोई इसे क्रिएट किया है। (00:44:47) किसी ने क्रिएट किया है। अब जावेद साहब आए (00:44:49) और अरे जनाब बोनट खोलिए। इसमें इंजन है। (00:44:52) इंजन इस कार को चला रहा है। हेंस प्रूव नो (00:44:54) वन हैज़ क्रिएटेड द कार। दिस इज़ इलॉजिकल। (00:44:56) दिस इज़ इररेशनल। आपने इंजन के जरिए उस गैप (00:45:00) को तो साबित किया। लेकिन क्या उससे (00:45:04) कि कार की जो क्रिएशन है और उसका जो (00:45:08) क्रिएटर है यह इंपॉसिबल हो जाए ऐसा पॉसिबल (00:45:10) है? उसका सवाल खत्म हो जाए ऐसा पॉसिबल है? (00:45:12) नहीं। आपने गैप्स को फिल करके कंटिंजेंट (00:45:16) चीजों से गैप्स को फिल करके हमारे (00:45:18) ऑब्जरवेशन को और ब्रॉड कर दिया। अब हमें (00:45:20) और पता चल गया कि ये जो कार है इसका (00:45:23) सिस्टम कितना ज्यादा कॉम्प्लेक्स है। पहले (00:45:25) कम समझते थे। अब कॉम्प्लेक्सिटी और ज्यादा (00:45:27) वाज़ हो गई। अब हमें समझ में आ रहा है कि (00:45:29) हमारी सर्टेनिटी और बढ़ गई कि जरूर इस कार (00:45:32) को किसी ना किसी ने बनाया। यही मामला (00:45:33) यूनिवर्स का है। साइंस हमेशा फिजिकल (00:45:36) वर्ल्ड की चीजों को ही फिल करती जाएगी और (00:45:38) फिजिकल चीजों से ही करती जाएगी क्योंकि (00:45:40) एंपेरिकल एविडेंस का ताल्लुक फिजिकल (00:45:41) वर्ल्ड से है। आप साइंस के जरिए (00:45:43) मेटाफिजिकल रियलिटी को कभी साबित नहीं कर (00:45:46) सकते। ये रॉन्ग टूल का इस्तेमाल करना है। (00:45:48) ये वही काम है कि आप मेटल डिटक्टर से (00:45:50) प्लास्टिक डिटक्टर करने चलें जो कि जाहिर (00:45:53) है सही नहीं है। थैंक यू। [प्रशंसा] (00:46:00) जी (00:46:02) ये आर्गुमेंट का राउंड टू है। सात मिनट (00:46:04) है। (00:46:05) पहले तो मैं आपसे अर्ज करूं कि आपने कहा (00:46:07) कि जब कायनात ही नहीं थी तो वक्त भी नहीं (00:46:10) था। कुछ भी नहीं था। कैसे नहीं था? खुदा (00:46:12) था। (00:46:13) एक एकिस्टेंस तो था ना खुदा का। तो जब (00:46:16) खुदा था तो वक्त भी होगा। ऐसा नहीं है कि (00:46:19) कुछ भी नहीं था। खुदा था। अच्छा बाकी है (00:46:22) कि आपने कहा साहब आप साबित कीजिए। आपके (00:46:24) पास भी लॉजिक है या मेरे पास भी लॉजिक है (00:46:26) आपका मेरा जिम्मेदारी नहीं है साबित करना (00:46:28) कि खुदा है। बर्टन रसेल ने बड़ी अच्छी बात (00:46:32) कही। [प्रशंसा] (00:46:34) बर्टन रसेल ने एक बड़ी अच्छी बात कही है। (00:46:35) मैं आपसे अगर ये दावा करूं कि एक चाय की (00:46:38) केतली मिरर के चारों तरफ घूम रही है मार्स (00:46:41) के चारों तरफ तो ये आपका काम नहीं है कि (00:46:43) आप साबित करें कि कोई चाय की केतली नहीं (00:46:45) है। ये मेरा काम है। मैंने दावा किया है। (00:46:48) ये दावा तो मजहबी लोग करते हैं कि खुदा (00:46:50) है। मैं क्यों साबित करूं कि नहीं है? जब (00:46:52) तक आप मुझे कंफ नहीं कर देंगे मैं नहीं (00:46:54) मानूंगा। (00:46:56) आपकी जिम्मेदारी है। [प्रशंसा] मेरी (00:46:58) जिम्मेदारी नहीं है। (00:47:02) दो ये कि ये जो आप कह रहे हैं जो गैप्स है (00:47:05) ये गैप्स जबजब किसी मजहब को चैलेंज करते (00:47:08) हैं। जब ऐसा कोई बात आती है तो हंगामा हो (00:47:12) जाता है। के जब वो चैलेंज करें किसी फेथ (00:47:15) को ये तमाम साइंस जो है इसे मुख्तलिफ (00:47:20) जगहों पे मुख्तलिफ़ वक्तों में मजहब ने (00:47:24) रोकने की कोशिश की है। यह किताब है रिलजन (00:47:27) एंड साइंस बट नर्सरी की पढ़िएगा अच्छी (00:47:30) लगेगी आपको। तारीख ही है साइंस मजहब की (00:47:34) साइंस से उसका यही रिश्ता है। अच्छा अब ये (00:47:38) हम सोचे कि बहाल ये वजूद जो है मजहब और ये (00:47:41) बिलीव इन गॉड इंसान को बेहतर बना देता है। (00:47:45) तो एक काम कीजिए हिंदुस्तान वर्ल्ड का (00:47:46) नक्शा लीजिए और मार्क कीजिए कि रिलीजन (00:47:49) कहां-कहां ज्यादा है। कहां-कहां चाहे वो (00:47:52) लैटिन अमेरिका हो या मिडिल ईस्ट हो या फार (00:47:55) ईस्ट हो या हिंदुस्तान के वो इलाके जहां (00:47:57) मजहबीियत ज्यादा है। रख दीजिए नक्शा अलग। (00:48:01) अब दूसरा नक्शा के कहां-कहां नाइंसाफी, (00:48:04) रिप्रेशन, औरतों के हुकूक की पामाली, (00:48:08) जुल्म, डिक्टेटरशिप कहां है? नक़्शा एक ही (00:48:12) होगा। (00:48:13) [प्रशंसा] (00:48:14) तो, आप मुझे बताएं के जो इसका तरकीब (00:48:18) इस्तेमाल क्या है? (00:48:21) खुदा का तरकीब इस्तेमाल तो बताइए। आप छोटी (00:48:23) सी दवा सड़क पे बेचते हैं। उसकी भी तरकीब (00:48:25) इस्तेमाल बताते हैं। इसके इस्तेमाल से तो (00:48:28) फायदा ही नहीं हुआ किसी को। जो सारे के (00:48:31) सारे ख़राब मुल्क हैं, खराब समाज है, वो (00:48:34) सारे जुल्म खुदा के नाम पे करते हैं। वो (00:48:37) गलत करते हैं, सही करते हैं। मुझे क्या (00:48:40) लेना देना उससे? इस्तेमाल से मालूम होता (00:48:42) ना। एक विस्की की बोतल कभी शायद देखी हो (00:48:45) आपने। लाल रंग की होती है उसपे रोशनी और (00:48:47) छिपड़े खूबसूरत लगती है। क्या बिगाड़ रही है (00:48:50) किसी का? उसका इस्तेमाल गलत है। इसलिए आप (00:48:53) उसे नापसंद करते हैं। इसका इस्तेमाल गलत (00:48:56) है। इस तसवुर का (00:48:59) इस्तेमाल ही गलत है और हमेशा से गलत हुआ (00:49:02) है। आप देख लीजिए इंसानी तारीख देख लीजिए। (00:49:04) आज देख लीजिए हिंदुस्तान देख लीजिए। (00:49:06) दुनिया देख लीजिए। क्या हो रहा है? (00:49:09) इसे कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं? फेथ वाले (00:49:12) लोग क्या फेयर हैं? जस्ट हैं जो अपने (00:49:15) खुदाओं पे यकीन रखते हैं। वो किस तरह के (00:49:18) लोग हैं? (00:49:19) वो लोगों को इंसाफ देते हैं। वह बेहतर (00:49:22) इंसान बने। तो इस दवा का फायदा क्या है? (00:49:25) चलो बहुत फायदा हो रहा तो मैं इस्तेमाल कर (00:49:26) लूंगा। मुझे तो इस दवा का कोई फायदा दिखता (00:49:29) ही नहीं। मुझे तो ऐसा लगता मैं एक और बात (00:49:32) बताऊं। अगर कोई आदमी मजहबी है और अच्छा (00:49:36) आदमी है तो मैं उसकी बहुत इज्जत करता हूं। (00:49:38) इसलिए कि मेरा ख्याल है मजहबी आदमी का (00:49:41) अच्छा होना मुझसे अच्छा होने से ज्यादा (00:49:43) मुश्किल है। भाई हर चीज की एक लिमिट है। (00:49:47) आप इतना भाग सकते हैं, इतना नहीं भाग (00:49:49) सकते। इतना वजन उठा सकते, इतना नहीं उठा (00:49:52) सकते। इतना दूर देख सकते हैं। इतना दूर (00:49:54) नहीं देख सकते। उसी तरह कॉमन सेंस कहता है (00:49:56) कि आप में नेकी का भी एक कोटा होगा। अब आप (00:50:00) अगर सुबह जाते हैं अपनी इबादतगाह और इबादत (00:50:04) करते हैं तो बाहर निकलते हैं तो आप तो यही (00:50:06) महसूस करते हैं कि आपने एक बहुत अच्छा काम (00:50:08) किया। आपकी नेकी का एक बहुत बड़ा कोटा (00:50:10) खर्च हो गया जिससे किसी का कोई फायदा नहीं (00:50:12) होगा। मैं तो नहीं जाता हूं तो मुझे तो (00:50:14) किसी को खाना खिलाना पड़ेगा। किसी बेवा की (00:50:17) मदद करनी पड़ेगी। मैं अपना कोटा कैसे (00:50:19) कंज्यूम करूं? आप अपना कोटा सारे मजहबी (00:50:23) लोग इंतहाई यूज़लेस कामों में यूज़ करते (00:50:25) हैं। उसके बाद भी अगर आप में बचती है थोड़ी (00:50:28) सी शराफत तो भाई वाह क्या बात है। (00:50:31) [प्रशंसा] (00:50:36) एक तो मुझे ये बात बहुत अच्छी लग रही है (00:50:38) कि दोनों ही विद्वान समय को मानते हैं। और (00:50:42) बहुत समय से अपनी दलीलें और बाज दफा समय (00:50:46) से पहले अपनी तकरीरें पूरी करके अपनीपनी (00:50:49) कुर्सी पर बैठ रहे हैं। ये इस आर्गुमेंट (00:50:52) का राउंड टू पूरा हुआ। अब रिबर्टल का (00:50:55) राउंड टू है और उसके बाद क्रॉस (00:50:56) एग्जामिनेशन होगा। (00:50:59) नहीं आपका आर्गुमेंट हो गया सर। (00:51:04) हमारे यहां स्कूल के सिलेबस में पंच (00:51:06) परमेश्वर कहानी पढ़ाई जाती है। प्रेमचंद (00:51:08) जी की लिखी हुई। आप निश्चिंत रहिए। आपकी (00:51:10) कोई राउंड मैं मिस नहीं होने दूंगा। (00:51:12) रिबर्टल का राउंड टू मुफ्ती शमाल नदी (00:51:14) साहब। (00:51:20) असल में जो हकीकी प्रॉब्लम है, असल (00:51:22) प्रॉब्लम है वो ये है कि जावेद साहब के (00:51:25) पास कांसेप्ट ऑफ गॉड क्लियर नहीं है। (00:51:28) इन्होंने कहा कि कायनात से पहले खुदा तो (00:51:31) था तब भी तो टाइम होगा। कि खुद कायनात (00:51:34) टाइम कायनात का हिस्सा है। हम खुदा उस (00:51:38) खुदा को मानते हैं। नेसेसरी बीइंग का (00:51:40) टाइमलेस होना जरूरी है। क्योंकि वो टाइम (00:51:42) का क्रिएटर है। जब उसने टाइम को क्रिएट (00:51:44) किया तो वो खुद टाइम पे कैसे होगा? उसने (00:51:46) जब स्पेस को क्रिएट किया तो खुद स्पेस में (00:51:48) कैसे होगा? अगर वो टाइम एंड स्पेस को पहले (00:51:50) से ही उसका पाबंद है तो फिर किस चीज को (00:51:53) उसने क्रिएट किया? लिहाजा ये सवाल गलत है (00:51:55) के खुदा था तो टाइम होगा। बिल्कुल नहीं। (00:51:58) टाइम के पाबंद हम है खुदा नहीं है। हम (00:52:00) फिजिकल वर्ल्ड से ताल्लुक रखते हैं। वो (00:52:02) मेटाफिजिकल रियलिटी है। दूसरी चीज (00:52:05) इन्होंने मिसाल दी कि चाय की केतली हवा (00:52:07) में घूम रही होगी और पता नहीं शायद वो (00:52:09) बर्टन रसेल का उन्होंने हवाला दिया। (00:52:10) बहरहाल यही प्रॉब्लम है। प्रॉब्लम यही है (00:52:13) कि हम चीजों के दरमियान डिफरेंशिएट नहीं (00:52:16) कर पाते। ये जो आपने मिसाल दी ये (00:52:18) इमेजिनेशन है। और मैं जो साबित कर रहा हूं (00:52:20) वो लॉजिकल नेसेसिटी है। [प्रशंसा] (00:52:25) आप इमेजिन करने आए तो कुछ भी करें। में (00:52:27) जुपिटर में पिंक एलीिफेंट होगा, यूनिकॉर्न (00:52:29) होगा। करें उसके उससे कायनात पे क्या फर्क (00:52:32) पड़ता है? उससे आप लॉजिकल नेसेसिटी साबित (00:52:34) नहीं कर सकते। मैं तो उस प्राइम कॉज की (00:52:37) बात कर रहा हूं। उस नेसेसरी बीइंग की बात (00:52:39) कर रहा हूं जिसके बगैर इस कायनात का (00:52:41) एकिस्टेंस मुमकिन नहीं है। दूसरी चीज़ मजहब (00:52:43) को साइंस चैलेंज करती है वगैरह-वगैरह। ये (00:52:45) हमारा टॉपिक ही नहीं है। मैं मैं इस पे (00:52:48) बात करूंगा तो फिर मेरा वक्त चला जाएगा। (00:52:50) मजहब के ऊपर क्योंकि हमारी डिस्कशन नहीं (00:52:52) है। साइंस को मजहब और बिलखसूस मैं और (00:52:56) हमारा वर्ल्ड व्यू कम से कम साइंस को पीछा (00:52:58) नहीं पीछे नहीं करता है। साइंटिज्म की (00:53:00) मज़म्मत करता है। इसकी वजाहत मैंने पहले कर (00:53:02) दी। दूसरी ची चीज इन्होंने कहा वर्ल्ड का (00:53:05) नक्शा लीजिए। वर्ल्ड मैप लीजिए। दो (00:53:08) अलग-अलग जगह की। हज़रत मैंने ये होमवर्क (00:53:10) किया था। और मैंने मिडिल ईस्ट मिडिल ईस्ट (00:53:12) का एक नक्शा लिया और यूरोप का एक नक्शा (00:53:15) लिया। यह मजहबी इलाका और यह (00:53:19) लिबरल और एथिस्ट इलाका। मुझे पता चला कि (00:53:22) सबसे ज्यादा रेप केसेस जो है वहां पर है। (00:53:26) [प्रशंसा] (00:53:30) मुझे ये पता चला यूएन की रिपोर्ट के (00:53:32) मुताबिक। मैं ये अपने घर से नहीं लेके आ (00:53:34) रहा कि जो वर्किंग वुमेन है यूरोपियन (00:53:36) कंट्रीज में उसमें 81% (00:53:39) वुमेन सेक्सुअल हरासमेंट का वर्क में जो (00:53:41) शुमार [प्रशंसा] ये मिडिल ईस्ट में नहीं (00:53:43) हो रहा है। वो मजहबी लोग हैं इसलिए नहीं (00:53:46) हो रहा है। दूसरी चीज आपने ये कहा के (00:53:50) मजहबी आदमी का अच्छा होना हमारे अच्छे (00:53:53) होने से बहुत मुश्किल है। बहुत मुश्किल (00:53:56) है। तो इसका मतलब ये है कि गॉड के अलावा (00:53:58) आपके पास अच्छे और बुरे का कोई स्टैंडर्ड (00:54:01) है। मैं चाहूंगा कि कन्वर्सेशनल स्टाइल (00:54:04) वाले डिस्कशन और सेगमेंट पे इसी पे बात कर (00:54:06) लेते हैं। थैंक यू वेरी मच। [प्रशंसा] (00:54:13) ये रिबर्टल का राउंड टू है। आपके पास 5 (00:54:17) मिनट का वक्त है। और इसके बाद क्रॉस (00:54:20) एग्जामिनेशन शुरू करेंगे। आप चाहे तो जो (00:54:22) इन्होंने सवाल पूछे उनके जवाब आप रिबर्टल (00:54:24) में भी दे सकते हैं। (00:54:25) जी जी (00:54:26) देखिए पहले तो ये बात कि ये मिसाल गलत (00:54:30) नहीं है। गलत है। इन्होंने पहले ही हमको (00:54:32) डिस्म कर दिया। कह अकल से मामला सॉल्व (00:54:34) नहीं हो सकता। लॉजिक से आप पहुंच नहीं (00:54:36) सकते। ये एक मेटाफिजिकल चीज है। (00:54:39) मेटाफिजिकल अजीब सा लब्ज़ है। ठीक से किसी (00:54:41) को माने नहीं मालूम इसके तो ऐसा लगता है (00:54:43) कुछ बड़ी चीज है। अरे भाई क्या होता है (00:54:45) मैटाफिजिकल? बताओ खड़ी हो। ये एक लफज़ है जो (00:54:51) कहीं भी इस्तेमाल हो जाता है। जब आप एक (00:54:54) बात कर रहे हैं और आप मुझसे बहस कर रहे (00:54:55) हैं तो मुझे मेटाफिजिकल मत बताइए। आप (00:54:58) लॉजिकली मुझे प्रूफ किए और अगर लॉजिकली आप (00:55:00) नहीं बात करते साहब ये मेटाफिजिकल है तो (00:55:02) फिर हम आप बात क्या कर रहे हैं? मेरा आपका (00:55:05) किस जबान में कन्वर्सेशन हुआ और ये कहना (00:55:09) कि वक्त पहले नहीं था तो फिर क्यों कहते (00:55:11) हैं ये हमेशा से और हमेशा रहेगा हमेशा (00:55:14) वक्त है। तो आप कैसे कहते हैं वो हमेशा से (00:55:18) है और हमेशा रहेगा। हमेशा का मतलब है कोई (00:55:20) वक्त। अगर वक्त ही नहीं है तो हमेशा कैसे? (00:55:26) बहरहाल वो रहेगा। अब मैं यह देखता हूं। (00:55:29) आपने कहा ना कि वहां रेप ज्यादा होते हैं। (00:55:32) तो हम एक बात देखते हैं कि ये दुनिया (00:55:35) जिसमें वो कादरे मुतलक है। जिसकी मर्जी के (00:55:37) बगैर पत्ता भी नहीं हिलता वो ओमनीपोटेंट (00:55:40) है। ये दुनिया चल कैसे रही है? और इस (00:55:43) दुनिया का हाल क्या है? 45,000 (00:55:47) बच्चे (00:55:49) जो 10 साल की उम्र से कम थे (00:55:53) वो अदाज़ा में मरे हैं। (00:55:56) भूख से काला हांडी में बच्चे मरते हैं और (00:56:00) डिप्थीरिया से मरते हैं। डिप्थीरिया अजीब (00:56:03) मर्ज है। गले में जाली मरना शुरू होती है। (00:56:06) बच्चा नीला हो जाता है। गरीब का बच्चा (00:56:09) इसलिए कि वो पास इला ये कादरे मुतलक है जो (00:56:12) जाहिर कर दे। इसलिए आप दुआएं मांगते हैं (00:56:14) हमारी ये काम कर दे वो कर दे तो इसका मतलब (00:56:17) डे टू डे लाइफ में वो इंटरफेयर करता है और (00:56:21) ये देख रहा है वो अगर वो वाकई भी है फॉर (00:56:24) डिस्कशन सेक तो मैं जब दुनिया देखता हूं (00:56:27) तो मेरे दिल में उसके लिए कोई इज्जत नहीं (00:56:28) पैदा होती क्या कर रहे हो तुम (00:56:32) [प्रशंसा] (00:56:33) पूरे ऑल पावरफुल हो ओमनीपोटेंट हो ओमनी (00:56:38) प्रेजेंट हो तुम तो वहां गदा में रहेगे ना (00:56:41) तुम हर जगह हो तुम देख रहे रहे थे कि (00:56:43) बच्चे की कैसे धज्जियां उड़ गई। तुम देख (00:56:46) रहे थे और तुम चाहते हो मैं तुम्हारी (00:56:49) परस्त करूं और तुम हो भी। (00:56:52) अरे यार इससे अच्छे तो हमारे चीफ प्राइम (00:56:54) मिनिस्टर हैं। कुछ तो ख्याल करते हैं। (00:56:59) कमाल [प्रशंसा] है। आप किसकी इबादत कर रहे (00:57:02) हैं? अगर वो है भी। यह दुनिया नाइंसाफी (00:57:06) से, जुल्म से, जब्र से, तशद्दुद से भरी (00:57:09) हुई है। और आप यह मत कहिएगा कि वो देख रहा (00:57:13) है और वो बताएगा एक दिन। अगर वो देख रहा (00:57:16) है और इंटरफेयर नहीं करता तो आप दुआ क्यों (00:57:17) मांगते? आप कहते हैं मेरा यह काम करा दे। (00:57:20) इसका मतलब है वो दखल दे सकता है। वो आपको (00:57:24) नौकरी दिलवा सकता है। भले दूसरे आदमी को (00:57:27) ना मिले। मगर आपका काम कर देगा क्योंकि (00:57:29) आपने दुआ मांगी है। तो जब वो आपको नौकरी (00:57:32) दिला सकता है, लड़की की शादी कर सकता है, (00:57:35) बेटे को ग्रीन कार्ड दिलवा सकता है। तो कम (00:57:38) से कम ये जो मर रहे हैं बच्चे इनको रोकते (00:57:41) हैं। कुछ तो करें। मुझे तो दुनिया में इस (00:57:43) दुनिया का कोई मालिक है। इसका ओमनीपोटेंट (00:57:47) कोई रूलर है। और ये दुनिया ऐसी चल रही है। (00:57:52) मैं तो चाहूंगा कि भाई ना हो। अगर हो तो (00:57:55) बड़ी शर्मिंदगी की बात है। शुक्रिया। (00:57:59) [प्रशंसा] (00:58:03) देवियों और सज्जनों इस बहस के दो राउंड और (00:58:07) दो रिबर्टल पूरे हो चुके हैं। अब सबसे (00:58:11) जरूरी और सबसे मुश्किल राउंड शुरू हो रहा (00:58:14) है क्रॉस एग्जामिनेशन का। अब इन विद्वानों (00:58:17) की सज्जनता की एक परख भी होगी। और वक्त (00:58:20) हमने 16 मिनट का तय किया है। (00:58:24) पहला सवाल आप पूछना चाहेंगे? (00:58:26) जी बिल्कुल (00:58:28) पहले बोले भी [हंसी] (00:58:31) आप माइक ले लीजिएगा हाथ में। (00:58:34) ये नीचे से हटवा (00:58:39) जी मैं मैं बोलता हूं। (00:58:42) ये डाइस हटा सकते हैं क्या हम? थोड़ा (00:58:44) क्विकली। (00:58:48) डाइस पीछे कर दीजिए बस थोड़ा सा है ताकि (00:58:51) यह जो दाएं बाएं लोग बैठे हैं इसे हटा (00:58:53) दीजिए अब हम वहां तो जाने वाले नहीं आराम (00:58:56) से आराम से दोनों तरफ से हटा दीजिए (00:59:08) इस बीच आप लोग भी अपनेप सवाल तैयार कर लें (00:59:12) यह ध्यान रखेंगे कि मैं यहां से सवाल (00:59:14) लूंगा आप लोगों को अपना हाथ ऊपर करना है। (00:59:17) अपना नाम बताना है और अधिकतम तीन वाक्यों (00:59:20) में अपना सवाल पूरा करना है। कई लोग सवाल (00:59:23) की जगह भाषण देने लगते हैं। उससे आज बचना (00:59:25) है। [प्रशंसा] (00:59:27) जी मुफ्ती साहब पहला सवाल आपका 16 मिनट (00:59:30) हैं। हम दोनों लोगों के सवाल लेंगे। जी (00:59:33) बहुत शुक्रिया। आप आपकी जो अभी बात हुई (00:59:35) बहुत अहम थी। मैं इसको चाहूंगा कि आगे (00:59:37) डिस्कस करूं। लेकिन चूंकि अभी ये वो (00:59:40) सेगमेंट है क्रॉस एग्जामिनेशन। अह तो सबसे (00:59:44) पहला सवाल आपसे यह है कि जो मैं इतनी देर (00:59:48) से कंटिंजेंसी आर्गुमेंट आपको बता रहा था, (00:59:50) यह अकल से ही बता रहा था हजरत। आप यह (00:59:53) बताएं के आप इनफिनिट रिग्रेस ऑफ कॉजेस को (00:59:56) पॉसिबल मानते हैं या नेसेसरी बीइंग के (00:59:58) एक्सिस्टेंस को सही समझते हैं। क्योंकि दो (01:00:00) ही ऑप्शन हो सकता है। आप ये बताएं। (01:00:02) देखिए आपको मैं ईमानदारी से बात कर रहा (01:00:04) हूं। एक तो मैं कंटिंजेंसी वर्ड ठीक से (01:00:06) समझता हूं। (01:00:07) और इस वक्त भी जो आपने अंग्रेजी के अल्फाज़ (01:00:10) इस्तेमाल किए वो जरा थोड़े से मुझे (01:00:12) डिफिकल्ट और कॉम्प्लिकेटेड लगे। [हंसी] तो (01:00:14) आप जरा सिंपल जबान में ये सवाल कर सकते (01:00:16) हैं। (01:00:17) बिल्कुल कर सकता हूं। (01:00:18) जी (01:00:18) यूनिवर्स की हर चीज कॉन्टिंजेंट होने का (01:00:21) मतलब ये है कि वो अपने एकिस्टेंस में किसी (01:00:23) के ऊपर डिपेंडेंट है। जो भी चीज डिपेंडेंट (01:00:26) होगी वो चीज इंडिपेंडेंट नहीं हो सकती। तो (01:00:28) उसका कोई ना कोई कॉज होगा। तो अब आप क्या (01:00:31) समझते हैं कि ये इनफिनिट रिग्रेस है यानी (01:00:34) कॉज पर कॉज कॉज पर कॉज कॉज पर कॉज और कभी (01:00:36) कोई एंड यानी ये एंडलेसली चलता रहा (01:00:38) क्योंकि अगर ऐसा होगा तो हम तो (01:00:40) एक्सिस्टेंस में आते ही नहीं। लॉजिकली ये (01:00:42) मुत्तफक अल चीज है मुत्तफक अल अग्रीड अपॉन (01:00:46) [हंसी] (01:00:47) इस पे हमने एग्री किया था कि मुश्किल शब्द (01:00:50) आएगा तो अर्थ बताना पड़ेगा। (01:00:51) तो इनफिनिट रिग्रेस तो पॉसिबल नहीं है। तो (01:00:53) कहीं ना कहीं आपको रुकना पड़ेगा ऐसे (01:00:55) नेसेसिटी पर। (01:00:56) नहीं कोई जरूरत नहीं है रुकने की। किसने (01:00:58) कहा रुकना पड़ेगा। आप रुकते हैं खुदा (01:01:01) आप नहीं रुकते आप कहते हैं वो हमेशा से जब (01:01:04) उस वक्त से है जब वक्त नहीं था आप कहां (01:01:08) रुकते हैं कि अब हुआ था वो आप नहीं कहते (01:01:11) हम क्यों नहीं मान सकते कि यूनिवर्स जो है (01:01:13) और बल्कि मल्टीवर्स जो है वो हमेशा से हैं (01:01:16) वो बनती है बिगड़ती है एक हमारे यहां एक (01:01:20) चीज है ब्लैक होल वो समेट लेता है वापस (01:01:24) फिर ब्लास्ट होता है फिर फैल जाता है और (01:01:27) इसमें हमारी तो खैर कोई औकात ही नहीं (01:01:28) इंसान की एक छोटे से जर्रे पे हम 50 60 (01:01:32) साल की उम्र रखते हैं जो करोरा अरबों साल (01:01:36) की कायनात उसमें और पैदा भी निहायती (01:01:39) बेहूदा वजह से हुए थे तो तो इसमें ये (01:01:44) सोचना कि इसकी वजूहात और ये क्यों है ये (01:01:47) डिपेंडेंट है ये हम देख रहे हैं क्या (01:01:50) मालूम आप सोचिए कि ये जो फैल रही है (01:01:52) कायनात ये कहां फैल रही है ये कहां जा रही (01:01:56) है और ये फैल क्यों रही है अरे बना ली थी। (01:01:59) तुमने रुको यहां काफी है। ये फैल क्यों (01:02:01) रही है? और कौन सी कायनात? जिसे मैं (01:02:04) दूरबीन से देखता हूं तो दो बिलियन लाइट (01:02:07) ईयर पे है। उससे मेरा कोई वास्ता ही नहीं (01:02:09) है। दो बिलियन ईयर यानी अगर मैं 80 (01:02:15) थाउजेंड माइल्स पर सेकंड से चलूं तो 20 (01:02:18) करोड़ साल में वहां पहुंच जाऊंगा। इसकी (01:02:21) जरूरत क्या थी? यह दुनिया ये कायनात तो (01:02:24) इंसान अशरफुल मखलूकात के लिए बनाई गई ना। (01:02:26) तो ये सब ये टर्म समझ में नहीं आया। (01:02:31) इसमें कोई खास समझने वाली बात थी भी नहीं। (01:02:36) ये जो अल्टीमेट कहा ये जाता है कि ये जो (01:02:38) पूरी यूनिवर्स है ये जो दुनिया है ये (01:02:41) इंसान के लिए बनाई गई है। (01:02:42) अच्छा ये सब इंसान के लिए। क्यों साहब? (01:02:44) सही है ना? (01:02:45) बिल्कुल। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि किसी (01:02:47) चीज़ के पीछे रीज़न आपको नहीं पता तो रीज़न (01:02:49) नहीं है। इसे कहते हैं आदमी नहीं। मुझे (01:02:51) मुझे नहीं पता। लेकिन मेरी जिम्मेदारी (01:02:54) नहीं है। वो बिल्कुल सही कहा था उसने। (01:02:56) बट्टन रसल ने आपने उसे मजाक में टाल दिया। (01:02:59) के भाई आप एक दावा कर रहे हैं। मैं क्यों (01:03:02) कहूं के ये गलत है दावा। आप प्रूफ कीजिए। (01:03:05) मेरे पे जिम्मेदारी ही नहीं है। मैंने (01:03:07) थोड़ी कहा है। आप प्रूफ कीजिए कि ये सही (01:03:10) है। (01:03:10) आप आर्गुमेंट ऑफ कंटिंजेंसी का जवाब (01:03:12) दीजिए। (01:03:12) सवाल पूछना चाहेंगे? आप सवाल पूछना (01:03:15) चाहेंगे मुफ्ती साहब से (01:03:17) क्योंकि ये क्रॉस एग्जामिनेशन का दौर है। (01:03:19) आप जैसे पहले बोल रहे थे फेथ को लेके कुछ (01:03:21) मैं ये पूछना चाहूंगा कि खुदा ने जो भी (01:03:24) रेवोलशंस किए हैं एक मजहब के नहीं बहुत से (01:03:26) मजहबों में किए हैं। अलग-अलग रेवोलेशन है। (01:03:29) कहीं कुछ एक बातें हैं। कंट्राडिक्शन भी (01:03:31) है आपस में। कहीं कुछ आप कर सकते हैं। (01:03:34) कहीं कुछ नहीं कर सकते। ऐसा नहीं है कि (01:03:37) सबकी कोड ऑफ़ मोरल एक है। तो (01:03:42) ये (01:03:45) किस्सा क्या है? अब आप ये देखिए कि मुझे (01:03:48) कभी-कभी लगता है कि जो फुटबॉल फाइनल होता (01:03:50) है लाखों लोग होते हैं। फिर वो टीवी कवर (01:03:53) करोड़ों लोग अगर उसमें खुदा की एक भूमि (01:03:56) आवाज आ जाती मैं गॉड हूं। तो सारे लोग अभी (01:04:01) सुन लेते और टीवी पे भी सुन लेते किस्सा (01:04:03) खत्म होता। ये इतनी राजदारी क्या है कि (01:04:06) तुम सामने कुछ तो सबूत दे दो हमें। सॉलिड (01:04:10) ये कह साहब ये यूनिवर्स कैसे बने? इससे (01:04:12) मसला क्या हल होगा? मैं पूछूंगा आपसे खुदा (01:04:15) कैसे बना? क्यों नहीं पूछूंगा? कैसे बना? (01:04:18) बल्कि वह तो कायनात से कहीं ज़्यादा (01:04:20) इंटेलिजेंस है। कायनात से कहीं ज़्यादा जी (01:04:23) वो हमेशा से। सही आप कहेंगे मैं मान (01:04:26) लूंगा। अच्छा दोयम वो कादर मुखल यानी (01:04:30) कादरे मुख का मतलब ओमनीपोटेंट जो चाहे कर (01:04:33) सकता है आपको नौकरी दिलवा सकता है। आपकी (01:04:36) अच्छी जगह शादी करवा सकता है। आपके पड़ोसी (01:04:40) का मुकदमा हरवा सकता है। आपको जिता सकता (01:04:42) है। सब काम करता है। थोड़ा सा माइक (01:04:44) वो इस दुनिया को चला कैसे रहा है? ये (01:04:48) दुनिया कैसे चल रही है? आपको इसमें हैरत (01:04:50) नहीं होती। या कयामत के बाद कभी एक जस्टिस (01:04:54) होगा। जब ये बच्चा मर चुका होगा जिसकी (01:04:57) धज्जियां उड़ गई बम से इसको इंसाफ मिलेगा (01:05:00) तब। (01:05:02) अच्छा (01:05:02) अब जवाब दूं कीजिए। (01:05:04) मैं वही इसीलिए आपकी तरफ आता हूं। (01:05:06) सबसे पहले आपने रेवोल्यूशन और (01:05:08) स्क्रिप्चर्स की बात की। इस पे मैं बात कर (01:05:10) सकता हूं लेकिन आज नहीं करूंगा क्योंकि (01:05:11) वक्त कम है। कभी और इस पे डिस्कस करेंगे। (01:05:13) मैं तैयार हूं उसपे भी बात करने के लिए। (01:05:15) ये अभी से राउंड टू की भूमिका तय हो रही (01:05:18) है। डस गॉट एक्सिस्ट राउंड टू। जी (01:05:21) क्योंकि आज गॉड के एक्सिस्टेंस पे बात है (01:05:23) तो मैं उसी के रिलेटेड जो है आपके सवालात (01:05:26) को एंटरटेन भी करूंगा और मैं भी पूछूंगा। (01:05:28) आपने कहा कि आपने साबित ही नहीं किया जबकि (01:05:32) आर्गुमेंट ऑफ कंटिंजेंसी बुनियादी (01:05:34) आर्गुमेंट है। (01:05:34) आप मुझे कॉन्टिंजेंसी का मतलब बताइए। आपका (01:05:37) मतलब क्या है? कॉन्टिंजेंसी? कंटिंजेंसी (01:05:39) का मतलब यह हुआ के हर वो वजूद जो किसी भी (01:05:44) चीज का पाबंद है। हर वो वजूद या हर वो चीज (01:05:47) जो अपने एकिस्टेंस में किसी भी चीज के (01:05:50) पाबंद है और उससे बाउंड है। उसको उसकी (01:05:53) जरूरत है। उस पर डिपेंड करती है। तो जाहिर (01:05:55) सी बात है कि उसका कोई ना कोई कॉज होता (01:05:57) है। ये तो अक्ल की बात है। ये आप रीजनिंग (01:06:00) की बात करते हैं। मैं वही कर रहा हूं। (01:06:01) दूसरी चीज आपने ये बात कही के (01:06:04) इतने बिलियन लाइट इयर्स दूर है उसका मेरा (01:06:08) क्या लेना देना फिर मेरे ख्याल से आपको ये (01:06:10) नहीं कहना चाहिए आई एम आई थिंक देयर फॉर (01:06:12) आई एम एन एथिस्ट आपको सोचना चाहिए सिर्फ (01:06:15) आप एक लिमिटेड दायरे में रहकर नहीं सोचे (01:06:17) बल्कि बाहर निकल कर सोचें| आपने तीसरा (01:06:20) सवाल किया आपने दो तीन सवाल एक साथ (01:06:22) ऐसी बातें ना कीजिए कुछ लोगों को ऐतराज हो (01:06:24) जाएगा आप पे कि आप कुछ भी सोचिए ये इजाजत (01:06:28) आपको है नहीं मुझे है [हंसी] (01:06:33) [प्रशंसा] (01:06:35) जी आप आपने प्रॉब्लम ऑफ इविल के ताल्लुक (01:06:39) से सवाल किया और बार-बार आप एक लफ्ज रिपीट (01:06:42) कर रहे हैं कि ओमनीपोटेंट गॉड है। ऑल (01:06:45) पावरफुल गॉड है। यही तो दर असल समझना है (01:06:48) कि गॉड का कांसेप्ट क्या है? प्रॉब्लम ऑफ (01:06:50) इविल जो है प्रॉब्लम ऑफ इविल दर हकीकत दो (01:06:53) असमशन पर कायम है। अगर आप इन दो असमशन को (01:06:56) समझ जाए तो ये प्रॉब्लम प्रॉब्लम नहीं (01:06:57) रहेगी। ये आर्गुमेंट आपको समझ में आ जाएगी (01:06:59) कि ये कोलैप्स कर जाता है। पॉइंट नंबर वन (01:07:02) यानी जो आपका सबसे पहला फॉल्स असमशन है कि (01:07:06) गॉड मर्सफुल है, ओमनीपोटेंट है। दुनिया (01:07:08) में जुल्म हो रहा है। लेकिन आपको ये समझना (01:07:11) चाहिए कि हमारे वर्ल्ड व्यू के मुताबिक (01:07:12) गॉड सिर्फ ओमनीपोटेंट और सिर्फ मर्सफुल (01:07:15) नहीं है। बल्कि वो ऑल वाइज भी है और वो ऑल (01:07:17) नोइंग भी है। उसके हर काम के पीछे हिकमत (01:07:20) और विज़डम है। ये कोई जरूरी नहीं है कि वो (01:07:22) हिकमत और विज़डम आपको समझ में आए या मुझे (01:07:24) समझ में आए। अगर आप जो समझ रहे हैं उसके (01:07:27) मुताबिक आप फैसला कर रहे हैं ये लिमिटेड (01:07:28) पर्सपेक्टिव से आर्गुमेंट है और इस चीज को (01:07:31) हम अपनी दुनिया में अपने लाइफ में डेली (01:07:33) लाइफ में इस प्रिंसिपल को एक्सेप्ट करते (01:07:35) हैं। हम जब किसी डॉक्टर के पास जाते हैं (01:07:37) डॉक्टर के पास जाकर वो अगर उसने हमें कोई (01:07:39) दवाई दी है तो हम ये तो नहीं कहते कि जब (01:07:42) तक आपके पास जितना नॉलेज और जितना विज़डम (01:07:44) नहीं है आपने क्यों ये दवाई दी है तब तक (01:07:47) हम इस चीज को एक्सेप्ट नहीं करेंगे। नहीं (01:07:49) कहते हम उसकी अथॉरिटी को तस्लीम करते हैं। (01:07:51) क्यों? क्योंकि उसकी हम जानते हैं कि वो (01:07:53) नॉलेजेबल है। वो विज़डम वाला है। हमसे (01:07:55) ज्यादा नॉलेज और हमसे ज्यादा विज़डम है। (01:07:57) बताएं सर। (01:07:58) नहीं नहीं डॉक्टर में खुदा में बड़ा है। (01:08:00) डॉक्टर पढ़ लिखा होता है। एक तो मैं उसकी (01:08:04) बात सुनूंगा। (01:08:06) दो ये नहीं कुछ जवाब तो ये भी नहीं है। (01:08:09) सर अगर सब ऑडियंस से बोलने लगेंगे तो फिर (01:08:11) मतलब नहीं है। (01:08:13) मतलब आप ये कहें कि क्योंकि आप डॉक्टर पे (01:08:15) बिलीव करते हैं इसलिए खुदा पे बिलीव किए। (01:08:16) ये क्या (01:08:17) ये मिसाल आपको समझाने के लिए (01:08:18) आर्गुमेंट है इस पे आपको एतराज नहीं है तो (01:08:25) सिंपल बात ये है कि मैं अगर ये यकीन कर (01:08:29) रहा हूं कि एक ओमनी परसेंट उसकी मसलहत है (01:08:32) ये जो बच्चे मर रहे हैं ये मसलहत है उसकी (01:08:35) मुझे नहीं चाहिए इसकी मसलहत (01:08:36) उसकी मसलहत नहीं यही तो समझना है (01:08:38) मतलब एक्सपीरियंस (01:08:40) अच्छा (01:08:41) इस आपने अभी मेरी बात पूरी सुनी नहीं (01:08:43) मैंने कहा आपका पूरा आर्गुमेंट दो फॉल्स (01:08:46) फॉल्स असमशन पर है। एक फॉल्स असमशन मैंने (01:08:48) बता दिया। दूसरा फॉल्स असंप्शन ये है कि (01:08:51) इस दुनिया में इविल के होने का कोई गुड (01:08:53) रीज़ नहीं है। जबकि हमारे पास बाज रीज़ंस (01:08:56) मौजूद हैं। हमारे पास बाज वजूहात मौजूद (01:08:58) हैं। अगर इस दुनिया में इविल ना हो तो आप (01:09:00) गुड को डिफाइन कैसे करेंगे? अगर जुल्म ना (01:09:02) हो आप इंसाफ को समझेंगे कैसे? अगर तारीकी (01:09:05) ना हो तो आप लाइट को समझेंगे कैसे? (01:09:08) [प्रशंसा] (01:09:09) बहुत अच्छे। (01:09:10) अभी और सुन ले। अभी और बाकी है। (01:09:11) ये तो बात बहुत पसंद आई साहब मुझे के जब (01:09:14) तक रेप ना हो तब तक औरतों की इज्जत का (01:09:17) ख्याल आप (01:09:17) आपने मेरा जवाब पूरा सुना ही नहीं। (01:09:19) जब तक के बच्चों का कत्ल ना किया जाए तब (01:09:21) तक आपको बच्चों की मासूमियत की इज्जत है। (01:09:24) आपने पूरा जवाब सुना ही। (01:09:25) क्या बात है। क्या आपने नुक्ता निकाला? (01:09:27) आपने पूरा जवाब सुनाई। नहीं आप सुन ले। (01:09:29) मेरी बात सुन लें। ये मैंने आपको एक चीज (01:09:31) बताई। दूसरी चीज इस दुनिया में हम आए हैं (01:09:34) टेस्ट के लिए। हमारा टेस्ट हो रहा है और (01:09:36) हर इंसान का अलग-अलग अंदाज में टेस्ट होता (01:09:38) है और इस दुनिया में अगर इविल मौजूद है तो (01:09:42) वो इविल जरिया है हमारे अंदर ह्यूमन नोबल (01:09:45) क्वालिटीज को डेवलप करने का और अलग-अलग (01:09:47) फील्ड में प्रोग्रेस करने का और अगर हमारे (01:09:51) अंदर और इस दुनिया में इविल नहीं होता तो (01:09:53) बताइए टेस्ट का मतलब क्या होता है? अगर (01:09:55) मैं अपने स्टूडेंट को एमसीक्यूस दूं और (01:09:57) उसमें सिर्फ राइट आंसर लिख कर दे दूं और (01:09:59) कहूं तुम्हारा टेस्ट हो गया। ये मीनिंगलेस (01:10:01) है। इस दुनिया में अगर हम टेस्ट के लिए आए (01:10:03) हैं तो जाहिर है गुड एंड इविल दोनों मौजूद (01:10:05) है। (01:10:07) [प्रशंसा] (01:10:08) तो अगर गुड एंड इविल दोनों मौजूद है तो ये (01:10:11) इविल भी खुदा का बनाया हुआ है। (01:10:13) जी हां खुदा का बनाया हुआ है। लेकिन (01:10:15) अच्छा चलो अच्छी बात है। (01:10:16) जी बिल्कुल। तो अभी अभी तो ये है कि जो (01:10:20) मेजॉरिटी (01:10:21) है दुनिया में वो इवल है। तो ये खुदा (01:10:25) एक्चुअली इविल के साइड पे लग रहा है मुझे। (01:10:27) बिल्कुल। (01:10:28) मेजोरिटी में तो वो है। (01:10:30) क्या बात कर रहे हैं भाई आप कोई भी जो (01:10:33) मुंसिफ होगा चाहे आपका अपना घर हो जिसके (01:10:35) आप सबसे बड़े हैं चाहे आपकी ऑर्गेनाइजेशन (01:10:38) हो जो आप चलाते हैं वहां पर आप इवल रखेंगे (01:10:42) साबित करने को कि बाकी लोग शरीफ हैं (01:10:44) मेरी बात सुनिए (01:10:45) क्या ये आर्गुमेंट ही गलत है कि जब तक के (01:10:47) कोई इवल नहीं होगा तब तक के शरीफ आदमी (01:10:50) शरीफ नहीं लगेगा (01:10:51) अगर एग्जामिनर इ गलत ऑप्शन दे रहा है तो (01:10:54) एग्जामिनर इविल नहीं हो गया जो गलत ऑप्शन (01:10:56) को सेलेक्ट कर रहा है वो फेल होगा क्रिएटर (01:10:58) ने इविल को बनाया है लेकिन वो इविल नहीं (01:11:01) है। सुनिए मेरी बात सर लेट मी कंप्लीट सर। (01:11:06) क्रिएटर ने इविल को बनाया है टेस्ट के लिए (01:11:08) वो इविल नहीं है। इविल वो होगा वो होगा जो (01:11:11) उसे इख्तियार करेगा। छुरी को बनाने वाला (01:11:14) गलत नहीं होता है। छुरी का गलत इस्तेमाल (01:11:16) करने वाला गलत होता है। [प्रशंसा] (01:11:21) रेप को कैसे गलत इस्तेमाल करते हैं? (01:11:24) रेप इंसान के फ्री मिल का नतीजा (01:11:29) ये रेप कैसे गलत इस्तेमाल होता है ये मुझे (01:11:31) अब सुन ले अब सुन ले गलत इस्तेमाल होता (01:11:33) हां मैं बता रहा हूं ना कैसे मैं बता रहा (01:11:35) हूं मैं बता रहा हूं कि जो इविल इस दुनिया (01:11:38) में मौजूद है उसके कई सारे तरीके हैं एक (01:11:41) तरीका इंसान का अपना फ्री विल है अब अगर (01:11:43) कोई रेपिस्ट रेप कर रहा है तो इसका गॉड का (01:11:45) कसूर नहीं है वो अपने फ्री विल का गलत (01:11:47) इस्तेमाल करना कर रहा है उसको सजा मिलनी (01:11:49) चाहिए और उसी के लिए जहन्नुम बनाई गई है (01:11:52) ये फ्री विल का भी बड़ा बड़ा चक्कर आप जब (01:11:55) कोई बुरा काम करते हैं या कोई बुराई होती (01:11:57) है तो ये कहा जाता है कि यह फ्री विल है। (01:12:00) 7 बिलियन फ्री विल्स आर मूविंग ऑन दिस (01:12:02) प्लेनेट। 7 बिलियन फ्री विल और एक आदमी (01:12:06) अपनी फ्री विल से मुझे कत्ल कर दे तो मैं (01:12:08) खुदा की मर्जी से मरा हूं कि इसकी फ्री (01:12:10) विल की वजह से। (01:12:12) मेरी मौत खुदा के हाथ है या फ्री विल वाले (01:12:15) के हाथ है? (01:12:17) खुदा ने फ्री विल का निजाम बनाया है और उस (01:12:19) निजाम का गलत इस्तेमाल करके कोई आपको मार (01:12:22) रहा है। (01:12:22) इस्तेमाल करके मेरा कत्ल कर देता है। अब (01:12:24) मेरी मौत का जिम्मेदार कौन है? (01:12:26) वो इंसान जिम्मेदार है। (01:12:27) वो इंसान तो ये कहना कि (01:12:29) और उसको उसको उसको सजा मिलेगी। (01:12:31) तो अब आप आगे चलिए कि ये तय करना कि (01:12:34) अल्लाह ही या खुदा सॉरी अल्लाह नहीं। खुदा (01:12:37) ही जिंदगी देता है और खुदा ही मौत देता (01:12:39) है। ये गलत है। (01:12:40) बिल्कुल गलत नहीं है। (01:12:41) हां नहीं। (01:12:41) निजाम उसी ने बनाया फ्री विल का। निजाम (01:12:44) मौत और हयात का उसी ने बनाया। (01:12:45) यू आर कंट्राडिक्टिंग योरसेल्फ। अभी आपने (01:12:48) कहा कि एक आदमी ने फ्री विल से आपको मार (01:12:50) दिया। इसमें उसे फ्री विल दी गई थी। उसने (01:12:53) गलत इस्तेमाल किया। 7 बिलियन फ्री विल्स (01:12:56) आर मूविंग ऑन दिस प्लेनेट। और आप चाह रहे (01:12:59) हैं कि मैं सिर्फ खुदा का ध्यान करूं। ये (01:13:01) 7 बिलियन फ्री विल्स को मुझे लुक आफ्टर (01:13:04) करना पड़ेगा कि नहीं? ये तो तबाहियां कर (01:13:06) रही हैं और तबाहियां ज्यादा हो रही हैं। (01:13:08) बिल्कुल। तो अगर आप बताएं आप बताएं अगर (01:13:11) खुदा नहीं है फॉर एग्जांपल तो आप इविल को (01:13:14) कैसे डिसाइड करेंगे? यानी हाउ कैन यू (01:13:16) डिफाइन इविल ऑब्जेक्टिवली विदाउट गॉड? (01:13:20) इविल को डिफाइन। (01:13:22) देखिए दुनिया में दो तरह के जानवर हैं। एक (01:13:26) जो अकेले रहते हैं जंगल में और एक जो (01:13:29) ग्रुप्स में रहते हैं। (01:13:32) ग्रुप में जो भी रहेगा चाहे वो आपका (01:13:35) फाउंडेशन हो, चाहे कोई क्लब हो, चाहे कोई (01:13:38) पॉलिटिकल पार्टी हो, चाहे कोई यूनिट हो, (01:13:42) उसमें आपको इंटलेक्ट करने के रूल बनाने (01:13:46) पड़ेंगे। (01:13:46) यानी लोग तय करेंगे। (01:13:47) लोग तय करेंगे। अगर लोगों ने ये तय किया (01:13:49) कि किसी का रेप करना सही है आप जस्टिफाई (01:13:51) करेंगे। (01:13:52) आपका फाउंडेशन तो ये हो गया ना कि लोग (01:13:54) इविल डिसाइड करेंगे। (01:13:56) नहीं अरे [प्रशंसा] (01:13:59) दुनिया में ऐसे ग्रुप्स हैं जो रेप को (01:14:03) जायज मानते हैं सर्टेन हालात में। मैं (01:14:06) डिटेल में नहीं जानूंगा। आप भी जानते हैं। (01:14:09) ये जो आईिस वाले थे जिन्होंने क्या किया (01:14:12) था? तो (01:14:13) उन्होंने क्या किया? उसका खुदा से कोई (01:14:15) ताल्लुक नहीं है। सर मैंने सिंपल सवाल (01:14:16) किया कि इविल को आप डिफाइन करते कैसे हैं? (01:14:19) आइए वापस आइए। (01:14:20) जी (01:14:21) आप साथ में तभी रह सकते हैं जब कुछ आप ऐसे (01:14:25) उसूल डेवलप करें जिसमें हर एक का बेसिक (01:14:28) तहफुल हर एक का बेसिक राइट हो और हर एक को (01:14:31) कोई आराम मिले। यही तरीका है किसी भी (01:14:34) ऑर्गेनाइजेशन जिसमें एक से ज्यादा लोग हैं (01:14:38) और वो ऐसे चलती है जिंदगी में। उसमें अगर (01:14:40) आप गड़बड़ करेंगे तो तबाही होगी, नुकसान (01:14:43) होगा, बर्बादियां आएंगी। और अगर उसमें आप (01:14:47) घर ले लीजिए ना एक हस्बैंड है, एक वाइफ (01:14:49) है, बच्चे हैं, वालदा भी हैं, दो बहनें भी (01:14:52) है, एक भाई भी है। अब इसमें कोई निजाम (01:14:55) आपको चाहिए साथ में रहने का। और एक दूसरे (01:14:59) पे भरोसा रहे। एक दूसरे से बही ख्वाब हो, (01:15:02) एक दूसरे की मदद करें। ऐसी जिंदगी (01:15:04) सर आपकी बात आ गई। आप ये कह रहे हैं कि (01:15:06) लोग डिसाइड करेंगे क्या सही है क्या गलत (01:15:08) है। यही है मेजॉरिटी डिसाइड करेगी क्या (01:15:10) सही है क्या गलत है। अरे भाई बिल्कुल (01:15:12) मेजॉरिटी अगर ये कहे कि नाज़ जर्मनी के साथ (01:15:14) जिस तरह मेजॉरिटी थी कि जेनोसाइड करना सही (01:15:16) है आप जस्टिफाई करेंगे (01:15:19) उस वक्त उस वक्त (01:15:21) आपका आपका ये (01:15:22) सवाल उसके बाद उस वक्त प्लेनेट पे जो लोग (01:15:26) थे उनमें कितने लोग हिट को सही समझते (01:15:29) अच्छा प्लेनेट की मेजॉरिटी तय करेगी (01:15:31) सोसाइटी की नहीं प्लनेट की मेजॉरिटी गॉड (01:15:33) के एक्सिस्टेंस को सही मानती है आप क्यों (01:15:34) नहीं मानते (01:15:38) [प्रशंसा] (01:15:39) ये (01:15:40) हेलो हेलो हेलो ये क्रॉस क्वेश्चन का (01:15:44) राउंड यहां पर समाप्त होता है और ये बड़ा (01:15:48) अच्छा है कि इस तरह से फ्रेगमेंट कर दिया (01:15:49) गया है ताकि जो मरकरी ऊपर जा रहा है नीचे (01:15:51) जवाब दे (01:15:52) जी (01:15:53) प्लनेट की ज्यादातर मेजॉरिटी (01:15:56) कुछ दूसरे मजहबों के खुदा को मानती है आप (01:16:00) नहीं आप तो मेजॉरिटी की बात कर रहे हैं। (01:16:03) आप ये कह रहे हैं इविल और गुड को डिसाइड (01:16:05) मेजॉरिटी करेगी। मेजॉरिटी जो कर दे वो सही (01:16:08) हो जाएगा। (01:16:10) इसको जैसा आप ही लोगों ने तय किया है उसी (01:16:12) फॉर्मेट को फॉलो कर लेते हैं। हां भाई (01:16:15) मैंने तो भले लोगों पे ऐतबार किया पर (01:16:18) मॉडरेशन तय किया। जी आपके पास 5 मिनट का (01:16:21) वक्त है क्लोजिंग आर्गुमेंट है। उसके बाद (01:16:23) हम ऑडियंस से क्वेश्चन आंसर लेंगे। जावेद (01:16:24) साहब के क्लोजिंग आर्गुमेंट के बाद। ओके (01:16:26) टाइम स्टार्ट। (01:16:27) बहुत शुक्रिया। (01:16:28) हमारा जो टॉपिक है डस गॉड एक्सिस्ट। मैं (01:16:31) इस पे इतने एकेडमिक तैयारी करके आया था। (01:16:34) मुझे था कि मैं मैंने सोचा था कि कई सारे (01:16:36) मैं आर्गुमेंट्स दूंगा। लेकिन वक्त की भी (01:16:38) किल्लत और जावेद साहब बार-बार इधर-उधर चले (01:16:41) जा रहे थे तो उसको भी थोड़ा एंटरटेन करना (01:16:43) पड़ गया। डस गॉड एक्सिस्ट पे मैं एक ही (01:16:45) आर्गुमेंट दे पाया। आर्गुमेंट्स बहुत हैं (01:16:47) और डेफिनेटिव आर्गुमेंट्स हैं और मेरे (01:16:50) आर्गुमेंट को किसी एक राउंड में भी (01:16:52) इन्होंने एंटरटेन नहीं किया और रेफ्यूट (01:16:53) नहीं किया है। एक राउंड में भी नहीं। एक (01:16:56) राउंड में भी नहीं। और ना ही (01:16:58) अभी अभी आपका क्लोजिंग आर्गुमेंट आएगा। (01:17:00) बता देना। (01:17:00) आर्गुमेंट ऑफ कंटिंजेंसी सर। (01:17:02) अरे मैं आपसे कई बार कह चुका हूं (01:17:04) कंटिंजेंसी का मतलब (01:17:05) अब मैं कैसे समझाऊं [हंसी] आपको? आपस में (01:17:07) हां आप (01:17:07) और कितने आसानी से समझाऊं मैं मुझे तो (01:17:09) नहीं समझ में आ रहा है। बस आप अपनी (01:17:12) कंटिंजेंसी उर्दू में बोल सकते हैं। आप (01:17:15) अपनी बात पूरी कर लें आखरी चार मिनट (01:17:17) दूसरी चीज (01:17:20) जस्ट अ मिनट प्लीज मैम कैन आई टॉक? (01:17:24) दूसरी चीज ये है कि आपने एक तो इसका जवाब (01:17:27) नहीं दिया। दूसरा आपने गॉड के ना होने पर (01:17:29) कोई डेफिनेटिव आर्गुमेंट नहीं दिया। सिर्फ (01:17:31) मजहब पे बात कर रहे हैं आप। मजहब तो आज (01:17:33) हमारा टॉपिक ही नहीं था। आज तो हमारा (01:17:36) टॉपिक हुआ आप मजहब से ले लेकर आईएस आईएस (01:17:38) तक चले गए भाई हमारा क्या ताल्लुक है उससे (01:17:40) वी कंडेम देम और उसका गॉड से क्या ताल्लुक (01:17:42) है अगर कोई गलत काम कर रहा है किसी ने (01:17:45) किसी को कत्ल किया किसी ने किसी का रेप (01:17:47) किया उसको सजा मिलनी चाहिए और आपके पास (01:17:49) कोई भी कोई भी रैशन स्ट्रांग फाउंडेशन ऑफ (01:17:53) मोरालिटी नहीं है। आपने कहा कि मेजॉरिटी (01:17:56) तय करेगी सोसाइटी की वो सही होगा। मैंने (01:17:58) कहा हिटलर को फिर आप सही कहेंगे। नहीं (01:18:00) नहीं नहीं प्लनेट की सोसाइट की मेजॉरिटी (01:18:03) तय करेगी। तो प्लनेट की मेजॉरिटी गॉड की (01:18:05) एक्सिस्टेंस को मानती है। आप कह रहे हैं (01:18:06) ये रिलीजियस है। तो यानी आपके पास कोई (01:18:09) स्ट्रांग फाउंडेशन नहीं है ऑब्जेक्टिव (01:18:11) मोरालिटी का। ऑब्जेक्टिव मोरालिटी का अगर (01:18:13) कोई फाउंडेशन है तो वो सिर्फ गॉड है। गॉड (01:18:16) है, गॉड है। थैंक यू। [प्रशंसा] (01:18:18) जी। ये मुफ्ती शमाइल नदवी साहब का (01:18:22) क्लोजिंग आर्गुमेंट था। अब हमारे पास जी (01:18:25) मैं (01:18:26) जी। [हंसी] (01:18:28) ये बड़ा अच्छा है कि दोनों लोगों को (01:18:32) मॉडरेटर से शिकायत भी और बोल रहे हैं भाई (01:18:34) हमारी शाबाशी भी तो करते चलो। अब मेरी बात (01:18:37) जी आपके पास जावेद अख्तर साहब 5 मिनट का (01:18:40) वक्त है। ये आपका क्लोजिंग आर्गुमेंट है। (01:18:42) टाइम रिसेट कर दें। जी (01:18:45) देखिए बहुत सारी बातें हैं। गॉड का (01:18:47) डेफिनेशन दुनिया के किसी भी रिलजन में है (01:18:49) कि वो पोटेंट है। वो भी प्रेजेंट है। ही (01:18:52) इज़ जस्ट ही इज़ काइंड। ही लव्स यू एंड सो (01:18:56) ऑन। (01:18:57) मैं जब दुनिया देखता हूं तो मुझे कोई ऐसा (01:18:59) सुप्रीम पावर यहां दिखाई नहीं देती है जो (01:19:03) इंसान की बेबूती के लिए कुछ कर रही हो (01:19:05) कमजोर को बचा रही हो मदद कर रही हो जालिम (01:19:08) को पीछे हटा रही हो मैंने देखा है तारीख (01:19:10) में नहीं एक तो अगर है और ये देख रहा है (01:19:14) तमाशा तो उसका होना ना होना बराबर है दो (01:19:18) ये कि (01:19:20) ये जो है जब आप ये कहते हैं कि कायनात (01:19:24) जिसकी कंटिंजेंसी है देखिए वो लफज़ (01:19:27) इस्तेमाल किया मैंने तो ये कैसे हो सकती (01:19:30) है और फौरन आप सरेंडर कर देते हैं कि (01:19:33) जाहिर है कि इसका बनाने वाला तो इससे (01:19:35) 10,000 गुना ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड होगा। (01:19:37) उस पे आपके होने पे कोई ऐतराज नहीं है। (01:19:40) उसे वो टाइमलेस है। वो पहले से था टाइम तो (01:19:43) बहुत बाद में आया। ये सब आप मानने को (01:19:45) तैयार है। जिसका आपके पास कोई सबूत नहीं। (01:19:48) आपके पास कोई रीज़ नहीं है। आपकी तारीफ (01:19:51) क्या है मजहबों की? बिलीफ की जो खुदाओं का (01:19:54) बिलीफ है ये कॉन्सेंटली गलत साबित होता (01:19:57) रहा है। मतलब आप कहें कि एस्टोटिस के (01:19:59) जमाने में तो सब जाहिल थे। वो भी इतने ही (01:20:02) यकीन से खुदा पे यकीन रखते थे जो अब नहीं (01:20:04) रहा। (01:20:06) ये भी नहीं रहेगा। आप लिख लीजिए और इसके (01:20:10) आसार आपको दुनिया में दिखाई देना शुरू हो (01:20:13) चुके हैं। ये बहस क्या आज से 100 साल पहले (01:20:16) इस तरह हो सकती थी? (01:20:18) यहां तक तो आपको हम ले आए हैं। तो (01:20:24) [प्रशंसा] सर सर (01:20:26) अरे इनको मदद की जरूरत नहीं भाई। ये सेल्फ (01:20:29) सफिशिएंट आदमी है। आप क्यों इनकी मदद कर (01:20:30) रहे हैं? (01:20:31) सर सर सर सर प्लीज प्लीज (01:20:34) तो ये जो है तमाम बातें अपनी जगह है। ये (01:20:37) एक पैकेज है। आप अकेले कोई आदमी ऐसा नहीं (01:20:40) है जो सिर्फ गॉड को मानता हो। उसके साथ (01:20:42) बहुत पैराफनेलिया आता है। अलग-अलग (01:20:44) पैराफनेलिया आते हैं। दे आर ओनली दे हैव (01:20:48) ऑलवेज क्रिएटेड इन द सोसाइटी। मैं तो आपको (01:20:52) सीधा ऑफर देता हूं कि दुनिया में 10 (01:20:55) इंपॉर्टेंट बिलीव्स है। आप एक मानते हैं (01:20:58) नौ नहीं मानते। नौ में आप एथिस्ट है। नौ (01:21:01) को आप बिल्कुल रीज़नेबली मेरी तरह देखते (01:21:03) हैं। (01:21:05) तो 90 मजहबी आदमी भी 90% एथिस्ट है। वो (01:21:09) दूसरे खुदा नहीं मानता। एक को मानता है (01:21:11) अपना वाला बाकियों को कहता है गलत है। (01:21:16) अगर आप मानना ही बंद कर दे तो आपका 10% (01:21:18) चांस है कि आप सही है और 90% चांस है कि (01:21:21) आप गलत हैं। मेरा मशवरा है आप मानना छोड़ (01:21:23) दिए तो 50% चांस होगा कि आप सही हैं और (01:21:26) 50% चांस होगा। 40% आप गेन करेंगे बाय (01:21:30) बिकम एन एथ। (01:21:33) [प्रशंसा] (01:21:36) ये एक फसूदा ख्याल है। ये खत्म हो रहा है। (01:21:40) हो सकता है मेरी जिंदगी में ना हो। लेकिन (01:21:42) ये हो जाएगा। जो बातें ये इनको आप (01:21:46) मेटाफिजिकल ये वो ऐसे रिस्पेक्टेबल टर्म (01:21:49) दे दिए। ये तो उन लोगों के हैं जिन्हें ना (01:21:51) फिजिक्स मालूम थी ना मेटा मालूम था। ये (01:21:54) उन्होंने आपको दिए हैं। (01:21:57) जी बहुत शुक्रिया आप दोनों लोगों का और अब (01:22:00) इस बातचीत का आखिरी राउंड शुरू होगा। डस (01:22:03) गॉड एक्सिस्ट की यह बहस मुफ्ती शमाइल नदवी (01:22:06) और जावेद अख्तर साहब के बीच आप लोग अपने (01:22:09) अपने हाथ ऊपर करेंगे मैं यहां से तय (01:22:11) करूंगा और माइक हमारे पास है क्या एक ही (01:22:14) माइक है ऑडियंस के लिए दो माइक है एक इस (01:22:17) तरफ एक इस तरफ ठीक है तो जी सबसे पहले (01:22:20) हमारी सहयोगी है मारिया मारिया शकी जी (01:22:23) पूछिए सवाल थोड़ा सा रुकेंगे ताकि कैमरे (01:22:26) का फ्रेम आप पर आ जाए आपकी तो प्रैक्टिस (01:22:28) है टीवी की जी (01:22:30) नवी साहब मैं (01:22:33) खुदा को मानती हूं। पहले मैं इसी प्रमाइस (01:22:35) से शुरू कर रही हूं और यह बता रही हूं (01:22:37) आपको। मैं मानती हूं। लेकिन कुछ कुछ सवाल (01:22:40) है जो जावेद साहब ने उठाया। उसका जवाब (01:22:43) आपको देना चाहिए। पहला सवाल ये के गजा में (01:22:47) सालों से छोटे बच्चे मर रहे हैं। वो उनको (01:22:52) अगर खुदा मर्सफुल है। हम मानते हैं कि (01:22:55) अल्लाह ताला में बहुत ताकत है तो वो बच्चे (01:22:58) क्यों मर रहे हैं? दूसरी बात ये कि अगर (01:23:02) कंटिंजेंसी की जो आप बात करते हैं पूरे (01:23:04) मुस्लिम मुालिक (01:23:06) मिलकर के भी उन गजा के बच्चों को क्यों (01:23:09) नहीं बचा पा रहे हैं? क्योंकि अगर वो (01:23:12) चाहते क्योंकि अल्लाह ताला उन पर हुकूमत (01:23:15) करते हैं। सब पर हुकूमत करते हैं तो वो (01:23:17) उनको क्यों नहीं बचा? (01:23:18) जी थैंक यू। थैंक यू वेरी मच। बहुत अच्छा (01:23:21) किया। आपने इस चीज को जिक्र कर दिया। मैं (01:23:22) इसको और अच्छे से एक्सप्लेन करने की कोशिश (01:23:24) करता हूं। देखें जहां तक आपने कहा कि गजा (01:23:28) के बच्चों को मारा जा रहा है। देखिए दो (01:23:30) वर्ल्ड व्यू है। एक एथिस्टिक वर्ल्ड व्यू (01:23:32) एक थिस्टिक वर्ल्ड व्यू है। बच्चे मर रहे (01:23:35) हैं दोनों वर्ल्ड व्यू में लेकिन हमारा (01:23:38) वर्ल्ड व्यू कह रहा है कि रिकेंस है। ये (01:23:40) कह रहे हैं कि उनका मर उनका मरना बेकार (01:23:42) जाने वाला है। कोई उसका रिकेंस नहीं है। (01:23:44) क्योंकि इनके यहां आखिरत और अल्लाह का कोई (01:23:46) तसवुर या गॉड का कोई तसवुर नहीं है। आपने (01:23:49) ये सवाल किया कि गॉड मर्सफुल है। क्यों (01:23:52) नहीं रोकता? ये मैंने बताया कि ये (01:23:54) मिसकंसेप्शन है लोगों के दरमियान कि गॉड (01:23:57) को सिर्फ मर्सफुल और ओमनीपोटेंट समझते (01:23:59) हैं। गॉड के सिर्फ यही दो एट्रिब्यूट्स (01:24:01) नहीं है। गॉड के कई सारे एट्रिब्यूट्स (01:24:03) हैं। उनमें से अल हकीम भी है। उनमें से (01:24:06) सॉरी ऑल ऑल ऑल वाइज भी है। ऑल नोइंग भी (01:24:09) है। लिहाजा अगर इस दुनिया में किसी को (01:24:12) तकलीफ आ रही है और गॉड उसको नहीं रोक रहा (01:24:15) है। वो इसलिए नहीं रोक रहा है क्योंकि (01:24:17) इंसानों को फ्री विल दिया गया है। ठीक इसी (01:24:19) सुनिए सुनिए। ठीक इसी तरीके से अगर एक (01:24:22) डॉक्टर किसी छोटे बच्चे को इंजेक्शन लगा (01:24:24) रहा है उसे तकलीफ पहुंच रही है। उसके (01:24:26) लिमिटेड पर्सपेक्टिव के ऐतबार से ये गलत (01:24:28) हो रहा है और डॉक्टर बुरा है। लेकिन जब आप (01:24:31) ब्रॉडर पिक्चर को देखेंगी आपके और हमारे (01:24:34) पास सिर्फ एक पिक्सल है। हमें इतना नजर आ (01:24:36) रहा है कि गजा में कत्ल हो रहा है। लेकिन (01:24:38) इसके पीछे कितना रिक्पेंस उनको मिलने वाला (01:24:41) है। पूरा पिक्चर गॉड के पास है। तो एक (01:24:43) पिक्सल से आप पूरे पिक्चर को कभी भी जज (01:24:46) नहीं कर सकती। (01:24:46) आप आप इसमें कुछ जोड़ना चाहेंगे? आपको कुछ (01:24:49) बोलना है इसमें? मैं ये बोल रहा हूं के (01:24:51) भाई आपने बहुत अच्छा जस्टिफिकेशन दिया ये (01:24:54) आप वो जो वहां के प्राइम मिनिस्टर है (01:24:56) इजराइल के उन्हें भेजिए वो बहुत खुश होंगे (01:24:58) आप जस्टिफिकेशन दे दे ना कि अगर गॉड नहीं (01:25:00) है तो बच्चे क्यों मर रहे हैं आप बताएं (01:25:03) वो ये सवाल पूछ रहे हैं कि अगर आप ईश्वर (01:25:05) का अस्तित्व नहीं मानते हैं तो उन बच्चों (01:25:07) की मौत को आप कैसे इंटरप्रेट करते हैं (01:25:12) भाई ये दुनिया जो है जो ताकतवर लोग होते (01:25:14) हैं वो एक नाइंसाफी करते हैं (01:25:17) तो ये अच्छा काम है आपके नजदीक तो नेचर (01:25:19) नाइंसाफी पे मबनी है। (01:25:21) अरे मेरे भाई आप नेचर की कहां बात कर तो (01:25:23) इंसान की बात (01:25:24) तो फिर जब मैं इंसान की बात कर रहा था आप (01:25:26) नेचर की बात करने लग गए। (01:25:27) क्रॉस एग्जामिनेशन मुझे बोलने नहीं देंगे (01:25:30) तो अलग बात है। आप बोलिए मैं मुझे कोई (01:25:33) नहीं क्रॉस एग्जामिनेशन (01:25:36) तो लेने दीजिए। क्या बात है? (01:25:38) बात ये है कि ह्यूमन सोसाइटी तभी साथ में (01:25:42) रह सकती है जब वो मोहब्बत से एकता से एक (01:25:45) दूसरे के एतराम करके रहे हो। इसके अलावा (01:25:47) पॉसिबल नहीं है। अकेले तो इंसान रह ही (01:25:49) नहीं सकता। वहां पर कुछ लोग हैं जो फाउल (01:25:52) करते हैं। वो फाउल हम हमेशा से तारीफ में (01:25:55) होता आया है। आज ये हो रहा है। जो हो रहा (01:25:58) है बहुत बुरा हो रहा है। बहुत जालिमाना (01:26:00) है। बहुत जाबराना है। उसको आप कहें कि ये (01:26:03) बच्चों को कंपनसेशन मिल जाएगा या इसकी (01:26:07) इंजेक्शन है। इंजेक्शन तो हेल्थ के लिए (01:26:09) दिया जाता है। आप ये कह रहे हैं कि ये (01:26:11) बच्चों की जो धज्जियां उड़ रही है। ये (01:26:13) इंजेक्शन है। (01:26:15) ये टेस्ट है। यह टेस्ट है और उस टेस्ट में (01:26:17) उनको उनको ऐसा रिकॉन्फेंस मिलेगा जो आपके (01:26:20) तसवुर के बाहर है। (01:26:21) ये आप तीन बरस के बच्चे को बारूद से उड़ा (01:26:24) के टेस्ट ले रहे हैं। (01:26:25) वाह! (01:26:25) वो नहीं ले रहा है। खुदा नहीं उड़ा रहा है। (01:26:27) इजराइल उड़ा रहा है। (01:26:28) ये अगला सवाल लेते हैं। अगला सवाल लेते (01:26:32) हैं प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल। (01:26:34) मुफ्ती साहब एक निवेदन आपसे है। कम से कम (01:26:37) एक (01:26:37) थोड़ा सा माइक क्लोज कर। (01:26:38) एक रिलीजियस और फिलोसफिकल (01:26:41) कर रहे हैं। कर रहे हैं। कर मैम मैम (01:26:42) प्लीज। (01:26:43) एक रिलीजियस और फिलोसोफिकल ट्रेडिशन है। (01:26:46) जो ब्रह्मांड को यानी यूनिवर्स को ही (01:26:49) अंतिम मानती है। सर्वम खलदम ब्रह्मम दिस (01:26:53) इज छंद उपनिषद एंड इट कंप्लीटली रूल्स आउट (01:26:57) द एकिस्टेंस और नेसेसिटी आपके शब्दों में (01:27:01) नेसेसिटी ऑफ़ अ क्रिएटर। द क्रिएशन इटसेल्फ (01:27:04) इज द क्रिएटर। तो एक मिनट प्लीज। दूसरा जो (01:27:08) सवाल आपने अभी जो आप बार-बार कह रहे हैं (01:27:10) कि भगवान विद्वान भी है वाइज सब जानने (01:27:14) वाला। तो अगर विडम में दुनिया भर के पापों (01:27:17) और अत्याचारों को बर्दाश्त करना शामिल है (01:27:20) तो फिर इसका मतलब ये हुआ कि अगर मैं फ्री (01:27:22) विल से उसको अपोज करता हूं तो ईश्वर की (01:27:25) विज़डम और मेरी फ्री विल में कंट्राडिक्शन (01:27:27) है। बिकॉज़ व्हेन आई एम अपोजिंग व्हाटएवर (01:27:29) हैपनिंग इन गाजा देन आई एम अपोजिंग द (01:27:31) गॉड्स विल और गॉड्स विज़डम जवाब ले वैसे तो (01:27:34) गॉड की विज़डम एक मिनट सौरभ प्लीज सर ये एक (01:27:38) एक जुमला गॉड की विज़डम है कि गाजा में जो (01:27:40) कुछ हो रहा है वो हो रहा है। मैं उसका (01:27:42) अपोज कर रहा हूं। तो मैं बोर्ड की विज़डम (01:27:44) के खिलाफ जा रहा हूं। एक सवाल। दूसरा यह (01:27:48) नहीं नहीं आपने दो ऑलरेडी। (01:27:49) एक सर (01:27:50) आप और सवाल कर लें लेकिन मुझे दो जवाब दे (01:27:52) दे। पहले आपने ये कहा सुनिए मेरी बात (01:27:55) सुनिए। (01:27:56) के मुताबिक थोड़ा ठीक हो रहा है ना? नहीं (01:27:58) नहीं हो रहा है। ठीक नहीं हो रहा है। मैं (01:27:59) बता रहा हूं क्या हो रहा है। आप तशरीफ़ (01:28:00) रखिए। मैं बता रहा हूं क्या हो रहा है। (01:28:02) लेट मी कंप्लीट प्लीज। (01:28:03) एक सेकंड गाइज़ एक सेकंड। ये देखिए ऐसा है (01:28:06) कि ये सब बड़ा आपस में विचार विमर्श के (01:28:09) बाद यह तय हुआ था कि कुछ नियम बना लिए (01:28:12) जाएं ताकि एक टाइम बाउंड बातचीत चले और (01:28:16) भाई साहब आप बड़ा जरूरी काम कर रहे हैं (01:28:18) लेकिन कैमरे के फ्रेम में आके उस काम को (01:28:20) गड़बड़ कर दे रहे है ठीक है गुरु अब मेरे (01:28:23) को कहीं का गुस्सा कहीं निकालना था सॉरी (01:28:26) [हंसी] (01:28:26) नहीं कोई गुस्सा नहीं है जी तो प्रोफेसर (01:28:29) ने सवाल पूछे आप उनके जवाब दें और थोड़ा (01:28:31) ये सब लोग थोड़ा ख्याल रखें भाई सवाल (01:28:34) संक्षिप्त रखें। आपने दो सवाल किए। सबसे (01:28:37) पहला ये कहा कि हमारे पास ये कांसेप्ट है (01:28:39) कि ये यूनिवर्स खुद नेसेसरी बीइंग है। (01:28:42) क्रिएशन इटसेल्फ इज द क्रिएटर। (01:28:45) हाउ इररेशनल इज दिस? कि मैं एकिस्ट करूंगा (01:28:48) बाद में लेकिन अभी एक्सिस्ट कर भी रहा (01:28:50) हूं। यानी एक ही टाइम में एक्सिस्ट भी कर (01:28:51) रहे हैं, नहीं भी कर रहे हैं। दिस इज नॉट (01:28:53) ट्रू। दूसरी चीज आपने कहा कि अगर इजराइल (01:28:57) में सॉरी माफ कीजिएगा। इजराइल डजंट (01:29:00) एक्सिस्ट ऑक्यूपाइड पेस्टाइन में अगर (01:29:04) [प्रशंसा] (01:29:07) अगर ऑक्यूपाइड पैलेस्टाइन में बच्चों को (01:29:09) मारा जा रहा है फ्री विल की वजह से और गॉड (01:29:12) नहीं रोक रहा ये कंट्राडिक्शन है ये बताइए (01:29:14) कि एक एग्जाम में एक बच्चा गलत आंसर लिख (01:29:17) रहा है सुनिए एग्जामिनर चाहे तो रोक रोक (01:29:19) सकता है क्यों नहीं रोक रहा है जो ये (01:29:22) कंट्राडिक्शन है या कंट्राडिक्शन नहीं है (01:29:26) नहीं सर ये आपस में (01:29:29) ये क्या आपका सवाल माइक पे माइक पे बोल (01:29:32) माइक माइक (01:29:33) फ्री विल दिया गया है टेस्ट के लिए (01:29:36) अकाउंटेबिलिटी के लिए। अगर फ्री विल नहीं (01:29:38) होता तो आप कहते हमें रोबोट बना दिया गया। (01:29:40) नॉट प्रजेंट माय पोजीशन। आपकी जो भी (01:29:42) पोजीशन मैं अपनी फ्री विल के नाते अपने (01:29:45) ह्यूमन विज़डम के नाते गाजा में हो रही (01:29:47) अत्याचार का विरोध करता हूं। (01:29:48) बिल्कुल करना चाहिए। (01:29:49) के हिसाब से मैं गॉड की विज़डम का विरोध कर (01:29:51) रहा हूं। (01:29:51) बिल्कुल नहीं। (01:29:52) जो हो रहा है गॉड (01:29:53) बिल्कुल भी नहीं। (01:29:54) बिल्कुल भी नहीं। उसका वहां पर गाजा में (01:29:57) कत्ल होना ये इंसानों के गलत इस्तेमाल का (01:30:00) नतीजा है। फ्री विल के इस्तेमाल का नतीजा (01:30:02) है। गॉड इसको गॉड इसका हुक्म नहीं देता। (01:30:05) उससे रोकता है। यही तो मसला है ना आपके (01:30:07) लिए कांसेप्ट क्लियर है। (01:30:08) नहीं नहीं भाई आपने तो बताया था इंजेक्शन (01:30:09) लगाने से बच्चे को तकलीफ होती है। ये (01:30:11) इंजेक्शन लगा (01:30:12) सर आप ऐसे रेटोरिक स्टेटमेंट दे तब तो कोई (01:30:14) मसला नहीं समझते रहेंगे। दिस इज अ रेटोरिक (01:30:16) स्टेटमेंट। दिस इज नॉट अ लॉजिकल आर्गुमेंट (01:30:18) सर। आई एम सॉरी। आई एम सॉरी। आखिरी 30 (01:30:20) मिनट बड़े मुश्किल होने वाले हैं। जी (01:30:22) मुफ्ती साहब आगे बैठे हैं। इनको माइक (01:30:24) दीजिए। (01:30:25) हां। तरुण माइक आप अपने पास रखिए। आपको (01:30:28) कैमरे का फ्रेम पता है। (01:30:29) जी। (01:30:30) सबसे पहले दोनों को मुबारकबाद। (01:30:32) एक सर अपना आप नाम बता दें। आप अमेरिका (01:30:36) में शिकागो में रहते हैं। इतना मुझे याद (01:30:37) है। (01:30:37) बताएं आपको। यासिर नदीम अलवाजदी मेरा नाम (01:30:39) है। जावेद सर आपसे एक क्वेश्चन है (01:30:42) इनफिनिटी इंग्रेस के ताल्लुक से। एक (01:30:43) हाइपोथेटिकल सिनेरियो है। मसल अगर आप (01:30:46) सर माइक थोड़ा सा प्लीज क्लोज रख। जी अगर (01:30:48) आप शायर इसलिए हैं कि आपके कोई उस्ताद (01:30:50) शायर थे और वो इसलिए शायर थे कि उनके कोई (01:30:53) उस्ताद शायर थे और इसी तरीके से हम माज़ (01:30:55) में पीछे चलते चलते चले जाएं और कहीं ना (01:30:58) रुके तो माफ़ कीजिएगा आप कभी शायर नहीं हो (01:31:00) सकते लेकिन आप शायर हैं। आपका शायर (01:31:02) एक्सिस्ट करता है। इसका मतलब यह है कि आप (01:31:04) कहीं ना कहीं रुके हैं। तो मेरा सवाल यह (01:31:07) है कि क्या आप इंफिनिट रिग्रेस ऑफ कॉजेस (01:31:10) को लॉजिकल फैलेसी मानते हैं या नहीं (01:31:13) मानते? हां या ना? (01:31:17) मैं इन्हें लॉजिकल फैलेसी नहीं मानता हूं। (01:31:21) लेकिन मैं मेरा प्रॉब्लम यह है कि जब मैं (01:31:23) नहीं मानता हूं तो आई विल कंटिन्यू विद (01:31:25) दिस लॉजिक जो फैलेसी नहीं हो। आप एक जगह (01:31:29) रुक जाते हैं जाके। आप कहते हैं ये गेंद (01:31:32) कैसे बनी? ये जजीरा कैसे बना? ये समंदर (01:31:34) कैसे बना? ये जमीन कैसे बनी? और अचानक गॉड (01:31:37) पे जाके आपको ब्रेक लग जाता है। एक बार आप (01:31:40) सवाल नहीं करते कि भाई इनको बनाने वाला तो (01:31:42) इनसे भी कॉम्प्लिकेटेड होगा। वो कैसे बना? (01:31:45) उसके बारे में आपने इत्मीनान कर लिया वो (01:31:47) हमेशा से है। तो अगर आप उसे हमेशा से (01:31:50) मानते हैं तो फिर ये मान लीजिए कि कायनात (01:31:52) हमेशा से क्या तकलीफ? (01:31:54) फिर हम वजूद नहीं आते। (01:31:55) जी हैं? (01:31:56) हम मौजूद नहीं। (01:31:57) सर सर सर क्यों नहीं होते? मैं बताऊंगा (01:31:58) प्लीज प्लीज। (01:31:59) जैसे मैंने मिसाल दी आपके शेर की। (01:32:02) आपका शेर कभी वजूद में ना आता अगर शायरी (01:32:04) इसी तरह चलता रहे हमेशा। (01:32:05) जी माइक माइक मेरे ख्याल से। इनफिनिट (01:32:08) रिग्रेस का कांसेप्ट क्लियर नहीं हो पाया। (01:32:09) ऐसा रहने दे। लेट्स मूव ऑन। (01:32:11) ठीक है। हां। थोड़ा सा मॉडरेटर का भी ख्याल (01:32:14) रखें। नहीं नहीं आपने तो रखा है। आपने रखा (01:32:16) है। यहां पे गौहर रजा साहब है वो भी एक (01:32:18) सवाल पूछना चाहते हैं। (01:32:21) माइक लीजिए तो ऑन कर (01:32:26) पहले तो ये कह दूं के (01:32:29) मैं उन बच्चों से शर्मिंदा हूं जिनको गजा (01:32:33) में कत्ल किया गया। (01:32:36) [प्रशंसा] (01:32:37) क्योंकि हमारे होते हुए कत्ल किया गया। (01:32:39) लेकिन उससे ज्यादा शर्मिंदगीगी इस बात से (01:32:41) हुई कि मुझे लगा कि मुफ्ती साहब उसको (01:32:45) जस्टिफाई कर रहे हैं। (01:32:47) बिल्कुल भी नहीं। आप आप गलत मुझे लगा मैं (01:32:50) गलत हो सकता हूं। गलत मैं सवाल पूछ रहा (01:32:52) हूं। सवाल मैं सवाल पूछ रहा हूं। (01:32:54) मैं जावेद भाई से डिसए्री करता हूं। (01:32:57) देखिए अगर देखिए ऐसा एक सेकंड आप सर वेट (01:33:01) वेट। अरे आप मैं कुछ मेरे पहले मुझे अपनी (01:33:04) बात कह लेने दीजिए। अगर ऑडियंस तय करेगी (01:33:06) तो फिर मॉडरेटर का मतलब नहीं है। मेरा आप (01:33:08) सबसे यह कहना है ये बहस दो लोगों के बीच (01:33:13) में है। एक तरफ मुफ्ती साहब एक तरफ जावेद (01:33:15) साहब। पिछले डेढ़ घंटे से ये लोग (01:33:18) अपने-अपने तर्क रख रहे हैं। आपकी इनसे (01:33:21) इत्तेफाकी हो सकती है ना इत्तेफाकी हो (01:33:23) सकती है। मेरे उस्ताद मुझे सिखा गए हैं कि (01:33:26) मुखा मुखम में असहमति की गुंजाइश बची रहनी (01:33:30) चाहिए। अगर मैं आपकी बहुत इज्जत करता हूं। (01:33:33) गौर साहब आपने जो कमाल की किताबें लिखी (01:33:36) साइंटिफिक टेंपरामेंट लेकिन मेरी यह (01:33:38) गुजारिश है आप सबसे कि यदि आप इन लोगों ने (01:33:41) जो बोला उन पे टिप्पणियां करेंगे तो ना (01:33:44) वक्त की पाबंदी रहेगी ना वन शास्त्र आप (01:33:46) सवाल पूछ लें उस सवाल में जो बात आ जाए वो (01:33:48) आ जाए मैं जावेद साहब से डिसए्री करता हूं (01:33:52) इसलिए जावेद साहब से सवाल पूछ रहा हूं (01:33:54) आपका सवाल जावेद अख्तर साहब से (01:33:55) और सवाल ये है मेरा कि जावेद साहब ने कई (01:33:58) बार लॉजिक का इस्तेमाल किया के साइंस में (01:34:02) लॉजिक है और रिलजन में लॉजिक नहीं है। (01:34:04) मेरा ख्याल यह है कि रिलजन में भी लॉजिक (01:34:07) है। लेकिन उस लॉजिक की बेसिस यह है कि आप (01:34:11) रुक जाते हैं जिसका जिक्र जावेद साहब ने (01:34:13) बार-बार किया। यानी खुदा के तसवुर पे आते (01:34:16) हुए, गॉड के तसवुर पे आते हुए रुक जाते (01:34:18) हैं। और इसके इसमें सवाल पूछना मतलब (01:34:23) फॉरबिटन होता है। सवाल ये है कि क्या (01:34:26) जावेद साहब इससे एग्री करते हैं कि साइंस (01:34:29) की लॉजिक अलग है और रिलीजन की लॉजिक अलग (01:34:33) है। बताइए सर। (01:34:37) देखिए तीन चीजें हैं। साइंस है, एक है (01:34:40) मंतिक है, इस्तदाल है। और एक जो है कुछ भी (01:34:44) नहीं है। फथ है, अकीदा है। मैं अकीदे के (01:34:49) लॉजिक का कायल नहीं हूं। मुझे आप इ्तदाल (01:34:52) से, लॉजिक से, रीज़्म से समझाइए। मैं मानने (01:34:56) को तैयार हूं। मेरा क्या नुकसान होगा? (01:34:58) लेकिन ये के अकीदे पे मैं नहीं जा सकता (01:35:01) हूं। अकीदे का मतलब है कि तुम ये मान लो, (01:35:03) सवाल ना करो। ये नहीं आप सारी बातें करके (01:35:07) बड़ी साइंटिफिक बातें करके एक जगह जाके (01:35:09) खुदा के हुदूद पे रुक जाते हैं। सरेंडर कर (01:35:12) देते हैं। मैं सरेंडर करने को तैयार नहीं। (01:35:14) दैट्स ऑल जी ये आगे सर बैठे हुए हैं। इनको (01:35:18) माइक दीजिए। (01:35:19) भाई वो वो आप पूछना चाह रहे थे ना? (01:35:21) नहीं नहीं मैं थैंक यू। (01:35:23) जी आपका नाम? (01:35:24) आसिम इफ्तखार। (01:35:25) आसिम जी पूछिए। (01:35:27) सर जावेद सर से सवाल है कि आपने अपने (01:35:29) क्लोजिंग (01:35:30) माइक थोड़ा करीब। ने क्लोजिंग स्टेटमेंट (01:35:32) में ये बात कही थी के मजहब का जो फ्यूचर (01:35:35) है वो ज्यादा दिन नहीं जाने वाला है। (01:35:38) लेकिन मैं देख पा रहा हूं कि जो ऑक्सफोर्ड (01:35:40) यूनिवर्सिटी की एक स्टडी है 2011 में हुई (01:35:43) है जिसके 50 एकेडमिशंस ने इसको अंजाम दिया (01:35:46) था। उसमें वो ये कहते हैं कि जो फेथ इन (01:35:51) गॉड है वो इनबिल्ट है ह्यूमन नेचर के अंदर (01:35:53) जिसको हम कहते हैं फितरत के अंदर शामिल है (01:35:55) वो। और वो ये कहते हैं कि अगर कोई यह (01:35:58) समझता है के मजहब को वो खत्म कर देगा तो (01:36:02) ये उसकी गलतफहमी है तो आप इसके बारे में (01:36:05) इस स्टडीज के बारे में क्या कहते हैं? (01:36:07) ठीक है। मैं उनसे एग्री नहीं करता हूं। वो (01:36:09) कौन से प्रोफेसर होंगे? ऐसा (01:36:10) आपके पास डाटा है। इन्होंने डाटा के (01:36:12) होगा। डाटा क्या हो सकता है? फ्यूचर का (01:36:15) डाटा तो नहीं हो सकता ना उनके पास। (01:36:17) प्रेजेंट का डाटा हो सकता है। डाटा आपने (01:36:19) सुना 100 साल पहले का बाद का डाटा मैंने (01:36:22) तो नहीं सुना आज तक। तो आज उनकी ये राय है (01:36:25) और होगी राय है। ठीक है। दुनिया में (01:36:28) तरह-तरह की राय है लोग। लेकिन मैं समझता (01:36:30) हूं कि वक्त के साथ इंसान ज्यादा से (01:36:32) ज्यादा रीज़नेबल और लॉजिकल होता जा रहा है। (01:36:36) आज आप देखिए वेस्टर्न यूरोप में क्या (01:36:38) परसेंटेज है नॉन बिलीवर्स की। बहुत हाई (01:36:42) है। वहां चर्च खाली पड़े होते हैं। तो (01:36:45) अल्टीमेटली (01:36:47) तो इंसान कोई ऐसी बात बहुत अरसे तक नहीं (01:36:50) मान सकेगा। चाहे गलत या सही जो उसे उसके (01:36:55) दिमाग को, उसके ज़हन को, उसके लॉजिक को (01:36:57) अपील ना करे। वो कह रहे हैं तो ऑक्सफोर्ड (01:37:00) के होंगे तो कैमरेज के होंगे तो मुझे क्या (01:37:02) लेना देना? उनका डाटा मुस्तकबिल का नहीं (01:37:05) हो सकता है। (01:37:06) जी दीपक हां पूछिए। मैं आऊंगा अभी पीछे की (01:37:09) साइड भी आऊंगा। माइक व भेजूंगा दो तीन (01:37:11) सवाल के लिए। जी (01:37:12) जावेद साहब आपसे सवाल है। नमस्ते। (01:37:14) अरे भाई (01:37:15) सर अगर आप ही लोगों को तय करना है तो फिर (01:37:17) सब फिर 200 लोग तय कर लें। (01:37:19) नहीं सर प्लीज डोंट डू दिस सर। सर, (01:37:21) एवरीबडी हैज़ अ राइट, सर। बट, वी कैन ओनली (01:37:24) टेक सिलेक्टेड क्वेश्चन। इन्होंने सर, यह (01:37:27) यंग लोग भी हैं, तो इनकी यह उतने यंग भाई (01:37:30) आप यंग है कि नहीं हैं? (01:37:31) वो कह रहे हैं वो भी यंग है साहब। आप उनकी (01:37:33) नौजवानी पर दावा उनको ही करने दे। (01:37:37) मुफ्ती साहब आप यंग, हां पूछिए। (01:37:40) अरे भैया साहब मेरा सवाल ये है। (01:37:42) भी तो पूछो। बस आपसे एक सवाल है। जैसे (01:37:46) थीस्टों के पास अपने जो ईश्वर को मानते (01:37:48) हैं उनके पास अपने सोशल गेट टुगेदर्स हैं। (01:37:49) पांच रोज आज क्रिसमस आने वाला है। होली (01:37:51) है, दिवाली है, ईद है। एथिस्ट क्या ऑफर कर (01:37:54) रहे हैं? मतलब मैं इनकी दुकान से दूर में (01:37:55) आना चाहता हूं उस तरफ। पर मैं अट्रैक्ट (01:37:57) नहीं हो पा रहा हूं। मैं सोशल गेट (01:37:58) टुगेदर्स क्या है आपके पास? (01:38:01) वो ये कह रहे हैं कि जो धार्मिक लोग हैं, (01:38:04) अलग-अलग धर्म के लोग उनके उत्सव, त्यौहार, (01:38:07) कम्युनिकेशन बहुत हैं। अब आपको मैं एक (01:38:09) सुनाता हूं। यहां हिस्टोरियन भी बैठे हैं। (01:38:11) मृदुला जी आप बताइएगा सही है क्या? ये एक (01:38:16) कॉन्सेंटाइन एक ग्रीक रोमन भाषा था जो (01:38:19) क्रिश्चियनिटी आने के 400 साल बाद उसने (01:38:22) डिसाइड किया कि मैं क्रिश्चियन हो जाऊंगा। (01:38:24) मेरी पूरी स्टेट कैंसिल हो जाएगी। उस (01:38:26) जमाने में ऐसे ही होता था राजा जो धर्म (01:38:28) इ्तियार करता था वो जनता भी कर लेती थी। (01:38:32) इसलिए कि वो हो गया था बैंककरप्ट और उसे (01:38:35) जो मेडिटेरियन कोस्ट के रिच क्रिश्चियन वो (01:38:39) थे मर्चेंट उससे पैसा चाहिए था। तो उसने (01:38:42) कहा यार क्रिश्चियन हो जाओ। तो उसने अपने (01:38:44) वजीर से कहा कि भाई ये हिस्ट्री है के अब (01:38:48) हम लोग क्रिश्चियन हो जाते हैं। कहते सर (01:38:50) हो जाएंगे कोई प्रॉब्लम नहीं है। लेकिन एक (01:38:52) प्रॉब्लम ये है कि 17 दिसंबर से 25 दिसंबर (01:38:57) तक जो पेगम फेस्टिवल होता जो पेग स्टेबल (01:39:00) हो जो फेस्टिवल होता है वो बंद हो जाएगा। (01:39:03) इसलिए कि हम क्रिश्चियन हो गए तो होगा (01:39:05) नहीं। तो वो बच्चों को बहुत बुरा लगेगा। (01:39:08) पब्लिक को बहुत डे वो बहुत एंजॉय करते (01:39:10) हैं। खासतौर से 25 तो उसने कहा हां ये तो (01:39:13) सही कह रहे हो। ये जीसस क्राइस्ट की (01:39:15) पैदाइश कब थी? कह साहब वो अप्रैल में थी (01:39:17) नहीं कट करो वो 25 दिसंबर को है। [हंसी] (01:39:21) ये हकीकत है। (01:39:23) और 400 साल बाद क्रिश्चियनिटी के अप्रैल (01:39:26) से दिसंबर ले आए और इसलिए कि यहां पेगन (01:39:29) फेस्टिवल होता था। अब मनाते हैं आप आराम (01:39:31) से। ये जो सारे फेस्टिवल हैं ये रिलीजन (01:39:35) थे। हर एक को एक एंटरटेनमेंट डिपार्टमेंट (01:39:38) चाहिए होता है अपनी कंपनी चलाने के लिए। (01:39:40) तो ये रिलीजंस ने ये सेकुलर त्यौहार थे (01:39:44) जिन्हें रिलीजंस ने ले लिया है। ये मौसम (01:39:46) के थे, फसलों के थे, किसानों के थे उसको (01:39:49) आपने लेके रिलीजियस रंग दे दिया। ये कोई (01:39:53) रिलीजन से थोड़ी आएंगे। आप आप अच्छा हमें (01:39:57) देखिए हम तो मुद हैं। हम ईद मनाते हैं। हम (01:40:00) दिवाली मनाते हैं। हम होली मनाते हैं। हम (01:40:02) क्रिसमस मनाते हैं। मुंबई की फिल्म (01:40:05) इंडस्ट्री की सबसे बड़ी होली हमारे घर में (01:40:07) होती है। सबसे बड़ी ईद हमारे घर में होती (01:40:09) है। वो हमारी सोशल वो है। हमारे यहां (01:40:13) हेरिटेज है। ऐसा थोड़ी है कि वी विल थ्रो (01:40:15) द बेबी अलोंग वि द वाटर। ये तो अच्छी चीज (01:40:18) है। इन्हें रखो। तो बेकार है। फेंक दो। (01:40:22) जी। हां। हेलो जी। मेरा सवाल नाधवी जी से (01:40:26) है। जैसा कि आपने बोला कि गॉड टाइम के भी (01:40:30) परे है और गॉड इतनी कॉम्प्लेक्स चीज है कि (01:40:33) उसे ह्यूमन माइंड समझ नहीं सकता और गॉड ने (01:40:36) अर्थ पे फ्री वेल भी दे दी है। तो आप अपना (01:40:39) वक्त जाया क्यों कर रहे हैं गॉड के बारे (01:40:41) में बात करके। अपन को तो बात करनी चाहिए (01:40:42) कि सोसाइटी को बेहतर कैसे करें? मैं गॉड (01:40:45) वही बताता है सोसाइटी को कैसे बेहतर करें। (01:40:47) अभी मैं आपका जवाब देता हूं। आपने कहा कि (01:40:50) टाइम पे वो एक्सिस्ट नहीं करता। सो (01:40:55) नहीं मेरा सवाल ये है कि जैसा आपने बोला (01:40:58) कि गॉड बहुत ही कॉम्प्लेक्स चीज है। (01:41:01) मैंने कहा ही नहीं कि कॉम्प्लेक्स है ये (01:41:02) तो आपके अल्फाज़ हैं। कॉम्प्लेक्स का लफज़ (01:41:04) गॉड के लिए सूटेबल नहीं है। क्यों? (01:41:06) क्योंकि कॉम्प्लेक्स वो चीजें होती है जो (01:41:08) ऑब्जेक्ट हो। गॉड इज नॉट एन ऑब्जेक्ट (01:41:10) जिसको आप इंस्ट्रूमेंट के जरिए लेबोरेटरी (01:41:12) में जाकर टेस्ट करें। ओह इट्स वेरी (01:41:14) कॉम्प्लेक्स। नो वो कोई कार का इंजन नहीं (01:41:16) है। वो फिलोसोफिकली (01:41:18) नेसेसरी बीइंग ऐसी बीइंग है जो सिंपल (01:41:21) बीइंग है। हां आप उसको मुकम्मल तौर पे (01:41:24) उसकी तमाम हिकमतों को जान ले और हर चीज को (01:41:26) जान ले ये पॉसिबल नहीं है। क्योंकि वो ऑल (01:41:28) वाइज है आप ऑल वाइज नहीं है और वो खुदा है (01:41:31) वो आपको सारी चीजें बता दे ये जरूरी नहीं (01:41:33) है। मेरा सवाल ये नहीं था। मेरा सवाल यह (01:41:36) था कि जब गॉड इतना परे है इस दुनिया से कि (01:41:40) उसने अर्थ पे फ्री विल भी दी है हम सब (01:41:42) ह्यूमंस की फ्री विल है और जो सोसाइटी में (01:41:45) हो रहा है वो अपन लोग डिसाइड करेंगे तो (01:41:48) अपन लोग डिसाइड नहीं करेंगे ना अपन लोग (01:41:50) डिसाइड नहीं करेंगे गॉड जो है गॉड ने वो (01:41:54) उसकी जात उसकी एकिस्टेंस टाइम एंड स्पेस (01:41:56) से परे है लेकिन वो हमारा टेस्ट ले रहा है (01:41:59) और उसी गॉड ने हमें बताया कि तुम्हें क्या (01:42:01) करना है क्या नहीं करना है तो जाहिर है उस (01:42:02) गॉड की बात सुनेंगे ना हम (01:42:04) जी (01:42:04) वो पीछे पीछे एक चश्मा लगा है जो मैम खड़ी (01:42:07) है उनको दीजिए। हां आप आप (01:42:12) जी जी बिल्कुल आएंगे। देखिए मैं कोशिश कर (01:42:14) रहा हूं सब तरफ जाने की हां उनको दीजिए (01:42:16) माइक जी (01:42:20) हेलो सर मैं (01:42:21) मैं ओमनी प्रेजेंट नहीं हूं टाइम पाबंद (01:42:24) हूं और जहां तक कोशिश कर सकता हूं करूंगा। (01:42:26) जी अपना नाम बताइए। (01:42:28) मेरा नाम उज्जला है। मैं दिल्ली (01:42:30) यूनिवर्सिटी की एक स्टूडेंट हूं और मैं (01:42:31) स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया से हूं। अ (01:42:34) मेरा सवाल मुफ्ती जी से है कि इस हॉल के (01:42:37) इस कमरे में बैठ के हम लोग रेप की (01:42:39) मोरालिटी के बारे में फिलॉसफिकली बात तो (01:42:41) कर सकते हैं बट असलियत ये है कि रोजमर्रा (01:42:44) की जिंदगी में औरतें रेप के थ्रू गुजरती (01:42:47) हैं और हम लोग सिर्फ नंबर्स पे इस तरह (01:42:50) नहीं देख सकते क्योंकि कितनी औरतें हैं इन (01:42:52) कंट्रीज में जहां पे आप बता रहे हैं कि (01:42:54) केसेस कम है जिनका एक्सेस है कि वो जाके (01:42:56) केस फाइल कर सकें। कितनी औरतें हैं जो (01:43:00) वर्किंग (01:43:01) जिनको काम करने की आजादी है उन कंट्रीज (01:43:04) में। यूरोप में ये आजादी आ गई। यूरोप में (01:43:06) ये रूल्स आ गए तो हम आज उसके बारे में बात (01:43:08) कर पा रहे हैं। (01:43:09) जी जॉब। (01:43:11) आपने ये कहा कि कमरे में बंद होकर हम लोग (01:43:15) इस पर फिलॉसोफिकली बात कर सकते हैं। लेकिन (01:43:17) हकीकत में क्या हो रहा है? वो ग्राउंड (01:43:20) लेवल पर क्या हो रहा है, जो बहुत गलत हो (01:43:22) रहा है और वो सफर कर रही हैं। आई एग्री? (01:43:24) बहुत गलत हो रहा है और जो गलत हो रहा है (01:43:26) उसको हमें रोकना है और क्यों रोकना है वो (01:43:29) गलत क्यों है? हमारे पास इसका ऑब्जेक्टिव (01:43:31) फाउंडेशन है। इनके पास उसका ऑब्जेक्टिव (01:43:33) फाउंडेशन नहीं है। मैं ये कहना चाह रहा (01:43:35) हूं कि जहां पे भी जुल्म हो रहा है, जहां (01:43:37) पे भी औरत पे जुल्म हो रहा है या उसकी (01:43:39) इज्जत लूटी जा रही है या उसे तकलीफ (01:43:41) पहुंचाई जा रही है। और सिर्फ औरत नहीं (01:43:43) किसी इंसान के ऊपर भी जुल्म हो रहा है तो (01:43:46) उसके खिलाफ खड़ा होना ये मोरालिटी हमारे (01:43:48) पास गॉड के पास से आई है। वरना जावेद साहब (01:43:51) तो कह रहे हैं कि जो है मेजॉरिटी डिसाइड (01:43:53) करेगी। की तो मेजॉरिटी तो कभी भी बदल सकती (01:43:54) है। [प्रशंसा] (01:43:57) क्या आप (01:43:59) ये थोड़ी सी आपको गलतफहमी है। मैं अगर (01:44:02) मेरे जुमले से ये मला निकला या मैंने कहा (01:44:05) तो ये जुमला मैं वापस लेता हूं। ये मेरा (01:44:06) मतलब ही नहीं था कि मेजॉरिटी डिसाइड (01:44:09) [प्रशंसा] कर। मेजरिटी डिसाइड करे तो (01:44:11) दुनिया में बड़ी (01:44:12) वैसे आपने कहा था ये जुमला। मैं मान रहा (01:44:14) हूं। (01:44:15) बाद में रीकैप कर लेंगे। (01:44:16) अरे एक सेकंड मैं अपनी एक्सप्लेनेशन दे (01:44:18) रहा हूं। (01:44:19) मुनासिब बात ये है कि हम सब के सब दिल में (01:44:22) जानते हैं कि क्या अच्छा है क्या बुरा है (01:44:24) हमें पता है अच्छी तरह से जो लोग बुरे काम (01:44:27) करते हैं उन्हें भी मालूम अच्छा क्या है (01:44:29) यही तो सवाल था हजरत कि फिर ये मोरालिटी (01:44:31) आई कहां से (01:44:32) क्रॉस एग्जामिनेशन मोरालिटी साथ रहने की (01:44:35) डिजायर से आई है। (01:44:36) यानी साथ रहकर जो कुछ कह दे जो कुछ कर दे (01:44:39) वो हो जाएगा। (01:44:40) नहीं तो (01:44:41) आप कायदे से रहित सकते हैं जब तक लोगों (01:44:43) में मोरालिटी हो। वरना कॉस हो जाएगा। (01:44:46) ये आपको कैसे पता? (01:44:47) जी। हमने देखा ना जहां मोरिटी काउंस हो (01:44:50) गया है। हम देखते हैं। (01:44:51) कहां पे देखते हैं? (01:44:52) भाई दुनिया में आप क्यों आप कहीं पे अगर (01:44:56) गलत हो रहा है इसको आप देखिए आप सर आप (01:45:00) एपिस्टमोलॉजी की बात कर रहे हैं मैं (01:45:01) ऑनोलॉजी की बात कर रहा हूं मैं आप दोनों (01:45:04) लोगों को चाय पोस्ट करूंगा वहां पे क्रॉस (01:45:06) एग्जामिनेशन कर लीजिए। अभी ऑडियंस का हक (01:45:08) मार रहे हैं आप लोग भाई। जस्ट लोग हैं आप (01:45:10) लोग और ये भाई ये (01:45:12) हां उधर उधर आएंगे उधर जी सर आएंगे आएंगे। (01:45:15) सर सर मेरा नाम लखुर रहमान है और मैं (01:45:17) अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का स्टूडेंट (01:45:19) हूं और जहां तक मुझे पता है कि सर यू आर (01:45:21) आल्सो प्रोडक्ट ऑफ अलीगढ़ मुस्लिम (01:45:23) मैं भी उसी चंदन का बुलबुल हूं। (01:45:25) हां सर तो बड़ी खुशी हुई मुझे जान के कि (01:45:28) मैं आपसे मिलूंगा। (01:45:29) सवाल (01:45:29) सर मेरा सवाल ये है सर सैयद अली रहमा का (01:45:32) नजरिया ये था के खुदा के वजूद को अकल के (01:45:36) दायरे में रह के तलाश करना ना के पूरी तौर (01:45:40) से उसका इंकार कर देना। सर हाउ विल यू (01:45:43) डिफाइन इट? नहीं नहीं तो यह तो आप इन्हें (01:45:45) बताइए सवाल है कि खुदा का वजूद साबित कर (01:45:49) रहे हैं तो सर आपने इनकार रखा है इस वजह (01:45:52) से मेरा क्वेश्चन (01:45:53) उन्होंने यही सबसे एक सेकंड सर सैयद ने (01:45:55) यही कहा है ना कि अकल से आप खुदा के वजूद (01:45:58) को साबित नहीं कर सकते यही कहा ना भाई (01:46:01) वो उन्होंने कहा है कर सकते हैं और वो कर (01:46:03) दिया गया आज (01:46:04) वो (01:46:06) तलाश करना या साबित करना अक्ल से ताल्लुक (01:46:10) अक्ल से नहीं अरे सवाल तो सुन लीजिए (01:46:12) जी अक्ल से नहीं हो सकता है। यही कहा ना (01:46:15) आपने? (01:46:16) अक्ल से हो सकता है। (01:46:17) अरे वो यही कह रहे हैं भाई आप बता रहे हो (01:46:20) सकता है। वो तो कुछ और (01:46:23) आप अगर सर देखो नौजवान (01:46:25) ले लो इतनी कमाल की यूनिवर्सिटी है ये। (01:46:27) अरे भाई दे दो। (01:46:29) अरे भाई मेरी बात सुनो। माइक पे बोलो ताकि (01:46:32) जो लाखों लोग देख रहे हैं। (01:46:34) माइक दे दो ना। (01:46:34) अरे देंगे ना माइक। तुम ठहरो तो। (01:46:37) हां सर मेरा सवाल ये था के सर सैयद अल (01:46:41) रहमा का एक नजरिया था अपना के खुदा का जो (01:46:44) वजूद है उसको अकल के दायरे में रह के तलाश (01:46:48) करना है ना कि पूरे तौर से इंकार कर देना (01:46:51) है ये ये उनका कांसेप्ट था लेकिन मेरा (01:46:53) सवाल ये है कि आप इसको कैसे डिफाइन करते (01:46:55) हैं एक्सप्लेन कैसे करेंगे मैं आपसे जानना (01:46:57) चाहता हूंकि यू आर द प्रोडक्ट ऑफ अलीगढ़ (01:47:00) मुस्लिम यूनिवर्सिटी (01:47:00) मुझे अली मुझे अक्ल के दायरे में मैंने (01:47:04) बहुत तलाश की मुझे मिला नहीं (01:47:09) हां ये इधर उधर वो चश्मा लगाए जो हां उनको (01:47:12) दे दीजिए (01:47:14) जी जी फटाफट पूछिए बस पांच मिनट है पांच (01:47:16) मिनट में खत्म हो रहा है हां (01:47:17) अस्सलाम वालेकुम मुफ्ती साहब एंड मेरा (01:47:19) सवाल मेरा सवाल जावेद अख्तर साहब से (01:47:21) क्या नाम है आपका मुझे पूछ रहे हो यार (01:47:25) फैज फैज फैज (01:47:26) फैज पूछिए फैज साहब (01:47:27) तो मेरा सवाल ये है कि अभी जो एथियस्ट है (01:47:30) वो प्रॉब्लम ऑफ इविल आर्गुमेंट यूज कर रहे (01:47:33) हैं अगेंस्ट मुस्लिम्स राइट कि इस दुनिया (01:47:34) में इतना सारा ईव वाले और (01:47:36) अगेंस्ट मुस्लिम तो यहां थिएस्ट अगेंस्ट (01:47:38) थिएस्ट हां थोड़ा सा करेक्ट कर लीजिए भाई (01:47:40) पूरी मशक्कत ही इसी बात की थी कि किसी एक (01:47:42) मजहब पे बात ना टिके (01:47:44) जी तो बेसिकली ये आर्गुमेंट ऐसा है कि इस (01:47:47) दुनिया में इतना ज्यादा ईवल एक्सिस्ट करता (01:47:49) है और अगर एक ऑल गुड गॉड है तो वो रोकता (01:47:50) क्यों नहीं है लेकिन इस सवाल में एक हिडन (01:47:53) असंप्शन ये है कि इस दुनिया में ईवल (01:47:55) एक्सिस्ट करता है अब एथियस कि कैसे (01:47:57) ऑनटोलॉजिकली प्रूव कर सकते हैं कि इस (01:47:58) दुनिया में ईवल एक्सिस्ट करता है मैं आपको (01:48:00) बताता हूं थोड़ा सा समझा (01:48:01) नहीं नहीं सर [हंसी] (01:48:03) इनको सुनिए नहीं प्लीज डोंट नो आई वांट (01:48:05) वांट टू एक्सप्लेन ऑनलॉजी (01:48:06) नहीं नहीं हम समझ गए सर इनको आप जवाब देने (01:48:08) दीजिए। (01:48:08) अच्छा सवाल पूछ रहा हूं मैं। (01:48:10) अभी तक क्या था? (01:48:10) वो मैं मैं थोड़ा सा ऐड ऑन कर लेता हूं। (01:48:13) तुम गुरु तो हम जब इसका राउंड 13 करेंगे (01:48:15) ना तब तुमको स्टेज पे बिठाएंगे। (01:48:18) जी जी तो हां जल्दी से तो देखिए एथिज्म (01:48:21) एथिज्म के हिसाब से सब कुछ रैंडमली बन गया (01:48:23) है। सब कुछ एटम्स और मॉलिक्यूल्स हैं। एक (01:48:25) पत्थर में और मुझ में सिर्फ इतना फर्क है (01:48:27) कि हम लोग एटम्स और मॉलिक्यूल्स का (01:48:28) अलग-अलग रिअरेंजमेंट है। अब एक पत्थर को (01:48:30) कोई इंसान तलवार से दो टुकड़ों में काट दे (01:48:32) या मुझे। अकॉर्डिंग टू एथिज्म इट इज़ सेम। (01:48:34) देयर इज नो इवल एंड गुड अकॉर्डिंग टू (01:48:35) एथिज्म। (01:48:37) जी। अच्छा फैज साहब का सवाल ये है कि (01:48:41) कोशिश भी करते तो इससे गलत सवाल नहीं कर (01:48:43) पाते। (01:48:45) एक लाइफ फॉर्म है और लाइफ फॉर्म में (01:48:48) फीलिंग्स है। मतलब लाइफ फॉर्म सुनता है, (01:48:52) देखता है, टेस्ट कर सकता है, फील कर सकता (01:48:55) है। तो उसकी जो ये जो क्वालिटी इस बबल में (01:48:59) आ गई है कि वो जानवर में भी है, इंसान में (01:49:02) भी है। तो जाहिर है कि उसे कोई तकलीफ (01:49:04) पहुंचेगी। तो चकि उसके पास वो सेंसिटिविटी (01:49:07) है तो करेगा। पत्थर में वह सेंसिटिविटी (01:49:10) नहीं है। तो यह क्या सवाल हुआ कि अगर (01:49:12) पत्थर को काटा तो पत्थर को तकलीफ नहीं (01:49:14) होती। तो आपको काटे तो आपको क्यों तकलीफ (01:49:16) होगी? बैठ जाइए। (01:49:17) जी। (01:49:18) हां, अगला सवाल। (01:49:19) हां पूछिए पूछिए पूछिए। (01:49:21) जी जावेद अख्तर साहब। (01:49:22) अरे भैया सब आप लोग मुफ्ती साहब को छोड़ (01:49:26) रहे हैं। वो मेरे ही पीछे पड़े हैं। क्या? (01:49:28) चलो बोलो भाई। (01:49:30) यू यू आस्क हाउ गॉड कैन एक्सिस्ट व्हेन (01:49:33) चिल्ड्रन डाई एंड गाज़ा। (01:49:34) हां? (01:49:35) यू आस्क्ड हाउ गॉड कैन एकिस्ट व्हेन (01:49:37) चिल्ड्रन डाई इन काज़ा एंड यू आल्सो मेंशन (01:49:40) द राइज़ ऑफ़ एथिज्म इन यूरोप बट द सेम (01:49:43) इवेंट्स आल्सो आर लीडिंग मेनी एथिस्ट एंड (01:49:46) नॉन बिलीवर्स टू टर्न टुवर्ड्स फेथ हाउ डू (01:49:49) यू इंटरप्रेट दिस कंट्राडिक्शन वेयर (01:49:51) सफरिंग पुशेस सम अवे फ्रॉम गॉड येट (01:49:54) ब्रिंग्स अदर्स क्लोजर टू बिलीफ आपको एक (01:49:57) बात बताऊं दुनिया परफेक्ट तो कहीं भी नहीं (01:50:00) है हर जगह कुछ खामियां है बेटा एक मिनट आप (01:50:03) ही को कहेंगे देखो वो (01:50:06) तो कुछ खामियां कमजोरियां खराबियां सब जगह (01:50:09) है। लेकिन अगर देखोगे ईमानदारी से कि (01:50:12) दुनिया सबसे ज्यादा मुजब कहां है? एक आम (01:50:16) शहरी को कहां हुकूक हासिल है? वो बोल सकता (01:50:20) है। अपनी मर्जी से काम कर सकता है। अपनी (01:50:22) मर्जी से राय दे सकता है। हुकूमत के खिलाफ (01:50:25) बोल सकता है। बरसरे इख्तेदार लोगों के (01:50:28) बारे में बोल सकता है। सरमायादारों के (01:50:30) खिलाफ बोल सकता है। तो आपको ये (01:50:32) स्कंडीनेवियन कंट्रीज में मिलेगा। (01:50:34) वेस्टर्न यूरोप में मिलेगा। मैं नहीं कह (01:50:36) रहा हूं परफेक्ट है। बिल्कुल नहीं। वहां (01:50:38) बहुत खराबियां भी है। परफेक्ट तो कोई (01:50:40) नहीं। लेकिन जिन-जिन मुल्कों में लिटिल (01:50:42) अमेरिका देखो। गल्फ देखो। वहां पर आपको यह (01:50:47) जरूर है कि रेप नहीं होते होंगे। रेप की (01:50:49) जरूरत क्या है? भाई उसको तो खरीद लो। घर (01:50:51) में रखो। सड़क पे रेप करने की क्या जरूरत (01:50:54) है? मगर सुनिए सुनिए सुनिए। मगर हकीकत ये (01:50:58) है कि वहां शख्स आजादी राय देने की बोलने (01:51:02) की नहीं है। (01:51:04) जी। ये एक आखरी सवाल मुफ्ती साहब से। हां (01:51:07) मैं इनको माइक दीजिए। (01:51:10) शुक्रिया। मेरा नाम मनीषा है। मैं हरियाणा (01:51:12) से आई हूं। मैं मुफ्ती साहब से एक बात (01:51:14) पूछना चाहती हूं। आप बार-बार जावेद साहब (01:51:16) को कंट्राडिक्ट तो कर रहे हैं कि आपने ये (01:51:18) कहा, ये कहा। लेकिन आप भी एजंपशंस के (01:51:21) बेसिस पे बात कर रहे हैं। आपने खुदा के (01:51:23) होने का कौन सा प्रूफ पेश किया है खुदा (01:51:26) [संगीत] की एक्सिस्टेंस का। अब मां इस (01:51:28) सवाल को अलग रहने दीजिए कौन एथिस्ट है, (01:51:30) कौन नहीं है। और दूसरी बात जो आपने एक (01:51:32) छोटी सी कही थी कि ये फ्री विल का (01:51:35) इस्तेमाल करता है इंसान अपनी। लेकिन उस (01:51:37) फ्री विल का इस्तेमाल में मतलब खुदा ने ये (01:51:40) दे दी सबको ये इजाजत कि वो कितना घिनौनापन (01:51:44) और कितने ज्यादा खराब से खराब तरीके (01:51:46) इस्तेमाल कर सकता है। (01:51:47) जब आप सुनते हैं (01:51:48) आप फ्री विल को मानती है ना या कहती है कि (01:51:50) फ्री विल नहीं है। (01:51:52) है ना? मानती है ना? तो अब आपके पास इसका (01:51:55) कोई एक्सप्लेनेशन नहीं है कि अगर एक इंसान (01:51:59) उस फ्री विल का इस्तेमाल करके गलत काम कर (01:52:01) रहा है और बच के अच्छी जिंदगी गुजार के (01:52:04) निकल जा रहा है उसका कोई रिकंपेंस नहीं (01:52:06) है। हमारे वर्ल्ड व्यू में जो इंसान गलत (01:52:10) काम कर रहा है उसको भी रिकंपैेंस यानी (01:52:13) उसका बुरा बदला मिलना है और जो सही काम कर (01:52:15) रहा है उसको सही बदला मिलना है। लिहाजा जो (01:52:18) फ्री विल है वो इस तरीके से है कि एक (01:52:21) लिमिटेड टाइम तक खुदा ने मोहलत दी है। ऐसा (01:52:23) नहीं कि छूट दे दी जो करना है करते रहो (01:52:25) हमेशा। वक्त आएगा जब एग्जाम का टाइम खत्म (01:52:28) होगा तब रिजल्ट आएगा। दौराने एग्जाम (01:52:30) जबरदस्ती आपको नहीं बताया जाएगा। (01:52:32) अरे भाई एक मिनट मुफ़्ती साहब से मेरा मैम (01:52:36) मुफ्ती साहब सेम (01:52:40) एक सेकंड रुक जाइए। आपसे फ़ आपसे (01:52:45) मैं मुफ़्ती साहब से एक ही सवाल करता हूं (01:52:48) के अगर जो हो रहा है फ्री विल से हो रहा (01:52:51) है और एक दिन बरोज़ कयामत इंसाफ होगा महशर (01:52:55) में वगैरह-वगैरह (01:52:58) तो दुआ क्यों मांगते हैं लोग? दुआ मांगते (01:53:01) हैं। इसके मतलब है अभी भी उसने यह (01:53:03) डिपार्टमेंट रखा है कि मैं रोजमर्रा की (01:53:06) जिंदगी में इंटरव्यू ही कैन (01:53:09) तो तुम ही कैन हो तुम मुझे नौकरी दिला (01:53:12) देते हो। मेरे बेटे को ग्रीन कार्ड दिला (01:53:14) देते हो और 45,000 बच्चे मरते हैं उन्हें (01:53:16) रोकते नहीं हो। (01:53:17) नहीं तो क्या आप ये कह रहे हैं कि इस (01:53:18) दुनिया में जालिमों को कभी पकड़ ही नहीं (01:53:20) होती है। (01:53:21) अरे जो भी पकड़ होगी। वो बच्चे के रोते (01:53:23) हैं। (01:53:24) बिल्कुल देखिए मैंने अपने ओपनिंग (01:53:26) स्टेटमेंट में यही कहा था कि जनाब जावेद (01:53:28) साहब सिर्फ इमोशनल आर्गुमेंट दिस एन (01:53:30) इमोशनल आर्गुमेंट ये छोटे इसके पीछे (01:53:34) इसके पीछे का रीज़न मैंने बताया क्या है? (01:53:37) इसके पीछे का क्या है मैंने बताया। (01:53:39) मंच से आप लोगों को सज्जनों इसलिए कह रहा (01:53:41) हूं ताकि थोड़ा सा आपके कॉन्शियस पे जोर (01:53:44) रहे कि आपको आर्डर बचा के रखना है। वक्त (01:53:47) तय हुआ था। ये वक्त पूरा हुआ। आपने इतने (01:53:50) धैर्य पूर्वक सुना। मैं आप सबका बहुत-बहुत (01:53:52) शुक्रगुजार हूं। यदि इन दोनों विद्वानों (01:53:55) की इच्छा होगी तो कभी हम इस बातचीत का (01:53:58) राउंड टू राउंड थ्री यही तो देखिए खूबी है (01:54:00) इंसान की कि बहस मुबासे में वो पड़ा रहता (01:54:03) है। आप लोगों ने बड़े धैर्य का परिचय (01:54:05) दिया। बहुत-बहुत शुक्रिया। इसी के साथ ये (01:54:06) बातचीत यहां पे (01:54:07) आप लोगों को मैं एक बात बता दूं। ये सारी (01:54:09) बहस हो गई। अब मुफ्ती साहब और बड़े मुफ्ती (01:54:12) साहब इन सब के साथ में खाना खाने वाला (01:54:14) हूं।

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