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Title: Meningitis | Causes | Pathophysiology | Risk Factor | Symptoms | Diagnose | Treatment
Duration: 00:32:34
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हेलो फ्रेंड्स, वेलकम टू रजनीत मेडिकल
(00:00:02)
एजुकेशन। इस लेक्चर में हम डिस्कस करेंगे
(00:00:04)
मेनिजाइटिस। सो लेट्स स्टार्ट द वीडियो।
(00:00:07)
मेनिंजाइटिस। मेनिंजाइटिस क्या होता है?
(00:00:09)
नेम से ही क्लियर है। मेनिंजाइटिस। इसमें
(00:00:12)
मेनिंजाइटिस का क्या मतलब है? मेनिजेस। तो
(00:00:16)
मेनिंजेस में इनफ्लामेशन होना। आईटीआईएस
(00:00:19)
क्या इंडिकेट कर रहा है? इनफ्लामेशन। तो
(00:00:21)
जब मेनिंजेस में इनफ्लामेशन हो जाती है जो
(00:00:24)
कि कॉमनली इनफेक्शन के कारण होती है तो उस
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टर्म को हम क्या बोलते हैं? मेनिंजाइटिस।
(00:00:29)
समटाइ्स हम इसको स्पाइनल मेनिंजाइटिस भी
(00:00:32)
कहते हैं। तो मेनिंजाइटिस और स्पाइनल
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मेनिंजाइटिस दोनों एक ही कंडीशन है। नाउ
(00:00:37)
सबसे पहले हम क्या पढ़ेंगे कि मेनिंजेस
(00:00:39)
क्या होता है? जिसकी इनफ्लामेशन हो रही
(00:00:41)
है। तो मेनिंजेस क्या होता है? मेनिंजेस
(00:00:43)
हमारे ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड के ऊपर
(00:00:47)
प्रोटेक्टिव कवरिंग या फिर प्रोटेक्टिव
(00:00:49)
लेयर होती है जिसको मेनिंजेस कहते हैं। तो
(00:00:51)
ये स्कल है। स्कल बोन। स्कल बोन के अंदर
(00:00:55)
क्या है? ब्रेन है तो ब्रेन को इसने कवर
(00:00:57)
किया हुआ है मेनंजेस ने और स्पाइनल कॉर्ड
(00:01:00)
को। तो ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड की यह
(00:01:02)
प्रोटेक्टिव कवरिंग है। प्रोटेक्टिव
(00:01:04)
कवरिंग इसलिए है क्योंकि ये ब्रेन और
(00:01:06)
स्पाइनल कॉर्ड को इंजरी से बचाती हैं।
(00:01:08)
ट्रोमा से बचाती हैं। प्लस साथ में ही ये
(00:01:10)
न्यूट्रिएंट्स भी प्रोवाइड करते हैं ब्रेन
(00:01:12)
एंड स्पाइनल कॉर्ड को। कैसे? अब देखो ये
(00:01:14)
इसी को बड़ा करके दिखाया हुआ है मेनिंजेस
(00:01:16)
को। तो सबसे पहले ये स्कल बोन है। उसके
(00:01:19)
नीचे ये तीन लेयर्स होती हैं मेनिंजेस की।
(00:01:21)
सबसे ऊपर ये जो आउटर वाली है अगर हम स्कल
(00:01:24)
से अंदर जाएं स्कल से ब्रेन की तरफ तो
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आउटर वाली क्या है? ड्यूरामेटर और उसके
(00:01:29)
बीच वाली क्या है? मतलब ड्यूरामेटर के जो
(00:01:31)
नीचे आती है वो है एरेकेनॉइड मैटर। और
(00:01:33)
सबसे इनर वाली जो कि ब्रेन के बिल्कुल ऊपर
(00:01:36)
प्रेजेंट है। ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड के
(00:01:38)
ऊपर वो क्या है? पायामेटर। तो ये डीएपी डप
(00:01:41)
ड्यूरामेटर, एरेकेनॉइड मैटर एंड पायाटर।
(00:01:44)
और अगर हम ब्रेन से स्कल की तरफ चलें तो
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ये क्या बन जाता है? पैड पायामीटर,
(00:01:47)
एरेकेनॉइड मैटर एंड ड्यूरामेट। तो ये तीन
(00:01:50)
प्रोटेक्टिव लेयर्स होती हैं। अब जो
(00:01:52)
ड्यूरामेटर है ये सबसे आउटर ये हार्ड लेयर
(00:01:55)
होती है। एरेकेनॉइड मैटर ये मिडिल वाली
(00:01:58)
लेयर होती है और पायामेटर सबसे इनर ये
(00:02:00)
डेलिकेट लेयर होती है। नाउ एरेकनॉइड मैटर
(00:02:03)
के जो नीचे स्पेस आता है ये जो स्पेस है
(00:02:06)
इस स्पेस को हम क्या बोलते हैं? सब
(00:02:08)
एरेकनॉइड स्पेस। एरेकेकनॉइड के नीचे है
(00:02:11)
इसलिए सब। सब सब का मतलब नीचे। तो
(00:02:13)
एरेकेनॉइड मैटर के जो नीचे स्पेस है उसको
(00:02:15)
सब एरेकेनॉइड स्पेस कहते हैं। जहां पर
(00:02:18)
सेरीब्रोस्पाइनल फ्लूइड फ्लो करता है। तो
(00:02:21)
सीएसएफ हमारे ब्रेन के वेंट्रिकल्स में
(00:02:23)
क्रॉइड प्लेक्सेस में प्रोड्यूस होता है।
(00:02:25)
ये जो फ्लूइड है ये ब्लड से ही फिल्टर
(00:02:27)
होकर बनता है। तो अल्ट्राफिल्ट्रेशन होता
(00:02:29)
है ये प्लाज्मा का सेरीब्रोस्पाइनल फ्लूइड
(00:02:32)
ब्रेन के वेंट्रिकल से निकलकर ये जो
(00:02:34)
सबरेकनॉइड स्पेस है जो कि ब्रेन और
(00:02:36)
स्पाइनल कॉर्ड के अराउंड प्रेजेंट है
(00:02:39)
उसमें फ्लो करता है। तो ये सीएसएफ क्या
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प्रोवाइड करता है? यह फर्दर प्रोटेक्शन
(00:02:43)
कुशनिंग प्रोवाइड करता है हमारे ब्रेन और
(00:02:45)
स्पाइनल कॉर्ड को। साथ में ही यह
(00:02:46)
न्यूट्रिएंट्स एंड ऑक्सीजन भी प्रोवाइड
(00:02:48)
करता है हमारे ब्रेन एंड स्पाइनल कॉर्ड
(00:02:50)
को। मेनिंजेस में भी नर्व्स और ब्लड
(00:02:52)
वेसल्स प्रेजेंट होती हैं जो कि हमारे
(00:02:54)
ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड को ऑक्सीजन एंड
(00:02:56)
न्यूट्रिएंट्स प्रोवाइड करती हैं। नाउ ये
(00:02:58)
जो एरिकनॉइड मैटर और पाया मैटर है ये
(00:03:01)
मिडिल और इनर लेयर है ये थोड़ी डेलिकेट
(00:03:04)
होती है। इनको हम लेप्टोमेनिंजेस बोलते
(00:03:06)
हैं। लेप्टोमेनिंजेस
(00:03:11)
और यह जो आउटर लेयर है ड्यूरामेटर यह
(00:03:13)
थोड़ी टफ लेयर होती है। इसको हम
(00:03:15)
पैकीनिंजेस बोलते हैं।
(00:03:21)
जब हम टिपिकल मेनिंजाइटिस की बात करते हैं
(00:03:23)
जिसमें मेनिजेस में इनफ्लामेशन हो जाती है
(00:03:26)
मोस्ट कॉमनली इनफेक्शन के कारण तो उसमें
(00:03:28)
टिपिकल मेनिंजेस में क्या इनवॉल्व होता है
(00:03:31)
लेप्टोमेनिंजेस मतलब एरेकेनॉइड मैटर एंड
(00:03:33)
पायाटर और एरेकेनॉइड मैटर और पायामेटर के
(00:03:36)
बीच में क्या फ्लो कर रहा है सब एरेकेनॉइड
(00:03:39)
स्पेस में सीएसएफ फ्लो कर रहा है तो
(00:03:40)
सीएसएफ भी इनफेक्टेड हो जाता है इसमें सब
(00:03:43)
एरेकेनॉइड स्पेस में जो सीएसएफ प्रेजेंट
(00:03:45)
होता है तो टिपिकल अगर हम मेनिंजाइटिस की
(00:03:48)
बात करें तो उसमें एरेकेनॉइड मैटर,
(00:03:50)
पायामीटर और सब एयरकनॉइड स्पेस जिसमें
(00:03:52)
सीएसएफ फ्लो कर रहा है वो अफेक्ट होते
(00:03:55)
हैं। और अगर हम बात करें जब ड्यूरामेटर
(00:03:58)
अफेक्ट होती है तो वो कौन सी मेनंजेस है?
(00:04:01)
पैकीजाइटिस। क्योंकि ड्यूरामेटर क्या है?
(00:04:03)
टफ लेयर है। यूजली किस कारण से होती है?
(00:04:06)
रेयर होता है। लेकिन यह तभी होता है सपोज़
(00:04:08)
अगर यहां से स्कल से इंजरी हुई है तो
(00:04:10)
डायरेक्टली ड्यूरा मैटर उसके नीचे आती है
(00:04:13)
स्कल के नीचे तो वो तब अफेक्ट होती है
(00:04:15)
ड्यूरामेटर या फिर अगर सिफलिस है,
(00:04:17)
ट्यूबरक्लोसिस है, साइनस इंफेक्शन या फिर
(00:04:20)
इयर इंफेक्शन में ड्यूरामेटर अफेक्ट हो
(00:04:22)
सकती है। अदरवाइज़ नॉर्मली जो मेनिंजाइटिस
(00:04:25)
होता है उसमें ब्लड से इंफेक्शन क्रॉस
(00:04:27)
होकर पायामीटर और एरेकेनॉइड मैटर और
(00:04:29)
सबरेकनॉइड स्पेस जहां पर सीएसएफ फ्लो कर
(00:04:32)
रहा है उसको अफेक्ट करती है। सो, ये हो
(00:04:34)
गया मेनिजेस। अब मेनिजेस में इनफ्लामेशन
(00:04:37)
को हम क्या बोलते हैं? मेनिंजाइटिस। सो,
(00:04:39)
मेनिंजाइटिस इज़ द इनफ्लामेशन ऑफ़ मेनिजेस
(00:04:42)
यूजली कॉज्ड बाय इनफेक्शन। इनफेक्शन के
(00:04:44)
कारण ये होता है। मेनिंजेस हमने पढ़ लिया।
(00:04:46)
तो, अगर हम इंफेक्शन की भी बात करें, तो
(00:04:49)
इंफेक्शन में यूज़ली ये बैक्टीरियल
(00:04:51)
इंफेक्शन के कारण ये ज्यादा सीरियस होता
(00:04:53)
है। वैसे कॉमन क्या है? वायरल इंफेक्शन।
(00:04:56)
वायरल इंफेक्शन के कारण मेनिंजाइटिस हो
(00:04:58)
जाना। लेकिन अगर बैक्टीरियल इंफेक्शन हो
(00:05:00)
जाता है तो वो सीरियस होता है। उसके लिए
(00:05:03)
हमको ब्रॉड स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक्स देने
(00:05:05)
पड़ते हैं। विग्रस कोर्स और ये लाइफ
(00:05:07)
थ्रेटनिंग भी हो सकता है। बैक्टीरियल
(00:05:08)
मेनिंजाइटिस। नाउ मेनिंजेस क्या है?
(00:05:10)
प्रोटेक्टिव मेंब्रेनस है जो कि ब्रेन और
(00:05:12)
स्पाइनल कॉर्ड को कवर करती है। तीन इसमें
(00:05:14)
आते हैं ड्यूरा मैटर, एरेकेनॉइड मैटर एंड
(00:05:16)
पाया मैटर। और एरेकेनॉइड और पाया मैटर के
(00:05:19)
बीच में सबकेॉइड स्पेस जहां पर सीएसएफ
(00:05:21)
फ्लो करता है। मेनिजेस के फंक्शन क्या है?
(00:05:23)
ये प्रोटेक्शन प्रोवाइड करता है ब्रेन और
(00:05:25)
स्पाइनल कॉर्ड को इंजरी से। सेकंड इसमें
(00:05:28)
नर्व्स होती हैं, ब्लड वेसल्स होता है और
(00:05:30)
सेरीब्रोस्पाइनल फ्लूइड होता है।
(00:05:31)
सेरीब्रोस्पाइनल फ्लूइड फर्दर प्रोटेक्शन
(00:05:33)
प्रोवाइड करता है। प्लस सेरीब्रोस्पाइनल
(00:05:35)
फ्लूइड क्या है? न्यूट्रिएंट्स भी सप्लाई
(00:05:37)
करता है ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड को। सो ये
(00:05:39)
ब्लड सप्लाई और सीएसएफ के कारण
(00:05:42)
न्यूट्रिएंट्स एंड ऑक्सीजन भी देता है
(00:05:43)
ब्रेन एंड स्पाइनल कॉर्ड को। तो ये
(00:05:45)
मेनिजेस का इंपॉर्टेंट फंक्शन है। नाउ
(00:05:47)
एसेप्टिक मेनिंजेस क्या है? सेप्सिस तो
(00:05:50)
हमें पता है। सेप्टिक का मतलब है
(00:05:51)
इंफेक्शन। तो यहां पर सेप्टिक मेनिंजाइटिस
(00:05:54)
वो होगी जिसमें बैक्टीरिया के कारण
(00:05:56)
इंफेक्शन हुआ और बैक्टीरिया के कारण
(00:05:58)
मेनिंजाइटिस हुआ। अगर बैक्टीरिया कॉज नहीं
(00:06:01)
है मेनिंजाइटिस का तो उसको हम क्या बोलते
(00:06:04)
हैं? एसेप्टिक मेनिंजाइटिस। तो एसेप्टिक
(00:06:06)
मेनिंजाइटिस में जब हम ब्लड कल्चर करते
(00:06:08)
हैं पेशेंट को सिम्टम्स तो हैं। पेशेंट को
(00:06:11)
सिम्टम्स हैं मेनिंजाइटिस के लेकिन जब हम
(00:06:13)
सीएसएफ का कल्चर करते हैं तो सीएसएफ कल्चर
(00:06:16)
क्या आता है? नेगेटिव आता है बैक्टीरिया
(00:06:18)
के लिए। तो इट मींस बैक्टीरिया कॉज नहीं
(00:06:20)
है मेनंजाइटिस का तो क्या कॉज हो सकता है?
(00:06:22)
वायरस हो सकता है। इट कैन बी कॉज बाय
(00:06:24)
वायरस। नॉन इनफेशियस कोर्स भी हो सकता है।
(00:06:27)
मतलब इंफेक्शन तो हो गया कि बैक्टीरिया हो
(00:06:30)
गया या वायरस हो गया। अगर बैक्टीरिया है
(00:06:31)
तो वो सेप्टिक मेनजाइटिस कहलाता है।
(00:06:33)
एसेप्टिक मेनंजाइटिस कॉमनली तब कहलाता है
(00:06:36)
जब इंफेक्शन कोज है लेकिन बैक्टीरिया नहीं
(00:06:39)
है वायरस है। या फिर नॉन इनफेक्शन कोज है।
(00:06:41)
जैसे कि कैंसर के कारण मेनिंजाइटिस हुआ।
(00:06:44)
ल्यूपस जो कि एक ऑटोइ्यून कंडीशन है उसके
(00:06:47)
कारण मेनिंजेस को ही अटैक करने लग गया
(00:06:49)
इम्यूनिटी तो उस कारण से भी मेनिंजाइटिस
(00:06:52)
हो सकता है एसेप्टिक या फिर कुछ मेडिकेशंस
(00:06:54)
जैसे कि नॉन स्टेरॉइडल एंटी इनफ्लामेटरी
(00:06:57)
ड्रग्स, एंटीबायोटिक्स, आईवी
(00:06:58)
इम्यूनोग्लोबुलिंस इनके कारण भी
(00:07:00)
मेनिंजाइटिस होता है या फिर अदर इनफेक्शन
(00:07:03)
जैसे कि ट्यूबरक्लोसिस या फिर फंगल। अगर
(00:07:06)
बैक्टीरिया नहीं है मेनिंजाइटिस का कोज़ तो
(00:07:08)
वो क्या होगा? एसेप्टिक मेनिंजाइटिस। तो
(00:07:11)
हमने मेनिंजेस भी पढ़ लिया। मेनिजाइटिस देख
(00:07:13)
लिया क्या होता है? पैथोफिजियोलॉजी देखते
(00:07:14)
हैं कि ये जो इंफेक्शन है ये मेनिंजेस में
(00:07:17)
कैसे होता है। किस तरह से ये स्प्रेड होता
(00:07:19)
है। तो पैथोज्स जो भी माइक्रो ऑर्गेनिज्म
(00:07:22)
है चाहे वो वायरस है, बैक्टीरिया है वो
(00:07:24)
कैसे एंटर करता है? सबसे पहले ब्लड
(00:07:26)
स्ट्रीम के थ्रू एंटर करता है। तो सपोज़
(00:07:30)
इंफेक्शन कहीं और हुआ है हमारी बॉडी में
(00:07:32)
कहीं भी हुआ है और ब्लड के थ्रू वो ब्रेन
(00:07:34)
तक चला गया है। तो ब्लड के थ्रू वो
(00:07:37)
सेंट्रल नर्वस सिस्टम में चला गया। ब्रेन
(00:07:38)
या फिर स्पाइनल कॉर्ड में। ब्रेन में ब्लड
(00:07:41)
ब्रेन बैरियर को क्रॉस किया और ब्रेन के
(00:07:43)
अंदर एंटर हो गया। मेनिजेस में एंटर हो
(00:07:45)
गया। तो ब्लड स्ट्रीम के थ्रू यह सबसे
(00:07:47)
कॉमन रूट है इंफेक्शन का एंट्री का। तो
(00:07:50)
फ्रॉम इंफेक्शन एल्सवेयर तो ब्लड स्ट्रीम
(00:07:53)
में एंटर हुआ लेकिन इंफेक्शन कहीं ओर था।
(00:07:56)
तो वो सीएसएफ में सेरीब्रोस्पाइनल फ्लूइड
(00:07:58)
में एंटर हुआ या फिर मेनिजिस में एंटर हुआ
(00:08:01)
और मेनिजाइटिस कॉज किया। या फिर डायरेक्ट
(00:08:03)
स्प्रेड जैसे कि अगर इयर में इंफेक्शन है,
(00:08:06)
साइनसेस में इंफेक्शन है जो कि नेज़ल
(00:08:08)
साइनसेस होते हैं अगर उनमें इंफेक्शन है
(00:08:10)
तो ये सभी आसपास है ब्रेन के। तो
(00:08:13)
डायरेक्टली मेनिजेस में इंफेक्शन कॉज हो
(00:08:15)
सकता है। या फिर स्कल में फ्रैक्चर हो गया
(00:08:18)
तो स्कल में फ्रैक्चर हुआ तो बैक्टीरिया
(00:08:20)
या फिर वायरस जो है ईज़ली एंटर कर सकता है
(00:08:22)
मेनिंजेस में। या फिर सर्जरी समटाइ्स
(00:08:25)
पोस्ट सर्जरी। अगर ब्रेन की कोई सर्जरी
(00:08:27)
हुई है तो उसके बाद भी बैक्टीरिया को एक
(00:08:29)
रूट मिल जाता है ईली एंट्री होने का या
(00:08:32)
फिर सर्जरी के बाद भी इंफेक्शन हो सकता है
(00:08:34)
मेनिंजेस में। तो पैथोज्स ब्लड ब्रेन
(00:08:36)
बैरियर को क्रॉस करता है और सब आरेकनॉइड
(00:08:39)
स्पेस में एंटर होता है। उसके बाद पैथोजन
(00:08:42)
सीएसएफ में मल्टीप्लाई करता है
(00:08:43)
सेरीब्रोस्पाइनल फ्लूइड में। क्योंकि
(00:08:45)
सीएसएफ में क्या है कि इम्यूनिटी कम है।
(00:08:48)
नॉर्मली वहां पर लिंफोसाइट्स या फिर
(00:08:49)
डब्ल्यूबीसीस जो है वो नॉर्मली वहां पर
(00:08:51)
प्रेजेंट नहीं होते बिग ब्लड सेल्स। प्लस
(00:08:53)
सीएसएफ में क्या है? है न्यूट्रिएंट्स इनफ
(00:08:55)
है पैथोजंस की नरिशमेंट के लिए। तो सीएसएफ
(00:08:58)
में ही सीएसएफ को अपनी साइट बनाते हैं वो।
(00:09:01)
वहां पर मल्टीप्लाई होते हैं पैथोजंस। तो
(00:09:03)
इम्यून सिस्टम क्या करता है? साइटोकाइन
(00:09:05)
रिलीज़ करता है इनफ्लामेटरी मार्कर्स जिससे
(00:09:08)
वहां पर सीएसएफ में वाइट ब्लड सेल्स फिर
(00:09:10)
आते हैं। तो वो डिपेंड करता है कि
(00:09:11)
बैक्टीरियल है तो न्यूट्रोफिल्स आते हैं।
(00:09:13)
अगर वायरल इंफेक्शन है तो वहां पर
(00:09:15)
लिंफोसाइट्स आते हैं। तो सीएसएफ में क्या
(00:09:18)
होता है? देन उसके बाद चेंज होता है। जो
(00:09:20)
सीएसएफ की जो कंपोज़िशन है वो बदल जाती है।
(00:09:22)
जैसे कि वहां पर डब्ल्यूबीसीस का अमाउंट
(00:09:24)
इंक्रीस हो जाता है। वाइट ब्लड सेल्स का।
(00:09:26)
नॉर्मली वहां पर प्रेजेंट नहीं होते
(00:09:27)
क्योंकि डब्ल्यूबीसीस एक तो लार्ज साइज
(00:09:29)
होते हैं। प्लस सीएसएफ में क्या होता है?
(00:09:31)
पैथोजन फ्री होता है। तो डब्ल्यूबीसीस
(00:09:33)
वाइट ब्लड सेल्स वहां पर आने स्टार्ट हो
(00:09:35)
जाएंगे। अगर बैक्टीरियल है तो
(00:09:38)
न्यूट्रोफिल्स आएंगे। अगर वायरस है तो
(00:09:40)
लिंफोसाइट्स का अमाउंट ज्यादा होगा।
(00:09:42)
प्रोटीन का अमाउंट इंक्रीस हो जाएगा
(00:09:44)
इनफ्लामेशन के कारण। अब अगर बैक्टीरियल
(00:09:46)
मेनंजाइटिस है तो वो ज्यादा सीवियर होता
(00:09:48)
है। ज्यादा उसमें डैमेज होता है। जिसकी
(00:09:50)
वजह से प्रोटीन का अमाउंट ज्यादा इंक्रीस
(00:09:53)
होता है बैक्टीरियल में। अगर वायरल है तो
(00:09:55)
स्लाइटली इंक्रीस होता है प्रोटीन का
(00:09:57)
अमाउंट। अब ग्लूकोस का जो अमाउंट है वो
(00:10:00)
डिक्रीज हो जाता है अगर बैक्टीरियल
(00:10:01)
इंफेक्शन है। क्योंकि बैक्टीरियास को
(00:10:04)
ग्लूकोस पसंद होता है तो वो उसे खाते हैं।
(00:10:07)
उसको यूज़ करते हैं एनर्जी के लिए। तो
(00:10:09)
बैक्टीरिया अगर बैक्टीरियल मेनंजाइटिस है
(00:10:11)
तो ग्लूकोस का अमाउंट कम हो जाएगा। अगर
(00:10:13)
वायरल है तो थोड़ा सा ही कम होता है या
(00:10:15)
फिर नॉर्मल रहता है। उसके बाद
(00:10:17)
इंट्राक्रेनियल प्रेशर इंक्रीस हो जाता
(00:10:19)
है। तो देखो मेनिजेस में क्या हो गया है?
(00:10:21)
इनफ्लामेशन हो गया है। इनफ्लामेशन का मतलब
(00:10:23)
है वहां स्वेलिंग हो गई है, एडमा हो गया
(00:10:25)
है। तो जब ये होता है तो क्या होता है कि
(00:10:27)
हमारी स्कल में तीन चीजों से प्रेशर बनता
(00:10:29)
है जिसको इंट्राक्रेनियल प्रेशर कहते हैं।
(00:10:31)
क्योंकि स्कल को क्रेनियम भी कहते हैं। तो
(00:10:33)
तीन चीजें कौन सी है? एक तो ब्रेन टिश्यू।
(00:10:35)
दूसरा सेरीब्रोस्पाइनल फ्लूइड और तीसरा
(00:10:38)
क्या है? ब्लड। चाहे वो वेनस ब्लड है,
(00:10:40)
चाहे आर्टेरियल ब्लड है जो भी ब्रेन में
(00:10:42)
प्रेजेंट है। ये तीनों चीजें मिलकर
(00:10:44)
इंट्राक्रेनियल प्रेशर बनाती हैं। और
(00:10:46)
तीनों चीजों में से किसी भी एक चीज का
(00:10:48)
वॉल्यूम अगर इंक्रीस होता है तो
(00:10:50)
इंट्राक्रेनियल प्रेशर इंक्रीस हो जाता
(00:10:52)
है। तो यहां पर मेनिंजेस में स्वेलिंग और
(00:10:54)
एडीमा के कारण ब्रेन टिश्यू का वॉल्यूम
(00:10:56)
इंक्रीस हो जाता है। प्लस साथ में ही
(00:10:58)
स्वेलिंग और एडीमा के कारण इनफ्लामेशन के
(00:11:00)
कारण जो एरिकनॉइड स्पेस है वहां पर
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इनफ्लामेशन के कारण सीएसएफ एब्सॉर्ब नहीं
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हो पाता। सीएसएफ की जो अब्सॉर्प्शन है वो
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एरेकनॉइड स्पेस से ही ड्यूरल वेनस
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साइनेसिस में होती है। क्योंकि एरेकेनॉइड
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स्पेस में एरेकेनॉइड विलाय होती हैं सब
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एरेकेकनॉइड स्पेस में जहां से सीएसएफ की
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एब्सॉर्प्शन होती है। तो सीएसएफ
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अब्जॉर्प्शन भी डिक्रीज हो जाती है। सो
(00:11:21)
रिड्यूस सीएसएफ अब्सॉर्प्शन मेनिंजेस का
(00:11:24)
वॉल्यूम इंक्रीस हो गया। सीएसएफ की
(00:11:25)
एब्सॉर्प्शन डिक्रीज हो गई। जिससे सीएसएफ
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का भी वॉल्यूम इंक्रीस हो गया। तो क्या
(00:11:29)
होता है? इंट्राक्रेनियल प्रेशर इंक्रीस
(00:11:31)
हो जाता है। जब इंट्राक्रेनियल प्रेशर
(00:11:33)
इंक्रीस होते हैं तो उसके जो क्लासिक साइन
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हैं वो क्या आते हैं? हेडेक होता है।
(00:11:36)
कास्टेंट सीवियर हेडेक होता है। फ्रंटल
(00:11:38)
हेडेक यूजली और प्रोजेक्टाइल वोमिटिंग
(00:11:41)
होती है। उसमें कोई भी नजिया वाले
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सिम्टम्स नहीं आते। मनकच्चा नहीं होता।
(00:11:46)
सीधा वोमिटिंग आती है। वोमिटिंग
(00:11:48)
प्रोजेक्टाइल होती है। वो फूड से रिलेटेड
(00:11:50)
नहीं होती। काफी प्रेशर सी आती है। साथ
(00:11:52)
में ही फीवर होगा मेनिजाइटिस के कारण
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क्योंकि इंफेक्शन है। नेक्स्ट स्टिफनेस
(00:11:57)
टिपिकल साइन है ये तीनों साइंस। नेक्स्ट
(00:11:59)
स्टिफनेस, फीवर और हेडेक। नेक स्टिफनेस या
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फिर इसको न्यूकल स्टिफनेस भी कहते हैं।
(00:12:05)
जिसमें जो नेक है वो आगे की तरफ फ्लेक्स
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नहीं हो पाती। क्योंकि यहां पर ये क्या
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है? मेनिजेस है सारी। ब्रेन और स्पाइनल
(00:12:11)
कॉर्ड को कवर जिसने किया हुआ है। तो
(00:12:13)
मेनिजेस में जब इनफ्लामेशन हो जाती है तो
(00:12:15)
नेक आगे की तरफ फ्लेक्स नहीं हो पाती। पेन
(00:12:17)
होता है नेक की फ्लेक्शन में। तो जिसको हम
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नेक स्टिफनेस बोलते हैं और हेडेक साथ में
(00:12:21)
होता है। फोटोफोबिया होता है। लाइट के लिए
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सेंसिटिविटी बढ़ जाती है। लाइट्स उसको
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अच्छी नहीं लगती। क्योंकि ऑप्टिक नर्व जो
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कि मेनिंजेस में है वो इरिटेट हो जाती है
(00:12:31)
जिसकी वजह से फोटोफोबिया होता है और साथ
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में ही जो इंट्राक्रेनियल प्रेशर इंक्रीस
(00:12:36)
हो गया उसके साइन आते हैं। अगर
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इंट्राक्रेनियल प्रेशर इंक्रीस होता है तो
(00:12:40)
ये भी लाइफ थ्रेटनिंग होता है। मेडिकल
(00:12:41)
इमरजेंसी है ये। क्योंकि जो ब्रेन में
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स्ट्रक्चर्स हैं जो कि ब्रेन स्टेम में है
(00:12:46)
मेडुला रेस्पिरेटरी सेंटर है वहां पर।
(00:12:48)
ब्रेन स्टेम इज़ वेरीेंट फॉर सर्वाइवल। और
(00:12:51)
अगर वो अफेक्ट होती है क्योंकि अगर
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इंट्राक्रेनियल प्रेशर इंक्रीस होता है तो
(00:12:55)
सेरीब्रल परफ्यूजन डिक्रीज हो जाता है।
(00:12:57)
ब्रेन को ब्लड सप्लाई कम मिलती है। जिसकी
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वजह से ये स्ट्रक्चर अफेक्ट होते हैं।
(00:13:00)
ब्रेन हर्निएशन भी हो सकती है
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इंट्राक्रेनियल प्रेशर इंक्रीस होने से।
(00:13:04)
तो जिसके कारण अल्टीमेटली ब्रेन डेथ हो
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सकती है। नाउ कॉजेस इसके क्या हैं? तो
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बैक्टीरियल कोज़ सबसे पहले पढ़ते हैं।
(00:13:10)
बैक्टीरियल मेनिंजाइटिस के। सो इनफेशियस
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कॉज़ज़ हैं और एक नॉन इनफेशियस है। इनफेशियस
(00:13:15)
में पैथोज्स होंगे। नॉन इनफेशियस में अदर
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कॉज़ज़ आएंगे। तो बैक्टीरियल अगर मेनिजाइटिस
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हो जाता है तो ये मेडिकल इमरजेंसी है
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क्योंकि बैक्टीरिया क्विकली मल्टीप्लाई
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होते हैं। पूरे ब्लड में फैल सकते हैं
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जिसको सेप्टिक शोक भी बोलते हैं। उसे
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सेप्टिसीमिया या फिर सेप्टिक शॉक हो सकता
(00:13:30)
है। तो सबसे कॉमन क्या है? नाइजीरिया
(00:13:32)
मेनंजाइटिस जिसको मेनिंजोकोपकल
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मेनिंजाइटिस भी बोलते हैं। यह बहुत
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कंटेजियस होती है। हाईली कंटेजियस। ईली ये
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एक पर्सन से दूसरे पर्सन को फैल जाती है।
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और यह एपिडेमिक होती है डोम्स और बैरेक
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में। मतलब जैसे हम भीड़भाड़ वाली जगह पर
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जब रहते हैं जैसे कि जो ट्रैवलर्स हैं या
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फिर स्टूडेंट्स हैं जब वो हॉस्टल में रहते
(00:13:53)
हैं तो वो एक दूसरे के क्लोज कांटेक्ट में
(00:13:55)
होते हैं तब ये जो बैक्टीरिया है
(00:13:57)
नाइजीरिया मेनंजाइटिस ये ईजीली स्प्रेड हो
(00:14:00)
सकता है। तो ये रेस्पिरेटरी रूट से ही
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स्प्रेड होता है। जैसे कि जब कोई पर्सन कफ
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करता है या स्नीज़ करता है और दूसरा पर्सन
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उस एयर ड्रॉपलेट्स को अगर इन्हेल कर लेता
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है तो यह स्प्रेड हो सकता है। हालांकि
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नाइजीरिया मेनंजाइटिस के लिए वैक्सीनेशन
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है। तो अगर कोई पर्सन ट्रैवल कर रहा है या
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फिर कोई हॉस्टल में रहने जा रहा है या फिर
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कोई क्राउडेड प्लेस में जा रहा है तो वह
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वैक्सीनेशन जरूर लेनी चाहिए इसके अगेंस्ट।
(00:14:22)
उसके बाद आता है स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया।
(00:14:24)
नाइजीरिया मेनंजाइटिस सबसे लाइफ थ्रेटनिंग
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भी है। अगर इसका ट्रीटमेंट नहीं किया जाता
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तो ये लाइफ थ्रेटनिंग हो सकती है।
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स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया। अगेन इसको बोलते
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हैं न्यूमोकोकल मेनंजाइटिस। यह भी
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रेस्पिरेटरी रूट के थ्रू स्प्रेड होती है।
(00:14:39)
यह भी सबसे कॉमन है। यह एडल्ट्स में इसका
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स्प्रेड हीमोफाइलस इनफ्लुएंजा टाइप बी
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इसके अगेंस्ट भी वैक्सीनेशन है जिसको
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एचआईवी वैक्सीन कहते हैं। ये चिल्ड्रन में
(00:14:48)
कॉमन होती है। ये भी प्रिवेंट की जा सकती
(00:14:51)
है वैक्सीनेशन के थ्रू। अगेन ये तीनों
(00:14:53)
क्या है? ये रेस्पिरेटरी रूट के थ्रू
(00:14:56)
स्प्रेड होते हैं ये इनफेक्शंस। उसके
(00:14:58)
अलावा बैक्टीरियल में आते हैं लाइसीरिया,
(00:15:00)
मोनोसाइटोजंस। ये फीकोरल रूट के थ्रू
(00:15:03)
कंटैमिनेटेड फूड या फिर वाटर के थ्रू
(00:15:05)
स्प्रेड होते हैं। माइकोबैक्टीरियम
(00:15:07)
ट्यूबरक्लोसिस ट्यूबरक्लोसिस चेस्ट
(00:15:10)
इंफेक्शन अगर चेस्ट ट्यूबरक्लोसिस हुआ है
(00:15:12)
तो वो इज़ली स्प्रेड हो सकता है। ब्रेन में
(00:15:14)
भी ब्रेन मेनंजाइटिस कोज़ कर सकता है। दो
(00:15:16)
इट्स बिट रेयर। उसके बाद आता है इकोलाई।
(00:15:19)
इकोलाई ये कब ट्रांसफर होता है? जैसे कि
(00:15:22)
ड्यूरिंग फीिटल बर्थ। क्योंकि अगर मदर के
(00:15:26)
जो बर्थ कैनाल है वहां पर इकोलाई प्रेजेंट
(00:15:28)
है या फिर लोअर गैस्ट्रोइेस्टाइनल ट्रैक
(00:15:30)
में जहां पर इकोलाई प्रेजेंट होता है और
(00:15:33)
ड्यूरिंग फीटल बर्थ अगर फीटस में ये
(00:15:35)
ट्रांसफर हो जाता है तो फीिटस को ये
(00:15:38)
मेनिंजाइटिस को कर सकता है। उसके बाद आता
(00:15:41)
है वायरल। वायरल मेनिंजाइटिस सबसे कॉमन है
(00:15:44)
और ये लाइफ थ्रेटनिंग नहीं है। ये यूजली
(00:15:46)
क्या होता है? रेस्ट और प्रॉपर न्यूट्रिशन
(00:15:49)
के साथ ये खुद भी ट्रीट हो जाता है। तो ये
(00:15:51)
लेस सीवियर है। इसमें क्या आता है? एंटी
(00:15:54)
वायरसेस। एंटीरो वायरसेस भी कंटैमिनेटेड
(00:15:56)
फूड और वाटर के थ्रू स्प्रेड होते हैं। तो
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इसका जो रूट ऑफ स्प्रेड है वो क्या है?
(00:16:00)
फीको ओरल रूट। उसके बाद आता है हर्पी
(00:16:03)
सिंप्लेक्स वायरस जो कि डायरेक्ट कांटेक्ट
(00:16:05)
से ट्रांसफर होते हैं। सेक्सुअल कांटेक्ट
(00:16:07)
से या फिर सलाइवा के साथ अगर डायरेक्ट
(00:16:09)
कांटेक्ट हो गया है। अगर कोल्ड सोर्स का
(00:16:11)
किसी दूसरे पर्सन के साथ डायरेक्ट
(00:16:12)
कांटेक्ट हो गया है तो ये ट्रांसफर होते
(00:16:14)
हैं। उसके बाद मम्स मम्स ऑफ कोर्स
(00:16:18)
रेस्पिरेटरी रूट है। अगेन एचआईवी एचआईवी
(00:16:21)
अगर इम्यूनो कॉम्प्रोमाइज इंडिविजुअल है
(00:16:23)
तो उसमें भी मेनिंजाइटिस कॉमनली हो सकता
(00:16:26)
है। इन्फ्लुएंजा भी कॉज कर सकता है
(00:16:28)
मेनिंजाइटिस। उसके बाद आता है फंगल और
(00:16:30)
पैरासिटिक। फंगल और पैरासिटिक रेयर है बट
(00:16:33)
यह भी कॉज करते हैं। फंगल में आता है
(00:16:35)
क्रिप्टोकोकस इन इम्यूनो कॉम्प्रोमाइज।
(00:16:37)
फंगल जो मेनजाइटिस है ये यूजुअली उन पीपल
(00:16:40)
में होता है जिनका इम्यूनिटी कॉम्प्रोमाइज
(00:16:42)
होता है। इम्यूनिटी लो होती है जिनमें
(00:16:44)
जैसे कि एचआईवी पेशेंट में एचआईवी और एड्स
(00:16:47)
के पेशेंट है या फिर किसी को अगर ऑर्गन
(00:16:49)
ट्रांसप्लांट किया है और वो इम्यूनो
(00:16:51)
सप्रेसेंट्स ले रहा है तो वो फंगल
(00:16:53)
मेनंजाइटिस हो सकता है। पैरासिटिक रेयर
(00:16:55)
होता है लेकिन पॉसिबल है यह भी। इसमें आता
(00:16:57)
है नेग्लेरिया फॉलरी ब्रेन ईटिंग एमीबा भी
(00:17:01)
इसको बोलते हैं। टॉक्सोप्लाज्मा गोंडाई।
(00:17:03)
तो ये सभी पैरा पैरासाइट्स भी कोज कर सकते
(00:17:06)
हैं मेनंजाइटिस। नाउ ये सभी थे इनफेशियस
(00:17:09)
कोज़। अब है नॉन इनफेशियस। इसमें पैथोज्स
(00:17:12)
नहीं होते। दूसरे कोज़ होते हैं जैसे कि
(00:17:14)
मेडिसिंस। नॉन स्टेरॉइडल एंटी इनफ्लामेटरी
(00:17:16)
ड्रग्स। ये भी कोज़ कर सकती हैं। अगर लॉन्ग
(00:17:19)
टर्म ले रहे हैं एंटीबायोटिक्स, कुछ
(00:17:20)
एंटीबायोटिक्स एंड इम्यूनोसप्रेसेंट्स।
(00:17:23)
उसके अलावा ऑटोइम डिसऑर्डर जैसे कि
(00:17:25)
सिस्टेमिक ल्यूपस। इसमें क्या होता है कि
(00:17:27)
मेनिंजेस को ही हमारा ही इम्यून सिस्टम
(00:17:30)
अटैक करने लग जाता है। प्लस ऑटोइ्यून में
(00:17:32)
क्या होता है कि पेशेंट
(00:17:34)
कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स भी लेता है। तो अगर
(00:17:36)
लॉन्ग टर्म से स्टेरॉइड पर है पेशेंट तो
(00:17:38)
भी इम्यूनिटी वीक हो सकती है। जिसके कारण
(00:17:41)
क्या हो सकता है? मेनिजाइटिस के रिस्क बढ़
(00:17:44)
जाता है। पोस्ट न्यूरोसर्जरी अगर कोई
(00:17:47)
न्यूरोसर्जरी हुई है तो उसके बाद क्या है?
(00:17:49)
जो माइक्रो ऑर्गेनज़्म है वह वहां पर ईज़ली
(00:17:51)
एंटर हो सकता है सर्जरी के बाद
(00:17:53)
न्यूरोसर्जरी के बाद या फिर ड्यूरिंग
(00:17:55)
सर्जरी भी कोई माइक्रो ऑर्गेनिज़्म
(00:17:57)
ट्रांसफर हो सकता है। देन उसके बाद कैंसर।
(00:18:00)
कैंसर भी डेबिलिटेटिंग बनाता है पर्सन को
(00:18:02)
जिसकी वजह से मेनिंजाइटिस हो सकता है या
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फिर हेड इंजरी। अगर हेड इंजरी हो सकती है
(00:18:06)
तो डायरेक्ट एंट्री माइक्रो ऑर्गेनिज्म कर
(00:18:09)
सकता है मेनिंजेस में। उसके बाद रिस्क
(00:18:11)
कौन-कौन रिस्क पर है? तो जो इनफेंट्स होते
(00:18:14)
हैं, यंग चिल्ड्रन और जो बूढ़े लोग होते
(00:18:16)
हैं, ओल्डर एडल्ट्स होते हैं, उनकी जो
(00:18:18)
इम्यूनिटी है वो अभी अंडर डेवलप्ड होती
(00:18:20)
है। जिसकी वजह से मेनिंजेस हो सकता है
(00:18:22)
उनको अगर कोई भी इंफेक्शन उनकी बॉडी में
(00:18:25)
एंटर हुआ है तो मेनिंजेस के रिस्क बढ़
(00:18:27)
जाते हैं। उसके बाद आता है वीक इम्यून
(00:18:30)
सिस्टम। अगेन यह भी इम्यूनिटी पर डिपेंड
(00:18:32)
करता है। अगर किसी का इम्यून सिस्टम वीक
(00:18:34)
है जैसे कि एचआईवी एड्स के पेशेंट है या
(00:18:37)
फिर इम्यूनो कॉम्प्रोमाइज कोई भी
(00:18:38)
इंडिविजुअल है, डायबिटीज है पेशेंट कैंसर
(00:18:41)
पेशेंट है तो उनमें क्या होता है कि
(00:18:43)
मेनिजाइटिस के रिस्क बढ़ जाते हैं
(00:18:45)
इम्यूनिटी कम होने के कारण। तो अगर उनका
(00:18:47)
कोई इयर इंफेक्शन हुआ है, साइनोसाइटिस है
(00:18:49)
या फिर कहीं और से भी ब्लड से ट्रैवल करके
(00:18:52)
इंफेक्शन ब्रेन में जा सकता है। उसके बाद
(00:18:55)
हॉस्टल्स में अगर कोई रहता है ओवरक्लाडेड
(00:18:57)
प्ले प्लेसेस में कोई रहता है तो डायरेक्ट
(00:19:00)
कांटेक्ट या फिर फीकोरल रूट या फिर
(00:19:03)
रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट्स के कारण जो भी
(00:19:05)
इनफेशियस माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स हैं चाहे
(00:19:07)
वो बैक्टीरियल है, वायरल है वो क्या कॉज
(00:19:09)
कर सकते हैं? मेनंजाइटिस कोज़ कर सकते हैं।
(00:19:12)
सो हॉस्टल्स और जो ओवरक्राउडेड प्लेसेस
(00:19:14)
हैं उनमें मेनिजोकोकल जो मेनिंजाइटिस है
(00:19:17)
वो ज्यादा देखने को मिलती है और यही सबसे
(00:19:18)
ज्यादा डेंजरस कोज़ है मेनिंजाइटिस का।
(00:19:22)
उसके बाद आता है अनवैक्सिननेटेड अगर
(00:19:24)
प्रॉपर वैक्सीनेशन नहीं ले रखी है जैसे कि
(00:19:26)
एचआईवी जो वैक्सीन है वो इनफेंट्स को दी
(00:19:29)
जाती है या फिर न्यूमोकोकल मेनिंजाइटिस
(00:19:30)
मेनिंजोकोकल मेनिंजाइटिस के लिए जो
(00:19:33)
वैक्सीनेशन अवेलेबल है अगर वो नहीं ली
(00:19:35)
जाती तो वो भी पर्संस रिस्क पर है। उसके
(00:19:37)
बाद एस्प्लनिया तो एस्प्लनिया क्या है? जो
(00:19:40)
स्प्लीन है हमारा स्प्लीन का काम क्या है?
(00:19:42)
बैक्टीरिया के अगेंस्ट फाइट करना। तो
(00:19:44)
बैक्टीरिया को बाहर निकालना बॉडी से
(00:19:46)
स्प्लीन का बहुत इंपॉर्टेंट रोल है इसमें।
(00:19:48)
तो अगर स्प्लीन किसी वजह से रिमूव की गई
(00:19:51)
है बॉडी से तो बैक्टीरियल इंफेक्शन होने
(00:19:54)
के चांसेस इंक्रीस हो जाते हैं।
(00:19:55)
बैक्टीरियल मेरिंजाइटिस होने के चांसेस
(00:19:57)
इंक्रीस हो जाते हैं। सिकल सेल डिसीज में
(00:19:59)
भी सेम होता है। जो सिकल से सिकल सेल
(00:20:02)
डिसीज में क्या होता है कि जो रेड ब्लड
(00:20:03)
सेल्स हैं वो सिकल शेप के हो जाते हैं। जब
(00:20:06)
वो सिकल शेप के होते हैं तो जो स्प्लीन की
(00:20:08)
जो आर्टरीज हैं उनमें ब्लॉकेज करते हैं।
(00:20:11)
जिसकी वजह से धीरे-धीरे स्प्लीन का जो
(00:20:13)
साइज है वो श्रिंक हो जाता है। जिसको
(00:20:14)
ऑटोस्प्लनेक्टमी बोलते हैं। जिसकी वजह से
(00:20:17)
स्प्लीन अपना प्रॉपर फंक्शन नहीं कर पाता।
(00:20:20)
उसके बाद अगर सीएसएफ लीक हो गया है कोई
(00:20:22)
ट्रॉमा की वजह से, न्यूरोसर्जरी की वजह से
(00:20:24)
तो वो तो डायरेक्ट एंट्री बन जाती है
(00:20:26)
माइक्रो ऑर्गेनिज्म की सीएसएफ में एंटर
(00:20:29)
होने पे। क्या-क्या साइन देखने को मिलते
(00:20:31)
हैं? अगर किसी पर्सन को मेनिंजाइटिस हो
(00:20:33)
जाता है। सो सबसे पहले क्लासिक तीन साइन
(00:20:35)
आते हैं मेनिंजाइटिस में जिसको क्लासिक
(00:20:37)
ट्रायर्ड बोलते हैं। फीवर हाई ग्रेड और
(00:20:40)
सडन ऑनसेट एकदम से फीवर आएगा पर्सन को और
(00:20:43)
उसका जो ऑनसेट होगा वो सडन होगा एकदम से
(00:20:46)
और हाई फीवर होगा जिसको हाई ग्रेड फीवर
(00:20:48)
कहते हैं। सीवियर एंड कॉन्सेंट हेडेक
(00:20:50)
हेडेक होगा उसको सीवियर होगा। एक तो
(00:20:52)
मेनिंजेस की इनफ्लामेशन के कारण जिसमें
(00:20:54)
नर्व्स हैं। मेनिंजेस में तो हेडेक हो रहा
(00:20:56)
है। इंट्राक्रेनियल प्रेशर इंक्रीस होने
(00:20:59)
की वजह से भी हेडेक होता है। उसके बाद आता
(00:21:01)
है न्यूकल रिजिडिटी। नेक की स्टिफनेस। तो
(00:21:04)
नेक फ्लेक्स नहीं होगी क्योंकि ये जो
(00:21:06)
मेनिजेस है इसने ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड
(00:21:08)
दोनों को कवर किया हुआ है। जिसकी वजह से
(00:21:10)
नेक स्टिफ रहेगी जिसको न्यूकल रिजिडिटी
(00:21:12)
बोलते हैं। इसके अलावा एडिशनल साइन क्या
(00:21:14)
आते हैं? फोटोफोबिया एंड फोनोफोबिया।
(00:21:16)
फोटोफोबिया मींस लाइट के लिए सेंसिटिविटी।
(00:21:19)
फोबिया मतलब डर लगना लाइट से। फोनोफोबिया
(00:21:22)
मतलब साउंड से सेंसिटिविटी। ये इसलिए होता
(00:21:24)
है क्योंकि मेनिजेस से बहुत सारी नर्व्स
(00:21:26)
क्रॉस हो रही हैं। क्रेनियल नर्व्स,
(00:21:28)
स्पाइनल नर्व्स। तो ऑप्टिक नर्व की
(00:21:30)
डिस्टरबेंस के कारण क्या होता है? लाइट
(00:21:32)
सेंसिटिविटी होती है। नर्व्स के
(00:21:34)
डिस्टरबेंस के कारण ये साइन आते हैं।
(00:21:36)
ऑल्टर्ड मेंटल स्टेटस अ जो उसका मेंटल
(00:21:39)
स्टेटस है वो उसमें चेंज देखने को मिलेगा।
(00:21:41)
क्योंकि एक तो इंट्राक्रेनियल प्रेशर
(00:21:44)
इंक्रीस हो रहा है। तो उसकी वजह से जो
(00:21:45)
इंपॉर्टेंट सेंटर्स हैं जो हमको अवेक रखते
(00:21:48)
हैं उसमें चेंजज़ आएगा। क्या चेंजेस आएगा?
(00:21:50)
कंफ्यूजन होगा पर्सन को लेथार्जी बहुत
(00:21:53)
थकावट फील होगी और इनफ्लामेशन के कारण
(00:21:56)
सीजर्स भी आ सकते हैं क्योंकि ब्रेन
(00:21:58)
टिश्यू इरिटेट हो जाते हैं। जब वो
(00:21:59)
ओवरएक्टिव होंगे, इरिटेट होंगे तो सीजर्स
(00:22:02)
आ सकते हैं। वोमिटिंग होगी इंक्रीस
(00:22:04)
इंट्राक्रेनियल प्रेशर के कारण वोमिटिंग
(00:22:06)
होती है। प्रोजेक्टाइल वोमिटिंग होती है
(00:22:08)
पर्सन को। स्किन रैश। स्किन रैश कब हो
(00:22:11)
सकता है? अगर मेनिजोकोकल मेनिंजाइटिस है
(00:22:14)
जो कि सबसे डेंजरस टाइप ऑफ मेनिंजाइटिस
(00:22:16)
है। मेनिंजोकोकल मेनंजाइटिस उसमें स्किन
(00:22:19)
रैश भी देखने को मिलते हैं लेट स्टेजेस
(00:22:21)
में। तो जिसको पेटकी एंड परप्यूरा बोलते
(00:22:23)
हैं और ये एक मेडिकल इमरजेंसी है। उसके
(00:22:27)
अलावा सेप्टिक शोक लेट स्टेजेस में क्या
(00:22:29)
होता है कि पूरे ब्लड में इंफेक्शन फैल
(00:22:32)
सकता है जिसको सेप्टिसीमिया बोलते हैं और
(00:22:34)
पर्सन कैन गो इंटू सेप्टिक शॉक जो कि लाइफ
(00:22:37)
थ्रेटनिंग है। उसके बाद स्पेशल साइन क्या
(00:22:39)
आते हैं? अगर हमें पता लगाना है कि पर्सन
(00:22:42)
को मेनिंजाइटिस है तो उसके लिए कुछ स्पेशल
(00:22:44)
साइन हैं। इसमें दो साइन है। एक है साइन
(00:22:47)
एंड एक है ब्रजिंस्की साइन। दोनों पॉजिटिव
(00:22:50)
आते हैं। अगर हम कॉर्निक साइन की बात करें
(00:22:53)
तो ये कर्निक साइन है। करनिक साइन में
(00:22:55)
क्या होता है? जब हम पर्सन की जो लेग है
(00:22:57)
उसको हिप से फ्लेक्स करवाते हैं और नी को
(00:23:00)
अगर हम एक्सटेंड करवाना चाहें इस साइड तो
(00:23:03)
वो नहीं कर पाएगा पर्सन। उसको बहुत ज्यादा
(00:23:05)
पेन होगी। ये इसीलिए हो रहा है क्योंकि जो
(00:23:08)
मेनिजेस है वो स्पाइनल कॉर्ड और ब्रेन
(00:23:10)
दोनों को कवर किए हुए हैं और उसमें
(00:23:11)
इंफेक्शन हो गया है, इनफ्लामेशन हो गई है
(00:23:13)
जिसकी वजह से उसको लेग एक्सटेंड करने में
(00:23:17)
बहुत पेन होगी। तो दैट इज़ कॉर्निक साइन।
(00:23:19)
उसके बाद आता है ब्रुजिंस्की साइन।
(00:23:21)
ब्रजिंस्की साइन में क्या होगा कि जब हम
(00:23:23)
पर्सन की जो नेक है उसको फ्लेक्स करते हैं
(00:23:25)
जिसको मेनिंजाइटिस है तो नेक फ्लेक्स करने
(00:23:28)
से उसको इतना पेन होगा कि ऑटोमेटिकली उसकी
(00:23:31)
जो लेग्स है वो इस तरह से फ्लेक्स हो
(00:23:34)
जाएंगी। उस पेन को कंपनसेेट करने के लिए
(00:23:36)
ताकि पेन कम हो। क्योंकि अगर हम नेक को
(00:23:39)
फ्लेक्स कर रहे हैं तो जो मेनिजेस हैं वो
(00:23:41)
स्ट्रेच हो रही हैं। तो क्योंकि वो ब्रेन
(00:23:43)
और स्पाइनल कॉर्ड पूरे में कवर है। तो
(00:23:45)
मेनिजेस स्ट्रेच होने के कारण ये पेन हो
(00:23:48)
रहा है। इसके कारण पर्सन क्या करता है?
(00:23:50)
अपनी लेग्स को भी एक्सटेंड कर लेता है
(00:23:52)
ताकि जो स्ट्रेचिंग है वो थोड़ी कम हो और
(00:23:53)
पेन कम हो। तो ये दोनों साइन हैं। ये
(00:23:56)
पॉजिटिव आते हैं मेनिंजाइटिस में। अब
(00:23:58)
इनफेंट्स में बच्चों में क्या-क्या साइन
(00:24:00)
देखने को मिलेंगे? क्योंकि बच्चों के जो
(00:24:01)
स्कल है वो सॉफ्ट है तो उसमें मेनजेस में
(00:24:04)
जब इनफ्लामेशन होती है स्वेलिंग के कारण
(00:24:07)
तो जो फोंटेनल्स हैं वो बल्ज हो जाते हैं।
(00:24:09)
बॉडी स्टिफ रहती है और लिम्स फ्लॉपी रहते
(00:24:12)
हैं। लेथार्जिक रहता है। बहुत थका हुआ
(00:24:14)
बहुत लेथार्जिक उसके लिम्स रहेंगे। हाई
(00:24:16)
पिच्ड्ड क्राई क्राई हाई पिच्ड्ड होगा।
(00:24:19)
उसके अलावा फीवर होगा और लेथार्जी और पुअर
(00:24:22)
फीडिंग। खाना नहीं खाएगा बच्चा अच्छे से।
(00:24:24)
पुअर फीडिंग होगी। अब डायग्नोस्टिक टेस्ट
(00:24:27)
क्या करते हैं? हिस्ट्री लेते हैं और
(00:24:29)
फिजिकल एग्जामिनेशन। फिजिकल एग्जामिनेशन
(00:24:31)
में साइंस देख सकते हैं। उसके अलावा फीवर
(00:24:33)
है पर्सन को ये देखेंगे। वोमिटिंग हो रही
(00:24:35)
है। ये सभी साइंस जो हमने पढ़े वो फिजिकल
(00:24:38)
एग्जामिनेशन में आएंगे। हिस्ट्री में हम
(00:24:39)
पेशेंट से ये पूछेंगे कि कभी उसने ट्रैवल
(00:24:42)
किया है? डोम्स में रहा है, कोई और
(00:24:44)
इंफेक्शन हुआ, इयर इंफेक्शन हुआ, साइनस का
(00:24:46)
इंफेक्शन हुआ तो वो सभी हिस्ट्री टेकिंग
(00:24:48)
लेंगे। कैंसर तो नहीं है, डायबिटीज
(00:24:50)
इम्यूनो सप्रेसेंट्स पर तो नहीं है, सब
(00:24:52)
कुछ पूछेंगे। उसमें हिस्ट्री में आ जाएगा।
(00:24:54)
नोज और थ्रोट स्वर्ब अगर हमें लगता है कि
(00:24:56)
कहीं और से इंफेक्शन के कारण वहां
(00:24:58)
इंफेक्शन बढ़ा है तो नोज या फिर थ्रोट
(00:25:01)
स्वर्ब ले सकते हैं। साइनसाइटिस में इयर
(00:25:02)
इंफेक्शन में इयर स्वर्ब ले सकते हैं।
(00:25:05)
उसके अलावा लंबर पंचर। लंब पंचर गोल्ड
(00:25:07)
स्टैंडर्ड है। लंबर पंचर हम इसलिए करते
(00:25:10)
हैं ताकि हम स्पाइन से सीएसएफ ले सकें।
(00:25:13)
सीएसएफ का सैंपल और पता लगा सकें कि कौन
(00:25:15)
सा माइक्रो ऑर्गेनिज्म है। अब लंबर पंचर
(00:25:18)
हम हर केस में नहीं करते। अगर इंक्रीस
(00:25:20)
इंट्राक्रेनियल प्रेशर है ऑब्स्ट्रक्टिव
(00:25:22)
के केस में स्पेशली ऑब्स्ट्रक्टिव का मतलब
(00:25:25)
है कि अगर वेंट्रिकल्स में कहीं
(00:25:26)
ऑब्स्ट्रक्शन है जिसके कारण सीएसएफ प्रॉपर
(00:25:29)
नहीं आ पा रहा आगे फ्लो नहीं हो पा रहा तो
(00:25:31)
इंट्राक्रेनियल प्रेशर ऑब्स्ट्रक्शन के
(00:25:33)
ऊपर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। तो उस केस
(00:25:36)
में हम लंबर पंचर नहीं करते। पर्सन का जो
(00:25:39)
प्रेशर है वो बिल्कुल चेंज हो जाएगा। अह
(00:25:41)
प्रेशर ग्रेडियंट चेंज हो जाता है जिसकी
(00:25:43)
वजह से हम यह नहीं करते ऑब्स्ट्रक्टिव शॉक
(00:25:45)
में। तो लंब पंचर करने से पहले हम सिटी
(00:25:47)
स्कैन या फिर एमआरआई करते हैं। तभी हम लंब
(00:25:50)
पंचर करते हैं। नॉन ऑब्स्ट्रक्टिव केसेस
(00:25:52)
में यूज़ली हम लंब पंचर करते हैं। तो
(00:25:54)
बैक्टीरियल मेनंजाइटिस अगर होगा तो हमें
(00:25:57)
सीएसएफ में क्या मिलेगा? सीएसएफ सैंपल
(00:25:59)
में? सीएसएफ सैंपल में हमें डब्ल्यूबीसीस
(00:26:02)
का अमाउंट इंक्रीस मिलेगा। लेकिन कौन से
(00:26:03)
डब्ल्यूबीसी? न्यूट्रोफिल्स बैक्टीरियल
(00:26:05)
में। ग्लूकोस का अमाउंट कम मिलेगा क्योंकि
(00:26:07)
बैक्टीरिया ग्लूकोस पर ही सर्वाइव करते
(00:26:09)
हैं। ग्लूकोस को खाते हैं न्यूट्रिशन की
(00:26:12)
तरह और ग्लूकोस कम हो जाता है। दूसरा
(00:26:14)
प्रोटीन का जो अमाउंट है वह बहुत इंक्रीस
(00:26:16)
मिलेगा क्योंकि बैक्टीरियल मेनंजाइटिस
(00:26:18)
बहुत ज्यादा डैमेज को करता है। उसके बाद
(00:26:21)
सीएसएफ ओपनिंग प्रेशर इंक्रीस होगा।
(00:26:23)
सीएसएफ का जो प्रेशर है वो इंक्रीस होगा
(00:26:24)
बैक्टीरियल मेनजाइटिस में और सीएसएफ की
(00:26:27)
अपीयरेंस कैसी होगी? क्लाउडडी। अगर वायरल
(00:26:29)
मेनंजाइटिस है तो डब्ल्यूबीसीस का अमाउंट
(00:26:31)
इसमें भी इंक्रीस होगा लेकिन लिंफोसाइट्स
(00:26:33)
का अमाउंट इंक्रीस होगा। ग्लूकोस नॉर्मल
(00:26:35)
रहेगा और स्लाइटली एलिवेटेड प्रोटीन
(00:26:38)
रहेंगे। ज्यादा एलिवेट नहीं होगा। ब्लड
(00:26:40)
कल्चर। ब्लड कल्चर हम करते हैं
(00:26:43)
एंटीबायोटिक्स को स्टार्ट करने से पहले कि
(00:26:46)
कौन सा माइक्रो ऑर्गेनिज्म है जिसके
(00:26:48)
अगेंस्ट एंटीबायोटिक वर्क करेगी। होता
(00:26:50)
सिटी स्कैन और एमआरआई। सिटी स्कैन और
(00:26:52)
एमआरआई हम इंक्रीज इंट्राक्रेनियल प्रेशर
(00:26:54)
को फाइंड आउट करने के लिए करते हैं।
(00:26:56)
इंक्रीज इंट्राक्रेनियल प्रेशर किस वजह से
(00:26:59)
हुआ है उसको फाइंड आउट करने के लिए हम
(00:27:00)
सिटी स्कैन या फिर एमआरआई करते हैं। या
(00:27:02)
फिर अगर कहीं एब्सेस तो नहीं है
(00:27:04)
ड्यूरामेटर के ऊपर एपिड्यूरल एमपाइमा या
(00:27:07)
फिर सबड्यूरल एब्सेस तो नहीं हो गया
(00:27:09)
ड्यूरामेटर के नीचे तो वो सभी के लिए हम
(00:27:11)
सिटी स्कैन और एमआरआई करते हैं। और मैंने
(00:27:14)
आपको बताया था कि लंब पंचर से पहले हमेशा
(00:27:16)
सिटी स्कैन और एमआरआई करते हैं। क्योंकि
(00:27:18)
हर किसी केस में लंबर पंचर हम नहीं कर
(00:27:20)
सकते। स्पेशली ऑब्स्ट्रक्टिव है सीएसएफ का
(00:27:23)
फ्लो तो उस केस में तो हम बिल्कुल भी नहीं
(00:27:25)
करते। चेस्ट एक्सरे अगर हमको लग रहा है कि
(00:27:27)
ट्यूबरक्लोसिस है पेशेंट को तो चेस्ट
(00:27:29)
एक्सरे करेंगे। स्टूल सैंपल करेंगे और
(00:27:31)
हमको लग रहा है कि वायरल कोज़ है जैसे कि
(00:27:32)
एंटीरो वायरस है उस केस में हम स्टूल
(00:27:35)
सैंपल करते हैं। इसको हम प्रिवेंट कर सकते
(00:27:37)
हैं वैक्सीनेशन के थ्रू। हीमोफाइलस
(00:27:39)
इन्फ्लुएंजा के लिए कौन सी है? एचआईवी
(00:27:41)
हीमोफाइलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी वैक्सीन
(00:27:44)
अवेलेबल है। न्यूमोकोकल वैक्सीन अवेलेबल
(00:27:46)
है इनफेंट्स और एल्डर्ली के लिए जो कि
(00:27:48)
स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया के अगेंस्ट
(00:27:50)
प्रिवेंट करता है। मेनिंजोकोकल वैक्सीन जो
(00:27:52)
भी कॉलेज स्टूडेंट्स हैं या फिर जो भी
(00:27:54)
ट्रेवलर हैं क्राउडेड प्लेस में रहने वाले
(00:27:57)
हैं उनके लिए हम मेनिंजोकोकल वैक्सीन देते
(00:27:59)
हैं जो कि नाइजीरिया मेनिंजाइटिस के
(00:28:01)
अगेंस्ट प्रोटेक्ट करता है। देन आता है
(00:28:03)
एमएमआर वैक्सीन जो कि मीज़ल वर्म्स रुबेला
(00:28:05)
के अगेंस्ट प्रोटेक्ट करता है। तो अगर
(00:28:08)
उससे रिलेटेड मेनंजाइटिस है तो उससे
(00:28:10)
प्रोटेक्ट करेगा। ट्रीटमेंट क्या हम
(00:28:11)
देंगे? ट्रीटमेंट क्या देंगे? तो जैसे ही
(00:28:13)
हमारे पास पेशेंट आया हमको लग रहा है कि
(00:28:15)
बैक्टीरियल मेनंजाइटिस का पेशेंट है तो
(00:28:18)
उसको सबसे पहले तो आइसोलेट करना है।
(00:28:20)
ड्रॉपलेट आइसोलेशन। क्योंकि जो भी
(00:28:21)
बैक्टीरिया के जो मोस्टली केसेस हैं वो
(00:28:23)
क्या है? ड्रॉपलेट इंफेक्शन के कारण
(00:28:25)
स्प्रेड हो रहे हैं। ड्रॉपलेट रूट के
(00:28:27)
थ्रू। सो एयर ड्रॉपलेट से रेस्पिरेटरी रूट
(00:28:30)
से स्प्रेड हो रहे हैं। तो हमको पेशेंट को
(00:28:32)
आइसोलेट करना है। एंड जब तक जैसे हमने
(00:28:34)
एंटीबायोटिक स्टार्ट कर दी तो उसके भी 24
(00:28:36)
आवर्स तक हमको हम हमको उसको आइसोलेट ही
(00:28:39)
करके रखना है। उसके बाद एडमिनिस्टर एररिक
(00:28:42)
आईवी एंटीबायोटिक्स एज सून एस पॉसिबल। तो
(00:28:44)
हमने ब्लड कल्चरर्स का वेट नहीं करना।
(00:28:46)
आईवी एंटीबायोटिक्स स्टार्ट कर देनी है एज
(00:28:48)
सून एस पॉसिबल। नियोनेट्स में एपिसिलिन
(00:28:50)
प्लस जेंटामाइसिन या फिर सफोटाज़ाइम
(00:28:52)
स्टार्ट करते हैं। चिल्ड्रन और एडल्ट में
(00:28:55)
सेफ्ट्राइग्जोन या फिर सेफोटाज़ाइम जो कि
(00:28:58)
थर्ड जनरेशन सेफेलोस्पोरिन है प्लस
(00:29:00)
वेंकोमाइसिन स्टार्ट करते हैं। एल्डर्ली
(00:29:02)
और इम्यूनो कॉम्प्रोमाइज इंडिविजुअल में
(00:29:04)
हम साथ में एमिसिलिन ऐड करते हैं जो कि
(00:29:07)
लिसेरिया को कवर करता है। तो इसके लिए
(00:29:10)
एमिसिलिन ही काम करेगा। बाकी ये जो थर्ड
(00:29:12)
जनरेशन एंटीबायोटिक्स है ये इसको किल नहीं
(00:29:15)
करती। देन कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स और
(00:29:17)
डेक्सामेथाजोन। तो स्टेरॉइड हम क्यों देते
(00:29:20)
हैं? सेरीब्रल एडीमा को रिड्यूस करने के
(00:29:22)
लिए। उसके बाद एसाइक्लोवीर। अगर हर्पीस
(00:29:24)
सिंप्लेक्स वायरस है तो एसाइक्लोव हम देते
(00:29:27)
हैं। एंटी ट्यूबरक्लोसिस ड्रग देंगे। अगर
(00:29:29)
अगर टीबी फाइंड आउट हुआ है एंटीफंगल ड्रग
(00:29:31)
देंगे। अगर फंगल मेनिंजाइटिस है तो इसमें
(00:29:33)
एंफोटेरसिन बी या फिर फ्लोसाइटोसिन हम
(00:29:36)
देते हैं। सपोर्टिव केयर में फीवर के लिए
(00:29:38)
एंटीबायोटिक्स देंगे। नेक्स्ट इज़ ऑक्सीजन
(00:29:40)
एंड आईसीयू केयर इफ नीडेड। ऑक्सीजन हम
(00:29:43)
इसलिए दे रहे हैं क्योंकि जब भी
(00:29:44)
इंट्राक्रेनियल प्रेशर इंक्रीस होता है तो
(00:29:47)
तीन जो साइन हैं उसके वो कुशिंग ट्रायर्ड
(00:29:49)
उसको बोलते हैं। हाई ब्लड प्रेशर ये बॉडी
(00:29:52)
का कंपनसेट करने का मैकेनिज्म है ताकि
(00:29:54)
ब्रेन को प्रॉपर ब्लड सप्लाई मिले। उसका
(00:29:56)
जो उल्टा है रिफ्लेक्स आता है स्लो हार्ट
(00:29:59)
रेट। सेकंड और थर्ड क्या होता है? अगर हम
(00:30:01)
ब्लड प्रेशर हाई की बात करें तो उसमें
(00:30:03)
सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर हाई होता है। सेकंड
(00:30:05)
स्लो हार्ट रेट। थर्ड इसमें क्या आता है
(00:30:07)
रेस्पिरेटरी प्रॉब्लम्स आती हैं,
(00:30:08)
ब्रीदीिंग प्रॉब्लम आती है जिसको चैन
(00:30:10)
स्ट्रोक्स बोलते हैं। तो वो वो क्यों होता
(00:30:12)
है? जब इंट्राक्रेनियल प्रेशर इंक्रीस
(00:30:14)
होता है तो ब्रेन स्टेम अफेक्ट होती है और
(00:30:16)
वहां पर क्या है? मेडुला में रेस्पिरेटरी
(00:30:18)
सेंटर है जो कि अफेक्ट होता है। तो
(00:30:20)
ऑक्सीजन और आईसीयू केयर उस टाइम पर देनी
(00:30:23)
होती है। सीजर प्रिकॉशन भी देंगे। सीजर
(00:30:25)
प्रिकॉशन मतलब कि पर्सन को कोई इंजरी ना
(00:30:27)
हो जाए। जैसे कि उसका जो बेड का जो हाइट
(00:30:30)
है वो लो रखेंगे। साथ में डायज अप पाम
(00:30:32)
रेडी रखेंगे इन केस और पेशेंट को हमेशा
(00:30:34)
मॉनिटर करते रहेंगे। फ्लूइड मैनेजमेंट
(00:30:36)
करेंगे तो इसमें आईवी फ्लूइड्स भी देने
(00:30:39)
पड़ते हैं समटाइ्स और समटाइ्स हमको क्या
(00:30:41)
करना पड़ता है? डायरेटिक्स भी देने पड़ते
(00:30:42)
हैं इंट्राक्रेनियल प्रेशर को कम करने के
(00:30:44)
लिए। तो इसमें हम इंटेक आउटपुट जरूर
(00:30:47)
देखेंगे। ओवरहाइड्रेशन भी नहीं करेंगे
(00:30:49)
पेशेंट का डिहाइड्रेट भी नहीं होना पेशेंट
(00:30:51)
को। उसके बाद नर्सिंग इंटरवेंशन क्या आती
(00:30:54)
है? न्यूरो ऑर्ब्स चेक करने हैं एव्री टू
(00:30:56)
वन टू टू आवरली। मॉनिटर फॉर
(00:30:58)
इंट्राक्रेनियल प्रेशर को मॉनिटर करेंगे।
(00:31:00)
जैसे कि हेडेक जो उसका क्लासिक साइन है,
(00:31:03)
वोमिटिंग जो उसके क्लासिक साइन है, लॉस ऑफ़
(00:31:05)
कॉन्शियसनेस तो नहीं हो रही है। कुशिंग
(00:31:08)
ट्रायर्ड जो कि मैंने अभी आपको बताया
(00:31:10)
इंट्राक्रेनियल प्रेशर इंक्रीस होने में
(00:31:11)
ही होता है। हाई बीपी, लो हार्ट रेट एंड
(00:31:14)
चेन स्ट्रोक्स जो कि रेस्पिरेटरी पैटर्न
(00:31:16)
जो है वो ऑल्टर हो जाता है। एलिवेट हेड ऑफ
(00:31:19)
द बेड टू 30° हेड ऑफ द बेड को एलिवेट करके
(00:31:22)
रखेंगे ताकि इजी ड्रेनेज हो और नेक की जो
(00:31:25)
फ्लेक्शन है वो अवॉइड करेंगे। क्योंकि
(00:31:27)
मेनिंजाइटिस में क्या होता है? नेक
(00:31:29)
फ्लेक्स नहीं होती। स्टिफ नेक होती है,
(00:31:30)
पेन होता है पेशेंट को नेक फ्लेक्स करने
(00:31:33)
पे। तो जो हेड है वो मिड लाइन रहेगा और
(00:31:35)
फ्लेक्स नहीं रहेगा। डार्क एंड क्वाइट रूम
(00:31:39)
क्योंकि फोटोफोबिया हो रहा है, फोनोफोबिया
(00:31:41)
हो रहा है। तो हमने पेशेंट को और इरिटेट
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नहीं करना। काम करके रखना है। सीजर
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प्रिकॉशंस हम लेंगे। उसके बाद नोटिफाई
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इमीडिएटली इफ परप्यूरा और पेटकी अपीयर्स।
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प्यूरा और पेटकी हमने देखा कि मेनिंजोकोकल
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मेनिंजाइटिस में ये साइन आते हैं। और
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मेनिंजोकोकल मेनिंजाइटिस लाइफ थ्रेटिंग हो
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सकता है। इसमें क्या होता है डीआईसी
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डिसएमिनेटेड इंट्रावस्कुलर कोगुलेशन हो
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सकता है। मतलब इंफेक्शन जब पूरी बॉडी में
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फैल जाता है, सीवियर होता है जो कि
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मेनिंजोकोकल मेनिंजाइटिस में होता है तो
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पूरी बॉडी में क्लोट्स भी बनते हैं। साथ
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में ही ब्लीडिंग का रिस्क बहुत इंक्रीस हो
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जाता है। क्योंकि सारे क्लोटिंग फैक्टर
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क्लोट्स बनने में कंज्यूम हो जाते हैं। तो
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नए क्लॉट नहीं बन पाते और ब्लीडिंग का
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रिस्क इंक्रीस हो जाता है। जो कि क्या है?
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एक तो लाइफ थ्रेटनिंग है और हमको इसको
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मेडिकलली इमरजेंसी है। यह एकदम से ट्रीट
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इस पेशेंट को करना होता है। सो आई होप
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आपको मेनंजाइटिस क्लियर हुआ। इफ यू
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अंडरस्टुड दिस वीडियो देन प्लीज लाइक,
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सब्सक्राइब एंड शेयर टू माय चैनल। थैंक यू
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फॉर वॉचिंग।
