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Meningitis | Causes | Pathophysiology | Risk Factor | Symptoms | Diagnose | Treatment (YouTube Video Transcript)

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Title: Meningitis | Causes | Pathophysiology | Risk Factor | Symptoms | Diagnose | Treatment
Duration: 00:32:34
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(00:00:00) Your YouTube transcript will appear here (00:00:00) हेलो फ्रेंड्स, वेलकम टू रजनीत मेडिकल (00:00:02) एजुकेशन। इस लेक्चर में हम डिस्कस करेंगे (00:00:04) मेनिजाइटिस। सो लेट्स स्टार्ट द वीडियो। (00:00:07) मेनिंजाइटिस। मेनिंजाइटिस क्या होता है? (00:00:09) नेम से ही क्लियर है। मेनिंजाइटिस। इसमें (00:00:12) मेनिंजाइटिस का क्या मतलब है? मेनिजेस। तो (00:00:16) मेनिंजेस में इनफ्लामेशन होना। आईटीआईएस (00:00:19) क्या इंडिकेट कर रहा है? इनफ्लामेशन। तो (00:00:21) जब मेनिंजेस में इनफ्लामेशन हो जाती है जो (00:00:24) कि कॉमनली इनफेक्शन के कारण होती है तो उस (00:00:27) टर्म को हम क्या बोलते हैं? मेनिंजाइटिस। (00:00:29) समटाइ्स हम इसको स्पाइनल मेनिंजाइटिस भी (00:00:32) कहते हैं। तो मेनिंजाइटिस और स्पाइनल (00:00:34) मेनिंजाइटिस दोनों एक ही कंडीशन है। नाउ (00:00:37) सबसे पहले हम क्या पढ़ेंगे कि मेनिंजेस (00:00:39) क्या होता है? जिसकी इनफ्लामेशन हो रही (00:00:41) है। तो मेनिंजेस क्या होता है? मेनिंजेस (00:00:43) हमारे ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड के ऊपर (00:00:47) प्रोटेक्टिव कवरिंग या फिर प्रोटेक्टिव (00:00:49) लेयर होती है जिसको मेनिंजेस कहते हैं। तो (00:00:51) ये स्कल है। स्कल बोन। स्कल बोन के अंदर (00:00:55) क्या है? ब्रेन है तो ब्रेन को इसने कवर (00:00:57) किया हुआ है मेनंजेस ने और स्पाइनल कॉर्ड (00:01:00) को। तो ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड की यह (00:01:02) प्रोटेक्टिव कवरिंग है। प्रोटेक्टिव (00:01:04) कवरिंग इसलिए है क्योंकि ये ब्रेन और (00:01:06) स्पाइनल कॉर्ड को इंजरी से बचाती हैं। (00:01:08) ट्रोमा से बचाती हैं। प्लस साथ में ही ये (00:01:10) न्यूट्रिएंट्स भी प्रोवाइड करते हैं ब्रेन (00:01:12) एंड स्पाइनल कॉर्ड को। कैसे? अब देखो ये (00:01:14) इसी को बड़ा करके दिखाया हुआ है मेनिंजेस (00:01:16) को। तो सबसे पहले ये स्कल बोन है। उसके (00:01:19) नीचे ये तीन लेयर्स होती हैं मेनिंजेस की। (00:01:21) सबसे ऊपर ये जो आउटर वाली है अगर हम स्कल (00:01:24) से अंदर जाएं स्कल से ब्रेन की तरफ तो (00:01:26) आउटर वाली क्या है? ड्यूरामेटर और उसके (00:01:29) बीच वाली क्या है? मतलब ड्यूरामेटर के जो (00:01:31) नीचे आती है वो है एरेकेनॉइड मैटर। और (00:01:33) सबसे इनर वाली जो कि ब्रेन के बिल्कुल ऊपर (00:01:36) प्रेजेंट है। ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड के (00:01:38) ऊपर वो क्या है? पायामेटर। तो ये डीएपी डप (00:01:41) ड्यूरामेटर, एरेकेनॉइड मैटर एंड पायाटर। (00:01:44) और अगर हम ब्रेन से स्कल की तरफ चलें तो (00:01:46) ये क्या बन जाता है? पैड पायामीटर, (00:01:47) एरेकेनॉइड मैटर एंड ड्यूरामेट। तो ये तीन (00:01:50) प्रोटेक्टिव लेयर्स होती हैं। अब जो (00:01:52) ड्यूरामेटर है ये सबसे आउटर ये हार्ड लेयर (00:01:55) होती है। एरेकेनॉइड मैटर ये मिडिल वाली (00:01:58) लेयर होती है और पायामेटर सबसे इनर ये (00:02:00) डेलिकेट लेयर होती है। नाउ एरेकनॉइड मैटर (00:02:03) के जो नीचे स्पेस आता है ये जो स्पेस है (00:02:06) इस स्पेस को हम क्या बोलते हैं? सब (00:02:08) एरेकनॉइड स्पेस। एरेकेकनॉइड के नीचे है (00:02:11) इसलिए सब। सब सब का मतलब नीचे। तो (00:02:13) एरेकेनॉइड मैटर के जो नीचे स्पेस है उसको (00:02:15) सब एरेकेनॉइड स्पेस कहते हैं। जहां पर (00:02:18) सेरीब्रोस्पाइनल फ्लूइड फ्लो करता है। तो (00:02:21) सीएसएफ हमारे ब्रेन के वेंट्रिकल्स में (00:02:23) क्रॉइड प्लेक्सेस में प्रोड्यूस होता है। (00:02:25) ये जो फ्लूइड है ये ब्लड से ही फिल्टर (00:02:27) होकर बनता है। तो अल्ट्राफिल्ट्रेशन होता (00:02:29) है ये प्लाज्मा का सेरीब्रोस्पाइनल फ्लूइड (00:02:32) ब्रेन के वेंट्रिकल से निकलकर ये जो (00:02:34) सबरेकनॉइड स्पेस है जो कि ब्रेन और (00:02:36) स्पाइनल कॉर्ड के अराउंड प्रेजेंट है (00:02:39) उसमें फ्लो करता है। तो ये सीएसएफ क्या (00:02:41) प्रोवाइड करता है? यह फर्दर प्रोटेक्शन (00:02:43) कुशनिंग प्रोवाइड करता है हमारे ब्रेन और (00:02:45) स्पाइनल कॉर्ड को। साथ में ही यह (00:02:46) न्यूट्रिएंट्स एंड ऑक्सीजन भी प्रोवाइड (00:02:48) करता है हमारे ब्रेन एंड स्पाइनल कॉर्ड (00:02:50) को। मेनिंजेस में भी नर्व्स और ब्लड (00:02:52) वेसल्स प्रेजेंट होती हैं जो कि हमारे (00:02:54) ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड को ऑक्सीजन एंड (00:02:56) न्यूट्रिएंट्स प्रोवाइड करती हैं। नाउ ये (00:02:58) जो एरिकनॉइड मैटर और पाया मैटर है ये (00:03:01) मिडिल और इनर लेयर है ये थोड़ी डेलिकेट (00:03:04) होती है। इनको हम लेप्टोमेनिंजेस बोलते (00:03:06) हैं। लेप्टोमेनिंजेस (00:03:11) और यह जो आउटर लेयर है ड्यूरामेटर यह (00:03:13) थोड़ी टफ लेयर होती है। इसको हम (00:03:15) पैकीनिंजेस बोलते हैं। (00:03:21) जब हम टिपिकल मेनिंजाइटिस की बात करते हैं (00:03:23) जिसमें मेनिजेस में इनफ्लामेशन हो जाती है (00:03:26) मोस्ट कॉमनली इनफेक्शन के कारण तो उसमें (00:03:28) टिपिकल मेनिंजेस में क्या इनवॉल्व होता है (00:03:31) लेप्टोमेनिंजेस मतलब एरेकेनॉइड मैटर एंड (00:03:33) पायाटर और एरेकेनॉइड मैटर और पायामेटर के (00:03:36) बीच में क्या फ्लो कर रहा है सब एरेकेनॉइड (00:03:39) स्पेस में सीएसएफ फ्लो कर रहा है तो (00:03:40) सीएसएफ भी इनफेक्टेड हो जाता है इसमें सब (00:03:43) एरेकेनॉइड स्पेस में जो सीएसएफ प्रेजेंट (00:03:45) होता है तो टिपिकल अगर हम मेनिंजाइटिस की (00:03:48) बात करें तो उसमें एरेकेनॉइड मैटर, (00:03:50) पायामीटर और सब एयरकनॉइड स्पेस जिसमें (00:03:52) सीएसएफ फ्लो कर रहा है वो अफेक्ट होते (00:03:55) हैं। और अगर हम बात करें जब ड्यूरामेटर (00:03:58) अफेक्ट होती है तो वो कौन सी मेनंजेस है? (00:04:01) पैकीजाइटिस। क्योंकि ड्यूरामेटर क्या है? (00:04:03) टफ लेयर है। यूजली किस कारण से होती है? (00:04:06) रेयर होता है। लेकिन यह तभी होता है सपोज़ (00:04:08) अगर यहां से स्कल से इंजरी हुई है तो (00:04:10) डायरेक्टली ड्यूरा मैटर उसके नीचे आती है (00:04:13) स्कल के नीचे तो वो तब अफेक्ट होती है (00:04:15) ड्यूरामेटर या फिर अगर सिफलिस है, (00:04:17) ट्यूबरक्लोसिस है, साइनस इंफेक्शन या फिर (00:04:20) इयर इंफेक्शन में ड्यूरामेटर अफेक्ट हो (00:04:22) सकती है। अदरवाइज़ नॉर्मली जो मेनिंजाइटिस (00:04:25) होता है उसमें ब्लड से इंफेक्शन क्रॉस (00:04:27) होकर पायामीटर और एरेकेनॉइड मैटर और (00:04:29) सबरेकनॉइड स्पेस जहां पर सीएसएफ फ्लो कर (00:04:32) रहा है उसको अफेक्ट करती है। सो, ये हो (00:04:34) गया मेनिजेस। अब मेनिजेस में इनफ्लामेशन (00:04:37) को हम क्या बोलते हैं? मेनिंजाइटिस। सो, (00:04:39) मेनिंजाइटिस इज़ द इनफ्लामेशन ऑफ़ मेनिजेस (00:04:42) यूजली कॉज्ड बाय इनफेक्शन। इनफेक्शन के (00:04:44) कारण ये होता है। मेनिंजेस हमने पढ़ लिया। (00:04:46) तो, अगर हम इंफेक्शन की भी बात करें, तो (00:04:49) इंफेक्शन में यूज़ली ये बैक्टीरियल (00:04:51) इंफेक्शन के कारण ये ज्यादा सीरियस होता (00:04:53) है। वैसे कॉमन क्या है? वायरल इंफेक्शन। (00:04:56) वायरल इंफेक्शन के कारण मेनिंजाइटिस हो (00:04:58) जाना। लेकिन अगर बैक्टीरियल इंफेक्शन हो (00:05:00) जाता है तो वो सीरियस होता है। उसके लिए (00:05:03) हमको ब्रॉड स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक्स देने (00:05:05) पड़ते हैं। विग्रस कोर्स और ये लाइफ (00:05:07) थ्रेटनिंग भी हो सकता है। बैक्टीरियल (00:05:08) मेनिंजाइटिस। नाउ मेनिंजेस क्या है? (00:05:10) प्रोटेक्टिव मेंब्रेनस है जो कि ब्रेन और (00:05:12) स्पाइनल कॉर्ड को कवर करती है। तीन इसमें (00:05:14) आते हैं ड्यूरा मैटर, एरेकेनॉइड मैटर एंड (00:05:16) पाया मैटर। और एरेकेनॉइड और पाया मैटर के (00:05:19) बीच में सबकेॉइड स्पेस जहां पर सीएसएफ (00:05:21) फ्लो करता है। मेनिजेस के फंक्शन क्या है? (00:05:23) ये प्रोटेक्शन प्रोवाइड करता है ब्रेन और (00:05:25) स्पाइनल कॉर्ड को इंजरी से। सेकंड इसमें (00:05:28) नर्व्स होती हैं, ब्लड वेसल्स होता है और (00:05:30) सेरीब्रोस्पाइनल फ्लूइड होता है। (00:05:31) सेरीब्रोस्पाइनल फ्लूइड फर्दर प्रोटेक्शन (00:05:33) प्रोवाइड करता है। प्लस सेरीब्रोस्पाइनल (00:05:35) फ्लूइड क्या है? न्यूट्रिएंट्स भी सप्लाई (00:05:37) करता है ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड को। सो ये (00:05:39) ब्लड सप्लाई और सीएसएफ के कारण (00:05:42) न्यूट्रिएंट्स एंड ऑक्सीजन भी देता है (00:05:43) ब्रेन एंड स्पाइनल कॉर्ड को। तो ये (00:05:45) मेनिजेस का इंपॉर्टेंट फंक्शन है। नाउ (00:05:47) एसेप्टिक मेनिंजेस क्या है? सेप्सिस तो (00:05:50) हमें पता है। सेप्टिक का मतलब है (00:05:51) इंफेक्शन। तो यहां पर सेप्टिक मेनिंजाइटिस (00:05:54) वो होगी जिसमें बैक्टीरिया के कारण (00:05:56) इंफेक्शन हुआ और बैक्टीरिया के कारण (00:05:58) मेनिंजाइटिस हुआ। अगर बैक्टीरिया कॉज नहीं (00:06:01) है मेनिंजाइटिस का तो उसको हम क्या बोलते (00:06:04) हैं? एसेप्टिक मेनिंजाइटिस। तो एसेप्टिक (00:06:06) मेनिंजाइटिस में जब हम ब्लड कल्चर करते (00:06:08) हैं पेशेंट को सिम्टम्स तो हैं। पेशेंट को (00:06:11) सिम्टम्स हैं मेनिंजाइटिस के लेकिन जब हम (00:06:13) सीएसएफ का कल्चर करते हैं तो सीएसएफ कल्चर (00:06:16) क्या आता है? नेगेटिव आता है बैक्टीरिया (00:06:18) के लिए। तो इट मींस बैक्टीरिया कॉज नहीं (00:06:20) है मेनंजाइटिस का तो क्या कॉज हो सकता है? (00:06:22) वायरस हो सकता है। इट कैन बी कॉज बाय (00:06:24) वायरस। नॉन इनफेशियस कोर्स भी हो सकता है। (00:06:27) मतलब इंफेक्शन तो हो गया कि बैक्टीरिया हो (00:06:30) गया या वायरस हो गया। अगर बैक्टीरिया है (00:06:31) तो वो सेप्टिक मेनजाइटिस कहलाता है। (00:06:33) एसेप्टिक मेनंजाइटिस कॉमनली तब कहलाता है (00:06:36) जब इंफेक्शन कोज है लेकिन बैक्टीरिया नहीं (00:06:39) है वायरस है। या फिर नॉन इनफेक्शन कोज है। (00:06:41) जैसे कि कैंसर के कारण मेनिंजाइटिस हुआ। (00:06:44) ल्यूपस जो कि एक ऑटोइ्यून कंडीशन है उसके (00:06:47) कारण मेनिंजेस को ही अटैक करने लग गया (00:06:49) इम्यूनिटी तो उस कारण से भी मेनिंजाइटिस (00:06:52) हो सकता है एसेप्टिक या फिर कुछ मेडिकेशंस (00:06:54) जैसे कि नॉन स्टेरॉइडल एंटी इनफ्लामेटरी (00:06:57) ड्रग्स, एंटीबायोटिक्स, आईवी (00:06:58) इम्यूनोग्लोबुलिंस इनके कारण भी (00:07:00) मेनिंजाइटिस होता है या फिर अदर इनफेक्शन (00:07:03) जैसे कि ट्यूबरक्लोसिस या फिर फंगल। अगर (00:07:06) बैक्टीरिया नहीं है मेनिंजाइटिस का कोज़ तो (00:07:08) वो क्या होगा? एसेप्टिक मेनिंजाइटिस। तो (00:07:11) हमने मेनिंजेस भी पढ़ लिया। मेनिजाइटिस देख (00:07:13) लिया क्या होता है? पैथोफिजियोलॉजी देखते (00:07:14) हैं कि ये जो इंफेक्शन है ये मेनिंजेस में (00:07:17) कैसे होता है। किस तरह से ये स्प्रेड होता (00:07:19) है। तो पैथोज्स जो भी माइक्रो ऑर्गेनिज्म (00:07:22) है चाहे वो वायरस है, बैक्टीरिया है वो (00:07:24) कैसे एंटर करता है? सबसे पहले ब्लड (00:07:26) स्ट्रीम के थ्रू एंटर करता है। तो सपोज़ (00:07:30) इंफेक्शन कहीं और हुआ है हमारी बॉडी में (00:07:32) कहीं भी हुआ है और ब्लड के थ्रू वो ब्रेन (00:07:34) तक चला गया है। तो ब्लड के थ्रू वो (00:07:37) सेंट्रल नर्वस सिस्टम में चला गया। ब्रेन (00:07:38) या फिर स्पाइनल कॉर्ड में। ब्रेन में ब्लड (00:07:41) ब्रेन बैरियर को क्रॉस किया और ब्रेन के (00:07:43) अंदर एंटर हो गया। मेनिजेस में एंटर हो (00:07:45) गया। तो ब्लड स्ट्रीम के थ्रू यह सबसे (00:07:47) कॉमन रूट है इंफेक्शन का एंट्री का। तो (00:07:50) फ्रॉम इंफेक्शन एल्सवेयर तो ब्लड स्ट्रीम (00:07:53) में एंटर हुआ लेकिन इंफेक्शन कहीं ओर था। (00:07:56) तो वो सीएसएफ में सेरीब्रोस्पाइनल फ्लूइड (00:07:58) में एंटर हुआ या फिर मेनिजिस में एंटर हुआ (00:08:01) और मेनिजाइटिस कॉज किया। या फिर डायरेक्ट (00:08:03) स्प्रेड जैसे कि अगर इयर में इंफेक्शन है, (00:08:06) साइनसेस में इंफेक्शन है जो कि नेज़ल (00:08:08) साइनसेस होते हैं अगर उनमें इंफेक्शन है (00:08:10) तो ये सभी आसपास है ब्रेन के। तो (00:08:13) डायरेक्टली मेनिजेस में इंफेक्शन कॉज हो (00:08:15) सकता है। या फिर स्कल में फ्रैक्चर हो गया (00:08:18) तो स्कल में फ्रैक्चर हुआ तो बैक्टीरिया (00:08:20) या फिर वायरस जो है ईज़ली एंटर कर सकता है (00:08:22) मेनिंजेस में। या फिर सर्जरी समटाइ्स (00:08:25) पोस्ट सर्जरी। अगर ब्रेन की कोई सर्जरी (00:08:27) हुई है तो उसके बाद भी बैक्टीरिया को एक (00:08:29) रूट मिल जाता है ईली एंट्री होने का या (00:08:32) फिर सर्जरी के बाद भी इंफेक्शन हो सकता है (00:08:34) मेनिंजेस में। तो पैथोज्स ब्लड ब्रेन (00:08:36) बैरियर को क्रॉस करता है और सब आरेकनॉइड (00:08:39) स्पेस में एंटर होता है। उसके बाद पैथोजन (00:08:42) सीएसएफ में मल्टीप्लाई करता है (00:08:43) सेरीब्रोस्पाइनल फ्लूइड में। क्योंकि (00:08:45) सीएसएफ में क्या है कि इम्यूनिटी कम है। (00:08:48) नॉर्मली वहां पर लिंफोसाइट्स या फिर (00:08:49) डब्ल्यूबीसीस जो है वो नॉर्मली वहां पर (00:08:51) प्रेजेंट नहीं होते बिग ब्लड सेल्स। प्लस (00:08:53) सीएसएफ में क्या है? है न्यूट्रिएंट्स इनफ (00:08:55) है पैथोजंस की नरिशमेंट के लिए। तो सीएसएफ (00:08:58) में ही सीएसएफ को अपनी साइट बनाते हैं वो। (00:09:01) वहां पर मल्टीप्लाई होते हैं पैथोजंस। तो (00:09:03) इम्यून सिस्टम क्या करता है? साइटोकाइन (00:09:05) रिलीज़ करता है इनफ्लामेटरी मार्कर्स जिससे (00:09:08) वहां पर सीएसएफ में वाइट ब्लड सेल्स फिर (00:09:10) आते हैं। तो वो डिपेंड करता है कि (00:09:11) बैक्टीरियल है तो न्यूट्रोफिल्स आते हैं। (00:09:13) अगर वायरल इंफेक्शन है तो वहां पर (00:09:15) लिंफोसाइट्स आते हैं। तो सीएसएफ में क्या (00:09:18) होता है? देन उसके बाद चेंज होता है। जो (00:09:20) सीएसएफ की जो कंपोज़िशन है वो बदल जाती है। (00:09:22) जैसे कि वहां पर डब्ल्यूबीसीस का अमाउंट (00:09:24) इंक्रीस हो जाता है। वाइट ब्लड सेल्स का। (00:09:26) नॉर्मली वहां पर प्रेजेंट नहीं होते (00:09:27) क्योंकि डब्ल्यूबीसीस एक तो लार्ज साइज (00:09:29) होते हैं। प्लस सीएसएफ में क्या होता है? (00:09:31) पैथोजन फ्री होता है। तो डब्ल्यूबीसीस (00:09:33) वाइट ब्लड सेल्स वहां पर आने स्टार्ट हो (00:09:35) जाएंगे। अगर बैक्टीरियल है तो (00:09:38) न्यूट्रोफिल्स आएंगे। अगर वायरस है तो (00:09:40) लिंफोसाइट्स का अमाउंट ज्यादा होगा। (00:09:42) प्रोटीन का अमाउंट इंक्रीस हो जाएगा (00:09:44) इनफ्लामेशन के कारण। अब अगर बैक्टीरियल (00:09:46) मेनंजाइटिस है तो वो ज्यादा सीवियर होता (00:09:48) है। ज्यादा उसमें डैमेज होता है। जिसकी (00:09:50) वजह से प्रोटीन का अमाउंट ज्यादा इंक्रीस (00:09:53) होता है बैक्टीरियल में। अगर वायरल है तो (00:09:55) स्लाइटली इंक्रीस होता है प्रोटीन का (00:09:57) अमाउंट। अब ग्लूकोस का जो अमाउंट है वो (00:10:00) डिक्रीज हो जाता है अगर बैक्टीरियल (00:10:01) इंफेक्शन है। क्योंकि बैक्टीरियास को (00:10:04) ग्लूकोस पसंद होता है तो वो उसे खाते हैं। (00:10:07) उसको यूज़ करते हैं एनर्जी के लिए। तो (00:10:09) बैक्टीरिया अगर बैक्टीरियल मेनंजाइटिस है (00:10:11) तो ग्लूकोस का अमाउंट कम हो जाएगा। अगर (00:10:13) वायरल है तो थोड़ा सा ही कम होता है या (00:10:15) फिर नॉर्मल रहता है। उसके बाद (00:10:17) इंट्राक्रेनियल प्रेशर इंक्रीस हो जाता (00:10:19) है। तो देखो मेनिजेस में क्या हो गया है? (00:10:21) इनफ्लामेशन हो गया है। इनफ्लामेशन का मतलब (00:10:23) है वहां स्वेलिंग हो गई है, एडमा हो गया (00:10:25) है। तो जब ये होता है तो क्या होता है कि (00:10:27) हमारी स्कल में तीन चीजों से प्रेशर बनता (00:10:29) है जिसको इंट्राक्रेनियल प्रेशर कहते हैं। (00:10:31) क्योंकि स्कल को क्रेनियम भी कहते हैं। तो (00:10:33) तीन चीजें कौन सी है? एक तो ब्रेन टिश्यू। (00:10:35) दूसरा सेरीब्रोस्पाइनल फ्लूइड और तीसरा (00:10:38) क्या है? ब्लड। चाहे वो वेनस ब्लड है, (00:10:40) चाहे आर्टेरियल ब्लड है जो भी ब्रेन में (00:10:42) प्रेजेंट है। ये तीनों चीजें मिलकर (00:10:44) इंट्राक्रेनियल प्रेशर बनाती हैं। और (00:10:46) तीनों चीजों में से किसी भी एक चीज का (00:10:48) वॉल्यूम अगर इंक्रीस होता है तो (00:10:50) इंट्राक्रेनियल प्रेशर इंक्रीस हो जाता (00:10:52) है। तो यहां पर मेनिंजेस में स्वेलिंग और (00:10:54) एडीमा के कारण ब्रेन टिश्यू का वॉल्यूम (00:10:56) इंक्रीस हो जाता है। प्लस साथ में ही (00:10:58) स्वेलिंग और एडीमा के कारण इनफ्लामेशन के (00:11:00) कारण जो एरिकनॉइड स्पेस है वहां पर (00:11:03) इनफ्लामेशन के कारण सीएसएफ एब्सॉर्ब नहीं (00:11:06) हो पाता। सीएसएफ की जो अब्सॉर्प्शन है वो (00:11:08) एरेकनॉइड स्पेस से ही ड्यूरल वेनस (00:11:11) साइनेसिस में होती है। क्योंकि एरेकेनॉइड (00:11:13) स्पेस में एरेकेनॉइड विलाय होती हैं सब (00:11:15) एरेकेकनॉइड स्पेस में जहां से सीएसएफ की (00:11:17) एब्सॉर्प्शन होती है। तो सीएसएफ (00:11:19) अब्जॉर्प्शन भी डिक्रीज हो जाती है। सो (00:11:21) रिड्यूस सीएसएफ अब्सॉर्प्शन मेनिंजेस का (00:11:24) वॉल्यूम इंक्रीस हो गया। सीएसएफ की (00:11:25) एब्सॉर्प्शन डिक्रीज हो गई। जिससे सीएसएफ (00:11:27) का भी वॉल्यूम इंक्रीस हो गया। तो क्या (00:11:29) होता है? इंट्राक्रेनियल प्रेशर इंक्रीस (00:11:31) हो जाता है। जब इंट्राक्रेनियल प्रेशर (00:11:33) इंक्रीस होते हैं तो उसके जो क्लासिक साइन (00:11:34) हैं वो क्या आते हैं? हेडेक होता है। (00:11:36) कास्टेंट सीवियर हेडेक होता है। फ्रंटल (00:11:38) हेडेक यूजली और प्रोजेक्टाइल वोमिटिंग (00:11:41) होती है। उसमें कोई भी नजिया वाले (00:11:44) सिम्टम्स नहीं आते। मनकच्चा नहीं होता। (00:11:46) सीधा वोमिटिंग आती है। वोमिटिंग (00:11:48) प्रोजेक्टाइल होती है। वो फूड से रिलेटेड (00:11:50) नहीं होती। काफी प्रेशर सी आती है। साथ (00:11:52) में ही फीवर होगा मेनिजाइटिस के कारण (00:11:55) क्योंकि इंफेक्शन है। नेक्स्ट स्टिफनेस (00:11:57) टिपिकल साइन है ये तीनों साइंस। नेक्स्ट (00:11:59) स्टिफनेस, फीवर और हेडेक। नेक स्टिफनेस या (00:12:02) फिर इसको न्यूकल स्टिफनेस भी कहते हैं। (00:12:05) जिसमें जो नेक है वो आगे की तरफ फ्लेक्स (00:12:07) नहीं हो पाती। क्योंकि यहां पर ये क्या (00:12:09) है? मेनिजेस है सारी। ब्रेन और स्पाइनल (00:12:11) कॉर्ड को कवर जिसने किया हुआ है। तो (00:12:13) मेनिजेस में जब इनफ्लामेशन हो जाती है तो (00:12:15) नेक आगे की तरफ फ्लेक्स नहीं हो पाती। पेन (00:12:17) होता है नेक की फ्लेक्शन में। तो जिसको हम (00:12:19) नेक स्टिफनेस बोलते हैं और हेडेक साथ में (00:12:21) होता है। फोटोफोबिया होता है। लाइट के लिए (00:12:24) सेंसिटिविटी बढ़ जाती है। लाइट्स उसको (00:12:26) अच्छी नहीं लगती। क्योंकि ऑप्टिक नर्व जो (00:12:29) कि मेनिंजेस में है वो इरिटेट हो जाती है (00:12:31) जिसकी वजह से फोटोफोबिया होता है और साथ (00:12:34) में ही जो इंट्राक्रेनियल प्रेशर इंक्रीस (00:12:36) हो गया उसके साइन आते हैं। अगर (00:12:38) इंट्राक्रेनियल प्रेशर इंक्रीस होता है तो (00:12:40) ये भी लाइफ थ्रेटनिंग होता है। मेडिकल (00:12:41) इमरजेंसी है ये। क्योंकि जो ब्रेन में (00:12:44) स्ट्रक्चर्स हैं जो कि ब्रेन स्टेम में है (00:12:46) मेडुला रेस्पिरेटरी सेंटर है वहां पर। (00:12:48) ब्रेन स्टेम इज़ वेरीेंट फॉर सर्वाइवल। और (00:12:51) अगर वो अफेक्ट होती है क्योंकि अगर (00:12:53) इंट्राक्रेनियल प्रेशर इंक्रीस होता है तो (00:12:55) सेरीब्रल परफ्यूजन डिक्रीज हो जाता है। (00:12:57) ब्रेन को ब्लड सप्लाई कम मिलती है। जिसकी (00:12:59) वजह से ये स्ट्रक्चर अफेक्ट होते हैं। (00:13:00) ब्रेन हर्निएशन भी हो सकती है (00:13:02) इंट्राक्रेनियल प्रेशर इंक्रीस होने से। (00:13:04) तो जिसके कारण अल्टीमेटली ब्रेन डेथ हो (00:13:06) सकती है। नाउ कॉजेस इसके क्या हैं? तो (00:13:09) बैक्टीरियल कोज़ सबसे पहले पढ़ते हैं। (00:13:10) बैक्टीरियल मेनिंजाइटिस के। सो इनफेशियस (00:13:13) कॉज़ज़ हैं और एक नॉन इनफेशियस है। इनफेशियस (00:13:15) में पैथोज्स होंगे। नॉन इनफेशियस में अदर (00:13:18) कॉज़ज़ आएंगे। तो बैक्टीरियल अगर मेनिजाइटिस (00:13:20) हो जाता है तो ये मेडिकल इमरजेंसी है (00:13:22) क्योंकि बैक्टीरिया क्विकली मल्टीप्लाई (00:13:24) होते हैं। पूरे ब्लड में फैल सकते हैं (00:13:26) जिसको सेप्टिक शोक भी बोलते हैं। उसे (00:13:28) सेप्टिसीमिया या फिर सेप्टिक शॉक हो सकता (00:13:30) है। तो सबसे कॉमन क्या है? नाइजीरिया (00:13:32) मेनंजाइटिस जिसको मेनिंजोकोपकल (00:13:35) मेनिंजाइटिस भी बोलते हैं। यह बहुत (00:13:37) कंटेजियस होती है। हाईली कंटेजियस। ईली ये (00:13:40) एक पर्सन से दूसरे पर्सन को फैल जाती है। (00:13:43) और यह एपिडेमिक होती है डोम्स और बैरेक (00:13:46) में। मतलब जैसे हम भीड़भाड़ वाली जगह पर (00:13:48) जब रहते हैं जैसे कि जो ट्रैवलर्स हैं या (00:13:51) फिर स्टूडेंट्स हैं जब वो हॉस्टल में रहते (00:13:53) हैं तो वो एक दूसरे के क्लोज कांटेक्ट में (00:13:55) होते हैं तब ये जो बैक्टीरिया है (00:13:57) नाइजीरिया मेनंजाइटिस ये ईजीली स्प्रेड हो (00:14:00) सकता है। तो ये रेस्पिरेटरी रूट से ही (00:14:02) स्प्रेड होता है। जैसे कि जब कोई पर्सन कफ (00:14:04) करता है या स्नीज़ करता है और दूसरा पर्सन (00:14:06) उस एयर ड्रॉपलेट्स को अगर इन्हेल कर लेता (00:14:09) है तो यह स्प्रेड हो सकता है। हालांकि (00:14:11) नाइजीरिया मेनंजाइटिस के लिए वैक्सीनेशन (00:14:13) है। तो अगर कोई पर्सन ट्रैवल कर रहा है या (00:14:16) फिर कोई हॉस्टल में रहने जा रहा है या फिर (00:14:17) कोई क्राउडेड प्लेस में जा रहा है तो वह (00:14:19) वैक्सीनेशन जरूर लेनी चाहिए इसके अगेंस्ट। (00:14:22) उसके बाद आता है स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया। (00:14:24) नाइजीरिया मेनंजाइटिस सबसे लाइफ थ्रेटनिंग (00:14:27) भी है। अगर इसका ट्रीटमेंट नहीं किया जाता (00:14:29) तो ये लाइफ थ्रेटनिंग हो सकती है। (00:14:31) स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया। अगेन इसको बोलते (00:14:34) हैं न्यूमोकोकल मेनंजाइटिस। यह भी (00:14:36) रेस्पिरेटरी रूट के थ्रू स्प्रेड होती है। (00:14:39) यह भी सबसे कॉमन है। यह एडल्ट्स में इसका (00:14:41) स्प्रेड हीमोफाइलस इनफ्लुएंजा टाइप बी (00:14:44) इसके अगेंस्ट भी वैक्सीनेशन है जिसको (00:14:46) एचआईवी वैक्सीन कहते हैं। ये चिल्ड्रन में (00:14:48) कॉमन होती है। ये भी प्रिवेंट की जा सकती (00:14:51) है वैक्सीनेशन के थ्रू। अगेन ये तीनों (00:14:53) क्या है? ये रेस्पिरेटरी रूट के थ्रू (00:14:56) स्प्रेड होते हैं ये इनफेक्शंस। उसके (00:14:58) अलावा बैक्टीरियल में आते हैं लाइसीरिया, (00:15:00) मोनोसाइटोजंस। ये फीकोरल रूट के थ्रू (00:15:03) कंटैमिनेटेड फूड या फिर वाटर के थ्रू (00:15:05) स्प्रेड होते हैं। माइकोबैक्टीरियम (00:15:07) ट्यूबरक्लोसिस ट्यूबरक्लोसिस चेस्ट (00:15:10) इंफेक्शन अगर चेस्ट ट्यूबरक्लोसिस हुआ है (00:15:12) तो वो इज़ली स्प्रेड हो सकता है। ब्रेन में (00:15:14) भी ब्रेन मेनंजाइटिस कोज़ कर सकता है। दो (00:15:16) इट्स बिट रेयर। उसके बाद आता है इकोलाई। (00:15:19) इकोलाई ये कब ट्रांसफर होता है? जैसे कि (00:15:22) ड्यूरिंग फीिटल बर्थ। क्योंकि अगर मदर के (00:15:26) जो बर्थ कैनाल है वहां पर इकोलाई प्रेजेंट (00:15:28) है या फिर लोअर गैस्ट्रोइेस्टाइनल ट्रैक (00:15:30) में जहां पर इकोलाई प्रेजेंट होता है और (00:15:33) ड्यूरिंग फीटल बर्थ अगर फीटस में ये (00:15:35) ट्रांसफर हो जाता है तो फीिटस को ये (00:15:38) मेनिंजाइटिस को कर सकता है। उसके बाद आता (00:15:41) है वायरल। वायरल मेनिंजाइटिस सबसे कॉमन है (00:15:44) और ये लाइफ थ्रेटनिंग नहीं है। ये यूजली (00:15:46) क्या होता है? रेस्ट और प्रॉपर न्यूट्रिशन (00:15:49) के साथ ये खुद भी ट्रीट हो जाता है। तो ये (00:15:51) लेस सीवियर है। इसमें क्या आता है? एंटी (00:15:54) वायरसेस। एंटीरो वायरसेस भी कंटैमिनेटेड (00:15:56) फूड और वाटर के थ्रू स्प्रेड होते हैं। तो (00:15:59) इसका जो रूट ऑफ स्प्रेड है वो क्या है? (00:16:00) फीको ओरल रूट। उसके बाद आता है हर्पी (00:16:03) सिंप्लेक्स वायरस जो कि डायरेक्ट कांटेक्ट (00:16:05) से ट्रांसफर होते हैं। सेक्सुअल कांटेक्ट (00:16:07) से या फिर सलाइवा के साथ अगर डायरेक्ट (00:16:09) कांटेक्ट हो गया है। अगर कोल्ड सोर्स का (00:16:11) किसी दूसरे पर्सन के साथ डायरेक्ट (00:16:12) कांटेक्ट हो गया है तो ये ट्रांसफर होते (00:16:14) हैं। उसके बाद मम्स मम्स ऑफ कोर्स (00:16:18) रेस्पिरेटरी रूट है। अगेन एचआईवी एचआईवी (00:16:21) अगर इम्यूनो कॉम्प्रोमाइज इंडिविजुअल है (00:16:23) तो उसमें भी मेनिंजाइटिस कॉमनली हो सकता (00:16:26) है। इन्फ्लुएंजा भी कॉज कर सकता है (00:16:28) मेनिंजाइटिस। उसके बाद आता है फंगल और (00:16:30) पैरासिटिक। फंगल और पैरासिटिक रेयर है बट (00:16:33) यह भी कॉज करते हैं। फंगल में आता है (00:16:35) क्रिप्टोकोकस इन इम्यूनो कॉम्प्रोमाइज। (00:16:37) फंगल जो मेनजाइटिस है ये यूजुअली उन पीपल (00:16:40) में होता है जिनका इम्यूनिटी कॉम्प्रोमाइज (00:16:42) होता है। इम्यूनिटी लो होती है जिनमें (00:16:44) जैसे कि एचआईवी पेशेंट में एचआईवी और एड्स (00:16:47) के पेशेंट है या फिर किसी को अगर ऑर्गन (00:16:49) ट्रांसप्लांट किया है और वो इम्यूनो (00:16:51) सप्रेसेंट्स ले रहा है तो वो फंगल (00:16:53) मेनंजाइटिस हो सकता है। पैरासिटिक रेयर (00:16:55) होता है लेकिन पॉसिबल है यह भी। इसमें आता (00:16:57) है नेग्लेरिया फॉलरी ब्रेन ईटिंग एमीबा भी (00:17:01) इसको बोलते हैं। टॉक्सोप्लाज्मा गोंडाई। (00:17:03) तो ये सभी पैरा पैरासाइट्स भी कोज कर सकते (00:17:06) हैं मेनंजाइटिस। नाउ ये सभी थे इनफेशियस (00:17:09) कोज़। अब है नॉन इनफेशियस। इसमें पैथोज्स (00:17:12) नहीं होते। दूसरे कोज़ होते हैं जैसे कि (00:17:14) मेडिसिंस। नॉन स्टेरॉइडल एंटी इनफ्लामेटरी (00:17:16) ड्रग्स। ये भी कोज़ कर सकती हैं। अगर लॉन्ग (00:17:19) टर्म ले रहे हैं एंटीबायोटिक्स, कुछ (00:17:20) एंटीबायोटिक्स एंड इम्यूनोसप्रेसेंट्स। (00:17:23) उसके अलावा ऑटोइम डिसऑर्डर जैसे कि (00:17:25) सिस्टेमिक ल्यूपस। इसमें क्या होता है कि (00:17:27) मेनिंजेस को ही हमारा ही इम्यून सिस्टम (00:17:30) अटैक करने लग जाता है। प्लस ऑटोइ्यून में (00:17:32) क्या होता है कि पेशेंट (00:17:34) कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स भी लेता है। तो अगर (00:17:36) लॉन्ग टर्म से स्टेरॉइड पर है पेशेंट तो (00:17:38) भी इम्यूनिटी वीक हो सकती है। जिसके कारण (00:17:41) क्या हो सकता है? मेनिजाइटिस के रिस्क बढ़ (00:17:44) जाता है। पोस्ट न्यूरोसर्जरी अगर कोई (00:17:47) न्यूरोसर्जरी हुई है तो उसके बाद क्या है? (00:17:49) जो माइक्रो ऑर्गेनज़्म है वह वहां पर ईज़ली (00:17:51) एंटर हो सकता है सर्जरी के बाद (00:17:53) न्यूरोसर्जरी के बाद या फिर ड्यूरिंग (00:17:55) सर्जरी भी कोई माइक्रो ऑर्गेनिज़्म (00:17:57) ट्रांसफर हो सकता है। देन उसके बाद कैंसर। (00:18:00) कैंसर भी डेबिलिटेटिंग बनाता है पर्सन को (00:18:02) जिसकी वजह से मेनिंजाइटिस हो सकता है या (00:18:04) फिर हेड इंजरी। अगर हेड इंजरी हो सकती है (00:18:06) तो डायरेक्ट एंट्री माइक्रो ऑर्गेनिज्म कर (00:18:09) सकता है मेनिंजेस में। उसके बाद रिस्क (00:18:11) कौन-कौन रिस्क पर है? तो जो इनफेंट्स होते (00:18:14) हैं, यंग चिल्ड्रन और जो बूढ़े लोग होते (00:18:16) हैं, ओल्डर एडल्ट्स होते हैं, उनकी जो (00:18:18) इम्यूनिटी है वो अभी अंडर डेवलप्ड होती (00:18:20) है। जिसकी वजह से मेनिंजेस हो सकता है (00:18:22) उनको अगर कोई भी इंफेक्शन उनकी बॉडी में (00:18:25) एंटर हुआ है तो मेनिंजेस के रिस्क बढ़ (00:18:27) जाते हैं। उसके बाद आता है वीक इम्यून (00:18:30) सिस्टम। अगेन यह भी इम्यूनिटी पर डिपेंड (00:18:32) करता है। अगर किसी का इम्यून सिस्टम वीक (00:18:34) है जैसे कि एचआईवी एड्स के पेशेंट है या (00:18:37) फिर इम्यूनो कॉम्प्रोमाइज कोई भी (00:18:38) इंडिविजुअल है, डायबिटीज है पेशेंट कैंसर (00:18:41) पेशेंट है तो उनमें क्या होता है कि (00:18:43) मेनिजाइटिस के रिस्क बढ़ जाते हैं (00:18:45) इम्यूनिटी कम होने के कारण। तो अगर उनका (00:18:47) कोई इयर इंफेक्शन हुआ है, साइनोसाइटिस है (00:18:49) या फिर कहीं और से भी ब्लड से ट्रैवल करके (00:18:52) इंफेक्शन ब्रेन में जा सकता है। उसके बाद (00:18:55) हॉस्टल्स में अगर कोई रहता है ओवरक्लाडेड (00:18:57) प्ले प्लेसेस में कोई रहता है तो डायरेक्ट (00:19:00) कांटेक्ट या फिर फीकोरल रूट या फिर (00:19:03) रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट्स के कारण जो भी (00:19:05) इनफेशियस माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स हैं चाहे (00:19:07) वो बैक्टीरियल है, वायरल है वो क्या कॉज (00:19:09) कर सकते हैं? मेनंजाइटिस कोज़ कर सकते हैं। (00:19:12) सो हॉस्टल्स और जो ओवरक्राउडेड प्लेसेस (00:19:14) हैं उनमें मेनिजोकोकल जो मेनिंजाइटिस है (00:19:17) वो ज्यादा देखने को मिलती है और यही सबसे (00:19:18) ज्यादा डेंजरस कोज़ है मेनिंजाइटिस का। (00:19:22) उसके बाद आता है अनवैक्सिननेटेड अगर (00:19:24) प्रॉपर वैक्सीनेशन नहीं ले रखी है जैसे कि (00:19:26) एचआईवी जो वैक्सीन है वो इनफेंट्स को दी (00:19:29) जाती है या फिर न्यूमोकोकल मेनिंजाइटिस (00:19:30) मेनिंजोकोकल मेनिंजाइटिस के लिए जो (00:19:33) वैक्सीनेशन अवेलेबल है अगर वो नहीं ली (00:19:35) जाती तो वो भी पर्संस रिस्क पर है। उसके (00:19:37) बाद एस्प्लनिया तो एस्प्लनिया क्या है? जो (00:19:40) स्प्लीन है हमारा स्प्लीन का काम क्या है? (00:19:42) बैक्टीरिया के अगेंस्ट फाइट करना। तो (00:19:44) बैक्टीरिया को बाहर निकालना बॉडी से (00:19:46) स्प्लीन का बहुत इंपॉर्टेंट रोल है इसमें। (00:19:48) तो अगर स्प्लीन किसी वजह से रिमूव की गई (00:19:51) है बॉडी से तो बैक्टीरियल इंफेक्शन होने (00:19:54) के चांसेस इंक्रीस हो जाते हैं। (00:19:55) बैक्टीरियल मेरिंजाइटिस होने के चांसेस (00:19:57) इंक्रीस हो जाते हैं। सिकल सेल डिसीज में (00:19:59) भी सेम होता है। जो सिकल से सिकल सेल (00:20:02) डिसीज में क्या होता है कि जो रेड ब्लड (00:20:03) सेल्स हैं वो सिकल शेप के हो जाते हैं। जब (00:20:06) वो सिकल शेप के होते हैं तो जो स्प्लीन की (00:20:08) जो आर्टरीज हैं उनमें ब्लॉकेज करते हैं। (00:20:11) जिसकी वजह से धीरे-धीरे स्प्लीन का जो (00:20:13) साइज है वो श्रिंक हो जाता है। जिसको (00:20:14) ऑटोस्प्लनेक्टमी बोलते हैं। जिसकी वजह से (00:20:17) स्प्लीन अपना प्रॉपर फंक्शन नहीं कर पाता। (00:20:20) उसके बाद अगर सीएसएफ लीक हो गया है कोई (00:20:22) ट्रॉमा की वजह से, न्यूरोसर्जरी की वजह से (00:20:24) तो वो तो डायरेक्ट एंट्री बन जाती है (00:20:26) माइक्रो ऑर्गेनिज्म की सीएसएफ में एंटर (00:20:29) होने पे। क्या-क्या साइन देखने को मिलते (00:20:31) हैं? अगर किसी पर्सन को मेनिंजाइटिस हो (00:20:33) जाता है। सो सबसे पहले क्लासिक तीन साइन (00:20:35) आते हैं मेनिंजाइटिस में जिसको क्लासिक (00:20:37) ट्रायर्ड बोलते हैं। फीवर हाई ग्रेड और (00:20:40) सडन ऑनसेट एकदम से फीवर आएगा पर्सन को और (00:20:43) उसका जो ऑनसेट होगा वो सडन होगा एकदम से (00:20:46) और हाई फीवर होगा जिसको हाई ग्रेड फीवर (00:20:48) कहते हैं। सीवियर एंड कॉन्सेंट हेडेक (00:20:50) हेडेक होगा उसको सीवियर होगा। एक तो (00:20:52) मेनिंजेस की इनफ्लामेशन के कारण जिसमें (00:20:54) नर्व्स हैं। मेनिंजेस में तो हेडेक हो रहा (00:20:56) है। इंट्राक्रेनियल प्रेशर इंक्रीस होने (00:20:59) की वजह से भी हेडेक होता है। उसके बाद आता (00:21:01) है न्यूकल रिजिडिटी। नेक की स्टिफनेस। तो (00:21:04) नेक फ्लेक्स नहीं होगी क्योंकि ये जो (00:21:06) मेनिजेस है इसने ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड (00:21:08) दोनों को कवर किया हुआ है। जिसकी वजह से (00:21:10) नेक स्टिफ रहेगी जिसको न्यूकल रिजिडिटी (00:21:12) बोलते हैं। इसके अलावा एडिशनल साइन क्या (00:21:14) आते हैं? फोटोफोबिया एंड फोनोफोबिया। (00:21:16) फोटोफोबिया मींस लाइट के लिए सेंसिटिविटी। (00:21:19) फोबिया मतलब डर लगना लाइट से। फोनोफोबिया (00:21:22) मतलब साउंड से सेंसिटिविटी। ये इसलिए होता (00:21:24) है क्योंकि मेनिजेस से बहुत सारी नर्व्स (00:21:26) क्रॉस हो रही हैं। क्रेनियल नर्व्स, (00:21:28) स्पाइनल नर्व्स। तो ऑप्टिक नर्व की (00:21:30) डिस्टरबेंस के कारण क्या होता है? लाइट (00:21:32) सेंसिटिविटी होती है। नर्व्स के (00:21:34) डिस्टरबेंस के कारण ये साइन आते हैं। (00:21:36) ऑल्टर्ड मेंटल स्टेटस अ जो उसका मेंटल (00:21:39) स्टेटस है वो उसमें चेंज देखने को मिलेगा। (00:21:41) क्योंकि एक तो इंट्राक्रेनियल प्रेशर (00:21:44) इंक्रीस हो रहा है। तो उसकी वजह से जो (00:21:45) इंपॉर्टेंट सेंटर्स हैं जो हमको अवेक रखते (00:21:48) हैं उसमें चेंजज़ आएगा। क्या चेंजेस आएगा? (00:21:50) कंफ्यूजन होगा पर्सन को लेथार्जी बहुत (00:21:53) थकावट फील होगी और इनफ्लामेशन के कारण (00:21:56) सीजर्स भी आ सकते हैं क्योंकि ब्रेन (00:21:58) टिश्यू इरिटेट हो जाते हैं। जब वो (00:21:59) ओवरएक्टिव होंगे, इरिटेट होंगे तो सीजर्स (00:22:02) आ सकते हैं। वोमिटिंग होगी इंक्रीस (00:22:04) इंट्राक्रेनियल प्रेशर के कारण वोमिटिंग (00:22:06) होती है। प्रोजेक्टाइल वोमिटिंग होती है (00:22:08) पर्सन को। स्किन रैश। स्किन रैश कब हो (00:22:11) सकता है? अगर मेनिजोकोकल मेनिंजाइटिस है (00:22:14) जो कि सबसे डेंजरस टाइप ऑफ मेनिंजाइटिस (00:22:16) है। मेनिंजोकोकल मेनंजाइटिस उसमें स्किन (00:22:19) रैश भी देखने को मिलते हैं लेट स्टेजेस (00:22:21) में। तो जिसको पेटकी एंड परप्यूरा बोलते (00:22:23) हैं और ये एक मेडिकल इमरजेंसी है। उसके (00:22:27) अलावा सेप्टिक शोक लेट स्टेजेस में क्या (00:22:29) होता है कि पूरे ब्लड में इंफेक्शन फैल (00:22:32) सकता है जिसको सेप्टिसीमिया बोलते हैं और (00:22:34) पर्सन कैन गो इंटू सेप्टिक शॉक जो कि लाइफ (00:22:37) थ्रेटनिंग है। उसके बाद स्पेशल साइन क्या (00:22:39) आते हैं? अगर हमें पता लगाना है कि पर्सन (00:22:42) को मेनिंजाइटिस है तो उसके लिए कुछ स्पेशल (00:22:44) साइन हैं। इसमें दो साइन है। एक है साइन (00:22:47) एंड एक है ब्रजिंस्की साइन। दोनों पॉजिटिव (00:22:50) आते हैं। अगर हम कॉर्निक साइन की बात करें (00:22:53) तो ये कर्निक साइन है। करनिक साइन में (00:22:55) क्या होता है? जब हम पर्सन की जो लेग है (00:22:57) उसको हिप से फ्लेक्स करवाते हैं और नी को (00:23:00) अगर हम एक्सटेंड करवाना चाहें इस साइड तो (00:23:03) वो नहीं कर पाएगा पर्सन। उसको बहुत ज्यादा (00:23:05) पेन होगी। ये इसीलिए हो रहा है क्योंकि जो (00:23:08) मेनिजेस है वो स्पाइनल कॉर्ड और ब्रेन (00:23:10) दोनों को कवर किए हुए हैं और उसमें (00:23:11) इंफेक्शन हो गया है, इनफ्लामेशन हो गई है (00:23:13) जिसकी वजह से उसको लेग एक्सटेंड करने में (00:23:17) बहुत पेन होगी। तो दैट इज़ कॉर्निक साइन। (00:23:19) उसके बाद आता है ब्रुजिंस्की साइन। (00:23:21) ब्रजिंस्की साइन में क्या होगा कि जब हम (00:23:23) पर्सन की जो नेक है उसको फ्लेक्स करते हैं (00:23:25) जिसको मेनिंजाइटिस है तो नेक फ्लेक्स करने (00:23:28) से उसको इतना पेन होगा कि ऑटोमेटिकली उसकी (00:23:31) जो लेग्स है वो इस तरह से फ्लेक्स हो (00:23:34) जाएंगी। उस पेन को कंपनसेेट करने के लिए (00:23:36) ताकि पेन कम हो। क्योंकि अगर हम नेक को (00:23:39) फ्लेक्स कर रहे हैं तो जो मेनिजेस हैं वो (00:23:41) स्ट्रेच हो रही हैं। तो क्योंकि वो ब्रेन (00:23:43) और स्पाइनल कॉर्ड पूरे में कवर है। तो (00:23:45) मेनिजेस स्ट्रेच होने के कारण ये पेन हो (00:23:48) रहा है। इसके कारण पर्सन क्या करता है? (00:23:50) अपनी लेग्स को भी एक्सटेंड कर लेता है (00:23:52) ताकि जो स्ट्रेचिंग है वो थोड़ी कम हो और (00:23:53) पेन कम हो। तो ये दोनों साइन हैं। ये (00:23:56) पॉजिटिव आते हैं मेनिंजाइटिस में। अब (00:23:58) इनफेंट्स में बच्चों में क्या-क्या साइन (00:24:00) देखने को मिलेंगे? क्योंकि बच्चों के जो (00:24:01) स्कल है वो सॉफ्ट है तो उसमें मेनजेस में (00:24:04) जब इनफ्लामेशन होती है स्वेलिंग के कारण (00:24:07) तो जो फोंटेनल्स हैं वो बल्ज हो जाते हैं। (00:24:09) बॉडी स्टिफ रहती है और लिम्स फ्लॉपी रहते (00:24:12) हैं। लेथार्जिक रहता है। बहुत थका हुआ (00:24:14) बहुत लेथार्जिक उसके लिम्स रहेंगे। हाई (00:24:16) पिच्ड्ड क्राई क्राई हाई पिच्ड्ड होगा। (00:24:19) उसके अलावा फीवर होगा और लेथार्जी और पुअर (00:24:22) फीडिंग। खाना नहीं खाएगा बच्चा अच्छे से। (00:24:24) पुअर फीडिंग होगी। अब डायग्नोस्टिक टेस्ट (00:24:27) क्या करते हैं? हिस्ट्री लेते हैं और (00:24:29) फिजिकल एग्जामिनेशन। फिजिकल एग्जामिनेशन (00:24:31) में साइंस देख सकते हैं। उसके अलावा फीवर (00:24:33) है पर्सन को ये देखेंगे। वोमिटिंग हो रही (00:24:35) है। ये सभी साइंस जो हमने पढ़े वो फिजिकल (00:24:38) एग्जामिनेशन में आएंगे। हिस्ट्री में हम (00:24:39) पेशेंट से ये पूछेंगे कि कभी उसने ट्रैवल (00:24:42) किया है? डोम्स में रहा है, कोई और (00:24:44) इंफेक्शन हुआ, इयर इंफेक्शन हुआ, साइनस का (00:24:46) इंफेक्शन हुआ तो वो सभी हिस्ट्री टेकिंग (00:24:48) लेंगे। कैंसर तो नहीं है, डायबिटीज (00:24:50) इम्यूनो सप्रेसेंट्स पर तो नहीं है, सब (00:24:52) कुछ पूछेंगे। उसमें हिस्ट्री में आ जाएगा। (00:24:54) नोज और थ्रोट स्वर्ब अगर हमें लगता है कि (00:24:56) कहीं और से इंफेक्शन के कारण वहां (00:24:58) इंफेक्शन बढ़ा है तो नोज या फिर थ्रोट (00:25:01) स्वर्ब ले सकते हैं। साइनसाइटिस में इयर (00:25:02) इंफेक्शन में इयर स्वर्ब ले सकते हैं। (00:25:05) उसके अलावा लंबर पंचर। लंब पंचर गोल्ड (00:25:07) स्टैंडर्ड है। लंबर पंचर हम इसलिए करते (00:25:10) हैं ताकि हम स्पाइन से सीएसएफ ले सकें। (00:25:13) सीएसएफ का सैंपल और पता लगा सकें कि कौन (00:25:15) सा माइक्रो ऑर्गेनिज्म है। अब लंबर पंचर (00:25:18) हम हर केस में नहीं करते। अगर इंक्रीस (00:25:20) इंट्राक्रेनियल प्रेशर है ऑब्स्ट्रक्टिव (00:25:22) के केस में स्पेशली ऑब्स्ट्रक्टिव का मतलब (00:25:25) है कि अगर वेंट्रिकल्स में कहीं (00:25:26) ऑब्स्ट्रक्शन है जिसके कारण सीएसएफ प्रॉपर (00:25:29) नहीं आ पा रहा आगे फ्लो नहीं हो पा रहा तो (00:25:31) इंट्राक्रेनियल प्रेशर ऑब्स्ट्रक्शन के (00:25:33) ऊपर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। तो उस केस (00:25:36) में हम लंबर पंचर नहीं करते। पर्सन का जो (00:25:39) प्रेशर है वो बिल्कुल चेंज हो जाएगा। अह (00:25:41) प्रेशर ग्रेडियंट चेंज हो जाता है जिसकी (00:25:43) वजह से हम यह नहीं करते ऑब्स्ट्रक्टिव शॉक (00:25:45) में। तो लंब पंचर करने से पहले हम सिटी (00:25:47) स्कैन या फिर एमआरआई करते हैं। तभी हम लंब (00:25:50) पंचर करते हैं। नॉन ऑब्स्ट्रक्टिव केसेस (00:25:52) में यूज़ली हम लंब पंचर करते हैं। तो (00:25:54) बैक्टीरियल मेनंजाइटिस अगर होगा तो हमें (00:25:57) सीएसएफ में क्या मिलेगा? सीएसएफ सैंपल (00:25:59) में? सीएसएफ सैंपल में हमें डब्ल्यूबीसीस (00:26:02) का अमाउंट इंक्रीस मिलेगा। लेकिन कौन से (00:26:03) डब्ल्यूबीसी? न्यूट्रोफिल्स बैक्टीरियल (00:26:05) में। ग्लूकोस का अमाउंट कम मिलेगा क्योंकि (00:26:07) बैक्टीरिया ग्लूकोस पर ही सर्वाइव करते (00:26:09) हैं। ग्लूकोस को खाते हैं न्यूट्रिशन की (00:26:12) तरह और ग्लूकोस कम हो जाता है। दूसरा (00:26:14) प्रोटीन का जो अमाउंट है वह बहुत इंक्रीस (00:26:16) मिलेगा क्योंकि बैक्टीरियल मेनंजाइटिस (00:26:18) बहुत ज्यादा डैमेज को करता है। उसके बाद (00:26:21) सीएसएफ ओपनिंग प्रेशर इंक्रीस होगा। (00:26:23) सीएसएफ का जो प्रेशर है वो इंक्रीस होगा (00:26:24) बैक्टीरियल मेनजाइटिस में और सीएसएफ की (00:26:27) अपीयरेंस कैसी होगी? क्लाउडडी। अगर वायरल (00:26:29) मेनंजाइटिस है तो डब्ल्यूबीसीस का अमाउंट (00:26:31) इसमें भी इंक्रीस होगा लेकिन लिंफोसाइट्स (00:26:33) का अमाउंट इंक्रीस होगा। ग्लूकोस नॉर्मल (00:26:35) रहेगा और स्लाइटली एलिवेटेड प्रोटीन (00:26:38) रहेंगे। ज्यादा एलिवेट नहीं होगा। ब्लड (00:26:40) कल्चर। ब्लड कल्चर हम करते हैं (00:26:43) एंटीबायोटिक्स को स्टार्ट करने से पहले कि (00:26:46) कौन सा माइक्रो ऑर्गेनिज्म है जिसके (00:26:48) अगेंस्ट एंटीबायोटिक वर्क करेगी। होता (00:26:50) सिटी स्कैन और एमआरआई। सिटी स्कैन और (00:26:52) एमआरआई हम इंक्रीज इंट्राक्रेनियल प्रेशर (00:26:54) को फाइंड आउट करने के लिए करते हैं। (00:26:56) इंक्रीज इंट्राक्रेनियल प्रेशर किस वजह से (00:26:59) हुआ है उसको फाइंड आउट करने के लिए हम (00:27:00) सिटी स्कैन या फिर एमआरआई करते हैं। या (00:27:02) फिर अगर कहीं एब्सेस तो नहीं है (00:27:04) ड्यूरामेटर के ऊपर एपिड्यूरल एमपाइमा या (00:27:07) फिर सबड्यूरल एब्सेस तो नहीं हो गया (00:27:09) ड्यूरामेटर के नीचे तो वो सभी के लिए हम (00:27:11) सिटी स्कैन और एमआरआई करते हैं। और मैंने (00:27:14) आपको बताया था कि लंब पंचर से पहले हमेशा (00:27:16) सिटी स्कैन और एमआरआई करते हैं। क्योंकि (00:27:18) हर किसी केस में लंबर पंचर हम नहीं कर (00:27:20) सकते। स्पेशली ऑब्स्ट्रक्टिव है सीएसएफ का (00:27:23) फ्लो तो उस केस में तो हम बिल्कुल भी नहीं (00:27:25) करते। चेस्ट एक्सरे अगर हमको लग रहा है कि (00:27:27) ट्यूबरक्लोसिस है पेशेंट को तो चेस्ट (00:27:29) एक्सरे करेंगे। स्टूल सैंपल करेंगे और (00:27:31) हमको लग रहा है कि वायरल कोज़ है जैसे कि (00:27:32) एंटीरो वायरस है उस केस में हम स्टूल (00:27:35) सैंपल करते हैं। इसको हम प्रिवेंट कर सकते (00:27:37) हैं वैक्सीनेशन के थ्रू। हीमोफाइलस (00:27:39) इन्फ्लुएंजा के लिए कौन सी है? एचआईवी (00:27:41) हीमोफाइलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी वैक्सीन (00:27:44) अवेलेबल है। न्यूमोकोकल वैक्सीन अवेलेबल (00:27:46) है इनफेंट्स और एल्डर्ली के लिए जो कि (00:27:48) स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया के अगेंस्ट (00:27:50) प्रिवेंट करता है। मेनिंजोकोकल वैक्सीन जो (00:27:52) भी कॉलेज स्टूडेंट्स हैं या फिर जो भी (00:27:54) ट्रेवलर हैं क्राउडेड प्लेस में रहने वाले (00:27:57) हैं उनके लिए हम मेनिंजोकोकल वैक्सीन देते (00:27:59) हैं जो कि नाइजीरिया मेनिंजाइटिस के (00:28:01) अगेंस्ट प्रोटेक्ट करता है। देन आता है (00:28:03) एमएमआर वैक्सीन जो कि मीज़ल वर्म्स रुबेला (00:28:05) के अगेंस्ट प्रोटेक्ट करता है। तो अगर (00:28:08) उससे रिलेटेड मेनंजाइटिस है तो उससे (00:28:10) प्रोटेक्ट करेगा। ट्रीटमेंट क्या हम (00:28:11) देंगे? ट्रीटमेंट क्या देंगे? तो जैसे ही (00:28:13) हमारे पास पेशेंट आया हमको लग रहा है कि (00:28:15) बैक्टीरियल मेनंजाइटिस का पेशेंट है तो (00:28:18) उसको सबसे पहले तो आइसोलेट करना है। (00:28:20) ड्रॉपलेट आइसोलेशन। क्योंकि जो भी (00:28:21) बैक्टीरिया के जो मोस्टली केसेस हैं वो (00:28:23) क्या है? ड्रॉपलेट इंफेक्शन के कारण (00:28:25) स्प्रेड हो रहे हैं। ड्रॉपलेट रूट के (00:28:27) थ्रू। सो एयर ड्रॉपलेट से रेस्पिरेटरी रूट (00:28:30) से स्प्रेड हो रहे हैं। तो हमको पेशेंट को (00:28:32) आइसोलेट करना है। एंड जब तक जैसे हमने (00:28:34) एंटीबायोटिक स्टार्ट कर दी तो उसके भी 24 (00:28:36) आवर्स तक हमको हम हमको उसको आइसोलेट ही (00:28:39) करके रखना है। उसके बाद एडमिनिस्टर एररिक (00:28:42) आईवी एंटीबायोटिक्स एज सून एस पॉसिबल। तो (00:28:44) हमने ब्लड कल्चरर्स का वेट नहीं करना। (00:28:46) आईवी एंटीबायोटिक्स स्टार्ट कर देनी है एज (00:28:48) सून एस पॉसिबल। नियोनेट्स में एपिसिलिन (00:28:50) प्लस जेंटामाइसिन या फिर सफोटाज़ाइम (00:28:52) स्टार्ट करते हैं। चिल्ड्रन और एडल्ट में (00:28:55) सेफ्ट्राइग्जोन या फिर सेफोटाज़ाइम जो कि (00:28:58) थर्ड जनरेशन सेफेलोस्पोरिन है प्लस (00:29:00) वेंकोमाइसिन स्टार्ट करते हैं। एल्डर्ली (00:29:02) और इम्यूनो कॉम्प्रोमाइज इंडिविजुअल में (00:29:04) हम साथ में एमिसिलिन ऐड करते हैं जो कि (00:29:07) लिसेरिया को कवर करता है। तो इसके लिए (00:29:10) एमिसिलिन ही काम करेगा। बाकी ये जो थर्ड (00:29:12) जनरेशन एंटीबायोटिक्स है ये इसको किल नहीं (00:29:15) करती। देन कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स और (00:29:17) डेक्सामेथाजोन। तो स्टेरॉइड हम क्यों देते (00:29:20) हैं? सेरीब्रल एडीमा को रिड्यूस करने के (00:29:22) लिए। उसके बाद एसाइक्लोवीर। अगर हर्पीस (00:29:24) सिंप्लेक्स वायरस है तो एसाइक्लोव हम देते (00:29:27) हैं। एंटी ट्यूबरक्लोसिस ड्रग देंगे। अगर (00:29:29) अगर टीबी फाइंड आउट हुआ है एंटीफंगल ड्रग (00:29:31) देंगे। अगर फंगल मेनिंजाइटिस है तो इसमें (00:29:33) एंफोटेरसिन बी या फिर फ्लोसाइटोसिन हम (00:29:36) देते हैं। सपोर्टिव केयर में फीवर के लिए (00:29:38) एंटीबायोटिक्स देंगे। नेक्स्ट इज़ ऑक्सीजन (00:29:40) एंड आईसीयू केयर इफ नीडेड। ऑक्सीजन हम (00:29:43) इसलिए दे रहे हैं क्योंकि जब भी (00:29:44) इंट्राक्रेनियल प्रेशर इंक्रीस होता है तो (00:29:47) तीन जो साइन हैं उसके वो कुशिंग ट्रायर्ड (00:29:49) उसको बोलते हैं। हाई ब्लड प्रेशर ये बॉडी (00:29:52) का कंपनसेट करने का मैकेनिज्म है ताकि (00:29:54) ब्रेन को प्रॉपर ब्लड सप्लाई मिले। उसका (00:29:56) जो उल्टा है रिफ्लेक्स आता है स्लो हार्ट (00:29:59) रेट। सेकंड और थर्ड क्या होता है? अगर हम (00:30:01) ब्लड प्रेशर हाई की बात करें तो उसमें (00:30:03) सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर हाई होता है। सेकंड (00:30:05) स्लो हार्ट रेट। थर्ड इसमें क्या आता है (00:30:07) रेस्पिरेटरी प्रॉब्लम्स आती हैं, (00:30:08) ब्रीदीिंग प्रॉब्लम आती है जिसको चैन (00:30:10) स्ट्रोक्स बोलते हैं। तो वो वो क्यों होता (00:30:12) है? जब इंट्राक्रेनियल प्रेशर इंक्रीस (00:30:14) होता है तो ब्रेन स्टेम अफेक्ट होती है और (00:30:16) वहां पर क्या है? मेडुला में रेस्पिरेटरी (00:30:18) सेंटर है जो कि अफेक्ट होता है। तो (00:30:20) ऑक्सीजन और आईसीयू केयर उस टाइम पर देनी (00:30:23) होती है। सीजर प्रिकॉशन भी देंगे। सीजर (00:30:25) प्रिकॉशन मतलब कि पर्सन को कोई इंजरी ना (00:30:27) हो जाए। जैसे कि उसका जो बेड का जो हाइट (00:30:30) है वो लो रखेंगे। साथ में डायज अप पाम (00:30:32) रेडी रखेंगे इन केस और पेशेंट को हमेशा (00:30:34) मॉनिटर करते रहेंगे। फ्लूइड मैनेजमेंट (00:30:36) करेंगे तो इसमें आईवी फ्लूइड्स भी देने (00:30:39) पड़ते हैं समटाइ्स और समटाइ्स हमको क्या (00:30:41) करना पड़ता है? डायरेटिक्स भी देने पड़ते (00:30:42) हैं इंट्राक्रेनियल प्रेशर को कम करने के (00:30:44) लिए। तो इसमें हम इंटेक आउटपुट जरूर (00:30:47) देखेंगे। ओवरहाइड्रेशन भी नहीं करेंगे (00:30:49) पेशेंट का डिहाइड्रेट भी नहीं होना पेशेंट (00:30:51) को। उसके बाद नर्सिंग इंटरवेंशन क्या आती (00:30:54) है? न्यूरो ऑर्ब्स चेक करने हैं एव्री टू (00:30:56) वन टू टू आवरली। मॉनिटर फॉर (00:30:58) इंट्राक्रेनियल प्रेशर को मॉनिटर करेंगे। (00:31:00) जैसे कि हेडेक जो उसका क्लासिक साइन है, (00:31:03) वोमिटिंग जो उसके क्लासिक साइन है, लॉस ऑफ़ (00:31:05) कॉन्शियसनेस तो नहीं हो रही है। कुशिंग (00:31:08) ट्रायर्ड जो कि मैंने अभी आपको बताया (00:31:10) इंट्राक्रेनियल प्रेशर इंक्रीस होने में (00:31:11) ही होता है। हाई बीपी, लो हार्ट रेट एंड (00:31:14) चेन स्ट्रोक्स जो कि रेस्पिरेटरी पैटर्न (00:31:16) जो है वो ऑल्टर हो जाता है। एलिवेट हेड ऑफ (00:31:19) द बेड टू 30° हेड ऑफ द बेड को एलिवेट करके (00:31:22) रखेंगे ताकि इजी ड्रेनेज हो और नेक की जो (00:31:25) फ्लेक्शन है वो अवॉइड करेंगे। क्योंकि (00:31:27) मेनिंजाइटिस में क्या होता है? नेक (00:31:29) फ्लेक्स नहीं होती। स्टिफ नेक होती है, (00:31:30) पेन होता है पेशेंट को नेक फ्लेक्स करने (00:31:33) पे। तो जो हेड है वो मिड लाइन रहेगा और (00:31:35) फ्लेक्स नहीं रहेगा। डार्क एंड क्वाइट रूम (00:31:39) क्योंकि फोटोफोबिया हो रहा है, फोनोफोबिया (00:31:41) हो रहा है। तो हमने पेशेंट को और इरिटेट (00:31:43) नहीं करना। काम करके रखना है। सीजर (00:31:46) प्रिकॉशंस हम लेंगे। उसके बाद नोटिफाई (00:31:48) इमीडिएटली इफ परप्यूरा और पेटकी अपीयर्स। (00:31:50) प्यूरा और पेटकी हमने देखा कि मेनिंजोकोकल (00:31:53) मेनिंजाइटिस में ये साइन आते हैं। और (00:31:55) मेनिंजोकोकल मेनिंजाइटिस लाइफ थ्रेटिंग हो (00:31:58) सकता है। इसमें क्या होता है डीआईसी (00:32:00) डिसएमिनेटेड इंट्रावस्कुलर कोगुलेशन हो (00:32:02) सकता है। मतलब इंफेक्शन जब पूरी बॉडी में (00:32:04) फैल जाता है, सीवियर होता है जो कि (00:32:06) मेनिंजोकोकल मेनिंजाइटिस में होता है तो (00:32:08) पूरी बॉडी में क्लोट्स भी बनते हैं। साथ (00:32:10) में ही ब्लीडिंग का रिस्क बहुत इंक्रीस हो (00:32:12) जाता है। क्योंकि सारे क्लोटिंग फैक्टर (00:32:13) क्लोट्स बनने में कंज्यूम हो जाते हैं। तो (00:32:16) नए क्लॉट नहीं बन पाते और ब्लीडिंग का (00:32:18) रिस्क इंक्रीस हो जाता है। जो कि क्या है? (00:32:20) एक तो लाइफ थ्रेटनिंग है और हमको इसको (00:32:22) मेडिकलली इमरजेंसी है। यह एकदम से ट्रीट (00:32:25) इस पेशेंट को करना होता है। सो आई होप (00:32:28) आपको मेनंजाइटिस क्लियर हुआ। इफ यू (00:32:30) अंडरस्टुड दिस वीडियो देन प्लीज लाइक, (00:32:32) सब्सक्राइब एंड शेयर टू माय चैनल। थैंक यू (00:32:34) फॉर वॉचिंग।

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