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Classical Test Theory and Item Response Theory | unit 3 psychological testing| UGC NET DECEMBER 2025 (YouTube Video Transcript)

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Title: Classical Test Theory and Item Response Theory | unit 3 psychological testing| UGC NET DECEMBER 2025
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(00:00:00) Your YouTube transcript will appear here (00:00:09) हेलो एवरीवन गुड इवनिंग हाउ आर यू डूइंग (00:00:12) आई होप यू आर ऑल डूइंग गुड वेलकम टू (00:00:16) टेक्नोलॉजी चलिए (00:00:19) स्टार्ट (00:00:22) इफ यू आर हियर फॉर द फर्स्ट टाइम यहां पे (00:00:24) आपको कंप्लीटली यूजीसी नेट की प्रिपरेशन (00:00:26) मैं करवाने वाली हूं फर्स्ट साइकोलॉजी (00:00:29) टीचिंग विल बी (00:00:30) नोट्स आपको प्रोवाइड मैं करवा दूंगी। सभी (00:00:32) के पीवाई एजुकेशन सभी चीज़ करने वाले हैं (00:00:35) यहां पे। ऑन YouTube यूजीसी नेट (00:00:41) दिस विल बी कंप्लीट (00:00:44) चलो या अगर आप क्लासेस ढूंढने में क्लासेस (00:00:47) नहीं मिलते तो प्लिस्ट पे सबसे पहले (00:00:51) Telegram चैनल (00:00:54) तो नहीं मिलता कई बार मेरे पास आता है कि (00:00:55) Telegram चैनल नहीं मिलता है। तो Telegram (00:00:58) चैनल चैनल के डिस्क्रिप्शन में भी है और (00:01:01) आपके पास वीडियोस के डिस्क्रिप्शन में भी (00:01:04) मिल जाता है। ये इस तरीके से हमने (00:01:06) प्लेलिस्ट बना रखी है सभी आपकी क्लासेस (00:01:09) की। तो यूनिट वन, यूनिट टू की क्लासेस, (00:01:11) यूनिट थ्री तीनों की बनी हुई है (00:01:12) प्लेलिस्ट। फर्स्ट क्लास से जाके आप लोग (00:01:14) देख सकते हैं। (00:01:16) यूनिट थ्री हमारा चल रहा था साइकोलॉजिकल (00:01:18) टेस्ट से। अभी तक जो क्लासेस हुई है, आई (00:01:20) होप आप लोगों को समझ आई होंगी। उसमें कुछ (00:01:23) भी रहता है जो भी रहता है आप लोग मुझे बता (00:01:25) सकते हो कमेंट कर सकते हो (00:01:29) आज हम बात करेंगे आज हम कुछ क्लासिक थ्यरी (00:01:32) की बात करेंगे आपके साइकोमेट्रिक के (00:01:34) साइकोमेट्रिक क्या है बेसिकली ये आपका (00:01:38) साइंस जो कि मेजर करता है आपके इंटेलिजेंस (00:01:40) पर्सनालिटी एटीट्यूड जैसी चीजें फॉर (00:01:42) एग्जांपल तो वो क्या है वो साइकोमेट्रिक (00:01:45) ही तो है तो साइकोल जी को आप क्या कर रहे (00:01:48) हो बेसिकली आप साइकोलॉजिकल कंस्ट्रक्ट्स (00:01:50) को क्या कर रहे हो मेजर कर रहे आपके पास (00:01:53) कोई मेजरमेंट का क्राइटेरिया है वो क्या (00:01:55) है वो साइकोमेट्रिक्स है तो उसी (00:01:57) साइकोमेट्रिक्स के फाउंडेशनल अप्रोचेस में (00:01:59) आती है ये क्लासिकल टेस्ट (00:02:02) तो इट इज़ बेसिकली ये देखने के लिए और इसका (00:02:05) ये कहना है कि कैसे आपका जो स्कोर है अब (00:02:08) क्या हो रहा है आप इंटेलिजेंस का स्केल दे (00:02:12) रहे हो या आप एटीट्यूड का दे रहे हो (00:02:14) पर्सनालिटी का दे रहे हो तो उसके अंदर ये (00:02:16) बताना कि जो हमारे पास स्कोर आ रहा है वो (00:02:20) कितना उस इंडिविजुअल की ट्रू एबिलिटी के (00:02:23) साथ रिलेट करता है। क्या उसके अंदर कितने (00:02:26) एरर हैं? ये सब हमें कौन बताता है? ये (00:02:29) हमें क्लासिकल टेस्ट थ्योरी बताती है। एंड (00:02:32) अलोंग विद दिस (00:02:34) ये हमें एक तरह का आपसे कहें तो मेजर ऑफ़ (00:02:36) रिलायबिलिटी भी है। (00:02:40) तभी इसको आप थ्योरी ऑफ़ रिलायबिलिटी भी (00:02:42) कहते हैं। (00:02:50) थ्योरी ऑफ़ रिलायबिलिटी। (00:02:54) क्योंकि क्या कर रहा है? यह देख रहा है कि (00:02:56) जो टेस्ट स्कोर है वो कितने किस हद तक (00:02:59) रिफ्लेक्ट कर रहे हैं आपके ट्रू स्कोर को (00:03:02) और बेसिकली कि जो आप हैं ये समझिए कि जो (00:03:06) आप हैं उसको वो कितना अच्छे से दिखा पा (00:03:08) रहे हैं। अगर आपको डिप्रेशन है तो आपका (00:03:10) टेस्ट डिप्रेशन दिखाना चाहिए। तो किस हद (00:03:13) तक किस एक्सटेंट तक टू व्हिच एक्सटेंट इट (00:03:17) कैन शो और योर फुल रिफ्लेक्ट्स (00:03:21) व्हाट इज गोइंग ऑन रिद (00:03:25) समझ रहे? दैट इज व्हाई इट इज आल्सो अ (00:03:28) थ्योरी ऑफ रिलायबिलिटी। क्योंकि हमें यह (00:03:29) रिलायबिलिटी समझने में हेल्प करती है। (00:03:31) हमें फार्मूला डिराइव करके देती है कि आप (00:03:34) इसके थ्रू क्या कर सकते हैं? आप (00:03:36) रिलायबिलिटी को का एक एस्टीिमेशन लगा सकते (00:03:38) हैं। तो हमें क्या दो चीजें मोटी-मोटी बता (00:03:42) रही है क्लासिकल टेस्ट थ्योरी कि (00:03:45) पहली चीज तो हाउ मच ऑफ योर टेस्ट स्कोर (00:03:48) रिफ्लेक्ट्स योर एबिलिटी। आपकी रियल (00:03:51) एबिलिटी किस हद तक आपका स्कोर बता पाता है (00:03:54) और कितना उसके अंदर एरर है। दूसरी चीज यह (00:03:59) हमें रिलायबिलिटी का एस्टिमेशन करने में (00:04:02) हेल्प करती है। तो ये दो चीजें हैं जो (00:04:05) हमें यहां से पता चलती है। (00:04:09) चलो अब हम एक एग्जांपल लेते हैं। (00:04:16) लेट्स सपोज कि आपका मैथ्स का एग्जाम (00:04:19) मैथ्स का एग्जाम है, साइकोलॉजी का एग्जाम (00:04:22) है, किसी का भी एग्जाम। (00:04:29) सो नाउ यू हैव योर (00:04:36) मैथ्स। (00:04:42) अब इसके अंदर क्या हुआ? यह एक 100 मार्क्स (00:04:46) का एग्जाम है और आपको इसमें आए आउट ऑफ 100 (00:04:52) 7 ये आपने स्कोर किया आपने 70 नंबर आप (00:04:55) लेके आए हो मैथ्स के अंदर आउट ऑफ 100 अब (00:05:00) हुआ ये (00:05:02) कि चलो एग्जाम था और आपके टीचर ने गलती से (00:05:08) आपको बैठा दिया टॉपर के पास आपको कुछ नहीं (00:05:11) आता है मैथ्स ठीक है ना आपको कुछ नहीं आता (00:05:14) है आपको बस बस काम चला वो आप कर लेते हो (00:05:16) बाकी तो पर लेकिन उस दिन आपका लक ये रहा (00:05:20) कि मैम ने आपको किसके पास बिठा दिया आपके (00:05:22) जो भी इनविजिलेटर थे उन्होंने आपको आपके (00:05:25) क्लास के टॉपर और वो टॉपर निकल गया बाय (00:05:27) चांस आपका फ्रेंड (00:05:29) अब टॉपर भी है और फ्रेंड भी है तो आपने (00:05:33) क्या किया बोला यार बता दे मैंने कहा चल (00:05:37) ठीक है बता देता हूं (00:05:39) तो उसने आपको (00:05:42) काफी सारी हेल्प कर दी आपने ने उसने देखा (00:05:45) और आप उसके देखतेदेखते कॉपी करते गए। फिर (00:05:47) उसने कहा कि भाई मैं टॉपर हूं। मुझे टॉप (00:05:51) करने दो। तुम टॉप मत करो। तो लिमिट में (00:05:54) कॉपी करो। तो बोले चल ठीक है। (00:05:58) अब (00:05:59) आपको उसमें से कितना आता था? आपको तो 50 (00:06:02) मार्क्स का पेपर आता था। (00:06:06) आपको कितना आता था? 50 मार्क्स का। पर (00:06:09) आपने कहा 50 में से तो काम नहीं चलेगा। घर (00:06:11) वाले मारेंगे तो फिर क्या करें? 20 नंबर (00:06:13) का कॉपी कर लेते हैं। तो 20 मार्क्स का (00:06:16) आपने क्या कर लिया? यह आपने कर लिया कॉपी। (00:06:22) चीटिंग कर ली। टोटल नंबर कितने आ गए? 70 आ (00:06:26) गए। बहुत शाबाशी भी आपको मिल गई। अब (00:06:31) नाउ इज दिस सिनेरियो क्या ये 70 मार्क्स? (00:06:35) आपका रियल स्कोर है? (00:06:38) क्या आपकी एबिलिटी है 70 मार्क्स ले आने (00:06:42) की मैथ्स के एग्जाम में? नहीं ना? नहीं। (00:06:47) बट स्टिल ये आपको कितने आ रहे हैं? 70 आ (00:06:50) रहे हैं। तो क्या मुझे ये 70 मार्क्स मेरी (00:06:52) रियल एबिलिटी दिखा पा रहे हैं? बिल्कुल (00:06:55) नहीं। तो क्या इस तरह का टेस्ट में भी हो (00:06:57) जाता है? मेजरमेंट स्केल्स में, (00:06:59) साइकोमेट्रिक स्केल्स में भी ऐसा हो जाता (00:07:01) है। हो जाता है कई बार। अगर कोई (00:07:03) इंडिविजुअल क्या करे? वो क्वेश्चन देखा (00:07:05) उसने डिप्रेशन का टिक टिक टिक टिक किया जा (00:07:07) रहा है। उसको कोई डिप्रेशन नहीं है। बहुत (00:07:09) ही मस्त एकदम चिल लाइफ चल रही है उसकी। (00:07:12) फिर भी उसने क्या किया? उसने पढ़ा नहीं। (00:07:13) बस सब पे एग्री एग्री करता गया और क्या हो (00:07:16) गया? डिप्रेशन आ रहा है सीरियल। (00:07:20) तो ये क्या है? ये कहीं ना कहीं एक एरर हम (00:07:23) कह सकते हैं कि एरर हुआ है। जैसे यहां पे (00:07:26) ये 20 मार्क्स का एरर हुआ। वैसे ही वो भी (00:07:30) क्या है? वो भी एरर है। तो ये क्या है? कम (00:07:34) होना या ज्यादा होना इज एरर। तो वहीं पर (00:07:37) आपकी क्लासिकल टेस्ट थ्योरी एक फार्मूला (00:07:39) देती है। (00:07:42) x = t + (00:07:57) x क्या है आपका? (00:07:59) x है ऑब्जर्व्स। (00:08:04) ऑब्जर्व स्कोर का मतलब जो स्कोर मैं (00:08:06) ऑब्जर्व कर पा रही हूं। जो स्कोर स्कोर (00:08:08) मुझे दिखाई दे रहा है तो मुझे कितना दिखाई (00:08:11) दे रहा है? मुझे दिखाई दे रहा है 70। (00:08:16) तो हमें क्या लग रहा है कि भाई 70 आए हैं (00:08:19) टी होता है ट्रू फोर। (00:08:24) और ई होता है एरर। (00:08:28) नाउ (00:08:30) अब देख तो मुझे 70 रहे हैं कि भाई ठीक है (00:08:33) बहुत अच्छे स्कोर आए हैं मेरे पास 70 नंबर (00:08:34) मैं लेकर आ गई हूं बहुत बढ़िया लेकिन क्या (00:08:37) 70 ही मेरे एक्चुअल स्कोर है क्या मेरी (00:08:39) एक्चुअल एबिलिटी ये दिखा रहा है 70 नहीं (00:08:43) ना मेरे को तो 50 मार्क्स जितना ही आता था (00:08:45) 20 मार्क्स तो वो मेरा दोस्त है जिसने (00:08:47) मुझे बता दिया इसकी वजह से मेरा स्कोर 70 (00:08:50) तक पहुंच गया अगर यह मुझे नहीं बताता अगर (00:08:53) बाय चांस यहां पे ये इंडिविजुअल नहीं होता (00:08:56) फ्रेंड नहीं होता और मुझे नहीं किसी से (00:08:59) पूछ पाता तो क्या होता? मेरे को कितने (00:09:02) मार्क्स आते? मेरे को 50 ही आते। तो मेरा (00:09:05) ट्रू स्कोर कितना? 50। अब ये जो एक्स्ट्रा (00:09:09) मेरे को 20 मार्क्स मिले। क्या ये कहीं ना (00:09:11) कहीं एक एरर है? एरर ही है तो 20 आपका (00:09:15) एरर। (00:09:17) तो यह क्लासिकल टेस्ट थ्योरी बेसिकली आपको (00:09:20) यही डिफाइन करने में हेल्प करती है। यही (00:09:23) समझने में हेल्प करती है कि आपका स्कोर (00:09:26) किस हद तक यह दिखा पा रहा है कि आपने जो (00:09:30) स्कोर किया है वो आपकी एक्चुअल एबिलिटी है (00:09:33) ना कि कोई एरर है। यह कौन बताता है? यह (00:09:36) क्लासिकल टेस्ट थ्योरी हमें बताती है। (00:09:41) फिर (00:09:42) इनका यह भी कहना है कि आपकी जो ट्रू स्कोर (00:09:45) होता है, जो आपकी एबिलिटी होती है, वह कभी (00:09:47) बदलती नहीं। (00:09:50) अब आप मैथ्स में एवरेज हो या आप टॉपर हो, (00:09:56) आप कुछ भी हो सकते हो। अब ये स्कोर थोड़ा (00:09:58) उल्टा भी जा सकता है। जैसे (00:10:02) अगेन लेट से यू हैव योर साइकोलॉजी एग्जाम। (00:10:07) और आप कहें, आप है क्लास के टॉपर। (00:10:10) लेकिन अब आपकी तबीयत खराब है। आपकी फीवर (00:10:13) है। आपकी और भी तबीयत खराब हो रही है। (00:10:14) काफी टाइम से और आप कुछ पढ़ नहीं पाए। (00:10:17) तो आपको 100 में से स्कोर आता है 60 का। (00:10:21) ये भी आप बिना पढ़े लिया है। जो भी आपने (00:10:22) पहले पढ़ा हुआ था उसके बेसिस पे आप 60 (00:10:24) मार्क्स लेके आ गए। (00:10:28) लेकिन क्या अब ये आपकी ट्रू एबिलिटी दिखा (00:10:30) रहा है। क्योंकि आपके अंदर कैलिबर कितना? (00:10:33) आप कितना कर सकते हो? आप तो 100 और 100 कर (00:10:36) सकते हो। लास्ट एग्जाम में तो आप 100 आउट (00:10:38) ऑफ 100 ही ले आए थे। (00:10:41) लेकिन अब क्योंकि आपकी तबीयत खराब है (00:10:43) क्योंकि कुछ एक्सटर्नल कंडीशंस ऐसी हो गई (00:10:46) है एक्सटर्नल इंटरनल कुछ भी ऐसे आ गई है (00:10:49) चीजें जिसकी वजह से आप क्या कर पाए आप (00:10:51) अपना नहीं अच्छा स्कोर कर पाए (00:10:55) तो अगेन आपकी एबिलिटी कितनी थी 100 की (00:10:59) सॉरी ऑब्वियस कितना स्कोर आया 60 (00:11:04) लेकिन ट्रू स्कोर क्या था ट्रू स्कोर तो (00:11:06) 100 है मेरी कैबिलिटी तो कितनी है 100 (00:11:10) लाने की है। मैं 100 ले आती (00:11:12) लेकिन लाई कितना हूं? 60 (00:11:16) तो एरर क्या हो गया? -40 (00:11:20) तो इससे क्या मुझे ये समझ में आया कि मेरा (00:11:23) एरर पॉजिटिव भी हो सकता है और नेगेटिव भी (00:11:25) हो सकता है। योर एरर कैन बी पॉजिटिव और (00:11:29) नेगेटिव। बट ये एरर है। क्या एरर पॉजिटिव (00:11:34) हो या नेगेटिव हो डिजायरेबल है? बिल्कुल (00:11:36) नहीं है। क्या हमें एरर चाहिए हमारे स्टडी (00:11:39) के अंदर? नहीं चाहिए। चाहे वो पॉजिटिव एरर (00:11:43) आ रहा हो, चाहे वो नेगेटिव एरर आ रहा हो। (00:11:45) हमें किसी प्रकार का कोई एरर नहीं चाहिए। (00:11:51) तो दीज़ एरर्स बी पॉजिटिव (00:12:00) और नेगेटिव। (00:12:03) बट दोनों ही अनडिजायरेबल है। (00:12:13) ये याद रखना (00:12:16) और इनका ये भी कहना है कि जो आपकी ट्रू (00:12:18) एबिलिटी है वो कभी बदलती नहीं है। हां वो (00:12:22) सिचुएशन के हिसाब से जो भी एरर होती है (00:12:24) उसके हिसाब से कम या ज्यादा हो जाती है या (00:12:26) तो घट जाती है या बढ़ जाती है बट वो कभी (00:12:29) बदलती नहीं है। समझ रहे हो? अगर आपका (00:12:33) आईक्यू 110 है, तो आपका आईक्यू 110 ही (00:12:36) रहेगा। हो सकता है सिचुएशनल फैक्टर्स की (00:12:40) वजह से या इंडिविजुअल डिफरेंसेस की वजह से (00:12:43) वो घट जाए या वो बढ़ जाए। बट वह एक्चुअल (00:12:48) स्कोर नहीं बदलेगा। आपका ऑब्जर्व स्कोर (00:12:50) बदल सकता है। बट आपका ट्रू स्कोर कभी नहीं (00:12:52) बदल सकता। आईक्यू 110 ही है। बट क्योंकि (00:12:56) कभी कर नहीं पाए अच्छा परफॉर्म या कभी (00:12:59) चीटिंग कर लिया। इस तरह की चीजों से क्या (00:13:01) हो सकता है वो कम या ज्यादा हो सकता है। (00:13:03) अब डिप्रेशन है तो है किसी को डिप्रेशन है (00:13:08) बट अब वो क्या कर रहा है? अगर वो टेस्ट (00:13:10) अच्छे से नहीं करता है। वो मार्क अच्छे से (00:13:13) नहीं करता या कोई और प्रॉब्लम आती है, कोई (00:13:15) और एरर हमारे पास आते हैं तो क्या हो सकता (00:13:17) है? उसके स्केल के ऊपर का डिप्रेशन कम शो (00:13:20) कर सकता है। बट इट डज़ नॉट मीन कि उसके (00:13:22) उसमें स्ट्रेस अ डिप्रेशन नहीं है। (00:13:27) समझ रहे हो? तो ट्रू स्कोर नेवर चेंज आपको (00:13:31) याद रखना (00:13:41) क्या हमें ये चीज समझ आई? क्या हमें ये (00:13:44) फ़ूला समझ आया है? आई होप दिस इज़ क्लियर टू (00:13:48) ऑल ऑफ़ यू। आप लोगों को समझ आया होगा ये (00:13:51) ऑब्ज़र्व्स टू स्कोर एरर स्पोर्स क्या है? (00:13:56) नाउ अब जो आपके एरर होते हैं ना वो दो (00:14:00) तरीके के होते हैं। (00:14:03) कौन-कौन से? रैंडम एरर और सिस्टमेटिक एरर। (00:14:08) रैंडम एरर वो एरर है जिसका (00:14:11) हम इसको हम कंट्रोल नहीं कर सकते एज अ (00:14:14) रिसर्च। अब मेरे पार्टिसिपेंट का मूड (00:14:17) अच्छा है। उसका मूड खराब है। वह थका हुआ (00:14:20) है। वह घर से लड़ के आया है या उसको कहीं (00:14:23) पर जाने में लेट हो रही है। इस वजह से वो (00:14:25) सिर्फ टिक टिक टिक टिक कर रहा है। वो क्या (00:14:26) कर रहा है? यह मेरे कंट्रोल में नहीं है। (00:14:29) क्या मैं कंट्रोल कर सकती हूं किसी का (00:14:31) मूड? क्या मैं कंट्रोल कर सकती हूं कि कोई (00:14:33) अच्छे मूड में आए, अच्छा टेस्ट दे या वो (00:14:36) इस तरीके से टिक ना करे। मैं नहीं कर सकती (00:14:38) कंट्रोल। यह मेरे कंट्रोल के बियों्ड है (00:14:41) क्योंकि इंडिविजुअल डिफरेंसेस बेसिकली आप (00:14:44) कहें तो पार्टिसिपेंट्स कैरेक्टरिस्टिक्स (00:14:47) तो रैंडम एरर में क्या आती है? रैंडम एरर (00:14:49) में आते हैं पार्टिसिपेंट के (00:14:50) कैरेक्टरिस्टिक्स (00:14:59) जिस पे एज अ रिस्चर मेरा कोई कंट्रोल नहीं (00:15:02) हो सकता है। और इन सब चीजों की वजह से जो (00:15:05) एरर आते हैं वो कौन से एरर होते हैं? (00:15:07) रैंडम एरर क्या रैंडम एरर नॉर्मली (00:15:10) डिस्ट्रीब्यूटेड होंगे? होंगे। तो ये (00:15:13) पार्टिसिपेंट्स की कैरेक्टरिस्टिक्स है और (00:15:14) ये रैंडमली डिस्ट्रीब्यूट हो नॉर्मली (00:15:17) डिस्ट्रीब्यूट हो जाते हैं। (00:15:20) दे आर नॉर्मली डिस्ट्रीब्यूटेड। ये दो (00:15:22) चीजें आपको यहां पे याद रखनी है। (00:15:32) अब सिस्टेटिक एरर क्या है? सिस्टेटिक एरर (00:15:34) है मेरे पार्ट पे कि मैं मैं किसी (00:15:37) एक्सटर्नल कंडीशंस या डिजाइन को कंट्रोल (00:15:39) नहीं कर पा रही हूं। प्रॉपर्ली एडमिनिस्टर (00:15:41) नहीं कर पा रही हूं कोई चीज। उसकी वजह से (00:15:44) एरर आ रहा है। अब मैंने क्या करा है? (00:15:45) मैंने आईक्यू का टेस्ट मैं कर रही हूं और (00:15:48) बाहर से बहुत ज्यादा शोर हो रहा है। नॉइज़ (00:15:50) हो रही है। ऐसे में क्या होगा? ऑब्वियसली (00:15:53) द पार्टिसिपेंट विल नॉट बी एबल टू (00:15:55) कंसंट्रेट। आप कंसंट्रेट नहीं कर पाएगा। (00:15:58) क्वेश्चन अच्छे से रीड नहीं कर पाएगा। तो (00:16:00) क्या होगा? आंसर गलत होने के चांसेस (00:16:02) ज्यादा हैं। आपका मैथ्स का एग्जाम चल रहा (00:16:04) है, आपका साइकोलॉजी का एग्जाम चल रहा है, (00:16:06) कोई भी एग्जाम चल रहा है और बाहर से बहुत (00:16:08) वो बाजे की आवाजें आ रही है, कुछ और हो (00:16:10) रहा है, कोई लड़ रहा है। सब, मतलब बहुत (00:16:12) सारी चीजें हो रही है। तो मुझे बताइए आपका (00:16:14) ध्यान एग्जाम पे होगा कि बाहर ही देखने (00:16:16) में होगा अच्छा कौन लड़ रहे हैं? क्या हो (00:16:17) गया है? है ना? तो वो चीजें अब ये किसकी (00:16:21) गलती है? ये मेरी गलती है। मुझे ये सब (00:16:23) चीजें कंट्रोल करनी चाहिए। मेरे को एक ऐसा (00:16:24) एनवायरमेंट देना चाहिए जहां पे ये सब (00:16:26) चीजें नहीं हो। तो यह रिस्चर की गलती (00:16:29) सिस्टमेटिक एरर वो एरर है जो किसकी वजह से (00:16:32) होते हैं? आपके रिस्चर की वजह से होते (00:16:34) हैं। (00:16:36) क्या इनको प्रिवेंट किया जा सकता है? इनको (00:16:38) प्रिवेंट किया जा सकता है। तो दीज़ एरर कैन (00:16:41) बी प्रिवेंटेड। (00:16:48) आई होप दिस इज़ क्लियर। तो ये दो तरीके के (00:16:50) हमारे पास यहां पे एरर होते हैं। (00:16:57) अब जैसा कि मैंने आपको बताया कि यहां पर (00:16:59) आपके पास क्या है? यह रिलायबिलिटी भी (00:17:02) बताता है। आपके जो स्कोर्स आ रहे हैं उसको (00:17:06) क्या कहता है ये? (00:17:09) अच्छा एक चीज और बताती हूं। (00:17:12) पहले कि आप इनका यह भी कहना है कि जो ट्रू (00:17:16) स्कोर है ना इस ट्रू स्कोर के बीच में और (00:17:19) आपके एरर के बीच में कोई रिलेशनशिप नहीं (00:17:22) होता है। देयर इज़ नो रिलेशनशिप बिटवीन (00:17:25) ट्रू स्कोर एंड एरर। (00:17:28) ये दोनों क्या है? ये दोनों अलग-अलग है। (00:17:30) ये अलग-अलग है। तभी तो देखो हम इनको अलग (00:17:32) कर पाए ना ऑब्ज़र्व्ड में से। ऑब्ज़र्व में (00:17:35) से हमने क्या करा? हमने एरर को निकाल (00:17:37) दिया। तो योर एरर स्कोर एंड योर ट्रू (00:17:41) स्कोर आर नॉट एट ऑल कोरिलेटेड। इनके बीच (00:17:44) में किसी प्रकार का कोरिलेशन नहीं होता (00:17:47) है। क्यों? क्योंकि जो रैंडम एरर है आपके (00:17:50) कौन से एरर की बात हो रही है यहां पे? (00:17:52) रैंडम एरर है। रैंडम एरर को हम थोड़ा (00:17:54) ज्यादा फोकस करते हैं। तो जो रैंडम एरर है (00:17:56) ना वो आपकी एबिलिटी नहीं छीन सकते। (00:18:00) क्या आपको मैथ्स में कितना आता है? आपको (00:18:02) साइकोलॉजी में कितना आता है? वो आपके फीवर (00:18:04) होने से कम या ज्यादा हो जाएगा? एक बार हो (00:18:07) जाएगा बट आपके अंदर जो उसकी एबिलिटी है उस (00:18:10) चीज को करने की वो तो खत्म नहीं होगी। अगर (00:18:12) आप बहुत अच्छा कोई स्पोर्ट्स खेलते हैं तो (00:18:15) आप एक बार खराब खेल लेंगे। (00:18:18) दो बार खराब खेल लेंगे। कुछ भी हो सकता (00:18:20) है। बट आपके अंदर से वो एबिलिटी तो नहीं (00:18:22) चली जाएगी उसको खेलने की या आपको ये भूल (00:18:25) जाएंगे आप किसको कैसे खेला जाता है? कैसे (00:18:27) किया जाता है। नहीं ना? आप अच्छा परफॉर्म (00:18:30) करेंगे। तो एरर कौन सी एरर? ज्यादा फोकस (00:18:33) किस पे है? इट इज़ मोर फोकस ऑन रैंडम एरिज (00:18:40) देयर इज़ नो कोरिलेशन (00:18:53) को (00:18:58) और यह तो मैंने आपको बता ही दिया कि एरर (00:19:00) क्या रहता है? नॉर्मली डिस्ट्रीब्यूटेड (00:19:02) यहां पर रहता है। (00:19:07) इसका मतलब अगर सैंपल लार्ज है, बड़ा सैंपल (00:19:10) है तो आगे जाके एरर क्या हो जाएगा? वो (00:19:12) जीरो हो जाएगा। क्योंकि आपका क्या रहता (00:19:14) है? आपका लॉन्ग बड़े सैंपल में लार्ज सैंपल (00:19:17) में नॉट लॉन्ग सैंपल। लार्ज सैंपल के अंदर (00:19:20) जो आपका मीन होता है वो क्या हो जाता है? (00:19:22) ऑलमोस्ट बराबर हो जाता है। फॉर योर (00:19:24) ऑब्जर्व स्कोर और फॉर योर ट्रू स्कोर। तो (00:19:27) इस वजह से एरर क्या हो जाएगी? ज़ीरो हो (00:19:29) जाएगी। (00:19:31) नाउ रिलायबिलिटी क्या होती है? ऑब्वियसली (00:19:33) हम पढ़ चुके हैं कंसिस्टेंसी एंड (00:19:35) स्टेबिलिटी ऑफ योर टेस्ट कोर्स। आपके जो (00:19:37) स्कोर्स है उनमें कितनी कंसिस्टेंसी आ रही (00:19:39) है? कितना हम उस पे विश्वास कर सकते हैं (00:19:42) विश्वसनीय विश्वसनीयता आपकी टेस्ट की, (00:19:44) आपके स्कोर्स की। तो ये भी कौन हेल्प करता (00:19:47) है? ये हमें चेक करने में हेल्प करता है (00:19:49) आपके रिलायबिलिटी को। कौन? क्लासिकल टेस्ट (00:19:51) थ्योरी। (00:19:53) अब यहां पर क्या है? यहां पर आपको इसका (00:19:56) फार्मूला दिया हुआ है कि आप किस तरीके से (00:19:58) इसको निकाल सकते हैं। (00:20:00) तो रिलायबिलिटी क्या होती है? ट्रू (00:20:03) वेरियंस। ट्रू वेरियंस क्या है आपकी? जो (00:20:06) आपका ट्रू स्कोर है। (00:20:08) ट्रू स्कोर अपॉन ट्रू प्लस एरर। यानी कि (00:20:11) इसको आप क्या कह सकते हैं? क्या आप इसको (00:20:13) कंबाइन ऑब्जर्व स्कोर कह सकते हैं? (00:20:19) ऑब्जर्व वैरियंस या फिर टोटल वेरियंस। (00:20:27) ये टर्म्स लिखी भी आ सकती है। अच्छा तो (00:20:30) इसका मतलब है कि हमें क्या दिखाता है? (00:20:33) हमें रिलायबिलिटी का कैसे अनुमान लगाते (00:20:35) हैं हम या हम रिलायबिलिटी को किस तरीके से (00:20:37) एस्टीिमेट करते हैं वो हम करते हैं इसके (00:20:41) रेश्यो के बेसिस पे कि हमारे टोटल वेरियंस (00:20:44) के रेश्यो का क्या रेश्यो है ट्रू वेरियंस (00:20:47) के साथ में कि अगर मेरा टोटल 100 है तो 60 (00:20:52) मेरी क्या है? (00:20:54) ट्रू वेरियंस है। इट मींस दिस इज़ माय (00:20:58) रिलायबिलिटी। (00:21:02) तो इन दोनों के इसके कॉन्टेक्स्ट में आप (00:21:04) कहें तो आपके टोटल वेरियंस के कॉन्टेक्स्ट (00:21:07) में हम देखते हैं कि ट्रू वेरियंस कितनी आ (00:21:10) रही है। (00:21:15) आई होप दिस इज़ क्लियर टू ऑल ऑफ़ यू। (00:21:19) इज इट? (00:21:23) चलिए (00:21:28) नाउ (00:21:33) अब ये क्यों आपको कई बार क्वेश्चन भी आया (00:21:35) हुआ है पहले पूछ भी लेते हैं कि चलो ये (00:21:38) फार्मूला है हमें रेश्यो के या उसके (00:21:40) कॉन्टेक्स्ट में बताता है ऑब्जर्व वेरियंस (00:21:42) से टोटल वेरियंस के कॉन्टेक्स्ट में हमें (00:21:43) बताता है कि ट्रू वेरियंस कितनी है और (00:21:45) उससे हम पता करते हैं कि अच्छा दिस इज़ माय (00:21:47) रिलायबिलिटी (00:21:49) ऐसा क्यों (00:21:51) क्योंकि हमारा मानना है कि हमारे जो ट्रू (00:21:54) स्कोर है और जो हमारे एरर स्कोर है वह एक (00:21:56) दूसरे से रिलेटेड नहीं है। वही जो मैंने (00:21:59) आपको पहले बताया कि रैंडम एरर आपकी (00:22:02) एबिलिटी को ट्रू एबिलिटी को इन्फ्लुएंस (00:22:04) नहीं कर सकता है इंडिविजुअल की। तभी हम (00:22:06) क्या करते हैं? उस टोटल वेरियंस के (00:22:08) कॉन्टेक्स्ट में देखते हैं कि आपकी ट्रू (00:22:10) वेरियंस कितनी है। हमें आपकी टोटल वेरियंस (00:22:14) से मतलब नहीं है। उस टोटल वेरियंस से हम (00:22:16) क्या देखेंगे? हम ट्रू वेरियंस देखेंगे कि (00:22:18) आपका ट्रू स्कोर कितना आ रहा है। (00:22:22) समझ रहे हो? तो अगर आपका ट्रू स्कोर 60 है (00:22:24) और आपका ऑब्जर्व स्कोर 100 है तो मैं (00:22:27) कहूंगी कि आपकी रिलायबिलिटी कितनी है? (00:22:29) 0.60 है। तो अच्छी रिलायबिलिटी है। (00:22:34) इस तरीके से (00:22:44) एरर डू नॉट (00:22:57) एबिलिटी ऑफ़ इंटेंशन (00:23:03) आई होप दिस इज़ क्लियर। (00:23:06) नाउ कुछ इसके एजम्पशनंस हैं। जैसे कि नो (00:23:10) कोरिलेशन बिटवीन ट्रू स्कोर एंड एरर (00:23:12) स्कोर। ये मैंने आपको बता दिया। अगर लार्ज (00:23:14) सैंपल होता है तो एवरेज एरर क्या हो जाती (00:23:16) है? ज़ीरो हो जाती है। क्यों? क्योंकि आपके (00:23:19) लार्ज स्कोर के अंदर, लार्ज सैंपल के अंदर (00:23:22) ट्रू स्कोर और ऑब्ज़र्व स्कोर में ज्यादा (00:23:24) डिफरेंस नहीं रहता है। उनका मीन बराबर हो (00:23:25) जाता है। तो इसकी वजह से आपका जो एरर है (00:23:27) वो ज़ीरो हो जाती है। हो जाता है। अब इसका (00:23:31) कहना है कि जो आइटम्स हैं आपके वो हमेशा (00:23:33) किस पे होने चाहिए? मैट्रिक लेवल पे होने (00:23:35) चाहिए। न्यूमेरिकली मेजरेबल होने चाहिए। (00:23:38) ये एक तो सबसे बड़ी इसकी एक तो आपको ये याद (00:23:41) भी रखना है। इसका मतलब हमारे पास जो (00:23:43) आइटम्स यानी कि क्वेश्चंस है वो कैसे होने (00:23:45) चाहिए? न्यूमेरिकल फॉर्म में होने चाहिए। (00:23:47) न्यूमेरिकली मेजरेबल होने चाहिए। अब अगर (00:23:50) हम साइकोलॉजी में क्वेश्चंस की बात करें। (00:23:53) आपको लिखा है आई फील लोनली। (00:23:58) अब आप मुझे बताइए इसके अंदर से कोई (00:24:00) न्यूमेरिकल वैल्यू है? क्या इसको (00:24:01) न्यूमेरिकली मेजर किया जा सकता है? इसको (00:24:03) तो यस और नो में मेजर किया जा सकता है। (00:24:05) सिर्फ (00:24:08) मैं इसको नंबर में तो मेजर नहीं कर सकती। (00:24:10) क्या आई फील लोनली ऑन अ स्केल ऑफ़ टू ऑन अ (00:24:12) स्केल ऑफ़ 10। आई फील टू या फोर या फाइव (00:24:17) कैसे नहीं हो सकता। तो मैं सिर्फ इसमें (00:24:20) बता सकती हूं या तो यस या तो नो आई फील (00:24:22) ओनली यस आई फील ओनली नो खत्म। तो कहीं ना (00:24:26) कहीं हम कह सकते हैं कि एक ड्रॉबैक है (00:24:27) इसका क्लासिकल टेस्ट थ्योरी का कि ये (00:24:30) सिर्फ मैट्रिक डेटा को लेता है। लेकिन अगर (00:24:32) हम साइकोलॉजी की बात करें या साइकोमेट्रिक (00:24:35) की इन जनरल बात करें तो वहां पर सारा डाटा (00:24:37) न्यूमेरिकल नहीं है। मोस्टली डाटा (00:24:39) न्यूमेरिकल नहीं है हमारे पास। (00:24:43) सीटीटी इज यूज्ड टू मेजर लेटेंट रेट्स। (00:24:45) ऑब्वियसली लेटेंट यानी हिडन रेट्स हमारी (00:24:49) जो चीज आप ऐसे देख के नहीं बता सकते हो। (00:24:52) आपको टेस्ट करने पड़ेंगे। फिर आपको पता (00:24:54) चलेगा किसी की पर्सनालिटी का, किसी के (00:24:56) एबिलिटीज का, इंटेलिजेंस का, किसी को (00:24:58) डिप्रेशन है कि नहीं है, स्ट्रेस है कि (00:25:00) नहीं। सब कुछ लेट एंट्रिक्स। (00:25:05) समझ रहे हो? अच्छा। अब जो सबसे इंपॉर्टेंट (00:25:08) चीज यह है कि ट्रू स्कोर इज जस्ट एन एस। (00:25:12) यस। यह जो ट्रू स्कोर है कि आपकी एबिलिटी (00:25:15) है 100 स्कोर करने की। आपकी एबिलिटी है 50 (00:25:18) स्कोर करने की। ये सिर्फ क्या है? एक (00:25:20) एजम्पशन है, एक अनुमान है। हम कैसे बता (00:25:24) सकते हैं? कैसे हम इसको प्रूव करें कि (00:25:26) मेरी साइकोलॉजी की एबिलिटी है। जो ट्रू (00:25:29) एबिलिटी है वो 100 ऑन 100 लाने की। यहां (00:25:31) मेरी कैपेसिटी है। हर किसी इंडिविजुअल की (00:25:34) कैपेसिटी है। हर इंडिविजुअल की एबिलिटी है (00:25:36) कि वो 100 में से 100 स्कोर कर सकता है। (00:25:39) बट ये मेरा ट्रू स्कोर तो नहीं। मुझे 60 आ (00:25:42) रहा है तो भी मैं बोल रही हूं कि मेरा (00:25:43) ट्रू स्कोर 100 है। मेरे को 80 आ रहा है (00:25:45) तो भी बोल रही हूं। 100 आ रहा है तो 100 (00:25:48) बोल रही हूं। (00:25:49) तो यह जो ट्रू स्कोर है ना यह कोई (00:25:51) डायरेक्टली ऑब्जरवेबल चीज नहीं है। मैं (00:25:54) ऑब्जर्व कर सकूं कि हां यह आपका ट्रू (00:25:56) स्कोर है। ये सिर्फ मेरा एक अनुमान है कि (00:25:58) हां मेरी एबिलिटी है। कैसे पता आपको कि (00:26:00) आपकी एबिलिटी है 100 मिलाने की? कैसे पता (00:26:02) आपको आज तक नहीं आए फिर भी बोल रहे हो कि (00:26:04) ट्रू स्कोर है मेरा 100 है। तो जब इसका (00:26:07) कोई ऑब्जरवेशन इसको आप ऑब्ज़र्व इसको आप कर (00:26:10) नहीं सकते हो डायरेक्टली। इसका कोई प्रूफ (00:26:12) हम दे नहीं सकते हैं। प्रूव इसको हम कर (00:26:14) नहीं सकते हैं। तो किस बेसिस पे मैं (00:26:16) बताऊंगी कि मेरी इसकी ट्रू स्कोर क्या है? (00:26:18) तो यह तो सिर्फ हम क्या करते हैं? एक (00:26:19) एस्टिमेशन लगाते हैं। एक एजमशन करते हैं (00:26:21) कि हां यह हो सकता है। ऐसे तो काम नहीं (00:26:25) चलता है साइंटिफिक उसमें। (00:26:27) तो ये भी क्या है? एक तरह का ड्रॉबैक है। (00:26:29) इसका एक तरह का नेगेटिव पॉइंट है उसमें। (00:26:34) आई होप दिस इज़ क्लियर टू ऑल ऑफ यू। यहां (00:26:36) पे आप आइटम डिफिकल्टी आइटम डिस्क्रिमिनेशन (00:26:39) भी देखते हैं कि अपन आगे देख। आइटम (00:26:41) डिफिकल्टी क्या होती है? (00:26:43) या (00:26:47) इज दिस क्लियर टू ऑल ऑफ यू? (00:26:52) एक चीज और हम इसमें कुछ चीजें और पॉइंट्स (00:26:54) देखते हैं। जैसे (00:27:01) आपसे टेस्ट लेते हैं। यहां पे जो मेजरमेंट (00:27:04) होता है ना वो टेस्ट लेवल पे होता है। (00:27:11) मेन हमको एक इंडिविजुअल आइटम्स से मतलब (00:27:14) नहीं है। हम क्या देख रहे हैं? हम ओवरऑल (00:27:17) स्कोर देख रहे हैं। मैं यह नहीं देख रही (00:27:19) कि आपने कौन से क्वेश्चन पे सही आंसर दिया (00:27:22) है। कौन से क्वेश्चन पे गलत आंसर किया है। (00:27:24) उससे मुझे कोई मतलब नहीं है। मुझे ये (00:27:28) जानने से कोई मतलब नहीं है कि अच्छा आप (00:27:30) किस एरिया में स्ट्रांग हो या आप किस (00:27:31) एरिया में वीक हो? उससे मुझे कोई मतलब (00:27:33) नहीं है। मुझे मतलब किससे आपको ओवरऑल (00:27:35) कितना स्कोर मिल रहा है। तो यहां पर (00:27:37) मेजरमेंट किस लेवल पर होता है? टेस्ट लेवल (00:27:39) मेजरमेंट पर होता है। (00:27:44) सेकंड (00:27:46) यहां पर जो आपका ट्रू स्कोर है और जो आपका (00:27:48) ऑब्जर्व स्कोर है उनके बीच में आप एक (00:27:50) लीनियर कोरिलेशन देखेंगे। (00:27:56) ट्रू स्कोर (00:27:58) एंड ऑब्जर्व (00:28:05) स्टंग लीनियर को (00:28:08) याद रखना। (00:28:11) लीनियर कोरिलेशन मैंने आपको बताया है। (00:28:16) ऐसा क्यों? क्योंकि आपका ट्रू स्कोर कहीं (00:28:18) ना कहीं आपके ऑब्जर्व स्कोर में ही तो आ (00:28:20) रहा है। आ रहा है कि नहीं आ रहा? यस। तो (00:28:23) जैसे-जैसे आपका एक स्कोर बढ़ेगा वैसे-वैसे (00:28:25) आपका दूसरा भी बढ़ेगा। (00:28:42) या फिर क्या हो सकता है? (00:28:46) या तो एक इनक्रीज होगा तो दूसरा भी (00:28:47) इंक्रीस हो जाएगा। या तो एक डिक्रीज होगा (00:28:50) तो दूसरा इंक्रीस हो जाएगा। इस तरीके से (00:28:53) ये चलता रहता है। इसी तरीके से चलता है। (00:28:55) इस तरीके से लीनियर पोजीशन (00:29:02) अंडर ऑब्जेक्ट। (00:29:07) तो आपसे ये पूछ सकते हैं कि लेवल ऑफ़ (00:29:09) मेज़रमेंट क्या है? टेस्ट लेवल पे मेज़मेंट (00:29:11) करते हैं। यहां पे आइटम को हम एनालाइज़ (00:29:14) नहीं कर रहे। हम टेस्ट को एनालाइज़ कर रहे (00:29:16) हैं। ट्रू स्कोर ऑब्ज़र्व स्कोर के बीच में (00:29:18) कैसा कोरिलेशन है? लीनियर कोरिलेशन है। (00:29:20) ट्रू स्कोर और आपके एरर रैंडम एरर के बीच (00:29:24) में कैसा रिलेशन है? नो रिलेशन। नो (00:29:26) कोरिलेशन। कोई किसी प्रकार का कोरिलेशन (00:29:29) उसके अंदर नहीं है। (00:29:32) आई होप दिस इज़ क्लियर टू ऑल ऑफ़ यू। नाउ वी (00:29:36) विल मूव ऑन टू आवर नेक्स्ट थ्योरी दैट इज़ (00:29:38) आइटम रिस्पांस थ्योरी। (00:29:40) ये आपकी क्लासिकल टेस्ट थ्योरी के बाद में (00:29:43) आई। और कुछ चीजें जो हमने क्लासिकल टेस्ट (00:29:46) थ्योरी में देखी या जो भी क्लासिकल टेस्ट (00:29:48) थ्योरी की डीमेरिट्स थी या ड्रॉबैक्स थी। (00:29:50) उनको हम कहे तो बेसिकली सुधारने का काम (00:29:53) इसने किया। (00:29:56) इसे आप लेटेंट ट्रेड मॉडल भी कहते हैं। (00:30:00) क्योंकि इसका आइडिया क्या है कि जो (00:30:02) ट्रेट्स है वो क्या है? वो सभी हिडन है। (00:30:04) वो सभी छुपी हुई है। और हमें उन्हें क्या (00:30:07) करना है? उन्हें पढ़ना है। उन्हें समझना (00:30:09) है हमारे साइकोमेट्रिक टेस्ट की हेल्प से। (00:30:14) अब जैसेजैसे अपन ने जो पीछे देखी उसी से (00:30:17) अपन इसको कोरिलेट करते हुए पढ़ते हैं। (00:30:19) हमने पढ़ा कि वहां पे जो मेजरमेंट है वो (00:30:22) टेस्ट लेवल पे होता है। होता है कि नहीं (00:30:24) होता? यहां पर इसने कहा कि आप आइटम को (00:30:29) समझिए ना टेस्ट के ओवरऑल पे मत जाओ। (00:30:33) इंस्टेड ऑफ लुकिंग एट दी टोटल स्कोर हमारा (00:30:37) फोकस किस पे होना चाहिए? हमारा फोकस (00:30:39) इंडिविजुअल आइटम्स पे होना चाहिए। (00:30:40) इंडिविजुअल क्वेश्चंस पे होना चाहिए कि (00:30:43) भाई एक इंडिविजुअल के क्या प्रोबेबिलिटी (00:30:45) है उन क्वेश्चंस को आंसर करने की उसके (00:30:48) लेवल ऑफ एबिलिटी के बेसिस पे। अब मुझे (00:30:50) किसी की क्षमता कैसे समझ में आएगी? वो किस (00:30:52) टाइप के क्वेश्चंस को अटेम्प्ट कर पा रहा (00:30:53) है? किस क्वेश्चंस को नहीं अटेम्प्ट कर पा (00:30:55) रहा है? क्योंकि हर आइटम की अपनी एक (00:30:57) कैरेक्टरिस्टिक्स होती है। इसका कहना है (00:31:00) कि हर आइटम आपके पास 10 क्वेश्चन है तो 10 (00:31:03) क्वेश्चन की अपनी-अपनी एक कैरेक्टरिस्टिक (00:31:05) है कि एक क्वेश्चन डिफिकल्टी को मेजर करने (00:31:07) के लिए बना है तो दूसरा क्वेश्चन बच्चों (00:31:09) में डिस्क्रिमिनेट करने के लिए बना है। और (00:31:12) कुछ क्वेश्चन सिर्फ गेसिंग एबिलिटी को (00:31:14) देखने के लिए बने हैं। तो हर आइटम की (00:31:17) अपनी-अपनी एक खासियत है। अपनी-अपनी (00:31:18) कैरेक्टरिस्टिक्स है। उसको मैं कैसे मेजर (00:31:21) करूंगी? उसको मैं तब मेजर कर पाऊंगी जब (00:31:23) मैं आइटम लेवल पे चीजों को समझूंगी। (00:31:27) समझ रहे हो? तो अंडरस्टैंडिंग किस लेवल पे (00:31:30) होनी चाहिए? आइटम लेवल पे होनी चाहिए। और (00:31:33) इनका ये भी कहना है कि जो आइटम्स होते हैं (00:31:35) ना वो कैसे होते हैं? वो सभी नॉमिनल होते (00:31:38) हैं नेचर में। ऑल दी आइटम्स आर नॉमिनल इन (00:31:42) नेचर या कैटेगोरिकल इन नेचर। (00:31:46) बट आइटम डज़ नॉट हैव अ न्यूमेरिकल वैल्यू। (00:31:49) आइटम की अपने आप में कोई न्यूमेरिकल (00:31:51) वैल्यू नहीं होती है। दे आर (00:31:54) एट नॉमिनल और यू कैन से कैटेगोरिकल लेवल। (00:32:01) ये तो हम है जो उसको क्या करते हैं? एक (00:32:04) नंबर प्रोवाइड कर देते हैं। जैसे आई फील (00:32:08) लोनली। (00:32:12) अब इसका आंसर या तो यस है या तो नो है। अब (00:32:15) कोई इंडिविजुअल इसमें यस आंसर देता है तो (00:32:18) उसको +2 मिलेगा और ज़ीरो मिलेगा नो देने (00:32:20) पे। लेट्स से इट इज़ इट इज़ द स्केल ऑफ़ (00:32:23) डिप्रेशन। अब डिप्रेशन का स्केल है तो (00:32:25) लोनली होना डिप्रेशन का साइन है तो आपको + (00:32:28) टू मिल जाएगा यस करने पे। तो आपका स्कोर (00:32:30) ऐड अप हो जाएगा। समझ रहे हो? आई फील (00:32:33) हैप्पी। (00:32:37) इसमें कोई यस करता है और नो करता है। यस (00:32:39) में 0, नो में +2 (00:32:42) तो अपने आप में इनकी कोई वैल्यू नहीं थी (00:32:45) ना। अपने आप में तो यस और नो के आंसर थे। (00:32:46) ट्रू फॉल्स आंसर थे। लेकिन हमने क्या (00:32:49) किया? हमने अपनी कंफर्ट के लिए हमारी (00:32:52) कैलकुलेशन हो जाए। हम एक कंक्लूजन पे (00:32:54) पहुंच जाए। उसके लिए क्या किया? इसको कोई (00:32:56) ना कोई न्यूमेरिकल वैल्यू प्रोवाइड कर दी। (00:32:59) तो आइटम की इसके अपने आप में कोई (00:33:01) न्यूमेरिकल वैल्यू नहीं है। लेकिन हमने (00:33:03) क्या करा? हमने इसको एक न्यूमेरिकल वैल्यू (00:33:05) प्रोवाइड कर दी। किस लेवल पे है? आइटम (00:33:08) नॉमिनल या कैटेगोरिकल लेवल पे है। यह आइटम (00:33:11) डिफरेंशिएट करेगा बिटवीन दोज़ हु आर लोनली (00:33:14) हु फील लोनली एंड हु डू नॉट फील लोनली। हु (00:33:17) डज़ नॉट फील लोनली। (00:33:20) करेगा कि नहीं करेगा? तो इट इज़ बेसिकली (00:33:22) डिफरेंशिएटिंग कैटेगरीज़ बनाने में हेल्प (00:33:24) करेगा आपको। आई फील हैप्पी। सम इफ समवन इज़ (00:33:27) फीलिंग हैप्पी। तो आप उनको एक कैटेगरी में (00:33:29) डालेंगे। एंड समवन हु डस नॉट फील हैप्पी। (00:33:32) उनको आप एक कैटेगरी में डालेंगे। (00:33:36) आई होप दिस इज़ क्लियर। आपको एक क्वेश्चन (00:33:38) पूछा गया था ये सीबीटी (00:33:40) कंप्यूटर बेस्ड जो आपके टेस्ट होते हैं। (00:33:45) जो आपका नेट का भी होता है। (00:33:49) वो किस पे बेस्ड है? वो आपके आईआरटी पे (00:33:51) बेस्ड है। आइटम रिस्पांस थ्योरी पे बेस्ड (00:33:53) है। क्यों? क्योंकि अब उनमें क्या है? अब (00:33:55) जो भी कॉम्पिटिटिव लेवल एग्जाम्स होते हैं (00:33:57) उनमें कुछ क्वेश्चंस होते हैं डिफिकल्टी (00:33:59) लेवल को मेजर करने के लिए कि आइटम कितना (00:34:02) डिफिकल्ट है बेस्ड ऑन कितने बच्चे इसको (00:34:05) आंसर कर पाए। कुछ क्वेश्चंस होते हैं (00:34:07) डिस्क्रिमिनेट करने पे। वो क्वेश्चंस ऐसे (00:34:09) होते हैं कि जो हाई स्कोरर्स और लो (00:34:12) स्कोरर्स के बीच में करते हैं। कुछ (00:34:14) क्वेश्चंस आपके एग्जाम में ऐसे होते हैं (00:34:15) जो कि सिर्फ जो टॉप स्कोर्स हैं कर रहे (00:34:18) हैं बच्चे मोस्टली वही बच्चे इसको सही कर (00:34:20) पाते हैं बाकी नहीं कर पाते। कुछ (00:34:22) क्वेश्चंस ऐसे होते हैं प्योरली आपको गेस (00:34:24) करना होता है। आपको नहीं पता इसका आंसर (00:34:25) क्या होगा क्या हो सकता है। यू हैव टू गेस (00:34:30) दैट इज़ (00:34:32) कंप्यूटर बेस्ड एग्जाम्स। तो ऐसा आपके (00:34:34) आईआईपी किस पे बेस्ड है? आईआरटी पे ही (00:34:36) बेस्ड है। क्लासिकल टेस्ट थ्योरी कहती है (00:34:38) कि टेस्ट परफेक्ट होता है। (00:34:41) टेस्ट क्या है? एकदम परफेक्ट है। उसमें (00:34:43) कोई कमी नहीं है। बट आईआरटी का मानना है, (00:34:46) आइटम रिस्पांस थ्योरी का मानना है कि (00:34:48) जरूरी नहीं है। टेस्ट में आपके टेस्ट के (00:34:52) आइटम्स में गलतियां हो सकती है। एंड इट इज़ (00:34:55) ओके। इट इज़ नॉर्मल टू हैव मिस्टेक्स। (00:35:02) आई होप दिस इज क्लियर। अब (00:35:07) एक दो चीज अगर अपन और देखें तो (00:35:12) हमने पहले देखा यहां पे कि यहां पे एक (00:35:14) लीनियर कोरिलेशन है बिटवीन योर आइटम एंड (00:35:18) दिस टू स्कोर एंड ऑब्जर्व्स को आइटम (00:35:21) रिस्पांस थ्योरी का कहना है कि नहीं नॉन (00:35:24) लीनियर इट इज़ अ नॉन लीनियर मेथड (00:35:34) व्हाई क्योंकि एबिलिटी हमेशा सेम नहीं (00:35:37) रहती है आपकी। आज आपको मैथ्स में नहीं आता (00:35:40) है। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है कि आप सीख (00:35:42) नहीं सकते हो और अपनी एबिलिटी को एनहांस (00:35:44) नहीं कर सकते हो। आज आपका स्कोर डिप्रेशन (00:35:47) पे हाई आ रहा है। हो सकता है आज के एक (00:35:49) महीने बाद नहीं आए। तो आपकी एबिलिटी है वो (00:35:53) हमेशा सेम नहीं रहती है। वो बदलती रहती (00:35:55) है। इस वजह से कैसा है यहां पे रिलेशन? (00:35:57) यहां पे नॉन लीनियर रिलेशन। (00:36:12) और यहां पे थोड़े से डिफिकल्ट एजम्पशनंस (00:36:14) होते हैं कंपैरेटिव एज़ कंपेयर टू योर (00:36:17) क्लासिकल टेस्ट थ्योरीज। एजम्पशनंस कैसे (00:36:19) हैं? थोड़े से डिफ़िकल्ट है। (00:36:22) अब यह जो आपका आईआरटी मॉडल है, आइटम (00:36:24) रिस्पांस थ्योरी है, वह तीन मॉडल्स पे (00:36:26) बेस्ड है। या फिर हम कहें तो ये तीन चीजों (00:36:28) को मेजर करती है। सबसे पहला मॉडल है वन (00:36:31) पैरामीटर मॉडल। अब ये मॉडल्स हैं। वन (00:36:35) पैरामीटर मॉडल आया, टू पैरामीटर मॉडल आया (00:36:37) और थ्री पैरामीटर मॉडल आया। नाम है इनके। (00:36:39) तो वन पैरामीटर मॉडल में सिर्फ डिफिकल्टी (00:36:42) आती है। पहले क्या चेक करने के लिए बना? (00:36:45) डिफिकल्टी। फिर आया टू पैरामीटर मॉडल। (00:36:48) मतलब अब यह डिफिकल्टी के साथ (00:36:49) डिस्क्रिमिनेशन भी मेजर करता है। थ्री (00:36:52) पैरामीटर मॉडल डिफिकल्टी, डिस्क्रिमिनेशन (00:36:54) और गेसिंग एबिलिटी। तो आपको ये याद होने (00:36:56) चाहिए कि तीन पैराटर्स हैं। वन पैरामीटर (00:36:59) मॉडल वाज़ अबाउट डिफिकल्टी। टू पैरामीटर (00:37:02) मॉडल वाज़ अबाउट डिफिकल्टी एंड (00:37:03) डिस्क्रिमिनेशन। थ्री पैरामीटर मॉडल वाज़ (00:37:06) अबाउट डिफिकल्टी, डिस्क्रिमिनेशन एंड (00:37:08) गेसिंग एबिलिटी। अब अपन ये जो तीनों (00:37:11) टर्म्स हैं, डिफिकल्टी क्या होती है? आइटम (00:37:13) डिफिकल्टी, आइटम डिस्क्रिमिनेशन और गेसिंग (00:37:16) एबिलिटी। इन तीनों को देख लेते हैं। आई (00:37:20) होप यहां तक आप लोगों को समझ में आया (00:37:22) होगा। (00:37:34) लेट्स टॉक अबाउट आइडेंटिटी। (00:37:54) अब मैं यहां पे कुछ क्वेश्चंस लिखती हूं। (00:37:56) फर्स्ट इज़ (00:38:02) वेव साइकोडायनेमिक (00:38:13) सेकंड हम ले लेते हैं (00:38:18) हु गव द कांसेप्ट ऑफ (00:38:27) लर्न ऑब्टेन (00:38:31) और थर्ड हम ले लेते हैं (00:38:37) व्हाट इज़ दिस फार्मूला (00:38:43) फॉर इफेक्ट सेंस। (00:38:47) सबसे पहला क्वेश्चन है कि साइकोडायनेमिक (00:38:49) थ्योरी किसने दी? सेकंड क्वेश्चन आपसे पूछ (00:38:52) रही हूं कि लर्न ऑप्टिमिज्म का कांसेप्ट (00:38:54) किसने दिया? और थर्ड क्वेश्चन है कि (00:38:56) इफेक्ट साइज का फार्मूला क्या होता है? अब (00:39:00) मुझे बताइए क्लास में (00:39:03) 50 बच्चे हैं। हमारे पास कितने बच्चे हैं? (00:39:08) क्या यह सभी बच्चे बता पाएंगे? मोस्टली (00:39:10) सभी बच्चे बता पाएंगे कि साइकोडायनेमिक (00:39:13) थ्योरी किसने? (00:39:15) एवरीवन नोस कि फ्लूइड का ये कांसेप्ट है। (00:39:18) उसने दी है। सबको पता है। अब उन 50 में से (00:39:24) कुछ बच्चे ऐसे होंगे जो ये बता पाएंगे कि (00:39:26) लर्न ऑप्टिमिज्म किसने दिया। ये सभी नहीं (00:39:28) बता पाएंगे। (00:39:30) वाज़ गिवन बाय मार्टिन सेलिगमेंट। तो ये अब (00:39:34) क्या होगा? यह थोड़े कम बच्चे बता पाएंगे (00:39:37) और इफेक्ट साइज का फार्मूला तो बस वही (00:39:39) बच्चे बता पाएंगे जो एक्चुअली पढ़ के आए (00:39:41) हैं। साइकोडायनेमिक थ्योरी ये बताने के (00:39:44) लिए कि किसने दिया उसके लिए आपको बैठ के (00:39:46) पढ़ने की जरूरत नहीं थी। जिसने थोड़ा बहुत (00:39:48) भी पढ़ा होगा वो कौन ये बता पाएगा कि लर्न (00:39:50) ऑप्टिमिज्म किसने दिया। बट इफेक्ट साइज के (00:39:53) लिए तो जिसने प्रॉपर कोई अनोवा पढ़ के आया (00:39:55) है अच्छे से बैठ के रिवाइज़ करके वही बता (00:39:59) पाएगा कि यार पढ़ कुछ तो था इफ़ेक्ट साइज़। (00:40:00) बहुत सारे बच्चों ने तो नाम ही नहीं सुना (00:40:02) होगा कि इफेक्ट साइज क्या है? कुछ ना सुना (00:40:04) होगा तो बोले सुना तो था जब क्लास में (00:40:06) पढ़ाया था तब तो पता था। अब नहीं पता है। (00:40:08) हमें नहीं पता कि क्या होती है। (00:40:11) तो यही है डिफिकल्टी। (00:40:14) ये देखना कि हमारा आइटम कितना डिफिकल्ट (00:40:17) है। (00:40:19) किस बेसिस पे जितने बच्चे उसको आंसर कर पा (00:40:21) रहे हैं। क्या? तो हमारे आइटम के (00:40:24) डिफिकल्टी लेवल को चेक करना इज आइटम (00:40:27) डिफिकल्टी। (00:40:31) इसको चेक कैसे करते हैं आप? (00:40:38) नंबर ऑफ पार्टिसिपेंट्स (00:40:45) आंसर (00:40:48) करेक्टली (00:40:55) टोटल नंबर ऑफ पार्टिसिपेंट्स अटेम्टेड द (00:40:59) क्वेश्चन (00:41:06) मतलब (00:41:08) अब अगर कोई क्वेश्चन इजी है तो क्या (00:41:11) ज्यादा बच्चे इसको अटेम्प्ट कर पाएंगे और (00:41:13) बेसिकली हम कहें तो अटेम्प्ट भी कर लिया (00:41:14) चलो सारे क्वेश्चन अटेम्प्ट करने पे (00:41:16) क्वेश्चन ईजी है तो ज्यादा बच्चे करेक्ट (00:41:19) कर पाएंगे क्वेश्चन डिफिकल्ट है तो कम (00:41:21) बच्चे करेक्ट कर पाएंगे तो जितने ज्यादा (00:41:24) इंडिविजुअल्स जितने ज्यादा पार्टिसिपेंट्स (00:41:26) किसी क्वेश्चन को सही करते हैं तो इसका (00:41:28) मतलब है कि वो आइटम इजी है अगर आपको ये हु (00:41:30) गव द हु गव साइकोडायनेमिक थ्योरी नेट में (00:41:32) आता तो मोस्टली हर बच्चा इसको सही करके (00:41:34) आता। वही अगर आपको इफेक्ट साइज का (00:41:36) फार्मूला पूछा है तो ये बहुत कम बच्चे सही (00:41:38) करके आ पाएंगे। (00:41:40) ये क्या बता रहा है हमको? ये बता रहा है (00:41:42) कि क्वेश्चन कितना आसान है और क्वेश्चन (00:41:43) कितना कठिन है। किस बेसिस पे कितने बच्चों (00:41:47) ने कितने पार्टिसिपेंट्स ने उसको अटेम्प्ट (00:41:49) किया है। (00:41:52) तो अगर मैं इसके ग्राफ की प्लॉटिंग करूं (00:41:56) प्लॉट दिस ऑन अ ग्राफ। (00:42:16) यहां पे आपका क्वेश्चन है (00:42:21) और क्या (00:42:27) दिस इज क्वेश्चन नंबर वन (00:42:30) दिस इज क्वेश्चन। अब देखो (00:42:37) साइकोडायनेमिक थ्योरी क्या सब बच्चे बता (00:42:39) पाएंगे? हां देखो सब बच्चे बता पाएंगे। (00:42:44) इसका मतलब (00:42:46) अगर मैं इसको मैं यहां प्लॉट (00:42:50) इसका मतलब क्या हुआ? अगर यहां पे मैंने (00:42:52) इसको प्लॉट किया। इसका मतलब है ये जितने (00:42:55) भी बच्चे हैं वो क्या कर पाए? वो इस (00:42:58) क्वेश्चन को अटेम्प्ट कर पाए। किसको? आइटम (00:43:01) नंबर वन को। हु गव साइकोडायनेमिक थ्योरी। (00:43:04) ऑल द इंडिविजुअल्स वर एबल टू आंसर दिस (00:43:07) क्वेश्चन। ये जितने भी यहां पे बच्चे हैं (00:43:10) ये सभी इसको आंसर कर पाए। बस ये वाले (00:43:13) राइट। (00:43:22) नेक्स्ट अगर मैं बात करूं (00:43:25) हु गव द कांसेप्ट ऑफ लर्न ऑप्टिमिज्म (00:43:34) मतलब (00:43:36) अब इसको और कम बच्चे अटेम्प्ट कर पाएंगे। (00:43:41) अब इसको क्या होगा कि अभी अब इसको सारे (00:43:43) बच्चे कर पाएंगे? नहीं। अब इसको बहुत कम (00:43:45) बच्चे कर पाएंगे। (00:43:48) वहीं अगर मैं थर्ड क्वेश्चन की बात करूं (00:43:51) तो इसको तो और भी कम बच्चे अटेमप्ट कर (00:43:53) पाएंगे। (00:43:55) ऐसा ही होगा। (00:43:57) इसका मतलब जितना आपका लेफ्ट की तरफ है (00:44:02) जितना लेफ्ट की तरफ जा रहा है। यहां पे (00:44:03) हमें इजी क्वेश्चंस बता रहा है। जितना (00:44:06) लेफ्ट की तरफ है उतना इजी है आइटम। जितना (00:44:09) राइट की तरफ है उतना डिफिकल्ट है। (00:44:12) क्योंकि अगर यहां पे प्लॉट किया तो इतने (00:44:14) सारे बच्चे हैं जिसको सही कर पाएंगे। ये (00:44:16) सारे सही कर पाएंगे। ये वाला क्वेश्चन बस (00:44:19) इतने ही सही कर पा रहे हैं। और ये वाला (00:44:21) क्वेश्चन तो सिर्फ इतने से पार्टिसिपेंट्स (00:44:24) हैं जो सही कर पाएंगे। (00:44:27) तो ये क्या है? ये डिफिकल्ट (00:44:31) और ये इजी है। तो लेफ्ट साइड में जितना (00:44:34) लेफ्ट की तरफ उतना इजी है आइटम। जितना (00:44:37) राइट की तरफ जाता रहता है वो जैसे-जैसे (00:44:39) राइट की तरफ जाएगा वैसे-वैसे वो आइटम (00:44:41) डिफिकल्ट होता रहेगा। (00:44:45) इन्हें हम क्या कहते हैं? इन्हें हम कहते (00:44:47) हैं आइटम कैरेक्टरिस्टिक। (00:45:03) तो, यह हमें बेसिकली क्या एक्सप्लेन कर (00:45:05) रहा है? कहीं ना कहीं हमें एक लीनियर (00:45:06) रिलेशन बता रहा है बिटवीन दी योर एबिलिटी (00:45:09) एंड योर प्रोबेबिलिटी ऑफ़ गिविंग दी करेक्ट (00:45:12) आंसर। कि आपके अंदर अगर क्षमता है तो आपके (00:45:17) आंसर सही होने के चांसेस भी क्या है? (00:45:19) ज्यादा है। तो एक क्या है? एक लीनियर (00:45:22) रिलेशन है यहां पे (00:45:30) बिटवीन योर एबिलिटी। अगर मुझे पता है (00:45:33) साइकोडायनेमिक थ्योरी किसने दी है तो (00:45:35) चांसेस ज्यादा है कि मैं उस क्वेश्चन को (00:45:37) सही करके आऊंगी। (00:45:46) प्रोबेबिलिटी ऑफ (00:45:50) गिविंग दी करेक्ट आंसर। (00:45:56) अब यहां पे आपको पूछते हैं कि भ किस बेसिस (00:45:59) पे आप डिफिकल्टी को बताते हो? डिटरमाइन (00:46:01) करते हो। तो कहीं क्या हम कह सकते हैं कि (00:46:03) यहां पे लोकेशन डिटरमाइन कर रही है। आइटम (00:46:06) लेफ्ट की तरफ है तो इजी है। राइट की तरफ (00:46:09) जा रहा है तो डिफिकल्ट है। तो यहां पे (00:46:11) कहीं ना कहीं जो लोकेशन है आपके आइटम की (00:46:13) या जो प्लॉटिंग है उसके बेसिस पे हम बता (00:46:16) रहे हैं कि आइटम डिफिकल्ट है या इजी है। (00:46:19) तो इट वुड बी दी लोकेशन। (00:46:28) कौन डिटरमाइन करेगा आपकी लोकेशन? (00:46:58) लेफ्ट में है तो इजी (00:47:01) राइट में है तो डिफिकल्ट। सिंपली इतना (00:47:05) कहना है कि अगर किसी को डिप्रेशन है तो (00:47:07) उसका डिप्रेशन पर स्कोर हाई आना चाहिए। (00:47:09) आना चाहिए कि नहीं आना चाहिए? आना चाहिए। (00:47:11) तभी हम क्या बता पाएंगे? तभी हम उसकी बता (00:47:13) पाएंगे कि हां भाई (00:47:17) ये काम क्या कर रहा है? ऐसे ही कर रहा है। (00:47:18) कोई एरर यहां पे नहीं है। तो इफ देयर इज (00:47:21) समथिंग। इसका पूरा बेस इतना ही है आइटम (00:47:23) डिफिकल्टी का कि अगर कोई चीज है, अगर कोई (00:47:26) चीज एक्सिस्ट करती है तो आप उसको मेजर कर (00:47:29) पाए। (00:47:33) आई होप दिस इज क्लियर (00:47:36) वन मोर थिंग हमें पता होनी चाहिए आई थिंक (00:47:38) डिफिकल्टी के बारे में (00:47:48) अगर इसकी वैल्यू कितनी होती है? इट इज़ (00:47:51) बिटवीन 0 टू वन। (00:47:55) 0 टू 1 के बीच में इसकी वैल्यू होती है। (00:47:58) और जितना आपका आइटम किसकी तरफ होगा? वन की (00:48:02) तरफ जाएगा उतना ही आपका क्वेश्चन इजी है। (00:48:07) जितना वन की तरफ उतना आइटम इजी है। अगर वन (00:48:11) है इसका मतलब सभी ने आंसर कर दिया। (00:48:27) क्वेश्चन इज (00:48:30) एंड एवरीवन इज (00:48:39) डिजायरेबल वैल्यू क्या होती है? 0.30 से (00:48:42) लेकर 0.70 (00:48:44) दिस इज द डिज़ायरेबल वैल्यू। इससे कम है। (00:48:48) 0.30 से तब भी प्रॉब्लम इतना भी आइटम (00:48:51) डिफिकल्ट नहीं होना चाहिए। और अगर 0.70 से (00:48:55) ज्यादा है तो इतना इजी भी आइटम नहीं होना (00:48:57) चाहिए। आइटम आइटम किसके बीच में होना (00:48:59) चाहिए? 0.30 से लेकर 0.70 के बीच में आपका (00:49:02) डिफिकल्टी लेवल होना चाहिए हर आइटम का। तो (00:49:05) वो हमारी एक डिज़ायरेबल वैल्यू आती है। (00:49:08) आई होप आपको ये चीज क्लियर होगी। आपको (00:49:11) आइटम डिफिकल्टी अच्छे से समझ आ गई होगी। (00:49:13) नाउ वी शुड मूव ऑन टू आइटम (00:49:15) डिस्क्रिमिनेशन। (00:49:26) आइटम डिस्क्रिमिनेशन बेसिकली हेल्प्स यू (00:49:29) टू डिस्क्रिमिनेट बिटवीन दी हाईएस्ट (00:49:31) स्कोरर्स एंड द लो स्कोरर्स (00:49:34) आपके आइटम कितना डिस्क्रिमिनेट कितना फर्क (00:49:38) कर पा रहा है हाईएस्ट स्कोरर्स के बीच में (00:49:40) हाई स्कोरर्स के बीच में और लो स्कोरर्स (00:49:42) के बीच में व्हिच मींस (00:49:46) वही सेम क्वेश्चंस हमारे मैं यहां पे फिर (00:49:48) से लिख देती हूं एक बार। सबसे पहला (00:49:51) क्वेश्चन हमारा साइकोडायनेमिक थ्योरी। (00:50:01) सेकंड क्वेश्चन वाज़ अबाउट लर्न (00:50:02) ऑप्टिमिज्म। (00:50:14) थर्ड क्वेश्चन था। (00:50:20) अब जो साइकोडायनेमिक थ्योरी का क्वेश्चन (00:50:23) है वो क्या हर बच्चा कर पाएगा? किसी को 20 (00:50:25) आ रहे हैं 100 में से और किसी को 90 आ रहे (00:50:28) हैं 100 में से। क्या दोनों ही बच्चे इस (00:50:30) क्वेश्चन को कर पाएंगे? कर पाएंगे। लर्न (00:50:33) ऑप्टिमिज्म का जो क्वेश्चन है वो एक एवरेज (00:50:36) लाने वाला कर पाएगा। इफेक्ट साइज का (00:50:39) क्वेश्चन है वही कर पाएगा जो बहुत अच्छे (00:50:41) से पढ़ के आया है। तो अगर किसी को 90 आउट (00:50:43) ऑफ 100 आ रहा है तो हम एक्सपेक्ट करते हैं (00:50:45) कि उसने ये क्वेश्चन सही किया होगा। वहीं (00:50:47) 20 आउट ऑफ 100 लेके आने वाला बच्चा ये (00:50:49) क्वेश्चन नहीं कर पाया हो। ये डिफिकल्ट है (00:50:52) अगेन। तो कहीं ना कहीं ये क्वेश्चन इफेक्ट (00:50:56) साइज का क्वेश्चन फर्क कर रहा है। (00:50:58) डिस्क्रिमिनेट कर पा रहा है हाई स्कोरर और (00:51:01) लो स्कोरर के बीच में। (00:51:03) कुछ क्वेश्चंस हमारे पास ऐसे होते हैं जो (00:51:06) बहुत कम बच्चे सही कर पाते हैं। जो बच्चे (00:51:08) बहुत अच्छा स्कोर कर रहे हैं। इट मींस (00:51:09) उन्होंने बहुत ज्यादा डीपली पढ़ाई की है। (00:51:12) इस वजह से वो क्वेश्चन वो सही कर पा रहे (00:51:13) हैं। तो हमारे पास इस टाइप के क्वेश्चन भी (00:51:16) होते हैं। आप लोगों ने सबने देखे होंगे (00:51:18) एग्जाम में। कुछ क्वेश्चन एकदम ऐसे आते (00:51:20) हैं कि भाई पता नहीं यार ये तो बड़ा (00:51:22) डिफिकल्ट क्वेश्चन है। पर जो बच्चे बहुत (00:51:24) अच्छा स्कोर करते हैं वो कहीं ना कहीं उस (00:51:25) क्वेश्चन को भी सही करके आते हैं। तो वो (00:51:27) क्वेश्चन बना ही इसलिए है कि वो (00:51:29) डिस्क्रिमिनेट कर सके बिटवीन योर हाई (00:51:31) स्कोरर्स और लो स्कोरर्स जिसने बहुत अच्छे (00:51:33) से पढ़ाई की है वही बच्चा अटेम्प्ट कर (00:51:35) पाए। वो कैसे क्वेश्चन होते हैं? (00:51:41) यहां पे बेसिकली क्या हो रहा है? लेट्स (00:51:44) अगेन हम बनाते हैं अपना आइटम (00:51:46) कैरेक्टरिस्टिक। (00:52:07) करेक्ट आंसर सी एंड योर (00:52:16) बेसिकली प्रोबेबिलिटी कितना आप सही करते (00:52:33) तो लेट्स से अगर मैं साइकोडायनेमिक की बात (00:52:35) करूं (00:52:37) तो क्या मेजरिटी ऑफ़ द स्टूडेंट्स इसको सही (00:52:40) कर पाएंगे? (00:52:42) हां। (00:52:44) मैंने आपका ग्राफ बनाया। यह इस तरीके से (00:52:47) प्लॉटिंग हुई थी। इसने भी सही दिया। इसने (00:52:48) भी इसने भी इसने इसने इसने सबने सही आंसर। (00:52:52) ठीक है ना? एवरीवन वाज़ एबल टू (00:52:56) आंसर। (00:53:00) यहां पे आपके आप समझिए लो एबिलिटी है। (00:53:03) यहां पर आपकी हाई (00:53:07) दिस क्वेश्चन। (00:53:14) फिर (00:53:20) क्वेश्चन (00:53:37) अब मैं अगर इस क्वेश्चन वन को देखती हूं (00:53:39) तो मुझे क्या समझ आ रहा है कि सबका इसमें (00:53:42) बराबर ही चल रहा है। चाहे लो स्कोरर हो, (00:53:46) चाहे हाई स्कोरर हो। क्या सब ऑलमोस्ट एक (00:53:49) ही क्वांटिम पे? एक ही स्क्वायर है। सब (00:53:52) इसको आंसर कर पा रहे हैं। तो क्या ये (00:53:54) क्वेश्चन डिस्क्रिमिनेट कर पा रहा है (00:53:55) बिटवीन योर हाई स्कोरर्स एंड लो स्कोरर्स? (00:53:58) नहीं कर पा रहे। वहीं अगर मैं थर्ड वाले (00:54:00) क्वेश्चन को देखूं तो आप देखिए जिन्होंने (00:54:02) लो स्कोर किया है वो इस पे आंसर नहीं कर (00:54:04) पा रहे। लेकिन जैसे-जैसे हाई एबिलिटी की (00:54:06) तरफ बढ़ रहे हैं। हम उन बच्चों की तरफ जा (00:54:08) रहे हैं जो हाई स्कोर कर रहे हैं (00:54:09) वैसे-वैसे हमारा ग्राफ देखिए यहां यानी कि (00:54:12) यह बच्चे तो इसको आंसर कर पाए। यह वाले (00:54:14) नहीं कर पाए। (00:54:21) तो आइटम डिस्क्रिमिनेशन (00:54:24) किस बेसिस पे शो होता है? आपके स्टीपनेस (00:54:26) के बेसिस पे शो होता है। (00:54:29) कि आपका कर्व जो है वह कितना स्टीप है? (00:54:33) दिस क्वेश्चन इज नॉट एबल टू (00:54:34) डिस्क्रिमिनेट। (00:54:49) वही अब एक ही उस पे जा रहा है तो कोई (00:54:52) डिस्क्रिमिनेशन नहीं है। बट अगर मेरा कर्व (00:54:54) कैसे जा रहा है? स्टीप है। देखिए यहां से (00:54:58) इस तरीके से जा रहा है। तो इसका मतलब ये (00:55:00) आइटम डिस्क्रिमिनेट कर पा रहा है अच्छे (00:55:02) से। ये बच्चे आंसर नहीं कर पा रहे। जिनकी (00:55:04) एबिलिटी लो है वो स्पोंसर नहीं कर पा रहे (00:55:06) हैं। वही जिनकी एबिलिटी हाई है वो (00:55:08) स्पोंसंसर कर पा रहे हैं। तो दिस इज़ आइटम (00:55:11) डिस्क्रिमिनेशन। (00:55:27) मिनट (00:55:34) हाय एंड (00:55:38) आई होप दिस इज़ क्लियर टू ऑल ऑफ यू (00:55:42) इसको आप रीड कर लेना ये सब आपके पास (00:55:45) अवेलेबल है (00:55:47) नाउ द लास्ट इज़ गेसिंग एबिलिटी। (00:55:51) गेसिंग एबिलिटी कहती है कि अब कुछ (00:55:54) क्वेश्चंस आपने एग्जाम में देखे होंगे। आप (00:55:55) एग्जाम देके आते हो तो उसमें कुछ (00:55:58) क्वेश्चंस ऐसे आते हैं जिसका आंसर हमें (00:56:00) नहीं पता। (00:56:02) मतलब वो क्वेश्चन समझ ही नहीं आ रहा होता (00:56:04) है कि भ ये कैसा क्वेश्चन है? ये भी कोई (00:56:07) क्वेश्चन है पूछने का। क्या पूछ रखा है (00:56:09) तुमने? ऐसा लगता है कि नहीं लगता क्वेश्चन (00:56:11) को देख के कि नहीं पता है। किसी ने बाय (00:56:13) चांस गलती से ही उसको देख लिया होता, पढ़ (00:56:15) लिया होता। तो बात अलग है। बाकी तो कोई (00:56:18) उसको इन जनरल नहीं बता पाता है उसके आंसर। (00:56:22) जैसे कि अगर हम कहें कि (00:56:25) व्हाट इज द बर्थ डेट ऑफ सिगमंड फ्री? (00:56:30) तो याद क्वेश्चन पूछा गया था। (00:57:15) लेट से हम आपको डेट्स दे (00:57:20) 1856 6 (00:57:25) सेवंथ में 1856 (00:57:29) 8 में 1856 (00:57:31) (00:57:34) अब आप मुझे बताइए (00:57:37) क्या मैं इस क्वेश्चन को देख के (00:57:40) थोड़ा भी अंदाजा लगा सकती हूं। अगर मुझे (00:57:42) एग्जैक्ट डेट पता है (00:57:45) तो तो मैं इस क्वेश्चन को कर सकती हूं। (00:57:47) अदर वाइज मैं इस क्वेश्चन को अटेम्प्ट ही (00:57:49) नहीं कर सकती। (00:57:50) है (00:57:52) आई वांट टू नो आई शुड नो द एग्जैक्ट डेट (00:57:59) इस क्वेश्चन को अटेम्प्ट करने के लिए (00:58:02) इफ आई वांट टू अटेम्प्ट दिस क्वेश्चन आई (00:58:04) शुड नो द एग्जैक्ट डे ऑफ़ डेट सेगमेंट थ्रू (00:58:08) इट्स बर्थडे अदरवाइज़ आई विल बी वन टू आंसर (00:58:11) इट अब बताओ यह कोई ऑप्शन हो 6 7 8 9 18 (00:58:15) मैं गेस किस बेसिस पे करूं नहीं कर सकता (00:58:18) बट बट (00:58:21) वही आपको ये ऑप्शन होता (00:58:25) सेवंथ में 1956 (00:58:28) एंड (00:58:30) 8th मे 195 (00:58:33) और (00:58:35) यहां लिख देते हैं 9 अगस्त (00:58:40) अब ये ऑप्शन अगर आपके पास यहां पे यही है (00:58:42) सिक्स में 18 (00:58:46) अब मुझे बताइए क्या हम दो ऑप्शंस को (00:58:48) एलिमिनेट कर सकते हैं कि 1956 और 1950 में (00:58:51) तो प्रविड नहीं पैदा हुआ। हुए तो उससे (00:58:55) पहले ही तो कहीं ना कहीं मेरा एजमशन जाता (00:58:58) है 1856 (00:59:00) सिक्स्थ में 1856 और 9th अगस्त 1856 और (00:59:03) गेसिंग एबिलिटी भी यही कहती है कि आपका जो (00:59:07) ऑप्शंस है आपके जो ऑप्शंस है वो इक्वली (00:59:09) डिस्ट्रीब्यूट होने चाहिए बिटवीन टू (00:59:12) ऑप्शंस (00:59:15) समझ रहे हो 50-50% अब कोई बच्चा दो ऑप्शंस (00:59:19) को एलिमिनेट करके ये कर सकता है कि हां अब (00:59:22) ए और डी में से कोई आंसर होने वाला है तब (00:59:25) तो हम उसको कहेंगे कि वो एक अच्छा क्या (00:59:28) है? एक अच्छा गेसिंग एबिलिटी का क्वेश्चन (00:59:30) है। (00:59:32) बट अगर ऑप्शंस ऐसे आ जाए (00:59:37) तब क्या है? तब ये बड़ा ही प्रॉब्लमैटिक (00:59:40) क्वेश्चन है। क्या अब कोई भी बच्चा गेस कर (00:59:42) पाएगा? अब आप गेसिंग एबिलिटी लगा ही नहीं (00:59:44) सकते हो। किस बेसिस पे आप गेस करोगे? उसके (00:59:46) बाद लेट्स से आपको यह भी याद रहेगा कि (00:59:48) शायद मई में आता था बर्थडे। तो आप कहोगे (00:59:51) चलो ठीक है लेट्स गो विद दिस क्वेश्चन (00:59:53) लेट्स गो विद दिस ऑप्शन सिक्स्थ मई 1856 (00:59:57) 1856 तो चलो मान लिया और शायद मुझे ऐसा (00:59:59) ध्यान है कि शायद इनका मई या जून के (01:00:01) अराउंड बर्थडे था तो लेट्स गो विद मे तो (01:00:05) यहां पे यू आर एबल टू गेस (01:00:09) तो दैट इज़ व्हाई हमारे पास ऑप्शंस क्या (01:00:12) होने चाहिए 50% पे डिस होने चाहिए अगर (01:00:15) नहीं है तो क्या होगा अगर वो हैवली (01:00:17) स्क्यूड है डेटा अगर सर्टेन ऑप्शन ऑप्शंस (01:00:20) के ऊपर तो इसके दो कारण हो सकते हैं। या (01:00:23) तो आपका आइटम गलत है। (01:00:26) उसको चेंज करने की जरूरत है। या तो ऑप्शंस (01:00:29) बदलिए या तो आइटम को बदलिए। तब आपको कभी (01:00:31) भी इस तरह के ऑप्शंस नहीं दिखेंगे एग्जाम (01:00:33) में। (01:00:35) समझ रहे हो? और अगर इस तरह का कुछ होता है (01:00:37) तो यहां पे हम कह देंगे कि जो (01:00:38) डिस्क्रिमिनेशन वैल्यू है वो नेगेटिव आएगी (01:00:40) या वो ज़ीरो आएगी। क्या ये क्वेश्चन (01:00:42) डिस्क्रिमिनेट कर पाएगा? ये डिस्क्रिमिनेट (01:00:44) नहीं कर पाएगा। जिसने जय माता दी करके टिक (01:00:48) कर दिया और उसका सही हो गया तो हो गया। हो (01:00:52) सकता है जो जीरो ले आ रहा हो वो इसमें +2 (01:00:54) ले आए। बाकी सब में जीरो लेके आ रहा है। (01:00:56) बट इसके वजह से उसका +2 आ रहा है। बट उसका (01:00:59) इसका मतलब ये तो नहीं है कि वो कोई (01:01:01) इंटेलिजेंट बच्चा है। ठीक है ना? (01:01:06) होप दिस इज़ क्लियर। अब अगर यहां पे आपकी (01:01:09) क्या होती है? यह ज़ीरो होती है। इफ़ यू आर (01:01:11) गेसिंग एबिलिटी इज़ बिलो ज़ीरो। और (01:01:13) डिस्क्रिमिनेशन वैल्यू बेसिकली इज़ (01:01:19) तो इसमें हम कहते हैं (01:01:21) डिस्क्रिमिनेशन वैल्यू विल बी नेगेटिव और (01:01:23) ज़ीरो। और इसका मतलब क्या है? या तो आपकी (01:01:26) जो की है वो आउटडेटेड है। आइदर योर आइटम (01:01:31) इज़ रॉन्ग ऑर की इज़ आउटडेटेड। (01:01:43) मतलब नेगेटिव अगर आता है (01:01:47) और योर आइटम इज़ आउटडेटेड। (01:01:57) आई होप इट इज़ क्लियर टू ऑल ऑफ़ यू। ये (01:01:58) पैरामीटर्स आपको समझ में आए होंगे। (01:02:03) एजम्पशंस क्या है? मोनोटोनिसिटी। (01:02:05) मोनोटोसिटी का मतलब है कि जैसे-जैसे ट्रेड (01:02:08) लेवल इनक्रीस होता है, वैसे आपकी एबिलिटी (01:02:10) बढ़ती है, आपकी प्रोबेबिलिटी भी बढ़ जाती (01:02:12) है उस क्वेश्चन को, उस आइटम को करेक्ट (01:02:14) करने की। यस। यून्य डायमेंशनलिटी ओनली वन (01:02:18) ट्रेड कैन बी मेजर्ड एट वन टाइम। एक बार (01:02:20) में एक ही ट्रेड मेजर होगी। डिप्रेशन का (01:02:23) स्केल है तो डिप्रेशन नहीं मेजर होगा। एक (01:02:25) आइटम जो है एक आइटम एक साथ (01:02:29) स्ट्रेस और एंजायटी मेजर नहीं करेगा। एक (01:02:34) आइटम एक बार में एक ही चीज को मेजर करेगा। (01:02:37) लोकल इंडिपेंडेंस आइटम्स आर रिलेटेड बट (01:02:40) नॉट डिपेंडेंट ऑन ईच अदर। (01:02:43) डिपेंडेंसी का मतलब क्या होता है? कि अगर (01:02:45) मैंने क्वेश्चन वन का आंसर यस किया है तो (01:02:50) उससे मैं ये अस्यूम कर सकती हूं कि मैं (01:02:52) क्वेश्चन टू पे यस कहूंगी या नो कहूंगी। (01:02:55) अगर इस तरह का कुछ है तो इसका मतलब फर्स्ट (01:02:57) क्वेश्चन डिपेंडेंट है क्वेश्चन टू पे। (01:03:00) अगर मेरे पास पेज हो तो आई कैन (01:03:05) कोई बात नहीं मतलब अगर मैंने आपको (01:03:07) क्वेश्चन दिया (01:03:15) आई डोंट बिलीव इन रेसिज्म। (01:03:19) मैं रेसिज्म में विश्वास नहीं रखती। कि हम (01:03:22) कलर के बेसिस पर किसी को जज नहीं करते (01:03:24) हैं। (01:03:27) और सेकंड क्वेश्चन मैंने आपको दिया। (01:03:51) नाउ अब अगर मैं पहले का आंसर कहती हूं कि (01:03:54) यस आई डोंट बिलीव (01:03:56) इसका आंसर अगर मैं यस करती हूं तो आप (01:03:58) बताइए अगर मैं कलर के बेसिस पे किसी को जज (01:04:01) नहीं करती हूं। मैं रेसिज्म के अगेंस्ट (01:04:03) हूं। तो मेरे को कोई दिक्कत होगी अगर मैं (01:04:05) किसी डिफरेंट रेस के इंडिविजुअल को मेरा (01:04:07) फ्रेंड बनाती हूं। नहीं होने चाहिए ना। तो (01:04:11) कहीं ना कहीं हम अस्यूम कर सकते हैं इसका (01:04:12) आंसर आप यस ही करेंगे। अगर आप नो कर रहे (01:04:15) हैं तो इसका मतलब आपने ऊपर कुछ ना कुछ तो (01:04:18) गड़बड़ करी। तो आपने किया है। अगर मैं (01:04:22) इसका आंसर नो देती हूं तो मैं इसका आंसर (01:04:23) भी नो ही दूंगी। अगर मैं इसका आंसर यस दे (01:04:25) दूं तो यस। ये हुए डिपेंडेंट क्वेश्चंस (01:04:28) डिपेंडेंट्स। (01:04:30) यहां पर आइटम्स एक दूसरे से रिलेटेड है बट (01:04:34) डिपेंडेंट नहीं है। मतलब मेरा जो पूरा (01:04:37) स्केल है वो डिप्रेशन पे बेस्ड है। (01:04:40) माय स्केल जो है मेरा माय स्केल इज़ बेस्ड (01:04:43) ऑन डिप्रेशन। तो मेरा फर्स्ट क्वेश्चन है (01:04:46) आई फील लोनली। (01:04:51) आई फील अनहै (01:04:57) फिर (01:04:59) हम कहीं तो और क्या क्वेश्चन हम कुछ भी ले (01:05:01) लो (01:05:08) आई एम नॉट एबल टू स्लीप (01:05:11) वेल अब आप मुझे बताइए चलो ये कहीं ना कहीं (01:05:15) एक दूसरे से रिलेटेड है। ऑल ऑफ़ दीज़ आइटम्स (01:05:18) आर रिलेटेड टू ईच अदर। कहीं ना कहीं तीनों (01:05:20) ही डिप्रेशन के अलग-अलग उसको मेजर करते (01:05:23) हैं आइटम्स। लेकिन जस्ट बिकॉज़ मैं इसमें (01:05:27) यस कहती हूं। इसका मतलब ये नहीं कि मैं (01:05:28) यहां पे भी यस कहूंगी। मैं यहां पे नो भी (01:05:31) कह सकती हूं। और जस्ट बिकॉज़ मैं कह रही (01:05:32) हूं कि आई फील अनहैपी डस नॉट मीन आई एम (01:05:34) नॉट एबल टू स्लीप वेल। (01:05:37) तो नो हो सकता है मुझे नींद अच्छे से मुझे (01:05:39) नींद आ जाती है। सबका अपना-अपना होता है। (01:05:42) किसी को इंसोमेनिया हो जाता है। बट किसी (01:05:44) को बहुत एक्सट्रीम नींद भी आती है। फिर (01:05:46) हाइपोसोमिया भी हो रहा है। (01:05:50) किसी की नींद नहीं आ रही है। किसी को पर (01:05:52) किसी को आ जाती है। कोई अगर बहुत अपसेट (01:05:53) होता है तो उसको नींद जल्दी आती है। बट (01:05:55) अगर कोई अपसेट है तो उसको नींद नहीं आती (01:05:57) है। (01:05:59) तो जस्ट बिकॉज़ आई एम अनहै डज़ नॉट मीन आई (01:06:02) विल नॉट बी एबल टू स्लीप। तो क्या मेरा यह (01:06:05) आंसर प्रेडिक्ट कर पाएगा इसको? नहीं कर (01:06:07) पाएगा। तो इसका मतलब है कि इंडिपेंडेंट (01:06:09) लोकल इंडिपेंडेंस आइटम एक दूसरे से (01:06:11) रिलेटेड है। सभी अलग-अलग डायमेंशन को मेजर (01:06:14) करते हैं डिप्रेशन की बट स्टिल दे आर नॉट (01:06:16) रिलेटेड दे आर नॉट डिपेंडेंट ऑन इट। (01:06:20) ठीक है? आइटम के जो पैराटर्स हैं आपके (01:06:23) तीनों जो पैराटर्स हैं आप उनको कहीं से भी (01:06:26) आपका जो आइटम कैरेक्टरिस्टिक कर्व है आइटम (01:06:28) रिस्पांस कर्व है उस पर कहीं से भी किसी (01:06:29) भी बेसिस पे उसको मेजर कर सकते हैं। आपको (01:06:31) जीरो से शुरू करने की जरूरत नहीं है। मैं (01:06:33) यहां पे अगर कुछ है तो मैं इससे भी यहां (01:06:35) पे मेजर कर सकती हूं। मुझे यहां से शुरू (01:06:37) करने की जरूरत नहीं होती। (01:06:40) ये आप लोग पढ़ लेना इनके बीच में डिफरेंस। (01:06:42) सो थैंक यू सो मच फॉर वाच वाचिंग। आई होप (01:06:45) आप लोगों को क्लास समझ आई होगी। आप लोगों (01:06:47) को ये दोनों थ्योरीज़ समझ में आई होगी। कुछ (01:06:50) भी डाउट है, कुछ भी है तो आप क्या कर सकते (01:06:51) हो? आप कमेंट पे मेंशन कर सकते हो। थैंक (01:06:53) यू सो मच एवरीवन। बाय-ब टेक केयर। ये आपका (01:06:57) लिंक है मतलब ये चैनल है। इसका लिंक आपको (01:06:59) डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा। तो आप लोग ले (01:07:02) लेना जॉइ कर लेना। चलो बाय-ब एवरीवन।

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