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Title: Classical Test Theory and Item Response Theory | unit 3 psychological testing| UGC NET DECEMBER 2025
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हेलो एवरीवन गुड इवनिंग हाउ आर यू डूइंग
(00:00:12)
आई होप यू आर ऑल डूइंग गुड वेलकम टू
(00:00:16)
टेक्नोलॉजी चलिए
(00:00:19)
स्टार्ट
(00:00:22)
इफ यू आर हियर फॉर द फर्स्ट टाइम यहां पे
(00:00:24)
आपको कंप्लीटली यूजीसी नेट की प्रिपरेशन
(00:00:26)
मैं करवाने वाली हूं फर्स्ट साइकोलॉजी
(00:00:29)
टीचिंग विल बी
(00:00:30)
नोट्स आपको प्रोवाइड मैं करवा दूंगी। सभी
(00:00:32)
के पीवाई एजुकेशन सभी चीज़ करने वाले हैं
(00:00:35)
यहां पे। ऑन YouTube यूजीसी नेट
(00:00:41)
दिस विल बी कंप्लीट
(00:00:44)
चलो या अगर आप क्लासेस ढूंढने में क्लासेस
(00:00:47)
नहीं मिलते तो प्लिस्ट पे सबसे पहले
(00:00:51)
Telegram चैनल
(00:00:54)
तो नहीं मिलता कई बार मेरे पास आता है कि
(00:00:55)
Telegram चैनल नहीं मिलता है। तो Telegram
(00:00:58)
चैनल चैनल के डिस्क्रिप्शन में भी है और
(00:01:01)
आपके पास वीडियोस के डिस्क्रिप्शन में भी
(00:01:04)
मिल जाता है। ये इस तरीके से हमने
(00:01:06)
प्लेलिस्ट बना रखी है सभी आपकी क्लासेस
(00:01:09)
की। तो यूनिट वन, यूनिट टू की क्लासेस,
(00:01:11)
यूनिट थ्री तीनों की बनी हुई है
(00:01:12)
प्लेलिस्ट। फर्स्ट क्लास से जाके आप लोग
(00:01:14)
देख सकते हैं।
(00:01:16)
यूनिट थ्री हमारा चल रहा था साइकोलॉजिकल
(00:01:18)
टेस्ट से। अभी तक जो क्लासेस हुई है, आई
(00:01:20)
होप आप लोगों को समझ आई होंगी। उसमें कुछ
(00:01:23)
भी रहता है जो भी रहता है आप लोग मुझे बता
(00:01:25)
सकते हो कमेंट कर सकते हो
(00:01:29)
आज हम बात करेंगे आज हम कुछ क्लासिक थ्यरी
(00:01:32)
की बात करेंगे आपके साइकोमेट्रिक के
(00:01:34)
साइकोमेट्रिक क्या है बेसिकली ये आपका
(00:01:38)
साइंस जो कि मेजर करता है आपके इंटेलिजेंस
(00:01:40)
पर्सनालिटी एटीट्यूड जैसी चीजें फॉर
(00:01:42)
एग्जांपल तो वो क्या है वो साइकोमेट्रिक
(00:01:45)
ही तो है तो साइकोल जी को आप क्या कर रहे
(00:01:48)
हो बेसिकली आप साइकोलॉजिकल कंस्ट्रक्ट्स
(00:01:50)
को क्या कर रहे हो मेजर कर रहे आपके पास
(00:01:53)
कोई मेजरमेंट का क्राइटेरिया है वो क्या
(00:01:55)
है वो साइकोमेट्रिक्स है तो उसी
(00:01:57)
साइकोमेट्रिक्स के फाउंडेशनल अप्रोचेस में
(00:01:59)
आती है ये क्लासिकल टेस्ट
(00:02:02)
तो इट इज़ बेसिकली ये देखने के लिए और इसका
(00:02:05)
ये कहना है कि कैसे आपका जो स्कोर है अब
(00:02:08)
क्या हो रहा है आप इंटेलिजेंस का स्केल दे
(00:02:12)
रहे हो या आप एटीट्यूड का दे रहे हो
(00:02:14)
पर्सनालिटी का दे रहे हो तो उसके अंदर ये
(00:02:16)
बताना कि जो हमारे पास स्कोर आ रहा है वो
(00:02:20)
कितना उस इंडिविजुअल की ट्रू एबिलिटी के
(00:02:23)
साथ रिलेट करता है। क्या उसके अंदर कितने
(00:02:26)
एरर हैं? ये सब हमें कौन बताता है? ये
(00:02:29)
हमें क्लासिकल टेस्ट थ्योरी बताती है। एंड
(00:02:32)
अलोंग विद दिस
(00:02:34)
ये हमें एक तरह का आपसे कहें तो मेजर ऑफ़
(00:02:36)
रिलायबिलिटी भी है।
(00:02:40)
तभी इसको आप थ्योरी ऑफ़ रिलायबिलिटी भी
(00:02:42)
कहते हैं।
(00:02:50)
थ्योरी ऑफ़ रिलायबिलिटी।
(00:02:54)
क्योंकि क्या कर रहा है? यह देख रहा है कि
(00:02:56)
जो टेस्ट स्कोर है वो कितने किस हद तक
(00:02:59)
रिफ्लेक्ट कर रहे हैं आपके ट्रू स्कोर को
(00:03:02)
और बेसिकली कि जो आप हैं ये समझिए कि जो
(00:03:06)
आप हैं उसको वो कितना अच्छे से दिखा पा
(00:03:08)
रहे हैं। अगर आपको डिप्रेशन है तो आपका
(00:03:10)
टेस्ट डिप्रेशन दिखाना चाहिए। तो किस हद
(00:03:13)
तक किस एक्सटेंट तक टू व्हिच एक्सटेंट इट
(00:03:17)
कैन शो और योर फुल रिफ्लेक्ट्स
(00:03:21)
व्हाट इज गोइंग ऑन रिद
(00:03:25)
समझ रहे? दैट इज व्हाई इट इज आल्सो अ
(00:03:28)
थ्योरी ऑफ रिलायबिलिटी। क्योंकि हमें यह
(00:03:29)
रिलायबिलिटी समझने में हेल्प करती है।
(00:03:31)
हमें फार्मूला डिराइव करके देती है कि आप
(00:03:34)
इसके थ्रू क्या कर सकते हैं? आप
(00:03:36)
रिलायबिलिटी को का एक एस्टीिमेशन लगा सकते
(00:03:38)
हैं। तो हमें क्या दो चीजें मोटी-मोटी बता
(00:03:42)
रही है क्लासिकल टेस्ट थ्योरी कि
(00:03:45)
पहली चीज तो हाउ मच ऑफ योर टेस्ट स्कोर
(00:03:48)
रिफ्लेक्ट्स योर एबिलिटी। आपकी रियल
(00:03:51)
एबिलिटी किस हद तक आपका स्कोर बता पाता है
(00:03:54)
और कितना उसके अंदर एरर है। दूसरी चीज यह
(00:03:59)
हमें रिलायबिलिटी का एस्टिमेशन करने में
(00:04:02)
हेल्प करती है। तो ये दो चीजें हैं जो
(00:04:05)
हमें यहां से पता चलती है।
(00:04:09)
चलो अब हम एक एग्जांपल लेते हैं।
(00:04:16)
लेट्स सपोज कि आपका मैथ्स का एग्जाम
(00:04:19)
मैथ्स का एग्जाम है, साइकोलॉजी का एग्जाम
(00:04:22)
है, किसी का भी एग्जाम।
(00:04:29)
सो नाउ यू हैव योर
(00:04:36)
मैथ्स।
(00:04:42)
अब इसके अंदर क्या हुआ? यह एक 100 मार्क्स
(00:04:46)
का एग्जाम है और आपको इसमें आए आउट ऑफ 100
(00:04:52)
7 ये आपने स्कोर किया आपने 70 नंबर आप
(00:04:55)
लेके आए हो मैथ्स के अंदर आउट ऑफ 100 अब
(00:05:00)
हुआ ये
(00:05:02)
कि चलो एग्जाम था और आपके टीचर ने गलती से
(00:05:08)
आपको बैठा दिया टॉपर के पास आपको कुछ नहीं
(00:05:11)
आता है मैथ्स ठीक है ना आपको कुछ नहीं आता
(00:05:14)
है आपको बस बस काम चला वो आप कर लेते हो
(00:05:16)
बाकी तो पर लेकिन उस दिन आपका लक ये रहा
(00:05:20)
कि मैम ने आपको किसके पास बिठा दिया आपके
(00:05:22)
जो भी इनविजिलेटर थे उन्होंने आपको आपके
(00:05:25)
क्लास के टॉपर और वो टॉपर निकल गया बाय
(00:05:27)
चांस आपका फ्रेंड
(00:05:29)
अब टॉपर भी है और फ्रेंड भी है तो आपने
(00:05:33)
क्या किया बोला यार बता दे मैंने कहा चल
(00:05:37)
ठीक है बता देता हूं
(00:05:39)
तो उसने आपको
(00:05:42)
काफी सारी हेल्प कर दी आपने ने उसने देखा
(00:05:45)
और आप उसके देखतेदेखते कॉपी करते गए। फिर
(00:05:47)
उसने कहा कि भाई मैं टॉपर हूं। मुझे टॉप
(00:05:51)
करने दो। तुम टॉप मत करो। तो लिमिट में
(00:05:54)
कॉपी करो। तो बोले चल ठीक है।
(00:05:58)
अब
(00:05:59)
आपको उसमें से कितना आता था? आपको तो 50
(00:06:02)
मार्क्स का पेपर आता था।
(00:06:06)
आपको कितना आता था? 50 मार्क्स का। पर
(00:06:09)
आपने कहा 50 में से तो काम नहीं चलेगा। घर
(00:06:11)
वाले मारेंगे तो फिर क्या करें? 20 नंबर
(00:06:13)
का कॉपी कर लेते हैं। तो 20 मार्क्स का
(00:06:16)
आपने क्या कर लिया? यह आपने कर लिया कॉपी।
(00:06:22)
चीटिंग कर ली। टोटल नंबर कितने आ गए? 70 आ
(00:06:26)
गए। बहुत शाबाशी भी आपको मिल गई। अब
(00:06:31)
नाउ इज दिस सिनेरियो क्या ये 70 मार्क्स?
(00:06:35)
आपका रियल स्कोर है?
(00:06:38)
क्या आपकी एबिलिटी है 70 मार्क्स ले आने
(00:06:42)
की मैथ्स के एग्जाम में? नहीं ना? नहीं।
(00:06:47)
बट स्टिल ये आपको कितने आ रहे हैं? 70 आ
(00:06:50)
रहे हैं। तो क्या मुझे ये 70 मार्क्स मेरी
(00:06:52)
रियल एबिलिटी दिखा पा रहे हैं? बिल्कुल
(00:06:55)
नहीं। तो क्या इस तरह का टेस्ट में भी हो
(00:06:57)
जाता है? मेजरमेंट स्केल्स में,
(00:06:59)
साइकोमेट्रिक स्केल्स में भी ऐसा हो जाता
(00:07:01)
है। हो जाता है कई बार। अगर कोई
(00:07:03)
इंडिविजुअल क्या करे? वो क्वेश्चन देखा
(00:07:05)
उसने डिप्रेशन का टिक टिक टिक टिक किया जा
(00:07:07)
रहा है। उसको कोई डिप्रेशन नहीं है। बहुत
(00:07:09)
ही मस्त एकदम चिल लाइफ चल रही है उसकी।
(00:07:12)
फिर भी उसने क्या किया? उसने पढ़ा नहीं।
(00:07:13)
बस सब पे एग्री एग्री करता गया और क्या हो
(00:07:16)
गया? डिप्रेशन आ रहा है सीरियल।
(00:07:20)
तो ये क्या है? ये कहीं ना कहीं एक एरर हम
(00:07:23)
कह सकते हैं कि एरर हुआ है। जैसे यहां पे
(00:07:26)
ये 20 मार्क्स का एरर हुआ। वैसे ही वो भी
(00:07:30)
क्या है? वो भी एरर है। तो ये क्या है? कम
(00:07:34)
होना या ज्यादा होना इज एरर। तो वहीं पर
(00:07:37)
आपकी क्लासिकल टेस्ट थ्योरी एक फार्मूला
(00:07:39)
देती है।
(00:07:42)
x = t +
(00:07:57)
x क्या है आपका?
(00:07:59)
x है ऑब्जर्व्स।
(00:08:04)
ऑब्जर्व स्कोर का मतलब जो स्कोर मैं
(00:08:06)
ऑब्जर्व कर पा रही हूं। जो स्कोर स्कोर
(00:08:08)
मुझे दिखाई दे रहा है तो मुझे कितना दिखाई
(00:08:11)
दे रहा है? मुझे दिखाई दे रहा है 70।
(00:08:16)
तो हमें क्या लग रहा है कि भाई 70 आए हैं
(00:08:19)
टी होता है ट्रू फोर।
(00:08:24)
और ई होता है एरर।
(00:08:28)
नाउ
(00:08:30)
अब देख तो मुझे 70 रहे हैं कि भाई ठीक है
(00:08:33)
बहुत अच्छे स्कोर आए हैं मेरे पास 70 नंबर
(00:08:34)
मैं लेकर आ गई हूं बहुत बढ़िया लेकिन क्या
(00:08:37)
70 ही मेरे एक्चुअल स्कोर है क्या मेरी
(00:08:39)
एक्चुअल एबिलिटी ये दिखा रहा है 70 नहीं
(00:08:43)
ना मेरे को तो 50 मार्क्स जितना ही आता था
(00:08:45)
20 मार्क्स तो वो मेरा दोस्त है जिसने
(00:08:47)
मुझे बता दिया इसकी वजह से मेरा स्कोर 70
(00:08:50)
तक पहुंच गया अगर यह मुझे नहीं बताता अगर
(00:08:53)
बाय चांस यहां पे ये इंडिविजुअल नहीं होता
(00:08:56)
फ्रेंड नहीं होता और मुझे नहीं किसी से
(00:08:59)
पूछ पाता तो क्या होता? मेरे को कितने
(00:09:02)
मार्क्स आते? मेरे को 50 ही आते। तो मेरा
(00:09:05)
ट्रू स्कोर कितना? 50। अब ये जो एक्स्ट्रा
(00:09:09)
मेरे को 20 मार्क्स मिले। क्या ये कहीं ना
(00:09:11)
कहीं एक एरर है? एरर ही है तो 20 आपका
(00:09:15)
एरर।
(00:09:17)
तो यह क्लासिकल टेस्ट थ्योरी बेसिकली आपको
(00:09:20)
यही डिफाइन करने में हेल्प करती है। यही
(00:09:23)
समझने में हेल्प करती है कि आपका स्कोर
(00:09:26)
किस हद तक यह दिखा पा रहा है कि आपने जो
(00:09:30)
स्कोर किया है वो आपकी एक्चुअल एबिलिटी है
(00:09:33)
ना कि कोई एरर है। यह कौन बताता है? यह
(00:09:36)
क्लासिकल टेस्ट थ्योरी हमें बताती है।
(00:09:41)
फिर
(00:09:42)
इनका यह भी कहना है कि आपकी जो ट्रू स्कोर
(00:09:45)
होता है, जो आपकी एबिलिटी होती है, वह कभी
(00:09:47)
बदलती नहीं।
(00:09:50)
अब आप मैथ्स में एवरेज हो या आप टॉपर हो,
(00:09:56)
आप कुछ भी हो सकते हो। अब ये स्कोर थोड़ा
(00:09:58)
उल्टा भी जा सकता है। जैसे
(00:10:02)
अगेन लेट से यू हैव योर साइकोलॉजी एग्जाम।
(00:10:07)
और आप कहें, आप है क्लास के टॉपर।
(00:10:10)
लेकिन अब आपकी तबीयत खराब है। आपकी फीवर
(00:10:13)
है। आपकी और भी तबीयत खराब हो रही है।
(00:10:14)
काफी टाइम से और आप कुछ पढ़ नहीं पाए।
(00:10:17)
तो आपको 100 में से स्कोर आता है 60 का।
(00:10:21)
ये भी आप बिना पढ़े लिया है। जो भी आपने
(00:10:22)
पहले पढ़ा हुआ था उसके बेसिस पे आप 60
(00:10:24)
मार्क्स लेके आ गए।
(00:10:28)
लेकिन क्या अब ये आपकी ट्रू एबिलिटी दिखा
(00:10:30)
रहा है। क्योंकि आपके अंदर कैलिबर कितना?
(00:10:33)
आप कितना कर सकते हो? आप तो 100 और 100 कर
(00:10:36)
सकते हो। लास्ट एग्जाम में तो आप 100 आउट
(00:10:38)
ऑफ 100 ही ले आए थे।
(00:10:41)
लेकिन अब क्योंकि आपकी तबीयत खराब है
(00:10:43)
क्योंकि कुछ एक्सटर्नल कंडीशंस ऐसी हो गई
(00:10:46)
है एक्सटर्नल इंटरनल कुछ भी ऐसे आ गई है
(00:10:49)
चीजें जिसकी वजह से आप क्या कर पाए आप
(00:10:51)
अपना नहीं अच्छा स्कोर कर पाए
(00:10:55)
तो अगेन आपकी एबिलिटी कितनी थी 100 की
(00:10:59)
सॉरी ऑब्वियस कितना स्कोर आया 60
(00:11:04)
लेकिन ट्रू स्कोर क्या था ट्रू स्कोर तो
(00:11:06)
100 है मेरी कैबिलिटी तो कितनी है 100
(00:11:10)
लाने की है। मैं 100 ले आती
(00:11:12)
लेकिन लाई कितना हूं? 60
(00:11:16)
तो एरर क्या हो गया? -40
(00:11:20)
तो इससे क्या मुझे ये समझ में आया कि मेरा
(00:11:23)
एरर पॉजिटिव भी हो सकता है और नेगेटिव भी
(00:11:25)
हो सकता है। योर एरर कैन बी पॉजिटिव और
(00:11:29)
नेगेटिव। बट ये एरर है। क्या एरर पॉजिटिव
(00:11:34)
हो या नेगेटिव हो डिजायरेबल है? बिल्कुल
(00:11:36)
नहीं है। क्या हमें एरर चाहिए हमारे स्टडी
(00:11:39)
के अंदर? नहीं चाहिए। चाहे वो पॉजिटिव एरर
(00:11:43)
आ रहा हो, चाहे वो नेगेटिव एरर आ रहा हो।
(00:11:45)
हमें किसी प्रकार का कोई एरर नहीं चाहिए।
(00:11:51)
तो दीज़ एरर्स बी पॉजिटिव
(00:12:00)
और नेगेटिव।
(00:12:03)
बट दोनों ही अनडिजायरेबल है।
(00:12:13)
ये याद रखना
(00:12:16)
और इनका ये भी कहना है कि जो आपकी ट्रू
(00:12:18)
एबिलिटी है वो कभी बदलती नहीं है। हां वो
(00:12:22)
सिचुएशन के हिसाब से जो भी एरर होती है
(00:12:24)
उसके हिसाब से कम या ज्यादा हो जाती है या
(00:12:26)
तो घट जाती है या बढ़ जाती है बट वो कभी
(00:12:29)
बदलती नहीं है। समझ रहे हो? अगर आपका
(00:12:33)
आईक्यू 110 है, तो आपका आईक्यू 110 ही
(00:12:36)
रहेगा। हो सकता है सिचुएशनल फैक्टर्स की
(00:12:40)
वजह से या इंडिविजुअल डिफरेंसेस की वजह से
(00:12:43)
वो घट जाए या वो बढ़ जाए। बट वह एक्चुअल
(00:12:48)
स्कोर नहीं बदलेगा। आपका ऑब्जर्व स्कोर
(00:12:50)
बदल सकता है। बट आपका ट्रू स्कोर कभी नहीं
(00:12:52)
बदल सकता। आईक्यू 110 ही है। बट क्योंकि
(00:12:56)
कभी कर नहीं पाए अच्छा परफॉर्म या कभी
(00:12:59)
चीटिंग कर लिया। इस तरह की चीजों से क्या
(00:13:01)
हो सकता है वो कम या ज्यादा हो सकता है।
(00:13:03)
अब डिप्रेशन है तो है किसी को डिप्रेशन है
(00:13:08)
बट अब वो क्या कर रहा है? अगर वो टेस्ट
(00:13:10)
अच्छे से नहीं करता है। वो मार्क अच्छे से
(00:13:13)
नहीं करता या कोई और प्रॉब्लम आती है, कोई
(00:13:15)
और एरर हमारे पास आते हैं तो क्या हो सकता
(00:13:17)
है? उसके स्केल के ऊपर का डिप्रेशन कम शो
(00:13:20)
कर सकता है। बट इट डज़ नॉट मीन कि उसके
(00:13:22)
उसमें स्ट्रेस अ डिप्रेशन नहीं है।
(00:13:27)
समझ रहे हो? तो ट्रू स्कोर नेवर चेंज आपको
(00:13:31)
याद रखना
(00:13:41)
क्या हमें ये चीज समझ आई? क्या हमें ये
(00:13:44)
फ़ूला समझ आया है? आई होप दिस इज़ क्लियर टू
(00:13:48)
ऑल ऑफ़ यू। आप लोगों को समझ आया होगा ये
(00:13:51)
ऑब्ज़र्व्स टू स्कोर एरर स्पोर्स क्या है?
(00:13:56)
नाउ अब जो आपके एरर होते हैं ना वो दो
(00:14:00)
तरीके के होते हैं।
(00:14:03)
कौन-कौन से? रैंडम एरर और सिस्टमेटिक एरर।
(00:14:08)
रैंडम एरर वो एरर है जिसका
(00:14:11)
हम इसको हम कंट्रोल नहीं कर सकते एज अ
(00:14:14)
रिसर्च। अब मेरे पार्टिसिपेंट का मूड
(00:14:17)
अच्छा है। उसका मूड खराब है। वह थका हुआ
(00:14:20)
है। वह घर से लड़ के आया है या उसको कहीं
(00:14:23)
पर जाने में लेट हो रही है। इस वजह से वो
(00:14:25)
सिर्फ टिक टिक टिक टिक कर रहा है। वो क्या
(00:14:26)
कर रहा है? यह मेरे कंट्रोल में नहीं है।
(00:14:29)
क्या मैं कंट्रोल कर सकती हूं किसी का
(00:14:31)
मूड? क्या मैं कंट्रोल कर सकती हूं कि कोई
(00:14:33)
अच्छे मूड में आए, अच्छा टेस्ट दे या वो
(00:14:36)
इस तरीके से टिक ना करे। मैं नहीं कर सकती
(00:14:38)
कंट्रोल। यह मेरे कंट्रोल के बियों्ड है
(00:14:41)
क्योंकि इंडिविजुअल डिफरेंसेस बेसिकली आप
(00:14:44)
कहें तो पार्टिसिपेंट्स कैरेक्टरिस्टिक्स
(00:14:47)
तो रैंडम एरर में क्या आती है? रैंडम एरर
(00:14:49)
में आते हैं पार्टिसिपेंट के
(00:14:50)
कैरेक्टरिस्टिक्स
(00:14:59)
जिस पे एज अ रिस्चर मेरा कोई कंट्रोल नहीं
(00:15:02)
हो सकता है। और इन सब चीजों की वजह से जो
(00:15:05)
एरर आते हैं वो कौन से एरर होते हैं?
(00:15:07)
रैंडम एरर क्या रैंडम एरर नॉर्मली
(00:15:10)
डिस्ट्रीब्यूटेड होंगे? होंगे। तो ये
(00:15:13)
पार्टिसिपेंट्स की कैरेक्टरिस्टिक्स है और
(00:15:14)
ये रैंडमली डिस्ट्रीब्यूट हो नॉर्मली
(00:15:17)
डिस्ट्रीब्यूट हो जाते हैं।
(00:15:20)
दे आर नॉर्मली डिस्ट्रीब्यूटेड। ये दो
(00:15:22)
चीजें आपको यहां पे याद रखनी है।
(00:15:32)
अब सिस्टेटिक एरर क्या है? सिस्टेटिक एरर
(00:15:34)
है मेरे पार्ट पे कि मैं मैं किसी
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एक्सटर्नल कंडीशंस या डिजाइन को कंट्रोल
(00:15:39)
नहीं कर पा रही हूं। प्रॉपर्ली एडमिनिस्टर
(00:15:41)
नहीं कर पा रही हूं कोई चीज। उसकी वजह से
(00:15:44)
एरर आ रहा है। अब मैंने क्या करा है?
(00:15:45)
मैंने आईक्यू का टेस्ट मैं कर रही हूं और
(00:15:48)
बाहर से बहुत ज्यादा शोर हो रहा है। नॉइज़
(00:15:50)
हो रही है। ऐसे में क्या होगा? ऑब्वियसली
(00:15:53)
द पार्टिसिपेंट विल नॉट बी एबल टू
(00:15:55)
कंसंट्रेट। आप कंसंट्रेट नहीं कर पाएगा।
(00:15:58)
क्वेश्चन अच्छे से रीड नहीं कर पाएगा। तो
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क्या होगा? आंसर गलत होने के चांसेस
(00:16:02)
ज्यादा हैं। आपका मैथ्स का एग्जाम चल रहा
(00:16:04)
है, आपका साइकोलॉजी का एग्जाम चल रहा है,
(00:16:06)
कोई भी एग्जाम चल रहा है और बाहर से बहुत
(00:16:08)
वो बाजे की आवाजें आ रही है, कुछ और हो
(00:16:10)
रहा है, कोई लड़ रहा है। सब, मतलब बहुत
(00:16:12)
सारी चीजें हो रही है। तो मुझे बताइए आपका
(00:16:14)
ध्यान एग्जाम पे होगा कि बाहर ही देखने
(00:16:16)
में होगा अच्छा कौन लड़ रहे हैं? क्या हो
(00:16:17)
गया है? है ना? तो वो चीजें अब ये किसकी
(00:16:21)
गलती है? ये मेरी गलती है। मुझे ये सब
(00:16:23)
चीजें कंट्रोल करनी चाहिए। मेरे को एक ऐसा
(00:16:24)
एनवायरमेंट देना चाहिए जहां पे ये सब
(00:16:26)
चीजें नहीं हो। तो यह रिस्चर की गलती
(00:16:29)
सिस्टमेटिक एरर वो एरर है जो किसकी वजह से
(00:16:32)
होते हैं? आपके रिस्चर की वजह से होते
(00:16:34)
हैं।
(00:16:36)
क्या इनको प्रिवेंट किया जा सकता है? इनको
(00:16:38)
प्रिवेंट किया जा सकता है। तो दीज़ एरर कैन
(00:16:41)
बी प्रिवेंटेड।
(00:16:48)
आई होप दिस इज़ क्लियर। तो ये दो तरीके के
(00:16:50)
हमारे पास यहां पे एरर होते हैं।
(00:16:57)
अब जैसा कि मैंने आपको बताया कि यहां पर
(00:16:59)
आपके पास क्या है? यह रिलायबिलिटी भी
(00:17:02)
बताता है। आपके जो स्कोर्स आ रहे हैं उसको
(00:17:06)
क्या कहता है ये?
(00:17:09)
अच्छा एक चीज और बताती हूं।
(00:17:12)
पहले कि आप इनका यह भी कहना है कि जो ट्रू
(00:17:16)
स्कोर है ना इस ट्रू स्कोर के बीच में और
(00:17:19)
आपके एरर के बीच में कोई रिलेशनशिप नहीं
(00:17:22)
होता है। देयर इज़ नो रिलेशनशिप बिटवीन
(00:17:25)
ट्रू स्कोर एंड एरर।
(00:17:28)
ये दोनों क्या है? ये दोनों अलग-अलग है।
(00:17:30)
ये अलग-अलग है। तभी तो देखो हम इनको अलग
(00:17:32)
कर पाए ना ऑब्ज़र्व्ड में से। ऑब्ज़र्व में
(00:17:35)
से हमने क्या करा? हमने एरर को निकाल
(00:17:37)
दिया। तो योर एरर स्कोर एंड योर ट्रू
(00:17:41)
स्कोर आर नॉट एट ऑल कोरिलेटेड। इनके बीच
(00:17:44)
में किसी प्रकार का कोरिलेशन नहीं होता
(00:17:47)
है। क्यों? क्योंकि जो रैंडम एरर है आपके
(00:17:50)
कौन से एरर की बात हो रही है यहां पे?
(00:17:52)
रैंडम एरर है। रैंडम एरर को हम थोड़ा
(00:17:54)
ज्यादा फोकस करते हैं। तो जो रैंडम एरर है
(00:17:56)
ना वो आपकी एबिलिटी नहीं छीन सकते।
(00:18:00)
क्या आपको मैथ्स में कितना आता है? आपको
(00:18:02)
साइकोलॉजी में कितना आता है? वो आपके फीवर
(00:18:04)
होने से कम या ज्यादा हो जाएगा? एक बार हो
(00:18:07)
जाएगा बट आपके अंदर जो उसकी एबिलिटी है उस
(00:18:10)
चीज को करने की वो तो खत्म नहीं होगी। अगर
(00:18:12)
आप बहुत अच्छा कोई स्पोर्ट्स खेलते हैं तो
(00:18:15)
आप एक बार खराब खेल लेंगे।
(00:18:18)
दो बार खराब खेल लेंगे। कुछ भी हो सकता
(00:18:20)
है। बट आपके अंदर से वो एबिलिटी तो नहीं
(00:18:22)
चली जाएगी उसको खेलने की या आपको ये भूल
(00:18:25)
जाएंगे आप किसको कैसे खेला जाता है? कैसे
(00:18:27)
किया जाता है। नहीं ना? आप अच्छा परफॉर्म
(00:18:30)
करेंगे। तो एरर कौन सी एरर? ज्यादा फोकस
(00:18:33)
किस पे है? इट इज़ मोर फोकस ऑन रैंडम एरिज
(00:18:40)
देयर इज़ नो कोरिलेशन
(00:18:53)
को
(00:18:58)
और यह तो मैंने आपको बता ही दिया कि एरर
(00:19:00)
क्या रहता है? नॉर्मली डिस्ट्रीब्यूटेड
(00:19:02)
यहां पर रहता है।
(00:19:07)
इसका मतलब अगर सैंपल लार्ज है, बड़ा सैंपल
(00:19:10)
है तो आगे जाके एरर क्या हो जाएगा? वो
(00:19:12)
जीरो हो जाएगा। क्योंकि आपका क्या रहता
(00:19:14)
है? आपका लॉन्ग बड़े सैंपल में लार्ज सैंपल
(00:19:17)
में नॉट लॉन्ग सैंपल। लार्ज सैंपल के अंदर
(00:19:20)
जो आपका मीन होता है वो क्या हो जाता है?
(00:19:22)
ऑलमोस्ट बराबर हो जाता है। फॉर योर
(00:19:24)
ऑब्जर्व स्कोर और फॉर योर ट्रू स्कोर। तो
(00:19:27)
इस वजह से एरर क्या हो जाएगी? ज़ीरो हो
(00:19:29)
जाएगी।
(00:19:31)
नाउ रिलायबिलिटी क्या होती है? ऑब्वियसली
(00:19:33)
हम पढ़ चुके हैं कंसिस्टेंसी एंड
(00:19:35)
स्टेबिलिटी ऑफ योर टेस्ट कोर्स। आपके जो
(00:19:37)
स्कोर्स है उनमें कितनी कंसिस्टेंसी आ रही
(00:19:39)
है? कितना हम उस पे विश्वास कर सकते हैं
(00:19:42)
विश्वसनीय विश्वसनीयता आपकी टेस्ट की,
(00:19:44)
आपके स्कोर्स की। तो ये भी कौन हेल्प करता
(00:19:47)
है? ये हमें चेक करने में हेल्प करता है
(00:19:49)
आपके रिलायबिलिटी को। कौन? क्लासिकल टेस्ट
(00:19:51)
थ्योरी।
(00:19:53)
अब यहां पर क्या है? यहां पर आपको इसका
(00:19:56)
फार्मूला दिया हुआ है कि आप किस तरीके से
(00:19:58)
इसको निकाल सकते हैं।
(00:20:00)
तो रिलायबिलिटी क्या होती है? ट्रू
(00:20:03)
वेरियंस। ट्रू वेरियंस क्या है आपकी? जो
(00:20:06)
आपका ट्रू स्कोर है।
(00:20:08)
ट्रू स्कोर अपॉन ट्रू प्लस एरर। यानी कि
(00:20:11)
इसको आप क्या कह सकते हैं? क्या आप इसको
(00:20:13)
कंबाइन ऑब्जर्व स्कोर कह सकते हैं?
(00:20:19)
ऑब्जर्व वैरियंस या फिर टोटल वेरियंस।
(00:20:27)
ये टर्म्स लिखी भी आ सकती है। अच्छा तो
(00:20:30)
इसका मतलब है कि हमें क्या दिखाता है?
(00:20:33)
हमें रिलायबिलिटी का कैसे अनुमान लगाते
(00:20:35)
हैं हम या हम रिलायबिलिटी को किस तरीके से
(00:20:37)
एस्टीिमेट करते हैं वो हम करते हैं इसके
(00:20:41)
रेश्यो के बेसिस पे कि हमारे टोटल वेरियंस
(00:20:44)
के रेश्यो का क्या रेश्यो है ट्रू वेरियंस
(00:20:47)
के साथ में कि अगर मेरा टोटल 100 है तो 60
(00:20:52)
मेरी क्या है?
(00:20:54)
ट्रू वेरियंस है। इट मींस दिस इज़ माय
(00:20:58)
रिलायबिलिटी।
(00:21:02)
तो इन दोनों के इसके कॉन्टेक्स्ट में आप
(00:21:04)
कहें तो आपके टोटल वेरियंस के कॉन्टेक्स्ट
(00:21:07)
में हम देखते हैं कि ट्रू वेरियंस कितनी आ
(00:21:10)
रही है।
(00:21:15)
आई होप दिस इज़ क्लियर टू ऑल ऑफ़ यू।
(00:21:19)
इज इट?
(00:21:23)
चलिए
(00:21:28)
नाउ
(00:21:33)
अब ये क्यों आपको कई बार क्वेश्चन भी आया
(00:21:35)
हुआ है पहले पूछ भी लेते हैं कि चलो ये
(00:21:38)
फार्मूला है हमें रेश्यो के या उसके
(00:21:40)
कॉन्टेक्स्ट में बताता है ऑब्जर्व वेरियंस
(00:21:42)
से टोटल वेरियंस के कॉन्टेक्स्ट में हमें
(00:21:43)
बताता है कि ट्रू वेरियंस कितनी है और
(00:21:45)
उससे हम पता करते हैं कि अच्छा दिस इज़ माय
(00:21:47)
रिलायबिलिटी
(00:21:49)
ऐसा क्यों
(00:21:51)
क्योंकि हमारा मानना है कि हमारे जो ट्रू
(00:21:54)
स्कोर है और जो हमारे एरर स्कोर है वह एक
(00:21:56)
दूसरे से रिलेटेड नहीं है। वही जो मैंने
(00:21:59)
आपको पहले बताया कि रैंडम एरर आपकी
(00:22:02)
एबिलिटी को ट्रू एबिलिटी को इन्फ्लुएंस
(00:22:04)
नहीं कर सकता है इंडिविजुअल की। तभी हम
(00:22:06)
क्या करते हैं? उस टोटल वेरियंस के
(00:22:08)
कॉन्टेक्स्ट में देखते हैं कि आपकी ट्रू
(00:22:10)
वेरियंस कितनी है। हमें आपकी टोटल वेरियंस
(00:22:14)
से मतलब नहीं है। उस टोटल वेरियंस से हम
(00:22:16)
क्या देखेंगे? हम ट्रू वेरियंस देखेंगे कि
(00:22:18)
आपका ट्रू स्कोर कितना आ रहा है।
(00:22:22)
समझ रहे हो? तो अगर आपका ट्रू स्कोर 60 है
(00:22:24)
और आपका ऑब्जर्व स्कोर 100 है तो मैं
(00:22:27)
कहूंगी कि आपकी रिलायबिलिटी कितनी है?
(00:22:29)
0.60 है। तो अच्छी रिलायबिलिटी है।
(00:22:34)
इस तरीके से
(00:22:44)
एरर डू नॉट
(00:22:57)
एबिलिटी ऑफ़ इंटेंशन
(00:23:03)
आई होप दिस इज़ क्लियर।
(00:23:06)
नाउ कुछ इसके एजम्पशनंस हैं। जैसे कि नो
(00:23:10)
कोरिलेशन बिटवीन ट्रू स्कोर एंड एरर
(00:23:12)
स्कोर। ये मैंने आपको बता दिया। अगर लार्ज
(00:23:14)
सैंपल होता है तो एवरेज एरर क्या हो जाती
(00:23:16)
है? ज़ीरो हो जाती है। क्यों? क्योंकि आपके
(00:23:19)
लार्ज स्कोर के अंदर, लार्ज सैंपल के अंदर
(00:23:22)
ट्रू स्कोर और ऑब्ज़र्व स्कोर में ज्यादा
(00:23:24)
डिफरेंस नहीं रहता है। उनका मीन बराबर हो
(00:23:25)
जाता है। तो इसकी वजह से आपका जो एरर है
(00:23:27)
वो ज़ीरो हो जाती है। हो जाता है। अब इसका
(00:23:31)
कहना है कि जो आइटम्स हैं आपके वो हमेशा
(00:23:33)
किस पे होने चाहिए? मैट्रिक लेवल पे होने
(00:23:35)
चाहिए। न्यूमेरिकली मेजरेबल होने चाहिए।
(00:23:38)
ये एक तो सबसे बड़ी इसकी एक तो आपको ये याद
(00:23:41)
भी रखना है। इसका मतलब हमारे पास जो
(00:23:43)
आइटम्स यानी कि क्वेश्चंस है वो कैसे होने
(00:23:45)
चाहिए? न्यूमेरिकल फॉर्म में होने चाहिए।
(00:23:47)
न्यूमेरिकली मेजरेबल होने चाहिए। अब अगर
(00:23:50)
हम साइकोलॉजी में क्वेश्चंस की बात करें।
(00:23:53)
आपको लिखा है आई फील लोनली।
(00:23:58)
अब आप मुझे बताइए इसके अंदर से कोई
(00:24:00)
न्यूमेरिकल वैल्यू है? क्या इसको
(00:24:01)
न्यूमेरिकली मेजर किया जा सकता है? इसको
(00:24:03)
तो यस और नो में मेजर किया जा सकता है।
(00:24:05)
सिर्फ
(00:24:08)
मैं इसको नंबर में तो मेजर नहीं कर सकती।
(00:24:10)
क्या आई फील लोनली ऑन अ स्केल ऑफ़ टू ऑन अ
(00:24:12)
स्केल ऑफ़ 10। आई फील टू या फोर या फाइव
(00:24:17)
कैसे नहीं हो सकता। तो मैं सिर्फ इसमें
(00:24:20)
बता सकती हूं या तो यस या तो नो आई फील
(00:24:22)
ओनली यस आई फील ओनली नो खत्म। तो कहीं ना
(00:24:26)
कहीं हम कह सकते हैं कि एक ड्रॉबैक है
(00:24:27)
इसका क्लासिकल टेस्ट थ्योरी का कि ये
(00:24:30)
सिर्फ मैट्रिक डेटा को लेता है। लेकिन अगर
(00:24:32)
हम साइकोलॉजी की बात करें या साइकोमेट्रिक
(00:24:35)
की इन जनरल बात करें तो वहां पर सारा डाटा
(00:24:37)
न्यूमेरिकल नहीं है। मोस्टली डाटा
(00:24:39)
न्यूमेरिकल नहीं है हमारे पास।
(00:24:43)
सीटीटी इज यूज्ड टू मेजर लेटेंट रेट्स।
(00:24:45)
ऑब्वियसली लेटेंट यानी हिडन रेट्स हमारी
(00:24:49)
जो चीज आप ऐसे देख के नहीं बता सकते हो।
(00:24:52)
आपको टेस्ट करने पड़ेंगे। फिर आपको पता
(00:24:54)
चलेगा किसी की पर्सनालिटी का, किसी के
(00:24:56)
एबिलिटीज का, इंटेलिजेंस का, किसी को
(00:24:58)
डिप्रेशन है कि नहीं है, स्ट्रेस है कि
(00:25:00)
नहीं। सब कुछ लेट एंट्रिक्स।
(00:25:05)
समझ रहे हो? अच्छा। अब जो सबसे इंपॉर्टेंट
(00:25:08)
चीज यह है कि ट्रू स्कोर इज जस्ट एन एस।
(00:25:12)
यस। यह जो ट्रू स्कोर है कि आपकी एबिलिटी
(00:25:15)
है 100 स्कोर करने की। आपकी एबिलिटी है 50
(00:25:18)
स्कोर करने की। ये सिर्फ क्या है? एक
(00:25:20)
एजम्पशन है, एक अनुमान है। हम कैसे बता
(00:25:24)
सकते हैं? कैसे हम इसको प्रूव करें कि
(00:25:26)
मेरी साइकोलॉजी की एबिलिटी है। जो ट्रू
(00:25:29)
एबिलिटी है वो 100 ऑन 100 लाने की। यहां
(00:25:31)
मेरी कैपेसिटी है। हर किसी इंडिविजुअल की
(00:25:34)
कैपेसिटी है। हर इंडिविजुअल की एबिलिटी है
(00:25:36)
कि वो 100 में से 100 स्कोर कर सकता है।
(00:25:39)
बट ये मेरा ट्रू स्कोर तो नहीं। मुझे 60 आ
(00:25:42)
रहा है तो भी मैं बोल रही हूं कि मेरा
(00:25:43)
ट्रू स्कोर 100 है। मेरे को 80 आ रहा है
(00:25:45)
तो भी बोल रही हूं। 100 आ रहा है तो 100
(00:25:48)
बोल रही हूं।
(00:25:49)
तो यह जो ट्रू स्कोर है ना यह कोई
(00:25:51)
डायरेक्टली ऑब्जरवेबल चीज नहीं है। मैं
(00:25:54)
ऑब्जर्व कर सकूं कि हां यह आपका ट्रू
(00:25:56)
स्कोर है। ये सिर्फ मेरा एक अनुमान है कि
(00:25:58)
हां मेरी एबिलिटी है। कैसे पता आपको कि
(00:26:00)
आपकी एबिलिटी है 100 मिलाने की? कैसे पता
(00:26:02)
आपको आज तक नहीं आए फिर भी बोल रहे हो कि
(00:26:04)
ट्रू स्कोर है मेरा 100 है। तो जब इसका
(00:26:07)
कोई ऑब्जरवेशन इसको आप ऑब्ज़र्व इसको आप कर
(00:26:10)
नहीं सकते हो डायरेक्टली। इसका कोई प्रूफ
(00:26:12)
हम दे नहीं सकते हैं। प्रूव इसको हम कर
(00:26:14)
नहीं सकते हैं। तो किस बेसिस पे मैं
(00:26:16)
बताऊंगी कि मेरी इसकी ट्रू स्कोर क्या है?
(00:26:18)
तो यह तो सिर्फ हम क्या करते हैं? एक
(00:26:19)
एस्टिमेशन लगाते हैं। एक एजमशन करते हैं
(00:26:21)
कि हां यह हो सकता है। ऐसे तो काम नहीं
(00:26:25)
चलता है साइंटिफिक उसमें।
(00:26:27)
तो ये भी क्या है? एक तरह का ड्रॉबैक है।
(00:26:29)
इसका एक तरह का नेगेटिव पॉइंट है उसमें।
(00:26:34)
आई होप दिस इज़ क्लियर टू ऑल ऑफ यू। यहां
(00:26:36)
पे आप आइटम डिफिकल्टी आइटम डिस्क्रिमिनेशन
(00:26:39)
भी देखते हैं कि अपन आगे देख। आइटम
(00:26:41)
डिफिकल्टी क्या होती है?
(00:26:43)
या
(00:26:47)
इज दिस क्लियर टू ऑल ऑफ यू?
(00:26:52)
एक चीज और हम इसमें कुछ चीजें और पॉइंट्स
(00:26:54)
देखते हैं। जैसे
(00:27:01)
आपसे टेस्ट लेते हैं। यहां पे जो मेजरमेंट
(00:27:04)
होता है ना वो टेस्ट लेवल पे होता है।
(00:27:11)
मेन हमको एक इंडिविजुअल आइटम्स से मतलब
(00:27:14)
नहीं है। हम क्या देख रहे हैं? हम ओवरऑल
(00:27:17)
स्कोर देख रहे हैं। मैं यह नहीं देख रही
(00:27:19)
कि आपने कौन से क्वेश्चन पे सही आंसर दिया
(00:27:22)
है। कौन से क्वेश्चन पे गलत आंसर किया है।
(00:27:24)
उससे मुझे कोई मतलब नहीं है। मुझे ये
(00:27:28)
जानने से कोई मतलब नहीं है कि अच्छा आप
(00:27:30)
किस एरिया में स्ट्रांग हो या आप किस
(00:27:31)
एरिया में वीक हो? उससे मुझे कोई मतलब
(00:27:33)
नहीं है। मुझे मतलब किससे आपको ओवरऑल
(00:27:35)
कितना स्कोर मिल रहा है। तो यहां पर
(00:27:37)
मेजरमेंट किस लेवल पर होता है? टेस्ट लेवल
(00:27:39)
मेजरमेंट पर होता है।
(00:27:44)
सेकंड
(00:27:46)
यहां पर जो आपका ट्रू स्कोर है और जो आपका
(00:27:48)
ऑब्जर्व स्कोर है उनके बीच में आप एक
(00:27:50)
लीनियर कोरिलेशन देखेंगे।
(00:27:56)
ट्रू स्कोर
(00:27:58)
एंड ऑब्जर्व
(00:28:05)
स्टंग लीनियर को
(00:28:08)
याद रखना।
(00:28:11)
लीनियर कोरिलेशन मैंने आपको बताया है।
(00:28:16)
ऐसा क्यों? क्योंकि आपका ट्रू स्कोर कहीं
(00:28:18)
ना कहीं आपके ऑब्जर्व स्कोर में ही तो आ
(00:28:20)
रहा है। आ रहा है कि नहीं आ रहा? यस। तो
(00:28:23)
जैसे-जैसे आपका एक स्कोर बढ़ेगा वैसे-वैसे
(00:28:25)
आपका दूसरा भी बढ़ेगा।
(00:28:42)
या फिर क्या हो सकता है?
(00:28:46)
या तो एक इनक्रीज होगा तो दूसरा भी
(00:28:47)
इंक्रीस हो जाएगा। या तो एक डिक्रीज होगा
(00:28:50)
तो दूसरा इंक्रीस हो जाएगा। इस तरीके से
(00:28:53)
ये चलता रहता है। इसी तरीके से चलता है।
(00:28:55)
इस तरीके से लीनियर पोजीशन
(00:29:02)
अंडर ऑब्जेक्ट।
(00:29:07)
तो आपसे ये पूछ सकते हैं कि लेवल ऑफ़
(00:29:09)
मेज़रमेंट क्या है? टेस्ट लेवल पे मेज़मेंट
(00:29:11)
करते हैं। यहां पे आइटम को हम एनालाइज़
(00:29:14)
नहीं कर रहे। हम टेस्ट को एनालाइज़ कर रहे
(00:29:16)
हैं। ट्रू स्कोर ऑब्ज़र्व स्कोर के बीच में
(00:29:18)
कैसा कोरिलेशन है? लीनियर कोरिलेशन है।
(00:29:20)
ट्रू स्कोर और आपके एरर रैंडम एरर के बीच
(00:29:24)
में कैसा रिलेशन है? नो रिलेशन। नो
(00:29:26)
कोरिलेशन। कोई किसी प्रकार का कोरिलेशन
(00:29:29)
उसके अंदर नहीं है।
(00:29:32)
आई होप दिस इज़ क्लियर टू ऑल ऑफ़ यू। नाउ वी
(00:29:36)
विल मूव ऑन टू आवर नेक्स्ट थ्योरी दैट इज़
(00:29:38)
आइटम रिस्पांस थ्योरी।
(00:29:40)
ये आपकी क्लासिकल टेस्ट थ्योरी के बाद में
(00:29:43)
आई। और कुछ चीजें जो हमने क्लासिकल टेस्ट
(00:29:46)
थ्योरी में देखी या जो भी क्लासिकल टेस्ट
(00:29:48)
थ्योरी की डीमेरिट्स थी या ड्रॉबैक्स थी।
(00:29:50)
उनको हम कहे तो बेसिकली सुधारने का काम
(00:29:53)
इसने किया।
(00:29:56)
इसे आप लेटेंट ट्रेड मॉडल भी कहते हैं।
(00:30:00)
क्योंकि इसका आइडिया क्या है कि जो
(00:30:02)
ट्रेट्स है वो क्या है? वो सभी हिडन है।
(00:30:04)
वो सभी छुपी हुई है। और हमें उन्हें क्या
(00:30:07)
करना है? उन्हें पढ़ना है। उन्हें समझना
(00:30:09)
है हमारे साइकोमेट्रिक टेस्ट की हेल्प से।
(00:30:14)
अब जैसेजैसे अपन ने जो पीछे देखी उसी से
(00:30:17)
अपन इसको कोरिलेट करते हुए पढ़ते हैं।
(00:30:19)
हमने पढ़ा कि वहां पे जो मेजरमेंट है वो
(00:30:22)
टेस्ट लेवल पे होता है। होता है कि नहीं
(00:30:24)
होता? यहां पर इसने कहा कि आप आइटम को
(00:30:29)
समझिए ना टेस्ट के ओवरऑल पे मत जाओ।
(00:30:33)
इंस्टेड ऑफ लुकिंग एट दी टोटल स्कोर हमारा
(00:30:37)
फोकस किस पे होना चाहिए? हमारा फोकस
(00:30:39)
इंडिविजुअल आइटम्स पे होना चाहिए।
(00:30:40)
इंडिविजुअल क्वेश्चंस पे होना चाहिए कि
(00:30:43)
भाई एक इंडिविजुअल के क्या प्रोबेबिलिटी
(00:30:45)
है उन क्वेश्चंस को आंसर करने की उसके
(00:30:48)
लेवल ऑफ एबिलिटी के बेसिस पे। अब मुझे
(00:30:50)
किसी की क्षमता कैसे समझ में आएगी? वो किस
(00:30:52)
टाइप के क्वेश्चंस को अटेम्प्ट कर पा रहा
(00:30:53)
है? किस क्वेश्चंस को नहीं अटेम्प्ट कर पा
(00:30:55)
रहा है? क्योंकि हर आइटम की अपनी एक
(00:30:57)
कैरेक्टरिस्टिक्स होती है। इसका कहना है
(00:31:00)
कि हर आइटम आपके पास 10 क्वेश्चन है तो 10
(00:31:03)
क्वेश्चन की अपनी-अपनी एक कैरेक्टरिस्टिक
(00:31:05)
है कि एक क्वेश्चन डिफिकल्टी को मेजर करने
(00:31:07)
के लिए बना है तो दूसरा क्वेश्चन बच्चों
(00:31:09)
में डिस्क्रिमिनेट करने के लिए बना है। और
(00:31:12)
कुछ क्वेश्चन सिर्फ गेसिंग एबिलिटी को
(00:31:14)
देखने के लिए बने हैं। तो हर आइटम की
(00:31:17)
अपनी-अपनी एक खासियत है। अपनी-अपनी
(00:31:18)
कैरेक्टरिस्टिक्स है। उसको मैं कैसे मेजर
(00:31:21)
करूंगी? उसको मैं तब मेजर कर पाऊंगी जब
(00:31:23)
मैं आइटम लेवल पे चीजों को समझूंगी।
(00:31:27)
समझ रहे हो? तो अंडरस्टैंडिंग किस लेवल पे
(00:31:30)
होनी चाहिए? आइटम लेवल पे होनी चाहिए। और
(00:31:33)
इनका ये भी कहना है कि जो आइटम्स होते हैं
(00:31:35)
ना वो कैसे होते हैं? वो सभी नॉमिनल होते
(00:31:38)
हैं नेचर में। ऑल दी आइटम्स आर नॉमिनल इन
(00:31:42)
नेचर या कैटेगोरिकल इन नेचर।
(00:31:46)
बट आइटम डज़ नॉट हैव अ न्यूमेरिकल वैल्यू।
(00:31:49)
आइटम की अपने आप में कोई न्यूमेरिकल
(00:31:51)
वैल्यू नहीं होती है। दे आर
(00:31:54)
एट नॉमिनल और यू कैन से कैटेगोरिकल लेवल।
(00:32:01)
ये तो हम है जो उसको क्या करते हैं? एक
(00:32:04)
नंबर प्रोवाइड कर देते हैं। जैसे आई फील
(00:32:08)
लोनली।
(00:32:12)
अब इसका आंसर या तो यस है या तो नो है। अब
(00:32:15)
कोई इंडिविजुअल इसमें यस आंसर देता है तो
(00:32:18)
उसको +2 मिलेगा और ज़ीरो मिलेगा नो देने
(00:32:20)
पे। लेट्स से इट इज़ इट इज़ द स्केल ऑफ़
(00:32:23)
डिप्रेशन। अब डिप्रेशन का स्केल है तो
(00:32:25)
लोनली होना डिप्रेशन का साइन है तो आपको +
(00:32:28)
टू मिल जाएगा यस करने पे। तो आपका स्कोर
(00:32:30)
ऐड अप हो जाएगा। समझ रहे हो? आई फील
(00:32:33)
हैप्पी।
(00:32:37)
इसमें कोई यस करता है और नो करता है। यस
(00:32:39)
में 0, नो में +2
(00:32:42)
तो अपने आप में इनकी कोई वैल्यू नहीं थी
(00:32:45)
ना। अपने आप में तो यस और नो के आंसर थे।
(00:32:46)
ट्रू फॉल्स आंसर थे। लेकिन हमने क्या
(00:32:49)
किया? हमने अपनी कंफर्ट के लिए हमारी
(00:32:52)
कैलकुलेशन हो जाए। हम एक कंक्लूजन पे
(00:32:54)
पहुंच जाए। उसके लिए क्या किया? इसको कोई
(00:32:56)
ना कोई न्यूमेरिकल वैल्यू प्रोवाइड कर दी।
(00:32:59)
तो आइटम की इसके अपने आप में कोई
(00:33:01)
न्यूमेरिकल वैल्यू नहीं है। लेकिन हमने
(00:33:03)
क्या करा? हमने इसको एक न्यूमेरिकल वैल्यू
(00:33:05)
प्रोवाइड कर दी। किस लेवल पे है? आइटम
(00:33:08)
नॉमिनल या कैटेगोरिकल लेवल पे है। यह आइटम
(00:33:11)
डिफरेंशिएट करेगा बिटवीन दोज़ हु आर लोनली
(00:33:14)
हु फील लोनली एंड हु डू नॉट फील लोनली। हु
(00:33:17)
डज़ नॉट फील लोनली।
(00:33:20)
करेगा कि नहीं करेगा? तो इट इज़ बेसिकली
(00:33:22)
डिफरेंशिएटिंग कैटेगरीज़ बनाने में हेल्प
(00:33:24)
करेगा आपको। आई फील हैप्पी। सम इफ समवन इज़
(00:33:27)
फीलिंग हैप्पी। तो आप उनको एक कैटेगरी में
(00:33:29)
डालेंगे। एंड समवन हु डस नॉट फील हैप्पी।
(00:33:32)
उनको आप एक कैटेगरी में डालेंगे।
(00:33:36)
आई होप दिस इज़ क्लियर। आपको एक क्वेश्चन
(00:33:38)
पूछा गया था ये सीबीटी
(00:33:40)
कंप्यूटर बेस्ड जो आपके टेस्ट होते हैं।
(00:33:45)
जो आपका नेट का भी होता है।
(00:33:49)
वो किस पे बेस्ड है? वो आपके आईआरटी पे
(00:33:51)
बेस्ड है। आइटम रिस्पांस थ्योरी पे बेस्ड
(00:33:53)
है। क्यों? क्योंकि अब उनमें क्या है? अब
(00:33:55)
जो भी कॉम्पिटिटिव लेवल एग्जाम्स होते हैं
(00:33:57)
उनमें कुछ क्वेश्चंस होते हैं डिफिकल्टी
(00:33:59)
लेवल को मेजर करने के लिए कि आइटम कितना
(00:34:02)
डिफिकल्ट है बेस्ड ऑन कितने बच्चे इसको
(00:34:05)
आंसर कर पाए। कुछ क्वेश्चंस होते हैं
(00:34:07)
डिस्क्रिमिनेट करने पे। वो क्वेश्चंस ऐसे
(00:34:09)
होते हैं कि जो हाई स्कोरर्स और लो
(00:34:12)
स्कोरर्स के बीच में करते हैं। कुछ
(00:34:14)
क्वेश्चंस आपके एग्जाम में ऐसे होते हैं
(00:34:15)
जो कि सिर्फ जो टॉप स्कोर्स हैं कर रहे
(00:34:18)
हैं बच्चे मोस्टली वही बच्चे इसको सही कर
(00:34:20)
पाते हैं बाकी नहीं कर पाते। कुछ
(00:34:22)
क्वेश्चंस ऐसे होते हैं प्योरली आपको गेस
(00:34:24)
करना होता है। आपको नहीं पता इसका आंसर
(00:34:25)
क्या होगा क्या हो सकता है। यू हैव टू गेस
(00:34:30)
दैट इज़
(00:34:32)
कंप्यूटर बेस्ड एग्जाम्स। तो ऐसा आपके
(00:34:34)
आईआईपी किस पे बेस्ड है? आईआरटी पे ही
(00:34:36)
बेस्ड है। क्लासिकल टेस्ट थ्योरी कहती है
(00:34:38)
कि टेस्ट परफेक्ट होता है।
(00:34:41)
टेस्ट क्या है? एकदम परफेक्ट है। उसमें
(00:34:43)
कोई कमी नहीं है। बट आईआरटी का मानना है,
(00:34:46)
आइटम रिस्पांस थ्योरी का मानना है कि
(00:34:48)
जरूरी नहीं है। टेस्ट में आपके टेस्ट के
(00:34:52)
आइटम्स में गलतियां हो सकती है। एंड इट इज़
(00:34:55)
ओके। इट इज़ नॉर्मल टू हैव मिस्टेक्स।
(00:35:02)
आई होप दिस इज क्लियर। अब
(00:35:07)
एक दो चीज अगर अपन और देखें तो
(00:35:12)
हमने पहले देखा यहां पे कि यहां पे एक
(00:35:14)
लीनियर कोरिलेशन है बिटवीन योर आइटम एंड
(00:35:18)
दिस टू स्कोर एंड ऑब्जर्व्स को आइटम
(00:35:21)
रिस्पांस थ्योरी का कहना है कि नहीं नॉन
(00:35:24)
लीनियर इट इज़ अ नॉन लीनियर मेथड
(00:35:34)
व्हाई क्योंकि एबिलिटी हमेशा सेम नहीं
(00:35:37)
रहती है आपकी। आज आपको मैथ्स में नहीं आता
(00:35:40)
है। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है कि आप सीख
(00:35:42)
नहीं सकते हो और अपनी एबिलिटी को एनहांस
(00:35:44)
नहीं कर सकते हो। आज आपका स्कोर डिप्रेशन
(00:35:47)
पे हाई आ रहा है। हो सकता है आज के एक
(00:35:49)
महीने बाद नहीं आए। तो आपकी एबिलिटी है वो
(00:35:53)
हमेशा सेम नहीं रहती है। वो बदलती रहती
(00:35:55)
है। इस वजह से कैसा है यहां पे रिलेशन?
(00:35:57)
यहां पे नॉन लीनियर रिलेशन।
(00:36:12)
और यहां पे थोड़े से डिफिकल्ट एजम्पशनंस
(00:36:14)
होते हैं कंपैरेटिव एज़ कंपेयर टू योर
(00:36:17)
क्लासिकल टेस्ट थ्योरीज। एजम्पशनंस कैसे
(00:36:19)
हैं? थोड़े से डिफ़िकल्ट है।
(00:36:22)
अब यह जो आपका आईआरटी मॉडल है, आइटम
(00:36:24)
रिस्पांस थ्योरी है, वह तीन मॉडल्स पे
(00:36:26)
बेस्ड है। या फिर हम कहें तो ये तीन चीजों
(00:36:28)
को मेजर करती है। सबसे पहला मॉडल है वन
(00:36:31)
पैरामीटर मॉडल। अब ये मॉडल्स हैं। वन
(00:36:35)
पैरामीटर मॉडल आया, टू पैरामीटर मॉडल आया
(00:36:37)
और थ्री पैरामीटर मॉडल आया। नाम है इनके।
(00:36:39)
तो वन पैरामीटर मॉडल में सिर्फ डिफिकल्टी
(00:36:42)
आती है। पहले क्या चेक करने के लिए बना?
(00:36:45)
डिफिकल्टी। फिर आया टू पैरामीटर मॉडल।
(00:36:48)
मतलब अब यह डिफिकल्टी के साथ
(00:36:49)
डिस्क्रिमिनेशन भी मेजर करता है। थ्री
(00:36:52)
पैरामीटर मॉडल डिफिकल्टी, डिस्क्रिमिनेशन
(00:36:54)
और गेसिंग एबिलिटी। तो आपको ये याद होने
(00:36:56)
चाहिए कि तीन पैराटर्स हैं। वन पैरामीटर
(00:36:59)
मॉडल वाज़ अबाउट डिफिकल्टी। टू पैरामीटर
(00:37:02)
मॉडल वाज़ अबाउट डिफिकल्टी एंड
(00:37:03)
डिस्क्रिमिनेशन। थ्री पैरामीटर मॉडल वाज़
(00:37:06)
अबाउट डिफिकल्टी, डिस्क्रिमिनेशन एंड
(00:37:08)
गेसिंग एबिलिटी। अब अपन ये जो तीनों
(00:37:11)
टर्म्स हैं, डिफिकल्टी क्या होती है? आइटम
(00:37:13)
डिफिकल्टी, आइटम डिस्क्रिमिनेशन और गेसिंग
(00:37:16)
एबिलिटी। इन तीनों को देख लेते हैं। आई
(00:37:20)
होप यहां तक आप लोगों को समझ में आया
(00:37:22)
होगा।
(00:37:34)
लेट्स टॉक अबाउट आइडेंटिटी।
(00:37:54)
अब मैं यहां पे कुछ क्वेश्चंस लिखती हूं।
(00:37:56)
फर्स्ट इज़
(00:38:02)
वेव साइकोडायनेमिक
(00:38:13)
सेकंड हम ले लेते हैं
(00:38:18)
हु गव द कांसेप्ट ऑफ
(00:38:27)
लर्न ऑब्टेन
(00:38:31)
और थर्ड हम ले लेते हैं
(00:38:37)
व्हाट इज़ दिस फार्मूला
(00:38:43)
फॉर इफेक्ट सेंस।
(00:38:47)
सबसे पहला क्वेश्चन है कि साइकोडायनेमिक
(00:38:49)
थ्योरी किसने दी? सेकंड क्वेश्चन आपसे पूछ
(00:38:52)
रही हूं कि लर्न ऑप्टिमिज्म का कांसेप्ट
(00:38:54)
किसने दिया? और थर्ड क्वेश्चन है कि
(00:38:56)
इफेक्ट साइज का फार्मूला क्या होता है? अब
(00:39:00)
मुझे बताइए क्लास में
(00:39:03)
50 बच्चे हैं। हमारे पास कितने बच्चे हैं?
(00:39:08)
क्या यह सभी बच्चे बता पाएंगे? मोस्टली
(00:39:10)
सभी बच्चे बता पाएंगे कि साइकोडायनेमिक
(00:39:13)
थ्योरी किसने?
(00:39:15)
एवरीवन नोस कि फ्लूइड का ये कांसेप्ट है।
(00:39:18)
उसने दी है। सबको पता है। अब उन 50 में से
(00:39:24)
कुछ बच्चे ऐसे होंगे जो ये बता पाएंगे कि
(00:39:26)
लर्न ऑप्टिमिज्म किसने दिया। ये सभी नहीं
(00:39:28)
बता पाएंगे।
(00:39:30)
वाज़ गिवन बाय मार्टिन सेलिगमेंट। तो ये अब
(00:39:34)
क्या होगा? यह थोड़े कम बच्चे बता पाएंगे
(00:39:37)
और इफेक्ट साइज का फार्मूला तो बस वही
(00:39:39)
बच्चे बता पाएंगे जो एक्चुअली पढ़ के आए
(00:39:41)
हैं। साइकोडायनेमिक थ्योरी ये बताने के
(00:39:44)
लिए कि किसने दिया उसके लिए आपको बैठ के
(00:39:46)
पढ़ने की जरूरत नहीं थी। जिसने थोड़ा बहुत
(00:39:48)
भी पढ़ा होगा वो कौन ये बता पाएगा कि लर्न
(00:39:50)
ऑप्टिमिज्म किसने दिया। बट इफेक्ट साइज के
(00:39:53)
लिए तो जिसने प्रॉपर कोई अनोवा पढ़ के आया
(00:39:55)
है अच्छे से बैठ के रिवाइज़ करके वही बता
(00:39:59)
पाएगा कि यार पढ़ कुछ तो था इफ़ेक्ट साइज़।
(00:40:00)
बहुत सारे बच्चों ने तो नाम ही नहीं सुना
(00:40:02)
होगा कि इफेक्ट साइज क्या है? कुछ ना सुना
(00:40:04)
होगा तो बोले सुना तो था जब क्लास में
(00:40:06)
पढ़ाया था तब तो पता था। अब नहीं पता है।
(00:40:08)
हमें नहीं पता कि क्या होती है।
(00:40:11)
तो यही है डिफिकल्टी।
(00:40:14)
ये देखना कि हमारा आइटम कितना डिफिकल्ट
(00:40:17)
है।
(00:40:19)
किस बेसिस पे जितने बच्चे उसको आंसर कर पा
(00:40:21)
रहे हैं। क्या? तो हमारे आइटम के
(00:40:24)
डिफिकल्टी लेवल को चेक करना इज आइटम
(00:40:27)
डिफिकल्टी।
(00:40:31)
इसको चेक कैसे करते हैं आप?
(00:40:38)
नंबर ऑफ पार्टिसिपेंट्स
(00:40:45)
आंसर
(00:40:48)
करेक्टली
(00:40:55)
टोटल नंबर ऑफ पार्टिसिपेंट्स अटेम्टेड द
(00:40:59)
क्वेश्चन
(00:41:06)
मतलब
(00:41:08)
अब अगर कोई क्वेश्चन इजी है तो क्या
(00:41:11)
ज्यादा बच्चे इसको अटेम्प्ट कर पाएंगे और
(00:41:13)
बेसिकली हम कहें तो अटेम्प्ट भी कर लिया
(00:41:14)
चलो सारे क्वेश्चन अटेम्प्ट करने पे
(00:41:16)
क्वेश्चन ईजी है तो ज्यादा बच्चे करेक्ट
(00:41:19)
कर पाएंगे क्वेश्चन डिफिकल्ट है तो कम
(00:41:21)
बच्चे करेक्ट कर पाएंगे तो जितने ज्यादा
(00:41:24)
इंडिविजुअल्स जितने ज्यादा पार्टिसिपेंट्स
(00:41:26)
किसी क्वेश्चन को सही करते हैं तो इसका
(00:41:28)
मतलब है कि वो आइटम इजी है अगर आपको ये हु
(00:41:30)
गव द हु गव साइकोडायनेमिक थ्योरी नेट में
(00:41:32)
आता तो मोस्टली हर बच्चा इसको सही करके
(00:41:34)
आता। वही अगर आपको इफेक्ट साइज का
(00:41:36)
फार्मूला पूछा है तो ये बहुत कम बच्चे सही
(00:41:38)
करके आ पाएंगे।
(00:41:40)
ये क्या बता रहा है हमको? ये बता रहा है
(00:41:42)
कि क्वेश्चन कितना आसान है और क्वेश्चन
(00:41:43)
कितना कठिन है। किस बेसिस पे कितने बच्चों
(00:41:47)
ने कितने पार्टिसिपेंट्स ने उसको अटेम्प्ट
(00:41:49)
किया है।
(00:41:52)
तो अगर मैं इसके ग्राफ की प्लॉटिंग करूं
(00:41:56)
प्लॉट दिस ऑन अ ग्राफ।
(00:42:16)
यहां पे आपका क्वेश्चन है
(00:42:21)
और क्या
(00:42:27)
दिस इज क्वेश्चन नंबर वन
(00:42:30)
दिस इज क्वेश्चन। अब देखो
(00:42:37)
साइकोडायनेमिक थ्योरी क्या सब बच्चे बता
(00:42:39)
पाएंगे? हां देखो सब बच्चे बता पाएंगे।
(00:42:44)
इसका मतलब
(00:42:46)
अगर मैं इसको मैं यहां प्लॉट
(00:42:50)
इसका मतलब क्या हुआ? अगर यहां पे मैंने
(00:42:52)
इसको प्लॉट किया। इसका मतलब है ये जितने
(00:42:55)
भी बच्चे हैं वो क्या कर पाए? वो इस
(00:42:58)
क्वेश्चन को अटेम्प्ट कर पाए। किसको? आइटम
(00:43:01)
नंबर वन को। हु गव साइकोडायनेमिक थ्योरी।
(00:43:04)
ऑल द इंडिविजुअल्स वर एबल टू आंसर दिस
(00:43:07)
क्वेश्चन। ये जितने भी यहां पे बच्चे हैं
(00:43:10)
ये सभी इसको आंसर कर पाए। बस ये वाले
(00:43:13)
राइट।
(00:43:22)
नेक्स्ट अगर मैं बात करूं
(00:43:25)
हु गव द कांसेप्ट ऑफ लर्न ऑप्टिमिज्म
(00:43:34)
मतलब
(00:43:36)
अब इसको और कम बच्चे अटेम्प्ट कर पाएंगे।
(00:43:41)
अब इसको क्या होगा कि अभी अब इसको सारे
(00:43:43)
बच्चे कर पाएंगे? नहीं। अब इसको बहुत कम
(00:43:45)
बच्चे कर पाएंगे।
(00:43:48)
वहीं अगर मैं थर्ड क्वेश्चन की बात करूं
(00:43:51)
तो इसको तो और भी कम बच्चे अटेमप्ट कर
(00:43:53)
पाएंगे।
(00:43:55)
ऐसा ही होगा।
(00:43:57)
इसका मतलब जितना आपका लेफ्ट की तरफ है
(00:44:02)
जितना लेफ्ट की तरफ जा रहा है। यहां पे
(00:44:03)
हमें इजी क्वेश्चंस बता रहा है। जितना
(00:44:06)
लेफ्ट की तरफ है उतना इजी है आइटम। जितना
(00:44:09)
राइट की तरफ है उतना डिफिकल्ट है।
(00:44:12)
क्योंकि अगर यहां पे प्लॉट किया तो इतने
(00:44:14)
सारे बच्चे हैं जिसको सही कर पाएंगे। ये
(00:44:16)
सारे सही कर पाएंगे। ये वाला क्वेश्चन बस
(00:44:19)
इतने ही सही कर पा रहे हैं। और ये वाला
(00:44:21)
क्वेश्चन तो सिर्फ इतने से पार्टिसिपेंट्स
(00:44:24)
हैं जो सही कर पाएंगे।
(00:44:27)
तो ये क्या है? ये डिफिकल्ट
(00:44:31)
और ये इजी है। तो लेफ्ट साइड में जितना
(00:44:34)
लेफ्ट की तरफ उतना इजी है आइटम। जितना
(00:44:37)
राइट की तरफ जाता रहता है वो जैसे-जैसे
(00:44:39)
राइट की तरफ जाएगा वैसे-वैसे वो आइटम
(00:44:41)
डिफिकल्ट होता रहेगा।
(00:44:45)
इन्हें हम क्या कहते हैं? इन्हें हम कहते
(00:44:47)
हैं आइटम कैरेक्टरिस्टिक।
(00:45:03)
तो, यह हमें बेसिकली क्या एक्सप्लेन कर
(00:45:05)
रहा है? कहीं ना कहीं हमें एक लीनियर
(00:45:06)
रिलेशन बता रहा है बिटवीन दी योर एबिलिटी
(00:45:09)
एंड योर प्रोबेबिलिटी ऑफ़ गिविंग दी करेक्ट
(00:45:12)
आंसर। कि आपके अंदर अगर क्षमता है तो आपके
(00:45:17)
आंसर सही होने के चांसेस भी क्या है?
(00:45:19)
ज्यादा है। तो एक क्या है? एक लीनियर
(00:45:22)
रिलेशन है यहां पे
(00:45:30)
बिटवीन योर एबिलिटी। अगर मुझे पता है
(00:45:33)
साइकोडायनेमिक थ्योरी किसने दी है तो
(00:45:35)
चांसेस ज्यादा है कि मैं उस क्वेश्चन को
(00:45:37)
सही करके आऊंगी।
(00:45:46)
प्रोबेबिलिटी ऑफ
(00:45:50)
गिविंग दी करेक्ट आंसर।
(00:45:56)
अब यहां पे आपको पूछते हैं कि भ किस बेसिस
(00:45:59)
पे आप डिफिकल्टी को बताते हो? डिटरमाइन
(00:46:01)
करते हो। तो कहीं क्या हम कह सकते हैं कि
(00:46:03)
यहां पे लोकेशन डिटरमाइन कर रही है। आइटम
(00:46:06)
लेफ्ट की तरफ है तो इजी है। राइट की तरफ
(00:46:09)
जा रहा है तो डिफिकल्ट है। तो यहां पे
(00:46:11)
कहीं ना कहीं जो लोकेशन है आपके आइटम की
(00:46:13)
या जो प्लॉटिंग है उसके बेसिस पे हम बता
(00:46:16)
रहे हैं कि आइटम डिफिकल्ट है या इजी है।
(00:46:19)
तो इट वुड बी दी लोकेशन।
(00:46:28)
कौन डिटरमाइन करेगा आपकी लोकेशन?
(00:46:58)
लेफ्ट में है तो इजी
(00:47:01)
राइट में है तो डिफिकल्ट। सिंपली इतना
(00:47:05)
कहना है कि अगर किसी को डिप्रेशन है तो
(00:47:07)
उसका डिप्रेशन पर स्कोर हाई आना चाहिए।
(00:47:09)
आना चाहिए कि नहीं आना चाहिए? आना चाहिए।
(00:47:11)
तभी हम क्या बता पाएंगे? तभी हम उसकी बता
(00:47:13)
पाएंगे कि हां भाई
(00:47:17)
ये काम क्या कर रहा है? ऐसे ही कर रहा है।
(00:47:18)
कोई एरर यहां पे नहीं है। तो इफ देयर इज
(00:47:21)
समथिंग। इसका पूरा बेस इतना ही है आइटम
(00:47:23)
डिफिकल्टी का कि अगर कोई चीज है, अगर कोई
(00:47:26)
चीज एक्सिस्ट करती है तो आप उसको मेजर कर
(00:47:29)
पाए।
(00:47:33)
आई होप दिस इज क्लियर
(00:47:36)
वन मोर थिंग हमें पता होनी चाहिए आई थिंक
(00:47:38)
डिफिकल्टी के बारे में
(00:47:48)
अगर इसकी वैल्यू कितनी होती है? इट इज़
(00:47:51)
बिटवीन 0 टू वन।
(00:47:55)
0 टू 1 के बीच में इसकी वैल्यू होती है।
(00:47:58)
और जितना आपका आइटम किसकी तरफ होगा? वन की
(00:48:02)
तरफ जाएगा उतना ही आपका क्वेश्चन इजी है।
(00:48:07)
जितना वन की तरफ उतना आइटम इजी है। अगर वन
(00:48:11)
है इसका मतलब सभी ने आंसर कर दिया।
(00:48:27)
क्वेश्चन इज
(00:48:30)
एंड एवरीवन इज
(00:48:39)
डिजायरेबल वैल्यू क्या होती है? 0.30 से
(00:48:42)
लेकर 0.70
(00:48:44)
दिस इज द डिज़ायरेबल वैल्यू। इससे कम है।
(00:48:48)
0.30 से तब भी प्रॉब्लम इतना भी आइटम
(00:48:51)
डिफिकल्ट नहीं होना चाहिए। और अगर 0.70 से
(00:48:55)
ज्यादा है तो इतना इजी भी आइटम नहीं होना
(00:48:57)
चाहिए। आइटम आइटम किसके बीच में होना
(00:48:59)
चाहिए? 0.30 से लेकर 0.70 के बीच में आपका
(00:49:02)
डिफिकल्टी लेवल होना चाहिए हर आइटम का। तो
(00:49:05)
वो हमारी एक डिज़ायरेबल वैल्यू आती है।
(00:49:08)
आई होप आपको ये चीज क्लियर होगी। आपको
(00:49:11)
आइटम डिफिकल्टी अच्छे से समझ आ गई होगी।
(00:49:13)
नाउ वी शुड मूव ऑन टू आइटम
(00:49:15)
डिस्क्रिमिनेशन।
(00:49:26)
आइटम डिस्क्रिमिनेशन बेसिकली हेल्प्स यू
(00:49:29)
टू डिस्क्रिमिनेट बिटवीन दी हाईएस्ट
(00:49:31)
स्कोरर्स एंड द लो स्कोरर्स
(00:49:34)
आपके आइटम कितना डिस्क्रिमिनेट कितना फर्क
(00:49:38)
कर पा रहा है हाईएस्ट स्कोरर्स के बीच में
(00:49:40)
हाई स्कोरर्स के बीच में और लो स्कोरर्स
(00:49:42)
के बीच में व्हिच मींस
(00:49:46)
वही सेम क्वेश्चंस हमारे मैं यहां पे फिर
(00:49:48)
से लिख देती हूं एक बार। सबसे पहला
(00:49:51)
क्वेश्चन हमारा साइकोडायनेमिक थ्योरी।
(00:50:01)
सेकंड क्वेश्चन वाज़ अबाउट लर्न
(00:50:02)
ऑप्टिमिज्म।
(00:50:14)
थर्ड क्वेश्चन था।
(00:50:20)
अब जो साइकोडायनेमिक थ्योरी का क्वेश्चन
(00:50:23)
है वो क्या हर बच्चा कर पाएगा? किसी को 20
(00:50:25)
आ रहे हैं 100 में से और किसी को 90 आ रहे
(00:50:28)
हैं 100 में से। क्या दोनों ही बच्चे इस
(00:50:30)
क्वेश्चन को कर पाएंगे? कर पाएंगे। लर्न
(00:50:33)
ऑप्टिमिज्म का जो क्वेश्चन है वो एक एवरेज
(00:50:36)
लाने वाला कर पाएगा। इफेक्ट साइज का
(00:50:39)
क्वेश्चन है वही कर पाएगा जो बहुत अच्छे
(00:50:41)
से पढ़ के आया है। तो अगर किसी को 90 आउट
(00:50:43)
ऑफ 100 आ रहा है तो हम एक्सपेक्ट करते हैं
(00:50:45)
कि उसने ये क्वेश्चन सही किया होगा। वहीं
(00:50:47)
20 आउट ऑफ 100 लेके आने वाला बच्चा ये
(00:50:49)
क्वेश्चन नहीं कर पाया हो। ये डिफिकल्ट है
(00:50:52)
अगेन। तो कहीं ना कहीं ये क्वेश्चन इफेक्ट
(00:50:56)
साइज का क्वेश्चन फर्क कर रहा है।
(00:50:58)
डिस्क्रिमिनेट कर पा रहा है हाई स्कोरर और
(00:51:01)
लो स्कोरर के बीच में।
(00:51:03)
कुछ क्वेश्चंस हमारे पास ऐसे होते हैं जो
(00:51:06)
बहुत कम बच्चे सही कर पाते हैं। जो बच्चे
(00:51:08)
बहुत अच्छा स्कोर कर रहे हैं। इट मींस
(00:51:09)
उन्होंने बहुत ज्यादा डीपली पढ़ाई की है।
(00:51:12)
इस वजह से वो क्वेश्चन वो सही कर पा रहे
(00:51:13)
हैं। तो हमारे पास इस टाइप के क्वेश्चन भी
(00:51:16)
होते हैं। आप लोगों ने सबने देखे होंगे
(00:51:18)
एग्जाम में। कुछ क्वेश्चन एकदम ऐसे आते
(00:51:20)
हैं कि भाई पता नहीं यार ये तो बड़ा
(00:51:22)
डिफिकल्ट क्वेश्चन है। पर जो बच्चे बहुत
(00:51:24)
अच्छा स्कोर करते हैं वो कहीं ना कहीं उस
(00:51:25)
क्वेश्चन को भी सही करके आते हैं। तो वो
(00:51:27)
क्वेश्चन बना ही इसलिए है कि वो
(00:51:29)
डिस्क्रिमिनेट कर सके बिटवीन योर हाई
(00:51:31)
स्कोरर्स और लो स्कोरर्स जिसने बहुत अच्छे
(00:51:33)
से पढ़ाई की है वही बच्चा अटेम्प्ट कर
(00:51:35)
पाए। वो कैसे क्वेश्चन होते हैं?
(00:51:41)
यहां पे बेसिकली क्या हो रहा है? लेट्स
(00:51:44)
अगेन हम बनाते हैं अपना आइटम
(00:51:46)
कैरेक्टरिस्टिक।
(00:52:07)
करेक्ट आंसर सी एंड योर
(00:52:16)
बेसिकली प्रोबेबिलिटी कितना आप सही करते
(00:52:33)
तो लेट्स से अगर मैं साइकोडायनेमिक की बात
(00:52:35)
करूं
(00:52:37)
तो क्या मेजरिटी ऑफ़ द स्टूडेंट्स इसको सही
(00:52:40)
कर पाएंगे?
(00:52:42)
हां।
(00:52:44)
मैंने आपका ग्राफ बनाया। यह इस तरीके से
(00:52:47)
प्लॉटिंग हुई थी। इसने भी सही दिया। इसने
(00:52:48)
भी इसने भी इसने इसने इसने सबने सही आंसर।
(00:52:52)
ठीक है ना? एवरीवन वाज़ एबल टू
(00:52:56)
आंसर।
(00:53:00)
यहां पे आपके आप समझिए लो एबिलिटी है।
(00:53:03)
यहां पर आपकी हाई
(00:53:07)
दिस क्वेश्चन।
(00:53:14)
फिर
(00:53:20)
क्वेश्चन
(00:53:37)
अब मैं अगर इस क्वेश्चन वन को देखती हूं
(00:53:39)
तो मुझे क्या समझ आ रहा है कि सबका इसमें
(00:53:42)
बराबर ही चल रहा है। चाहे लो स्कोरर हो,
(00:53:46)
चाहे हाई स्कोरर हो। क्या सब ऑलमोस्ट एक
(00:53:49)
ही क्वांटिम पे? एक ही स्क्वायर है। सब
(00:53:52)
इसको आंसर कर पा रहे हैं। तो क्या ये
(00:53:54)
क्वेश्चन डिस्क्रिमिनेट कर पा रहा है
(00:53:55)
बिटवीन योर हाई स्कोरर्स एंड लो स्कोरर्स?
(00:53:58)
नहीं कर पा रहे। वहीं अगर मैं थर्ड वाले
(00:54:00)
क्वेश्चन को देखूं तो आप देखिए जिन्होंने
(00:54:02)
लो स्कोर किया है वो इस पे आंसर नहीं कर
(00:54:04)
पा रहे। लेकिन जैसे-जैसे हाई एबिलिटी की
(00:54:06)
तरफ बढ़ रहे हैं। हम उन बच्चों की तरफ जा
(00:54:08)
रहे हैं जो हाई स्कोर कर रहे हैं
(00:54:09)
वैसे-वैसे हमारा ग्राफ देखिए यहां यानी कि
(00:54:12)
यह बच्चे तो इसको आंसर कर पाए। यह वाले
(00:54:14)
नहीं कर पाए।
(00:54:21)
तो आइटम डिस्क्रिमिनेशन
(00:54:24)
किस बेसिस पे शो होता है? आपके स्टीपनेस
(00:54:26)
के बेसिस पे शो होता है।
(00:54:29)
कि आपका कर्व जो है वह कितना स्टीप है?
(00:54:33)
दिस क्वेश्चन इज नॉट एबल टू
(00:54:34)
डिस्क्रिमिनेट।
(00:54:49)
वही अब एक ही उस पे जा रहा है तो कोई
(00:54:52)
डिस्क्रिमिनेशन नहीं है। बट अगर मेरा कर्व
(00:54:54)
कैसे जा रहा है? स्टीप है। देखिए यहां से
(00:54:58)
इस तरीके से जा रहा है। तो इसका मतलब ये
(00:55:00)
आइटम डिस्क्रिमिनेट कर पा रहा है अच्छे
(00:55:02)
से। ये बच्चे आंसर नहीं कर पा रहे। जिनकी
(00:55:04)
एबिलिटी लो है वो स्पोंसर नहीं कर पा रहे
(00:55:06)
हैं। वही जिनकी एबिलिटी हाई है वो
(00:55:08)
स्पोंसंसर कर पा रहे हैं। तो दिस इज़ आइटम
(00:55:11)
डिस्क्रिमिनेशन।
(00:55:27)
मिनट
(00:55:34)
हाय एंड
(00:55:38)
आई होप दिस इज़ क्लियर टू ऑल ऑफ यू
(00:55:42)
इसको आप रीड कर लेना ये सब आपके पास
(00:55:45)
अवेलेबल है
(00:55:47)
नाउ द लास्ट इज़ गेसिंग एबिलिटी।
(00:55:51)
गेसिंग एबिलिटी कहती है कि अब कुछ
(00:55:54)
क्वेश्चंस आपने एग्जाम में देखे होंगे। आप
(00:55:55)
एग्जाम देके आते हो तो उसमें कुछ
(00:55:58)
क्वेश्चंस ऐसे आते हैं जिसका आंसर हमें
(00:56:00)
नहीं पता।
(00:56:02)
मतलब वो क्वेश्चन समझ ही नहीं आ रहा होता
(00:56:04)
है कि भ ये कैसा क्वेश्चन है? ये भी कोई
(00:56:07)
क्वेश्चन है पूछने का। क्या पूछ रखा है
(00:56:09)
तुमने? ऐसा लगता है कि नहीं लगता क्वेश्चन
(00:56:11)
को देख के कि नहीं पता है। किसी ने बाय
(00:56:13)
चांस गलती से ही उसको देख लिया होता, पढ़
(00:56:15)
लिया होता। तो बात अलग है। बाकी तो कोई
(00:56:18)
उसको इन जनरल नहीं बता पाता है उसके आंसर।
(00:56:22)
जैसे कि अगर हम कहें कि
(00:56:25)
व्हाट इज द बर्थ डेट ऑफ सिगमंड फ्री?
(00:56:30)
तो याद क्वेश्चन पूछा गया था।
(00:57:15)
लेट से हम आपको डेट्स दे
(00:57:20)
1856 6
(00:57:25)
सेवंथ में 1856
(00:57:29)
8 में 1856
(00:57:31)
न
(00:57:34)
अब आप मुझे बताइए
(00:57:37)
क्या मैं इस क्वेश्चन को देख के
(00:57:40)
थोड़ा भी अंदाजा लगा सकती हूं। अगर मुझे
(00:57:42)
एग्जैक्ट डेट पता है
(00:57:45)
तो तो मैं इस क्वेश्चन को कर सकती हूं।
(00:57:47)
अदर वाइज मैं इस क्वेश्चन को अटेम्प्ट ही
(00:57:49)
नहीं कर सकती।
(00:57:50)
है
(00:57:52)
आई वांट टू नो आई शुड नो द एग्जैक्ट डेट
(00:57:59)
इस क्वेश्चन को अटेम्प्ट करने के लिए
(00:58:02)
इफ आई वांट टू अटेम्प्ट दिस क्वेश्चन आई
(00:58:04)
शुड नो द एग्जैक्ट डे ऑफ़ डेट सेगमेंट थ्रू
(00:58:08)
इट्स बर्थडे अदरवाइज़ आई विल बी वन टू आंसर
(00:58:11)
इट अब बताओ यह कोई ऑप्शन हो 6 7 8 9 18
(00:58:15)
मैं गेस किस बेसिस पे करूं नहीं कर सकता
(00:58:18)
बट बट
(00:58:21)
वही आपको ये ऑप्शन होता
(00:58:25)
सेवंथ में 1956
(00:58:28)
एंड
(00:58:30)
8th मे 195
(00:58:33)
और
(00:58:35)
यहां लिख देते हैं 9 अगस्त
(00:58:40)
अब ये ऑप्शन अगर आपके पास यहां पे यही है
(00:58:42)
सिक्स में 18
(00:58:46)
अब मुझे बताइए क्या हम दो ऑप्शंस को
(00:58:48)
एलिमिनेट कर सकते हैं कि 1956 और 1950 में
(00:58:51)
तो प्रविड नहीं पैदा हुआ। हुए तो उससे
(00:58:55)
पहले ही तो कहीं ना कहीं मेरा एजमशन जाता
(00:58:58)
है 1856
(00:59:00)
सिक्स्थ में 1856 और 9th अगस्त 1856 और
(00:59:03)
गेसिंग एबिलिटी भी यही कहती है कि आपका जो
(00:59:07)
ऑप्शंस है आपके जो ऑप्शंस है वो इक्वली
(00:59:09)
डिस्ट्रीब्यूट होने चाहिए बिटवीन टू
(00:59:12)
ऑप्शंस
(00:59:15)
समझ रहे हो 50-50% अब कोई बच्चा दो ऑप्शंस
(00:59:19)
को एलिमिनेट करके ये कर सकता है कि हां अब
(00:59:22)
ए और डी में से कोई आंसर होने वाला है तब
(00:59:25)
तो हम उसको कहेंगे कि वो एक अच्छा क्या
(00:59:28)
है? एक अच्छा गेसिंग एबिलिटी का क्वेश्चन
(00:59:30)
है।
(00:59:32)
बट अगर ऑप्शंस ऐसे आ जाए
(00:59:37)
तब क्या है? तब ये बड़ा ही प्रॉब्लमैटिक
(00:59:40)
क्वेश्चन है। क्या अब कोई भी बच्चा गेस कर
(00:59:42)
पाएगा? अब आप गेसिंग एबिलिटी लगा ही नहीं
(00:59:44)
सकते हो। किस बेसिस पे आप गेस करोगे? उसके
(00:59:46)
बाद लेट्स से आपको यह भी याद रहेगा कि
(00:59:48)
शायद मई में आता था बर्थडे। तो आप कहोगे
(00:59:51)
चलो ठीक है लेट्स गो विद दिस क्वेश्चन
(00:59:53)
लेट्स गो विद दिस ऑप्शन सिक्स्थ मई 1856
(00:59:57)
1856 तो चलो मान लिया और शायद मुझे ऐसा
(00:59:59)
ध्यान है कि शायद इनका मई या जून के
(01:00:01)
अराउंड बर्थडे था तो लेट्स गो विद मे तो
(01:00:05)
यहां पे यू आर एबल टू गेस
(01:00:09)
तो दैट इज़ व्हाई हमारे पास ऑप्शंस क्या
(01:00:12)
होने चाहिए 50% पे डिस होने चाहिए अगर
(01:00:15)
नहीं है तो क्या होगा अगर वो हैवली
(01:00:17)
स्क्यूड है डेटा अगर सर्टेन ऑप्शन ऑप्शंस
(01:00:20)
के ऊपर तो इसके दो कारण हो सकते हैं। या
(01:00:23)
तो आपका आइटम गलत है।
(01:00:26)
उसको चेंज करने की जरूरत है। या तो ऑप्शंस
(01:00:29)
बदलिए या तो आइटम को बदलिए। तब आपको कभी
(01:00:31)
भी इस तरह के ऑप्शंस नहीं दिखेंगे एग्जाम
(01:00:33)
में।
(01:00:35)
समझ रहे हो? और अगर इस तरह का कुछ होता है
(01:00:37)
तो यहां पे हम कह देंगे कि जो
(01:00:38)
डिस्क्रिमिनेशन वैल्यू है वो नेगेटिव आएगी
(01:00:40)
या वो ज़ीरो आएगी। क्या ये क्वेश्चन
(01:00:42)
डिस्क्रिमिनेट कर पाएगा? ये डिस्क्रिमिनेट
(01:00:44)
नहीं कर पाएगा। जिसने जय माता दी करके टिक
(01:00:48)
कर दिया और उसका सही हो गया तो हो गया। हो
(01:00:52)
सकता है जो जीरो ले आ रहा हो वो इसमें +2
(01:00:54)
ले आए। बाकी सब में जीरो लेके आ रहा है।
(01:00:56)
बट इसके वजह से उसका +2 आ रहा है। बट उसका
(01:00:59)
इसका मतलब ये तो नहीं है कि वो कोई
(01:01:01)
इंटेलिजेंट बच्चा है। ठीक है ना?
(01:01:06)
होप दिस इज़ क्लियर। अब अगर यहां पे आपकी
(01:01:09)
क्या होती है? यह ज़ीरो होती है। इफ़ यू आर
(01:01:11)
गेसिंग एबिलिटी इज़ बिलो ज़ीरो। और
(01:01:13)
डिस्क्रिमिनेशन वैल्यू बेसिकली इज़
(01:01:19)
तो इसमें हम कहते हैं
(01:01:21)
डिस्क्रिमिनेशन वैल्यू विल बी नेगेटिव और
(01:01:23)
ज़ीरो। और इसका मतलब क्या है? या तो आपकी
(01:01:26)
जो की है वो आउटडेटेड है। आइदर योर आइटम
(01:01:31)
इज़ रॉन्ग ऑर की इज़ आउटडेटेड।
(01:01:43)
मतलब नेगेटिव अगर आता है
(01:01:47)
और योर आइटम इज़ आउटडेटेड।
(01:01:57)
आई होप इट इज़ क्लियर टू ऑल ऑफ़ यू। ये
(01:01:58)
पैरामीटर्स आपको समझ में आए होंगे।
(01:02:03)
एजम्पशंस क्या है? मोनोटोनिसिटी।
(01:02:05)
मोनोटोसिटी का मतलब है कि जैसे-जैसे ट्रेड
(01:02:08)
लेवल इनक्रीस होता है, वैसे आपकी एबिलिटी
(01:02:10)
बढ़ती है, आपकी प्रोबेबिलिटी भी बढ़ जाती
(01:02:12)
है उस क्वेश्चन को, उस आइटम को करेक्ट
(01:02:14)
करने की। यस। यून्य डायमेंशनलिटी ओनली वन
(01:02:18)
ट्रेड कैन बी मेजर्ड एट वन टाइम। एक बार
(01:02:20)
में एक ही ट्रेड मेजर होगी। डिप्रेशन का
(01:02:23)
स्केल है तो डिप्रेशन नहीं मेजर होगा। एक
(01:02:25)
आइटम जो है एक आइटम एक साथ
(01:02:29)
स्ट्रेस और एंजायटी मेजर नहीं करेगा। एक
(01:02:34)
आइटम एक बार में एक ही चीज को मेजर करेगा।
(01:02:37)
लोकल इंडिपेंडेंस आइटम्स आर रिलेटेड बट
(01:02:40)
नॉट डिपेंडेंट ऑन ईच अदर।
(01:02:43)
डिपेंडेंसी का मतलब क्या होता है? कि अगर
(01:02:45)
मैंने क्वेश्चन वन का आंसर यस किया है तो
(01:02:50)
उससे मैं ये अस्यूम कर सकती हूं कि मैं
(01:02:52)
क्वेश्चन टू पे यस कहूंगी या नो कहूंगी।
(01:02:55)
अगर इस तरह का कुछ है तो इसका मतलब फर्स्ट
(01:02:57)
क्वेश्चन डिपेंडेंट है क्वेश्चन टू पे।
(01:03:00)
अगर मेरे पास पेज हो तो आई कैन
(01:03:05)
कोई बात नहीं मतलब अगर मैंने आपको
(01:03:07)
क्वेश्चन दिया
(01:03:15)
आई डोंट बिलीव इन रेसिज्म।
(01:03:19)
मैं रेसिज्म में विश्वास नहीं रखती। कि हम
(01:03:22)
कलर के बेसिस पर किसी को जज नहीं करते
(01:03:24)
हैं।
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और सेकंड क्वेश्चन मैंने आपको दिया।
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नाउ अब अगर मैं पहले का आंसर कहती हूं कि
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यस आई डोंट बिलीव
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इसका आंसर अगर मैं यस करती हूं तो आप
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बताइए अगर मैं कलर के बेसिस पे किसी को जज
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नहीं करती हूं। मैं रेसिज्म के अगेंस्ट
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हूं। तो मेरे को कोई दिक्कत होगी अगर मैं
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किसी डिफरेंट रेस के इंडिविजुअल को मेरा
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फ्रेंड बनाती हूं। नहीं होने चाहिए ना। तो
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कहीं ना कहीं हम अस्यूम कर सकते हैं इसका
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आंसर आप यस ही करेंगे। अगर आप नो कर रहे
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हैं तो इसका मतलब आपने ऊपर कुछ ना कुछ तो
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गड़बड़ करी। तो आपने किया है। अगर मैं
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इसका आंसर नो देती हूं तो मैं इसका आंसर
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भी नो ही दूंगी। अगर मैं इसका आंसर यस दे
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दूं तो यस। ये हुए डिपेंडेंट क्वेश्चंस
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डिपेंडेंट्स।
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यहां पर आइटम्स एक दूसरे से रिलेटेड है बट
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डिपेंडेंट नहीं है। मतलब मेरा जो पूरा
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स्केल है वो डिप्रेशन पे बेस्ड है।
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माय स्केल जो है मेरा माय स्केल इज़ बेस्ड
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ऑन डिप्रेशन। तो मेरा फर्स्ट क्वेश्चन है
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आई फील लोनली।
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आई फील अनहै
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फिर
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हम कहीं तो और क्या क्वेश्चन हम कुछ भी ले
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लो
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आई एम नॉट एबल टू स्लीप
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वेल अब आप मुझे बताइए चलो ये कहीं ना कहीं
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एक दूसरे से रिलेटेड है। ऑल ऑफ़ दीज़ आइटम्स
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आर रिलेटेड टू ईच अदर। कहीं ना कहीं तीनों
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ही डिप्रेशन के अलग-अलग उसको मेजर करते
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हैं आइटम्स। लेकिन जस्ट बिकॉज़ मैं इसमें
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यस कहती हूं। इसका मतलब ये नहीं कि मैं
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यहां पे भी यस कहूंगी। मैं यहां पे नो भी
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कह सकती हूं। और जस्ट बिकॉज़ मैं कह रही
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हूं कि आई फील अनहैपी डस नॉट मीन आई एम
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नॉट एबल टू स्लीप वेल।
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तो नो हो सकता है मुझे नींद अच्छे से मुझे
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नींद आ जाती है। सबका अपना-अपना होता है।
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किसी को इंसोमेनिया हो जाता है। बट किसी
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को बहुत एक्सट्रीम नींद भी आती है। फिर
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हाइपोसोमिया भी हो रहा है।
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किसी की नींद नहीं आ रही है। किसी को पर
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किसी को आ जाती है। कोई अगर बहुत अपसेट
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होता है तो उसको नींद जल्दी आती है। बट
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अगर कोई अपसेट है तो उसको नींद नहीं आती
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है।
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तो जस्ट बिकॉज़ आई एम अनहै डज़ नॉट मीन आई
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विल नॉट बी एबल टू स्लीप। तो क्या मेरा यह
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आंसर प्रेडिक्ट कर पाएगा इसको? नहीं कर
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पाएगा। तो इसका मतलब है कि इंडिपेंडेंट
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लोकल इंडिपेंडेंस आइटम एक दूसरे से
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रिलेटेड है। सभी अलग-अलग डायमेंशन को मेजर
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करते हैं डिप्रेशन की बट स्टिल दे आर नॉट
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रिलेटेड दे आर नॉट डिपेंडेंट ऑन इट।
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ठीक है? आइटम के जो पैराटर्स हैं आपके
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तीनों जो पैराटर्स हैं आप उनको कहीं से भी
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आपका जो आइटम कैरेक्टरिस्टिक कर्व है आइटम
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रिस्पांस कर्व है उस पर कहीं से भी किसी
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भी बेसिस पे उसको मेजर कर सकते हैं। आपको
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जीरो से शुरू करने की जरूरत नहीं है। मैं
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यहां पे अगर कुछ है तो मैं इससे भी यहां
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पे मेजर कर सकती हूं। मुझे यहां से शुरू
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करने की जरूरत नहीं होती।
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ये आप लोग पढ़ लेना इनके बीच में डिफरेंस।
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सो थैंक यू सो मच फॉर वाच वाचिंग। आई होप
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आप लोगों को क्लास समझ आई होगी। आप लोगों
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को ये दोनों थ्योरीज़ समझ में आई होगी। कुछ
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भी डाउट है, कुछ भी है तो आप क्या कर सकते
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हो? आप कमेंट पे मेंशन कर सकते हो। थैंक
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यू सो मच एवरीवन। बाय-ब टेक केयर। ये आपका
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लिंक है मतलब ये चैनल है। इसका लिंक आपको
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डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा। तो आप लोग ले
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लेना जॉइ कर लेना। चलो बाय-ब एवरीवन।
