↔
Title: full story of the angels Harut and Marut | haroot or maroot ka qissa| zuhra sitara | angles story
Duration: 00:11:10
Total Correct Answers:
Current Caption
Correct
Learning Modes
YouTube Video Transcript Hide
Ask AI:
Export as:
Ask AI Result
The ask AI result will appear here..
(00:00:00) Your YouTube transcript will appear here
(00:00:06)
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम अल्लाह तबारक
(00:00:08)
वी ताला के नाम से शुरू जो बड़ा मेहरबान
(00:00:10)
और निहायत रम करने वाला है
(00:00:13)
आसमान से आए तो ऐसे फरिश्ते जो आज भी
(00:00:16)
बाबुल के केन में उल्टे लटके हुए हैं
(00:00:25)
यह फरिश्ते जमीन पर क्यों आए थे और इन
(00:00:28)
फरिश्तों को बोल के केन में क्यों मटका
(00:00:30)
दिया गया और इन फरिश्तों ने ऐसा कौन सा
(00:00:33)
गुना किया था जिसकी वजह से ये कयामत तक
(00:00:36)
इसी बोल के केन में उल्टे लटकती रहेंगे
(00:00:39)
प्यार दोस्तों आज की इस वीडियो में हम
(00:00:41)
आपको बताएंगे की हरिऔध और मरुद कौन थे यह
(00:00:44)
दोनों किरदार फरिश्ते थे या फिर जन्नत
(00:00:49)
और सितारा बने वाली जोहर औरत कौन थी और
(00:00:52)
इसको किस वजह से तारे की शक्ल में तब्दील
(00:00:55)
कर दिया गया और इसके साथ-साथ यह भी
(00:00:57)
बताएंगे की इस्लाम में जादू हराम है इसके
(00:01:00)
बावजूद यह दोनों फरिश्ते अल्लाह के हम से
(00:01:02)
लोगों को जादू क्यों सिखाया करते थे और
(00:01:06)
हरिऔध और मरुद के वाक्य की हकीकत क्या है
(00:01:08)
इस वाक्य के अंदर कितनी सच्चाई है
(00:01:26)
प्यार दोस्तों बनी इजरायल की रिवायत में
(00:01:29)
आता है की जब अल्लाह तबारक वी ताला ने
(00:01:31)
इंसान को तकलीफ फरमाया और उसको अपनी
(00:01:33)
खिलाफत से नवाज वही इंसान जब जमीन पर आया
(00:01:36)
तो उसकी नल में से कुछ लोग ल तबारक वी
(00:01:39)
ताला की नाफरमानियां करने लगे और कटलो
(00:01:41)
भारत और फिटना फसाद फैलाने लगे तो एक दिन
(00:01:44)
फरिश्तों ने अल्लाह तबारक वी ताला की
(00:01:46)
बारगाह में अज की या रबल आलमीन इंसान तो
(00:01:49)
खून बहाने वाला और फसाद फैलाने वाला है
(00:01:51)
इसके बावजूद भी इंसान को खलीफा बना दिया
(00:01:54)
गया जब की हम हर वक्त तेरी हम तो सैना
(00:01:57)
करते हैं और तेरी नाफरमानी नहीं करते हम
(00:02:00)
तेरी खिलाफत के ज्यादा लाइक थे तो अल्लाह
(00:02:03)
तबारक वी ताला ने फरिश्तों को इरशाद
(00:02:05)
फरमाया की इंसान को गुस्सा और शहर दी गई
(00:02:08)
है इसी वजह से इंसान ज्यादा गुना करता है
(00:02:10)
अगर यही चीज और सफात तुम लोगों के अंदर रख
(00:02:14)
दी जैन तो तुम लोग भी इसी तरह बुराई के
(00:02:16)
अंदर मुकाला हो जाओगे और मेरी ना फरमानी
(00:02:19)
करने लगोगे तो इस बात पर फरिश्ते बोले की
(00:02:21)
यार अब्बू लाल अमीन हम तो गुना के करीब भी
(00:02:24)
ना जाएंगे तो अल्लाह तबारक वी ताला ने फॉर
(00:02:26)
लोगों को आजमाने के लिए हम इरशाद फरमाया
(00:02:28)
की अपने घरों में से दो फरिश्तों को चुन
(00:02:30)
लो तो फरिश्तों ने अपनी जमाई में से दो
(00:02:33)
फरिश्ते जिनका नाम हरिऔध और मरुद था जो की
(00:02:36)
बहुत ही ज्यादा मुटकी और परहेज़गार थे और
(00:02:38)
अल्लाह तबारक वी ताला के इबादत गुर्जर
(00:02:40)
फरिश्ते थे उन फरिश्तों को चुन लिया चुंचे
(00:02:44)
अल्लाह तबारक वी ताला ने इन दोनों
(00:02:46)
फरिश्तों को बसारी ख्वाहिशात देकर उसे और
(00:02:48)
स्वत इनके अंदर रखकर जमीन पर उतार दिया
(00:02:51)
गया प्यार दोस्तों रिवायत में आता है की
(00:02:54)
यह दोनों फरिश्ते शुभ जमीन पर आते और शाम
(00:02:57)
को अल्लाह तबारक वी ताला का इसमें आजम पढ़
(00:02:59)
कर आसमान पर चले जाते ये मामल इसी तरह चला
(00:03:02)
रहा आहिस्ता आहिस्ता यह दोनों फरिश्ते
(00:03:05)
शेयर बाबुल में पहुंच गए और वहां ये दोनों
(00:03:07)
फरिश्ते लोगों के दरमियां इंसाफ के फैसला
(00:03:10)
किया करते थे आहिस्ता आहिस्ता इन दोनों
(00:03:13)
फरिश्तों के शोहरत पूरे बबल शहर में फेल
(00:03:15)
गई इस बबल शहर के अंदर जोड़ना में एक
(00:03:19)
हसीना रहती थी जी पर पूरा शहर जान छिड़कता
(00:03:22)
था लेकिन यह हसीना अपने शहर के शिवा किसी
(00:03:25)
की तरफ उठाकर ना देखते थे एक दिन इन दोनों
(00:03:29)
फरिश्तों ने बोल की उसे हसीनों जमील
(00:03:31)
जोहरानामी औरत को देखा तो देखते ही उसके
(00:03:34)
हुस्न जमाल की दाल में फैंस गए और उसे पर
(00:03:36)
दिल हर बैठे ये दोनों फरिश्ते उजोरा नामी
(00:03:40)
औरत के पास गए और उसे अपने ख्वाहिश पुरी
(00:03:42)
करने का कहा उसे वक्त जोहर नामी औरत ये
(00:03:45)
खाने लगी की मेरा और तुम्हारा दिन अलग अलग
(00:03:48)
है मैं तुम्हारी ख्वाहिश को उसे वक्त पुरी
(00:03:50)
करूंगी जब तुम लोग अपना दिन छोड़कर मेरे
(00:03:53)
दिन को काबुल कर लो तो फरिश्तों ने जोहर
(00:03:56)
औरत से पूछा की तुम्हारा मजहब कौन सा है
(00:03:58)
तो उसने कहा की मैं फुल बुद्ध की पूजा
(00:04:00)
करती हूं अगर तुम अपने मजहब को छोड़कर
(00:04:03)
मेरे उसे बुद्ध को अपना खुदा माना लोग तो
(00:04:05)
मैं तुम्हारी ख्वाहिश पुरी कर दूंगी
(00:04:07)
फरिश्ते यह बात सुनकर वापस चले गए और उसके
(00:04:10)
मजहब को काबुल करने से इनकार कर दिया कुछ
(00:04:13)
दोनों बाद इन दोनों फरिश्तों की दोबारा
(00:04:15)
मुलाकात जोहरानामी औरत से हुई और उसे औरत
(00:04:18)
के हुसैन जो माल को देखकर इसे रहना गया और
(00:04:21)
उसे औरत से खाने लगे की हम तुम्हारे साथ
(00:04:22)
अपनी ख्वाइश को पूरा करना चाहते हैं उसे
(00:04:25)
वक्त उसे ने कहा की मैं उसे वक्त तक
(00:04:28)
तुम्हारी ख्वाहिश पुरी ना करूंगी जब तक
(00:04:30)
तुम इन तीन केमोन में से कोई एक कम ना कर
(00:04:33)
लो जोहर की ये बात सुनकर फरिश्तों ने पूछा
(00:04:35)
की वो तीन कम कौन से हैं तो वो औरत खाने
(00:04:38)
लगी की या तो तुम अपने मजहब को छोड़कर
(00:04:39)
मेरा मजहब इख्तियार कर लो और भूतों की
(00:04:42)
पूजा शुरू कर दो या फिर तुम लोग मेरे शहर
(00:04:45)
को कत्ल करो क्योंकि वो बहुत गैरत वाला है
(00:04:48)
अगर उसे इस बात का इल हो गया तो वो मुझे
(00:04:51)
कत्ल कर डालेगा और या फिर तुम लोग शराब
(00:04:54)
पियो इसके बाद मैं तुम्हारी ख्वाहिश पुरी
(00:04:56)
करूंगी इस तरफ फरिश्तों ने जब उसे औरत की
(00:04:59)
ये बात सनी तो एकदम खामोश हो गए और कुछ डर
(00:05:02)
सोने लगे हैं उसे वक्त फरिश्तों ने आपस
(00:05:04)
में ये मशवरा किया की अल्लाह तबारक वी
(00:05:06)
ताला के अलावा भूतों की पूजा करना बहुत
(00:05:09)
बड़ा गुना है और किसी इंसान को कत्ल करना
(00:05:11)
भी कबीर गुना है और शराब पीना इन दोनों
(00:05:14)
गुनाहों के मुकाबला में छोटा गुना है
(00:05:16)
क्यों ना हम लोग शराब पी ले और इसके साथ
(00:05:19)
अपनी ख्वाइश पुरी कर ले इस तरह ये दोनों
(00:05:21)
फरिश्ते शराब पीकर उसे औरत के साथ
(00:05:24)
बलात्कारी करने पर राजी हो गए
(00:05:26)
चुनाचे इस तरह यह दोनों फरिश्ते उसे औरत
(00:05:29)
के बताए हुए वक्त पर उसके घर में पहुंच गए
(00:05:31)
और वहां पहुंचकर इन्होंने खूब शराब पी और
(00:05:34)
शराब के नसे में धूत हो गए उसे वक्त वो
(00:05:37)
औरत इनके सामने अपने खुला हुए बालों के
(00:05:39)
साथ इनके पास आकर बैठ गई जब इन फरिश्तों
(00:05:42)
ने उसे औरत की तरफ हाथ बढ़ाना चाहा तो उसे
(00:05:45)
औरत ने कहा की ठहरो पहले मुझे वो काली मौत
(00:05:48)
सिखाओ जी काली मौत को पढ़ कर तुम लोग
(00:05:50)
आसमानों की तरफ लोट जाते हो जो की ये
(00:05:53)
दोनों फरिश्ते उसे वक्त उसके हुस्न जमाल
(00:05:55)
को देकर शाहाबाद के हाथों मजबूर हो चुके
(00:05:57)
थे इस तरह इन दोनों फरिश्तों ने अल्लाह
(00:06:00)
तबारक वी ताला का इसमें आजम उसे औरत को
(00:06:02)
सिखाया जिसकी मदद से वो रोजाना शाम को
(00:06:05)
आसमानों की तरफ लोट जय करते थे इसके बाद
(00:06:08)
इन दोनों फरिश्तों ने उसे औरत के साथ
(00:06:09)
भदकारी की इस अधिकारी के दौरान उसे औरत का
(00:06:13)
शहर भी ए गया उसे औरत के शहर ने जब इन
(00:06:16)
दोनों फरिश्तों को अपनी बीबी के साथ
(00:06:18)
भदकारी करते हुए देखा तो उसे वक्त इन
(00:06:20)
दोनों ने उसके शहर को कत्ल कर दिया इसके
(00:06:23)
बाद इन दोनों फरिश्तों ने उसे औरत के खुदा
(00:06:26)
यानी बुद्ध को भी सजा किया और शक के अंदर
(00:06:29)
मुफ्तला हो गए इस तरह उसे औरत के साथ अपनी
(00:06:33)
ख्वाइश पुरी कर चुके तो इसके बाद उसे औरत
(00:06:36)
ने वो काली मान पढ़े जो काली मान फरिश्तों
(00:06:38)
ने उसको सिखाए थे वो काली माता ही वो औरत
(00:06:41)
आसमानों की तरफ चली गई और वहां पर अल्लाह
(00:06:44)
तबारक वी ताला ने उसे औरत को
(00:06:47)
दिल कर दिया
(00:06:50)
इधर जब इन दोनों फरिश्तों को शराब के नसे
(00:06:52)
से होश आया तो यह दोनों फरिश्ते एक दूसरे
(00:06:55)
से खाने लगे की ये हमने क्या कर दिया जब
(00:06:58)
इन दोनों फरिश्तों ने वो काली मान पढ़कर
(00:07:00)
आसमान की तरफ जाना चाहा तो ये दोनों
(00:07:03)
फरिश्तें आसमान की तरफ ना जा सके इस तरह
(00:07:06)
ये दोनों फरिश्ते स्वत के हाथों मजबूर
(00:07:08)
होकर अल्लाह तबारक वी तलाक की नाफरमानी का
(00:07:10)
मस्ती कार पे तो अल्लाह तबारक वी ताला ने
(00:07:13)
इन दोनों फरिश्तों को ये इख्तियार दिया या
(00:07:15)
तो ये दुनिया की सजा को इख्तियार कर लेने
(00:07:17)
या फिर आखरत की सजा को इख्तियार करें
(00:07:20)
क्योंकि ये फरिश्ते जानते थे की आखिरत का
(00:07:22)
अजब हमेशा हमेशा आजाद है और वो दुनिया के
(00:07:25)
मुकाबला में बहुत ज्यादा दर्दनाक है इसलिए
(00:07:27)
इन दोनों फरिश्तों ने दुनिया के अजब को
(00:07:30)
इख्तियार किया जी पर अल्लाह तबारक वी ताला
(00:07:32)
ने इन दोनों फरिश्तों को बाबर के केन में
(00:07:35)
कैद कर दिया प्यार दोस्तों बात करते हैं
(00:07:37)
की हरिऔध और मरुद के किस के बड़े में
(00:07:39)
पुराने पाक के इरशाद फरमाता है और इस
(00:07:41)
वाक्य के अंदर कितनी हकीकत है और ये
(00:07:44)
फरिश्ते लोगों को जादू क्यों सिखाया करते
(00:07:46)
थे चुंचे अल्लाह तबारक वी ताला कराने पाक
(00:07:49)
की सूरा बकरा शिकायत नंबर 102 में इरशाद
(00:07:51)
फरमाता है और उन्होंने
(00:07:53)
काली मान की पैरवी की जिसको सुलेमान अले
(00:07:57)
सलाम के डर हुकूमत में शैतान पड़ा करते थे
(00:08:00)
और सुलेमान अलैहिस्सलाम ने कोई कुफर नहीं
(00:08:02)
किया अलबत्ता शायद या तीन ही कुफ्र किया
(00:08:05)
करते थे वो लोगों को जादू सीखने थे और
(00:08:08)
उन्होंने उसे जादू की पैरवी की जो शेहरे
(00:08:11)
बाबुल में दो फरिश्ते हरिऔध और मरुद पर
(00:08:14)
उतारा गया था और वह फरिश्ते उसे वक्त किसी
(00:08:17)
को कुछ ना सीखने थे जब तक यह ना कहते की
(00:08:20)
हम तो सिर्फ आजमाइश हैं तो तुम कुफर ना
(00:08:23)
करो और वो उनसे उसे चीज को सीखने जिसके
(00:08:26)
करीब वो मर्द और उसकी बीबी के दरमियां अलग
(00:08:29)
ही करते हैं और अल्लाह की इजाजत के बगैर
(00:08:31)
वो इस जादू से किसी को नुकसान नहीं पहुंच
(00:08:33)
सकते थे और वो उनसे इस चीज को सीखने जो
(00:08:36)
उनको नुकसान पहुंच और उनको नफा ना दे बेशक
(00:08:40)
वो खूब जानते थे की जिसने इस जादू को
(00:08:42)
खरीदा उसका आखरत में कोई हिस्सा नहीं और
(00:08:45)
कैसी बुरी चीज है वो जिसके बदले में
(00:08:48)
उन्होंने अपने आप को फरोक मार डाला काश यह
(00:08:51)
जान लेते प्यार दोस्तों अल्लाह तबारक वी
(00:08:54)
ताला ने इन फरिश्तों को जादू सीखने के लिए
(00:08:56)
इसलिए कहा क्योंकि उसे दूर में शहरी बाबुल
(00:08:59)
के लोग जब अल्लाह तबारक वी ताला का नबी
(00:09:01)
कोई मोजा दिखता तो वो लोग अल्लाह के नबी
(00:09:03)
के मोजे को देख कर ये कहते की ये तो जादू
(00:09:06)
है और मैं अल्लाह उसे दूर में नबियों को
(00:09:08)
भी जादूगर कहा जाता था तो अल्लाह तबारक वी
(00:09:11)
ताला ने अपने दो मुखर्रफ फरिश्तों को जमीन
(00:09:13)
पर उतारा ताकि वो शेर-ए- बाबुल में लोगों
(00:09:15)
को जादू सिखाए और ताकि उन लोगों को ये पता
(00:09:18)
चल सके की जादू और अल्लाह के नबी की मौत
(00:09:21)
से मैं क्या फराक है इसी वजह से ये दोनों
(00:09:24)
फरिश्ते जमीन पर आए और अल्लाह के हम से
(00:09:26)
जादू सीखने रहे इसके साथ-साथ अल्लाह तबारक
(00:09:29)
वी ताला ने अपने इन दो मुखर्जी फरिश्तों
(00:09:32)
को ये हम भी फरमाया था की जो भी तुमसे
(00:09:34)
जादू सीखने के लिए आए तो पहले उसे इस बात
(00:09:37)
की आगई कर देना की जादू एक कुफर है और लोग
(00:09:40)
जादूगरों की तबाह से दूर रहे और मेरे नबी
(00:09:43)
पर इनाम ले आएं यार दोस्तों बात करते हैं
(00:09:46)
की बनी इजरायल की रिवायत में हरिऔध और
(00:09:48)
मरुद के जी का जिक्र है इस वाक्य के अंदर
(00:09:51)
कितनी सच्चाई है क्या वाकई अल्लाह तबारक
(00:09:54)
वी तलाक के फरिश्ते गुनाहों के अंदर
(00:09:56)
मुख्तला हो सकते हैं और क्या वाकई हरिऔध
(00:09:59)
और मृत ने जोरा नामी औरत के साथ जीना किया
(00:10:02)
था तो इस वाक्य के बड़े में मफास से री
(00:10:04)
इरशाद फॉर्मेट हैं की इस वाक्य की साड़ी
(00:10:06)
रिवायत बगैर किसी सनत के हैं और इस वाक्य
(00:10:09)
के अंदर कोई हकीकत नहीं है क्योंकि अल्लाह
(00:10:12)
तबारक वी ताला की फरिश्ते मासूम होते हैं
(00:10:13)
और वो गुनाहों से पाक होते हैं लेकिन इस
(00:10:17)
किस पर नबी अकरम सल्लल्लाहु ताल अलेही
(00:10:20)
वल्लम की कोई हदीस मौजूद नहीं इसीलिए
(00:10:23)
अल्लाह तबारक वी ताला ने कराने पाक में
(00:10:25)
हरिऔध और मरुद के वेक को जी कादर बयान
(00:10:28)
किया है और जितना वाक्य कराने पाक में आया
(00:10:30)
है इस वाक्य पर हमारा इनाम लाना जरूरी है
(00:10:33)
और हम उतने ही वाकई पर इनाम लेट हैं इसके
(00:10:36)
अलावा बनी इजरायल की जितनी भी रिवायत हैं
(00:10:38)
वो तमाम की तमाम जी! क्योंकि अल्लाह तबारक
(00:10:42)
वी ताला कराने पाक में इरशाद फरमाता है और
(00:10:44)
वो वही कम करते हैं जिनका उन्हें अल्लाह
(00:10:47)
हम फरमाता है अल्लाह तबारक वी ताला से दुआ
(00:10:49)
है की अल्लाह तबारक वी ताला अपने प्यार
(00:10:52)
हबीब हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु ताल
(00:10:54)
अलेही वल्लम के सड़के हमारे तमाम गुनाहों
(00:10:57)
को मुआ फरमाए और हजूर सल्लल्लाहु ताल
(00:11:00)
अलेही वल्लम की मोहब्बत के अंदर जीना मरना
(00:11:02)
नसीब फरमाए
(00:11:03)
[संगीत]
