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The Power of Morning Routine | Win Life in 40 minutes | WNE (YouTube Video Transcript)

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Title: The Power of Morning Routine | Win Life in 40 minutes | WNE
Duration: 00:39:46
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(00:00:00) Your YouTube transcript will appear here (00:00:00) वह अमल कौन सा है जो कि कयामत के दिन (00:00:03) इंसान को निजात दे देगा जहन्नुम से। मैं (00:00:05) उसके बारे में सोचा था एंड आई वास लाइक कि (00:00:07) यार मैंने क्यों नहीं पूछा। ज्यादा रिचनेस (00:00:09) ये नहीं है कि इंसान के पास बैंक बैलेंस (00:00:10) बहुत ज्यादा हो या करोड़ों रुपए पड़े हो। (00:00:12) असल रिचनेस असल तवंगुरी और बादशाही क्या (00:00:14) है कि इंसान के दिल मुतम हो। जितना मर्जी (00:00:17) आ जाए। मजीद की जो लालच है वो खत्म ही (00:00:19) नहीं हो पा रही। जिसको मज़द की जरूरत है वो (00:00:21) बड़ा गरीब है इंसान। कल कयामत के दिन ये (00:00:24) जब उठेगा कह रहा होगा लबक अल्लाह लबक लब (00:00:27) ला शरी लबक। जिस रात को जिब्रील अल सलातो (00:00:30) सलाम नाज़िल होते हैं, उस रात को हम क्या (00:00:33) बोलते हैं? लैलतुल कदर हां बट जिस रात (00:00:35) सुभान अल्लाह अल्लाह रब्बुल आलमीन की जात (00:00:37) नाज़िल होती है वो रात दैट्स एवरीाई (00:00:42) बिस्मिल्लाह सला सलाम रसूल रब सदरी (00:00:50) अल्हम्दुलिल्लाह (00:00:55) अल्लाह का बहुत एहसान है जिसने हमें ये (00:00:57) तौफीक दी कि हमने नॉलेज की वीडियोस पे (00:00:59) क्लिक किया और हमने नॉलेज या जन्नत के (00:01:01) बागात में से कुछ लेना शुरू कर दिया (00:01:03) अल्हम्दुलिल्लाह। व्ल्लाह ही मेरे भाइयों (00:01:05) और बहनों लाइफ है यही कि इंसान पढ़ता रहे (00:01:08) और पढ़ाता रहे और उसको अमल में कन्वर्ट (00:01:11) करे और इबादत में कन्वर्ट कर ले। ये जन्नत (00:01:14) बगात है व्लाह इस दुनिया में। अल्लाह ताला (00:01:16) इस इस हक पे कायम रखे और मौत भी जिस दिन (00:01:21) दे हमें तो हम उस दिन भी पढ़ते और पढ़ाते (00:01:24) और अमल करते हुए इस दुनिया से चले जाए। आज (00:01:26) का टॉपिक बहुत ज्यादा एसेंशियल है, बहुत (00:01:28) इंपॉर्टेंट है पर्सनली मेरे लिए और आप (00:01:32) सबके लिए भी वो यह है कि (00:01:35) हमारी मॉर्निंग्स कितनी इंपॉर्टेंट है (00:01:37) हमारे लिए एंड हाउ टू विन योर मॉर्निंग्स (00:01:40) इन ऑर्डर टू विन योर डे। (00:01:44) और मैं एक स्टोरी से शुरू करता हूं। (00:01:47) जैसे हमें पता है कि अल्लाह ताला की खलकत (00:01:50) में अंबिया के बाद सबसे अफजल इंसान अबू (00:01:52) बकर सिद्दीक थे रदी अल्लाह। और उसके बाद (00:01:55) उमर बिन खब र और उसके बाद उस्माफान रदी (00:02:00) अल्लाह उसके बाद अली बिन तालिब रदी अल्लाह (00:02:02) और उसके बाद दीगर सबाश मुबरीन एंड एंड अह (00:02:06) बैत अल्हम्दुलिल्लाह तो ये स्टोरी है पहले (00:02:08) तीन टॉप के जो मखलूक है अल्लाह ताला की (00:02:12) अंबिया के बाद सो व्हाट हैपेंड वाज़ के (00:02:16) उस्मान बिन अफान एक दरख्त के साए के नीचे (00:02:18) बैठे हुए थे तो उमर बिन खताब उनके पास से (00:02:20) गुजरे और उनको अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह (00:02:23) बरकातू किया बट उस्मान बिन अफान ने उनको (00:02:27) इग्नोर किया (00:02:30) और खताब ने बड़ा माइंड किया इस चीज को कि (00:02:32) मेरा भाई है लेकिन ये मतलब ऐसा क्यों किया (00:02:35) इसे मेरे साथ तो वो जब गए आगे तो आगे जाके (00:02:40) अबू बकर सिद्दीक से मिले और यह वो दौर है (00:02:42) कि जब अल्लाह के नबी सल्लल्लाह वसल्लम (00:02:44) उनके और हमारे महबूब वो गुजर चुके इस (00:02:46) दुनिया से और अबू बकर सिद्दीक की खिलाफत (00:02:49) का दौर है ना अबू बकर सिद्दीक दलिफ उमर (00:02:52) बिन खताब ने कहा अबू बकर को के (00:02:56) रदी अल्लाह अन कि मैंने उस्मान को सलाम (00:02:59) किया और उसने मुझे एक तो इग्नोर किया और (00:03:02) मुझे मेरे सलाम का जवाब तक नहीं दिया। (00:03:06) अबू बकर सिद्दीक रदी अल्लाह बीइंग द कैलिफ (00:03:08) एंड द मोस्ट बिजी पर्सन (00:03:11) कहते हैं उमर उठो अभी चलो उस्मान के पास (00:03:14) बिकॉज़ ही नोज़ कि व्हाई ब्रदरहुड इज़ (00:03:17) वेरीेंट व्हाई आवर रिलेशनशिप्स आर वेरीेंट (00:03:20) मदीना की रियासत बिल्डिंग्स का या (00:03:22) इंफ्रास्ट्रक्चर का या हाई राइज़ (00:03:25) स्काईस्कपर्स का नाम नहीं था या Lamborgin (00:03:29) Bgati का नाम नहीं था। मदीना की रियासत (00:03:31) नाम था ब्रदरहुड का। एंड दिस इज व्हाट अबू (00:03:34) बकर सिद्दीक न्यू कि मुझे यह चीज हमेशा (00:03:37) मेंटेन रखनी है। तो वो आए और कहा उस्मान (00:03:42) अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह बरकातहू उमर (00:03:44) तुम्हारे पास से गुजरा और तुमने उनके बात (00:03:47) का ना जवाब दिया ना उनको नोटिस किया। (00:03:49) कितनी अजीब बात है। व्हाई इज़ दैट सो? (00:03:53) तो उसमें रफा ने इस डिनाई किया। व्लाह ही (00:03:56) मेरे साथ से नहीं गुजरा। (00:03:58) तो उमर खताब ने दोबारा उनकी बात को डिनाई (00:04:01) किया और कहा कि अल्लाह ही मैं तुम्हारे (00:04:02) साथ से गुजरा हूं। मैं तुम्हें तुम्हें (00:04:04) सलाम भी किया है। और उमर कहते हैं अबू बकर (00:04:06) को कि देखिए दिस इज़ दिकेंस ऑफ़ बनया। सुभान (00:04:09) अल्लाह। यानी ही वाज़ एंग्री। उमर खताब वाज़ (00:04:12) एंग्री। और उनका आपस में ताल्लुक इतना (00:04:14) गहरा था कि वो ऐसी बातें कर ले थे। (00:04:17) सुभान अल्लाह। तो उस्मान बिन अफान बड़े (00:04:20) हैरान हो गए। और उन्होंने कहा कि आई वाज़ (00:04:24) इंडल्ज्ड इंटू अ थॉट। मैं एक सोच में इतना (00:04:27) शायद गुम हऊंगा कि मुझे पता नहीं चला और (00:04:30) आप गुजरे हैं। बोला आई आई हैव नो क्लू कि (00:04:32) आप गुजरे हैं। और अबू बकर सिद्दीक ने भी (00:04:35) इस बात को एक्नॉलेज किया कि हां उस्मान (00:04:36) किसी चीज से परेशान होगा। यानी कभी होता (00:04:38) है ना हम इतने ऑक्यूपाइड होते हैं कि (00:04:40) हमारे से कोई बात कर लेता है तो हमें पता (00:04:42) नहीं चलता कि किसी ने क्या बात की है या (00:04:43) कुछ बोला भी है। तो दैट हैपेंड। (00:04:47) तो अबू बकर सिद्दीक ने पूछा उस्मान क्या (00:04:49) चीज तुम्हारे माइंड को ऑक्यूुपाई कर रही (00:04:51) है? व्हाट इज़ व्हाट इज दैट थिंग जो कि (00:04:53) तुम्हें इतना परेशान कर रही है? इट मस्ट (00:04:55) बी कंसर्निंग इतनी बड़ी चीज है कि तुम्हें (00:04:57) उम्र का गुजरना पता नहीं चला। (00:05:00) तो उस्मान कहते हैं कि मुझे यह पछतावा हो (00:05:02) रहा था और मुझे हसरत हो रही थी कि अल्लाह (00:05:04) के नबी के साथ सल्लल्लाह वसल्लम इतना टाइम (00:05:06) गुजरा मैंने आज तक ये पूछा ही नहीं कि या (00:05:09) रसूल अल्लाह क्या वो अमल है जो कयामत के (00:05:11) दिन निजात का बायस बनेगा (00:05:13) यानी और आमाल हमने पूछा कि सबसे व्हाट इज (00:05:15) द बेस्ट ऑफ़ डीड्स एंड व्हाट इज़ वो अमल कौन (00:05:18) सा है जो कि कयामत के दिन इंसान को निजात (00:05:21) दे देगा जहन्नुम से मैं उसके बारे में (00:05:24) सोचा था एंड आई वास लाइक के यार मैंने (00:05:26) क्यों नहीं पूछा अल्लाह के नबी सल्ला (00:05:27) वसल्लम यानी सुभान आई वास थिंकिंग व्हाट (00:05:29) इज़ आखिरा? तो अबू बकर सिद्दीक कहते हैं कि (00:05:32) उस्मान बिन अफान योर प्रॉब्लम इज़ सॉल्वड। (00:05:34) मैंने क्योंकि ये बात अल्लाह के नबी से (00:05:36) पूछी है। और उस्मान कहते हैं कि मेरे (00:05:39) मां-बाप आप पे कुर्बान जाएं। आपका ही हक (00:05:42) था ये सवाल करने का। यानी आप ही मैं (00:05:44) एक्सपेक्ट करता था कि आप भी पूछेंगे सवाल। (00:05:46) तो क्या था उसका जवाब? उस सवाल का जवाब (00:05:50) क्या था जो कि हबीब ने दिया था सल्लल्लाहु (00:05:51) अलैहि वसल्लम। तो अबू बकर ने कहा कि मैंने (00:05:55) रसूल्लाह से पूछा कि क्या चीज कयामत के (00:05:57) दिन इंसान को निजात देगी तो आपने कहा कि (00:05:59) वो कलमा जो मैंने अपने चाचा को प्रीच किया (00:06:02) था यानी अबू तालिब को और जो शख्स उसको (00:06:06) एक्सेप्ट कर लेगा और एम्ब्रेस करेगा यानी (00:06:08) उससे अपनी लाइफ के साथ लाइफ गुजारेगा वो (00:06:11) कलमा उसको कयामत के दिन निजात दे देगा (00:06:13) यानी अशद इलाहा इल्लल्लाह अशद मोहम्मद (00:06:16) रसूल्लाह जो इसको मानेगा जानेगा और इसके (00:06:20) साथ लाइफ गुजारेगा (00:06:23) यानी (00:06:26) रसूल (00:06:29) जो तुम्हें अल्लाह के नबी दे दे उसको ले (00:06:30) लो और जिससे तुम्हें रोक दे वो छोड़ दो। (00:06:33) यही तो मतलब है अशद मोहम्मद रसूल्लाह का (00:06:38) तो एंड दैट वाज़ द टाइम अफान फ्ट रिलीव्ड (00:06:44) अल्हम्दुलिल्लाह मुझे अपने उस सवाल का (00:06:46) जवाब मिल गया अल्हम्दुलिल्लाह। (00:06:48) इस पूरी स्टोरी से जो बात पता चलती है वो (00:06:50) क्या है वही स्वामीना खान (00:06:54) वाज वो गुम थे कुडंट रियलाइज के कौन गुजरा (00:06:58) साथ से जैसे हम अक्सर अपनी दुनियावी थॉट्स (00:07:01) के पीछे बिज़नेस की वरीज़ के पीछे कभी (00:07:03) फैमिलीज़ की कभी कोई टेंशन होती है बट उनकी (00:07:06) टेंशन क्या थी हज़ जेन्युइन कंसर्न वाज़ (00:07:10) दाखिरा हज़ वरी वाज़ दाखिरा एंड लाइक वाइज़ (00:07:14) हमें भी हमारी जो थॉट होनी चाहिए और जो (00:07:17) कंसर्न होना चाहिए वो क्या होना चाहिए (00:07:19) आखिरत का। और मैं और आप सवाल करें अपने आप (00:07:23) से कि व्हाट डिड आई डू टुडे? आज मैंने आज (00:07:25) के दिन जो गुजरने वाला है या गुजरेगा। (00:07:28) क्या किया मैंने? टू गेट क्लोज़र टू जन्ना (00:07:32) एंड फर्दर फ्रॉम हेल फायर एंड क्लोज़र टू (00:07:36) अल्लाह सुभाना ताला। वो कौन सा एक्शन है (00:07:38) जो मैंने आज किया है? ये कभी हमें थॉट (00:07:40) इतना कंसर्न करती है? (00:07:44) क्योंकि (00:07:46) अल्लाह के नबी सल्लाहु अलह वसल्लम फरमाया (00:07:48) मन जमा हम वाहिदा जिसके हम एक गम हुआ (00:07:53) जिसके वरी एक वरी हुई यानी हमल मदद आखिरत (00:07:57) का गम कफा सा अल्लाह ताला सारे उसके हम और (00:08:02) गम के लिए काफी हो जाएगा अल्लाह विल टेक (00:08:05) केयर ऑफ़ देम मन तशा हुम फ़ अल दुनिया और जो (00:08:11) दुनिया के ही वरीज़ में हर टाइम पड़ा रहेगा (00:08:13) और आखिरत उसका गम ही नहीं होगा। यानी उसकी (00:08:16) वरी नहीं होगी। लम युब्लाह फीती हलक फिर (00:08:21) अल्लाह को परवाह ही नहीं है कि वो जज्बादी (00:08:23) में जाके मर जाए। अल्लाह सुान डजंट केयर (00:08:26) इन व्हिच वैली ही पेरिशेस। यानी सुभान (00:08:30) अल्लाह इसके बड़े मतलब है। अल्लाहू अकबर (00:08:32) अल्लाह ताला हमें अमल की तौफीक दे। एक (00:08:34) मतलब तो यह है कि वह कौन से गम में जाके (00:08:40) मर जाए। (00:08:42) या कौन सा गम उसको ले डूबे (00:08:45) या वो जिंदा हो या मुर्दा हो फिर इट डजंट (00:08:48) मैटर टू अल्लाह सुभान ताला बिकॉज़ ही वाज़ अ (00:08:50) पर्सन अब्दु दीनार व दरहम व दुनिया वो ही (00:08:52) वाज़ अ स्लेव ऑफ़ दुनिया और अल्लाह ताला की (00:08:56) जात अल्लाह के नबी का दीन आखिरत उसका कभी (00:08:59) वरी नहीं थी। (00:09:02) एंड सुभान अल्लाह यह मैं मेंशन करना चाहता (00:09:05) हूं कि मॉर्निंग्स में कितना जरूरी है टू (00:09:09) स्टार्ट योर डे वि द हम ऑफ़ आखिरा वि द वरी (00:09:12) ऑफ़ आखिरा एंड दिस शुड बी द फर्स्ट थिंग (00:09:15) व्हेन वी शुड वेक अप इन द मॉर्निंग (00:09:18) सफ सलहीन एक दूसरे को नसीहत किया करते थे (00:09:21) और कहते थे मन आखिरा क्ला दुनिया जो आखिरत (00:09:27) के लिए काम करेगा जो आखिरत के लिए उसकी (00:09:28) एफर्ट होगी वरी होगी उसका माइंडसेट कैसा (00:09:30) कैसा होगा? मॉर्निंग माइंडसेट की बात कर (00:09:32) रहा हूं मैं आपसे। अभी हम आते हैं कि (00:09:34) स्टार्ट कैसे करना है? एक्शन प्लान पे आते (00:09:36) हैं। एंड 1991 रूल पे मैं आपको एंड में (00:09:40) बताऊंगा व्हाट इज दैट रूल एंड प्रिंसिपल (00:09:42) फॉर सक्सेस। (00:09:44) वो क्या है? वो ये है कि अपने आपको (00:09:49) आखिरा फोकस्ड बनाना। ना सिर्फ ना के सिर्फ (00:09:52) दुनिया फोकस्ड। इसका मतलब यह नहीं है कि (00:09:54) आप अपने फाइनेंससेस मैनेज नहीं करते। आप (00:09:55) अच्छा कमाते नहीं हैं। आप अपनी फिजिकल (00:09:58) हेल्थ पे कॉम्प्रोमाइज करते हैं। आपका कोई (00:09:59) लाइफ ही नहीं है। कोई ना ना इसका मतलब है (00:10:02) कि आपकी टॉप की बुराई क्या है? आखिरत की (00:10:04) लाइफ कि मैंने आज क्या किया अल्लाह को (00:10:06) राजी करने के लिए? क्या अल्लाह क्या मेरा (00:10:09) रब मुझसे राजी है या मुझसे नाराज तो नहीं (00:10:11) है? (00:10:13) डू आई फ्री मसेल्फ फॉर द वरशिप ऑफ अल्लाह (00:10:16) सुना ताला? क्या मेरे पास इबादत का टाइम (00:10:18) होता है? या मैं हमेशा रश एंड हरी में (00:10:21) इबादत कर रहा होता हूं। (00:10:23) अल्लाह के नबी ने कहा (00:10:25) के इन्लाह ताला यकूल अल्लाह ताला खुद (00:10:28) फरमाते हैं हदीस कुसी है आदम आदम की औलाद (00:10:31) तबादती (00:10:33) अपने आप को मेरी इबादत इबादत के लिए फारग (00:10:36) कर ले तो मैं क्या करूंगा यानी जिस रब ने (00:10:39) तुझे 24 घंटे दिए हैं ना उसके लिए 24 मिनट (00:10:41) तो निकाल लिया कर नमाज़ें कजा ना किया कर (00:10:45) हलाल कमा आंखों का जिना ना कर और जो मेरे (00:10:49) बड़े लिमिटेड से अहकामात है उनको पूरा कर (00:10:51) कौन सा रोजाना हज है कौन सा रोजाना रमजान (00:10:53) है कौन सा रोजाना जकात देनी है कौन सा (00:10:56) रोजाना सदका देना है बेसिक एक्शन पे तो (00:10:59) अमल कर अल्लाह के लिए टाइम तो निकाल और (00:11:00) अपना फोकस आखिरत तो बिना मैं क्या करूंगा (00:11:03) अमला सद कान (00:11:06) व मैं तेरे दिल को गनी कर दूंगा और (00:11:11) तेरी फकीरी को दूर ले जाऊंगा (00:11:14) व इफल और अगर तूने ऐसा ना किया मला तू यद (00:11:19) शन वस मैं तेरे हाथों को कामों से भर (00:11:23) दूंगा (00:11:24) और तेरी फकीरी को तुझसे कभी दूर नहीं ले (00:11:26) जाऊंगा। फिर तू हमेशा ही गरीब रहेगा। (00:11:28) अल्लाहू अकबर। अमेजिंग हदीस। (00:11:31) यानी (00:11:33) दिल को गना से भरना पता है क्या है? (00:11:36) अल्लाह के नबी ने पूछा अपने सहाबा से कि ऐ (00:11:39) मेरे सहाबा रिच इंसान कौन है? मालदार कौन (00:11:43) है? तो आपने कहा सहाबा ने कहा जिसके पास (00:11:45) दहम और दीनार हो। तो रसूल्लाह सल्लल्लाहु (00:11:48) अलह वसल्लम ने कहा कि नहीं (00:11:51) अलना नफ्स दिल का गनी होना और एक फरमाया (00:11:59) कलब ज्यादा रिचनेस ये नहीं है कि इंसान के (00:12:02) पास बैंक बैलेंस बहुत ज्यादा हो या (00:12:04) करोड़ों रुपए पड़े हो असल रिचनेस असल (00:12:06) तवंगुरी और बादशाही क्या है कि इंसान का (00:12:08) दिल मुमईन हो और गनी मतलब बेपरवाह हो उसको (00:12:12) परेशानियां ना हो एंजाइटी से ना गुजारा हो (00:12:14) वो इंसान अपने कामों में भागता रहेगा (00:12:18) गिरता रहेगा और उसे काम भी वस और उसके (00:12:21) काम भी पूरे नहीं होंगे। सुभान अल्लाह (00:12:24) तो जब भी सुबह करे ना अल्लाह के ने कहा (00:12:26) क्या करो तुम मन अस दुनिया अकबर हो जिसने (00:12:31) सुबह की और उसका सिर्फ दुनियावी माइंडसेट (00:12:33) कैपिटलिस्ट माइंडसेट कंज्यूमरिस्ट और (00:12:35) हाइपर कंज्यूमरिस्ट माइंडसेट हुआ कि बस (00:12:39) गाड़ी और यानी उसने फोन खोलते ही (00:12:41) Instagram और TikTok और अखबार और बीबीसीसी (00:12:43) ने देखा कि यार यह क्या हो रहा है? सब (00:12:45) इतना ग्रो कर रहे हैं और मैं श्ला अल शहु (00:12:50) फला (00:12:55) अल्लाह ताला से काम बिखेर देते हैं इसकी (00:12:58) आंखों के बीच में फकीरी को डाल देते हैं (00:13:01) यह फकीरी से डरता रहता है हर टाइम वम (00:13:05) दुनिया कुतला और दुनिया तो नहीं आई जितनी (00:13:07) पहले से रखी हुई थी ला इलाहा कोईटी का (00:13:09) फायदा नहीं हुआ कोई एफर्ट का स्ट्रगल (00:13:12) फायदा नहीं हुआ जिसने सुबह की मॉर्निंग (00:13:14) अभी हम वी आर टॉकिंग अबाउट हाउ टू ओन योर (00:13:17) मॉर्निंग्स एंड हाउ टू विन योर (00:13:18) मॉर्निंग्स। अभी हम माइंडसेट की बात कर (00:13:21) रहे हैं। वन असबा आखिरत अकबर जिसने सुबह (00:13:24) की और आखिरत उसका हम हुई मेरी ताज्जुद (00:13:27) नहीं रह गई। उठते ही अल्हम्दुलिल्लाह (00:13:32) पढ़ता है। वो कहता है अल्लाह तूने शुक्र (00:13:34) है मुझे सब कुछ दिया और वो वजू करता है और (00:13:36) वो तैयारी करता है आखिरत की। (00:13:39) क्या होता है ज्लाना कल अल्लाह उसके दिल (00:13:44) में डाल देते हैं जमला और अल्लाह ऐसे (00:13:47) कामों को जमा कर देते हैं तो दुनिया (00:13:50) दुनिया जलील हो के इसके पास आती है ला (00:13:52) इलाहा दुनिया जलील हो के इसके पास आती है (00:13:56) ये दुनिया से दूर भाग रहा होता है और (00:13:58) दुनिया के पास भागती भागती आ रही होती है (00:14:00) इसको पता ही नहीं चल रहा था कि मेरा पास (00:14:01) माल कहां से आ रहा है। मैंने फला (00:14:03) इन्वेस्टमेंट की थी। बस ऐसे ही कर ली थी। (00:14:05) उसने मुझे 200% प्रॉफिट दे दिया। मैंने (00:14:08) फला काम किया था। मैं इससे कुछ एक्सपेक्ट (00:14:09) नहीं कर रहा था। लेकिन इसने मुझे हस बसरी (00:14:12) कहते हैं या शबाब या माशरा शबाब ऐ यंग (00:14:16) लोगों का ग्रोह मेरी ऑडियंस में अक्सर यूथ (00:14:19) है और वो सुन रही है (00:14:21) आखिरा आखिरत के लिए एफर्ट करो और काम करो (00:14:24) क्योंकि वो कहते हैं मैंने बहुत से लोगों (00:14:26) को देखा जिन्होंने आखिरत के लिए काम किया। (00:14:28) अल्लाह ने उनको दुनिया भी दी आखिरत भी दी। (00:14:32) और मैंने बहुत से लोग ऐसे देखे जिन्होंने (00:14:34) दुनिया के लिए काम किया। उनको दुनिया तो (00:14:37) मिली या नहीं मिली आखिरत कभी नहीं मिली (00:14:38) फिर उनको (00:14:40) उनकी मौत ही ऐसी और उनकी लाइफ ऐसी गुजरी (00:14:43) सुभान अल्लाह इट इज़ वेरी इजी फॉर अल्लाह (00:14:46) सुभाना ताला टू टेक केयर ऑफ योर दुनिया ये (00:14:49) जो हमारे लिए बड़ी चीजें है ना 50 करोड़ (00:14:52) 100 करोड़ एक अरब रब के लिए कुछ भी नहीं (00:14:55) है पूरी दुनिया कुछ नहीं है मच्छर का पर (00:14:58) है ये (00:15:00) सो इफ यू हैव वन फियर व्हिच आखिरा अल्लाह (00:15:03) विल टेक केयर ऑफ योर प्रॉब्लम प्रॉब्लम्स (00:15:06) सो दुआ करें अल्लाह दुनिया (00:15:10) या अल्लाह हमारा जो हमारे गम ना सिर्फ (00:15:13) दुनिया की लाइफ को ना बनाना और इल्म हासिल (00:15:16) करने का जो मकसद है ना वो दुनिया को सिर्फ (00:15:18) ना बनाना बल्कि दुनिया बनानी ना आखिरत (00:15:20) बनाना हमेशा और अल्लाह ताला दुनिया दे ही (00:15:23) देंगे इंशाल्लाह एंड माय पर्सनल (00:15:25) एक्सपीरियंस इज़ दिस वर्ल्ड इज़ लाइक अ शैडो (00:15:28) जितना आप इसके पीछे भागते हैं आखिरत को (00:15:30) छोड़ के ये आपसे आगे जाएगी और जितना आप (00:15:33) आखिरत के पीछे जाएंगे अल्लाह के पीछे (00:15:34) भागेंगे यह आपके कदम छुएगी। सो लोग (00:15:38) अनफॉर्चूनेटली आजकल जितना मर्जी आ जाए मज़द (00:15:42) की जो लालच है वो खत्म ही नहीं हो पा रही। (00:15:45) जिसको मज़द की जरूरत है वो बड़ा गरीब इंसान (00:15:47) है। (00:15:49) जिसका कॉन्फिडेंस मटेरियल चीजों में है वो (00:15:52) बड़ा गरीब इंसान है। (00:15:55) असल जो इंसान की जो अपने आप को पहचान है (00:15:57) ना सेल्फ एक्चुअलाइज़ेशन वो सेल्फलेसनेस (00:15:59) में है कि मेरी डिपेंडेंसी इस पे होनी (00:16:02) नहीं चाहिए। (00:16:04) और जो सारा दिन सारा महीना मुआवजे की लालच (00:16:07) के लिए भागता रहता है ना (00:16:10) वह छोटे लोग होते हैं और जो इनसे आजाद (00:16:13) होते हैं वो इंसान की अजमत की दिली होती (00:16:16) है। सो फोकस ऑन आखिर एंड अल्लाह विल टेक (00:16:19) केयर और इसका मतलब ये नहीं कि आप लेजी हो (00:16:21) जाएं। डू योर पार्ट बट आपका दिल आखिरत की (00:16:24) तरफ माय हो। एंड दिस दिस माइंडसेट इज़ (00:16:28) अमेजिंग। जब पता है कि जो रब ने लिखा है (00:16:30) वो मिलके रहेगा। और जो नहीं मिल रहा वो (00:16:32) कभी नहीं मिल सकता। चाहे पूरी दुनिया (00:16:34) कोशिश क्यों ना कर ले व्हाई टू वरी व्हाई (00:16:36) टू हैव एंजाइटटी (00:16:38) तो ये माइंडसेट के साथ सुबह करें दूसरी (00:16:42) चीज सुभान अल्लाह अब मैं आपसे शेयर करना (00:16:43) चाहता हूं के शेख अब्दुल रजाक बिन बदर (00:16:47) हाफिज्लाह अभी भी जिंदा है (00:16:48) अल्हम्दुलिल्लाह मस्जिद नबी में पढ़ाते (00:16:50) हैं आप उनकी वीडियोस देख सकते हैं YouTube (00:16:52) पे बहुत नेक इंसान है इंशाल्लाह अल्लाह (00:16:54) जानता है और वो कहते हैं कि असलाफ कहा (00:16:56) करते थे कि जो शख्स सुबह करता है वजू किया (00:17:01) तहज्जुद पढ़ता सुन्नतें अदा करता है। फर्ज (00:17:05) फजर के फर्ज पढ़ता है और उसके बाद के अकार (00:17:07) पढ़ता है और कुरान की तिलावत करता है। तो (00:17:11) आपने सिर्फ यह घंटा आपने ककर कर लिया ना (00:17:14) अपने दिन का यू हैव ककरर्ड योर एंटायर डे। (00:17:19) अगर आपने पहला आवर द 60 और द 90 मिनट्स ऑफ (00:17:23) योर डे। अगर आपने कॉनकर कर लिए यू हैव (00:17:27) वर्न योर एंटायर डे। एंड देसेल्फ। (00:17:32) द डे इज लाइक अ कैमल (00:17:35) आप कैमल के जैसे उसके अंदर वह रकाबें डाल (00:17:39) के ना यार हुक डाल के उसके नाक से पकड़ के (00:17:42) जैसे इंसान उनको या उसके मुंह के अंदर जो (00:17:44) वो डिवाइस होती है जिसे आप पकड़ के खींचते (00:17:46) हो इफ यू कंट्रोल द फर्स्ट पार्ट ऑफ कैमल (00:17:49) यानी व्हिच इज द फेस पूरा कैमल आपके पीछे (00:17:52) चलता रहेगा सो डे इज लाइक कैमल इफ यू (00:17:55) कंट्रोल द फर्स्ट पार्ट ऑफ द डे सुभान (00:17:57) अल्लाह यू कंट्रोल द होल डे (00:18:01) विल खैर एंड बका एंड फुल ऑफ ब्लेसिंग्स। (00:18:05) और इमाम कहते हैं कि मॉर्निंग जो है वह (00:18:08) यूथ है और नाइट जो है वो ओल्ड एज की तरह (00:18:11) है। तो जो अपनी यूथ में जो इंसान काम करता (00:18:13) है उसको सीज कर लेगा तो वो अपने दिन में (00:18:16) भी बरकतें उसकी हासिल करेगा और जो अपनी (00:18:19) यूथ को लूज़ कर देगा उसका बुढ़ापा भी बड़ा (00:18:21) वीक होगा। (00:18:22) मन शबा श यह सफ कहते थे कि योर हैबिट्स इन (00:18:28) यूथ यूजली स्टिक टिल ओल्ड एज मन शबा श (00:18:33) शाबा अल यानी जो अपनी यूथ जिस तरह गुजारता (00:18:37) है वो अपना बुढ़ापा भी उस तरह गुजारेगा (00:18:39) अपनी बड़ी ऐज भी उस तरह गुजारेगा मन शाबा (00:18:42) शात अल और जिस तरह की जो लाइफ गुजारेगा वो (00:18:46) उस चीज उसी लाइफ पे मरेगा (00:18:49) (00:18:51) और जो जिस तरह मरेगा वो उस तरह उठाया (00:18:53) जाएगा। सो दैट्स व्हाई इट्स इंपोर्टेंट टू (00:18:55) कंट्रोल योर यूथ एंड कंट्रोल योर फर्स्ट (00:18:58) पार्ट ऑफ़ द डे। बिकॉज़ याद रखिए हमारी जो (00:19:00) लाइफ है ना वो बनती है कुछ सालों को मिला (00:19:03) के। और हमारे साल बनते हैं कुछ महीनों को (00:19:06) मिला के। और हमारे महीने बनते हैं कुछ (00:19:08) दिनों को मिला के। और हमारे दिन बनते हैं (00:19:11) मॉर्निंग, आफ्टरनून, इवनिंग को मिलाके। जो (00:19:13) बंदा अपनी मॉर्निंग को कंट्रोल कर लेगा और (00:19:15) विन कर लेगा ही विल विन हिज़ होल डे। सो इफ (00:19:18) यू विन योर मॉर्निंग यू विल विन योर (00:19:20) कंप्लीट लाइफ अल्टीमेटली। और एटॉमिक (00:19:23) हैबिट्स की जो किताब है उसमें बहुत (00:19:25) मजे-मजे की एडवाइसेस हैं। और ये है कि याद (00:19:29) रखें लूज़र्स का और विनर्स का सेम गोल होता (00:19:31) है। लेकिन विनर्स सिस्टम्स डेवलप करते (00:19:34) हैं। हैबिट्स फॉर्म करते हैं और लूज़र्स बस (00:19:37) वो समझते हैं कि एक दिन ही मैं कुछ करूंगा (00:19:39) तो मैं वो गोल अचीव कर लूंगा। फॉर (00:19:41) एग्जांपल मिसाल देते हैं कि जिसमें आप एक (00:19:44) दरख्त आपने काटा हो तो आप उसको कुल्हाड़ी (00:19:46) मारते रहो मारते रहो मारते रहो फिर वो (00:19:49) अल्टीमेटली जो गिरता है तो एक लास्ट वार (00:19:52) या लास्ट स्ट्राइक से गिरता है। राइट? सो (00:19:55) जो लास्ट स्ट्राइक है वो तो सिर्फ दरख्त (00:19:57) नहीं गिराती ना। इट्स द कंसिस्टेंट (00:20:00) स्ट्र्राइक्स जो कि दरख्त गिराती हैं। तो (00:20:05) इसीलिए इंसान जब डेली हैबिट्स फॉर्म करता (00:20:08) है तो फिर एक स्ट्राइक करता है और दरख्त (00:20:10) गिर जाता है जो अचीव करना चाहता है वो। (00:20:12) लेकिन ऐसा कभी नहीं होता कि इंसान एक दिन (00:20:14) आया कि मैं आज ही एक स्ट्राइक मारूंगा और (00:20:16) ये पूरा दरख्त गिर जाएगा। सो सिस्टम्स एंड (00:20:18) हैबिट्स आर वेरीेंट। (00:20:20) और याद रखें हम जिस तरह की के दिन (00:20:23) गुजारेंगे उस तरह की बुढ़ापा और जिस तरह (00:20:25) का बुढ़ापा उस तरह की मौत और जिस तरह की (00:20:27) मौत उस तरह कयामत के दिन खड़े होंगे। (00:20:29) अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलह वसल्लम ने (00:20:31) फरमाया कि युबत कुल अमा इंसान जिस तरह (00:20:36) मरेगा उस तरह उठाया जाएगा। (00:20:39) एक सहाबी हिजदा के मौके पे वो सवारी पे (00:20:43) सवार से वो जब गिरे तो उस एंगल से गिरे कि (00:20:45) ही डाइड रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलह वसल्लम (00:20:48) फरमाया कि इसको इससे दफना दो कल कयामत के (00:20:52) दिन ये जब उठेगा कह रहा होगा लब अल्लाह लब (00:20:55) लब ला शरी लब (00:20:59) शब जो जिस चीज पे मरता है वो उस पे उठाया (00:21:02) जाता है सो अ डे व्हिच स्टार्ट्स जिक्र (00:21:05) एंड स्पिरिचुअल डे वो उसप सारे दिन की (00:21:08) स्पिरिचुअलिटी होगी बरकत होगी एनर्जी होगी (00:21:11) लेकिन जो याद रखें दिन शुरू ही लेज़नेस से (00:21:13) होता दैट दे इज़ फुल ऑफ़ लेज़नेस एंड लैक ऑफ़ (00:21:17) बका। (00:21:19) और (00:21:21) एक और स्टोरी शेयर करता हूं मैं आपसे। (00:21:23) अब्दुल इब्न मसूद रदी अल्लाह अन फजर की (00:21:27) नमाज़ पढ़ के अपने जो इबादत सर के घर चले (00:21:30) गए। कुछ लोग उनको मिलने के लिए आए। तो जब (00:21:32) मिलने के लिए आए तो उन्होंने पूछा (00:21:34) अब्दुल्ला बिन मसूद उनसे पूछा लोगों से के (00:21:36) क्या सूरज निकल आया है? तो उन्होंने कहा (00:21:39) नहीं। तो अब्दुल बिन मसूद ने जो अपना (00:21:41) असकार करे थे उनको कंटिन्यू करते रहे (00:21:44) करते रहे और जब दोबारा पूछा कि सूरज निकल (00:21:47) आया तो उन्होंने देखा जी अब निकल आया है (00:21:49) तो क्या कहते हैं अल्हम्दुलिल्लाह (00:21:53) यम वही (00:21:57) अल्लाह का शुक्र है कि अल्लाह ताला ने (00:21:59) हमें आज पारडन कर दिया आज के दिन हमें माफ़ (00:22:03) कर दिया और हमारे गुनाहों की वजह से हमें (00:22:06) पनिश नहीं किया इस दिन में यह अब्दुल्ला (00:22:09) इब्न मसूद कब कह रहे हैं? जैसे ही सूरज (00:22:12) तुलू हुआ है यानी इशरा का टाइम। अभी तो (00:22:16) दिन का स्टार्ट है, लेकिन वो कह रहे हैं, (00:22:17) अल्हम्दुलिल्लाह, आज के दिन अल्लाह ने (00:22:18) हमें माफ़ कर दिया। और हमें अज़ाब नहीं (00:22:21) दिया। व्हिच मींस इज़ यह सलफ का फिक्स थी। (00:22:24) कि जिस तरह के इंसान मॉर्निंग गुजारता है (00:22:27) वो दिन उसी तरह गुजरेगा। और अल्लाह ताला (00:22:29) भी इंसान के साथ वही मामला फरमाएंगे (00:22:31) इंशाल्लाह ताला। सो वी स्टार्ट ऑफ़ द डे। (00:22:34) सुभान अल्लाह। सो विन योर मॉर्निंग्स बाय (00:22:38) मेकिंग आखरा योर मेन कंसर्न यह अभी तक (00:22:40) हमने बात की है। नाउ लेट्स टॉक अबाउट हाउ (00:22:42) टू मेक आखरा योर मेन कंसर्न इट्स नॉट जस्ट (00:22:45) अबाउट रीडिंग अ फ्यू थिंग्स एंड सेंटेंसेस (00:22:47) ना इट्स अ कंप्लीट स्ेड्यूल एंड अ रूटीन (00:22:51) जो मैं आपसे शेयर करता हूं इंशाल्लाह (00:22:52) ताला। एक्शन प्लान क्या है? सो यू शुड (00:22:56) स्टार्ट बिफोर (00:22:59) फजर टाइम एंटर्स। (00:23:04) यू शुड स्टार्ट योर डे बिफोर द अज़ान ऑफ़ (00:23:06) फजर। जब फजर का टाइम दाखिल और यह मैं बता (00:23:10) रहा हूं बिगिनर्स लेवल। (00:23:12) जो बंदा ट्रू और जेन्युइन है अपने लाइफ को (00:23:16) जीतने में या आखिरत पर अचीव करने में और (00:23:18) आखिरत के बारे में कंसर्न है वो एटलीस्ट (00:23:21) 30 मिनट्स पहले फजर से कि अजान से पहले उठ (00:23:23) जाए। यह बिग लेवल है। शायद हमें वेटर्न (00:23:26) लेवल की बात कर लें। अगर टाइम मिला तो (00:23:28) हमें बाय द एंड ऑफ़ दिस लेक्चर। (00:23:30) और वो क्या करें? फजर की अजान या फजर का (00:23:33) टाइम दाखिल होने से पहले 30 मिनट्स पहले (00:23:34) उठ जाए और क्या कहे अल्हम्दुलिल्लाह लानी (00:23:38) फी जसदी व र (00:23:42) वली बिरी अल्लाह तेरा शुक्र है कि तूने (00:23:46) हेल्थ मुझे अता कर दी और मेरी रूह को मेरे (00:23:50) मेरे सोल में वापस मेरी बॉडी में लुटा (00:23:52) दिया और मुझे यह तौफीक दी मुझे अलव किया (00:23:56) कि मैं तेरा जिक्र किया करूं एंड हाउ (00:23:59) अमेजिंग इज दुआ रसूल वसल्लम रात को जब भी (00:24:02) उठते थे तो वो ये दुआ पढ़ते थे बिकॉज़ व्लाह (00:24:05) अज़म मेरे भाइयों और बहनों देयर आर पीपल हु (00:24:09) वेक अप देर आईसाइट इज़ नो मोर (00:24:13) दे आर हियरिंग दे हैव लॉस्ट इट देयर लेग्स (00:24:17) सम पीपल आर पैरालाइज्ड (00:24:20) दे वेक अप इन द सीट ऑफ़ पैरालिसिस और कुछ (00:24:22) लोग उठते हैं कि जलजले से कि छत उनके उनके (00:24:26) ऊपर गिरती आ गया। पर अभी रिसेंटली जो (00:24:28) जलजला आए हैं उसमें अफगानिस्तान में भी (00:24:30) जलजला आया और कितने ही लोग हैं जो मलवे के (00:24:32) नीचे दब के मर गए सुभान अल्लाह और कुछ तो (00:24:34) लोग तो जलजले से यानी उनको अंदाजा नहीं था (00:24:37) कि हम आज रात चले जाएंगे और जो फ्लैश्स आए (00:24:40) हैं सबक्टिनेंट में लोग रात सो रहे थे और (00:24:44) उनके घर में पानी एंटर हो गया और पूरी की (00:24:46) पूरी फैमिली को बहा के ले गया। सो थैंक (00:24:49) अल्लाह सुान ताला फॉर द ब्लेसिंग्स। (00:24:50) व्हाई? बिकॉज़ वी वांट ब्लेसिंग्स टू बी (00:24:53) प्रिजर्व। हम चाहते हैं ब्लेसिंग्स रहें। (00:24:56) एंड थैंकिंग अल्लाह प्रिजर्व ब्लेसिंग्स। (00:24:58) अल्लाह का शुक्र अदा करने से नेमतें (00:25:02) प्रिजर्व होती हैं। सक्सेसफुल पीपल, (00:25:05) स्मार्ट पीपल, स्मार्ट मुस्लिम्स दे नो (00:25:07) दैट दैट द बिगेस्ट ग्रंटोर ऑफ़ ब्लेसिंग्स (00:25:09) इज़ ग्रेटट्यूड। जो चीज़ नेमतों को दवाम (00:25:12) बखशती है और लोंजेविटी बखशती है। वो क्या (00:25:15) है? सुभान अल्लाह। वो अल्लाह का शुक्र है। (00:25:18) सुभान अल्लाह। व्हेन यू वेक अप। हम क्या (00:25:20) करते हैं? सबसे पहले वज़ू करते हैं ना? एंड (00:25:23) वज़ू सुभान अल्लाह। इतनी अमेजिंग इबादत है (00:25:25) कि हम ना बस ऐसे ही कर लेते हैं। हमें (00:25:27) अंदाजा नहीं होता कि ये कितनी अमेजिंग (00:25:29) इबादत है। और एक बहुत ही प्यारी और (00:25:31) अमेजिंग और मीठी हदीस में रसूल्लाह बयान (00:25:34) करते हैं अल्लाह ताला से। और ये हदीस कुसी (00:25:37) है भी कि इन्लाह ताला यकूल रबुल आलमीन खुद (00:25:40) फरमाते हैं किससे? (00:25:43) हिजाब जो हिजाब के पीछे है मखलूक। कौन (00:25:46) मलाका? कहते या मला ए मेरे मलाका उनदा (00:25:53) इस बंदे को जो मेरा बंदा है ना जो रात को (00:25:55) उठा है मेरे लिए इसको देखो जरा का फरा (00:25:59) ये अपने बेड को इसने छोड़ा और इसने अपने (00:26:01) कंफर्ट को छोड़ा क्यों का सला रतन फीदी (00:26:06) नमाज़ के लिए खड़ा होता है ये डिजायरिंग (00:26:09) व्हाट आई हैव जो मेरे पास जन्नत है उसको (00:26:11) चाहते हुए व शफतदी (00:26:14) और जो मेरे पास है जहन्नुम उससे डरते हुए (00:26:19) मा सलनी अबदी हादा जो मेरा बंदा मुझसे (00:26:23) सवाल करेगा फवलू वो उसको अता कर दिया गया (00:26:27) वो उसको दे दिया गया ब्यूटीफुल हदीस सुभान (00:26:29) अल्लाह इंसान को ये हदीस याद हो ना तो (00:26:33) इंसान को सुबह उठते हुए मोटिवेशन होती है (00:26:35) और उसका दिल चाहता है कि मैं अल्लाह ताला (00:26:37) के लिए यानी कयाम करूं और मेरा रब मेरे (00:26:40) बारे में मलाइका पे फक्र कर रहा है और (00:26:43) पर्सनलाइज्ड अटेंशन दे रहा है मुझे (00:26:47) और फिर जब इंसान उठ के अपने आंखों पर अपने (00:26:50) चेहरे पर हाथ मलता है और उठ के दुआ पढ़ता (00:26:53) है तो वजू करता है जाके और याद रखिए वज़ू (00:26:57) सिर्फ इसलिए ना किया जाए कि मेरा नमाज़ (00:27:00) पढ़नी है मैंने बल्कि वज़ू इसलिए भी किया (00:27:03) जाए कि मुझसे अगर गुनाह हो तो वो धुल (00:27:04) जाएंगे। सो व्हाट इज माय एंड योर (00:27:08) रिलेशनशिप विद वज़ू? कभी-कभी होता है ना कि (00:27:10) हम नमाज पढ़ने होती है या कुछ भी तो हमें (00:27:13) पता है हम सोचते हैं वज़ू है या नहीं है। (00:27:15) कहीं वज़ू मैं वाशरूम तो नहीं गया था या (00:27:18) एक्स व जी हां ये मत सोचा करें ये सोचा (00:27:22) करें कि लास्ट वजू से अब तक मैंने कोई (00:27:24) गुनाह तो नहीं किया मेरी आंखों से मेरी (00:27:27) जुबान से मेरे कानों से कोई गुनाह तो नहीं (00:27:29) हुआ था हाथों से अगर तो हुआ था तो चाहे (00:27:32) वजू है या नहीं कर लिया करें इंशाल्लाह (00:27:34) क्यों क्योंकि जब इंसान वजू करता है उसके (00:27:37) चेहरे से गुनाह बह जाते हैं हत्ता कि हदीस (00:27:39) में आता है उसके जो नेल्स है ना उसके बीच (00:27:41) में से गुनाह निकल के बह जाते हैं। तो वज़ू (00:27:44) सिर्फ इसलिए ना करें कि नमाज़ पढ़नी है। वज़ू (00:27:46) अल्लाह के नबी तो हर नमाज़ से पहले वज़ू (00:27:48) किया करते थे। ऑलदो फर्ज नहीं है। जरूरी (00:27:49) नहीं है। आप एक वज़ू के साथ भी दो चार (00:27:52) नमाज़ें पढ़ सकते हैं। बट वज़ू इंसान इसलिए (00:27:54) करे कि मेरे गुनाह धुल जाए। और ज्यादा (00:27:59) टाइम मेरी जिंदगी में ना गुजरे कि जब मेरे (00:28:01) पास गुनाह का बर्डन है। और जब इंसान वज़ू (00:28:04) करता है इस इंटेंशन के साथ कि मेरे गुनाह (00:28:06) धुल रहे हैं। सो जस्ट इमेजिन (00:28:09) और फिर उसके बाद जब इंसान दुआ पढ़ता है (00:28:13) वाशरूम से निकलने की दुआ (00:28:16) शरी मोहम्मद रसूलरीन (00:28:22) और ये दुआएं पढ़ता है तो फिर क्या होता है (00:28:25) जन्नत के आठों दरवाजे उसके लिए खोल दिए (00:28:28) जाते हैं। इमेजिन यानी यू बिकम द पर्सन (00:28:32) जिसके लिए जन्नत के आठों दरवाजे खोल दिए (00:28:34) गए हैं। और ये और कब होता है? रमजान में (00:28:37) होता है सिर्फ और दूसरे वो शख्स हैं जो (00:28:40) आपके लिए होता है और यह दुआ पढ़ने के बाद (00:28:41) फिर इंसान जब यानी इट्स अभी अभी तो आपके (00:28:46) दिन का आधा पौना घंटा गुजरा है शुरू का और (00:28:50) आपके लिए इतना कुछ होना शुरू हो गया है। (00:28:52) अल्लाह ताला आप पे फक्र कर रहे हैं। (00:28:53) अल्लाह ताला आपके बारे में बात कर रहे (00:28:54) हैं। आपके लिए जन्नत के दरवाजे खोल दिए गए (00:28:57) हैं। आपके गुनाह वज़ू की वजह से माफ़ कर दिए (00:29:00) गए हैं। अभी तो दिन का स्टार्ट हो रहा ही (00:29:02) है। और फिर इंसान दो रकतें पढ़ता है। (00:29:06) और उसमें एटलीस्ट कम से कम 10 आयत हमें (00:29:08) पढ़नी चाहिए। तो सूर काफिरून और सू्लास को (00:29:11) मिलाकर 10 आयात बनती हैं। और अब्दुल (00:29:14) अब्बास कहते हैं कि जो शख्स रात को उठने (00:29:16) के बाद यानी तहज्जुद में दो रकतें पढ़ (00:29:18) लेता है यह उन लोगों में शामिल हो जाता है (00:29:21) जिसके बारे में जो रब कहता है यह मेरे (00:29:23) बंदे हैं। इबाद रहमान है अलदीना यबीद रब (00:29:27) सुज कयामा मेरे इबाद रहमान रहमान के बंदे (00:29:31) कौन है? जो अपनी रात को सजदा और कयाम में (00:29:34) गुजारते हैं। तो जो शख्स दो रकतें भी (00:29:35) सिर्फ पढ़ ले दैट पर्सन क्वालिफाइज़ फॉर (00:29:39) दैट क्वालिटी ऑफ़ इबाद रहमान। सुभान (00:29:42) अल्लाह। हम क्यों नहीं पढ़ते? और एक और (00:29:45) बहुत अमेजिंग हदीस सुभान अल्लाह। आज का (00:29:48) दिन हदीस और अमेजिंग हदीस का दिन है (00:29:50) इंशा्लाह रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलह वसल्लम (00:29:52) फरमाया मनमा आयात लम यत गाफन जो रात को (00:29:58) खड़ा होगा उसने सिर्फ 10 आयात पढ़ ली (00:30:02) अल्लाह गाफलीन में से उसका नाम मिटा देंगे (00:30:04) अल्लाहू अकबर इमेजिन सिर्फ 10 आयात कुल (00:30:08) काफिरून या इवन फलकनास की 11 आयात है बाय (00:30:10) द वे वो गाफरीन में से हटा दिया जाएगा वन (00:30:14) कामा आया कुतिबा मिनल कान और जो शख्स (00:30:20) जिसने 100 आयात पढ़ ली उनको कानतीन यानी (00:30:24) डिवोटेड ओबिडिएंट वरशिपर्स में शामिल कर (00:30:27) दिया जाएगा जो अल्लाह के इबादत गुजार लोग (00:30:29) हैं और अल्लाह के करीब लोग हैं वन का अलफ (00:30:32) आया और जिसने हजार आयतें पढ़ी कुतिबा (00:30:36) मुकरीन उनको मुकतरीन में शुमार कर दिया (00:30:39) जाएगा मुकरीन हज रिवॉर्ड्स वाले यानी (00:30:44) पहाड़ों के बराबर रिवॉर्ड्स वाले (00:30:47) अल्लाहू अकबर थाउजेंड प्लस दीनार को एक (00:30:52) किंतार बोला जाता है और मुकतरीन इमेजिन वो (00:30:55) इतने बड़े-बड़े रिवॉर्ड्स ले जाएंगे (00:30:58) तो इबने हजर रह कहते हैं कि जो शख्स जुआमा (00:31:01) और जुस्तबारक यानी 29थ पारा एंड 30थ पारा (00:31:04) पढ़ लेता है तो ये 999 आयात बन जाती है (00:31:07) उसकी और एक आयत और ऐड कर ले तो ये हजार (00:31:09) आयात बन जाती है। सो इब्न हजर रहम की बात (00:31:11) को जब मैंने चैट जीबीटी से पूछा तो उसने (00:31:14) कहा कि 995 आयात बनती हैं बट यह उलमा का (00:31:19) मौकफ है कि बिस्मिल्ला-हिर्रहमान रहीम यह (00:31:22) भी सूरत का पार्ट है। तो फिर तो 1000 से (00:31:25) ऊपर ही बन जाती हैं। ठीक है? तो आप जस्ट (00:31:27) इन केस दो चार आयात और भी मिला लें। सो (00:31:30) ईजीली यानी क्लोज टू 1000 ये बन जाती हैं। (00:31:32) तो आप एक दो सूरतें पढ़ लेंगे साथ तो वो (00:31:35) पूरा 1000 बन जाएंगे इंशाल्लाह। तो हम लोग (00:31:38) वाई वी आर डिप्र्राइव्ड। जिस रब ने हमें (00:31:42) 10 घंटे की रात दी है। हमें पता है हमारे (00:31:44) इल्म में है कि 10 घंटे की रात है अगर तो (00:31:47) हम उस रब के लिए 5 मिनट भी नहीं निकाल (00:31:49) सकते। जस्ट टू पे रुका टू रकात्स अजीब (00:31:53) अल्लाह। इंसान के ऊपर हैरानगी होती है। और (00:31:55) यह दो रकतें पढ़ने के बाद अभी फजर के टाइम (00:31:57) दाखिल होने से पहले द बेस्ट थिंग यू कैन (00:32:00) डू इज़ इस्तग़फार। (00:32:03) इस्तकफार करना इस टाइम पर क्योंकि कुरान (00:32:08) अपने जो अल्लाह के करीबी लोग हैं उनकी (00:32:11) क्वालिटी बयान करते कहते हैं बिल (00:32:13) असार्तफिरून (00:32:15) वो सेहरी के टाइम पे इस्तकफार करते हैं। (00:32:19) मुस्तफरी बिल असार वो इस सेहरी के टाइम पे (00:32:22) यानी फजर से बिल्कुल पहले के टाइम (00:32:25) इस्तकफार करते हैं। और कुरान पढ़ने और (00:32:27) हदीस पढ़ने से यह तो लगता ही है इंसान को (00:32:29) कि यार दो जो जन्नती में होंगे ना वो (00:32:31) तहज्जुद लाजमी पढ़ते होंगे। यानी यह तो (00:32:32) फॉर शोर बात है। जो जन्नती होंगे और वह (00:32:35) तहज्जुद ना पढ़ते हो यह कोई कॉम्बिनेशन (00:32:37) बनता नहीं है। (00:32:39) तो इस्तकफार करना अल्लाह ताला से अस्त रबी (00:32:42) कुल (00:32:44) अस्तुल्लाह अल्लाह कुल द अल्लाह से (00:32:49) इस्तकफार करना या रबी त ठीक है और हदीस (00:32:53) में आता है अगर उस हदीस की सेहत पे कुछ (00:32:55) कलाम है लेकिन मतलब बिलकुल ठीक है मज़ (00:32:58) इस्तगफार जो इस्तगफार को पकड़ लेता है ज (00:33:02) मजा अल्लाह हर टाइटनेस उसको निकाल देंगे (00:33:06) कुल फजा और हर हम और गम और एंजाइटी 100 से (00:33:11) उसको निजात दे देंगे (00:33:14) और उसको वहां वहां से रिज़्क देंगे डॉलर्स (00:33:17) देंगे पाउंड्स देंगे रियाल देंगे कैश (00:33:21) देंगे उसने इमेजिन नहीं किया होगा सुभान (00:33:23) अल्लाह और मैं आपको एक और चीज शेयर करता (00:33:26) हूं आपसे वो ये के जिस रात को जिब्रील अल (00:33:30) सलातो सलाम नाज़िल होते हैं। उस रात को हम (00:33:33) क्या बोलते हैं? लैलतुल कदर हां बट जिस (00:33:37) रात सुभान अल्लाह अल्लाह रब्बुल आलमीन की (00:33:39) जात नाज़िल होती है वो रात दैट्स एव्री (00:33:43) नाइट क्योंकि अल्लाह सुान ताला नोज़ दैट ह (00:33:46) स्लीव्स नीड हिम एवरी सिंगल नाइट। हम सब (00:33:50) उस रात को तो खड़े होकर इबादत करते हैं और (00:33:53) दुआएं करते हैं। जिस दिन जिब्रील नाज़िल हो (00:33:56) रहे हैं। लेकिन जिस रात अल्लाह जल वाला (00:33:59) खुद नाज़िल हो रहे हैं। और पुकार रहे हैं (00:34:03) कि है कोई सवाल करने वाला, है कोई तौबा (00:34:06) करने वाला, है कोई मांगने वाला (00:34:09) और हम सो रहे हो और जिस तरह सिर्फ जिब्रील (00:34:12) अल सलाम आ रहे हैं और हम उस जाग रहे हो (00:34:15) अल्लाह एक बंदा एक इंसान जिसको जन्नत का (00:34:18) पता है और जहन्नुम का पता है वो उस उस (00:34:20) टाइम में नहीं सो सकता और असलाफ में (00:34:23) एग्जांपल भी आती है कि एक खातून व्हेन शी (00:34:25) एंटर्ड एस सिटी अपने हस्बैंड के साथ (00:34:28) उन्होंने अपने हस्बैंड से कहा कि ये यहां (00:34:30) पे कोई नहीं जाग रहा इस टाइम। कहते हैं (00:34:32) शायद इनको कोई जरूरत नहीं है। क्योंकि (00:34:35) जिसको तो जरूरत है वो तो रात को वो पॉसिबल (00:34:37) ही नहीं है कि रात को इस टाइम पे ना जागे। (00:34:40) सो तहज्जुद पढ़ के फिर इंसान फजर की दो (00:34:44) सुन्नते पढ़े। (00:34:46) द बेस्ट खैर दुनिया माफी जो इस दुनिया में (00:34:50) और उसमें जो कुछ है फजर की दो सुन्नतें वो (00:34:52) सबसे बेहतर है। (00:34:54) और फिर फजर की नमाज के लिए चल के जाए। अगर (00:34:57) खवातीन है तो वह घर में पढ़ें। (00:35:00) और उसके बाद सुभान अल्लाह यानी फजर की (00:35:02) नमाज पढ़ने के बाद मॉर्निंग अकारगार मैं (00:35:06) अनफॉर्चूनेटली इस बात से हैरान होता हूं (00:35:08) और खुशी खुश भी होता हूं। हैरान इस बात से (00:35:10) होता हूं कि लोगों को मॉर्निंग अकार सुबह (00:35:13) के अकार का पता ही नहीं है जो अल्लाह के (00:35:14) नबी किया करते थे और खुश इस बात से होता (00:35:16) हूं कि इट्स एन ओपोरर्चुनिटी फॉर मी टू (00:35:19) एजुकेट पीपल एंड गेट मोर अजर के सुबह के (00:35:23) अकार और शाम के अकार जो इंसान नहीं करता (00:35:26) वो कैसे लाइफ यानी कैसे जी सकता है वो (00:35:28) कैसे सिक्योर फील कर सकता है और इतनी बड़ी (00:35:30) सुन्नत है जो मतूक और महाजूर है जो अल्लाह (00:35:32) के नबी किया करते थे उसको छोड़ देता है (00:35:36) इमेजिन जो सुबह उठे कहता है असना फितरत (00:35:38) इस्लाम कलमतलास (00:35:41) व दी नबी मोहम्मद सल्ला वसल्लम मिलता (00:35:44) इब्राहिम हनीफा (00:35:47) मैंने इस्लाम पे (00:35:49) ना सुबा की है और जो दीन पे मैंने सुबह की (00:35:54) है जो कलमतल इ्लास का मतलब है ला इलाहा (00:35:56) इल्लल्लाह पे और मैं अल्लाह के नबी की (00:35:58) सुन्नत को और उसकी उम्मत उसका उम्मती हूं (00:36:00) और मैं इब्राहिम अल सलातो सलाम की लेगसी (00:36:02) को फॉलो कर रहा हूं। इतनी अमेजिंग है यह (00:36:05) दुआ और हम लोग पढ़ते ही नहीं है। तो सैयद (00:36:08) इस्तकफार सुभान अल्लाह याद रखें जो सदफार (00:36:11) है अल्लाह रब ये पूरी दुआ (00:36:15) जो बंदा पढ़ लेता है और जो बंदा नहीं (00:36:17) पढ़ता दोनों मुसलमान है दोनों नमाज़ हैं। (00:36:19) क्या फर्क है इन दोनों में? हदीस में आता (00:36:22) है कि जो ये पढ़ लेता है दुआ अगर वो शाम (00:36:26) होने से पहले मर जाए वो जन्नती है। और शाम (00:36:28) में अगर पढ़ ले वो सुबह होने से पहले मर (00:36:30) जाए वो जन्नती है। तो नबी रह कहते हैं कि (00:36:33) इमेजिन टू बी पर्सन एंड पर्सन बी पर्सन ए (00:36:35) भी नमाज़ है यह भी नमाज़ है। इसने यह दुआ पढ़ (00:36:39) ली है और इसने नहीं पढ़ी एंड दे बोथ डाई। (00:36:42) इमाम नवी अपनी किताब में कहते हैं कि (00:36:43) जिसने पढ़ी होगी ना वो जन्नत में दाखिल (00:36:46) होगा। ला हिसाब वाला अज़ाब विदाउट (00:36:49) अकाउंटेबिलिटी एंड विदाउट पनिशमेंट। (00:36:50) अल्लाहू अकबर। (00:36:52) और इस बंदे का इसका हिसाब लिया जाएगा। (00:36:55) इसको हो सकता है अगर इसे गुनाह है इसको (00:36:58) पनिश भी किया जाए। इतना बड़ा डिफरेंस है और (00:37:02) हम लोग (00:37:03) सो जो 1991 रूल है ना वो पता है क्या है (00:37:06) वो ये है कि फॉर द नेक्स्ट 90 डेज जो आप (00:37:08) लोगों ने और मैंने करना है फॉर द नेक्स्ट (00:37:10) 90 डेज (00:37:14) और उन 90 डेज में जो फर्स्ट 90 मिनट्स हैं (00:37:16) पहला डेढ़ घंटा ये एक जो आज मैं फार्मूला (00:37:20) बता रहा हूं इसमें अमल करना है इंशाल्लाह (00:37:22) फॉर द नेक्स्ट 90 डेज एंड एव्री डे फॉर द (00:37:25) फर्स्ट 90 मिनट्स यानी 1.5 आवर्स ये काम (00:37:29) करना है हमें इंशाल्लाह एंड यू सी यू विल (00:37:31) सी फर्स्ट फर्स्ट एंड इज़ आर टफेस्ट। अगर (00:37:34) आप ये कर लें यू विल सी फॉर लाइफ आपकी (00:37:38) हैबिट बन जाएगी। और अगर मैं और आप फॉर (00:37:41) लाइफ ये हैबिट बना लेते हैं तो इमेजिन (00:37:43) हमारी लाइफ किस तरह की होगी। हमारे दिन (00:37:44) किस तरह के होंगे और इंशाल्लाह हमारी (00:37:46) आखिरत किस तरह की होगी। तो हम तो बड़े (00:37:48) सुनते हैं ना इबने तमिया रहम्लाह और फला (00:37:51) फला आलिम वो यह लाजमी काम किया करते थे और (00:37:54) उनसे उनके शागिर्द पूछते हैं कि शेख अभी (00:37:56) तक आप बैठे हुए हैं अल्लाह का जिक्र कर (00:37:58) रहे हैं कहते मेरा ब्रेकफास्ट है अगर मैं (00:38:00) ना लूं तो आई फील यानी मैल न्यूट्रिशन (00:38:03) मेरा दिन नहीं गुजारा होता इंसान को आदत (00:38:06) लग जाएगी इस चीज की और अल्लाह ताला हमसे (00:38:09) डिमांड करते हैं यादीना आमनु (00:38:12) फले अमर है हुक्म है उ्लाहिक करा अल्लाह (00:38:17) को याद सिर्फ नहीं करना बल्ले कसरत से याद (00:38:19) करना है। दिस इज़ ऑर्डर ये फर्ज है जिक्र (00:38:21) करना अल्लाह ताला का व सब (00:38:25) और अल्लाह की सुबह और शाम को तारीफ बयान (00:38:27) करो तो फिर क्या करेंगे अल्लाह ताला (00:38:29) वसल्ली अलकुम वातू (00:38:35) नूर तो अल्लाह रबुल आलमीन की जात तुम पे (00:38:40) सलात भेजेगी और उसके फरिश्ते भी ताकि (00:38:43) तुम्हें जुलमात अंधेरों से निकाल के नूर (00:38:45) की तरफ लाया जाए वन (00:38:48) रहीमा और अल्लाह ताला अपने मोमिन बहुत (00:38:50) रहीम है। सो (00:38:54) बातें करना बहुत आसान है। अमल करना जन्नत (00:38:56) के लिए अमल चाहिए और अमल करने से ही (00:39:00) अल्लाह ताला राजी होते हैं। अल्लाह ताला (00:39:02) से तौफीक का सवाल करें। अल्लाह तफी (00:39:06) सर मुस्तकीम या अल्लाह तौफीक हमारा साथी (00:39:09) बना दे और सरात मुस्तकीम पे हमें चलाए रख। (00:39:12) और जो मैंने दुआ आज बीच में मेंशन की थी (00:39:16) दुनिया वना (00:39:19) वसना (00:39:20) ममना या अल्लाह दुनिया की जिंदगी हमारा (00:39:24) सबसे बड़ा हम और गमना बना देना और ना ही (00:39:28) इल्म हासिल करने का मकसद और मलग दुनिया की (00:39:31) जिंदगी हो बल्कि आखिरत हो और तेरा तेरी (00:39:33) रजा हो और तेरा चेहरे का दीदार हो और हम (00:39:36) पे ऐसे लोग मुसलत ना करना जो हम पे रहम ना (00:39:39) करे रब (00:39:41) अलीम इन रहीम अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह (00:39:46) बरकातू

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