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What are emotions? | Types of Emotions | Nature of emotions | Sources of emotions (YouTube Video Transcript)

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Title: What are emotions? | Types of Emotions | Nature of emotions | Sources of emotions
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(00:00:00) Your YouTube transcript will appear here (00:00:01) [संगीत] (00:00:05) हेलो दोस्तों स्वागत है आप सबका मेरे (00:00:08) [संगीत] (00:00:11) youtube's क्या होते हैं ये एक इंपॉर्टेंट (00:00:14) टॉपिक है जब आप ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर का (00:00:16) सब्जेक्ट पढ़ते हो तो उसमें यह एक चैप्टर (00:00:18) है जो आपको समझना होता है तो बहुत सारे (00:00:21) बच्चे जानते तो हैं इमोशंस के बारे में पर (00:00:23) उसके बारे में कैसे लिखना है या (00:00:25) प्रैक्टिकली अगर हम बात करें वो क्या होता (00:00:27) है क्या डेफिनेशंस बनती हैं क्या उसकी (00:00:29) नेचर है (00:00:31) देखिए सबसे पहले इमोशंस जो वर्ड है यह एक (00:00:36) कॉम्प्लेक्टेड होती है दैट अराइज इन (00:00:40) रिस्पांस टू इंटरनल एंड एक्सटर्नल (00:00:42) स्टिमुलिव क्या है आपके अंदर क्या हो रहा (00:00:45) है आपके आसपास क्या हो रहा है आपके (00:00:47) एक्सटर्नल में क्या हो रहा है उस वजह से (00:00:50) उस वजह से आप उस सिचुएशन में कैसे (00:00:54) रिस्पांस दे रहे हो वो एक साइकोलॉजिकल (00:00:57) स्टेट जो होती है दैट इज कॉल्ड इमोशंस (00:00:59) मतलब मब मेरे साथ कुछ हुआ यानी अचानक से (00:01:02) आपको किसी ने सरप्राइज दिया किसी भी चीज प (00:01:04) आपके बर्थडे पे तो ओबवियसली आपको कुछ चीज (00:01:06) का पता नहीं था आप ओबवियसली उस जो (00:01:08) सरप्राइज को देखोगे जब भी या आपको जब भी (00:01:11) वो सरप्राइज मिलेगा तो क्या होगा यू आर (00:01:13) वेरी हैप्पी तो जो वो वर्ड हैप्पी मैंने (00:01:16) कहा दैट इज व्ट कॉल्ड इमोशन इमोशन जरूरी (00:01:20) नहीं है हैप्पी का हो सैड भी हो सकता है (00:01:22) एंग्री भी हो सकता है यह सारे इसके टाइप्स (00:01:24) हैं जो हम आगे कवर करेंगे तो ओबवियस सी (00:01:27) बात है इमोशन का सिंपल मीनिंग एक ऐसी (00:01:28) स्टेट जो हम अंदर बाहर हो रहा है जो सब (00:01:32) कुछ उसको रिस्पांस हम कैसे दे रहे हैं यह (00:01:35) सिचुएशन होती है दैट इज कॉल्ड इमोशंस की (00:01:38) अब इसमें और फदर बात करते हैं कि जो (00:01:40) इमोशंस है वो एक सब्जेक्टिव नेचर के होते (00:01:42) हैं ना कि ऑब्जेक्टिव नेचर के यह सिर्फ (00:01:45) सब्जेक्टिव चीजों को कवर करते हैं यानी हर (00:01:48) पर्सन में अलग-अलग इमोशंस होते हैं पर्सन (00:01:50) टू पर्सन यह जो चीज है यह वेरी करती है (00:01:52) ओबवियस सी बात है ये आप सबको नॉर्मली और (00:01:54) जनरली सब कुछ पता है इसके बारे में कैसे (00:01:57) अब आगे देखो जो इमोशंस हैं ये एक (00:02:02) साइकोलॉजिकल चेंस को दर्शाते हैं (00:02:04) साइकोलॉजिकल चेंस मतलब क्या है कि हमारी (00:02:07) बॉडी में अगर हार्ट रेट में कोई चेंस आते (00:02:09) हैं हमारी ब्रीथिंग में कोई प्रॉब्लम्स (00:02:12) आती हैं या हार्मोन लेवल पे कुछ होता है (00:02:14) तो उन सबका इफेक्ट कहां पड़ता है हमारी (00:02:17) ओबवियसली हमारे साइकोलॉजिकल चेंस के बेसिस (00:02:20) पे अब वो साइकोलॉजिकल चेंस क्या करते हैं (00:02:22) हमारे इमोशंस को दर्शाते हैं मतलब हमारे (00:02:25) हार्ट रेट में जब भी कोई प्रॉब्लम आती है (00:02:26) या फिर हमें ब्रीथिंग प्रॉब्लम आती है तो (00:02:28) हम जैसा रिएक्ट कर रहे हैं वो रिएक्शन या (00:02:31) व रिस्पांस हम जैसा दे रहे हैं उस चीज पर (00:02:34) हम वह क्या है हमारे इमोशंस (00:02:37) राइट तो यह जो चीजें हैं यह ऑटोमेटिक (00:02:41) किससे रिलेट कर रही हैं इमोशन से ही रिलेट (00:02:43) कर रही है चाहे वह साइकोलॉजिकल चेंजेज हैं (00:02:45) चाहे वो इंटरनल चेंजेज है चाहे वो (00:02:47) एक्सटर्नल थिंकिंग है कुछ भी कह लो ठीक है (00:02:50) देयर आफ्टर आता है कॉग्निटिव अप्रोच (00:02:53) कॉग्निटिव अप्रोच का मतलब होता है एक (00:02:55) सिचुएशन में रहकर आप कैसे डील कर रहे हो (00:02:57) मतलब मैं जिस सिचुएशन में हूं मैं उस उस (00:03:00) सिचुएशन में कैसे रिस्पांस कर रहा हूं उस (00:03:03) उस सिचुएशन को कैसे इंटरप्रेट कर रहा हूं (00:03:06) कैसे समझ के आगे बढ़ रहा हूं उन सब चीजों (00:03:09) के साथ भी इमोशंस रिलेट होते हैं मतलब (00:03:12) इमोशंस जो हैं वो एक पर्टिकुलर सिचुएशन से (00:03:15) ज्यादा लिंक्ड होते हैं कि आप उस सिचुएशन (00:03:17) को कैसे अंडरस्टैंड कर रहे हो समझ रहे हो (00:03:20) राइट ज अ नेक्स्ट नेक्स्ट आपके पास है (00:03:23) फोर्थ पॉइंट कि इमोशंस आर एक्सप्रेस्ड (00:03:25) थ्रू फिजय एक्सप्रेशंस बॉडी लैंग्वेज और (00:03:28) वो कजला इजेशन मतलब मतलब क्या था इस चीज (00:03:31) का कि आपकी फिजिकल स्टेट कैसी होती है अब (00:03:34) एक फॉर एग्जांपल ले लो कि मैं कहीं प बैठा (00:03:36) हूं मतलब ओबवियस सी बात है मैं एक सिंपल (00:03:39) एनवायरमेंट में अपने फ्रेंड्स के साथ बैठा (00:03:41) हूं तो जैसा मैं वहां पे मतलब बैठा हूं (00:03:43) बैठे मेरी जो बॉडी लैंग्वेज उस समय बनी (00:03:46) हुई है मतलब कह लो कि मैं चुपचाप बैठा हूं (00:03:48) साइड प बैठा हूं तो उससे क्या होगा उससे (00:03:51) मेरे फ्रेंड्स जो मुझे देख रहे हैं उससे (00:03:53) उनको आईडिया हो जाएगा कि ये कुछ ना कुछ (00:03:54) सोच रहा है या कुछ ना कुछ हुआ है इसे तो (00:03:57) वो जो उनको आईडिया मिला वो किस वजह से (00:04:00) मिला वो मेरे इमोशन से मिला और वो इमोशंस (00:04:02) कहां से बने मेरी बॉडी लैंग्वेज से बने तो (00:04:05) ओबवियस सी बात है जो इमोशंस हैं वो एक कह (00:04:08) लो कि बॉडी लैंग्वेज पे भी डिपेंड होते (00:04:10) हैं आपके नेचर पे डिपेंड होते हैं आप किस (00:04:13) स्टेट में कैसे बैठे हो उस चीज से भी (00:04:14) डिपेंड होते हैं राइट उसके बाद आता है (00:04:17) इमोशन आर टिपिकली एसोसिएटेड विद स्पेसिफिक (00:04:21) एक्शन टेंडेंसीज आपके साथ एक पल के लिए (00:04:24) क्या होता है आप कैसे उस पल में एक्शन (00:04:27) करते हो वो चीज भी इमोशंस ही होते हैं तो (00:04:30) ओबवियस सी बात है इमोशंस जो है वह बहुत (00:04:32) सारी चीजों से रिलेट करते हैं पर्सन टू (00:04:34) पर्सन वैरी होते हैं कैसे एक्शन कर रहे हो (00:04:37) किस सिचुएशन में कैसे रह रहे हो आप किस (00:04:39) सिचुएशन को कैसे अंडरस्टैंड कर रहे हो (00:04:42) आपके इंटरनल एक्सटर्नल में जो होता है आप (00:04:44) उसको कैसे रिस्पांस कर रहे हो दैट ऑल आर (00:04:47) कम अंडर इमोशंस एंड दीज ऑल आर रिस्पांसिस (00:04:51) इमोशंस ठीक है ना चलिए अब एक चीज तो समझ (00:04:55) में आ गई कि इमोशंस क्या होते हैं उसकी (00:04:57) नेचर क्या है अब हम बात करते हैं कि यह (00:04:59) कितने तरह के के होते हैं देखो बहुत सिंपल (00:05:01) है इसके टाइप्स क्यों क्योंकि इसमें बहुत (00:05:03) सारी वही चीजें हैं जो आज के टाइम पे (00:05:05) हमारे साथ हैं कैसे सर देखिए सबसे पहले है (00:05:09) बेसिक इमोशंस बेसिक इमोशंस की जब हम बात (00:05:11) करते हैं तो इसमें जॉय सैड फेयर एंगर (00:05:16) सरप्राइज ये बहुत से नॉर्मल चीजें हैं अगर (00:05:19) आपको ये क्वेश्चन बड़ा आ भी जाता है तो आप (00:05:20) इनको एक्सप्लेनेशन में बड़े आराम से दे (00:05:22) सकते हो कि सर जॉय का मतलब क्या है फेयर (00:05:24) का मतलब ये तो सबको आईडिया है मैंने फिर (00:05:26) भी हिंट के साथ दे दिया नोट्स में ताकि (00:05:28) आपको इस चीजों को थोड़ा सा समझने में (00:05:30) मुश्किल ना हो फिर भी अगर हम बात करें कि (00:05:33) बेसिक इमोशंस जो हमें खुशी हो रही है जो (00:05:36) हम दुख है जो हमें दुख है या हम दुखी हो (00:05:39) रहे हैं जो हमें डर है जो हमें एंगर यानी (00:05:42) गुस्सा आता है इन सब चीजों से रिलेट क्या (00:05:45) चीजें मतलब ये हमारे कौन से इमोशंस होते (00:05:47) हैं बेसिक जो आजकल नॉर्मली हर कोई देख रहा (00:05:51) है एक दूसरे के बीच में लेकिन कुछ ऐसे भी (00:05:55) इमोशंस होते हैं जो (00:05:58) कॉम्प्लेक्शन या फिर जेलेसी यह जो लव और (00:06:02) जेलेसी की इमोशंस होती हैं यह बहुत कम (00:06:04) देखने को मिल मतलब बहुत कम नहीं बहुत से (00:06:06) ऐसे हैं यह पर्टिकुलर इमोशंस जो जो किसी (00:06:09) में ज्यादा ही होते हैं और किसी में बहुत (00:06:11) ही कम होते हैं तो यह चीज बहुत ऐसी है जो (00:06:15) इसीलिए (00:06:17) कॉम्प्लेक्शन होती है जिनको समझना भी (00:06:20) मुश्किल होता है और जिनको ओबवियसली मतलब (00:06:23) एक ऐसी सिचुएशन जिसमें खुद को अंडरस्टैंड (00:06:26) करना भी काफी मुश्किल होता है तो यू कैन (00:06:28) से दैट कि ये एक कॉप्लेक्स नेचर के इमोशंस (00:06:30) हैं (00:06:32) जिसमें अरे यार जिसमें एक पर्सन को रिएक्ट (00:06:36) करना थोड़ा सा मुश्किल होता है लेकिन जब (00:06:38) भी वह जैसा भी रिएक्ट करता है वह जल्दी से (00:06:40) पता चल जाता है कि यह किस तरह के इमोशंस (00:06:42) में वह रिएक्ट कर रहा है उसके बाद आते हैं (00:06:45) सोशल इमोशंस जब आप सोसाइटी के बीच में आते (00:06:47) हो ना तो आपके दो तरह के मेन इमोशंस आपके (00:06:49) सामने आते हैं कौन से सर एक एंपैथी और एक (00:06:52) सिंपैथी दोनों चीजों से आप ओबवियसली आपको (00:06:55) नन नॉलेजेबल है कि सिंपति मतलब दया भाव जब (00:06:59) भी आप बाहर आते जाते रहते हो किसी के नेचर (00:07:02) को समझते हो देखते हो इधर-उधर जाते हुए (00:07:05) किसी को देखते हो उसको मतलब उस मतलब एक तर (00:07:08) एक तरीके से ना सोशल जो एनवायरमेंट होता (00:07:10) है उसमें दो ही चीजें ज्यादातर आपको देखने (00:07:13) को मिलेंगी इसलिए मैंने यहां पे दो ही (00:07:14) पर्टिकुलर इमोशंस के बारे में आपको बताने (00:07:16) की कोशिश की है एंपैथी और सिंपैथी के बारे (00:07:19) में इसी तरह से अगर हम बात करते हैं (00:07:21) नेक्स्ट इमोशन की कि जो है सेल्फ कॉन्शियस (00:07:23) इमोशंस ये हमारे खुद के मतलब एक तरीके से (00:07:26) कह लो खुद के अंदर के इमोशंस होते हैं (00:07:29) इंटरनल कैसे सर प्राइड जो आपको जब प्राउड (00:07:34) फील होता है खुद में ही कि यार यह ऐसा हुआ (00:07:37) मतलब जब एक प्राउड फीलिंग आपको खुद को (00:07:39) मिलती है तो वो एक प्राइड इमोशंस आपके (00:07:41) सामने आपके चेहरे पर नजर आते हैं सिमिलरली (00:07:44) कुछ गलत होता है कुछ आपको गलत फील होता है (00:07:47) आपने कुछ गलत किया आपको गिल्ट फील होता है (00:07:49) अशम्ड फील्ड होता है वहां पे कौन से (00:07:51) इमोशंस हैं गिल्ट इमोशंस सामने आते हैं तो (00:07:54) ये एक पर्टिकुलर ऐसे इमोशंस है जो सिचुएशन (00:07:56) मतलब जो खुद के इंटरनल बेसिस पर आपको पता (00:07:59) चलते हैं कि आपको कैसा लग रहा है जिस (00:08:01) सिचुएशन में आपको प्राउड लग रहा है (00:08:03) ओबवियसली प्राइड इमोशंस आपके सामने आएंगे (00:08:05) आप वैसे ही वैसे ही एक्ट करोगे और ऐसे ही (00:08:09) अगर आपको कुछ बुरा लग रहा है तो गिल्ट (00:08:10) इमोशंस भी आपके नजर आते हैं यह खुद के (00:08:13) अंदर के ही इमोशंस है जो आपको खुद के (00:08:15) माइंड में जब मिलते हैं कि ऐसा नहीं ऐसा (00:08:17) हुआ यह वो चीजें तब यह सामने आते हैं ठीक (00:08:20) है ना तो अब यह तो हो गया आपके टाइप्स (00:08:24) क्या होते हैं सिमिलरली ये इमोशंस आते (00:08:26) कहां से सोर्सेस तो जब हम बात करते हैं (00:08:29) सोर्सेस की तो ये दो तरह के मेन सोर्सेस (00:08:31) हैं इंटरनल और एक्सटर्नल इंटरनल इमोशंस की (00:08:35) बात करें तो यह बिल्कुल हमारी बॉडी से (00:08:36) अटैच इमोशंस है यार मतलब इमोशंस हमारी (00:08:39) बॉडी से पर्टिकुलर जो मेन चीज इंटरनल है (00:08:41) वो कहां से है बॉडी तो जब हम बॉडी की बात (00:08:44) करते हैं तो सबसे पहले हमारे हॉर्मोन लेवल (00:08:46) पे बात आती है क्योंकि हमारे हार्मोस ही (00:08:48) एक ऐसी सिचुएशन में होते हैं जिससे (00:08:50) एक्चुअली में हम एक्ट कर रहे होते हैं ठीक (00:08:53) है ना तो जैसे भी हमारे इमोशंस हैं और (00:08:55) जैसे भी हमारे इमोशंस होते हैं वो हमारे (00:08:57) पर्टिकुलर किस इंटरनल थिंग पे डिपेंड होते (00:09:00) हैं किस इंटरनल वे पे डिपेंड होते हैं (00:09:02) हमारे हार्मोस कैसे रिएक्ट कर रहे हैं (00:09:04) उसके ऊपर तो यह पर्टिकुलर सबसे पहला पॉइंट (00:09:06) है दूसरा है कॉग्निटिव प्रोसेस हम हमारे (00:09:10) माइंड में एक सिचुएशन को कैसे अंडरस्टैंड (00:09:13) कर रहे हैं उसके ऊपर सेकली हमारे इमोशंस (00:09:16) डिपेंड होते हैं मतलब हमारे इमोशंस कहां (00:09:18) से जनरेट हो रहे हैं एक तो हमारे हार्मोन (00:09:20) लेवल जैसे रिएक्ट करेंगे दूसरा हम एक (00:09:23) पर्टिकुलर सिचुएशन में जहां पर बैठे हैं (00:09:25) उस सिचुएशन में हम कैसे अंडरस्टैंड कर रहे (00:09:27) हैं किसी को कैसे देख रहे हैं हैं किसी को (00:09:30) कैसे किसी के साथ घुलमिल रहे हैं कैसे (00:09:32) किसी के साथ अच्छा नहीं लग रहा यह सब (00:09:34) चीजें जब हमारे सामने आती हैं तो हम क्या (00:09:37) कर रहे हैं हमारे इमोशंस वहां पे जनरेट हो (00:09:39) रहे हैं ठीक है ना थर्ड पास्ट एक्सपीरियंस (00:09:43) किसी के कुछ ना कुछ पास्ट एक्सपीरियंस (00:09:45) होते हैं जिसको वोह सोच सोचकर या तो (00:09:48) हैप्पी हो जाएगा या फिर सैड होता रहेगा तो (00:09:50) जब वो भी जब भी कोई पास्ट एक्सपीरियंस (00:09:52) आपके सामने आता है चाहे वो खुशी का है (00:09:54) चाहे वो दुखी दुख वाला है तो फिर क्या (00:09:56) होता है ओबवियस सी बात है उस सिचुएशन में (00:09:59) चाहे आप आप कहीं पे भी बैठे हो आपके माइंड (00:10:01) में अगर वो इमोशंस मतलब आपके माइंड में जब (00:10:03) वो एक्सपीरियंस आता है ना तो आपके चेहरे (00:10:05) पे वो इमोशंस जनरेट होने शुरू हो जाते हैं (00:10:08) कि आप कैसा फील कर रहे हो अपने आप में वो (00:10:10) सामने नजर आ जाता है तो अगर आपको अच्छा (00:10:12) नहीं लग रहा है तो ओबवियस सी बात है आप (00:10:13) दुखी नजर आओगे तो आपके चेहरे पे वो (00:10:17) फीलिंग्लेस किस बेसिस पे आपके पास्ट (00:10:20) एक्सपीरियंस पे आपके सोचने पे जो आपके साथ (00:10:23) हुआ था उस बेसिस पे चाहे वो अच्छा है चाहे (00:10:25) वो बुरा है ऑटोमेटिक वो इमोशंस जनरेट करता (00:10:28) है जब (00:10:30) कहीं पर भी आप ऐसी थिंकिंग को कर रहे मतलब (00:10:32) ऐसी थिंकिंग आपके मन में आती है (00:10:35) राइट इसके बाद अगर हम बात करते हैं सिर्फ (00:10:38) ये तीन चीजें ही हैं जो मेनली आपके (00:10:39) इंटरनली इमोशंस को जनरेट करती हैं अदर (00:10:42) वाइज ज्यादातर जो चीजें हैं वो एक्सटर्नल (00:10:44) से ही आपके इमोशंस को कंट्रोल करती हैं (00:10:46) मतलब जनरेट करती है इ (00:10:48) मीन ऐसी कौन सी चीजें हैं जो हमारे (00:10:51) एक्सटर्नल एनवायरमेंट में होने के बाद (00:10:53) हमारे इमोशंस को ज्यादा जनरेट करती हैं या (00:10:56) फिर हमारे इमोशंस ज्यादा बाहर आते हैं उस (00:10:58) सिचुएशन में तो नंबर वन है सोशल (00:11:01) इंटरेक्शन किसी के साथ भी मिलोगे तो आप (00:11:04) ओबवियस सी बात है ये तो है नहीं हैंड शेक (00:11:07) करते हो तो ओबवियस बात खुशी मतलब एक (00:11:09) स्माइल करके करते हो तो वो चीज क्या है वो (00:11:12) भी इमोशंस है भाई जब किसी को देख रहे हो (00:11:14) जब किसी के साथ इंटरेक्ट कर रहे हो तो जो (00:11:16) अंदर से बाहर आपके चेहरे के एक्सप्रेशंस (00:11:19) आते हैं खुशी के या फिर कह लो कि किसी को (00:11:22) देखकर अच्छा नहीं लगा है या फिर आप कुछ भी (00:11:25) ऐसा मन में ले लो कि जब कोई ऐसे थिंकिंग (00:11:28) है जिसको मतलब किसी जब भी मतलब इंटरेक्ट (00:11:31) कर रहे हो किसी के साथ मेरे कहने का मतलब (00:11:33) जब भी किसी के साथ इंटरेक्ट कर रहे हो तो (00:11:35) जो भी आपके माइंड में आ रहा है जैसा भी आ (00:11:38) रहा है जब वो आपके चेहरे पे एक्सप्रेस (00:11:40) करना मतलब होना शुरू हो जाता है ना तो (00:11:42) इसका मतलब यह होता है कि आप एक ऐसे (00:11:44) एनवायरमेंट में आ चुके हो जिसमें हमारे (00:11:46) इमोशंस जनरेट होते हैं लेकिन अब आप ये मत (00:11:49) कहने लग जाना कि सर ये किसी-किसी के होते (00:11:51) हैं ओबवियसली यार ये हर किसी के बीच में (00:11:53) होते हैं चाहे वो कैसे भी एनवायरमेंट में (00:11:55) बैठा हो कैसे भी सोशल इंटरेक्शन में रहता (00:11:57) हो सभी के लिए ये एक इक्वल चीज है जो सभी (00:12:01) में जनरेट होती है ठीक है ना सेकंड है (00:12:04) कल्चर फैक्टर कल्चर मतलब कल्चर मतलब होता (00:12:09) है कि आप किस कल्चर में रहते आए हुए हो या (00:12:11) किस कल्चर में अभी रह रहे हो तो व्हाट इज (00:12:14) कंसीडर्ड (00:12:16) असेप्टेट बल इन द टर्म ऑफ इमोशनल (00:12:18) एक्सप्रेशन कैन बी वेरी वे वाइडल तो हमारे (00:12:22) कल्चर कुछ ऐसे चीजों के मतलब हमारा जो (00:12:24) कल्चर होता है ना वो हर किसी का अलग-अलग (00:12:26) होता है जैसे इमोशंस हमारे अलग-अलग है ना (00:12:28) तो कल्चर भी हमारा अलग-अलग है तो जैसे (00:12:31) हमारे कल्चर होते हैं हम वैसा ही रिएक्ट (00:12:33) करेंगे सबसे बड़ी बात है ये मतलब जिस (00:12:36) कल्चर में भी मैं रहता हूं या जिस कल्चर (00:12:38) में आप सब रहते होंगे या जिस कल्चर में (00:12:40) कोई भी रहता होगा वो उसी तरह से रिएक्ट (00:12:43) करेगा जैसे किसी के कल्चर में कोई चीज (00:12:45) अच्छी है तो किसी के कल्चर में वो चीज (00:12:46) अच्छी नहीं है तो ओबवियस सी बात है जिस (00:12:48) कल्चर में वो चीज अच्छी है वो खुश होते (00:12:50) नजर आएंगे और जिस कल्चर में वो चीज अच्छी (00:12:52) नहीं है वो वहां पे दुखी हो जाएंगे तो (00:12:54) ओबवियस सी बात है जो कल्चर है वो हमारे (00:12:56) एक्सप्रेशंस या जो हमारे कल्चर होते हैं (00:12:58) वो हमारे इमोशंस को ज्यादा इफेक्ट करते (00:13:01) हैं यह इंपॉर्टेंट चीज है ठीक है उसके बाद (00:13:05) है लाइफ इवेंट सर यह तो हमने पास्ट (00:13:07) एक्सपीरियंस में किया था वो था हमारी (00:13:09) थिंकिंग जो हमारे पीछे मतलब जो हमारे (00:13:11) माइंड में है जो हमारे माइंड में है उससे (00:13:13) जब हम बाहर कुछ निकालते हैं तो वो चीज (00:13:16) क्या है इंटरनल थिंग लेकिन एक्सटर्नल का (00:13:19) मतलब है जो अभी-अभी मेरे साथ हो गया लाइफ (00:13:21) इवेंट मतलब अगर मैं कहीं पर जा रहा हूं (00:13:23) एक्सीडेंट हो गया तो क्या मैं वहां पर खुश (00:13:25) होंगा ओबवियसली नहीं यार तो बुरा ही लगेगा (00:13:27) तो जो बुरे वाले एक्सप्रेशंस में मेरे (00:13:29) सामने आ रहे हैं यार ये अच्छा नहीं हुआ ओ (00:13:30) हो हो यह बुरा हुआ तो ऐसे कुछ एक्सप्रेशंस (00:13:33) आ रहे हैं ना नजर तो वो चीज क्या है हमारे (00:13:36) इमोशंस जो कहां से जनरेट हुए कुछ हुआ है (00:13:39) कुछ लाइफ इवेंट्स हो रहे हैं जिसकी वजह से (00:13:41) वो चीज हुई है इसी तरीके से मीडिया मीडिया (00:13:45) इन्फ्लुएंस भी ऐसा इन्फ्लुएंस है जो (00:13:47) एक्सटर्नली हमें बहुत इफेक्ट करता है (00:13:48) ओबवियस सी बात है आप न्यूज़ देख रहे हो तो (00:13:50) न्यूज़ देखते हुए कुछ अच्छी न्यूज़ आएगी (00:13:51) तो आप खुश हो जाओगे कुछ बुरी न्यूज़ आएगी (00:13:53) तो आपको अच्छा नहीं लगेगा तो वो जो चीजें (00:13:56) आ रही है आपके माइंड में मतलब उस चीज को (00:13:58) देखकर आप जैसा रिएक्ट रिस्पांस करोगे वो (00:14:00) भी कहां से वो क्या वो क्या कर रहा है वो (00:14:02) हमारी इमोशंस को जनरेट कर रहा (00:14:05) है फिजिकल हेल्थ आप कैसे अगर आप फिट एंड (00:14:08) फाइन हो तो आप ज्यादा खुश नजर आओगे लेकिन (00:14:10) अगर आप उसी तरह से आपको अच्छा नहीं लग रहा (00:14:13) है आप ठीक नहीं हो आप हेल्दी नहीं हो आपको (00:14:16) कोई प्रॉब्लम हुई पड़ी है तो ओबवियस सी (00:14:18) बात है वहां पे आप खुश नहीं नजर आओगे तो (00:14:20) खुश ना नजर आने का मतलब क्या है आपके (00:14:23) इमोशंस दुखी मतलब आपके इमोशन सैड को दर्शा (00:14:26) रहे हैं जो बहुत फिजिकली फिट है ओबवियस सी (00:14:28) बात है वहां पे कुछ ना कुछ उनको अच्छा फील (00:14:31) होता है तो अच्छा फील होने पर उसके चेहरे (00:14:33) पे हैप्पीनेस आ रही होगी तो जो ये चीजें (00:14:36) मैं कह रहा हूं सैड हैप्पीनेस ये कहां पे (00:14:38) डिपेंड है हमारी फिजिकल हेल्थ पे तो कहीं (00:14:40) ना कहीं फिजिकल हेल्थ भी हमें इमोशंस (00:14:43) जनरेट करने में मदद करती है कि हम कैसा (00:14:46) रिएक्ट करें कैसा रिस्पांस करेंगे यह (00:14:48) फिजिकल हेल्थ पे भी डिपेंड होता है ऐसे ही (00:14:51) वर्क एनवायरमेंट आप कहां पे काम कर रहे हो (00:14:54) किस जगह पे काम कर रहे हो आपका अच्छा लग (00:14:56) रहा है अगर वो एनवायरमेंट में तो ओबवियसली (00:14:58) बात है आप खुशी-खुशी काम करोगे आपके चेहरे (00:15:00) पे खुशी नजर आएगी लेकिन अगर आप ऐसे काम (00:15:03) में इवॉल्व हो जहां पे आपको अच्छा ही नहीं (00:15:05) लगता तो वहां पे आपके चेहरे पे भी कभी (00:15:08) खुशी नजर नहीं आएगी आप ओबवियस सी बात है (00:15:10) वहां पे बस एक टाइम पास कर रहे होगे ऐसे (00:15:13) एक्सप्रेशंस आपके सामने नजर आ रहे होंगे (00:15:15) तो जैसा जैसा वर्क एनवायरमेंट होगा (00:15:17) वैसे-वैसे आपके जो इमोशंस है वो भी जनरेट (00:15:19) होते नजर आएंगे तो वर्क एनवायरमेंट भी एक (00:15:22) ऐसा फैक्टर है जो आपके इमोशंस को कहीं ना (00:15:24) कहीं इफेक्ट कर रहा है दिखा रहा 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